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  • जाने नीतीश की अभिलाषा पूरे होने में क्या आ रही समस्या

    देश– बिहार की राजनीति में बीते कई महीनों से उथल पुथल देंखने को मिल रही है। अभी कुछ महीने पहले नीतीश कुमार ने बीजेपी से बैर करके RJD का दामन थाम लिया और बिहार में पुनः सरकार बनाई। लेकर नीतीश और तेजस्वी के साथ ने नीतीश कुमार को सावालो के घेरे में उतारा दिया।
    मुख्य विपक्षी दल केरूप में खड़ी भाजपा सरकार ने नीतीश कुमार पर सवालों के बाण छोड़ दिए। सदन में नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति को लेकर उन्हें खूब घेरा गया। वहीं विपक्ष की इस रणनीति ने गुजरात मे नीतीश कुमार की लोकप्रियता को प्रभावित किया है। बिहार के लोगों की नजर में कहीं न कहीं नीतीश कुमार की छवि एक पलटू नेता के रूप में विकसित हुई है। लेकिन इस सबके बाद भी नीतीश कुमार स्वयं को देश के सर्वोच्च पद पर देखना चाहते हैं।

    जाने क्या है नीतीश की अभिलाषा-

    हालाकि इस बात पर नीतीश कुमार ने कभी खुलकर अपना मुह नहीं खोला है कि वह भारत के प्रधानमंत्री बनने का स्वप्न देख रहे हैं। लेकर विशेषज्ञ का कहना है कि नीतीश स्वयं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भांति समझते हैं। उन्हें लगता है कि विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में वह एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कांटे की टक्कर दे सकते हैं।
    नीतीश कुमार एक तरह यह रणनीति बना रहे हैं कि वह बिहार चुनाव में साल 2025 में पुनः मुख्यमंत्री के रूप में अपनी धाक बनाएं एवं बिहार से अपना वर्चस्व देश के कोने कोने तक पहुंचा कर भारत के सर्वोच्च पद तक पहुचें।

    क्या है समस्या-

    बिहार में हुई सत्ता पलट ने नीतीश कुमार की लोकप्रियता को कम कर दिया है। बिहार की आम जनता अब नीतीश कुमार को एक बेहतरीन मुख्यमंत्री के रूप में न देखकर पलटू मुख्यमंत्री कहती है। अब ऐसे में यदि नीतीश कुमार अपना सपना पूरा करना चाहते हैं। तो उन्हें सत्ता तेजस्वी यादव के हाथों में सौंप देनी चाहिए। क्योंकि यही एक रास्ता है जो साल 2025 में जीत का कारण बन सकता है। अन्यथा बिहार में नीतीश कुमार को खुद को खड़ा रखना आसान नहीं होगा।

  • नीतीश और तेजस्वी के साथ के चार मास पूरे, जाने क्यों चाचा को रास आया भतीजे का साथ

    देश– बिहार में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के साथ से बनी सरकार को चार महीने पूरे हो गए हैं। नीतीश कुमार ने चाचा तेजस्वी को न सिर्फ मुख्यमंत्री का पद दिया बल्कि उन्हें सम्मान भी दिया। वहीं अब एक सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या बार बार अपना खेमा बदलने के चलते नीतीश की लोकप्रियता डूब गई है और जनता अब उनपर विश्वास नहीं जता पा रही है।
    हालाकि यह सब जमीनी स्तर की बातें हैं। लेकिन नीतीश और तेजस्वी के साथ से एक बात स्पष्ट हो गई है। कि तेजस्वी यादव ने बिहार की जनता के बीच अपनी एक अलग छवि गढ़ी है और अब वह राजनीति का एक ऐसा चेहरा बन चुके हैं। जिन्हें जनता उच्च पद पर देखना चाहती है। बिहार की जनता और कई नेताओं की अभिलाषा है कि तेजस्वी यादव अब बिहार के युवा मुख्यमंत्री बनें। क्योंकि नीतीश कुमार अब युवाओं को नहीं समझ सकते और उनकी छवि प्रधानमंत्री के समान है।
    वहीं इस बात में कोई शंका नहीं है कि नीतीश कुमार स्वयं को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखते। नीतीश की यह अभिलाषा है कि वह मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पहुंच जाए और मोदी को कड़ी टक्कर दें। हालाकि नीतीश कुमार ने यह बात स्पष्ट नहीं की है कि उन्हें प्रधानमंत्री बनने की चाहत है। लेकिन वह यह जरूर समझते हैं विपक्ष के पास उनसे बेहतर विकल्प नहीं हो सकता।

    कैसे नीतीश चले दिल्ली से पटना की ओर…

    जब नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाई तो लोगो के मन मे कई सवाल थे। कई लोगों ने यह भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी कि नीतीश कुमार दिल्ली के दिलवालों के साथ ज्यादा दिन नहीं टीक पाएंगे। वहीं जब दिल्ली सरकार की कई नीतियों के विरोध में युवाओं ने जमकर प्रदर्शन किया और उन सभी प्रदर्शनों का केंद्र बिहार बना। तो नीतीश कुमार को यह स्पष्ट दिखाई देने लगा की दिल्ली के लोगों को बिहार के युवाओं ने नकार दिया है और तेजस्वी का प्यार युवाओं के सर चढ़कर बोल रहा है।
    नीतीश कुमार कभी भी स्वयं को सत्ता से बाहर होते नहीं देखना चाहते हैं। यही कारण था कि वह तेजस्वी यादव से जाकर मिल गए और उन्होंने भाजपा की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए। जानकारों का यह भी कहना है कि यदि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में तेजस्वी यादव को आगे कर दिया जाए तो साल 2025 में होने वाले बिहार चुनाव में बड़ा बदलाव होगा और भाजपा को पुनः हार का सामना करना पड़ सकता।

  • राहुल के पीएम उम्मीदवार बनने से नीतीश को नहीं समस्या

    देश– कांग्रेस की ओर से जारी भारत जोड़ो यात्रा ने राहुल गांधी की छवि एक गम्भीर नेता के रूप में विकसित की है। वहीं यदि हम विपक्ष की बात करें तो कहीं न कहीं विपक्ष राहुल पर विश्वास जता रहा है। अभी बीते दिन मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने बयान दिया था कि राहुल गांधी पीएम पद का चेहरा हो सकते हैं। वह इस पद हेतु उपर्युक्त हैं। 
    वहीं अब नीतीश कुमार ने बयान दिया है कि यदि उनके सहयोगी कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को पीएम पद का चेहरा बनाया जाता है। तो इससे हमें कोई समस्या नहीं है। वहीं मैं उस पद का दावेदार नहीं हूं मैने बस एकजुटता जताई है। क्योंकि बीजेपी को तोड़ना ही संकल्प है।
    बता दें राहुल गांधी बीते कई महीनों से पद यात्रा कर रहे हैं। वह जनता के मध्य जाकर कांग्रेस का संदेश लोगों को भेज रहे हैं। वहीं आज भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी की छवि एक गम्भीर नेता के रूप में विकसित हुई है और आज राहुल गांधी के भाषण की चर्चा हर ओर है।

  • क्या वरुण गांधी ज्वाइन करने वाले हैं कांग्रेस ?

    डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी अक्सर अपनी ही सरकार की नीतियों और फैसलों के खिलाफ बोलते नजर आते हैं। वहीं हाल ही में वो मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए ये कहकर चर्चा में आ गए थे कि वो न ही कांग्रेस के खिलाफ हैं और न ही पंडित नेहरू के, बता दें इस दौरान उन्होंने “हिंदू-मुस्लिम राजनीति” के खिलाफ भी खुलकर अपनी बात पेश की थी। इन दोनों बयानों के बाद उनके कांग्रेस में जाने की चर्चा काफी तेज हो गई है।
    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वरुण गांधी ये कहते भी नजर आ रहे हैं कि वो न तो कांग्रेस के खिलाफ हैं और न ही जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ हैं साथ ही पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने कहा कि, ‘हमारे देश में राजनीति देश को जोड़ने वाली होनी चाहिए, न कि देश के अंदर ही युद्ध कराने वाली। साथ ही हमें ऐसी राजनीति नहीं करनी चाहिए जो लोगों को दबाए, बल्कि हमें ऐसी राजनीति करनी चाहिए जो लोगों का उत्थान भी करे।
    साथ ही उन्होंने कहा, ‘आज केवल हिंदू-मुस्लिम और जाति की राजनीति हो रही है। वहीं भाइयों को बांटो और भाइयों को मारो की राजनीति भी जारी है। और हम इस राजनीति को नहीं होने देंगे.’ उनके इन बयानों की वजह से सियासी हलके में चर्चा का बाजार गर्म हो चुका है कि क्या कांग्रेस में जाएंगे वरुण गांधी?
    कुछ राजनीति से जुड़े लोगों ने वरुण गांधी की बातों को कांग्रेस के जन संपर्क कार्यक्रम भारत जोड़ो यात्रा के दौरान लाल किले के पास उनके चचेरे भाई राहुल गांधी के भाषण की बातों से जोड़कर भी देखना शुरू कर दिया है साथ ही दोनों की बातों में लोगों ने समानता खोजना शुरू कर दी है। साथ ही वरुण गांधी के कांग्रेस में जाने की चर्चा भी होने लगी है।
    साथ ही शनिवार को यात्रा के दौरान राहुल गांधी से पूछा गया कि क्या कांग्रेस में वरुण गांधी के लिए जगह है? तो इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में पार्टी अध्यक्ष से पूछना चाहिए और यह पूछे जाने पर कि क्या वरुण गांधी का भारत जोड़ो यात्रा में स्वागत किया जाएगा, जो जनवरी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने वाली है, तो राहुल गांधी ने कहा, ‘स्वागत तो किसी का भी है पर वो बीजेपी के हैं तो उनको वहां समस्या तो होगी ही। इसी कड़ी में राहुल गांधी ने सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को तोड़ने के आरोपों पर कहा कि क्या सरकार चाहती है कि वह बुलेट प्रूफ कार में यात्रा करना शुरू कर दें? 

  • राहुल के इस बयान से साफ हुआ वरुण का कांग्रेस में शामिल होने का रास्ता

    देश– पीलीभीत से भाजपा सांसद वरुण गांधी बीते कई दिनों से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। वरुण गांधी उन आलोचकों में से है जिन्हें अपनी सत्ताधारी पार्टी से सवाल पूंछने में कोई डर नहीं लगता। वह साफ छवि के साथ जमीनी राजनीति करने में दिलचस्पी रखते हैं। आय दिन वह बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों को उठाते रहते हैं।
    वहीं अब राहुल गांधी ने कुछ ऐसे संकेत दिए हैं जो इस ओर इशारा कर रहे हैं कि जल्द ही वरुण गांधी की घर वापसी हो सकती है। राहुल गांधी से जब पूंछा गया कि क्या वरुण गांधी भारत जोड़ो यात्रा में पीलीभीत से शामिल होंगे। राहुल ने जवाब दिया कि भारत जोड़ो यात्रा भारत को जोड़ने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इसमें हर किसी का स्वागत है। वरुण गांधी बीजेपी से हैं यदि वह इस यात्रा में शामिल होते हैं तो उन्हें समस्या हो सकती है।
    वहीं जब राहुल गांधी से पूंछा गया क्या वरुण गांधी कांग्रेस परिवार का हिस्सा बनेंगे। तो उन्होंने साफ तौर पर कहा, आपको यह सवाल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से पूंछना चाहिए। बता दें वरुण गांधी के कांग्रेस से जुड़ने की अटकलें तब तेज हो गईं जब उन्होंने यह कहा कि वह न तो कांग्रेस विरोधी हैं और न ही पंडित नेहरू के आलोचक।
    जानकारी के लिए बता दें राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 3 जनवरी को उत्तरप्रदेश में प्रवेश करने जा रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि राहुल गांधी को यूपी में खूब समर्थन मिलेगा और ज्यादा से ज्यादा लोग कांग्रेस की इस यात्रा में जुड़कर इसे सफल बनाने का प्रयास करेंगे।

  • क्या हैं आखिर मोदी सरकार के अधूरे वादे

    देश- केंद्र सरकार अपने बड़े बड़े वादों से जनता को लुभाने में तो सफल हो गई लेकिन उन वादों को पूरा करना मानो केंद्र सरकार के वश का ही नही रहा। साल 2022 में जनता से कई बड़े बडे वादे किए गए। देश की अर्थव्यवस्था से लेकर किसानों की आय बढ़ाने तक के वादों से जनता को लुभाया गया। लेकिन सरकार के यह वादे हकीकत नहीं बन पाए और पूरा साल पलट गया।
    कल से साल 2023 लागू हो गया और अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वह कौन कौन से वादे थे जो सरकार पूरे नहीं कर पाई। लेकिन सरकार ने उन वादों के बलबूते पर जनता से वाहवाही लूटी और कई महीनों तक इन वादों के बलबूते पर केंद्र सरकार सोशल ट्रेड का हिस्सा रही।

    जाने साल 2022 के अधूरे वादे-

    कांग्रेस की ओर से ट्वीट कर लोगों का ध्यान मोदी सरकार के अधूरे वादों पर केंद्रित करने की कोशिश की गई है। ट्वीट में लिखा गया है कि 2022 के लिए मोदी सरकार का वादा था ।
     • देश की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन हो जाएगी
    • किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी
    • हर परिवार का अपना घर होगा
    • बुलेट ट्रेन चलने लगेगी 
    क्या मीडिया को इन वादों पर सवाल नहीं करना चाहिए?मीडिया मोदी सरकार से सवाल क्यों नहीं करता?
    https://twitter.com/INCIndia/status/1609409172487147520?t=r8OtEddOSzMxZEJWXkL0Pg&s=19

     

  • आरएसएस कार्यकर्ता और राम मंदिर न्यास के सचिव ने की भारत जोड़ो यात्रा की सराहना

    देश- बीते दिन राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने पत्र लिखकर राहुल गांधी को आशीर्वाद दिया था। वहीं अब मंदिर न्यास के सचिव चंपत राय ने भारत जोड़ो यात्रा की जमकर तारीफ की है।
    फैजाबाद सर्किट हाउस की बैठक में शामिल होने के बाद वह बोले एक युवक देश मे पैदल चल रहा है। यह उसका सराहनीय कदम है। मैं इसकी तरीफ करता हूँ। मै आरएसएस का कार्यकर्ता हूँ। लेकिन आरएसएस कभी भारत को विखंडित करने की बात नहीं करती है। उसका उद्देश्य भारत को एकजुट रखना है।
    वह इतने खराब मौसम में भारत का भ्रमण कर रहे हैं। इसके लिए उनकी सराहना करनी चाहिए। मुझे यह कहना होगा कि हर किसी को ऐसी यात्रा करनी चाहिए।
    राम मंदिर न्यास के एक अन्य वरिष्ठ न्यासी गोविंद देव गिरि कहते हैं मैं भगवान राम से अराधना करता हूँ कि वह उन्हें स्मार्थ्य प्रदान करें। वह एक बेहतर काम कर रहे हैं। भारत जोड़ो अच्छा नारा है। भारत के लोगों को एकजुट रहना ही चाहिए।
    बता दें इससे पूर्व अयोध्या के राम मंदिर के पुजारी ने पत्र लिखकर राहुल गांधी को आशीर्वाद दिया था और भारत जोड़ो यात्रा की सफलता की कामना की थी।

  • क्यों अमेरिका ने मोदी पर लगाया था वीज़ा बैन

    देश- भारत मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि हिंदुत्व के रूप में जानी जाती है। लोग उन्हें हिन्दू हितैषी भी कहते हैं। क्योंकि गुजरात दंगों के बाद से इन्हें मुस्लिम विरोधी करार दिया जाता है। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और गुजरात मे हिन्दू मुस्लिम विवाद तूल पर था। पूरे भारत मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय से लेकर आज तक भगवा पक्षधर माने जाते हैं।
    नरेंद्र मोदी की मस्लिम विरोधी छवि के चलते अमेरिका ने उन पर यूएस इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम एक्ट 1998 के तहत वीज़ा बैन लगाया था। लेकिन यह बैन साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो हटाया गया। जानकारी के लिए बता दें यह बैन अमेरिकी एजेंसी कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम की सिफ़ारिश पर लगाया गया था। 
    लेकर जब से वह प्रधानमंत्री बने हैं उनकी हिंदुत्व की छवि ने कभी विश्व के अन्य देशों को प्रभावित नहीं किया है। लोग भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्मान करते हैं और वह सभी धर्मों के लोगों से सम्मान के भाव से मिलते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी ने कई बार अमेरिका का दौरा किया है। वहीं अमेरिकी कांग्रेस को भी इन्होंने सम्बोधित किया है।
    लेकर मोदी यहीं नहीं रुके उन्होंने अपना प्रभाव इस्लामिक देशों पर बनाने के लिए प्रयास किया। मुस्लिम देशों के साथ सम्बंध मजबूत करने के लिए मोदी ने उनके हित को आगे रखकर उन्हें उच्च अधिकारियों समेत राजनेताओं से मुलाकात की। वहीं आज मोदी के नेतृत्व में भारत की छवि वैश्विक स्तर पर उम्दा बनी हुई है और प्रत्येक देश भारत को सम्मान की नजर से देख रहा है।

  • बिहार की सियासत में क्यों मची हलचल, क्या महागठबंधन में देखने को मिलेगी भगदड़

    बिहार में चूड़ा दही पार्टी एक पुरानी परंपरा है। मकरसंक्रांति से पूर्व यह हर वर्ष होती है। इस परंपरा में भविष्य की राजनीति की तस्वीर दिखाई जाती है। लेकिन इस बार चूड़ा दही पार्टी देने की परंपरा से पूर्व बिहार की बड़ी पार्टी बीजेपी, आरजेडी और जदयू के टूटने का दावा किया जा रहा है।
    इन दावों ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। बीजेपी नेताओं और पूर्व उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने यह दावा किया है कि जदयू के ज्यादा सांसद अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें अपना भविष्य खतरे में दिखाई दे रहा है। क्योंकि साल 2019 में जो सांसद मैदान में उतरे थे वो नरेंद्र मोदी के प्रभाव से जीते थे। लेकिन इस बार स्थिति अलग है।
    उन्होंने आगे कहा, नीतीश कुमार अपने दम पर अपनी पार्टी को खड़ा नहीं कर पा रहे हैं। इसफ़ल यह होगा कि आगमी समय मे महागठबंधन में भगदड़ देंखने को मिलेगी। वहीं अब बिहार में नीतीश की स्थिति पहले से खराब है। क्योंकि उन्होंने राहुल गांधी का समर्थन दिया है जो उनके भविष्य के लिए खतरा है। वह विपक्षी एकता के नेता बनना चाहते थे लेकिन उन्हें मिली क्या निराशा।
    बता दें यह बयान बीजेपी की ओर से तब आया जब नीतीश कुमार ने अपने बयान में यह साफ कर दिया कि अगर राहुल पीएम पद के उम्मीदवार होते हैं। तो उन्हें इससे कोई समस्या नहीं होगी। वहीं अगर हम साल 2019 के रिजल्ट पर गौर करें तो बिहार की एकमात्र किशनगंज सीट पर कांग्रेस की जीत हुई थी, जबकि बाकि 39 सीटें एनडीए के खाते में गई थी. इनमें 17 बीजेपी, 16 पर जेडीयू और 6 पर एलजेपी की जीत हुई थी।

  • हमने 70 साल में जो किया उसकी वजह से मोदी आज देश के प्रधानमंत्री

    राजनीति- कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में बीते 3 महीने से भारत जोड़ो यात्रा जारी है। इस यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी 3120 किलोमीटर तक पैदल चल चुके हैं। वहीं बीजेपी बार बार कांग्रेस नेताओं से सवाल कर रही है कि इस यात्रा से क्या लाभ होगा। इसके साथ ही जनता भी जानना चाहती है कि कांग्रेस को भारत जोड़ो यात्रा से क्या लाभ होगा।
    वहीं अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया है कि क्यों कांग्रेस इतनीं बड़ी भारत जोड़ो यात्रा कर रही है। उन्होंने कहा, वह कहते हैं 70 साल में कांग्रेस ने क्या किया है। लेकिन मोदी ने तो जनता से सिर्फ झूठे वादे किये हैं। काले धन के झूठे वादे। रोजगार के झूठे वादे।
    हमने देश की इतनीं तरक्की की है कि आज मोदी जी प्रधानमंत्री के पद पर बैठे हैं। हमने आईआईटी, मेडिकल कालेज देश में उच्च शैक्षणिक संस्थाएं दी। पंडित नेहरू ने पंचवर्षीय योजनाएं चलाकर देश की तरक्की की। संविधान की रक्षा की और देश की आजादी के लिए बलिदान दिया।
    मैं मोदी जी से जानना चाहता हूं क्या भाजपा परिवार का देश की आजादी में कोई योगदान रहा है। क्या किसी भाजपा कार्यकर्ता की आजदी के दौर में गिरफ्तारी हुई है। क्या किसी भाजपाई की गिरफ्तारी हुई है। तो आप अब जनता ही तय करें कौन सच्चा है और कौन झूठा।
    उन्होंने कहा कि देश में 30 लाख पद सरकारी नौकरी के लिए आज भी खाली पड़े हैं। ये पद रेलवे,सेना,शिक्षा के क्षेत्र में रिक्त पड़े हैं। मगर मोदी सरकार अग्निवीर बना रही है। चार साल के बाद ये युवा क्या करेंगे। क्या पकौड़े बेचेंगे। यह बदलाव युवाओं में नफरत का बीजारोपण कर रहा है।