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  • Delhi University 100 Years: 2047 तक विकसित भारत बनाना हमारा टारगेट

    DU Shatabdi Samaroh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह के समापन सत्र को संबोधित कर रहे हैं. पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, जब मुझे निमंत्रण मिला था तो मैने तय कर लिया था की मुझे आना ही है. मुझे खुशी है की मुझे इस माहौल में आने का मौका मिला है, आज मैं मेट्रो से युवा दोस्तों के साथ बातचीत करते हुए आया हूं. 

    प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 100 साल पूरे होने पर कहा, कोई भी देश हो उसकी यूनिवर्सिटीज, शिक्षण संस्थान, उसकी उपलब्धि के सच्चे प्रतीक हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी सिर्फ एक यूनिवर्सिटी नहीं बल्कि एक मूमेंट है. इस यूनिवर्सिटी ने हर मूमेंट को जिया है, इस यूनिवर्सिटी ने हर मूमेंट में जान भर दी है. पीएम मोदी ने कहा, बीते दिनों जब मैं अमेरिका के दौरे पर गया तो आप सबको पता चला कि दुनिया में हमारे देश का सम्मान तेजी से बढ़ा है. 

  • Maharashtra Political Crisis: एकनाथ शिंदे के दिल्ली दौरे पर लिखी गई थी महाराष्ट्र की स्क्रिप्ट?

    Maharashtra Political Crisis: कहते हैं कि सियासत मौके का खेल है और जो मौकों को भुना लेता है, वही सबसे बड़ा खिलाड़ी होता है. आज महाराष्ट्र की सियासत में अजित पवार बड़े खिलाड़ी साबित हुए. लंबे समय से चली आ रही अटकलों पर उन्होंने पूर्ण विराम लगा दिया. बीजेपी के साथ उनका जो राजनीतिक रिश्ता बना है, उसके लिए उन्होंने पारिवारिक रिश्ते की बलि चढ़ा दी, लेकिन ये सब कुछ अचानक नहीं हुआ, ना तो अजित पवार के दिल में बीजेपी के लिए अचानक से कोई प्यार उमड़ा और ना ही बीजेपी ने एक रात में इतना बड़ा गेम खेल दिया…बल्कि इसके पीछे तो शुद्ध राजनीति है, जिसकी नींव एक महीने पहले से पड़ने लगी थी. हम आपको बताएंगे कि कैसे मुंबई से दिल्ली और दिल्ली से अहमदाबाद तक इस सियासी एसिपोड की स्क्रिप्ट लिखी गई.

    एक झटके में डिप्टी सीएम बन गए पवार-

    महाराष्ट्र में रविवार की सुबह बिल्कुल सामान्य थी, छुट्टी का दिन था तो सबकी अपनी-अपनी प्लानिंग थी. लेकिन शाम होते-होते महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत कुछ बदल गया. जो अजित पवार कल तक जनता की नजरों में नेता विपक्ष की भूमिका में थे वो अब डिप्टी सीएम हैं और सबसे बड़ी बात ये कि शरद पवार के सियासी भविष्य के सामने उन्होंने नई लकीर खींच दी है. 

    ये तस्वीर महाराष्ट्र की सियासत में पिछले कुछ सालों का सबसे बड़ा विस्फोट है, जिसने ना सिर्फ बीजेपी का जोश हाई कर दिया है, बल्कि शरद पवार के सियासी भविष्य को समेटकर रख दिया है. अजित पवार के गुट का दावा है कि उनके साथ NCP के 40 विधायक हैं, लेकिन ये 40 विधायक अजित पवार के छाते के नीचे कैसे आए. इन विधायकों ने शरद पवार के खिलाफ मोर्चा क्यों खोला. इसकी एक लंबी कहानी है, क्योंकि ये घटना अचानक से नहीं हुई है. बल्कि इसके पीछे धारदार रणनीति और मंझी हुई सियासत है.

    दिल्ली में लिखी गई स्क्रिप्ट-

    महाराष्ट्र में हुए महाबदलाव का एक सिरा दिल्ली की सियासी जमीन से जुड़ता है. क्योंकि 29 जून को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दिल्ली दौरे पर थे. कहने को तो ये साधारण दौरा था, लेकिन यहीं पर गृहमंत्री अमित शाह से हुई शिंदे की मुलाकात ने 2 जुलाई की पूरी स्क्रिप्ट लिख दी. दिल्ली में 29 जून की रात को एक ऐसी पिक्चर की तैयारी चल रही थी, जो महाराष्ट्र में तूफान लाने वाली थी. 

    पहले खबर उठी कि महाराष्ट्र में कैबिनेट विस्तार पर मंथन चल रहा है, लेकिन इस मुलाकात की कहानी कुछ और ही थी. इस मुलाकात में डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी ये नहीं सोचा था कि बीजेपी महाराष्ट्र में ऑपरेशन पवार पर काम कर रही है. .ये ऑपरेशन अब तक के सबसे सीक्रेट ऑपरेशन्स में से एक था. ये सियासत में बदलाव की ऐसी आंधी थी, जो एक झटके में बहुत कुछ उड़ा ले गई. 

    काफी सीक्रेट रखा गया ‘ऑपरेशन’-

    दिल्ली में भले ही 29 जून को सब कुछ तय हो गया था, लेकिन महाराष्ट्र में इस बदलाव की खबर चुनिंदा लोगों को ही थी. बीजेपी और अजित पवार की प्लानिंग इतनी सीक्रेट थी कि किसी को भी कानों-कान इसकी भनक तक नहीं लगी. दिल्ली और मुंबई में रातों-रात क्या सियासी खिचड़ी पक रही थी, इसका अंदाजा शरद पवार भी नहीं लगा सके और उनके सामने अब ऐसी परिस्थिति पैदा हो गई, जिससे उभरने में उन्हें लंबा वक्त लग सकता है.

    आशीष सेलार की अहम भूमिका-

    इस ऑपरेशन में बीजेपी हाईकमान ने चुनिंदा नेताओं को ही शामिल किया था. जिसमें से एक बड़ा नाम- मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष आशीष शेलार भी हैं. आशीष सेलार ही वो नेता हैं जो लगातार दिल्ली और मुंबई के बीच संवाद सेतु बने थे. दिल्ली में बीजेपी के ताकतवर नेताओं के संपर्क में थे और बीजेपी हाईकमान से अजित पवार की सीधी बात करवा रहे थे. ये मुद्दा दिल्ली से मुंबई और मुंबई से दिल्ली शिफ्ट होता रहा, लेकिन बात लीक होने के डर से सिर्फ खास नेताओं को ही इसके बारे में जानकारी दी गई थी.

    लगातार चलती रही सीक्रेट मीटिंग-

    सिर्फ दिल्ली और मुंबई ही नहीं…अजित पवार को सरकार में शामिल कराने के पीछे अहमदाबाद में हुई एक मीटिंग भी काफी अहम है. ये मीटिंग 20 जून को हुई थी, यानी करीब दो हफ्ते पहले… सूत्र बताते हैं कि 20 जून को ही अजित पवार की अहमदाबाद में बीजेपी के एक बड़े नेता से मुलाकात हुई थी और उसी दिन तय हो गया था कि जुलाई के शुरुआती दिनों में ही महाराष्ट्र में बड़ा सियासी विस्फोट करना है. ऐसा नहीं है कि अजित पवार एक झटके में शिंदे सरकार में शामिल हो गए, बल्कि इसके लिए उन्हें भी काफी मेहनत करनी पड़ी. एक-एक विधायक को भरोसे में लेना पड़ा, मंत्रीपद का बंटवारा तय करना पड़ा और तब जाकर महाराष्ट्र में बदलाव का मेगा एपिसोड पूरा हुआ.

  • पीएम छत्तीसगढ़ से शुरू करेंगे चुनाव की तैयारी

    देश: चार राज्यों में होने वाले चुनाव के संदर्भ में बीजेपी ने अपनी कमर कस ली है। पीएम मोदी आज छत्तीसगढ़ से आपने दौरे की शुरुआत करेंगे। पीएम  छत्तीसगढ़  के साइंस कॉलेज में  विजय संकल्प नाम की एक जनसभा को सम्बोधित करेंगे। 

    सूत्रों के मुताबिक पीएम 7600 की परियोजना का शिलान्यास करेंगे। पीएम मोदी की कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ में यह पहली यात्रा है लोग उनकी यात्रा का सम्बन्ध राजनीतिक हित से जोड़ रहे हैं क्योंकि साल के अंत में छत्तीसगढ़ में चुनाव होने को है। 

    बताते चले छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की योजनाएं जनता के मन को खूब भा रही है। भूपेश बघेल हर संभव प्रयास कर रहे हैं जनता के मन में अपनी उम्दा छवि स्थापित कर पुनः सत्ता में वापसी के लिए। वही बीजेपी पीएम मोदी के बलबूते कांग्रेस की सरकार गिराना चाहती है। 

  • कौन है किसके साथ? राकांपा में आज होगा साफ

    राकांपा में फूट के बाद शरद पवार एवं अजित पवार, दोनों गुटों ने अपने-अपने खेमे की बैठकें पांच जुलाई को बुलाई हैं। इन बैठकों में नेताओं और विधायकों की उपस्थिति देखकर ही कहा जा सकेगा कि किस गुट के साथ कितने विधायक हैं। इसके बाद ही महाराष्ट्र विधानसभा के नए नेता प्रतिपक्ष का फैसला भी हो सकेगा। वहीं, अजित गुट ने भी सभी वर्तमान व पूर्व विधायकों, सांसदों, पदाधिकारियों, कार्यसमिति सदस्यों और अन्य को बैठक में उपस्थित रहने के लिए नोटिस जारी किया है। बैठक के लिए शरद पवार गुट की ओर से मुख्य सचेतक जितेंद्र अह्वाड ने सभी विधायकों को एक लाइन का व्हिप जारी किया है और उनसे बैठक में उपस्थित रहने के लिए कहा है।

    अजित के पास कितने विधायकों का समर्थन?

    अजित पवार ने रविवार को ही उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली थी। उनके साथ राकांपा के आठ मंत्री भी बन गए। वह दावा कर रहे हैं कि पार्टी के बहुसंख्य विधायक उनके साथ हैं, लेकिन इन विधायकों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।

    विधानसभाध्यक्ष राहुल नर्वेकर को भी अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अजित पवार के साथ कितने विधायक सत्तापक्ष में शामिल हुए हैं। इसका फैसला बुधवार को होने की संभावना है।

    राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने पांच जुलाई को दिन में एक बजे अपनी पार्टी के नेताओं की बैठक नरीमन प्वाइंट स्थित यशवंतराव चह्वाण प्रतिष्ठान में बुलाई है, जबकि अजित पवार ने 11 बजे बांद्रा के भुजबल नालेज सिटी में अपने विधायकों एवं संगठन के अन्य नेताओं की बैठक बुलाई है।

    क्या छिन जाएगी सदस्यता?

    यानी पवार गुट की बैठक शुरू होने से पहले ही विधानसभा में अजित पवार की स्थिति स्पष्ट हो चुकी होगी। यदि अजित पवार पार्टी के दो तिहाई विधायकों (यानी कम से कम 36) की संख्या नहीं जुटा सके, तो उनके सहित उनके समर्थक विधायकों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है और उनकी सदस्यता भी जा सकती है।

    यदि अजित पवार इतने विधायकों का समर्थन जुटाने में सफल रहे तो पवार गुट के हाथ से राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी जा सकता है, क्योंकि 45 सदस्यों वाली कांग्रेस ने मंगलवार को अपने विधायक दल की बैठक कर इस पद पर दावा ठोंकने का मन बना लिया है।

    क्या कुछ बोले प्रफुल्ल पटेल?

    बता दें कि अजित पवार के साथ गए राकांपा के वरिष्ठ नेता एवं कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने एक चैनल से बातचीत में दावा किया है कि पिछले वर्ष महाविकास आघाड़ी सरकार गिरने के बाद ही पार्टी के 53 में से 51 विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष शरद पवार पर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने की बात करने का दबाव बनाया था।

    उन्होंने कहा कि उस समय इस उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया था, जिस पर अनिल देशमुख और नवाब मलिक को छोड़कर पार्टी के अन्य सभी विधायकों के हस्ताक्षर थे, लेकिन तब शरद पवार ने यह बात नहीं मानी थी।

  • UCC Issue: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बोला UCC का हो जमकर विरोध

    UCC Issue: यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर अलग-अलग जगहों पर विरोध हो रहा है। विपक्ष लगातार इसके विरोध में अपनी आवाज बुलंद किये हुए है। वही अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से एक मीटिंग आयोजित हुई और कहा गया की यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) का जमकर विरोध किया जाना चाहिए। 

    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ये बैठक करीब 3 घंटे तक चली. एआईएमपीएलबी की ओर से कहा गया, “विरोध करने के लिए बस एक लिंक पर क्लिक करना होगा, जहां पर विरोध की लाइनें पहले से ही मौजूद हैं. बस अपनी मेल आईडी से उसे लॉ कमीशन को भेजना होगा.” 

    बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि यूसीसी के मसले पर चर्चा हुई है और जो बातें हुई उसमें आपत्तियों के तमाम बिंदुओं पर चर्चा की गई. इसे लेकर एक लिंक जारी किया गया और आम लोगों से इसका विरोध करने की अपील की गई है. 

    उन्होंने कहा, “यह बात हम पहले ही कर चुके हैं कि यूसीसी के प्रावधान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और शरीयत के कानून के तहत नहीं हैं. ऐसे में इसका विरोध जायज है. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शरीयत पर आधारित है इसलिए कोई भी मुसलमान उसमें किसी भी तरीके के बदलाव को मंजूर नहीं करेगा. 

    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से जारी चिट्ठी में कहा गया कि हमारे देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने का माहौल बनाया जा रहा है, इसके जरिए अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों की स्वतंत्रता पर चोट पहुंचाई जा रही है. 

  • NCP Political Crisis: बीजेपी महाराष्ट्र को तोडना चाहती

    NCP Political Crisis: महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने उन्होंने कहा – बीजेपी महाराष्ट्र को तोडना चाहती है। पहले बीजेपी ने शिवसेना में फुट डाली फिर एनसीपी को तोड़ दिया उनका उद्देश्य तोडना है। उन्हें कोई नहीं रोक रहा है। 

    बता दें अजित पवार के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम बनने के बाद एनसीपी में दोफाड़ हो गए हैं. इसके बाद से ही चाचा शरद पवार और भतीजे अजित के बीच एनसीपी के नेतृत्व पर कब्जा बनाए रखने की सियासी लड़ाई जारी है. 

    अजित ने खुद को एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करवा लिया है और चुनाव आयोग में पार्टी को लेकर अपना दावा ठोंक दिया है. वहीं, शरद पवार भी चुनाव आयोग की शरण में पहुंच चुके हैं. ये तमाम चीजें ठीक वैसे ही घटित हो रही हैं, जैसे शिवसेना के साथ हुई थीं. 

    महाराष्ट्र सरकार में अजित पवार की एंट्री के बाद दावा किया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे गुट के कई विधायक नाराज हैं. शिवसेना यूबीटी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत भी दावा कर चुके हैं कि एनसीपी में हुई बगावत और अजित की राज्य सरकार में एंट्री से शिंदे गुट के 17 से 18 विधायक नाराज हैं और उनके संपर्क में हैं. इसके साथ ही संजय राउत ने महाराष्ट्र को नया मुख्यमंत्री मिलने का दावा किया.

    एकनाथ शिंदे गुट के नेता और उद्योग मंत्री उदय सामंत ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि सीएम एकनाथ शिंदे को लेकर लगाई जा रही तमाम अटकलें गलत हैं. उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ है (उसके लिए) पहल मुख्यमंत्री शिंदे ने ही की थी. वहीं, शिंदे गुट के कई विधायकों ने बयान जारी करते हुए कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
     

  • World’s Richest Beggar : दुनिया का सबसे अमीर भिखारी भरत जैन, 7.5 करोड़ संपत्ति का मालिक

    दुनिया के सबसे अमीर व्‍यक्ति के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा, लेकिन क्‍या एक भिखारी के बारे में कभी सुना या देखा है, जिसके पास करोड़ों की दौलत हो? आज हम एक ऐसे ही भिखारी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो दुनिया का सबसे अमीर भिखारी है. दुनिया के सबसे अमीर भिखारी भरत जैन (Bharat Jain) भारत के मुंबई शहर में रहते है.

    जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह मुंबई की सड़कों पर भीख मांगते हुए पाए जाते हैं. इनकी शादी हो चुकी है और उनके साथ उनकी पत्‍नी, दो बेटे, उनका भाई और उनके पिता रहते हैं. उनके बच्‍चे कॉन्‍वेंट स्‍कूल में बढ़ते हैं.

    भरत जैन के पास 7.5 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति हैं. भीख मांगने से ही उनकी मंथली कमाई 60 हजार रुपये से लेकर 75 हजार रुपये तक होती है. भरत जैन के पास मुंबई में 1.2 करोड़ रुपये का दो बेडरूम वाला फ्लैट है. ठाणे में दो दुकानें भी हैं, जहां से उन्‍हें हर महीने 30,000 रुपये किराया मिलता है. इतनी संपत्ति होने के बावजूद भरत जैन  संड़कों पर भीख मांगते हैं.

  • कैसे अर्थव्यवस्था के मामले में चीन को पछाड़ेगा भारत

    भारत का पड़ोसी देश चीन हर मामले में स्वयं को ताकतवर दिखाता है। भारत लगातार अपने बल से चीन को टक्कर देता है। जनसंख्या के मामले में भारत चीन से आगे निकल चुका है लेकिन अर्थव्यवस्था के मामले में भारत चीन से अभी काफी पीछे है। अभी हाल ही में खबर आई की भारत जल्द ही अर्थव्यवस्था के मामले में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश जर्मनी से आगे निकल जाएगा। लेकिन अब एक सवाल यह भी है कि क्या भारत अर्थव्यस्था के मामले में चीन से आगे निकल पाएगा और अगर भारत चीन को अर्थव्यवस्था के मामले में टक्कर देना चाहता है तो उसे क्या करना चाहिए। 

    एक समय ऐसा भी था जब भारत और उसके पड़ोसी देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग एक जैसा ही था. साल 1990 में चीनी अर्थव्यवस्था भारत की तुलना में बहुत ज्यादा बड़ी नहीं थी, लेकिन चीन ने अपने विकास की गति ऐसी बढ़ाई की आज इस देश की जीडीपी भारत से 5 गुना ज्यादा है और चीन की प्रगति, निवेश और आर्थिक स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने चीन से उसके विकासशील देश का दर्जा हटा दिया है.

    मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस की एक रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार हाल ही में 3.5 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को उम्मीद है कि इस साल यह 3.7 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो जाएगा.  आसान भाषा में समझें तो फिलहाल भारत की अर्थव्यवस्था साल 2007  के चीन की अर्थव्यवस्था जैसी ही है. हालांकि आंकड़ों के हिसाब से उस वक्त भी चीनी अर्थव्यवस्था तुलनात्मक रूप से भारत से बड़ी ही थी.  साल 2007 में चीन की प्रति व्यक्ति आय 2,694 डॉलर थी, जबकि आईएमएफ को उम्मीद है कि भारत की प्रति व्यक्ति आय 2022 में 2,379 डॉलर से बढ़कर 2023 में 2,601 डॉलर हो जाएगी.

    भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार चीन से धीमी क्यों –

    आयात- निर्यात

    दरअसल भारत और चीन के विकास का तरीका बिल्कुल अलग-अलग है. चीन के जीडीपी के ग्रोथ का सबसे बड़ा कारण यह है कि इस देश ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काफी निवेश किया है. इसके साथ ही एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया गया है जिसके कारण अर्थव्यवस्था में काफी तेजी आई है. 

    साल 2003 से 2011 के बीच चीन के कुल जीडीपी का 40 प्रतिशत सिर्फ निवेश के कारण आया था. साल 2012 से 2021 के बीच जैसे-जैसे चीनी अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी, इसका निवेश अनुपात और भी ज्यादा बढ़ गया. जबकि भारत में हाई ग्रोथ फेज के दौरान भी निवेश अनुपात औसतन 33 प्रतिशत के आसपास ही रहा है. 

    किसी भी देश में निवेश के बाद जीडीपी ग्रोथ का दूसरा सबसे बड़ा कारण निर्यात होता है. साल 2022-23 में, भारत में वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 770 बिलियन डॉलर से अधिक हुआ, जबकि आयात लगभग 890 बिलियन डॉलर था.  इसकी तुलना साल 2007 के चीनी अर्थव्यवस्था से करें तो उस साल चीन का निर्यात 1.2 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया था, जबकि आयात 950 बिलियन डॉलर रहा था. 

    श्रम बल 

    चीन के जीडीपी ग्रोथ का एक कारण श्रम बल भी है. भारत और चीन के पास दुनिया के कुल कार्य आबादी का 40 प्रतिशत से ज्यादा आबादी है. चीन ने साक्षरता स्तर को बढ़ाकर अपने मानव पूंजी को बेहतर बनाने पर काम किया है. ये देश बढ़ते श्रमिक वर्ग के लिए पर्याप्त रोजगार पैदा करने में सफल रहें, जो उच्च बचत निवेश और अधिक विकास में सहायता करते हैं. 

    वहीं दूसरी तरफ भारत की बात करें तो भारत बुनियादी शिक्षा में पीछे है. साल 2007 में, इस चीन में श्रम शक्ति भागीदारी लगभग 73 प्रतिशत थी. लेकिन अब यह घटकर 67 प्रतिशत रह गया है. वहीं भारत में यह भागीदारी दर साल 2022 में लगभग 50 प्रतिशत होने का अनुमान है.

    दोनों देशों में पुरुष श्रम तो बल लगभग समान है लेकिन चीन में महिला श्रम बल भागीदारी ज्यादा है. साल 2007 में चीन में महिला श्रम बल में 66 प्रतिशत थी जो कि साल 2022 तक घटकर 61 प्रतिशत हो गई. वही दूसरी तरफ भारत में साल 2007 में महिला श्रम बल केवल 30 प्रतिशत थी और 2022 में यह और भी गिरकर 24 प्रतिशत पर आ गई है. 

    रोजगार 

    रोजगार की कमी भारत के विकास में आज भी रास्ते का कांटा बना हुआ है. भारत में पिछले कुछ सालों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ज्यादा नौकरियां पैदा नहीं हुई है. हमारे देश में ज्यादातर नौकरियां निर्माण, व्यापार और परिवहन सेक्टर में पैदा होती है. लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इन क्षेत्रों की तुलना में बहुत अधिक उत्पादक है. यह परिवहन सेक्टर की तुलना में दोगुना उत्पादक है, व्यापार की तुलना में 2.5 गुना अधिक उत्पादक है, और आर्थिक सर्वेक्षण जारी किए गए अनुमान के अनुसार निर्माण की तुलना में 3.75 गुना अधिक उत्पादक है. 

    विदेशी निवेश

    एक तरफ जहां साल 2019 से लेकर साल 2021 तक, पिछले 2 साल के बीच भारत में विदेशी निवेश की हिस्सेदारी 3.4 प्रतिशत से कम होकर 2.8 प्रतिशत हो गई है. वहीं भारत के पड़ोसी देश चीन की बात करें तो साल 2019 से 21 के बीच इस देश का विदेशी निवेश 14.5 फ़ीसदी से बढ़कर 20.3 फीसदी हो गया है. भारत को विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए एफडीआई नीतियों और उदार निवेश व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है.

    क्या भारत आने वाले डेढ़ दशक में अगला चीन हो सकता है?? 

    बीबीसी की एक रिपोर्ट में प्रख्यात अमेरिकी अर्थशास्त्री स्टीव हैंके जॉन्स इस सवाल के जवाब में कहते हैं, ‘भारत जनसंख्या के मामले में तो चीन को पछाड़ चुका है लेकिन विकास के मामले में आज भी कहीं ज्यादा पीछे है. भारत समस्याओं से दबा हुआ देश है. वर्ल्ड बैंक के अनुसार साल 2021 में भारत और चीन की जीडीपी के बीच 9 साल का अंतर है. जहां भारत की जीडीपी 3.1 ट्रिलियन डॉलर थी तो वहीं चीन की 17.7 ट्रिलियन डॉलर की.

    ऐसे में अगर चीनी अर्थव्यवस्था को रोक दिया जाए और भारत की अर्थव्यवस्था 7-7.50 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़े, तो आज की चीनी अर्थव्यवस्था को पार करने में भारत को लगभग 25 साल लग जाएंगे. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ साल पहले ‘व्हार्टन’ के डीन जेफ्री से पूछा गया था कि भारत आर्थिक वृद्धि को गति देकर चीन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ सकता है या नहीं. इसके जवाब में उन्होंने कहा था, ‘हां ऐसा संभव है क्योंकि चीन इतिहास का ऐसा पहला देश बनेगा जो अमीर होने से पहले बूढ़ा हो जाएगा. अगले 10 सालों में इस देश की आबादी 1.5 बिलियन से कम होगी और धीरे-धीरे मध्य शताब्दी तक लगभग 1.3 बिलियन तक सीमित हो जाएगी.

    वहीं 2050 तक 70 फीसदी आबादी ऐसी होगी जो काम करने वाले लोगों पर निर्भर रहेंगे. फिलहाल यह 35 फीसदी है. इससे चीन और वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ेगा.बीबीसी की एक रिपोर्ट में चीनी पत्रकार सन शी कहते हैं, “एक जैसा लोकतंत्र होने के कारण पश्चिमी देश ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय मामलों में चीन से ज्यादा भारत को तरजीह देता है और अक्सर ही चीन को संतुलित करने के लिए भारत का इस्तेमाल करना चाहता है. 

    चीन से छीना गया विकासशील देश का दर्जा

    हाल ही में अमेरिकी सीनेट ने एक नए कानून को मंजूरी दी, जिसके अनुसार चीन को अब विकाशील देश का दर्जा नहीं दिया जा सकेगा. विकासशील देश का दर्जा वापस लिए जाने के बाद चीन को अब विश्व बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से  आसानी से और कम ब्याज दर पर लोन नहीं मिल पाएगा. दरअसल विकासशील देश होने के कारण चीन को आसानी से सस्ता कर्ज मिलता था. लेकिन सस्ता कर्जा लेने के बाद चीन दुनिया के अन्य गरीब देशों को महंगे कर्ज देकर अपने कर्ज की जाल में फंसा लेता था.

  • Kolkata University: नो इंग्लिश नो एडमिशन

    Kolkata Loreto college: कलकत्ता यूनिवर्सिटी के लोरेटो कॉलेज के अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई नहीं करने पर एडमिशन नहीं देने वाले फैसले से हड़कंप मच गया, जिसके बाद कॉलेज ने माफी मांगी. कॉलेज के इस फैसले के बाद राज्य के कई वर्ग के लोगों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की और प्रदर्शन शुरू हो गए, इस वजह से कॉलेज को अपने इस फैसले को वापस लेना पड़ा.

    पश्चिम बंगाल में स्नातक में प्रवेश लेने के लिए प्रक्रिया शनिवार (1 जुलाई) को शुरू हुई, जिसमें कैथोलिक संस्था ने ऑनलाइन घोषणा की थी कि बंगाली और हिंदी माध्यम स्कूलों के आवेदकों का स्वागत नहीं है. 2023-24 अंडर ग्रेजुएट के लिए सिलेक्ट किए गए बच्चों के साथ एक नोट में लिखा हुआ था कि स्थानीय माध्यम स्कूलों के उम्मीदवारों को प्रवेश के लिए कंसीडर नहीं किया गया, क्योंकि संस्थान में सभी निर्देश, परीक्षाएं और किताबें अंग्रेजी में हैं.

    कॉलेज ने निकाला यह फरमान
    1912 में साउथ कोलकाता के पार्क स्ट्रीट क्षेत्र के पास स्थापित, कॉलेज की नीति में कहा गया कि लोरेटो कॉलेज में सभी लेक्चर अंग्रेजी में हैं, इसलिए छात्रों को अंग्रेजी आना बहुत आवश्यक है. छात्रों को अंग्रेजी में अच्छा ज्ञान होना चाहिए, वह अपने लिखित कार्य, मौखिक परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम हो. परीक्षाओं का उत्तर केवल अंग्रेजी में देना होगा. हमारी ओपन शेल्फ लाइब्रेरी में केवल अंग्रेजी टेस्ट बुक है. कॉलेज की लाइब्रेरी में बंगाली या हिंदी जैसी क्षेत्रीय भाषा की किताबें उपलब्ध नहीं है. लोरेटो कॉलेज में शिक्षा का माध्यम केवल अंग्रेजी है.

    कॉलेज के इस फैसले के बाद से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. कॉलेज से जारी नोटिस की फोटो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल होने लगी और हडकंप मच गया. साथ ही कलकत्ता विश्वविद्यालय ने लोरेटो कॉलेज से जानकारी मांगी है कि ऐसा दिशा-निर्देश क्यों जारी किया गया.

  • हिन्दू व्यक्ति ने बुर्का पहना और सरकारी योजना का लाभ उठाना चाहा

    देश: कर्नाटक सरकार ने महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा शुरू की है। शक्ति योजना के तहत महिलाएं फ्री बस यात्रा कर रही हैं। वही कर्नाटक के धारवाड़ जिले में एक व्यक्ति को बुर्का पहने देखा गया। लोगों का दावा है कि व्यक्ति कर्नाटक सरकार की शक्ति योजना के तहत बस का टिकट मुफ्त प्राप्त करना चाहता है। उसने इसी लिए अपना यह वेश बनाया। बुर्का पहने यह व्यक्ति हिन्दू है। व्यक्ति का कहना है कि उसने बुर्का भीख मांगने के लिए पहना था। 

    इण्डिया टुडे की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बुर्का वाला हिन्दू व्यक्ति वीरभद्रैया बस स्टॉप पर बैठा था। उसके हाव – भाव बड़े अजीब थे लोगों को उसपर शक होने लगा। लोग उसके पास गए और उससे बातें करने लगे। उसने काफी बहाने बाजी की लेकिन जब उसकी दाल नहीं गली तो उसने कहा कि भीख मांगने के उद्देश्य से उसने बुर्का पहना था। 

    उसके पास से एक महिला के आधार कार्ड की फोटो कांपी बरामद हुई है जिससे लोगों का शक और बढ़ गया कि वह कर्नाटक सरकार की शक्ति योजना का लाभ उठाना चाहता था।  बता दें घटना राज्य के धारवाड़ जिले के कुंडागोला तालुका के सांशी गांव की है। आरोपी विजयपुर का रहने वाला है।