Category: politics

  • मीडिया के रवैया से प्रेरणा लेकर शुरू की भारत जोड़ो यात्रा

    राजनीति- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के परिपेक्ष्य में बड़ा बयान देते हुए कहा, यात्रा शुरू करने की प्रेरणा हमें मुख्य धारा के मीडिया से मिली है। उन्होंने कहा, मीडिया मोदी को दिखा रही है। हमें लोगों से प्रत्यक्ष संवाद करने की प्रेरणा इन्हीं से प्राप्त हुई है।
    उन्होंने कहा, मीडिया में जनता के मुद्दों को स्थान नहीं मिल रहा है। लोग एक पक्ष को दिखा रहे हैं। यह विपक्ष के लिए समस्या बन रहा है। मीडिया में रोजगार, महंगाई, अग्निवीर और युवाओं के भविष्य को लेकर बात नहीं होती। हमें लोगों की समस्याओं को समझने के लिए यह यात्रा शुरू करनी पड़ी।
    हम महंगाई का मुद्दा उठाते हैं। मीडिया इससे भागती है। क्योंकि मीडिया अब जनता की बात पर ध्यान नहीं देती। वह समाज मे हिंसा और डर फैला रही है। वह केवल प्रधानमंत्री और क्रिकेटर, बॉलीवुड स्टार को दिखाने में व्यस्त हैं। उनके इस रवैया से प्रेरित होकर मैंने यह यात्रा प्रारंभ की।

  • मायावती के ‘एकला चलो’ ऐलान के सियासी मायने

    डेस्क। लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सियासी बिसात बिछाई ही जाने लगी है, जिसका सेमीफाइनल इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को भी माना जा रहा है। वहीं ऐसे में सियासी पार्टियां अपने सामाजिक समीकरण दुरुस्त करने और राजनीतिक गठजोड़ बनाने की कवायद शुरू भी कर दी गई है।
     नीतीश कुमार से लेकर केसीआर और कांग्रेस तक अपने-अपने स्तर से विपक्षी एकता बनाने के लिए राजनीतिक तानाबाना बनाने में लगे हैं तो बसपा प्रमुख मायावती ने किसी से गठबंधन करने के बजाय एकला चलो की राह पर चलने का फैसला भी किया है।
    मायावती ने अपने 67वें जन्मदिन पर यह ऐलान किया कि 2023 में होने वाले कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा अकेले चुनाव भी लड़ेगी। साथ ही कांग्रेस या अन्य किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन भी नहीं करेगी। इसी के साथ उन्होंने यह बात कांग्रेस के साथ बसपा गठबंधन में चर्चांओं पर बात भी की। पर , मायावती ने अकेले चुनावी मैदान में लड़ने का निर्णय ऐसे समय लिया है जब गठबंधन की सियासत तेज दिखाईं दे रही है। ऐसे में सवाल यही है कि मायावती के ‘एकला चलो’ ऐलान के सियासी मायने आखिर क्या हैं?

  • न गठबंधन न किसी का साथ, 2024 में अकेले चलने के लिए बसपा है तैयार

    राजनीति- साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए सभी राजनैतिक दलों ने अपना ताना बाना बुनना आरंभ कर दिया है। बीजेपी जमीनी स्तर पर स्वयं को मजबूत कर रही है। 
    तो यूपी में सपा गठबंधन की तैयारी में जुट गई है। वहीं इस बीच बसपा की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि वह किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। वह मैदान में अकेले उतरेगी।
    मायावती ने अपने जन्मदिन के मौके पर कहा, बसपा कांग्रेस या अन्य दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगी। उनकी पार्टी सियासी मैदान में अपने दम पर अपना जलवा दिखाएगी।
    हालाकि मायावती की इस घोषणा के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। लोगों का दावा के कि यह ऐलान किसी बड़ी राजनैतिक चाल का हिस्सा है।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ-

    बसपा की एकल राजनीति को एंगी5करते हुए जानकारों का कहना है कि बसपा के पुनः फेल होने के चांस अधिक हैं। क्योंकि साल 2012 के बाद से यूपी समेत अन्य कई राज्यों में बसपा का प्रभाव कम हुआ है। लोग बसपा की रणनीति से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे में अब अगर बसपा अकेले मैदान में उतरती है तो बसपा मजबूती के साथ स्वयं को स्थापित नहीं कर पाएगी।

  • राहुल गांधी को मांगनी चाहिए कांग्रेस और गांधी परिवार की गलतियों की माफी

    राजनीति– कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा अपने अंतिम चरण में है। पूरे भारत मे इस यात्रा को भरपूर समर्थन मिला। राहुल गांधी के अलग अलग रूप देखने को मिले। उनके भाषणों ने सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोरीं और इंटरनेट पर राहुल गांधी तपस्वी के रूप में वायरल हुए।
    वहीं आज भारत जोड़ो यात्रा की एंट्री जम्मू कश्मीर में होने जा रही है। यह यात्रा पठानकोट होते हुए जम्मू कश्मीर में दाखिल होगी। लेकिन सुरक्षा के इंतजाम पूर्ण किए गए हैं। बताया जा रहा है कि राहुल को कम पैदल चलना होगा। लेकिन यहां राहुल गांधी कितने किलोमीटर की पद यात्रा करेंगे यह अभी निर्धारित नहीं हुआ है।
    उच्च अधिकारियों का कहना है कि राहुल की सुरक्षा में चूक नहीं की जा सकती है। हम सुरक्षा के लिहाज से पूरे इंतजाम कर रहे हैं। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर उनकी पद यात्रा कम की जाएगी।

    क्या बोले भाजपा नेता-

    जम्मू कश्मीर में भारत जोड़ो यात्रा के परिपेक्ष्य में भाजपा नेता रविन्द्र रैना ने कहा, कांग्रेस आतंकवाद समर्थित पार्टी है। वह आतंकियों के प्रति सहानुभूति रखती है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे जिन्होंने देश को एकजुट किया। गांधी परिवार और कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर के लिए कई ऐतिहासिक गलतियां की हैं। इनकी नीतियों से हजारों लोगों की जान ली हैं।
    राहुल गांधी जब जम्मू कश्मीर में प्रवेश कर रहे हैं। तो उन्हें गांधी परिवार और कांग्रेस की गलतियों के लिए माफी मांगने की आवश्यकता है। कांग्रेस ने जो किया उसे भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कैसे अपने विरोधियों को जेल में डाला यह भुला नहीं जा सकता है।

  • आप जैसा बोलते हैं, आपको वैसा ही वापस मिलता है- सचिन पायलट

    देश- राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के मध्य घमासान जारी है। सचिन पायलट ने बिना नाम लिए अशोक गहलोत पर निशाना साधा है- उन्होंने कहा बुजुर्गों को युवाओं के भविष्य पर विचार करना चाहिए उन्हें मौका देना चाहिए।
    उन्होंने यह बयान न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न के इस्तीफे पर दिया और कहा अपनी कम होती लोकप्रियता के बाद अपना पद छोड़ दिया और पार्टी के लिए काम करने का निर्णय लिया।
    उन्होंने आगे कहा, व्यक्ति की परवरिश ऐसी होनी चाहिए कि वह दूसरों को सम्मान दे सके। जब आप किसी को सम्मान देते हैं तभी आपको सम्मान मिलता है। व्यक्ति जैसा बोता है वैसा ही काटता है।
    संघ कार्यालय का उद्घाटन के दौरान उन्होंने यह बात कही। वह आगे बोले आप सब मुझे भली भांति जानते हैं। आपको यह पता है कि मेरे बारे में क्या-क्या बोला गया। मैं आपसे बड़ा हूँ मेरा दायित्व है कि मैं आपको संस्कार सिखाऊं। क्योंकि आप लोगों को जो देते हैं आपको वहीं वापस मिलता है।
    युवाओं से उन्होंने कहा, यदि आपको बेहतर वातावरण में शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिला है। तो आप उसका सदुपयोग कीजिए। अच्छा बोलना सीखिए। अच्छा सुनना सीखिए। सभी का सम्मान कीजिए। क्योंकि आपका व्यवहार ही आपकी प्रतिष्ठा बढ़ाता है।

  • Attack on Bageshwar Baba: पप्पू यादव की धीरेंद्र शास्त्री को खुली चुनौती

    पटना। Pappu Yadav Attack on Bageshwar Baba: बागेश्वर धाम सरकार इन दिनों काफी विवादों में हैं। वहीं अपने चमत्कार और लोगों का भूत-भविष्य बताने के उनके तरीके को लेकर समर्थक और विरोधी दोनों ही सोशल मीडिया पर एक्टिव भी हैं।
    साथ ही बागेश्वर धाम सरकार के नाम से मशहूर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अभी हाल ही में नागपुर में विवाद देखने को सामने भी आया था, जिसके बाद से वह सुर्खियों में छाए हुए हैं। साथ ही दूसरी ओर बयानबाजी की सियासत से अटे-पड़े बिहार में बागेश्वर बाबा के लिए भी बयानबाजी शुरू हो चुकी है। और जाप प्रमुख पप्पू यादव ने बागेश्वर बाबा पर टिप्पणी भी की है।
    जाप प्रमुख का शनिवार को एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह बागेश्वर बाबा को आड़े हाथों लेते नज़र आते हैं। पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री को खुली चुनौती दी और कहा कि ‘क्या वह अगर, चमत्कार से लोगों की गंभीर बीमारी कैंसर, ब्रेन ट्यूमर और हार्ट अटैक जैसी बीमारी को खत्म कर सकते हैं’ धीरेंद्र शास्त्री यह कर देंगे तो मैं भी उनका भक्त बन जाऊंगा और उनके पैर पकड़ लूंगा।
    पेश किया ये दावा
    इसके बाद भी पप्पू यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह भी कहा कि ‘अगर उनमें हिम्मत और औकात है तो बिहार आकर बताएं और मैं जो कहता हूं वह करके भी दिखाएं। साथ ही चमत्कार से देश की गरीबी को मिटा सकते हैं और ये लोग मार्केटिंग करते हैं और एक ही काम के लिए 200 से अधिक लोगों को लगाए भी रहते हैं। वहीं भीड़ में पहले से ही उनके लोग मौजूद रहते हैं और इसके बाद वह उन लोगों को ही बुलाकर उनकी जीवनी भी बताते हैं।

  • जानें कैसे अलग हुए राहुल गांधी और वरुण गांधी

    राजनीति– राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा अंतिम पड़ाव में पहुंच गई है। यात्रा उत्तर भारत मे जब प्रवेश करती है तो यह बात सुर्खियों में थी कि वरुण गांधी कांग्रेस में पुनः शामिल हो सकते हैं। 
    हालाकि राहुल ने यह साफ कर दिया है कि वरुण की राजनीतिक विचारधारा अलग है। हम साथ बैठ सकते हैं बात कर सकते हैं। लेकिन हम साथ आ सकते हैं यह नहीं कहा जा सकता। 
    इन सभी बयानों के बाद हर कोई यह जानने का आतुर हो गया। कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक ही आंगन में जन्मे इंदिरा गांधी के दोनो पोते अलग हो गए और वरुण गांधी अपनी ही पार्टी के प्रतिद्वंद्वी बन गए। 
    हालाकि इस समय वरुण गांधी अपनी ही सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। जो यह साफ कर रहा है कि 2024 में वह बीजेपी को अलविदा कह सकते हैं।

    जानें क्यों अलग हुए राहुल और वरुण-

    19 जून 1970 को राहुल गांधी का जन्म हुआ। 13 मार्च 1980 को वरुण गांधी का जन्म हुआ। राहुल गांधी वरुण गांधी से 10 साल बड़े हैं। राहुल गांधी इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी के पुत्र और वरुण गांधी संजय गांधी के पुत्र हैं। दोनों का राजनीति करने का तरीका अलग है और दोनों की विचारधारा भी भिन्न है।
    जहां राहुल गांधी सियासी ताना बाना बुन कर जनता के बीच स्वयं को स्थापित करना चाहते हैं। वहीं वरुण गांधी अपनी कलम और अपनी प्रखर आवाज के बलबूते पर लोगों की आवाज उठाते दिखाई देते हैं। वरुण गांधी सत्ता अभिलाषी तो नहीं लगते हैं। क्योंकि वह सदैव सत्ताधारी सरकार से सवाल पूँछगे रहते हैं।
    लेकिन राहुल और वरुण बचपन मे ही अलग हो गए थे और वरुण गांधी को उनकी मां ने अकेले अपने लाड़ प्यार से बड़ा किया। वरुण गांधी के पिता संजय गांधी के निधन के बाद इंदिरा गांधी और मेनका गांधी के मध्य मतभेद शुरू हो गए थे। 
    उन्होंने 2 साल के वरुण को साथ लेकर इंदिरा गांधी का आवास छोड़ दिया। जब वरुण 4 वर्ष के हुए तो उनकी दादी की हत्या कर दी गई। दादी की मौत के बाद से वरुण गांधी का सम्बंध गांधी परिवार से टूट गया और वरुण गांधी और राहुल गांधी अलग हो गए।

  • चुनावों से एक साल पहले ही एक्शन में आई भाजपा की यूपी इकाई, किया बड़ा ऐलान

    डेस्क। Lok Sabha Election: अगले साल होने जा रहे लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी एक्टिव एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। वहीं रविवार को उत्तर प्रदेश में भाजपा कार्यकारी समिति की बैठक ने एक राजनीतिक प्रस्ताव पारित कर बीजेपी को एक बार फिर सत्ता में लाने का संकल्प भी लिया है। इसमें यह भी कहा गया कि गरीबों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों की सेवा के प्रति राज्य सरकार के समर्पण से पार्टी ने पिछले साल लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव को जीता भी है।
    इसके साथ ही यह भी दावा किया गया कि पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रयास और लोगों के आशीर्वाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024 में लगातार तीसरी बार सत्ता में भी आएंगे और भाजपा के विजय रथ को रोकने की विपक्ष की कोशिशों का जनता करारा जवाब भी देगी। साथ ही बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल राज्य में हुए लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में पार्टी की जीत पर प्रकाश भी डाला है।

  • क्या बीजेपी तोड़ देगी बिहार में महागठबंधन का मनोबल

    राजनीति- महागठबंधन से नाराज नेता उपेंद्र कुशवाहा जबसे बीजेपी नेताओं से मिले हैं। बिहार की सियासत में हलचल मच गई है। 
    हर ओर यह चर्चा हो रही है कि उपेंद्र कुशवाहा भाजपा छोड़ने की रणनीति बना रहे हैं। वहीं बीजेपी नेताओं का कहना है कि यदि वह हमारे परिवार कक हिस्सा बनते हैं तो हम उनका खुले मन से स्वागत करेंगे।
    सूत्रों का कहना है कि बीजेपी ने बिहार विजय के लिए अपनी रणनीति बना ली है। अनुमान है कि भाजपा बिहार में अपना प्रदेश अध्यक्ष बदल सकती है। 
    वहीं बीजेपी चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा पर भी दांव लगा सकती है। क्योंकि उपेंद्र कुशावाहा कोइरी जाति से आते हैं, जिसकी आबादी बिहार में करीब 3 फीसदी से ज्यादा है. वहीं चिराग जिस जाति से आते हैं, उसकी आबादी भी बिहार में 5 फीसदी है।

  • क्यों 10 फीसदी आरक्षण वालों को मंत्री ने बताया अंग्रेजों का हितकारी

    बिहार- बिहार सरकार के भूमि सुधार मंत्री एंव राजस्व मंत्री आलोक मेहता ने आरक्षण को लेकर विवादित बयान दिया है। 
    उन्होंने कहा, जगदेव बाबू ने दलित, शोषित, पिछड़े और वंचितों के उत्थान की लड़ाई लड़ी, जिनकी हिस्सेदारी 90 प्रतिशत है। उन्हें समाज में कोई सम्मान नहीं मिलता था। 
    उन्होंने आगे कहा, जब अंग्रेज गए तो उन्होंने 10 फीसदी आरक्षण वालों की झोली भर दी। उन्हें भूमि दी लेकिन जो लोग मेहनत मजदूरी करते थे। 
    वह ऐसे ही रह गए। 10 फीसदी आरक्षण वाले अंग्रेजों के चमचे थे। जो भी इनके खिलाफ बोलता था। उसकी जुबान काट दी जाती थी।