Category: politics

  • क्यों इंदिरा गांधी को याद करके भावुक हो गए राहुल गांधी

    राजनीति– कांग्रेस की जमीनी छवि गढ़ने के लिए शुरू की गई भारत जोड़ो यात्रा कर्नाटक पहुँच गई है और कल कर्नाटक में यात्रा का आख़िरी दिन था। 
    यात्रा के आखिरी दिन राहुल गांधी भावुक हो गए। उन्होंने कहा राज्य से हमारा पुराना नाता है। दादी और माता ने यहां से महत्वपूर्ण चुनाव जीते हैं। 
    आप लोगो के समर्थन से इंदिरा गांधी ने1978 में चिकमंगलुरु से चुनाव जीत मैं यह भी नहीं भूल सकता कि आपने (1999) में बेल्लारी से सोनिया गांधी को जीत दिलाई थी।
    उन्होंने आगे कर्नाटक की जनता का धन्यवाद किया। आपके प्यार और आभार के लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगा। भाजपा और आरएसएस ने पूरे देश में हिंसा और घृणा को बढ़ावा दिया है। उन्होंने एकता में फूट डाली है। देश को बांटने का काम किया है।
    हम भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से लोगो को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों के लिए सरकार कुछ नही कर रही। किसान परेशान हैं वह न किसानों की मदद कर रहे हैं और न उनको उनकी नीतियों का लाभ प्राप्त हो रहा है।
    उन्होंने आगे कहा, देश महंगाई , बेरोजगारी से परेशान हैं। युवा रोजगार के लिये भटक रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री ने इन मुद्दों पर चुप्पी साध रखी है। उनकी नोटबन्दी और जीएसटी लोगो के लिए समस्या बन गई है। इससे लाखो युवाओं का रोजगार चला गया है।
    वह आगे बोले, भारत का एक व्यक्ति दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति है। वह प्रधानमंत्री का मित्र हैं। एक ओर दुनिया के सबसे अमीर भारत मे है और एक तरह भारत मे बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।

  • कैसे शुरू हुई बीजेपी की विकास यात्रा

    राजनीति– बीजेपी आज के समय मे सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी बनकर उभरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को बीजेपी के लिये तुरुप का इक्का कहा जाता है। विपक्ष बीजेपी की नीतियों के आगे जमीन पर धड़ाम हो गया है और खुद के अस्तित्व को बचाने के लिए आज बीजेपी की ही नीतियों को अपनी ढाल बना रहा है।
    लेकिन अब सवाल यह उठता है कि आखिर बीजेपी इतनी बड़ी राजनैतिक पार्टी कैसे बन गई कि आजादी के दौर की लोकप्रिय पार्टी कांग्रेस बीजेपी के आते ही बिखर गई और अब अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है।
    बीजेपी की स्थापना 21 अक्टूबर 1951 में हुई। उस समय बीजेपी फ्रेश पार्टी थी कोई बीजेपी के उद्देश्य से परिचित नही था। लोगो की जुबान पर सिर्फ कांग्रेस का नाम था। जब बीजेपी की स्थापना श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी तब इनका चुनाव चिन्ह जलता हुआ दीपक था।
    उस समय बीजेपी काफी कमजोर थी आज जो बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में अपना जलवा बिखेर रही है। एक समय उसको 2, 4 सींटो में ही संतुष्ट होना पड़ा था। लेकिन बीजेपी ने हार नही मानी और अपने संघर्ष के बलबूते पर अपना अस्तित्व स्थापित किया।
    1957 में हुए लोकसभा चुनाव में जनसंघ पार्टी को 4, 1962 में 14, 1967 में 35 सीटें मिलीं. 1977 में कई राजनीतिक दल जनसंघ में मिल गए और इस तरह इसे नया नाम दिया गया- जनता पार्टी।
    लेकिन आपातकाल ने इस पार्टी की छवि बदल दी।1977 में आपातकाल के बाद जब लोकसभा सभा चुनाव हुए तो पार्टी ने 295 सीटें जीतें और केंद्र में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में सरकार बनी और यही से बीजेपी के विकास की यात्रा शुरू हो गई।
    लेकिन सरकार बनने के बाद पार्टी को आंतरिक कलह से जूझना पड़ा। पार्टी का गठबंधन टूट गया और सरकार गिर गई।1980 में लोकसभा चुनाव हुए तो पार्टी को मिली करारी हार के बाद नई पार्टी बनने की योजना बनी और 1980 में बीजेपी यानी भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ।
    भाजपा के गठन के बाद 1984 में जब लोकसभा का चुनाव हुए तो बीजेपी महज 2 सींटो पर सिमट गईं। लेकिन प्रभु श्री राम बीजेपी के लिए मुद्दा बन गए और राम मंदिर आंदोलन ने बीजेपी की एक नई छवि गढ़ी। इस आंदोलन का फायदा बीजेपी को हुआ और 1989 के चुनाव में 80 से अधिक सीटें जीतकर भाजपा ने सत्ता हासिल की।
    1996 के चुनाव में पार्टी ने रिकॉर्ड बनाया और 161 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और केंद्र में सरकार बनाई। लेकिन यह सरकार लम्बे वक्त तक नही चल पाई। 1999 में बीजेपी पुनः सत्ता में आई और इस बार बीजेपी ने अपना कार्यकाल पूरा किया।
    लेकिन इसके बाद बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा और वह विपक्षी दल के रुप में उभरी। लेकिन साल 2014 में जब चुनाव हुआ। तो बीजेपी का स्लोगन हर हर मोदी घर घर मोदी गूंजने लगा। अच्छे दिन आने वाले हैं हम मोदी जी को लाने वाले हैं कि धूम मच गई और जनता के समर्थन के साथ बीजेपी ने 282 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ पार्टी सत्ता में वापसी की।
    यह जीत बीजेपी के लिए उसके स्वर्णिम युग की शुरुआत थी। इसके बाद 2017 में बीजेपी ने उत्तरप्रदेश में सरकार बनाई और लोगो का दिल जीत लिया। राम मंदिर के फैसले ने बीजेपी की एक अलग छवि गढ़ दी और 2019 के चुनाव में विपक्ष एकता को बीजेपी ने मात दी और केंद्र में पुनः मोदी का गुंजन हुआ।
    वही अब साल 2024 का चुनाव बीजेपी में फोकस पर है। क्योंकि कांग्रेस अपने अस्तित्व को पाने के लिए संघर्ष कर रही है और बीजेपी अगर पुनः वापसी करती है तो यह बड़ी उपलब्धि साबित होगी। लेकिन यदि कांग्रेस को जनता का समर्थन मिलता है तो राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा सफल हो जाएगी।

  • ब्राह्मण बीजेपी का चमचा, नेता ने दी गाली मचा बवाल

    राजनीति– मध्यप्रदेश में ब्राह्मण को लेकर तरह तरह के बयान सामने आ रहे हैं। अभी हाल ही में बीजेपी से निष्कासित विधायक प्रियतम लोधी ने ब्राह्मण को लेकर टिप्पणी की थी। वही अब कांग्रेस के नेता और अध्यक्ष केके मिश्रा ने ब्राह्मण को बीजेपी का चमचा बताया है।
    उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में वह ब्राह्मण को गाली देते नजर आ रहे हैं। वही बीजेपी ने अब उनपर पलटवार शुरू किया है।
    जानकारी के लिए बता दें पत्रकार कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने झाबुआ कलेक्टर सोमेश मिश्रा को हटाने को हटाए जाने को लेकर अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। इस चर्चा में वह ब्राह्मण को बीजेपी का चमचा कहते हुए गाली भी दे रहे है। तभी उनका वीडियो एक व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया। जो अब सुर्खियों में है।
    जब से उनका वीडियो सामने आया बीजेपी का ब्राह्मण समाज उनपर हमलावर हो गया। बीजेपी मीडियो प्रभारी लोकेंद्र पारासर ने ट्वीट कर लिखा ‘कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने आज जो बोला है वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. मेरे संस्कार उस वीडियो को प्रसारित करने की इजाजत नहीं देते है।

  • पत्थरबाज अब विकास में कर रहे मदद – अमित शाह

    देश– नेशनल पुलिस मेमोरियल के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने पत्थर बाजो को लेकर बड़ा बयान दिया है। 
    उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि अभी तक जो युवा पत्थरबाजी में शामिल होते थे। वह अब देश के विकास में शामिल हो रहे हैं। देश की सुरक्षा में अब अंतरिक बदलाव हो रहा है।
    पहले बड़ी बड़ी नक्षलवाद की घटनाएं सामने आती है। लेकिन अब देश बदल रहा है। पहले सिर्फ सुरक्षा बलों को स्पेशल पावर दी गई थी अब युवाओं के पास विकास के लिए विशेष शक्ति है। 

  • BJP Muslim politics: भाजपा के लिए क्यों जरुरी हैं Pasmanda Muslims?

    डेस्क। Pasmanda Muslims: Muslim politics को लेकर भाजपा का रुक अक्सर बाकियों से अलग ही दिखाई पड़ता है।
    वहीं थोड़ी मजबूरी, थोड़ी जरूरत और ढेर सारे अनुभव की कसौटी पर भाजपा अब मुसलमानों के वंचित-दलित-पिछड़े वर्ग यानी पसमांदा समाज को अपने पाले में लाने की कोशिश में है।
    इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 16 से 18 अक्टूबर के बीच पहला पसमांदा बुद्धिजीवी सम्‍मेलन करके भाजपा ने मुसलमानों के उपेक्षित वर्ग का भरोसा जीतने का कोशिश की है।
    भाजपा की हैदराबाद में हुई राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी समुदायों के ‘वंचित और दलित’ वर्गों तक पहुंचने के साथ ही स्‍नेह यात्रा निकालने का आग्रह भी किया था। तभी से ऐसा माना गया कि भाजपा की नजर अब मुसलमान समाज के आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से कमजोर वर्ग पर है।
    वहीं भाजपा का हिंदुत्‍व पर जोर देखते हुए राजनीतिक फायदे-नुकसान का तत्‍काल आंकलन भी संभावित नहीं है, पर ऐसा लगता नहीं कि हार्डकोर हिंदू वोटरों की नाराजगी की कीमत पर भाजपा कोई राजनीतिक सौदा करेगी।
    आपको बता दें पसमांदा मुसलमानों को जोड़ने का कदम बहुत सोच समझकर और नफा-नुकसान के आंकलन के बाद उठाया गया है। वहीं बीते आठ सालों में छोटे-छोटे प्रयोगों की सफलता तथा परस्‍पर दूरी घटने के बाद भाजपा को ऐसा लग रहा है कि मुस्लिम समाज का उपेक्षित वर्ग उस पर भरोसा कर सकता है।
    विशेषज्ञों की माने तो भाजपा जातिवाद-भेदभाव पर चोट करके 80 फीसदी पसमांदा वर्ग तक अपनी पहुंच बना सकती है। वहीं विरोध के बावजूद तीन तलाक को खत्‍म कर भाजपा मुस्लिम महिलाओं के बड़े वर्ग की सहानुभूति और वोट पाने में भी सफल रही है।
    इसके अलावा आपको बता दें भाजपा की सरकार में पसमांदा मुसलमानों को बिना भेदभाव के सरकारी आवास, शौचालय के अलावा मुफ्त राशन एवं अन्‍य योजनाओं का लाभ मिला है।

  • आज मल्लिकार्जुन खड़गे सम्भालेंगे अपना कार्यभार, यह है चुनौती

    देश– कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आज अपने अध्यक्ष पद का कार्यभार सम्भालेंगे। मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने उनके पद पर असित होने से पूर्व काफी चुनौती है। उन्हें कांग्रेस की डूबती नैया को बचाना है। वही कांग्रेस के लिए उम्दा रणनीति भी तैयार करनी है।
    लेकिन इस सबके बीच अगर मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने सबसे बड़ी चुनौती कोई है। तो वह है कांग्रेस की कलह को दूर करना। राजस्थान कांग्रेस में आंतरिक घमासान मचा हुआ है। मल्लिकार्जुन खड़गे का पहला कदम यह हो सकता है कि वह राजस्थान कांग्रेस को स्थिर करे और उन्हें चुनाव पर फोकस करने को कहे।
    वही उनके लिए दूसरी बड़ी चुनौती गुजरात और हिमाचल प्रदेश में होने वाला चुनाव है। यह ऐसे राज्य है जहां मल्लिकार्जुन खड़गे को अपने आप को भी साबित करना है और कांग्रेस को भी। क्योंकि यहां दिसम्बर में चुनाव है और कांग्रेस की तैयारी यहां काफी ढीली नजर आ रही है। 

  • राज्यपाल और मुख्यमंत्री में छिड़ा विवाद, माकपा कांग्रेस दिखे एक साथ

    देश– केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पुनः सुर्खियों में है। अभी हाल ही में इनका विवाद हुआ था और इन्होंने कुलपति से इस्तीफा मांगा था। लेकिन अब यह मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को लेकर सुर्खियों में है।
    उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को एक पत्र लिखा है और उनसे केरल के वित्त मंत्री के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग उठाई है। उन्होंने वित्त मंत्री केएन बालगोपाल के एकता को कमतर करने वाले भाषण के परिपेक्ष्य में सवाल उठाया है।
    लेकिन मुख्यमंत्री ने उनकी मांग को खारिज कर दिया है। इसके बाद उन्होंने साफ तौर पर यह कह दिया है कि वह उनके पद पर बने रहने से असंतुष्ट है। उन्हें इसकी कोई खुशी नही है।
    केरल के राज्यपाल की मांग के बाद माकपा और कांग्रेस एक मंच पर दिखाई दिए। लेकिन कांग्रेस ने यह भी आशंका जाहिर की है कि सत्तारूढ़ माकपा और राज्यपाल के मध्य जो खींचातानी दिखाई दे रही है वह सिर्फ दिखावा तो नही है।
    माकपा का आरोप है कि राज्यपाल बीजेपी और आरएसएस के एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। वह संवैधानिक मूल से हटकर काम करवाना चाहते हैं। उन्हें संवैधानिक और कानूनी तौर पर काम करने की कोशिश करनी चाहिए।
    हालाकि कांग्रेस ने यह कहा है कि सत्तारूढ़ ने उनकी इस मांग को अवमानना मान कर खारिज किया है। एक माकपा नेता ने राज्यपाल पर कटाक्ष करते हुए कहा वह व्यक्तिगत नहीं हो सकते। किसी को भी उनकी पसन्द के आधार पर नही बदला जा सकता है।

  • केजरीवाल ने लिया यू टर्न, यह पाकिस्तान जाकर कह सकते हैं हम पाकिस्तानी है

    राजनीति– देश की राजनीति में अब देवी देवताओं की एंट्री को चुकी है। जब से बीजेपी ने केंद्र की सत्ता संभाली है अब प्रत्येक राजनैतिक दल प्रभु में आस्था दिखा कर अपना राजनैतिक हित साध रहा है। वही अगर हम बात आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की करे तो यह अब खुद को आस्था को चोला पहना चुके हैं।
    अभी हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने भारतीय नोटो पर भगवान गणेश और लक्ष्मी की छवि होने की बात कही थी। वही अब उनके इस बयान पर बीजेपी और कांग्रेस भड़क उठी है। दोनो दलों ने अरविंद केजरीवाल के इस बयान को उनका राजनैतिक स्वार्थ बताया है।
    बीजेपी से संबित पात्रा ने कहा, केजरीवाल की राजनीति में काफी परिवर्तन देंखने को मिल रहा है। यह वही केजरीवाल है जिन्होंने साफ तौर पर कहा था वह राम मंदिर नही जायेगे। यह वही केजरीवाल है जिन्होंने कश्मीरी पंडितों के पलायन पर कहा था यह झूठ है।
    कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, अरविंद केजरीवाल आरएसएस की बी टीम है। उनका यह बयान राजनैतिक दाव पेज है। उन्हें समझ नही है वह वोट के लिए पॉलिटिक्स करते हैं। अगर वह पाकिस्तान गए तो वह वोट पाने के लिए यह कहने से नही चुकेंगे की वह एक पाकिस्तानी है।

  • मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए क्या है सबसे बड़ी टेंशन गुजरात या 2024 का चुनाव

    देश– कांग्रेस को मल्लिकार्जुन खड़गे के रुप में नया अध्यक्ष मिल गया है। इन्होंने बुधवार को औपचारिक रूप से अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल लिया है। 
    मल्लिकार्जुन ने कांग्रेस की लम्बे समय से चली आ रही नीति को तोड़ा है और इस बार कांग्रेस के माथे से परिवारवाद का ठप्पा हटाया है। क्योंकि बीते कई सालों से कांग्रेस को अगर कोई अध्यक्ष मिल रहा था तो वो गांधी परिवार का सदस्य था।
    हालाकि मल्लिकार्जुन ने इस नीति को तोड़ दिया है। लेकिन उनके सामने अब कई बड़ी चुनौती है। क्योंकि कांग्रेस की नैया डूबती जा रही है और मल्लिकार्जुन खड़गे को उसे टट्रैक पर वापस लाना है। 
    राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने कही न कही दक्षिण में कांग्रेस को पहले की अपेक्षा स्थापित कर लिया है और अपनी छवि भी गढ़ी है। लेकिन कांग्रेस के लिए इतना काफी नही होगा।
    मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए सबसे बड़ी समस्या अगर कोई है तो साल 2024 का चुनाव। इसमे उन्हें खुद को साबित करना है और कांग्रेस में पुनः जान भरनी है। जिससे केंद्र में कांग्रेस पुनः खड़ी हो सके।
    वही अभी की सबसे बड़ी चुनौती गुजरात और हिमाचल प्रदेश का चुनाव है। गुजरात मे कांग्रेस वैसे तो मुख्य विपक्षी दल है। लेकिन इस बार गुजरात मे आम आदमी पार्टी अपने पैर पसारने में जुटी हुई है।
    मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुजरात मे कांग्रेस का वनवास खत्म करने की रहेगी। क्योंकि यहां बीते 27 साल से कांग्रेस सत्ता से दूर है।
    इसके साथ ही इस बार कांग्रेस का गुजरात चुनाव पर कोई खास फ़ोकस भी नही नजर आ रहा है। लोग यह दावा कर रहे हैं कि गुजरात मे कांग्रेस की जगह अब आम आदमी पार्टी ने ले ली है।
    ऐसे में मल्लिकार्जुन खड़गे को महज 1 माह में गुजरात मे कांग्रेस को अस्तिव में लाना बड़ी चुनौती है।

  • ताजपोशी के साथ ही खड़गे को देनी होगी अग्निपरीक्षा

    डेस्क। Mallikarjun Kharge Congress President: मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार (26 अक्टूबर, 2022) को लगभग ढाई दशकों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले गैर-गांधी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार को अपने हाथ में लिया है। वहीं इस पद को संभालने से पहले खड़गे ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी है। वहीं, खड़गे की ताजपोशी पर पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि खड़गे की नीतियां पंडित जवाहर लाल नेहरू की नीतियां ही होगी। 
    वहीं लोकतंत्र और समाजवाद को हमें मजबूत करना, जाति प्रथा को खत्म भी करना है। वहीं इसमें कुछ नई भी नीतियां शामिल हो सकती हैं। वहीं पिछले हफ्ते हुए कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में खड़गे ने शशि थरूर को भारी अंतर से हराकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा भी जमाया था। साथ ही वह कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी की जगह भी लेंगे।
    खड़गे के अध्यक्ष पद की कमान संभालने से पहले, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने यह कहा कि आखिरी मिनट तक राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने की कोशिश की गई, क्योंकि वही मोदी और सरकार को चुनौती दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज एक नई शुरुआत है। हम मल्लिकार्जुन खड़गे को बधाई देते हैं और पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।
    गहलोत ने कहा कि सोनिया जी ने जो फैसला किया कि गैर-गांधी से कांग्रेस अध्यक्ष बने और खड़गे जी बन भी गए हैं तो हम सब की जिम्मेदारी है कि इसे हम कामयाब करें और पार्टी को भी मजबूत करें।
    कार्यक्रम से पहले नवनिर्वाचित कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ कुछ समय बिताने के लिए उनके आवास पर भी गए थे। पीटीआई की माने तो, खड़गे के सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष कार्यालय और एआईसीसी मुख्यालय के लॉन में अंतिम समय की व्यवस्था भी की गई है।
    2024 के लोकसभा चुनाव से पहले 11 राज्यों में चुनाव होने वाले है और खड़गे के सामने सबसे बड़ी परीक्षा पार्टी को कम से कम प्रमुख राज्यों में जीत दिलाने की होगी जिसमें हिमाचल और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की क्या रणनीति होती है। वहीं इसको लेकर पार्टी के नए अध्यक्ष खड़गे क्या कदम उठाते हैं इस पर भी सभी की नजरें टिकी हुई होंगी।
    मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा था क‍ि मैं उदयपुर घोषणा पत्र को लागू करूंगा। वहीं उन्होंने कहा कि अगर वह कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित होते हैं तो युवाओं, किसानों, महिलाओं और छोटे कारोबारियों की समस्याओं का समाधान करने की भी कोशिश करेंगे।
    इसके साथ ही कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आज पदभार संभाल चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ शशि थरूर ने दावा खोला था। वहीं इस चुनाव में खड़गे ने शशि थरूर को 6,825 वोटो से मात भी दी थी।
    खड़गे को 7897 वोट मिले थे वहीं शशि थरूर के खाते में 1072 वोट आए थे। साथ ही बता दें मल्लिकार्जुन खड़गे के रूप में कांग्रेस को 24 साल बाद गांधी परिवार से बाहर का अध्यक्ष मिला है।
    कांग्रेस में इससे पहले सीताराम केसरी गैर गांधी अध्यक्ष थे। कांग्रेस के 137 साल के इतिहास में अध्यक्ष पद के लिए 6वीं बार चुनाव भी हुए थे।
    कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं। साथ ही यहां बीजेपी अंदरूनी कलह से जूझ रही है। और ऐसे में मल्लिकार्जुन खड़गे के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस पार्टी काफी फायदा पहुंच सकता है।