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  • तेजस्वी मय बिहार विधानसभा

    तेजस्वी मय बिहार विधानसभा

    बीते दिन बिहार विधानसभा में दिए भाषण के बाद तेजस्वी यादव एक कुशल नेता के रूप में दिखाई दिए। उनके भाषण की सराहना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों दलों ने की। नीतीश कुमार ने विश्वास मत प्राप्त कर लिया और बिहार में पुनः एनडीए की सरकार बन गई। विश्वास मत के पक्ष में 129 वोट पड़े जबकि बहुमत हेतु 122 वोट की आवश्यकता थी।
    नीतीश कुमार बीते महीने 28 जनवरी को महागबंधन (जेडीयू, आरजेडी, कांग्रेस का गठबंधन) से अलग होकर सीएम पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। नीतीश की बार-बार दल बदलो नीति ने बिहार के विकास पर पूर्ण विराम लगा दिया है। जनता के मन में सवाल हैं कि बार-बार दल बदल कर नीतीश कुमार जनता का हित नहीं स्वयं का हित देख रहे हैं। नीतीश को सत्ता से प्रेम हैं नीतीश को जिस तरफ से स्वयं का फायदा दिखाई देता है वह उधर दौड़ जाते हैं।
    क्या बोले तेजस्वी यादव:
    कल बिहार विधानसभा में तेजस्वी यादव एक कुशल नेता के रूप में दिखाई दिए। उन्होंने बारी-बारी सबपर कटाक्ष किया लेकिन शब्दों की मर्यादा नहीं लांघी। तेजस्वी यादव के भाषण में लालू यादव की झलक दिख रही थी। इतनी सहजता के साथ अपना पक्ष रखना आज की राजनीती में किसी नेता के लिए संभव नहीं है। लेकिन तेजस्वी ने वह कर दिखाया। तेजस्वी के अंदाज से यह साफ़ दिखाई दे रहा था की नीतीश की पाला बदलो नीति से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। शायद नीतीश तेजस्वी खेमे में उनकी नीतियों पर बोझ थे। जो स्वयं ही उतर गए।
    नीतीश पर बरसते हुए तेजस्वी यादव बोले- आपने कहा- मुझे वहां अच्छा नहीं लग रहा। आपकी पार्टी को तोड़ने का काम किया जा रहा है। आप ही आए थे। केंद्र से तानाशाही सत्ता को गिराने का लक्ष्य लेकर। हम सब तो एकता के बलबूते आपके साथ चले थे। मोदी जी की गारंटी बहुत मजबूत गारंटी है न क्या मोदी जी गारंटी लेंगे कि यह अब नहीं पलटेंगे। उन्होंने आगे कहा- आप(नीतीश कुमार) जो झंडा लेकर चले थे की मोदी जी को रोकना है। अब आपका यह भतीजा आपका झंडा लेकर बिहार में मोदी जी को रोकने का काम करेगा।
  • तेजस्वी के साथ जाएंगे नीतीश, फिर मारेंगे पलटी?

    तेजस्वी के साथ जाएंगे नीतीश, फिर मारेंगे पलटी?

    बिहार में सियासी सरगर्मी तेज है। नीतीश कुमार ने पुनः पलटी मार ली। बिहार में अब राजद और आरजेडी की नहीं राजद और बीजेपी की सरकार बन गई। नीतीश कुमार ने विधानसभा में विश्वास मत साबित कर तेजस्वी यादव के खेला होबे वाले दावे को खारिज कर दिया। लेकिन जिस अंदाज में बिहार विधानसभा में तेजस्वी यादव दिखाई दिए। उसकी सराहना पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में जमकर हो रही है। राजनीति के जानकारों का कहना है की तेजस्वी बिहार का भविष्य हैं, नीतीश की पटल नीति ने उनका राजनीतिक करियर स्वाहा कर दिया है। अब उनके पास न जनता का विश्वास है न किसी दल का। सभी जानते हैं की नीतीश सत्ता प्रेमी हैं और जिस दल में उनको अपनी कुर्सी खतरे में दिखाई देती है वह उस दल से रफ्फूचक्कर हो दूसरे दल में अपना पद सुरक्षित कर लेते हैं। वही अब एक सवाल जो सियासी गलियारों में चक्कर काट रहा है वह है क्या तेजस्वी के दल में अभी भी खुले हैं नीतीश के लिए द्वारा-
    क्या तेजस्वी खेमे में जाएंगे नीतीश कुमार:
    विधानसभा में नीतीश ने यह स्पष्ट कर दिया की अब वह दल नहीं बदलेंगे। लेकिन तेजस्वी यादव ने जिस अंदाज में विधानसभा में भाषण दिया उसके कई मायने हैं। एक तो तेजस्वी के भाषण ने उनको एक बेहतर नेता साबित कर दिया। बिहार की जनता आज तेजस्वी यादव को कुशल नेतृत्व वाला बता रही है। दूसरा जिस संयम और भाषा की मर्यादा के साथ तेजस्वी ने नीतीश समेत बीजेपी के कई बड़े नेताओं पर कटाक्ष किया उससे यह स्पष्ट है की वह विधानसभा चुनाव में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं।
    उन्होंने नीतीश को राजा दशरथ बताया। कहा- वह एक बार जाने से पहले चर्चा कर सकते थे। लेकिन उन्होंने चुप – चाप राज्यपाल को इस्तीफ़ा सौंप दिया। खैर आपका मन नहीं लग रहा था। आपको जो उचित लगा आपने वह किया। आप मोदी जी को रोकने के उद्देश्य से हमारे साथ आए थे। आपने जो लक्ष्य रखा अब उसको आपका भतीजा पूरा करेगा। बिहार में मोदी को रोकने का काम हम करके दिखाएंगे। हालांकि अगर कभी स्थिति ऐसी बनें की चीजें अव्यवस्थित होने लगें तो आप हमें अवश्य याद कीजिएगा।
    तेजस्वी यादव की इस बात से यह साफ़ है की अभी नीतीश की पलट नीति के लिए आरजेडी में जगह है। लेकिन यह आसान नहीं होगा। क्योंकि तेजस्वी का दावा है बिहार के विकास के लिए पलट नीति वाली नहीं स्थिर सरकार की आवश्यकता है। यह रोज – रोज का सरकार बदल नीति बिहार के विकास में रोड़ा बन गया है।
  • सोनिया गांधी ने क्यों छोड़ा रायबरेली

    सोनिया गांधी ने क्यों छोड़ा रायबरेली

    Sonia Gandhi: लोकसभा चुनाव को कुछ दिन शेष बचे हैं। बीजेपी अपनी विकास नीति और मोदी के बलबूते सत्ता में अपना दबदबा कायम रखना चाहती है। तो कांग्रेस स्वयं को अस्तित्व में लाने के लिए कोशिश में लगी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी जनता से सीधा सम्पर्क साध रहे हैं, आज भारत जोड़ो यात्रा ने राहुल को जनता का नेता बना दिया है। वही इस बीच सोनिया गांधी ने राज्यसभा के लिए राजस्थान से अपना नामांकन दर्ज किया है। सोनिया के इस फैसले ने अब कांग्रेस को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीति के जानकारों ने इसे गलत रणनीति बताया है।
    क्या कहते हैं जानकार:
    विशेषज्ञों का कहना है की कांग्रेस अपने अस्तित्व की तलाश में जुटी है। सोनिया गांधी यूपी के रायबरेली का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। अचानक से सोनिया गांधी का लोकसभा से राज्यसभा की तरफ रुख करना विपक्ष और कांग्रेस के लिए गलत निर्णय साबित हो सकता है। क्योंकि सोनिया लोकसभा में विपक्ष और कांग्रेस का पक्ष रखतीं थीं। उन्होंने राजनीति को लम्बा समय दिया है – ऐसे में वह सदन में देश के मुद्दों को उठाने में विपक्ष की तरफ से निपुण नेता थीं। ऐसे में चुनाव के नजदीक सोनिया का यह निर्णय कांग्रेस के हतार्थ में ठीक साबित नहीं हो सकता है।
    क्यों छोड़ा रायबरेली:
    रायबरेली कांग्रेस का गढ़ है। इंदिरा के दौर से यहां की जनता कांग्रेस पर विश्वास जताते चली आ रही है। सोनिया गांधी के परिवार के प्रति रायबरेली की जनता सम्मानित भाव रखती है। लेकिन अब स्थिति परिवर्तित है। योगी के नेतृत्व में यूपी हिंदुत्व के मार्ग पर चल पड़ा है। घर-घर श्री राम का जयघोष है। ऐसे में रायबरेली में कांग्रेस के लिए अपनी सीट सुरक्षित रखना बड़ा संकल्प होगा।
    सोनिया गांधी की उम्र अब 75 वर्ष हो गई है। स्वास्थ्य स्थिर नहीं रहता है। आय दिन उनको स्वास्थ्य संबंधित समस्या के चलते अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। रायबरेली ऐसी सीट है जहां कांग्रेस को जीत का परचम लहराने के लिए अँधा कैम्पेनिंग करनी पड़ेगी। सोनिया जानती हैं कि कैम्पेनिंग के लिए वह अस्वस्थ हैं। ऐसे में वह अधिक भागा-दौड़ी भी नहीं कर सकती। तो रायबरेली सीट से उनका चुनाव लड़ना कांग्रेस के हितार्थ नहीं है। रायबरेली सीट पर कांग्रेस किसी युवा नेता को अपना प्रत्याशी बना सकती है।
    जानकारों का मत है की कांग्रेस प्रियंका गांधी या राहुल गांधी में से किसी एक को रायबरेली सीट से मैदान में उतार सकती है। लेकिन इस संदर्भ में कांग्रेस आलाकमान से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उम्मीद यह भी जताई जा रही है की इस सीट पर कांग्रेस कोई बड़ा राजनीतिक दांव खेल सकती है।
  • राहुल ने तेजस्वी यादव को सौंपा बिहार

    राहुल ने तेजस्वी यादव को सौंपा बिहार

    बिहार में राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। नीतीश कुमार 28 जनवरी को महागठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल हो गए। बिहार विधानसभा में तेजस्वी यादव के भाषण ने बवाल मचा दिया। पक्ष-विपक्ष दोनों ने तेजस्वी यादव की भाषा और कटाक्ष के लहजे की सराहना की। विशेषज्ञों ने तेजस्वी यादव को बिहार का भविष्य बताया। वही बीते दिन सोशल मीडिया पर तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की एक तस्वीर ने बवाल मचा दिया। तस्वीर राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की है। तेजस्वी यादव राहुल गांधी के साथ उनकी यात्रा पर निकले। सियासी गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं तेजस्वी यादव के साथ बिहार में कांग्रेस बड़ी रणनीति तैयार कर रही है।
    क्या हैं तस्वीर के मायने:
    राजनीति के जानकारों का कहना है। राहुल – तेजस्वी की जोड़ी कुछ बड़ा कर सकती है। विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने स्वयं को  सिद्ध कर दिया है। सूत्रों का कहना है राहुल ने बिहार में तेजस्वी को स्टेरिंग पकड़ा दिया है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में गठबंधन बिहार में बवाल मचाएगा। कहा जा रहा है बिहार तेजस्वी यादव का समझा हुआ है। कहीं न कहीं बिहार की जनता तेजस्वी यादव को अपना नेता मान चुकी है। नीतीश को लेकर विश्वसनीयता समाप्त हो गई है। पलट नीति ने बीजेपी और नीतीश को तेजस्वी के सम्मुख साइड लाइन कर दिया है। ऐसे में तेजस्वी यादव का मजबूती के साथ जनता के मध्य खड़ा होना बिहार की राजनीति के नए युग का उदय साबित होगा।
    कई लोगों का मानना है की कांग्रेस और आरजेडी मिलकर सेक्युलर और मुस्लिम वोटों का विभाजन रोक सकते हैं। बिहार में चुनावी आँकड़ों के लिहाज़ से भी इसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव और राज्य के अगले विधानसभा चुनावों के लिए तेजस्वी यादव पर विपक्षी गठबंधन की सफलता की बड़ी ज़िम्मेदारी होगी। हालांकि जानकारों ने यह स्पष्ट कर दिया है की बिहार में तेजस्वी यादव मुख्य भूमिका में होगें और कांग्रेस उनकी समर्थक बनकर चलेगी।
  • Lok Sabha Election 2024: सपा के बड़े नेता ने दिया इस्तीफ़ा, नेतृत्व पर उठाए सवाल, गठबंधन को बताया ?

    Lok Sabha Election 2024: सपा के बड़े नेता ने दिया इस्तीफ़ा, नेतृत्व पर उठाए सवाल, गठबंधन को बताया ?

    Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव आने में कुछ दिन शेष बचे हैं। सत्तापक्ष दावा कर रहा है जनता ने विपक्ष की नीतियों को नकार बीजेपी की विकास नीति पर विश्वास जताया है। पीएम मोदी तीसरे टर्म में देश का नेतृत्व करने वाले हैं। विपक्षी दलों में इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है। सियासी गलियारों में खबर आ रही है की जल्द ही कांग्रेस के बड़े नेता कमलनाथ बीजेपी परिवार में शामिल हो सकते हैं। वही यूपी में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने पार्टी महासचिव के पद से इस्तीफ़ा दे दिया। स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा- उनके साथ पार्टी में भेदवाव होता था और शीर्ष नेतृत्व उसपर मौन था। लेकिन अब इस बीच एक बड़े मुस्लिम नेता ने अखिलेश की नीतियों पर सवाल उठाते हुए पार्टी को अलविदा कह दिया है।
    जानें किस मुस्लिम नेता ने सपा को कहा अलविदा:
    सलीम शेरवानी ने समाजवादी पार्टी के महासचिव पद से इस्तीफा दिया है। उनका कहना है सपा में मुसलमान को सम्मान नहीं मिल रहा है। पार्टी ने किसी भी मुसलमान को राज्य सभा का टिकट नहीं दिया। यह वास्तव में अनैतिक है पार्टी मेरे नाम पर विचार न करती यह स्वीकार था। लेकिन किसी भी मुसलमान के नाम पर विचार नहीं किया गया यह गलत है।
    यूपी में मुसलमान के साथ जो व्यवहार हो रहा है। वह अनैतिक है। मुसलामन ने सदैव सम्मान के साथ जीने के अलावा कुछ नहीं मांगा। लेकिन उसे यह भी नहीं मिल रहा। मुझे मालूम है मैं अपने समाज के हितार्थ समाजवादी पार्टी में रहकर कुछ नहीं कर सकता। इसलिए पार्टी से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ। भविष्य कहां ले जाएगा इसका खुलासा जल्द ही होगा।
    वही विपक्षी गठबंधन को इंगित करते हुए सलीम शेरवानी बोले- यह बेईमानी लगता है। एकजुटता का अभाव दिखता है। ऐसा लगता है कोई इसे लेकर गंभीर नहीं है। सब जबरन है। आप सत्तापक्ष से लड़ने से अधिक स्वयं से लड़ रहे हैं।
    जानकारी के लिए बता दें सलीम शेरवानी पूर्व पीएम राजीव गांधी के करीबी रहे हैं। वह बदायूं लोकसभा सीट से पांच बार के सांसद रह चुके हैं। वह चार बार सपा के टिकट पर चुनाव जीते, जबकि पहली बार कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे।
  • Asaduddin Owaisi on kamal nath: इंदिरा का तीसरा बेटा बीजेपी का हुआ, अपनी मस्जिद के लिए मुसलमान

    Asaduddin Owaisi on kamal nath: इंदिरा का तीसरा बेटा बीजेपी का हुआ, अपनी मस्जिद के लिए मुसलमान

    Asaduddin Owaisi on kamal nath: लोकसभा चुनाव से पूर्व कमलनाथ के बीजेपी में जाने की खबर ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कमलनाथ को इंगित करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा- कांग्रेस अब बताए बीजेपी की बी टीम कौन है। AIMIM या कांग्रेस।
    क्या बोले AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी:
    AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा- सुना है  इंदिरा का तीसरा बेटा कमलनाथ बीजेपी में शामिल होने जा रहा है। अब आप ही बताइए बीजेपी की बी टीम कौन है। राइट टू रिलिजन हमारा अधिकार है। यह हमें संविधान से प्राप्त हुआ है। बीजेपी और आरएसएस हमसे इसे छीनना चाहती हैं। मोदी अपनी नीतियों से देश चलाना चाहते हैं। हायर एजुकेशन में 1 लाख 80 हजार मुसलमान शामिल नहीं हैं।
    उन्होंने आगे कहा- आप लोग देख रहे हैं न देश में क्या हो रहा है। ज्ञानवापी में क्या चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला आस्था के आधार पर देकर यह साबित किया है की आस्था एविडेंस से अधिक महत्व रखती है। मुसलमान से मेरा निवेदन है अपनी आस्था के लिए, अपनी मस्जिदों के लिए अपनी आवाज बुलंद रखें।
    जानकारी के लिए बता दें- कमलनाथ को इंदिरा गांधी का तीसरा बेटा कहा जाता है। वह एमपी में कांग्रेस की रीढ़ माने जाते हैं। वही अब खबर आ रही है की कमलनाथ और उनके बेटे छिंदवाड़ा से सांसद नकुलनाथ बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों का दावा है कमलनाथ बीजेपी में कांग्रेस को खोखला करके जाएंगे। उनके साथ कई विधायक और नेता भाजपा में जा सकते हैं।
  • Lok Sabha Election 2024: बेटे-भतीजे को सीएम-पीएम बनाने में जुटी हैं पार्टियां

    Lok Sabha Election 2024: बेटे-भतीजे को सीएम-पीएम बनाने में जुटी हैं पार्टियां

    Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव की डेट नजदीक आने वाली है। सत्ता पक्ष और विपक्ष जनता को लुभाने की कवायद में जुट गए हैं। विपक्ष जहां महंगाई, बरोजगारी और शिक्षा के मुद्दे को हवा दे रहा है। वहीं सत्तापक्ष लगातार विकास नीति के बलबूते जीत के झंडे गाढ़ने को आतुर है। बीजेपी नेताओं का दावा है मोदी के नेतृत्व में देश विकास के पथ पर तीव्रता के साथ आगे बढ़ रहा है। आज विकासशील देश भारत की सराहना कर रहे हैं। वही बीते दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जबरदस्त हमला बोलते हुए भाई-भतीजा वाद करने का आरोप लगाया है।
    अमित शाह ने कहा- पीएम मोदी के नेतृत्व में देश विकास के पथ पर तीव्रता के साथ आगे बढ़ा है। वैश्विक स्तर पर आज भारत का कद बढ़ा है। पीएम मोदी का एकमात्र लक्ष्य भारत को शीर्ष पर देखना है। मोदी ने देश के प्रत्येक वर्ग को विकास से जोड़कर भारत को विश्व के सम्मुख मजबूत स्थिति में खड़ा किया है। लेकिन विपक्ष आज भी अपनी परिवारवाद की नीति के साथ आगे बढ़ रहा है।
    उन्होंने आगे कहा- सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टियां भाई-भतीजा वाद को बढ़ावा दे रहीं हैं। उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे को सीएम बनाना चाहते हैं तो सोनिया गांधी राहुल गांधी को पीएम बनाना चाहती हैं। लालू आपने लाल को सीएम और मायावती अपने भतीजे आकाश को सीएम बनाने की कोशिश में लगी हैं। सभी को प्राथमिकता के तौर पर अपना परिवार दिखाई दे रहा है।
  • कोई नहीं तय कर सकता की महिलाओं को क्या पहना चाहिए

    कोई नहीं तय कर सकता की महिलाओं को क्या पहना चाहिए

    Rahul Gandhi on Hijab: भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकले राहुल गांधी लगातर जनता से सम्पर्क साध स्वयं की उम्दा छवि गढ़ने में लगे हुए हैं। वर्तमान में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा यूपी में चल रही है। अखिलेश यादव ने राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होकर यह स्पष्ट कर दिया है की आगामी लोकसभा चुनाव में दो लड़को की जोड़ी एकसाथ दिखेगी। वही कांग्रेस नेता और वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) की छात्राओं से मुलाकात कर बातचीत की।
    अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) की छात्राओं से राहुल गांधी ने राजनीति में महिलाओं की भूमिका, शिक्षा, स्वतंत्रता, स्वयं के लिए स्टैंड लेने संबंधित कई मुद्दों पर बात की। इसके साथ ही जब हिजाब के संदर्भ में राहुल गांधी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा- महिलाएं स्वतंत्र हैं वह जो चाहें अपनी इच्छा से पहन सकती हैं। यह कोई नहीं तय कर सकता की उनको क्या पहना चाहिए। स्वयं की वेशभूषा चुनने का अधिकार महिलाओं को स्वयं है।
  • Loksabha Election 2024: सपा के लिए अस्तित्व बचाने की होड़

    Loksabha Election 2024: सपा के लिए अस्तित्व बचाने की होड़

    Loksabha Election 2024: लोकसभा चुनाव को कुछ दिन शेष बचे हैं। सत्तापक्ष और विपक्ष जनता को लुभाने की कवायद में जुटे हैं। बीजेपी का दावा है की 80 लोकसभा सीट पर उनका अधिपत्य होगा, तो समाजवादी पार्टी का कहना है की जनता अबकी बीजेपी का गुरुर तोड़ देगी। वही अब यूपी की 80 सीट पर होने वाले लोकसभा चुनाव के संदर्भ में एक सर्वे सामने आया है। जो विपक्ष के लिए नकारात्मक तो बीजेपी के लिए सकारात्मक प्रभाव दिखा है।
    सर्वे के मुताबिक यूपी की 80 सीटों में से बीजेपी के खेमे में 78 सीट पर जीत मिलेगी। वही विपक्ष के खेमे में महज २ सीट आ सकती हैं। क्योंकि यूपी की जनता बीजेपी पर विश्वास जता रही है। जनता का मत है बीजेपी ने हिंदुत्व को मस्तक पर धारण किया है और जो हिंदुत्व की बात करेगा। हमारे आराध्य के लिए जी जान लगा देगा जनता उसके पक्ष में रहेगी।
    लोकसभा चुनाव के संदर्भ में हुए सर्वे के अनुसार समाजवादी पार्टी  मैनपुरी और आजमगढ़ में जीत दर्ज कर सकती है। लेकिन कांग्रेस का गढ़ कहा जाने वाला रायबरेली और अमेठी कांग्रेस के हाथ से निकलने वाला है। सर्वे यह भी दावा कर रहा है की सपा-कांग्रेस के गठबंधन से समाजवादी पार्टी को कोई लाभ नहीं होगा। कांग्रेस यूपी में शून्य की स्थिति में आ जाएगी और समाजवादी पार्टी भी बीजेपी के सम्मुख अपना अस्तित्व बचाने को मजबूर होगी।
  • Surabhi Chandna Ties the Knot with Karan Sharma: A Destination Wedding Affair

    Surabhi Chandna Ties the Knot with Karan Sharma: A Destination Wedding Affair

    Surabhi Chandna, renowned for her role in “Ishqbaaz,” entered the sacred bond of marriage with her longtime boyfriend, Karan Sharma, on March 2nd. The couple celebrated their union with a destination wedding at Chomu Palace in Jaipur, followed by a mesmerizing wedding reception held at the same venue, capturing hearts and attention alike.

    Captivating Dance Moves

    Videos surfacing on social media depict the newlywed couple, Surabhi Chandna and Karan Sharma, gracefully swaying to romantic tunes, lost in each other’s embrace. Chandna exudes elegance in her Western one-shoulder shimmering gown, complemented by a sleek hairstyle, adding a touch of glamour to her appearance. Adorned with traditional bangles and vermillion in her hairline, Chandna radiates timeless beauty.

    Groom’s Dapper Look

    Karan Sharma, the groom, opted for a wine-colored suit paired with a crisp white shirt, exuding sophistication and charm. Shared on Surabhi’s fan page, the video captures the couple’s first dance as husband and wife, symbolizing the beginning of a new journey together.

    Royal Wedding Affair

    Surabhi Chandna’s marriage to Karan Sharma was a regal affair, attended by their “Ishqbaaz” co-stars, friends, and family. The actress embraced the essence of royalty in every aspect of her wedding celebrations, showcasing her penchant for grandeur and elegance. While glimpses of all the festivities flooded social media, Surabhi herself refrained from posting any pictures or videos on her Instagram handle, maintaining an air of mystique.

    Surabhi’s OTT Debut

    Beyond the realm of television, Surabhi Chandna has carved her identity with iconic roles in “Ishqbaaz” and “Naagin.” Expanding her horizons, Surabhi stepped into the world of OTT platforms with her debut in the series “Rakshak Indiajay Braves Chapter 2” alongside Barun Sobti. The series, streaming on Amazon Mini TV, marks a new chapter in Surabhi’s career, captivating audiences with her versatile talent.

     

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