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  • क्यों आरएसएस की ओर से कहा गया भारत की गरीबी चिंताजनक है

    Politics – केंद्र में बीजेपी की सरकार चल रही है। आरएसएस को विपक्ष बीजेपी की रीढ़ कहता है और विपक्ष का दावा है कि आज बीजेपी जो इतनी मजबूती के साथ मैदान में खड़ी है। इसके पीछे कही न कही आरएसएस का बड़ा स्पोर्ट है।
    आरएसएस को बीजेपी की रीढ़ कहे जाने का एक कारण यह भी है। क्योंकि बीजेपी के कई बड़े नेता भविष्य में आरएसएस के सदस्य रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस से आए हैं। वही जब से केंद्र की बागडोर बीजेपी के हाथ मे गई है आरएसएस ने प्रखर रूप से सरकार से सवाल पूंछना बन्द कर दिया है।
    विपक्ष आरएसएस के इस रवैया पर भी सवाल उठाती है। लेकिन अभी हाल ही में आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने एक ऐसा बयान दिया। जो अप्रत्यक्ष रुप से बीजेपी सरकार को सावालो के घेरे में उतार रहा है।
    उन्होंने बयान जारी कहते हुए कहा, यह वास्तव में विचार करने वाली बात है कि भारत की 20 करोड़ से अधिक की आबादी आज भी गरीबी रेखा के नीचे रह रही है। इस गरीबी से लड़ने के लिए हमे आवश्यकता है कुछ ठोस नियमो की क्योंकि यह भयावह है जो आगामी समय मे देश के लिये खतरा साबित हो सकती है।
    स्वदेशी जागरण मंच की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में होसबाले ने कहा था, भारत भले ही विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ा है लेकिन भारत को अभी भी गरीबी ने जकड़ रखा है। भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी गरीबी रेखा के नीचे है। जो वास्तव में चिंता जनक है।
    उन्होंने कहा एक तरफ भारत तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। हम दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। लेकिन हमारे देश के 20 करोड़ लोग आज भी 375 रुपये से कम कमाते हैं। वह गरीबी रेखा के नीचे आते हैं।
    भारत के लिए यह बात नई नहीं है दत्तात्रेय होसबाले से पहले 29 सितंबर को यह बात केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी कह चुके हैं। नितिन गडकरी ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही है। हम विकास कर रहे हैं। लेकिन भारत के लोग आज भी गरीब है।

  • तेजस्वी ने किया खुलासा की नीतीश प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं या नही

    राजनीति– बीते कई महीनों से यह खबर तूल पकड़े हुए हैं कि नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनने की लालसा है। पद के लालच में नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया और तेजस्वी के साथ सरकार बनाई। इसके साथ ही वह अब विपक्ष को एकजुट करने के लिए भी अपने स्वार्थ हेतु जुटे हुए हैं।

    लेकिन अब नीतीश के प्रधानमंत्री बनने की इच्छा पर तेजस्वी यादव ने खुलकर बात की है। तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया है कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नही बनना चाहते हैं। वह सिर्फ लोकसभा चुनाव में परिवर्तन का बिगुल फूंकना चाहते हैं और विपक्ष को एकजुट करना चाहते हैं।
    तेजस्वी यादव ने कहा, नीतीश कुमार अभी बिहार के मुख्यमंत्री है। हम सब उनके नेतृत्व में काम कर रहे हैं। अभी उनका ध्यान साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर है। वह प्रधानमंत्री नही बनना चाहते हैं और न ही उनकी इस तरह की कोई इच्छा है।
    क्योंकि हमारी सरकार अच्छे से चल रही है। बिहार की जनता संतुष्ट हैं। हम सब मिलकर काम कर रहे हैं। लोग इस तरह के बयान देते रहते हैं। लेकिन यह बयान सत्य नही है क्योंकि सभी को अभी सिर्फ परिवर्तन की लालसा है।
    वही जब तेजस्वी यादव से मुख्यमंत्री बनने का सवाल मीडिया कर्मियों ने किया तो वह बोले मेरी ऐसी कोई अभिलाषा नही है। मैं जो हूँ ठीक हूँ। मेरा लक्ष्य निश्चित था की मैं बिहार की गद्दी से बीजेपी और आरएसएस को हटा सकूं। वह सफल हुआ है और अब मेरा उद्देश्य साफ है हम उन्हें केंद्र से हटाना चाहते हैं।

  • क्या बीजेपी के मददगार बनकर गुजरात पहुंचे है चिराग पासवान

    गुजरात– गुजरात चुनाव पर इस समय पूरे देश की नजरें टिकी हुई है। क्योंकि सभी विपक्षी दल गुजरात मे बीजेपी को सत्ता से बेदखल करना चाह रहे हैं। वही अब बड़ी खबर यह सामने आ रही है कि चिराग पासवान की पार्टी पहली बार गुजरात के चुनावी मैदान में कूदने जा रही है।
    सूत्रों के मुताबिक अब गुजरात के चुनावी मैदान में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, एआईएमआईएम, बीजेपी के साथ चिराग पासवान की पार्टी भी मैदान में होगी। जानकारो का कहना है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) दल गुजरात मे अपने उम्मीदवार को लेकर चर्चा कर रही है। चिराग पासवान की पार्टी मैदान में बीजेपी की मदद हेतु उतर रही है।
    विपक्ष की ओर से चिराग पासवान पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि वह गुजरात मे बीजेपी के हितैषी बनकर आये हैं। उनका उद्देश्य गुजरात में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के वोट को काटना और बीजेपी के वोट बैंक को मजबूत करना है।
    राजनीति के जानकारों का कहना है कि चिराग पासवान की पार्टी के लिए गुजरात मे कोई जगह नही है। जनता इनकी पार्टी को नही जानती है इसलिए वह एसटी एससी उम्मीदवार उतार कर गुजरात मे अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं।

  • जाने कब सोनिया गांधी के जनसपंर्क के सामने फेल हुआ था बीजेपी का खेल-

    राजनीति– कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को साउथ अच्छा जनसमर्थन समर्थन मिल रहा है। जनता का प्यार और बेरोजगारी व महंगाई के मुद्दे के साथ कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा आगे बढ़ती जा रही है। कांग्रेस के बड़े नेता यह दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा परिवर्तन की यात्रा है। जिस तरह से दक्षिण भारत मे कांग्रेस को जनमत समर्थन मिल रहा है उससे साफ जाहिर है आगामी समय मे भाजपा सत्ता से जाएगी।
    वही कल कांग्रेस की पद यात्रा में सोनिया गांधी शामिल हुई। सोनिया का भारत जोड़ो यात्रा में पहुंचना बड़े राजनैतिक संकेत दे रहा है। जैसे ही सोनिया गांधी भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा बनी मां बेटे की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर एक अलग ही मंजर बना दिया।
    वही आज हम बताने जा रहे हैं उस राजनैतिक दौर की बात जब बीजेपी की जीत तय मानी जा रही थी और सोनिया गांधी ने जनसपंर्क अभियान से पूरा खेल बदल दिया और बीजेपी को जीत का स्वाद चखने को नही मिला।

    जाने कब सोनिया गांधी के जनसपंर्क के सामने फेल हुआ था बीजेपी का खेल-

    साल 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सभी को यही प्रतीत हो रहा था की बीजेपी को सत्ता मिलेगी। लेकिन उस समय सोनिया गांधी ने बड़ी चाल चल दी और बीजेपी का सारा खेल एक झटके में पलट गया।
    सोनिया गांधी को आरम्भ से ही राजनीति का बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। क्योंकि सोनिया 2004 में जब बीजेपी की लहर थी तब मैदान में अपनी सास इंदिरा गांधी की तरह उतरी और उन्होंने सींधे तौर पर जनता से सम्पर्क साधा और बीजेपी लहर के बीच कांग्रेस की जीत का डंका बजा दिया।
    उस समय सोनिया गांधी ने जो पद यात्रा शुरू की थी उसमें उनका काफिला कही भी रुक जाता था। सोनिया गांधी कभी लक्जरी लाइफ नही देखती थी। वह लोगो के साथ लोगो की तरह ही रहती थी। उनके इस व्यवहार ने राजनीति में बड़ा परिवर्तन दिखाया और अटल बिहारी वाजपेयी के सपनो को तोड़ दिया। 
    वही अगर हम आज कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा की बात करे तो बीते कई दिनों से राहुल गांधी अपनी मां की तरह जनता से जुड़ रहे हैं। साउथ की जनता का कांग्रेस को समर्थन भी मिल रहा है। वही कल भारत जोड़ो यात्रा में सोनिया गांधी भी पहुँच गई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस के लिए आगामी समय मे संजीवनी बूटी साबित हो सकती है।

  • कांग्रेस को मिल रहा भरपूर समर्थन अबकी बीजेपी का होगा सफाया

    Breakingnews – आज कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी शामिल हुई है। वही अब कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस की पदयात्रा को खुब समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस विधानसभा चुनाव शुरु हो चुका है। अब बीजेपी पीछे हो रही है।
    उन्होंने आगे कहा जिस तरह से कांग्रेस को कर्नाटक और शासित राज्यों में समर्थन मिल रहा है। उससे यह साफ है कि बीजेपी अबकी बार हार का मुह देखेगी। जानकारी के लिए बता दें कर्नाटक में 30 सितंबर से कांग्रेस की पदयात्रा आरम्भ हुई थी। आज यात्रा का 7 वां दिन है। कांग्रेस नेता लगातार जनता से सीधा संपर्क साध कर अपनी राजनैतिक धाक मजबूत करना चाह रहे हैं।
    कांग्रेस की पदयात्रा राज्य में चामराजनगर जिले से चलकर मांड्या पहुंची है, जहां पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी भी यात्रा में शामिल हुईं. सोनिया गांधी सोमवार को मैसूर पहुंचीं थीं, जहां उन्होंने भीमनकोली मंदिर का भी दौरा किया. इसके बाद सोनिया गांधी ने बेगुर गांव में रावण दहन में भी हिस्सा लिया।

  • अब नीतीश कुर्सी भी छोड़ दे तब भी मैं उनके साथ नही खड़ा होऊंगा- प्रशांत किशोर

    राजनीति– प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के खिलाफ धावा बोल दिया है और साफ तौर वह यह कह दिया है कि वह किसी भी कीमत पर नीतीश कुमार का साथ नही देंगे। प्रशांत किशोर जन सुराज अभियान के तहत बिहार की अपनी 3500 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर हैं।
    इसी दौरान उन्होंने नीतीश कुमार को बड़ा झटका दिया है और उनके मंसूबो पर पानी फेर दिया है। जहां एक ओर नीतीश कुमार की यह इच्छा थी की प्रशांत किशोर उनके साथ आ जाएं। वही प्रशांत किशोर ने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और कहा है अगर नीतीश कुमार यह भी कह दें की वह अपनी कुर्सी छोड़ रहे हैं। तब भी मैं उनके साथ नही जाऊंगा।
    जानकारी के लिए लिए बता दें बता दें कि 45 साल के प्रशांत किशोर को सीएम नीतीश कुमार ने 2018 में जेडीयू में शामिल किया था और कुछ ही हफ्तों में उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर पदोन्नत कर दिया गया था. हालांकि, संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) विवाद को लेकर कुमार के साथ तकरार के कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

  • एक व्यक्ति की वजह से कश्मीर बन गया विवाद :- PM

    देश – गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने को है। प्रत्येक राजनीतिक दल जनता को लुभाने के लिए जमीन पर उतार चुके है।  आम आदमी पार्टी लगातार गुजरात में अपनी धाक जमाने की  कवायद में जुटी हुई है।  वही बीजेपी गुजरात में अपनी जीत के रिकॉर्ड को टूटने नहीं देना चाहती है। वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के आणंद में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का नाम लिए बिना उनपर जमकर हमला बोला. प्राधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ,आजादी के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने तत्कालीन रियासतों के विलय के सभी मुद्दों को सुलझा दिया था. लेकिन कश्मीर का मुद्दा विवाद बना रहा क्योंकि यह किसी अन्य व्यक्ति के पास था। मै सरदार वल्लभ भाई पटेल के नक्शे कदम पर चल रहा हूँ और शायद इसी वजह से मै कश्मीर मुद्दे को सुलझा पा रहा हूँ. 
    उन्होंने कहा ,सरदार वल्लभ भाई पटेल का ड्रीम प्रोजेक्ट था सरोवर बाँध इसे रोकने की नक्सलियों ने कोशिश की।  सरदार भाई ने जिन रियासतों के भारत विलय का जिम्मा उठाया था उसे बखूबी निभाया।  लेकिन उस समय कश्मीर का जिम्मा किसी अन्य को दिया गया था। लेकिन वह इस मुद्दे को सुलझाने में असफल रहे उन्होंने इसे विवादों में घिरा रहने दिया। लेकिन मैंने कश्मीर की समस्या को सुलझाया क्योंकि मै सरदार वल्लभ भाई पटेल की नीतियों पर चलता हूँ. उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजली भी अर्पित की। 
    उन्होंने आगे कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा पिछली सरकार ने बाँध को लेकर काम किया लेकिन उसने नहरों को नजर अंदाज किया। उन्होंने बांधों का निर्माण देखने के लिए कोई काम किया था क्या? उन्होंने कहा कि इस काम को उन्होंने अपने हाथों में लिया और 20 सालों में पूरा किया. उन्होंने कहा कि अब गुजरात के कोने-कोने में पानी पहुंच रहा है और इसकी बदौलत कृषि उत्पादन में नौ से 10 गुणा तक की वृद्धि हुई है.

  • बीजेपी को 2024 में वापस देंखने के लिए संघ ने उठाया बड़ा कदम

    राजनीति– बीजेपी साल 2024 चुनाव के लिए मैदान में उतर चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के कई बड़े नेता बार बार यह दावा कर रहे हैं कि साल 2024 में केंद्र में बीजेपी की वापसी निश्चित है। वही अब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी प्रयाग पहुंच गए हैं। यह प्रयागराज में 8 दिन रुकेंगे। 
    राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि मोहन भागवत का प्रयाग जाना को इत्तेफाक नही है। यह वही जगह है जहाँ से देश को कई प्रधानमंत्री मिले हैं। वही संघ प्रमुख मोहन भागवत प्रयागराज में 16 से 19 अक्तूबर तक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय होने हैं। 
    बताया जा रहा है कि इस बैठक में समाज की स्थिति और देश के अमुख मुद्दों पर चर्चा होगी और संघ एकजुटता के मुद्दे पर मंथन किया जाएगा। संघ के विस्तार का मुद्दा उठाया जाएगा। देश में वर्तमान में चल रहे समसामयिक विषयों पर भी चर्चा होगी। संघ की इस बैठक में मुख्य रूप से सेवा, संस्कार, समरसता आदि के स्वरूप पर मंथन किया जाएगा। 
    वही कही न कही प्रयागराज से संघ बीजेपी को 2024 में जीत दिलाने के लिए रणनीति भी तैयार करेगी। क्योंकि संघ सत्ता में बीजेपी को ही देखना चाहता है। संघ की बीजेपी को उसके लक्ष्य तक ले जाने हेतु हर तमगे पर अपनी उम्दा रणनीति तैयार करने की योजना का खाका तैयार कर रहा है।

  • देश में पसमांदा मुस्लिमों के लिए भाजपा कर रही सम्मेलन, यूपी में आज होगा अयोजन

    Pasmanda Muslims Meeting: भारतीय जनता पार्टी की अल्पसंख्यक शाखा रविवार (16 अक्टूबर) को लखनऊ में पसमांदा मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों की एक बैठक का आयोजन करने जा रही है। पार्टी ने इसे देश में किसी भी राजनीतिक दल द्वारा पसमांदा मुसलमानों के लिए इस तरह का पहला कार्यक्रम करार दिया है।
    इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक इस पसमांदा बुद्धिजीवी सम्मेलन में मुख्य अतिथि होंगे। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी भी इस बैठक में शामिल होने वाले हैं। वह भाजपा राज्य सरकार में एकमात्र मुस्लिम मंत्री हैं और पसमांदा समुदाय से भी आते हैं। भाजपा अल्पसंख्यक विंग के राष्ट्रीय महासचिव साबिर अली मुख्य वक्ता होंगे, जो प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण पर इस सम्मेलन में ध्यान केंद्रित करेंगे।
    जानकारी के लिए याद दिला दें कि पीएम मोदी ने आग्रह किया था: तीन महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से सभी समुदायों के वंचित और दलित वर्गों तक पहुंचने का आग्रह किया था वहीं बता दें कि बैठक में जिन लोगों को सम्मानित किया जाएगा, उनमें जम्मू-कश्मीर के नव मनोनीत राज्यसभा सांसद, गुर्जर मुस्लिम समुदाय के भाजपा नेता गुलाम अली खटाना भी होंगे।
     पसमांदा बुद्धिजीवी सम्मेलन में भाजपा बताएगी कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और राज्य में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत इस समुदाय के 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को क्या लाभ हुआ है। वहीं यह आयोजन समुदाय के साथ संवाद का एक प्रमुख मंच देगा। यूपी बीजेपी अल्पसंख्यक विंग के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा कि रविवार को होने वाली इस बैठक में इस तरह का पहला कार्यक्रम होगा।

  • हिजाब को लेकर क्यों ओवैसी ने किया ईरान का जिक्र

    देश– कल हिजाब पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों वाली बेंच का फैसला आया। दोनो जजों के इसपर अलग अलग मत देंखने को मिला और इस मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच में होने की सिफारिश की गई। फैसला अभी तक इस मामले पर स्पष्ट नही आया है लेकिन राजनैतिक गलियारों में एक बार पुनः इस मामले को लेकर विवाद छिड़ गया है।
    वही खुद मुस्लिम हितैषी बताने वाले एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी ने इस मसले को लेकर एक नया बयान दिया है। उन्होंने कहा हमे हमारे पूर्वजों ने कठिन संघर्ष करने अंग्रेजों की बेड़ियों से आजादी दिलाई। वही आज हमारे यहां हमारी ही बेटियों से हिजाब को लेकर सवाल किया जा रहा है।
    ओवैसी ने आगे कहा, आज लोग यह कह रहे हैं कि हिजाब पिछड़ेपन की निशानी है। हम यह कहते हैं कि हम हिजाब इसलिए पहनते हैं क्योंकि इसका जिक्र कुरान में किया गया है। यह अल्ल्लाह का हुक्म है। हमे यह अधिकार संविधान में मिला है कि हम अपने लिए इसे चुन सके।
    अगर हमारी कोई बेटी कपड़ा पहनती हैं। तो इसका यह बिल्कुल मतलब नही है कि हमने उसके दिमाग को कवर कर लिया है। हमारे देश में अलग अलग तरह के लोग रहते हैं। अलग अलग विचारधारा है हमने किसी से यह नही कहा की वह लोग हमारी तरह वस्त्र धारण करे। तो जब हमारी बेटियां कुछ पहनती हैं तो किसी को तकलीफ क्यों होती है। 
    ओवैसी ने कहा, ”हैदराबाद की सड़कों पर सबसे ख़तरनाम मोटरसाइकिल-गाड़ी जो चलाता है वो हमारी बहनें चलाती हैं बुरके के साथ. कभी इनके पीछे मोटरसाइकिल-गाड़ी लेकर मत जाना. क्या हमारी बच्चियां डॉक्टर, इंजीनियर, एमबीए, एमसीए नहीं पढ़ रही हैं, भारत को मजबूत नहीं कर रही हैं? 
    वही ईरान का जिक्र करते हुए वह बोले लोग हमारी तुलना ईरान से कर रहे हैं। तर्क दे रहे हैं कि ईरान में।लड़कियां अपने बाल काट रही है हिजाब फूंक रही है। लेकिन हमें ईरान से क्या मतलब उससे हमारा क्या ताल्लुक है। हम हैदराबाद में सिर्फ ईरान की चाय पीते हैं। बाकी हमारे यहां महिलाओ को अधिकार है कि वह अपने लिए निर्णय ले सकें और यह निर्धारित कर सके उन्हें क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं।