Category: politics

  • क्यों आरजेडी और जेडीयू नेताओं के मध्य छिड़ा है विवाद

    देश– जेडीयू और आरजेडी की गठबंधन सरकार बिहार में राज कर रही है। लेकिन राम चरित मानस को लेकर प्यार तकरार में परिवर्तित होता नजर आ रहा है। यह तकरार तब बढ़ी जब जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार और उनके समर्थकों ने एक हनुमान मंदिर के बाहर तुलसीदास की रची गई रामचरितमानस की कुछ चौपाइयां पढ़ीं।
    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जेडीयू नेताओं ने ऐसा रामचरित मानस के परिपेक्ष्य में राज्य के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर की टिप्पणी के विरोध में किया है। जेडीयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने आरजेडी नेताओं की राम चरित मानस पर टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं। वहीं सुधानर सिंह की टिप्पणी पर कहा है कि सब मौन क्यों धारण किये हैं।
    इससे पहले बुधवार को नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में शामिल हुए चंद्रशेखर ने दावा किया था कि “दलितों, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखने की बात कर रामचरितमानस और मनुस्मृति समाज में नफरत फैलाते हैं।

  • जानें क्यों भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा बनें कमल हासन

    देश- कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में जारी भारत जोड़ो यात्रा ने सभी का आकर्षित कर रखा है। लगातार सोशल मीडिया पर राहुल गांधी सुर्खियों में हैं। 
    वहीं कमल हासन कोझिकोड में छठे केरल साहित्य उत्सव के समापन के मौके पर शामिल होने पहुंचे थे। जहां उन्होंने बताया कि वह भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा क्यों बनें।
    उन्होंने कहा, यह यात्रा भारत की एकजुटता के लिए जारी है। मैं इस यात्रा में भारत को जोड़ने के लिए इसमें शामिल हुआ। इसे मेरा किसी भी पार्टी की ओर झुकाव नहीं समझा जाना चाहिए। यात्रा से जुड़ने का उद्देश्य भारत की एकता है।
    साउथ के दिग्गत एक्टर ने आगे कहा कि, अगर 1970 के दशक में उन्हें राजनीति की इतनी समझ होती तो वह इमर्जेंसी के दौरान भी वह राजधानी की सड़कों पर उतरे होते। यह सिर्फ भारत की एकता के लिए है और भारत की एकजुटता के लिए मैं इस यात्रा का हिस्सा बना।
    मैंने राजनीति में कदम इसलिए रखा, क्योंकि मेरे अंदर गुस्सा है. मैं समाज और उन लोगों के लिए काम करना चाहता हूं, जिन्होंने छह दशकों से इतना प्यार और सम्मान दिया है।

  • हिन्दू के नाम पर लोगों पर थोपी जा रही हिंदुत्व की विचारधारा

    देश- प्रख्यात शास्त्रीय नृत्यांगना और कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई ने देश के हालात पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है किहिन्दू धर्म की आड़ में लोगों पर हिंदुत्व की विचारधारा थोपी जा रही है। लोगों को एक आइडियोजी से जोड़ा जा रहा है।
    मैं आज जब अपने आस पास का नजारा देखती हूँ। तो मैं दुखी होती हूँ। यह मुझे पूरी तरह तोड़ रहा है। मैंने कभी यह विचार नहीं किया था कि मेरा भारत अपने आदर्शों से भटक जायेगे। लोग विज्ञापन की चकाचौंध में अंधे हो जाएंगे।आज लोग शास्त्रों की बात करते हैं और हिन्दू के नाम पर विचारधारा को लोगों के माथे पर थोपते हैं।
    जानकारी के लिए बता दें साराभाई, जिन्होंने 1980 के दशक में पीटर ब्रुक के नाटक ‘द महाभारत’ में द्रौपदी की भूमिका निभाई थी। एकल नाट्य कृतियों ‘शक्ति: द पावर ऑफ वुमेन’ में अभिनय करने और ‘वीमेन विद ब्रोकन विंग्स’ के सह-निर्देशन किया है।

  • समलैंगिक संबंधों को मिला मोहन भागवत का सपोर्ट

    देश– समलैंगिता भारत का अहम मुद्दा बन गई है। हर ओर इस परिपेक्ष्य में बयान बाजी जारी है। देश में जहां कुछ लोग इसे सही बता रहे हैं। वहीं कई लोगों का कहना है कि भारत का समाज अभी इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। वहीं अब समलैंगिक संबंधों को लेकर आरएसएस का बयान सुर्खियों में है। 
    क्योंकि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का समलैंगिक जोड़े के सम्बंध में बयान उनके प्रति सहानुभूति दर्शाता है और कई सन्देश देता है। मोहन भागवत ने कहा था कि उन्हें हमारे समाज का हिस्सा माना जाना चाहिए। क्योंकि वह हम सबमें से एक हैं। समलैंगिकता बायोलॉजिकल है। यह उनके जीवन जीने का तरीका है। 
    वहीं यह सम्बंध हमारे देश के लिए कोई नए नहीं हैं। यह हमारे इतिहास का हिस्सा हैं। जरासंध के दो सेनापति हंस और दिंभक भी इसी प्रकार के सम्बंध रखते थे। कथा के मुताबिक- जरासंध के दो सेना पति हंस और दिंभक थे। सैनिकों ने खबर फैलाई की हंस मारा गया है। यह सुनकर दिंभग ने समुद्र में कूद कर आत्महत्या कर ली। दोनो सैनिकों की मौत ने जरासंध को हताश किया। बताया गया कि दिंभग ने अंतिम समय मे कहा बिना हंस के मेरे जीवन का कोई औचित्य नहीं है।
    वहीं अब जब मोहन भागवत ने समलैंगिक संबंधों को लेकर यह बयान दिया तो लोग इसे हमदर्दी के भाव से जोड़कर देख रहे हैं। लोग का कहना है कि वह यह भाव समझते हैं। उनका यह बयान मानवता और हमदर्दी की यओर इशारा कर रहा है। वह उनसे घृणा न करें उन्हें समाज का हिस्सा समझें। क्योंकि समाज मे सम्मान के साथ रहने का हक सभी का है।

  • पब्लिक है यह सब जानती है – राजनीतिक दलों को घमंड में आने की जरूरत नहीं

    देश– राजनीति को समझना आसान हो सकता है। लेकिन जनता के मूड को समझ पाना आसान नहीं है। क्योंकि यह पब्लिक है यह सब जानती है और नेताओं के वादों को यह भली भांति पहचानती है। 
    लेकिन इस बार जो हिमाचल में हुआ वह इस बात का संकेत है कि किसी भी राजनैतिक दल को इस घमंड में रहने की आवश्यकता नहीं है कि वह अब जनता के दिमाग मे बस चुके हैं और जनता उन्हें सत्ता से नहीं उखाड़ फेंकेगी। 
    क्योंकि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार बनेगी यह किसी को नहीं पता था और भाजपा को यह विश्वास था कि वह मोदी मैजिक पर विकास की बातों के बलबूते पर जनता का दिल जीत चुके हैं।
    हिमाचल के चुनाव ने सभी को सतर्क कर दिया है। कांग्रेस को जहां यह उम्मीद मिली है कि वह पुनर्वापसी कर सकती है। वहीं अन्य दलों को यह मालूम चल गया है कि जनता किसी के अधीन नहीं है। 
    वहीं अब कांग्रेस की निगाह कर्नाटक चुनाव पर है। कांग्रेस प्रियंका गांधी की रणनीति से यहां अपनी जीत का ध्वज लहराना चाहती है। कांग्रेस का दावा है कि हिमाचल फतेह में प्रियंका गांधी ने अहम भूमिका निभाई है।

    क्या है मामला-

    वैसे तो कांग्रेस दक्षिण में मजबूत है। लेकिन यहां राहुल गांधी का काफी प्रभाव है। दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक में प्रियंका गांधी महिलाओं को लुभाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। 
    लेकिन यहां राहुल गांधी की उपस्थिति आवश्यक है। क्योंकि राहुल को जनता काफी समर्थन दे रही है और भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से वह लोगों के ह्रदय तक पहुंच चुके हैं।
    राजनीति विशेषज्ञ का कहना है कि यदि बीजेपी इस गुमान में बैठी रही कि मोदी मैजिक की वजह से वह कर्नाटक फतेह कर लेंगे। तो उनके लिये समस्या बन जायेगी। क्योंकि इस बार कर्नाटक में कांग्रेस की धाक है और जिस रणनीति से कांग्रेस जमीनी स्तर पर काम कर रही है। उससे स्पष्ट है कि जनता कहीं न कहीं कांग्रेस की ओर झुकाव दिखा रही है।
    कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार जनता कक साधने की कवायद में जुटे हुए हैं। वहीं कर्नाटक की कमान यदि प्रियंका के हाथ मे आई तो वह क्या कमाल दिखाएंगे और महिलाओं को केंद्र में रखकर क्या दांव खेलेंगी। हालाकि कांग्रेस के सामनें एक समस्या अपने नेताओं को जोड़कर रखना भी है। क्योंकि पार्टी में पद को लेकर हंगामा आय दिन देखनें को मिक जाता है।

  • भाजपा आप को बर्बाद करना चाहती है

    देश– भारत मे भाजपा और आम आदमी पार्टी के मध्य जुबानी जंग जारी है। वहीं अब आप सांसद संयज सिंह ने केंद्र सरकार पर हमला किया है ओर कहा है यह लोग आम आदमी पार्टी को बरबाद करना चाहते हैं।
    उन्होंने आगे कहा, पहले केंद्र सरकार के निर्देशों पर हमारे घर, गांव में सीबीआई की छापेमारी की गई। जब वहां कुछ हासिल नहीं हुआ। तो आज जब कार्यलय जब बन्द है तो सीबीआई की टीम वहां छापेमारी करनें पहुचती है। 
    वह लोग चाहें जितना हाथ पैर मार लें। चाहें जितना छापेमारी करवा लें। लेकिन कुछ मिलेगा नहीं।

  • नीतीश पर टिप्पणी कर बुरे फसे आरजेडी विधायक

    राजनीति– बिहार की राजनीति में हलचल मची हुई है। महागठबंधन में दरार आनें की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। वहीं अब आरजेडी के विधायक सुधानकर चौधरी के खिलाफ नीतीश कुमार पर टिप्पणी को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
    यह नोटिस आरजेडी अध्यक्ष तेजस्वी यादव की ओर से जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि उन्होंने गठबंधन के नियमों का उल्लंघन किया है और अपने बयान से एक वर्ग विशेष को आहत किया है।
    जानकारी के लिए बता दें सुधानकर चौधरी से पत्रकारों ने बातचीत के दौरान पूंछा के राजनीति के इतिहास में नीतीश कुमार को कैसे याद किया जाएगा। तो उन्होंने कहा था कि उन्हें शिखंडी के रूप में याद रखा जाएगा। 
    नीतीश पर यह बयान सुधानकर के लिए समस्या बन गया। जेडीयू के नेताओं ने उनके खिलाफ विरोध किया। वहीं आरजेडी अध्यक्ष ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनपर कार्यवाही की बात कही है।

  • आरजेडी और जदयू में मध्य छिड़ा विवाद, मीटिंग में नहीं दिखे आरजेडी नेता

    देश- बिहार में सियासी घमासान जारी है। बिहार के शिक्षा मंत्री एस जयशंकर द्वारा राम चरित मानस पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ने गठबंधन में दरार डालने का काम कर दिया है। दावे किए जा रहे हैं कि आरजेडी और जदयू के नेताओं के मध्य मतभेद आरम्भ हो गया है।
    आरजेडी के नेता शिक्षा मंत्री का समर्थन कर रहे हैं। वहीं जदयू नेताओं की मांग है कि शिक्षा मंत्री को अपने इस बयान के परिपेक्ष्य में माफी मांगनी चाहिए। वहीं इस बीच नीतीश कुमार ने कुछ ऐसा किया है जो यह संकेत दे रहा है कि गठबंधन में अंदरूनी हलचल मची हुई है।

    जाने क्यों हुआ बवाल-

    नीतीश कुमार ने बिहार में धान खरीद के परिपेक्ष्य में एक बैठक बुलाई। इस बैठक में जदयू के सभी नेता मौजूद थे। बैठक में कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत और सहकारिता मंत्री सुरेंद्र प्रसाद यादव को नहीं बुलाया गया। लेकिन कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत और सहकारिता मंत्री सुरेंद्र प्रसाद यादव को इस बैठक में बुलाया गया।
    वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि इस बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी मौजूद नहीं हुए। गठबंधन की सरकार के बाद यह पहली बार हुआ है जब कोई समीक्षा बैठक बिना तेजस्वी यादव की उपस्थिति में हुई हो।
     बताया जा रहा है कि इस बैठक में आरजेडी के नेताओं की उपस्थिति न होना नीतीश कुमार की रणनीति का हिस्सा है। हो सकता है आगमी समय मे नीतीश कुमार कोई बड़ा दाव खेलें और बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिले।

  • क्या है राहुल गांधी की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

    डेस्क। केरल के वायनाड सीट से सांसद राहुल गांधी इन दिनों अपनी भारत जोड़ो यात्रा में ही जुटे हुए हैं। कन्याकुमारी से निकली ये यात्रा कई राज्यों से होकर गुजर भी रही है।वहीं इस यात्रा में रोजाना राहुल कई किलोमीटर तक पैदल भी चल रहे हैं।
    साथ ही इस यात्रा के दौरान एजुकेशन और देश में बढ़ती बेरोजगारी जैसे कई मुद्दे पर अपनी बात भी उन्होने रखी है। ऐसे में अगर आपके मन में ये सवाल उठ रहा हो कि देश के एजुकेशन की बात कर रहे सांसद की एजुकेशन क्वालिफिकेशन क्या है, तो आइए हम आपको आज इसकी जानकारी दे दें।
    कांग्रेस की वेबसाइट के मुताबिक, राहुल गांधी का बचपन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और देहरादून में बीता हैं। वहीं इसलिए राहुल गांधी ने अपनी शुरूआती पढ़ाई नई दिल्ली और देहरादून में ही की है। बाद में, राहुल कुछ सुरक्षा के कारणों घर पर रहकर ही पढ़ाई करने लगे। इसके बाद, राहुल ने सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन कम्पलीट की। और फिर, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पढ़ने के लिए भी चले गए। उसके बाद, सुरक्षा कारणों से उनको फ्लोरिडा के रॉलिन्स कॉलेज में ट्रांसफर कर दिया गया और इसके बाद 1994 में, राहुल गांधी ने ग्रेजुएट की उपाधि प्राप्त की।
    इस सब्जेक्ट में किया M.Phil
    पिछले चुनाव के नामांकन के समय हलफनामे में उनके द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने 1995 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलेपमेंटल स्टडीज (Developmental studies) में एमफिल यानी मास्टर ऑफ फिलॉसफी की डिग्री भी हासिल की है।
    बता दें मार्च 2004 में राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में एंट्री की। अपने पिता राजीव गांधी के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी से चुनाव लड़कर, राहुल गांधी ने शानदार जीत भी हासिल की, जहां राहुल ने एक लाख से अधिक मतों के भारी अंतर से जीत भी हासिल की। वहीं राहुल गांधी को 2017 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष का पद मिला। इसके बाद लोकसभा 2019 के चुनाव में कांग्रेस को करारी हार भी मिली। जिस पर हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ भी दे दिया।
    साथ ही 2019 में लड़े गए आखिरी चुनाव के दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार, राहुल गांधी की नेट वर्थ 15.17 करोड़ रुपये की है। उनके पास 15.89 करोड़ रुपये की संपत्ति है और उनके नाम 72.02 लाख रुपये की देनदारियां भी हैं।

  • मैं और वरण अलग हैं, हमारी विचारधारा अलग है, हम एक नहीं- राहुल गांधी

    देश- राहुल गांधी के नेतृत्व में जारी भारत जोड़ो यात्रा को विपक्ष समेत आम जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। जनता राहुल की ओर झुकाव दिखा रही है और आज राहुल गांधी एक गम्भीर नेता के रूप में उभर रहे हैं। वहीं अब एक बार पुनः राहुल गांधी और वरुण गांधी को लेकर बातें हो रही हैं। 
    क्योंकि कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने वरुण गांधी की विचारधारा को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, मेरी और वरुण गांधी की विचारधारा में जमीन आसमान का अंतर है। हम अलग अलग हैं। वह भाजपा परिवार का हिस्सा हैं। वह यदि भारत जोड़ो यात्रा में चलेंगे तो यह उनके लिए समस्या खड़ी कर देगा।
    हम अलग अलग नाव पर सवार हैं। मैं आरएसएस के मुख्यालय कभी नहीं जा सकता। उसके लिए आपको पहले मेरा गला काटना होगा। मेरा जो परिवार है वह एक विचारधारा है। उसके सोचने का अपना अलग तरीका है। वरुण ने एक समय भाजपा की विचारधारा को स्वीकार किया है। लेकिन मैं उसे नहीं स्वीकार कर सकता।
    हालाकि मैं वरुण गांधी से मिल सकता हूँ। प्यार से गले लग सकता हूँ। हम साथ बैठ सकते हैं। हम बातचीत कर सकते हैं। लेकिन मैं उस विचारधारा को अपना नहीं सकता।