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  • Maharashtra NCP Crisis: ‘एनसीपी टूटी नहीं है’, प्रफुल्ल पटेल ने पार्टी संगठन

    NCP Political Crisis: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में अजित पवार की बगावत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में उथल पुथल मची हुई है. शरद पवार और अजित पवार, दोनों गुट पार्टी पर अपना दावा कर रहे हैं. इस बीच अजित पवार धड़े के नेता प्रफुल्ल पटेल ने शुक्रवार, 7 जुलाई को कहा कि पार्टी टूटी नहीं है. उन्होंने दावा किया कि गुरुवार को दिल्ली में शरद पवार की तरफ से बुलाई गई राष्ट्रीय कार्यसमिति (National Working Committee) की बैठक आधिकारिक नहीं थी.

    पीटीआई की खबर के अनुसार, प्रफुल्ल पटेल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 30 जून को विधायक दल और संगठनात्मक इकाइयों ने अजित पवार को सर्वसम्मति से पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किया है. उन्होंने 40 से अधिक विधायकों के हलफनामों के साथ भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को एक अर्जी सौंपी है, जिसमें अजित पवार की नियुक्ति के बारे में सूचित किया गया है और ‘‘पार्टी के नाम और चिह्न’’ पर दावा किया गया है.

    पटेल ने पार्टी संगठन पर उठाए सवाल-

    राष्ट्रीय कार्यसमिति के अधिकार पर सवाल उठाते हुए पटेल ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को ही गलत बताया. उन्होंने कहा, हमारा संगठनात्मक ढांचा गड़बड़ है, क्योंकि अधिकांश पार्टी पदाधिकारियों को कुछ लोग नियुक्ति करते हैं, जो एनसीपी के संविधान के खिलाफ है और इस तरह वर्किंग कमेटी निर्णय नहीं ले सकती.

    पटेल ने कहा, तीस जून को ‘देवगिरी’ (मुंबई में अजित पवार का आधिकारिक आवास) पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें विधायक, पदाधिकारी और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे. उन्होंने सर्वसम्मति से अजित पवार को अपना नेता नियुक्त किया. उन्होंने कहा कि नियुक्ति के तुरंत बाद, अजित पवार ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को बताया कि प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

    उन्होंने कहा कि अजित पवार को राकांपा विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया, अनिल पटेल विधानसभा में पार्टी सचेतक बने रहेंगे और विधान परिषद सभापति को सूचित किया गया कि अमोल मिटकरी को परिषद में सचेतक नियुक्त किया गया है. पटेल ने कहा, ‘‘(मूल) राजनीतिक दल का निर्धारण कौन करेगा? यह भारत के निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में है, जबकि विधायकों को लेकर कार्रवाई विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में है.’’ उन्होंने कहा कि शरद पवार समूह द्वारा अजित पवार गुट के नेताओं को निष्कासित या अयोग्य ठहराने के फैसले अवैध हैं और ये लागू नहीं होते हैं.

    शरद पवार ने बुलाई थी कार्यसमिति की बैठक-

    गुरुवार को एनसीपी चीफ शरद पवार ने दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाई थी. इस दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए अजित पवार और दो सांसदों – प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे सहित सभी नौ विधायकों को निष्कासित करने के फैसले का समर्थन किया गया.

  • IIT दिल्ली के fourth year के छात्र ने उदयगिरि हॉस्टल में कर ली सुसाइड

    अभी अभी देश की राजधानी दिल्ली से एक चौंकाने वाली खबर आयी है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, उदयगिरि  हास्टल में आईआईटी दिल्ली के 4थे वर्ष के छात्र ने सुसाइड कर ली है। पुलिस के अनुसार, आयुष आशना (20) नाम के एक लड़के ने हॉस्टल में नायलॉन की रस्सी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 

    बताया जा रहा है कि छात्र बीटेक कर रहा था और अंतिम वर्ष की परीक्षा दी थी। पुलिस  जांच कर  रही है और मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। अभी तक छात्र के आत्महत्या करने की बात सामने आ रही है, लेकिन उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, पुलिस इसकी जांच की जा रही है।

     किशनगढ़ थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। और अभी तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है। इसके संबंध में परिजनों को सूचना दी गई है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।  बीती रात करीब 12 बजे, थाना किशनगढ़ में आईआईटी दिल्ली में एक छात्र द्वारा आत्महत्या के संबंध में एक पीसीआर कॉल मिली थी।  

  • केंद्र सरकार ने कम किया ट्रेन का किराया

    देश: महंगाई से परेशान  लोगों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। जो लोग यात्रा के शौकीन हैं और महंगे किराए से परेशान रहते हैं उन्हें राहत देते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने वन्दे भारत समेत सभी ट्रेन के चेयर कार, एक्जीक्यूटिव क्लास के किराए में 25 फीसदी की कटौती घोषणा की है। मोदी सरकार के इस फैसले से हर वर्ग के व्यक्ति को राहत मिली है। 

    बता दें बीते कई दिनों से भारतीय रेल इस बात की समीक्षा कर रहा था की ट्रेन का किराया कम किया जाए। भारत में वन्दे भारत ट्रेन का किराया अधिक होने से यात्री इसके लाभ से वंचित रह गए। लेकिन सरकार के इस फैसले से अब हर कोई इस ट्रेन में यात्रा करने का सुख उठा सकेगा। 

    केंद्र सरकार ने कई राज्यों में वन्दे भारत ट्रेन चला दी है। ट्रेन में जो यात्री बैठे हैं उनका कहना है ट्रेन का सफर काफी सुखद रहा। यह बेहद आरामदाय है इसमें यात्रा करके आप प्लेन में यात्रा का अनुभव महसूस करते हैं। 

  • Heavy Rain in the Delhi : भारी बारिश ने दिल्ली में 41 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया, गाड़िया डूबी, सांसद, विधायक और मंत्रियों के घरों घुसा पानी

    दिल्ली में बारिश के पानी ने पिछले 41 साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया है। नई दिल्ली की सड़कों और नालों में कोई अंतर नहीं रह गया है। यहां तक बारिश का पानी आम लोगों के घरों में ही नहीं बल्कि सांसद, मंत्रियों और विधायकों के घरों में भी पहुंच गया है। दिल्ली सरकार की बारिश से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है, की पोल कर रख दी है।

    मौसम विभाग (आईएमडी ( के आंकड़ों के अनुसार , रविवार सुबह साढ़े आठ बजे समाप्त हुए 24 घंटों में 153 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो कि 1982 के एक दिन में सबसे अधिक बारिश का रिकॉर्ड से ज्यादा हैं।

    बारिश के कारण दिल्ली की सभी सड़कों और बस्तियों में भयंकर पानी भर गया है, मौसम विभाग ने बताया कि ,उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश पंजाब, और दिल्ली, समेत देश के उत्तरी राज्यों में भारी बारिश हो रही है।

    1982 के बाद पहली बार एक ही दिन में 153 मिमी बारिश हुई। दिल्ली, हिमाचल, पंजाब समेत उत्तर भारत में भारी बारिश हुई है, जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पोशाना नदी पार करते समय सेना के दो जवान डूब गए। बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश में 5, जम्मू-कश्मीर में 2 और उत्तर प्रदेश में 4 लोगों की मौत हो गई है, बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश में स्कूलों को दो दिन की छुट्टी दे दी गई है। 

    2003 में 24 घंटे में 133.4 मिमी बारिश हुई थी, 2013 में दिल्ली में 123.4 मिमी बारिश हुई थी, इस बीच 9 जुलाई 2023 को दिल्ली में बारिश ने 14 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया था, 24 घंटे में 153 मिमी बारिश हो चुकी है। बारिश अभी भी थमी नहीं है, मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में आज (रविवार) 9 जुलाई को भी मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है।

     

  • Maharashtra Politics: अजित पवार की एंट्री के बाद महाराष्ट्र में शुरू हुआ पावर गेम

    Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में जारी घमासान के बाद अब पावर पॉलिटिक्स का गेम शुरू हो चुका है. एनसीपी के अजित पवार भी सरकार में आ चुके हैं और अब फिर से विभागों को लेकर खींचतान की बात सामने आ रही है. इसी बीच एकनाथ शिंदे को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आईं, जिसमें बताया गया कि उनकी कुर्सी खतरे में है, हालांकि इसी दौरान जब देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलें तेज हुईं तो तस्वीर बदलती नजर आई. आइए जानते हैं कि महाराष्ट्र में फिलहाल क्या चल रहा है और ये पावर पॉलिटिक्स आखिर किस तरफ मोड़ ले रही है. 

    दरअसल पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र में जो घटनाक्रम हुआ है, उससे ये बात साफ हो चुकी है कि फिलहाल एकनाथ शिंदे की कुर्सी बची रहेगी, इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली बुलाने की तैयारी है. केंद्रीय कैबिनेट में जल्द बदलाव हो सकता है, जिसके बाद फडणवीस को दिल्ली बुलाकर कोई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. 

    फडणवीस और शिंदे के बीच टकराव?
    महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस को अगर वाकई में दिल्ली बुला लिया जाता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा एकनाथ शिंदे को होगा. दोनों ही नेताओं के बीच पावर टसल की खबरें भी सामने आई थीं. पिछले महीने यानी जून में एक विज्ञापन को लेकर खूब चर्चा हुई, महाराष्ट्र के अखबारों में छपे इस विज्ञापन में देश के लिए मोदी और महाराष्ट्र के लिए शिंदे का नारा दिया गया था. ये विज्ञापन एकनाथ शिंदे के समर्थकों की तरफ से छपवाया गया था. इस विज्ञापन ने फडणवीस और शिंदे के बीच के शीत युद्ध को हवा देने का काम किया. हालांकि इस पर एकनाथ शिंदे ने साफ किया कि ऐसा कुछ भी नहीं है और दोनों नेताओं के बीच कोई मनमुटाव नहीं है. 

    किसका फायदा किसका नुकसान?
    अब फायदे और नुकसान की बात करें तो अगर वाकई फडणवीस को महाराष्ट्र की सियासत से हटाकर दिल्ली लाया जाता है तो एकनाथ शिंदे के लिए ये काफी फायदेमंद साबित होगा. क्योंकि इसके बाद शिंदे के नेतृत्व में ही आने वाले सभी चुनाव लड़े जाएंगे, जिससे उनकी ताकत कम होने की बजाय और ज्यादा बढ़ सकती है. क्योंकि कांग्रेस को छोड़ दोनों बड़े विपक्षी दल शिवसेना और एनसीपी शिंदे सरकार में शामिल हैं, ऐसे में पावर उसी के हाथ में रहेगी, जो इस गठबंधन का नेतृत्व करेगा. आने वाले दिनों में बीएमसी चुनाव, लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव होने हैं. जो महाराष्ट्र में तमाम सियासी दलों का भविष्य तय कर सकते हैं. 

    वित्त मंत्रालय के बंटवारे पर बवाल
    महाराष्ट्र में फिलहाल विभागों के बंटवारे को लेकर भी बवाल चल रहा है. सरकार में शामिल हुए अजित पवार को वित्त मंत्रालय सौंपे जाने की बात सामने आ रही है. जिस पर बात लगभग फाइनल हो चुकी है. फिलहाल देवेंद्र फडणवीस के पास ही गृह और वित्त की जिम्मेदारी है. ऐसे में अगर उनसे ये मंत्रालय छिन जाता है तो ये उनके लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है. माना जा रहा है कि अंधेरी ईस्ट सीट पर उपचुनाव और इस साल फरवरी में हुए परिषद चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन फडणवीस के खिलाफ जा सकता है. क्योंकि इस चुनाव में देवेंद्र फडणवीस और आरएसएस के दबदबे वाले नागपुर में बीजेपी का सफाया हो गया. इसे फडणवीस और बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना गया. अब फडणवीस को अगर वाकई महाराष्ट्र से बुला लिया जाता है तो इसके पीछे यही कारण हो सकते हैं. 

    यानी कुल मिलाकर अगर शिंदे गुट के विधायक चुनावों तक अयोग्यता से बच जाते हैं तो ये उनके लिए बड़ी राहत होगी. इसके अलावा एकनाथ शिंदे आने वाले चुनावों में मुख्यमंत्री रहते हुए ही अपने दल को और मजबूत कर सकते हैं. क्योंकि पहले ही शिवसेना और उसका चुनाव चिन्ह उन्हें मिल चुका है, अब चुनावों में खुद को साबित करने की बारी है. आने वाले कुछ दिनों में लोकसभा और विधानसभा के लिए सीट शेयरिंग भी काफी मायने रखेगी. शिंदे और अजित पवार गुट में किसका पलड़ा भारी है, सीटों के बंटवारे से ये साफ हो जाएगा. 

  • Delhi Liquor Policy Case: सिसोदिया की संपत्ति पर केजरीवाल की सफाई

    Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ हफ्तों से अध्यादेश पर जारी सियासी लड़ाई फिलहाल कमजोर पड़ती नजर आ रही है. आम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली सरकार का ध्यान इस पर केंद्र के अध्यादेश से हटकर मनीष सिसोदिया के केस (Delhi Liquor Policy Case) पर आ गया है. शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शराब घोटाला मामले में आरोपी मनीष सिसोदिया, अमनदीप ढल, राजेश जोशी, गौतम मल्होत्रा और अन्य की करीब 52 करोड़ 24 लाख की संपत्ति जब्त कर ली. इस अटैचमेंट में 44 करोड़ 29 लाख रुपये कैश और चल संपत्ति है. जिनमें से 11 लाख 49 हजार रुपये मनीष सिसोदिया और 16 करोड़ 45 लाख रुपये बृंदको सेल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के है.

    दिल्ली बीजेपी हुई हमलावर-

    कुछ ही देर में इस खबर ने सियासी रंग लेना शुरू कर दिया. दिल्ली भाजपा ईडी के एक्शन को मुद्दा बनाते हुए आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से जवाब मांगने लगी. दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘ईडी द्वारा दिल्ली उत्पाद शुल्क मामले में आप नेता मनीष सिसौदिया और उनकी पत्नी की 52 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुप क्यों हैं?’ इस तरह के कई ट्वीट के बाद आप संयोजक को सामने आना पड़ा.

    ED ने चलवाईं झूठी खबरें

    सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ईडी द्वारा जब्त की गई मनीष सिसोदिया की समपत्ति पर जवाब देते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, जब आपको मनीष सिसोदिया के खिलाफ कुछ नहीं मिला तो आपने ED के जरिए मनीष को बदनाम करना चालू कर दिया? आपकी ED शाम से टीवी चैनलों पर झूठी खबरें चलवा रही है कि मनीष सिसोदिया की 52 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई.’

    ’80 लाख की संपत्ति हुई जब्त’

    सीएम ने कहा, ‘ED ने असल में जो संपत्ति जब्त की है, उसके कागजात ये रहे. टोटल 80 लाख की संपत्ति जब्त की है, वो भी 2018 के पहले की, जब एक्साइज नीति बनी ही नहीं थी. पूरी संपत्ति एक नंबर की है. Declared. लोगों ने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन ऐसा आएगा जब भारत जैसे महान देश का ऐसा प्रधानमंत्री मिलेगा जो इस तरह खुले आम झूठ बोलकर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को खत्म करने की कोशिश करेगा. असली भ्रष्टाचारी कौन हैं, ये आप भी जानते हैं. हिम्मत है तो उन्हें पकड़ कर दिखाइए.’

    ‘सिसोदिया के पास सिर्फ 81 लाख की संपत्ति’

    वहीं दिल्ली की मंत्री आतिशी ने भी इस मामले में जवाब देते हुए कहा, ‘बीजेपी ने मनीष सिसौदिया को बदनाम करने के लिए झूठ का नया पुलिंदा तैयार किया है. ईडी के अपने दस्तावेजों के मुताबिक, मनीष सिसौदिया के पास केवल 81 लाख रुपये की संपत्ति है, जिसमें बैंक खाते में 11 लाख रुपये, 5 लाख रुपये का एक फ्लैट और एक 65 लाख रुपये का फ्लैट शामिल है.’

  • मिशन चंद्रयान-3 : 600 करोड़ खर्च करके चंद्रमा पर क्या करेगा भारत

    आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर लॉन्च होने वाला चंद्रयान -3 भारत का तीसरा चंद्र मिशन है. यह 2019 के चंद्रयान -2 मिशन का हिस्सा है. 2019 में लैंडर और रोवर चंद्रमा पर सॉफ्ट-लैंडिंग नहीं कर पाया था जिस वजह से ये मिशन फेल हो गया था.  

    इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक इसरो के अधिकारियों का कहना है कि चंद्रयान -3 अपने लॉन्च के लगभग एक महीने बाद चंद्र कक्षा में पहुंचेगा. इसके लैंडर, विक्रम और रोवर के 23 अगस्त को चंद्रमा पर उतरने की संभावना है. खास बात ये है कि मिशन चंद्रयान-3  की लैंडिंग साइट लगभग चंद्रयान -2 के समान (70 डिग्री ) है. अगर सब कुछ ठीक रहा तो चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला मिशन बन जाएगा.

    चंद्रमा पर उतरने वाले पिछले सभी अंतरिक्ष यान भूमध्यरेखीय क्षेत्र में उतरे हैं. भूमध्य रेखा से कोई भी अंतरिक्ष यान सबसे दूर गया यान सर्वेयर 7 था. इसने 10 जनवरी 1968 को चंद्रमा पर लैंडिंग की थी. यह अंतरिक्ष यान 40 डिग्री दक्षिणी अक्षांश के पास उतरा था.  चंद्रमा पर अब तक की सभी लैंडिंग भूमध्यरेखीय क्षेत्र में हुई हैं. यहां तक कि चीन का चांग’ई 4, जो चंद्रमा के दूर उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना था. चंगा’ई 4, 45 डिग्री अक्षांश के पास उतरा था. 

  • सावधान बारिश बन रही विपदा

    उत्तर प्रदेश में बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की वजह से अब तक 34 लोगों की मौत चुकी  है. उत्तर भारत के कई हिस्सों में रविवार को मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के चलते अलग-अलग घटनाओं में 50 से ज्यादा मौतों की खबर है. राष्ट्रीय राजधानी में 1982 के बाद से जुलाई में एक दिन में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई है.  2013 की उत्तराखंड आपदा के बाद एक भी साल ऐसा नहीं रहा है जब कम से कम एक बार खतरनाक बारिश नहीं हुई है. हर साल बड़े पैमाने पर बारिश से बाढ़, विनाश और ज्यादातर मामलों में भारी नुकसान तो होता ही है, लोगों की जान भी जाती है.

    इस साल भी पिछले दो दिनों में कश्मीर, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, मुंबई, गुड़गांव, केरल, असम, बिहार और कई अन्य राज्यों में भारी बारिश की घटनाएं हुई हैं. कई जगहों पर बारिश और बाढ़ का कहर अब भी जारी है.  ये ठीक उसी तरह की घटनाएं हैं जिनकी चेतावनी वैज्ञानिक कई सालों से देते रहे हैं. वैज्ञानिक पिछले कई साल से इस बात को लेकर सावधान करते रहे हैं कि आने वाले समय में मौसम में अचानक बदलाव (अचानक बादल या अचानक धूप) का सामना करना पड़ेगा. उत्तरी भारत में फिलहाल हो रही भारी बारिश इसी प्रवृत्ति का एक हिस्सा है. 20 से 25 सालों में भले ही यह अब तक की सबसे भारी बारिश है लेकिन लगातार और मुसलाधार बारिश पहली बार नहीं हो रही है. पिछले कई सालों में देश के कई राज्यों ने खतरनाक और लगातार बारिश का सामना किया है.  

    अलग-अलग राज्य झेल चुके हैं भारी बारिश की मार

    बेंगलुरु में हर साल बाढ़ इसलिए आती है क्योंकि यहां भारी बारिश के साथ पानी के प्रवाह को बहाने के लिए कोई भी इंतजाम नहीं है. 

    2014 में श्रीनगर में खतरनाक बाढ़ आई. उस साल सितंबर में केवल चार दिनों में इतनी खतरनाक बारिश हुई कि झेलम नदी में बाढ़ आ गयी.

    केरल में हर साल खतरनाक बारिश होती है. 2018 में इस बारिश ने बड़े पैमान पर खतरा पैदा कर दिया था. उत्तराखंड आपदा भी इस तरह के खतरे का सबसे डरावना उदाहरण है. इसके बाद से लगातार देश हर साल भारी बारिश की मार झेल रहा है, हालांकि वैज्ञनािक ये चेतावनी दे चुके हैं कि आने वाले सालों में गर्मी के साथ भारी बारिश की घटनाएं बढ़ेंगी. विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की घटनाओं की संख्या में वृद्धि सीधे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई है. 

    राज्य मौतें
    उत्तर प्रदेश 34
    हिमाचल प्रदेश 7
    उत्तराखंड 6
    जम्मू-कश्मीर 4
    पंजाब  3
    राजस्थान 1
    दिल्ली 1
    कुल 56

    मालूम हो कि 10 जुलाई को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मु और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब. हरियाणा, राजस्थान में भारी बारिश होने की आशंका है. वहीं 11 जुलाई को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश होने की आशंका है. 

    खतरनाक बारिश की मार सिर्फ भारत ही नहीं दूसरे देश भी झेल रहे हैं. पश्चिम जापान में मूसलाधार बारिश की वजह से भूस्खलन हुआ. जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन लोग लापता हैं. बता दें कि वहां अधिकारियों ने ज्यादा भूस्खलन और बाढ़ के खतरे को देखते हुए हजारों लोगों से अपने घरों को छोड़ने को कहा था.

    दूसरी तरफ पाकिस्तान में भी अगले 24 से 48 घंटे में गरज के साथ भारी बारिश हो सकती है. सवाल ये है कि आखिर इस बारिश और जलवायु परिवर्तन का क्या कनेक्शन है. क्या जलवायु परिवर्तन के अलावा इंसान भी इस बारिश के लिए जिम्मेदार हैं. 

    अप्रैल में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आगामी मानसून के लिए दो महत्वपूर्ण पूर्वानुमान लगाए. एक अल नीनो की स्थिति – जिसमें समुद्र की सतह के पानी का असामान्य गर्म होना कम वर्षा का कारण बन सकता था. भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक मानसून के दौरान अल-नीनो के विकसित होने की संभावना थी. दूसरा इन स्थितियों के बावजूद मानसून “सामान्य” रहेगा, जिसमें दक्षिण प्रायद्वीप में ज्यादा बारिश होने की उम्मीद लगाई गई. वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य या सामान्य से कम बारिश की उम्मीद जताई गई. 

    हालांकि जून के अंत तक जमीन पर स्थिति इन पूर्वानुमानों से बहुत अलग दिखी. बारिश का भौगोलिक वितरण पूर्वानुमान के विपरीत था. उत्तर-पश्चिम भारत में जून में 42% ज्यादा वर्षा देखी गई, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में सामान्य से 45% कम वर्षा हुई, साथ ही मध्य भारत में 6% की कमी और पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में 18% की कमी दर्ज की गई. अभी उत्तर भारत में  उत्तर भारत में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है. 

    क्या बिपरजॉय तूफान इस बारिश के लिए जिम्मेदार

    जून में जिस तरह की गर्मी थी उसे देखकर नहीं लग रहा था कि इतनी तेज बारिश होगी. आईएमडी के मुताबिक जून में ही भारी बारिश होने के अनुमान था लेकिन अरब सागर में चक्रवात बिपारजॉय के बनने के कारण लंबी अवधि का पूर्वानुमान गड़बड़ा गया. जून की शुरुआत में अरब सागर में चक्रवात के तेज होने के साथ ही नमी को अपने साथ ले गया जो मानसून को मजबूत कर सकता था. नतीजतन 11 जून को मानसून नहीं आ सका. बता दें कि मानसून के  सामान्य आगमन की तारीख 11 जून है. 

    19 जून को चक्रवात खत्म हो गया, लेकिन इसके अवशेष उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बचे थे. इस वजह से बंगाल की खाड़ी में मानसूनी हवाएं आईं. जिससे दिल्ली में खूब बारिश हुई. 

    वैज्ञानिक इसकी वजह जलवायु परिवर्तन को बता रहे हैं. द स्कॉर्ल में छपी खबर के मुताबिक पृथ्वी वैज्ञानिक और मैरीलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रघु मुर्तुगुडे ने कहा, “अरब सागर जनवरी से गर्म हो रहा था और मौजूदा हो रही बारिश अब तक की सबसे लंबी अवधी तक होने वाली बारिश बन गई है.  जलवायु परिवर्तन के कारण बिपारजॉय जैसी मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं. ये मानसून को प्रभावित कर रहे हैं. 

    दो हवाओं के टकराने से हो रही बारिश

    द स्कॉर्ल में छपी खबर के मुताबिक इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के क्लिनिकल एसोसिएट प्रोफेसर (रिसर्च) और रिसर्च डायरेक्टर अंजल प्रकाश ने कहा, “जलवायु परिवर्तन ने पारंपरिक मानसून पैटर्न को खत्म कर दिया गया है, जिससे तापमान, हवा की नमी और हवा के पैटर्न में बदलाव आया है. उत्तर भारत में हो रही भारी बारिश के बीच मची तबाही का जिम्मेदार हवाएं हैं. पहला मानसूनी हवाओं और दूसरा पश्चिमी विक्षोभ में होने वाला बदलाव’.

    केदारनाथ में साल 2013 में आई आपदा का कारण भी इसी को बताया गया. एक्सपर्ट्स ने भी इसे लेकर चेतावनी दी है. जिसमें कहा गया है कि लगातार क्लाइमेट चेंज हो रहा है और धरती गर्म हो रही है. जिससे दुनियाभर में तय सीमा से अधिक बारिश और बाढ़ की हालत बन सकती है. 

    द स्कॉर्ल की खबर के मुताबिक इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज रिपोर्ट के लेखक प्रकाश ने कहा कि हवाएं के परिवर्तनों ने पारंपरिक मानसून पैटर्न को खत्म कर दिया. कुछ महीनों में मानसून के पैटर्न का सटीक पूर्वानुमान लगाना चुनौतीपूर्ण बना दिया है. इससे इन आपदाओं के लिए पहले से तैयार रहना और खतरे को कम करना और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. 

    विशेषज्ञ उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में पिछले दो दिनों से आई विनाशकारी बाढ़ को दो हवाओं के ‘खतरनाक’ मिलन से जोड़कर देख रहे हैं. उनका मानना है कि मानसूनी हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ के मिलन से फिर वैसे हालात बन रहे हैं जैसे 2013 में उत्तराखंड आई बाढ़ के समय बने थे.

    जानकारों के मुताबिक हवाएं के इस तरह के मिलन से गर्म होती दुनिया में बहुत ज्यादा बारिश और बाढ़ आने की संभावना बढ़ जाती है. इन्हीं हवाओं के मिलन से उत्तर भारत खासकर हिमाचल प्रदेश के मनाली में खतरे के निशान से ऊपर बहने वाली नदियों में भंयकर तबाही आई हुई है.

    पिछले दो दिनों से उत्तर भारत में दो तरह की मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं.  आउटलुक में छपी खबर के मुताबिक आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र  ने कहा ‘पश्चिमी विक्षोभ की वजह से राजस्थान से उत्तरी अरब सागर तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई थी. वहीं, मानसून की मजबूत स्थिति के कारण बंगाल की खाड़ी से हवाएं भी उत्तर की ओर पहुंच रही थीं. इन दोनों प्रणालियों का संगम हुआ, और शनिवार को जम्मू-कश्मीर और रविवार को हिमाचल प्रदेश के आसपास इसका असर देखने को मिला. इन क्षेत्रों को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से नमी मिली, जिसके परिणामस्वरूप बहुत भारी बारिश हुई’. 

    उन्होंने कहा कि दो मौसम प्रणालियों के बीच इस तरह का मिलन असामान्य नहीं है. ये मिलन खासतौर से उत्तर-पश्चिम भारत की पहाड़ियों में चरम मौसम की घटनाओं से जुड़ी हुई है.  2013 के मध्य जून में एक पश्चिमी विक्षोभ ने बंगाल की खाड़ी से आने वाले कम दबाव की वजह से उत्तर की ओर नमी सोख ली. इसके परिणामस्वरूप न केवल मानसून रिकॉर्ड समय (16 जून तक) में पूरे देश में पहुंच गया, बल्कि केदारनाथ में बादल फटने जैसी घटना हुई. 

    आपस में क्यों मिलती हैं ये हवाएं 

    ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के कीरन एमआर हंट ने हाल ही में भारत में दो हवाओं के खतरनाक मिलन को लेकर एक रिसर्च लिखा था, उनके मुताबिक इन संगमों की वजह लगातार बढ़ती गर्मी है, उन्होंने ये भी लिखा था कि आने वाले समय में गर्मी की मार झेल रहे देशों में हवाओं का ये मिलन देखने को मिल सकता है.  इससे अचानक भारी बारिश का खतरा भी पैदा होगा. क्योंकि ये हवाएं पहाड़ियों से टकराती हैं और बहुत तेजी से ऊपर उठती हैं जिससे भारी बारिश होती है’.

    तो क्या इसे रोक नहीं सकते

    हंट ने रिसर्च  में लिखा था कि ‘ यह कहना मुश्किल है कि (इस तरह का मिलन) आवृत्ति ऊपर जाएगी या नीचे जाएगी , क्योंकि इसकी कोई स्पष्ट प्रवृत्ति नहीं है.  हालांकि, हम काफी हद तक निश्चित हो सकते हैं कि ये जब ये मिलन होता है तो अत्यधिक वर्षा और  भयानक बाढ़ जरूर आते हैं.

    भारी बारिश के लिए इंसान कितना जिम्मेदार 

    वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव जनित ग्लोबल वार्मिंग इसके लिए जिम्मेदार है. ऐसा इसलिए है क्योंकि जलवायु परिवर्तन जल चक्र की वाष्पीकरण प्रक्रिया को सुपरचार्ज कर रहा है. इससे बारिश का पैटर्न गड़बड़ा रहा है. 

    वैज्ञानिक के मुताबिक जैसे ही हवा गर्म होती है, जल वाष्प ज्यादा होता है. यानी मिट्टी, पौधों, महासागरों और जलमार्गों से अधिक पानी वाष्पित हो जाता है – यह वाष्प बन जाता है. अतिरिक्त जल वाष्प का मतलब है कि भारी बारिश के लिए पानी तैयार हो रहा है.  

  • West Bengal Panchayat Election 2023: हिंसा, हल्ला और हत्या के बीच वोटिंग जारी

    West Bengal Panchayat Election 2023: पश्चिम बंगाल में पंचायत का चुनाव हो रहा है. कई जगहों से हिंसा की खबरें आ रही हैं. अलग-अलग जगहों पर दो गुट में हुए विवाद के कारण अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है. यह चुनाव एक चरण में हो रहा है. 2 लाख से अधिक प्रत्याशी मैदान में हैं जो 73887 सीटों के लिए फाइट कर रहे हैं. प्रदेश के 5.67 करोड़ वोटर्स इन प्रत्याशियों के तकदीर का फैसला करेंगे. 

    चुनावी झड़प को लेकर बीजेपी नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि इलेक्शन कमीशन और राज्य सरकार ने मिलकर इस चुनाव को निष्पक्ष नहीं होने देने का फैसला कर लिया है. केंद्र सरकार ने जो सेंट्रल फोर्स भेजा, उसे काम पर नहीं लगाया गया है. TMC के कार्यकर्ता दूसरे दलों के नेता और सपोर्टर्स पर हमला कर रहे हैं. इस चुनाव के कोई मतलब नहीं समझ में आ रहा है.

    नॉर्थ 24 परगना जिला के  Pirgachha में स्वतंत्र उम्मीदवार के बूथ एजेंट अब्दुल्ला की हत्या कर दी गई है. गांव के लोग इस घटना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका आरोप है कि TMC प्रत्याशी मुन्ना बीबी का पति इस हत्या के पीछे है और वे उसकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. इसी तरह कूच बिहार के फलिमारी  ग्राम पंचायत पर बीजेपी प्रत्याशी के पोलिंग एजेंट माधव विश्वास की भी हत्या कर दी गई है. प्रत्याशी भी बुरी तरह घायल हो गया है.

    बता दें कि इस पंचायती चुनाव की घोषणा के बाद से ही TMC और BJP कार्यकर्ताओं के बीच भयंकर झड़प है और अब तक कुल 19 लोगों की जान जा चुकी है. 2024 में लोकसभा का चुनाव होने वाला है. उससे पहले बंगाल में बीजेपी अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है. यह चुनाव एक लिटमस पेपर टेस्ट की तरह है और दोनों पार्टियां अपना पूरी जोर लगा दी है.

  • Delhi Ordinance: सुलझेगा AAP और कांग्रेस के बीच अध्यादेश वाला पेंच?

    Congress On Delhi Ordinance 2023: दिल्ली में लाए गए केंद्र के अध्यादेश पर आम आदमी पार्टी (AAP) को कांग्रेस (Congress) का साथ मिल सकता है. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस 16 जुलाई को केंद्र के अध्यादेश का विरोध करने का ऐलान कर सकती है. कांग्रेस ने 16 जुलाई को संसदीय रणनीति समूह की बैठक बुलाई है. जिसके बाद पार्टी अपना रुख साफ कर सकती है.

    सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से अध्यादेश का विरोध करने का ऐलान करने के बाद अरविंद केजरीवाल बेंगलुरु में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में शामिल हो सकते हैं. बीते मई के महीने में केंद्र सरकार ने दिल्ली में ग्रुप-ए अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण गठित करने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था. 

    आप कर रही केंद्र के अध्यादेश का विरोध

    केंद्र के इस अध्यादेश से कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पुलिस, कानून-व्यवस्था और भूमि को छोड़कर अन्य सभी सेवाओं का नियंत्रण दिल्ली सरकार को सौंप दिया था. आम आदमी पार्टी इस अध्यादेश का पुरजोर विरोध कर रही है. केजरीवाल सरकार का आरोप है कि ये अध्यादेश असंवैधानिक है और केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी नहीं मान रही है. 

    विपक्षी नेताओं से मिले अरविंद केजरीवाल

    आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल इस अध्यादेश के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए विपक्ष के कई बड़े नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं. उन्होंने बीते दिनों बिहार के सीएम नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, एनसीपी चीफ शरद पवार, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन समेत कई नेताओं से मुलाकात की है. लगभग सभी नेताओं ने उनका समर्थन करने की बात कही. 

    कांग्रेस से भी मांगा था समर्थन

    अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर समर्थन के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता राहुल गांधी से भी मिलने का समय मांगा था. हालांकि ये मुलाकात नहीं हो पाई. 23 जून को पटना में हुई विपक्षी दलों की बैठक में भी सीएम केजरीवाल ने ये मुद्दा उठाया था और कांग्रेस से इसपर रुख साफ करने को कहा था.