Category: politics

  • जेल में बंद नवजोत सिंह सिद्धू ने किया ऐसा काम कि हर तरफ हो रही चर्चा

    डेस्क : सेंट्रल जेल पटियाला में एक साल की सजा काट रहे पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने जेल में अपनी फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया है उन्होंने कुछ ऐसा किया है कि वह मीडिया में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। 

    नवजोत सिंह से मिलने पहुंचे पूर्व विधायक पीरमल सिंह ने इस बात का खुलासा किया है। उनके मुताबिक उन्होंने अपना वजन कम कर अपनी फिटनेस को पहले से भी बेहतर कर लिया है।

    इसके साथ हीं नवजोत सिंह सिद्धू जेल में काफी ज्यादा सैर करने के साथ-साथ खाने-पीने पर भी खास ध्यान दे रहे हैं। आपको बता दें कि पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट ने इसी वर्ष मई महीने में एक साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस दिन से नवजोत सिंह सिद्धू सेंट्रल जेल पटियाला में बंद भी हैं।

    इसको लेकर उन्हें पहले कुछ स्वास्थ्य समस्याएं थीं, लेकिन अब उन्होंने समय के अनुसार खुद को ढाल लिया है और अपनी फिटनेस पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं तो पूर्व विधायक पीरमल सिंह के अनुसार उन्हें पंजाब की बहुत चिंता है और उन्होंने लोगों की सेवा करने और पंजाब के हितों की रक्षा करने को कहा हैं।

  • Congress President Result 2022: मजदूरों के नेता और बौद्ध धर्म के अनुयायी है मल्लिकार्जुन खड़गे

     

    Congress President Polls Result 2022: कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव का परिणाम घोषित हो चुका है। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने शशि थरूर को इसमें हरा भी दिया है। खड़गे कांग्रेस के छठे दक्षिण भारतीय अध्यक्ष होंगे।
    वहीं उनसे पहले पीवी नरसिम्हा राव, एस निजलिंगप्पा, के कामराज, नीलम संजीव रेड्डी और पट्टाभि सीतारमैया कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं जो इसी भूमि से आते हैं। इसी कड़ी में खड़गे पहली बार साल 1969 में गुलबर्गा शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चुने गए थे। साथ ही कांग्रेस में शामिल होने से पहले वह मजदूर संघ के नेता भी हुआ करते थे।
    बता दें की प्रेसिडेंट इलेक्शन में खड़गे के प्रतिद्वंदी रहे शशि थरूर उन्हें ‘कांग्रेस भीष्म पितामह’ भी बता चुके हैं। इससे पार्टी में खड़गे के कद और महत्व को समझा भी जा सकता है। वहीं साथ ही कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले 80 वर्षीय खड़के बीते 50 वर्षों से भारतीय राजनीति में सक्रिय भी हैं।
    बता दें वह लगातार 10 चुनाव जीत चुके हैं। जिसमें वो आठ बार विधायक और दो बार सांसद रहे। वहीं वह सिर्फ एक चुनाव हारे हैं। और वह चुनाव था- 2019 का लोकसभा चुनाव। इसी वजह से खड़गे को ‘सोलिलदा सरदार’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है- कभी न हारने वाला योद्धा।
    बता दें कि पिछले 24 वर्षों में पहली बार कांग्रेस की कमान गांधी परिवार से इतर किसी नेता के हाथ में जाएगी।  कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे ने 7897 वोट दिए गए हैं। इसके साथ ही शशि थरूर करीब 1000 वोट अपने पाले में खींच पाए हैं। यानी खड़गे को थरूर की तुलना में 8 गुना ज्यादा वोट मिले हैं इस चुनाव में 416 वोट खारिज भी किए गए हैं।
    बौद्ध धर्म को मानते हैं खड़गे
    कांग्रेस के नवनिर्वाचित मुखिया मल्लिकार्जुन खड़गे बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और उनके अध्यक्षता में चलने वाला सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट बुद्ध और डॉ. अंबेडकर के विचारों फैलाने का काम भी करता है। यह ट्रस्ट गुलबर्गा के बाहरी इलाके में स्थित हैं वहीं खड़गे इसी क्षेत्र से सबसे अधिक बार चुनाव भी जीते हैं।

  • क्यों उपमुख्यमंत्री बोले मुस्लिम समाज बिरियानी में पड़े तेजपत्ता जैसा है

    राजनीति– उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने अपने बयान में मुस्लिम की तुलना बिरयानी में पड़े तेजपत्ता से की है। 
    भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने आयोजित एक कार्यक्रम में ब्रजेश पाठक ने कहा, आजादी के बाद से देश मे मुस्लिम की स्थिति में कोई सुधार नही आया है।
    देश में मुस्लिम को तब भी राजनैतिक दल अपने स्वार्थ के रूप में इस्तेमाल करते थे और आज भी वह लोग इन्हें अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। 
    आज इन लोगो के लिए मुस्लिम बिरियानी में पड़े तेजपत्ता के समान है। जिसे तब तक वह लोग अपने साथ रखते हैं जब तक बिरियानी पक नहीं जाती है और जैसे ही बिरियानी पक कर रेडी होती है वह लोग इसे कूड़ेदान में फेंक देते हैं।
    उन्होंने आगे कहा, मोदी सरकार ने पहली दफा मुस्लिम समाज के लिए कानून की बात की है। उनके अधिकारों की चर्चा की जा रही है। सभी की तरह उनको भी सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। 
    वही अगर हम सपा , बसपा और कांग्रेस की बात करे तो इन लोगो ने मुस्लिम को महज वोट बैंक समझा और अपने स्वार्थ हेतु मुस्लिम का उपयोग किया और उन्हें छोड़ दिया। लेकिन बीजेपी के लिए सभी वर्ग के लोग समान है और बीजेपी ने सभी वर्ग के लोगो के लिए हितकरी काम किये हैं।

  • मेरा बाप मुसलमान था मां की कोई गारंटी नहीं: इस बयान के बाद विवादो में मुनव्वर राणा

    डेस्क। यूपी की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में बीते दिनों बीजेपी (BJP) ने पसमांदा (Pasmanda) सम्मेलन किया है। जिसके बाद से बीजेपी के इस सम्मेलन पर कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आ रही है। इसी कड़ी में शायर मुनव्वर राणा (Munawwar Rana) का एक बयान काफी चर्चा में है जिसमें मुनव्वर राणा से पूछा गया कि ये पसमांदा कौन हैं, इस प्रश्न का जवाब देते हुए ही उन्होंने यह बयान दिया।
    मुनव्वर राणा ने कहा है कि, “पसमांदा की शब्दावली का मतलब ये होता है कि पिछड़े हुए लोग। समाज में जो पिछड़ जाते हैं, उन्हें पसमांदा कह दिया जाता है। वहीं इस्लाम में पसमांदा का कोई जिक्र नहीं था और न ही जात-पात का कोई जिक्र मिलता है। इसमें कोई नहीं जानता है कि कौन-कौन किस जाति के लोग है। वहीं हम केवल ये जानते हैं कि ये अरबी हैं। इसी पर शादी होती है और इसी पर विवाह भी होता है हिंदुस्तान में आकर हमलोग इस रंग में रंग गए।”
    शायर ने आगे कहा कि, “मैं बहुत इमानदारी से एक बात कहता हूं कि मेरा बाप मुसलमान था, वहीं इसकी मैं गारंटी लेता हूं। पर मेरी मां भी मुसलमान थी इसकी गारंटी मैं नहीं ले सकता हूं।
    उन्होने तर्क दिया ऐसा इसलिए है क्योंकि मेरे पिता पहले भारत आए थे। वो चाहे ईसा पूर्व से आया हो, चाहे समरकंद से आया हो, चाहे मुखारद से आया हो, चाहे अफ्रीका आया हो या अरब से आया हो वहीं वो फौज के साथ आया था और फौज बगल में कभी भी बीवी लेकर नहीं चलते हैं। इसलिए मेरा बाप, वो मुसलमान था लेकिन मेरी मां भी मुसलमान थी इसकी मैं गारंटी नहीं ले सकता हूं।”

  • बाबा रामदेव ने लगाया बॉलीवुड के तीनों खान पर बड़ा आरोप, आर्यन खान पर भी तंज

    डेस्क। योग गुरु बाबा रामदेव ने शनिवार को बॉलीवुड दिग्गज खांस यानी अभिनेता शाहरुख खान और सलमान खान को लेकर बड़ा बयान दिया है। आपको बता दें कि उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्रियों के बारे में भी बड़ा खुलासा किया है।
    एक आर्यवीर सम्मेलन को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने कहा शाहरुख का बेटा ड्रग्स लेते पकड़ा गया और वो जेल गया। सलमान खान भी ड्रग्स लेता है। आमिर लेता है या नहीं, ये तो पता नहीं। पूरा बॉलीवुड ड्रग्स की चपेट में है। वहीं एक्ट्रेस का तो भगवान ही मालिक है।
    इसके आगे बाबा ने कहा इस्लाम में कोई शराब पी ले तो उसे कहते हैं कि वो नापाक हो गया, लेकिन जिन्ना दारू पीता था और वो मर गया..अच्छा हुआ। इस्लाम में शराब को लेकर सख्ती है तो वहां बीड़ी-सिगरेट का नशा काफी हावी हो गया है।
    आपको बता दें आज पूरे देश में कोई पवित्र समाज है तो वो सिर्फ आर्य समाज ही है, जिसे मानने वाले किसी भी प्रकार का नशा नहीं करते। बाबा रामदेव ने सभा को आगे संबोधन करते हुए कहा आप तो ऋषियों के वंशज हैं, नशा क्यों नहीं छोड़ सकते।
    बाबा रामदेव ने अपने बयान में कहा कि चुनाव आते ही कुछ राजनीतिक दल समाज को जातियों और पंथों में बांटने की कोशिश शुरू कर देते हैं। ओबीसी, दलित, आदिवासी, मुसलमान का गठजोड़ बनाने की कोशिश होने लग जाती है। साथ ही वो बोले कि यह कभी अपने मकसद में कामयाब नहीं होंगे। उन्होंने कहा सिर्फ आर्य समाज है, जो लोगों से कोई भेदभाव नहीं करता। और यहां सभी जातियां एक समान हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आर्य समाज देश को जातिमुक्त और समानतायुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है। आर्य समाज लोगों को आचरण और चरित्र से लेकर हर तरह की दिव्यता को प्रदान करने में लगा है।

  • ममता ने बीजेपी पर छोटे अपने शाब्दिक बाण सुनाई खरी खोटी

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने तीखे हमलों से हमेशा ही बीजेपी को घयाल करने के लिए आतुर रहती है। वह कई बार यह दावा कर चुकी है कि देश की सरकारी एजेंसी अब बीजेपी के हाथ की कठपुतली बन गई है और बीजेपी उन्हें जिस तरह चाहे उस तरह नाच नचा रही है।
    वही अब एक बार पुनः उन्होंने अपने शाब्दिक बाणों की बौछार बीजेपी पर की है। उन्होंने गांधी की प्रतिमा को दुर्गा पूजा में असुर के रुप में दिखाए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है और कहा वह घटना शर्मनाक है उसे माफ नहीं किया जा सकता है। आप गांधी को असुर के रूप में व्यक्त करते हैं क्या वास्तव में दुर्गा ने गांधी जैसे दिखने वाले असुर का वध किया था।
    हमने इस मामले पर अपना ध्यान दिया पुलिस भेजी और प्रतिमा की वेशभूषा बदली गई। उस वक्त कुछ नही बोला मैंने क्योंकि पूजा का समय था एक भी बयान से विवाद बढ़ सकता था। लेकिन यह ठीक है क्या। आज जिस तरह से आप लोग सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। सत्ता जिस दिन आपके हाथ से जाएगी यह सरकारी एजेंसी आपके पीछे होंगी। आज यह लोग आपके समर्थन में है लेकिन कब तक रहेंगे। 

  • लक्ष्मी, सरस्वती और हनुमान पर बीजेपी विधायक ने की टिप्पणी मचा बवाल

    देश– राजनीतिक गलियारों में आजकल हिन्दू देवी देवताओं को लेकर तरह तरह के बयान दिए जा रहे हैं। इन बयानों पर खूब बवाल मचता दिखाई देता है। वही अब बीजेपी विधायक के एक बयान ने हंगामा मचा दिया है। क्योंकि उन्होंने लक्ष्मी, सरस्वती और बजरंग बली पर टिप्पणी की है।
    भागलपुर की पीरपैंती से भाजपा विधायक ललन पासवान ने कहा, अगर हमे माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से धन अर्जित हो जाता। तो मुस्लिम कभी अरबपति नही होते। मुस्लिम पूजा नही करते लेकिन वह अमीर है। मुस्लिम सरस्वती की पूजा नही करते लेकिन ऐसा तो नही है कि उनमें कोई विद्वान नही है।
    उन्होंने कहा, मुस्लिम भी आईएस पीसीएस बनते हैं। यह सब विश्वास से होता है। आत्म और परमात्मा लोगो की मान्यता है महज। हम देवी देवताओं को मानते हैं यह हमारा विश्वास है हम उन्हें नहीं मानते यह भी हमारा विश्वास है।
    हमे इस मामले के निष्कर्ष पर जाना होगा। इसके लिए हमे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सोचना होगा। क्योंकि यदि हम ऐसा करते हैं तो हमारी बुद्धि में वृद्धि होगी।
    वही लोग कहते हैं बजरंगबली से हमे शक्ति मिलती है। मुस्लिम और ईसाई भी शक्तिशाली है। आप विश्वास खत्म करिए और देखिये यह चीजे स्वतः खत्म हो जाएगी।

  • 43वें दिन कहा पहुंची राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, अबतक इतनी दूरी की कवर

    Bharat Jodo Yatra: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के 43वें दिन की शुरुआत आंध्र प्रदेश के कुरनूल के बनवासी गांव से करी है। वहीं वह अपनी इस यात्रा के दौरान किसानों से मुलाकात करते हुए भी दिखे। इस दौरान उनकी कुछ तस्वीरों को शेयर कर कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से लिखा गया कि, किसान इस देश की ‘जड़’ है और उसे मजबूत रखना हमारी जिम्मेदारी भी है।
    आपको बता दें कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी और इस यात्रा ने अबतक 1000 किमी से अधिक की दूरी भी तय कर ली है। गौरतलब है कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 150 दिनों में लगभग 3500 किलोमीटर की दूरी तय करने की कोशिश है। वहीं इस दौरान 12 राज्यों से यह यात्रा होकर जाएगी।
    आपको बता दें कि राहुल गांधी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान यह भी कहा कि लोग आखिर कांग्रेस को वोट दें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे दलों के मुकाबले कांग्रेस को वोट देने के कई कारण मौजुद हैं। इसमें पहला कारण तो यह है कि कांग्रेस देश की ऐसी इकलौती पार्टी है जो एक-एक भारतीय का प्रतिनिधित्व भी करती है।
    राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस किसी के साथ जाति, समुदाय, धर्म या राज्य के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करती। वहीं इसके अलावा गरीबों, किसानों, मजदूरों के अधिकारों की रक्षा का कर्तव्य भी कांग्रेस ही निभाती है।

  • कांग्रेस बनी लोगो की पसन्द सर्वे देखे हिली बीजेपी की नीव

    देश– कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल गया है। खड़गे के अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस के माथे से परिवारवाद का ठप्पा मिट गया है। हालाकि बीजेपी बार बार खड़गे की आलोचना कर रही है और यह कहते दिख रही है कि अध्यक्ष पद का चुनाव दिखावा है। 
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे गांधी परिवार की कठपुतली है। लेकिन खड़गे ने साफ किया है उनका खुद का राजनैतिक अनुभव है और वह पार्टी के लिए निर्णय लेने में सक्षम है।
    वही राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से कांग्रेस को मजबूत करने और अपनी छवि गढ़ने में जुटे हुए हैं। कही न कही कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा प्रभावी होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस को दक्षिण भारत मे खूब स्पोर्ट मिल रहा है। 
    लेकिन इन सबके बीच सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनता के मन मे क्या चल रहा है। क्या कांग्रेस की नई छवि को जनता पसन्द कर रही है। वही मल्लिकार्जुन खड़गे कैसे कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगाएंगे।

    कैसे मल्लिकार्जुन कांग्रेस के लिए फायदेमंद-

    मल्लिकार्जुन खड़गे का अपना एक राजनैतिक अनुभव है। उन्होंने राजनीति को कई साल दिये हैं। वही कर्नाटक और तमिलनाडु में उनकी अच्छी पैख है। लोग मल्लिकार्जुन पर विश्वास करते हैं। वही आगामी समय मे कर्नाटक में चुनाव होने को है। अब ऐसे में मल्लिकार्जुन का अध्यक्ष बनना बीजेपी के लिए नुकसान दायक और कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित होगा। 
    क्योंकि दक्षिण में लोग मल्लिकार्जुन पर विश्वास करते हैं और यही विश्वास कांग्रेस के लिए आगामी चुनाव में ढाल बन सकता है। जिसके बलबूते पर कांग्रेस अपना दक्षिण में बेहतरीन प्रदर्शन दिखा सकती है।

    राहुल की यात्रा पर लोगो का मत-

    एक टीवी चैनल के सर्वे की माने तो दक्षिण भारत मे राहुल की भारत जोड़ो यात्रा से जनता खूब पप्रभावित हुई है। 59 फीसदी लोगो ने राहुल गांधी को अच्छा नेता बताया और उनकी भारत जोड़ो यात्रा का बेहतरीन बताया है। 
    वही 25 फीसदीं लोग ऐसे थे जो राहुल गांधी की यात्रा का विरोध करते दिखे। लेकिन सर्वे में 16 फीसदीं लोग ऐसे थे जिन्होंने जवाब देना मुनासिब नही समझा। ऐसे लोग काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। क्योंकि यह अपना दाव अंतिम समय मे खेलते हैं और देश मे इनकीं वजह से बड़ा परिवर्तन देंखने को मिलता है। 
    अब अगर हम इस आंकड़े के मुताबिक बात करे तो कांग्रेस अब बीजेपी के लिए नासूर बनती जा रही है। वही अगर आकड़ा काम कर गया तो वह दिन दूर नही होगा। जब केंद्र में सत्ता परिवर्तन होगा और सरकार बनाने के अपने लक्ष्य में कांग्रेस सफल हो जाएगी।

  • क्यों महिलाओं के प्रति बदल रही है अब आरएसएस अपना विचार

    देश– महिलाओ के प्रति आरएसएस की सोच पर इस समय पूरे भारत मे चर्चा हो रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत कई बार महिलाओ को आगे पुरुषों के साथ लेकर चलने का मुद्दा उठा चुके हैं। 
    वही आरएसएस के स्थापना दिवस पर जब दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट को दो बार फ़तह करने वाली संतोष यादव को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। 
    संघ का यह नया रूप देखकर सभी लोग चौंक गए हैं और राजनैतिक गलियारों में इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या वास्तव में अब आरएसएस की सोच बदल गई है। क्योंकि अभी तक आरएसएस का हिस्सा सिर्फ एक हिन्दू पुरुष हो सकता था और महिलाओ के लिए एक अन्य संगठन था।
    आरएसएस प्रमुख ने जब विजयदशमी के दिन अपने भाषण की शुरुआत की ओर कहा कि महिलाओ को पुरुषों के बराबर आंकना चाहिए। हिन्दू धर्म मे दुर्गा देवी को शक्ति के रूप में पूजा जाता है। वही देश के विकास तभी सम्भव है जब पुरुष महिला समान रूप से काम करें।
    उन्होंने यह भी कहा था कि सर्वत्र शक्ति का आधार शक्ति ही है। लेकिन आरएसएस की इस नीति पर अब कई सवाल उठ रहे हैं और आरएसएस की संस्था राष्ट्र सेविका समिति सुर्खियों में बनी हुई है।
    वैसे तो आरएसएस की इस संस्था को आरएसएस ही कहा जाता है। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब आरएसएस अपनी मुख्य शाखा में महिलाओं की एंट्री पर लगे प्रतिबंध को हटाने की कवायद में लग गया है। 
    क्या अब वास्तव में आरएसएस महिलाओ को लेकर अपनी विचारधारा में बदलाव कर रहा है। विशेषज्ञ का कहना है कि अब आरएसएस को बदलवा स्वीकार करना है।
     आरएसएस यह जान चुकी है कि देश मे अब महिलाओ और पुरुषों के मध्य कोई असमानता नही है और आज महिला अब पुरुष के साथ उसका आगे बढ़ रही है।
    आज कोई ऐसा क्षेत्र नही है कि जहां महिलाएं अपनी धाक न जमाए हो। वही आरएसएस यदि आज के समय मे महिलाओ को एक अलग रूप से देखती है तो यह समाज मे आरएसएस की एक धूमिल छवि स्थापित करेगा। 
    शायद यही एक मूल कारण है कि आरएसएस अब महिलाओ को लेकर अपना विचार बदल रही है और अब आरएसएस पूर्णतः बदल रही है