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  • मोदी से मैं नहीं डरता, यह भय की राजनीति है, यह विनाशकाल है

    ED: नेशनल हेराल्ड केस में ईडी लगातार गांधी परिवार से पूंछताछ कर रही है। वही इस केस में यंग इंडिया का दफ्तर सील होने के बाद राहुल गांधी केंद्र सरकार पर हमलावर हो गए हैं और वह अब ईडी की जांच को वह सीधे बीजेपी से जोड़ रहे हैं। उन्होंने मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, मैं उनसे नही डरता हूँ उन्हें जो करना है वह कर ले। मुझे फर्क नही पड़ता है। उन्होंने आगे कहा, सरकार ईडी के माध्यम से हमारे ऊपर दवाब बनाने की कोशिश कर रही है लेकिन हमें इससे डर नही लग रहा हम चुप नहीं रहेंगे। हम लोकतंत्र की रक्षा के लिये अपनी आवाज बुलंद रखेगे इसे कोई नही दबा सकता है।

    जानकारी के लिए बता दें कल यानी बुधवार के दिन ईडी ने यंग इंडिया के ऑफिस को सील कर दिया। ईडी ने बताया यह कार्यवाही पहले मंगलवार के दिन होनी थी लेकिन उस दिन कम्पनी के अधिकारी मौजूद नहीं थे। जिस कारण यह कार्यवाही बुधवार को करनी पड़ी। ईडी ने बुधवार को नेशनल हेराल्ड केस के संदर्भ में यंग इंडिया के दफ्तर पर ताला लटका दिया है।

    ईडी की कार्यवाही और कांग्रेस:

    ईडी की कार्यवाही पर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है अब सरकारी एजेंसी निष्पक्ष कार्यवाही नही कर रही है। यंग इंडिया का ऑफिस सील होने पर कांग्रेस नेताओं ने जमकर हंगामा काटा। कांग्रेस मुख्यालय पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किये गए। कांग्रेस नेताओं ने कहा लोकतंत्र की हत्या हो रही है हमारे साथ आतंकियों जैसा बर्ताव हो रहा है।
    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, आज जो हो रहा है, यह प्रतिशोध, धमकी की राजनीति है। परंतु एक कहावत है न कि , ‘विनाशकाले विपरीत बुद्धि’ इस समय महंगाई, बेरोजगारी, GST का विनाशकाल है। प्रधानमंत्री भय की राजनीति कर रहे हैं जो हो रहा है वह गलत है।

     

  • हर घर तिरंगा’ मुहीम चलाने वाले, उस देशद्रोही संगठन से निकले हैं, जिन्होंने 52 सालों तक तिरंगा नहीं फहराया: राहुल गांधी

    देश: पूरा भारत देश की आजादी का 75 वां उत्सव मना रहा है। केंद्र सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान चलाने कयव घोषणा की है। बीजेपी नेता समेत देश के लोग इस अभियान का हिस्सा बन रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार हर घर तिरंगा अभियान ट्रेड कर रहा है। वही विपक लगातार इस अभियान को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोल रहा है। सोशल मीडिया पर जहां लाखो लोग इस अभियान के समर्थन में खड़े हैं वही कई लोग ऐसे भी है जो इस अभियान का विरोध कर रहे हैं।

    अब इस बीच कर्नाटक दौरे पर गए कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने हर घर तिरंगा अभियान को इंगित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार और संघ पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्वीट किया और लिखा, कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग के सभी साथियों से मिलकर बहुत खुशी हुई इतिहास गवाह है, ‘हर घर तिरंगा’ मुहीम चलाने वाले, उस देशद्रोही संगठन से निकले हैं, जिन्होंने 52 सालों तक तिरंगा नहीं फहराया। आज़ादी की लड़ाई से, ये कांग्रेस पार्टी को तब भी नहीं रोक पाए और आज भी नहीं रोक पाएंगे। 

     

    जाने क्या बोले यूजर:-

    राहुल के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर बोला,यदि मोदी सरकार को तिरेंगे को प्रमोट करना था तो चीन का पोलिस्टर आयात नही करना था। मोदी ने चीन की अधीनता और डर का पहला सबूत दे दिया है। बचाओ भारत को। एक अन्य यूजर कहता है कि देश का सबसे बड़ा देशद्रोही संघटन कांग्रेस और गांधी परिवार है जिन्होंने देश की जनता की आंखों में धूल झोंककर देश का दुश्मन चीन के साथ गुप्त समझौता किया है..देश के सैनिक दुश्मनों से दो दो हाथ कर रहे थे तब राहुल गांधी चीन के राजदूत से गुप्त वार्ता कर रहे थे।

  • वरुण गांधी ने फिर कसा अपनी ही पार्टी पर शिकंजा बोले सरकारी खजाने पर किसका हक

    डेस्क। भाजपा नेता और पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी अपनी ही सरकार को घेरने में और सियासी हमले करते नज़र आते हैं। भाजपा सांसद वरुण गांधी अक्सर अपनी सरकार के फैसलों को लेकर आए दिन अपनी नाराजगी जाहिर करते ही रहते हैं।

    इसी कड़ी में एक बार फिर वरुण गांधी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए यह सवाल किया है कि, ‘सरकारी खजाने पर आखिर पहला हक किसका है?’

    आपको बता दें कि पीलीभीत से भाजपा सांसद वरुण गांधी ने शनिवार 06 अगस्त को अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से खुद की सरकार को असहज कर देने वाला एक ट्वीट पोस्ट किया। 

    वरुण गांधी ने पोस्ट में लिखा, ‘जो सदन गरीब को 5 किलो राशन दिए जाने पर ‘धन्यवाद’ की आकांक्षा रखता हो वही सदन बताता है कि 5 वर्षों में भ्रष्ट धनपशुओं का 10 लाख करोड़ तक का लोन माफ हुआ है।

    आगे उन्होंने ‘मुफ्त की रेवड़ी’ लेने वालों में मेहुल चोकसी और ऋषि अग्रवाल का नाम शीर्ष पर बताया। उन्होंने पूछा कि सरकारी खजाने पर आखिर पहला हक किसका है?’

    आपको बता दें कि ‘मुफ्त की रेवड़ी’ वाला वरुण गांधी का यह ट्वीट पीएम मोदी की एक टिप्पणी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें पीएम मोदी ने यूपी में एक जनसभा में मुफ्त में सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली आलोचना दी थी। उन्होंने कहा था कि यह ‘रेवड़ी कल्चर’ देश के विकास के लिए ”बहुत ही घातक” है। 

    इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा था, ‘आज हमारे देश में ‘रेवड़ियां’ बांट कर वोट जुटाने की कोशिश हो रही है यह ‘रेवड़ी कल्चर’ देश के विकास के लिए बहुत घातक होगा। देश के लोगों खास तौर से युवाओं को इस संस्कृति के खिलाफ सतर्क रहने की आवस्यकता है।’

  • बीजेपी हुई अहंकारी अब उसे जनता से कोई लेना देना नही

    गुजरात चुनाव :- इस साल के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने को है। पक्ष विपक्ष जनता को लुभाने की कवायद में तेजी से लगे हुए है। जहां एक तरफ सत्ताधारी दल बीजेपी गुजरात में अपने हाथ से ३० साल की सत्ता को नहीं खोना चाहती है वही अगर हम बात मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की करे तो कांग्रेस गुजरात में अपना वनवास खत्म कर सत्ता का सुख भोगना चाहती है। साल २०१७ के चुनाव में गुजरात में कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन रहा और वह गुजरात में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर कर आई।  

    लेकिन इस बार गुजरात की राजनीति में बदलाव देखने को मिल रहा है। क्योंकि इस बार गुजरात की राजनीति में आम आदमी पार्टी की एंट्री हुई है। अरविन्द केजरीवाल लगातार इस कोशिश में जुटे है की वह अपने दिल्ली विकास के मॉडल के बलबूते पर गुजरात में अपनी धमक बना सके और गुजरात मे पंजाब की तरह अपना मैजिक दिखा सके।
    हालाकि केजरीवाल के लिये गुजरात मे आप को स्थापित करना आसान काम नही होगा। क्योंकि गुजरात वह राज्य है जहां साल से कांग्रेस और भाजपा की धाक बनी हुई है। परंतु अरविंद केजरीवाल लगातार गुजरात मे अपनी पार्टी को मजबूत करने की कोशिश में लगे हुए हैं। वह आय दिन गुजरात का दौरा कर रहे हैं। वही आज दिल्ली पहुंचे रविवार केजरीवाल ने कहा , बीजेपी बीते 27 साल से गुजरात में राज कर रही है। लेकिन अब बीजेपी के लोग अहंकारी हो गए हैं उनको जनता से कोई लेना देना नही है। 
    उन्होंने दिल्ली में शराब पीड़ितों का जिक्र करते हुए कहा, मैं सीएम होने के नाते उनसे मिला। लेकिन यहां के सीएम उनसे मिलने नहीं आए। गुजरात के पास अब एक ही नहीं विकल्प है आम आदमी पार्टी। जानकारी के लिये बता दें अरविंद केजरीवाल दो दिन के दौरे पर गुजरात गए हुए हैं। आज उन्होंने गुजरात के व्यापारियों से मुलाकात की वही कल वह आदिवासी समाज को साधेंगे।
    उन्होंने एक आगे कहा, दिल्ली के बाद आप पंजाब के लोगो के जीरो बिल आने लगे हैं। हम कर्ज माफ नही करते बल्कि जनता के बिजली बिल माफ करते हैं। करोड़ो लोगो का आशीर्वाद हमारे साथ है। गुजरात मे भी यह हो सकता है अब चाबी आपके हाथ मे है कि आप क्या चाहते हैं।

  • भाजपा बिहार में बना रही नए राजनीतिक गाँठजोड 2024 में होगा बड़ा खेला

    राजनीति: नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़ दिया है और आरजेडी के साथ मिलकर नई सरकार बना ली है। जदयू का बीजेपी से गठबंधन टूटने के बाद अब बिहार में भाजपा विपक्ष की भूमिका निभा रही है। वही भाजपा नेता लगातार नीतीश कुमार पर बरस रहे हैं। वही इस बीच राजनीतिक जानकारो का कहना है कि भाजपा ने बिहार में अपना विजय अभियान शुरू कर दिया है। भाजपा बिहार में न सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए खुद को मजबूत कर रही है बल्कि उसकी नजर आगामी विधानसभा चुनाव पर भी है।

    भाजपा की रणनीति इस समय अपने विरोधी दल को कमजोर करना और बिहार में अपना वर्चस्व स्थापित करना है। इस कड़ी में भाजपा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अपना वोट बैंक मजबूत करने की कवायद में जुटी हुई है। वही खबर है कि अब भाजपा बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है भाजपा सत्ताधारी दल के समर्थन से जनता पर जो प्रभाव पड़ा है उसका पूरा फायदा उठाना चाह रही है।
    वही अगर हम बात नीतीश कुमार की ओर गौर करे तो उनका यू पलटी मारकर राजद के साथ जाना बड़े संकेत दे रहा है। इस गठबंधन में राजद बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। इसका जनता और नीतीश दोनो पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। वही अब गुजरात मे राजनीतिक गतिविधियों में कई बड़े परिवर्तन देंखने को मिलेंगे।
    सूत्रों का कहना है कि भाजपा अब महागठबंधन को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरेगी और उनपर अपने सावालो के तीर छोड़ेगी। वही खबर यह भी है कि नीतीश कुमार विपक्ष की और से साल 2024 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बन सकते हैं।

  • आखिर क्यों बीजेपी से भड़क कर नीतीश कुमार ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, जाने वजह

    बिहार: बिहार की राजनीति में मची सियासी हलचल के बीच नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना सभी को खूब खटक रहा है। इस समय हर कोई यही जानना चाह रहा है कि ऐसा क्या हुआ कि इस समय की सबसे सम्रद्ध पार्टी भाजपा के साथ से नीतीश कुमार ऊबने लगे और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और राज्यपाल के सामने नई सरकार बनाने का दावा पेश किया। तो आइये जानते हैं इन सावालो के जवाब और समझते हैं कि आखिर क्यों नितीश कुमार ने अपने पद से दिया इस्तीफा…

    सबसे पहला कारण स्वतंत्रता रहा। बिहार में साल 2017 में विधानसभा चुनाव हुए। भाजपा ने इस चुनाव में 75 सीटें हासिल कीं, तो वहीं जदयू महज 43 सीट पर ही सीमित हो गई। भाजपा ने इस स्थिति का फायदा उठाया और नीतीश कुमार के साथ मिलकर बिहार में सरकार बना ली। भाजपा ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन भाजपा ने अपना नियंत्रण बरकरार रखने के लिए दो डिप्टी सीएम- तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी भी उनके साथ रखे। 
    भाजपा की इस रणनीति ने नीतीश कुमार पर लगामा लगाने जैसा काम किया। नीतीश कुमार सरकार पर अपना नियंत्रण नही रख पा रहे थे। उनके पास निर्णय लेने की आजादी नही थी। जिसके बाद भाजपा से नीतीश कुमार व उनके नेताओ को समस्या होने लगी और आज नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है।
    वही अगर हम बात भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की करे तो जेपी नड्डा के बयान ने बिहार की राजनीति में बड़ा हंगामा मचा दिया। 31 मार्च को जेपी नड्डा ने बिहार में कहा कि आने वाले समय मे बिहार की स्थानीय पार्टियों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। नड्डा के इस बयान ने हलचल मचा दी।
    उन्होंने जैसे ही बयान दिया मैं बार-बार कहता हूं कि देखो अगर ये विचारधारा नहीं होती तो हम इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़ सकते थे। सब लोग (अन्य राजनीतिक दल) मिट गए, समाप्त हो गए और जो नहीं हुए वे भी हो जाएंगे। रहेगी तो केवल भाजपा ही रहेगी। भाजपा के विरोध में लड़ने वाली कोई राष्ट्रीय पार्टी बची नहीं। हमारी असली लड़ाई परिवारवाद और वंशवाद से है। नड्डा के बयान ने कही न कही नीतीश कुमार को झझकोर दिया और आज उसका परिणाम यह हुआ है कि अब भाजपा और JDU का गठबंधन टूट गया है।

  • Nitish Kumar ने ली आठवीं बार सीएम पद की शपथ, साथ ही बोली बड़ी बात

    Nitish Kumar Oath Taking Ceremony: बिहार राजभवन में नीतीश कुमार ने आठवीं बार सीएम पद के लिए शपथ ली। उनके बाद राज्यपाल ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को दूसरी बार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ भी दिलवाई। उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए राबड़ी देवी भी अपने परिवार के साथ राजभवन पहुंची। उनके साथ ही तेजस्वी यादव की पत्नी भी वहां मौजूद रहीं। बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं और पुराना सब माफ है।

    नीतीश कुमार बोले-

    नीतीश कुमार ने सीएम पद की शपथ लेने के बाद प्रेस वार्ता कर कहा कि पिछले दो महीनों से हालात ठीक नहीं थे। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि हमने भाजपा को सपोर्ट दिया लेकिन वो हमें ही हराने में लगे थे।

    आगे उन्होंने कहा कि हमारी यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। और जो भाजपा को लगता था विपक्ष खत्म हो जाएगा लेकिन अब हम भी विपक्ष में ही हैं।

    इसके बाद किसी का नाम लिए बिना नीतीश कुमार ने कहा कि 2014 में आने वाले, 2024 में रहेंगे तब ना। वहीं 2024 में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के सवाल पर बिहार CM नीतीश कुमार ने कहा कि नहीं, हमारी किसी भी पद के लिए कोई दावेदारी नहीं है।

  • बिहार: नीतीश कुमार से विश्वास उठ गया है, विश्वसनीयता शून्य हो गई है

    बिहार: बिहार में सियासी हंगामा जारी है। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। वही लोजपा ने बिहार के मुख्यमंत्री पर जमकर हमला बोला। चिराग पासवान ने कहा अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से विश्वास उठ गया है। विश्वसनीयता शून्य हो गई है। क्योंकि उन्होंने अब उन्ही के साथ मिलकर सरकार बना ली जिस जंगलराज का वह विकल्प बनकर आए थे।

    नीतीश कुमार ने संसद में खड़े होकर शपथ ली थी कि मैं मिट्टी में मिल जाऊंगा लेकिन भाजपा के साथ नही जाउंगी। अपनी बात से पलट कर साल 2017 में वह भाजपा के साथ गए और उसी के साथ सरकार बनाई। उन्होंने आगे कहा, अब तो मुख्यमंत्री पद से विश्वास उठ गया है। कोई कैसे विश्वास करे जब मुख्यमंत्री पद पर आसित व्यक्ति खुद अपनी बात पर नही टिका रह सकता है।
    उन्होंने आगे कहा, अब बिहार में पुनः चुनाव होना चाहिए। राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए। क्योंकि इस तरह तोड़ मोड़ कर सरकार बनाना अनुचित है। आपकी कोई विचारधारा या कोई सिद्धान नही है क्या।

  • नीतीश अपने दम पर सीएम नहीं बन सकते, पीएम का सपना देख रहे हैं

    बिहार: बिहार की राजनीति में कल नया मोड़ देंखने को मिला और नीतीश कुमार ने भाजपा से अपने सभी बन्धन तोड़ लिये व मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर नई सरकार बनाने का दावा राज्यपाल के सामने रख दिया। नीतीश कुमार अब RJD परिवार से मिल कर नई सरकार बनाने जा रहे हैं। लोग नीतीश के इस बदले रूप को देखकर हैरान हैं और तरह तरह की बाते बना रहे हैं।

    बीजेपी नेता लगातार नीतीश कुमार पर हमलावर है। कोई नीतीश कुमार को पलटू राम कह कर सम्भोधित कर रहा है।तो कोई इन्हें विश्वास घाती बता रहा है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार को धोखेबाज करार दिया है। उन्होंने कहा है कि कही पर निगाहे कही पर निशाना। नजरें थी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर जनता ने एनडीए को वोट किया था लेकिन उन्होंने धोखा दे दिया। 
    उन्होंने आगे कहा, नीतीश कुमार अपने बलबूते पर तो सीएम नही बन सकते हैं तो पीएम दूर की बात है। उन्होंने कहा नीतीश कुमार एजेंडे की राजनीति करते हैं। उनका उद्देश्य है देश का प्रधानमंत्री बनना लेकिन वह यह नही जानते कि प्रधानमंत्री का पद भारत मे खाली नही है।

     

    देखे यूजर्स की प्रतिक्रिया: 

    एक यूजर कहता है कि नीतीश कुमार वो बुजुर्ग हैं जिसने रिटायरमेंट के ठीक पहले सेविंग का सारा पैसा सट्टे में लगा दिया है और दांव भी ऐसा लगाया है जिसमें पैसा डूब जाने की प्रबल संभावना है। ना नाम बचे, न पैसा.. ये सियासी खेल कैसा? एक अन्य यूजर कहता है एक अनैतिक व्यक्ति द्वारा गठबंधन तोड़े जाने पर भाजपा को अफ़सोस नहीं करना चाहिए बल्कि कल बिहार में लड्डू बँटवाने चाहिए क्यों इस सरकार की विफलता का ठीकरा अब आपके सर नहीं फूटेगा । अपने अंत की और अग्रसर आदमी का आप कुछ नहीं कर सकते ।

  • Nitish Kumar:-हम बेवफा हरगिज न थे पर हम वफ़ा कर न सके , ऑफर मिला ऐसा हमे कि हम मना कर न सके

    बिहार: बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। अब तक जिसकी नीतियो से नीतीश को समस्या थी अब वह के घर का हिस्सा बन गए हैं। भाजपा गठबंधन तोड़ने के बाद नीतीश कुमार ने राजद से हाथ मिला लिया है और अब विरोध मित्र बनकर गुजरात मे नई सरकार का गठन कर चुके हैं। नई सरकार बनते ही नीतीश कुमार ने 8 वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण और तेजस्वी यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। 

    लेकिन अब सवाल यह उठता है कि जो नीतीश कुमार भाजपा की तरीफ करते नही थकते थे। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर नीति की सराहना करने थे उन्हें अचानक से भाजपा कांटो की तरह क्यों चुभने लगी और उन्होंने भाजपा को छोड़कर क्यों राजद का दामन थाम कर बिहार की सरकार बदल दी।
    यदि हम विशेषग्यों की माने तो नीतीश कुमार के लिये सत्ता सर्वोपरि है। वह हमेशा से सत्ता में उच्च पद प्राप्ति की अभिलाषा रखते थे। जब वह लालू प्रसाद के सलाहकार थे तब उन्हें मुख्यमंत्री बनने की ललक लगी थी, उन्होंने साल 2005 में लालू की लालटेन की लौ बुझा दी और बिहार के मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने उस समय भाजपा के साथ मिलकर अपनी सरकार बनाई थी और मुख्यमंत्री के पद पर बैठे थे। वही अब जब नीतीश कुमार ने साल 2022 में भाजपा गठबंधन को से दूसरी बार अलग होकर राजद से हाथ मिलाया है तो यह स्पष्ट है कि इसके पीछे उनके बड़े राजनीति इरादे है।
    क्योंकि जब पहली बार नीतीश भाजपा के समर्थन में उतरे थे तो वह लालू प्रसाद को छोड़कर आये थे। लालू प्रसाद और नीतीश कुमार स्कूल के समय से मित्र थे। लेकिन सत्ता के मोह में उन्होंने दोस्ती को एक बार भी नही देखा और बिहार में गठबंधन की सरकार बना ली व मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वही अब नीतीश कुमार को अभिलाषा है प्रधानमंत्री बनने की। उन्होंने इस बात पर कभी अपना मुख नही खोला है कि वह प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं लेकिन उनके करीबियों ने इस बात पर मुहर लगाई है कि उनके मन मे प्रधानमंत्री बनने की चाहत है। 
    वही भाजपा में रहकर नीतीश कुमार कभी भी इस पद के उम्मीदवार नही बन सकते थे। क्योंकि भाजपा प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी के अलावा किसी को नही देख सकती। मोदी भाजपा के लिये तुरुप का इक्का है भाजपा उनके अलावा किसी पर भी दांव लगाना उचित नही समझती क्योंकि भाजपा जानती है कि मोदी को जनता पसंद कर रही है और वह अपनी लुभावनी नीतियो से जनता को आकर्षित कर सकते हैं।
    भाजपा की इस नीति से नीतीश कुमार भली भांति परिचित थे। लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री बनने की लालसा तो मन मे थी। इसलिए उन्होंने विकल्प के तौर पर भाजपा से अलग होना और विपक्ष के साथ मिलकर नई सरकार बनना उचित समझा। अब कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री का चेहरा हो सकते हैं। हालाकि यह बात अभी तक औपचारिक रूप से नही कही गई है।
    जानकारी के लिये बता दें अभी हाल ही में नीतीश कुमार के करीबी रहे आरपीसी सिंह ने बयान दिया था कि नीतीश कुमार कभी भी मुख्यमंत्री नही बन सकते। वही भाजपा गठबंधन टूटने के बाद जदयू अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा की नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री बनने के सभी गुण है। इन दोनों नेताओं के बयान से पता चलता है नीतीश का अगला निशाना प्रधानमंत्री की कुर्सी है वह मोदी से सत्ता छीनने की फिराक में है।