Category: national

  • PM Modi Speech: SCO के मंच से बिना नाम लिए पाकिस्तान पर पीएम मोदी का प्रहार

    SCO Summit 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 4 जुलाई को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन की बैठक की मेजबानी की. वर्चुअली आयोजित की गई इस बैठक में रूस और चीन समेत एससीओ के सदस्य देश शामिल हुए. बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, इस समय विश्व विवाद, तनाव और महामारी से घिरा हुआ है, ऐसे में हमें मिलकर काम करना है. उन्होंने एससीओ में सुधार के प्रस्ताव का समर्थन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर हमला बोला.

    पीएम मोदी ने कहा, आतंकवाद क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति के लिए प्रमुख खतरा बना हुआ है. इस चुनौती से निपटने के लिए निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है. आतंकवाद चाहे किसी भी रूप में हो, किसी भी अभिव्यक्ति में हो, हमें इसके विरुद्ध मिलकर लड़ाई करनी होगी. कुछ देश, क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म को अपनी नीतियों के टूल के रूप में इस्तेमाल करते हैं. आतंकवादियों को पनाह देते हैं. SCO को ऐसे देशों की आलोचना में कोई संकोच नहीं करना चाहिए.

    अफगानिस्तान को लेकर बोले पीएम मोदी

    पीएम मोदी ने अफगानिस्तान को लेकर सभी सदस्य देशों से मिलकर काम करने की अपील की. पीएम मोदी ने कहा, अफगानिस्तान की स्थिति का सीधा असर का हम सभी (देशों) की सुरक्षा पर पड़ा है. अफगानिस्तान को लेकर भारत की चिंताएं और अपेक्षाएं एससीओ के अधिकांश सदस्य देशों की तरह ही हैं. हमें अफगानिस्तान के लोगों के कल्याण के लिए एकजुट प्रयास करने होंगे. यह महत्वपूर्ण है कि अफगानिस्तान की भूमि का उपयोग पड़ोसी देशों में अशांति फैलाने या चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए न किया जाए.

    एससीओ में भारत के 5 स्तंभों का पीएम ने किया जिक्र

    पीएम मोदी ने बताया, भारत ने एससीओ के भीतर सहयोग के पांच स्तंभ स्थापित किए हैं: स्टार्टअप और इनोवेशन, पारंपरिक चिकित्सा, युवा सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन और साझा बौद्ध विरासत. पिछले दो दशकों में एससीओ पूरे यूरेशिया क्षेत्र में शांति, समृद्धि और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है. इस क्षेत्र के साथ भारत के हजारों साल पुराने सांस्कृतिक और लोगों के आपसी संबंध हमारी साझा विरासत का जीवंत प्रमाण हैं.

    भारत के लैंग्वेज प्लेटफॉर्म की दी जानकारी

    इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने भारत के लैंग्वेज प्लेटफॉर्म के बारे में सदस्य देशों को जानकारी दी. उन्होंने कहा, “हमें एससीओ के भीतर भाषा की बाधा को दूर करने के लिए भारत के एआई-आधारित लैंग्वेज प्लेटफॉर्म भाषिनी को सभी के साथ साझा करने में खुशी होगी. यह डिजिटल प्रौद्योगिकी और समावेशी विकास का एक उदाहरण बन सकता है. उन्होंने आगे कहा, एससीओ संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थानों में सुधारों की आवाज बन सकता है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने ईरान के एससीओ परिवार में नए सदस्य देश के रूप में शामिल होने पर खुशी जताई.

  • UN Report On Children And Armed Conflict: UN Report से भारत हुआ बाहर

    UN Report On Children And Armed Conflict: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने ‘बच्चों की बेहतर सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों’ का हवाला देते हुए बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट से भारत का नाम हटा दिया है. साल 2010 के बाद से बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर महासचिव की रिपोर्ट में सशस्त्र समूहों द्वारा बच्चों की कथित भर्ती और उनके इस्तेमाल के मामले में कई अन्य देशों के साथ भारत के नाम का उल्लेख भी किया जाता था.

    भारत का उल्लेख जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र समूहों के साथ संबंध के आरोप में या राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा बच्चों को हिरासत में लेने जैसे कदमों के कारण किया जाता था. गुतारेस ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उन्होंने अपने विशेष प्रतिनिधि के साथ भारत सरकार की बातचीत का स्वागत किया है और उन्हें लगता है कि भविष्य में भारत का नाम इस रिपोर्ट से हटाया जा सकता है.

    2023 की रिपोर्ट से हटाया भारत का नाम;

    संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर अपनी 2023 की रिपोर्ट में कहा, ‘बच्चों की बेहतर सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को देखते हुए, भारत का नाम 2023 की रिपोर्ट से हटा दिया गया है.’गुतारेस ने जुलाई 2022 में बाल संरक्षण के लिए सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने के वास्ते अपने विशेष प्रतिनिधि के कार्यालय के तकनीकी मिशन और संयुक्त राष्ट्र की भागीदारी के साथ सरकार द्वारा पिछले सात नवंबर में जम्मू-कश्मीर में बाल संरक्षण को मजबूत करने के संबंध में आयोजित कार्यशाला पर प्रकाश डाला.

    अपनी हालिया रिपोर्ट में उन्होंने भारत से अपने विशेष प्रतिनिधि और संयुक्त राष्ट्र के परामर्श के अनुसार शेष उपायों को लागू करने का भी आह्वान किया. गुतारेस ने कहा कि इनमें बाल संरक्षण को लेकर सशस्त्र तथा सुरक्षा बलों का प्रशिक्षण, बच्चों पर घातक तथा अन्य बल प्रयोग पर प्रतिबंध, ‘पैलेट गन’ का इस्तेमाल बंद करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि कोई रास्ता न रह जाने पर ही और कम से कम अवधि के लिए बच्चों को हिरासत में लिया जाए. उन्होंने हिरासत में हर प्रकार के दुर्व्यवहार को रोकने के उपायों के कार्यान्वयन और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल व संरक्षण) अधिनियम तथा

    ‘भारत ने दिए इस बात के संकेत’ बच्चों एवं सशस्त्र संघर्ष पर महासचिव की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि पिछले दो वर्षों से करीबी सहयोग से ‘हम भारत के साथ काम कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘भारत ने इससे निपटने के लिए एक कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है.’ गाम्बा ने कहा कि भारत ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वह इस दिशा में काम करने और ऐसे कदम उठाने को तैयार है, जो लंबे समय तक कारगर साबित होंगे. इसलिए ही भारत का नाम इस रिपोर्ट से हटाने की अनुमति मिली है.

    पिछले साल की रिपोर्ट में गुतारेस ने कहा था कि वह ‘जम्मू-कश्मीर में बच्चों के खिलाफ उल्लंघन की बढ़ती संख्या’  की बात से चिंतित हैं, जिनकी पुष्टि की गई है और उन्होंने भारत सरकार से बाल संरक्षण को मजबूत करने का आह्वान किया था. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने बच्चों की सुरक्षा के लिए कानूनी और प्रशासनिक ढांचे और छत्तीसगढ़, असम, झारखंड, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में बाल संरक्षण सेवाओं तक बेहतर पहुंच और बाल अधिकार संरक्षण के लिए जम्मू-कश्मीर आयोग के निर्माण में प्रगति का स्वागत किया था.

    केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कही यह बात इधर, नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा बच्चों की बेहतर सुरक्षा के लिए किये गए प्रयासों के परिणामस्वरूप यह संभव हो सका है.मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा, ‘केंद्र सरकार द्वारा बच्चों की बेहतर सुरक्षा के लिए किये गए प्रयासों के परिणामस्वरूप अब बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर जारी संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट में भारत का नाम हटा दिया गया है.’

    इसमें कहा गया कि नवंबर 2021 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव इंदीवर पांडे की विदेश मंत्रालय, न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी मिशन व भारत सरकार के गृह मंत्रालय तथा बच्चों के लिए महासचिव की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गैम्बा और नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के साथ एक अंतर-मंत्रालयी बैठक हुई. बयान में कहा गया, ‘इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि (एसआरएसजी) के साथ जारी भारत सरकार की गतिविधियों में और तेजी आई थी.’

  • सड़क पर उतरे छात्रों पर लाठीचार्ज; नीतीश-तेजस्वी का पूतला फूंका

    बिहार में 1.70 लाख शिक्षक पदों की भर्ती से पहले डोमिसाइल नीति हटाने को लेकर राज्य के शिक्षक अभ्यर्थियों में आक्रोश है। शनिवार को बिहार सरकार की नई डोमिसाइल नीति के विरोध में हजारों की संख्या में बेरोजगार युवा राजधानी पटना की सड़कों पर उतर आए।पटना के डाकबंगला चौक, इनकम टैक्स चौक और जेपी चौक पर जुटे युवाओं जगह-जगह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का पुतला फूंका और शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के बयान को लेकर नाराजगी जाहिर की, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार के छात्र अन्य राज्य के छात्रों की तुलना में कम प्रतिभाशाली हैं।

    प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने बिहार सरकार से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में दूसरे राज्यों के छात्रों के आवेदन मंगवाने के फैसले को वापस लेने की मांग की और ऐसा करने पर अपना विरोध जारी रखने की चेतावनी दी। शिक्षक अभ्यर्थियों को एसटीईटी, सीटीईटी के अलावा प्राथमिक, माध्यमिक और अनुबंध शिक्षकों सहित विभिन्न शिक्षक संघों का समर्थन प्राप्त था।

    केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन पर डीएसपी कोतवाली, कानून एवं व्यवस्था, नुरुल हक ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। वे सड़कों पर उतर रहे हैं, जिससे ट्रैफिक जाम हो रहा है। प्रदर्शनकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके लिए उन्हें जेल जाना होगा। पुलिस उन्हें नियंत्रित करने के लिए लाठियों का इस्तेमाल कर रही है।

  • ऊंची जाति के मुसलमान तो ओबीसी हिंदुओं से भी गरीब: असदुद्दीन ओवैसी

    राजनीति: बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में भाषण दिया और  समान नागरिक संहिता (UCC) व पसमांदा मुसलमान का जिक्र छेड़ दिया उन्होंने कहा उनके समुदाय के लोगों द्वारा पसमांदा मुसलमान का शोषण किया जा रहा है। उनके बयान से विपक्ष में हलचल मच है। स्वयं को मुस्लिम हितैसी बताने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा- मुसलमानों का एक वर्ग पसमांदा मुसलमानों को आगे नहीं बढ़ने दे रहा है।   

    लेकिन सच्चाई ये है कि सभी मुस्लिम गरीब हैं और ऊंची जाति के मुसलमान तो ओबीसी हिंदुओं से भी गरीब हैं. इसके साथ ही ओवैसी ने पीएम मोदी से सवाल किया कि वे पूरे देश के पीएम हैं, फिर उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण का बजट 40 फीसदी क्यों कम कर दिया। ओवैसी ने आगे पूछा, क्यों उनकी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलित मुस्लिम के आरक्षण का विरोध किया? क्यों बीजेपी ने पिछड़े मुस्लिमों के आरक्षण का विरोध किया. क्यों वे इस सामाजिक अन्याय का दोष भी यूसीसी पर डालेंगे?

    ओवैसी ने कांग्रेस और दूसरी पार्टियों से भी सवाल किया। उन्होंने कहा, कांग्रेस और दूसरी सामाजिक न्याय वाली पार्टियां हमें बताएं- हमें हमारा उचित हिस्सा मिलेगा, या हम इस बात पर ही खुश रहें कि आपके नेता ने इफ्तार में सिर पर टोपी पहनी थी। 

  • यूनिफॉर्म सिविल कोड देश के लिए क्यों जरूरी?

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले दिनों एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने पहली बार यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर जो कुछ कहा है उसके बाद देशभर में इस पर बहस तेज हो गई है. हालांकि, विपक्ष के कुछ दलों ने भी आंशिक या पूर्ण रुप से यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अपनी सहमति दी है. लेकिन, इसको लेकर इस वक्त कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं और सरकार से इसके स्वरुप लाने की मांग की जा रही है. ऐसा कहा जा रहा है कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश, जहां पर विविधता है, यहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना संभव नहीं होगा. 

    news by abp- 

    सवाल: यूसीसी पर पीएम मोदी का बयान और उसके बाद देशभर में इस पर बहस तेज, आपका इस पूरे मामले पर क्या कहना है?

    जवाब: हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि एक देश में एक कानून होना चाहिए. हमारी आईपीसी एक है, सीआरपीसी एक है, एविडेंस एक्ट एक है. निश्चित रुप से कानून तो इस देश में एक है. अगर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है तो उनके दिमाग में जरूर ये बात होगी. आप गौर कीजिए कि पीएम मोदी ने यूसीसी को लेकर ये बातें कहां पर कही हैं, उन्होंने इसे मध्य प्रदेश में कहा है, जहां पर अगले कुछ महीनों में विधानसभा का चुनाव है. चुनाव में ध्रुवीकरण चाहते हैं. देश के 99 फीसदी लोगों को नहीं पता कि यूनिफॉर्म सिविल कोड आखिर है क्या. सरकार को चाहिए कि वे बताएं कि वे क्या करना चाहती है. इस पर लोगों को सुझाव मांगे, जो सार्वजनिक तौर पर हो, जो पूरी प्रक्रिया है किसी कानून को बनाने का. हिन्दू-मुस्लिम, पारसी, जैन, सिख की बात छोड़िए, सिर्फ एक धर्म के अंदर ही अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं. मुस्लिम समाज में भी ऐसी है. दक्षिण भारत में अलग मान्यताएं हैं और उत्तर भारत में अलग मान्यताएं हैं.

    हिन्दू समाज की भी बात करें तो पूरे समुदाय को छोड़िए सिर्फ एक जात में ही उत्तर भारत में कहा जाता है कि सात पुश्त में कोई ब्लड रिलेशन न हो. जबकि,  दक्षिण भारत में ब्लड रिलेशन में ही शादी होती है. ऐसे में उस पर क्या विचार किया जाएगा. इस्लाम धर्म में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग मान्यताएं हैं. मुस्लिम में भी हनाफी, वहाबी, देवबंदी, बरेलवी है. सिख में भी अलग-अलग लोग हैं. यानी, सभी धर्मों में विविधताएं हैं. ऐसे में अनेकता में एकता के बीच ये देश चल रहा है लेकिन कुछ लोग चाहते हैं कि लड़ाई बढ़ती चली जाए. यूसीसी की बात किसी और ने नहीं बल्कि खुद प्रधानमंत्री मोदी ने कही है. सरकार को पहले प्रारुप लाना चाहिए कि वो यूसीसी पर क्या करना चाहती है, उसके बाद इस पर किसी को प्रतिक्रिया देनी चाहिए. 

    यूसीसी अभी आया भी नहीं और कुछ लोग इसे बहुत बढ़िया और कुछ लोग इसे गलत बता रहे हैं. जबकि अधिकतर लोगों को यूसीसी के बारे में कुछ भी पता नहीं है. इसलिए सरकार के पक्ष और विरोध वालों को ये नहीं करना चाहिए. पहले सरकार का प्रस्ताव जान लेना चाहिए. ऐसे में सुधार अगर अपने बीच से होता है तो वही सुधार परमानेंट होता है. जबरदस्ती किसी को आप समाज को सुधार नहीं सकते हैं. हिन्दू समाज में सती प्रथा थी, लेकिन हिन्दू समाज से ही राजा राममोहन राय आए और इस प्रथा का अंत हुआ. प्रधानमंत्री और भाजपा की मंशा ही यही है कि लोगों को लड़वाकर वोट लें. इनकी राजनीति एक है कि समाज में कैसे लड़ाया जाए और कैसे विद्वेष फैलाया जाए.      

    सवाल:  लॉ कमीशन ने 2016 में यूसीसी पर राय मांगी थी. उसके बाद 2018 में कहा कि देश को  यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं है. ऐसे में 2024 लोकसभा चुनाव से पहले पीएम का ये कहना कि सुप्रीम कोर्ट भी चाहता है कि यूसीसी पर कानून बने. अब ऐसा कहा जा रहा है कि मॉनसून सेशन में इस पर बिल लाया जा सकता है. आप इसे किस तरह से देख रहे हैं?

    जवाब: देखिए, उद्देश्य जो लगता है वो यही है कि 2024 में लोकसभा का चुनाव होने जा रहा है. आपने भी बताया कि 2024 में चुनाव होने जा रहा है. पहले कि क्या होगा? मेरे ख्याल से इसमें लोगों को लड़वाया जाएगा. पहले खोजेंगे ऐसे लोग जो बिना यूसीसी के बारे में जाने ही इसका पुरजोर विरोध करे. कुछ ऐसे लोगों की तलाश करेंगे जो इसका खूब सपोर्ट करे. टेलीविजन चैनलों के जरिए देश के अलग-अलग धर्म के लोगों को खूब लड़वाया जाएगा. अपने को बहुसंख्यक धर्म का हितैषी बताकर उनका वोट लेना चाहेंगे. यही सीधी-सीधी राजनीति है. इसलिए मैंने शुरू में ही कहा कि पीए मोदी ने ये यूसीसी पर बातें

    सवाल: यूनिफॉर्म सिविल कोड पर पहली बार प्रधानमंत्री का इस तरह का बयान आया है. इसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इमरजेंसी बैठक बुलाई. ओवैसी से लेकर तमाम मुस्लिम नेताओं के इस पर बयान आए. पूरे एपिसोड में आप क्या देख रहे हैं कि देश यूसीसी को लेकर किधर जा रहा है?

    जवाब: देखिए, बात बिल्कुल वही है कि वो आपस में लड़वाना चाहते हैं. जो भी समझदार लोग हैं उनको ये कहना चाहिए कि आप क्या करना चाहते हैं उसका एक ड्राफ्ट देश के सामने रखिए. उसमें हो सकता है कि बहुत सी अच्छी बातें हों, जो लोगों के दिमाग में अभी नहीं हो. बहुत सी ऐसी बातें हो सकती है, जिस पर खून खराबा होने की बात हो जाए. मैंने कहा कि धर्म तो छोड़ दीजिए एक जाति में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड इस देश में लगना मुश्किल है.

    मध्य प्रदेश में कही हैं, जहां पर अगले तीन से चार महीन में चुनाव होने जा रहा है. 

    सवाल: आप क्या देख रहे हैं कि 2024 का चुनाव पूरी तरह से ध्रुवीकरण का लड़ा जाएगा? 

    जवाब: प्रयास तो हमेशा भारतीय जनता पार्टी ध्रुवीकरण का करने की करती है. लेकिन, 2014 का चुनाव याद कीजिए जब मोदी जी कैसे चुनाव जीतकर आए थे और एक साल बाद ही 2015 में बिहार का चुनाव हार गए. केजरीवाल जी से दिल्ली में चुनाव हार गए. इसलिए देश की धीरे-धीरे ये समझ गए हैं कि इनको कोई काम नहीं, कोई विकास और तरक्की से मतलब नहीं है. इनको सत्ता कैसे मिलेगी तो बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक करके. अल्पसंख्यक में कोई जरूरी नहीं कि वो मुसलमान ही हो, जो भी हो उनको लड़ावें. हरियाणा में जाट और नॉन जाट की लड़ाई शुरू करवा दी गई थी. इसलिए जहां भी हो लड़ा सके, और वहां पर जो अधिक संख्या वाला हो उसकी हम अपनी हितैषी बताएं, यही बीजेपी की रणनीति है. 

    यूसीसी पर मेरी व्यक्तिगत राय ये है कि अभी प्रारुप आना चाहिए. उसके बाद सरकार को बताना चाहिए कि हम ये करना चाहते हैं. तब लोग उस पर अपनी राय दें कि क्या अच्छा और क्या बुरा है. प्रधानमंत्री ने कहा है इसका मतलब है कि सरकार ने कहा है. लेकिन, बगैर प्रस्ताव के चुनाव के बीच में ये सब लड़ाने के लिए किया जा रहा है, ऐसे में मैं समझता हूं कि ये किसी सरकार को शोभा नहीं देता है.

  • DERC चेयरमैन के शपथ ग्रहण पर अगली सुनवाई तक लगाई गई रोक

    DERC Chairman Appointment: राजधानी में दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेट्री कमीशन (DERC) चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर विवाद लगातार जारी है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई, जिसके बाद फिलहाल दिल्ली में DERC अध्यक्ष के शपथ पर रोक रहेगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली के एलजी को नोटिस जारी किया है, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी. तब तक शपथ ग्रहण पर रोक जारी रहेगी. दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने 7 जुलाई को होने जा रहे शपथ ग्रहण कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की थी.

    ‘200 यूनिट मुफ्त बिजली बंद करने की तैयारी’
    DERC अध्यक्ष के तौर पर पूर्व जस्टिस उमेश कुमार की नियुक्ति के खिलाफ दिल्ली सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई हुई. दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वकील सिंघवी ने कहा कि अपना DERC अध्यक्ष बनाकर एलजी दिल्ली के लोगों की 200 यूनिट मुफ्त बिजली बंद करना चाहते हैं. इसीलिए इस नियुक्ति पर रोक लगनी चाहिए. इसके बाद एलजी तफ्तर की तरफ से पेश हुए वकील ने इसका जवाब दिया.

    एलजी दफ्तर ने दिया ये तर्क
    वहीं एलजी ऑफिस के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे आधारहीन बयान बताते हुए विरोध किया. मेहता ने कहा कि जस्टिस उमेश कुमार की नियुक्ति के मामले में दिल्ली सरकार को पूरी जानकारी थी. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार केंद्र के अध्यादेश को चुनौती देना चाहती है, उससे पहले उसके एक हिस्से (सेक्शन  45-D के आधार पर हुई है नियुक्ति) के आधार पर जारी आदेश के अमल पर रोक हासिल कर तैयारी करना चाहती है. दोनों तरफ से हुई इस बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल एलजी और केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई के बाद ही DERC अध्यक्ष की नियुक्ति पर फैसला हो सकता है. 

  • Maharashtra NCP Crisis Live: अजित की बगावत के बाद महाराष्ट्र में आज पहली कैबिनेट बैठक

    Maharashtra NCP Crisis Live Updates: अजित पवार की बगावत के बाद महाराष्ट्र में राजनीति गरमाई हुई है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) चीफ शरद पवार राजनीतिक जीवन के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. भतीजे के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद अब पार्टी पर कब्जे की लड़ाई शुरू हो गई है. 

    रविवार (2 जुलाई) को अजित पवार की बगावत के बाद अगले दिन सोमवार को पार्टी में अपनी ताकत दिखाने के लिए शक्ति प्रदर्शन किया. शरद पवार सतारा के कराड में दिवंगत वाई वी चव्हा के स्मारक पहुंचे. इस दौरान हजारों समर्थकों ने उनका स्वागत किया. शरद पवार ने कहा, हमारे कुछ लोग अन्य पार्टियों को तोड़ने की बीजेपी की रणनीति का शिकार हो गए. उन्होंने कार्यकर्ताओं से हताश न होने की अपील करते हुए कहा, मेरे पास विधायकों के जाने के 2-3 पुराने अनुभव हैं. आगे नतीजे अच्छे आएंगे.

    सोमवार को शरद पवार के आदेश पर बागियों पर एक्शन भी शुरू हो गया. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और लोकसभा सांसद सुनील तटकरे को पार्टी से निकाल दिया गया. पवार ने ट्वीट कर कहा कि मैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल की पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर उनके नाम एनसीपी सदस्यों के रजिस्टर से हटाने का आदेश देता हूं. 

    इसके पहले एनसीपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने मंत्री पद की शपथ लेने वाले 9 विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया. इन विधायकों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष के पास अयोग्यता याचिका भी भेजी गई है.

    शरद पवार ने कार्रवाई की तो इसका जवाब अजित पवार खेमे ने भी एक्शन से ही दिया. शरद पवार के गुट के कार्यकारी अध्यक्ष पद से हटाए जाने के तुरंत बाद प्रफुल्ल पटेल ने जयंत पाटिल की जगह लोकसभा सांसद सुनील तटकरे को पार्टी की महाराष्ट्र इकाई का अध्यक्ष नियुक्त करने का ऐलान किया. साथ ही उपमुख्यमंत्री अजित पवार को पार्टी का विधायक दल का नेता भी नियुक्त किया. पटेल ने अनिल भाईदास पाटिल को महाराष्ट्र विधानसभा में एनसनपी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया है.

    प्रफुल्ल पटेल ने कहा एनसीपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष होने के नाते मैंने महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सुनील तटकरे को देने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि हमारी शरद पवार से हाथ जोड़कर विनती है कि पार्टी के बहुसंख्यक वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की इच्छा का वे आदर करें. सरकार में शामिल होने के बाद सोमवार को उपमुख्यमंत्री अजित पवार और राज्य के मंत्री छगन भुजबल सोमवार को उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से मिलने पहुंचे. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस दौरान विभागों के आवंटन पर चर्चा हुई. 

  • Manipur Violence: हिंसा प्रभावित मणिपुर दौरे के दूसरे दिन मेइती समुदाय के लोगों से मिलेंगे राहुल गांधी

    Manipur Violence: मणिपुर में पिछले करीब दो महीने से जारी हिंसा के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी राज्य के दौरे पर हैं. राहुल गांधी ने अपने दौरे के पहले दिन इंफाल से 63 किलोमीटर दूर चुराचांदपुर में राहत शिविरों में शरण लिए हुए लोगों से मुलाकात की. इससे पहले खूब हंगामा भी हुआ. अब राहुल अपने दौरे के दूसरे दिन हेलीकॉप्टर से विष्णुपर जिले के मोइरांग के लिए रवाना हुए हैं. जहां वो मेइती समुदाय के हिंसा प्रभावित लोगों से मुलाकात करेंगे और पीड़ित लोगों से बातचीत होगी. 

    सामाजिक कार्यकर्ताओं से करेंगे बात
    राहुल गांधी मेइती समुदाय के लोगों से मिलने के बाद इंफाल लौटेंगे. जहां वो सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करेंगे. बताया जा रहा है कि राहुल हिंसा को रोकने के लिए और लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं से बात कर सकते हैं. इसके बाद राहुल गांधी मणिपुर से ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं. जिसमें वो लोगों से हुई बातचीत की जानकारी दे सकते हैं. 

    राहुल गांधी को रोकने पर हुआ विवाद
    राहुल गांधी गुरुवार 29 जून को मणिपुर पहुंचे, लेकिन एयरपोर्ट पर उतरने के कुछ देर बाद राहुल के काफिले को रोक दिया गया. पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राहुल को सड़क मार्ग से जाने की इजाजत नहीं दी, इसके बाद राहुल गांधी हेलीकॉप्टर से चुराचांदपुर पहुंचे और राहत शिविरों में मौजूद लोगों से मिले. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की यात्रा को विफल करने के लिए बीजेपी सरकार ने ऐसा किया, वहीं बीजेपी की तरफ से कहा गया कि नेताओं का दौरा मणिपुर में मतभेद को और बढ़ा सकता है. 

    हिंसा में दो लोगों की मौत
    मणिपुर में पिछले कुछ दिन से बनी शांति तब भंग हो गई जब कांगपोकपी जिले के हराओठेल गांव में गुरुवार (29 जून) सुबह सुरक्षा कर्मियों के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध दंगाइयों की मौत हो गई. इस गोलीबारी की घटना में पांच लोग घायल भी हो गए. अधिकारियों ने बताया कि जिस समुदाय से दोनों मृतक उपद्रवी आते थे, उसके लोगों ने उनके शवों के साथ इंफाल में मुख्यमंत्री आवास तक जुलूस निकालने की कोशिश की. जब पुलिस ने उन्हें मुख्यमंत्री आवास तक जाने से रोका तो जुलूस हिंसक हो गया. इसके बाद पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया.

  • देश के विकास हेतु करना होगा यह काम

    देश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है साल 2047 तक हम विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। देश के चौमुखी विकास के लिए हमें भारत के सभी तमगो को एक साथ लेकर चलना होगा। जब सभी संगठन, समुदाय और समाज एक साथ मिलकर काम करेंगे तो यह आसानी से होगा- रक्षा मंत्री राज नाथ सिंह 

    बीते दिन गुरु पूर्णिमा के मौके पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा पंजाब के जालंधर में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राज नाथ सिंह ने कहा – देश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। देश का चौमुखी विकास तभी सम्भव है जब देश के सभी समाज के लोग,संगठन एक साथ मिलकर देश हित में काम करेंगे। 

    उन्होंने आगे कहा – धर्म का संबंध कर्तव्य से है। प्रत्येक व्यक्ति को धर्म का अनुसरण करना चाहिए। धर्म हमें निजी और सार्वजानिक जीवन जीने का तरीका सिखाता है। धर्म का संबंध जीवन से है। यह हमारे हर हिस्से में है यह राजनीति में है। आज देश में जिस राजनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं वह स्वयं धर्म से प्रेरित है।

  • स्नूकर खिलाड़ी माजिद अली ने की आत्महत्या

    डेस्क रिपोर्ट :

    पाकिस्तान के टैलेंटेड स्नूकर खिलाड़ी माजिद अली ने आत्महत्या कर ली है। माजिद 28 साल के थे। वे एशियन अंडर-21 टूर्नामेंट के सिल्वर मेडलिस्ट रह चुके हैं। बताया जा रहा है कि माजिद लंबे समय से डिप्रेशन का शिकार थे और आखिरकार यह उनकी आत्महत्या का कारण बना।पाकिस्तान से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, माजिद ने वुड कटर मशीन का इस्तेमाल कर आत्महत्या की। उन्होंने पाकिस्तानी पंजाब के फैसलाबाद के नजदीक अपने होम टाउन समुंदरी में आत्महत्या की। माजिद कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पाकिस्तान को रिप्रजेंट कर चुके थे। वे पाकिस्तानी स्नूकर खिलाड़ियों में टॉप रैंक पर थे।
    एक महीने में दूसरे पाकिस्तानी स्नूकर खिलाड़ी की मौत हुई है। पिछले महीने पाकिस्तान के दो बार के नेशनल चैंपियन मोहम्मद बिलाल की हार्ट अटैक की वजह से मौत हुई थी। बिलाल 38 साल के थे।दो बार के नेशनल स्नूकर चैंपियन मोहम्मद बिलाल की पिछले महीने हार्ट अटैक से मौत हुई थी।माजिद के भाई उमर ने बताया कि वे टीनएज उम्र से ही डिप्रेशन का शिकार थे। उनका इलाज भी कराया गया था। माजिद ने कहा- यह हमारे परिवार के लिए गहरा सदमा है। हम जानते थे कि वह परेशान था, लेकिन इसकी उम्मीद नहीं थी कि जान दे देगा।