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  • Love Jihad: सीएम धामी से मुलाकात के बाद मुस्लिम महापंचायत रद्द

    Uttarakhand Mahapanchayat: ‘लव जिहाद’ (Love Jihad) की कथित घटनाओं को लेकर उत्तराखंड के उत्तरकाशी (Uttarkashi) जिले के पुरोला (Purola) में गुरुवार को प्रस्तावित ‘महापंचायत’ का आयोजन रोकने के लिए धारा 144 लागू (Section 144) कर दी गई. हिंदू महापंचायत के एलान के बाद मुस्लिम महापंचायत का भी एलान किया गया था. लेकिन सूत्रों की मानें तो अब 18 जून को होने वाली मुस्लिम महापंचायत को रद्द कर दिया गया है.

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्रवाई के आश्वासन के बाद 18 जून को देहरादून में प्रस्तावित मुस्लिम महापंचायत को रद्द कर दिया गया है. देहरादून के एसएसपी दिलीप सिंह कुंवर ने बताया कि कई स्तरों पर हुई बातचीत के बाद और मुख्यमंत्री के कार्रवाई के आश्वासन पर पार्टियों के बीच सैद्धांतिक रूप से समझौता हो गया था, जिसके बाद प्रस्तावित महापंचायत को रद्द कर दिया गया है. दरअसल, पुरोला में 14 जून से छह दिन के लिए धारा 144 लागू की गयी है. 

    इस वजह से बनी तनाव की स्थिति
    गत 26 मई को एक हिंदु लड़की को दूसरे समुदाय के युवक द्वारा कथित रूप से भगाने का प्रयास सामने आने के बाद से उत्तरकाशी जिले की यमुना घाटी में तनाव समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है. तनाव पूर्ण स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिगत पुरोला में तीन पीएसी प्लाटून के 300 जवानों सहित देहरादून से दो पुलिस क्षेत्राधिकारियों और एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की तैनाती की है.

    वहीं इस कथित तौर पर भगाने की असफल घटना के बाद मुसलमानों की दुकानों पर पोस्टर लगा दिए गए थे. इन पोस्टरों पर उन्हें इलाकें छोड़कर चलने जानी की धमकी दी गई थी. इसके बाद हिंदू महापंचायत का एलान किया गया था. ये महापंचायत 15 जून को होने वाली थी. लेकिन इसकी अनुमति जिला प्रशासन ने नहीं दी और धारा 144 लागू कर दी गई. हिंदू महापंचायत के एलान के बाद मुस्लिमों ने भी महापंचायत का एलान किया था.

  • मप्र में भाजपा की मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी

    मध्यप्रदेश में इसी साल होने वाले विधानसभा के चुनाव कशमकश भरे होंगे और बाजी किसके हाथ लगेगी इसका पूवार्नुमान किसी को नहीं है। लिहाजा सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी किसी तरह की चूक करने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को सामने रखकर चुनाव लड़ने का लगभग मन बना लिया है। राज्य में भाजपा की लगभग दो दशक से सरकार है। बीच में लगभग सवा साल ऐसा आया था जब कांग्रेस के हाथ में सत्ता थी। लंबे अरसे से सत्ता की बागडोर भाजपा के हाथ में होने के कारण पार्टी को एंटी इनकंबेंसी की चिंता सता रही है।

    पिछले कुछ दिनों में पार्टी के अंदरूनी सर्वे में भी पार्टी को खुश करने वाले नहीं रहे। उसके बाद से पार्टी ऐसी रणनीति पर काम कर रही है जिससे एक तरफ एंटी इनकंबेंसी के प्रभाव को रोका जा सके तो वहीं प्रधानमंत्री की छवि को आगे रख कर जनता को लुभाया जा सके। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन का प्रदेश में लगातार दखल बढ़ रहा है और यही कारण है कि वरिष्ठ नेताओं की राज्य में सक्रियता भी बड़ी है। विशेष संपर्क अभियान के तहत यह नेता न केवल लोकसभा, विधानसभा क्षेत्र तक पहुंच रहे हैं बल्कि समाज के प्रबुद्ध लोगों से भी संवाद कर रहे हैं। इसके पीछे पार्टी का मकसद जमीनी स्थिति का आकलन करना और उसमें सुधार लाना है।

    इसके अलावा पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के दौरे भी राज्य में बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की छवि को पार्टी आगे रखकर राज्य के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरने का मन बना चुकी है। इसी के चलते पीएम मोदी के राज्य में प्रवास भी बढ़ रहे हैं। वो 27 जून को राज्य में आ रहे हैं, धार जाएंगे, भोपाल के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे साथ ही शहडोल का भी प्रवास संभावित है।

    भाजपा प्रधानमंत्री के प्रवास के जरिए आदिवासी वोट बैंक को लुभाने की कोशिश कर रही है। पीएम मोदी का आदिवासी गौरव दिवस पर मध्य प्रदेश प्रवास हुआ, इसी वर्ग से जुड़ी रानी कमलापति के नाम पर भोपाल में रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया। इसी क्रम में अन्य फैसले भी हुए और अब प्रधानमंत्री का आदिवासी बाहुल्य वाला इलाका शहडोल भी जाना हो रहा है।

    राज्य में भाजपा की नजर आदिवासी वोट बैंक पर है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को आदिवासी इलाके में बड़ा नुकसान हुआ था। 47 सीटों में से भाजपा सिर्फ 16 सीटें जीत सकी थी और कांग्रेस 30 सीटों पर आगे रही थी। कुल मिलाकर भाजपा को सत्ता से दूर रखने में आदिवासी वोट की अहम भूमिका रही थी।

    भाजपा एक बार फिर इस वोट बैंक में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाह रही है। पिछले चुनाव में राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 114 और भाजपा को 109 सीटें हासिल हुई थी। चुनाव करीब आने के साथ कांग्रेस के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आते जा रहे हैं। पहले अरुण यादव ने प्रधानमंत्री के मध्य प्रदेश प्रवास को लेकर गंभीर हमला बोला था और अब नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने हमला बोला है।

    कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अब्बास हफीज का कहना है कि जिस भी राज्य में चुनाव होते हैं प्रधानमंत्री वहां प्रचार मंत्री की भूमिका में नजर आते हैं। कर्नाटक में भी यही हुआ, मगर जनता मन बना चुकी थी और भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा। मध्य प्रदेश मे भी यही कुछ होने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी चाहे जितने दौरे करें मगर राज्य की जनता भाजपा को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है। जैसा कर्नाटक में हुआ है वैसा ही मध्य प्रदेश में होने वाला है। प्रधानमंत्री हर तरफ घूमेंगे और भाजपा की हार होगी।

    वहीं भाजपा के प्रवक्ता पंकज चतुवेर्दी का कहना है कि नरेंद्र मोदी का होना भाजपा के लिए गर्व का विषय है। जहां तक चेहरे की बात है तो भाजपा का चेहरा कमल का निशान है। उसी निशान पर चुनाव लड़ा जाएगा। नेतृत्व प्रधानमंत्री का है और चुनाव का मुद्दा विकास होगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य के विधानसभा चुनाव दोनों ही राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के लिए काफी अहम है।

    राज्य सरकार को लेकर भाजपा के अच्छा फीडबैक नहीं मिल रहा है। लिहाजा पार्टी की कोशिश है कि प्रधानमंत्री के चेहरे को आगे रखा जाए और हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ा जाए, जिसका राज्य में पार्टी को लाभ मिल सकता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ प्रधानमंत्री की लगातार राज्य में आमद बढ़ रही है। भाजपा प्रधानमंत्री की छवि को मध्य प्रदेश में भुनाना चाह रही है।

  • चुनौतियों के बावजूद रूस ने आर्थिक स्थिरता कायम रखी: पुतिन

     राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 26वें सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के पूर्ण सत्र के दौरान कहा कि रूस ने अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करते हुए आर्थिक स्थिरता को सफलतापूर्वक बनाए रखा है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शुक्रवार को पुतिन के हवाले से कहा, सकारात्मक व्यापक आर्थिक रुझान गति पकड़ रहे हैं और तेजी से स्पष्ट हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि रूस की जीडीपी इस साल लगभग 1.5 फीसदी से 2 फीसदी की विकास दर हासिल कर सकती है, जिससे देश दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान बनाए रखने में सक्षम होगा।

    रूसी नेता के अनुसार, मुद्रास्फीति 2.9 प्रतिशत के ऐतिहासिक निम्न स्तर के करीब है और बेरोजगारी 3.3 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर है।

    पुतिन ने कहा, कई विदेशी ब्रांड लंबे समय से रूस में पूरी तरह से निर्मित उत्पादों को बेच रहे हैं, वास्तव में रूसी सामान केवल विदेशी लोगो के साथ अब ब्रांड मालिकों के प्रस्थान के बाद आपूर्ति की जाती है और मुनाफा रहता है।

    उन्होंने श्रोताओं से कहा कि रूस एक खुली अर्थव्यवस्था का पीछा करना जारी रखता है और सभी कठिनाइयों के बावजूद कभी भी आत्म-अलगाव के रास्ते पर नहीं चलेगा।

    उन्होंने कहा, इसके विपरीत, हमने देशों और क्षेत्रों में विश्वसनीय, जिम्मेदार भागीदारों के साथ संपर्क का विस्तार किया है जो आज वैश्विक अर्थव्यवस्था के लोकोमोटिव और चालक के रूप में कार्य करते हैं। मैं दोहराना चाहता हूं: ये भविष्य के बाजार हैं।

    पुतिन ने कहा, अनिवार्य रूप से नव-औपनिवेशिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का अस्तित्व समाप्त हो गया है, जबकि इसके विपरीत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। यह एक अपरिहार्य प्रक्रिया है।

    सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम 1997 से रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर में सालाना आयोजित किया गया है, और इस साल के आयोजन का विषय सॉवरेन डेवलपमेंट एज द बेसिस ऑफ ए जस्ट वर्ल्ड: जॉइनिंग फोर्सेज फॉर फ्यूचर जेनरेशन है।

  • मुस्लिम देशों के साथ संबंध बढ़ाने में ईरान के सामने कोई बाधा नहीं

    ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने कहा है कि मुस्लिम देशों के साथ संबंध बढ़ाने में ईरान के सामने कोई बाधा नहीं है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने ईरानी राष्ट्रपति के कार्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि रायसी ने शनिवार को राजधानी तेहरान में सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ बैठक में यह टिप्पणी की।

    उन्होंने मुस्लिम दुनिया के दो महत्वपूर्ण और प्रभावशाली देशों के बीच संबंधों की बहाली का स्वागत करते हुए कहा कि तेहरान और रियाद के बीच बातचीत से दोनों देशों को लाभ होता है, जो अच्छे पड़ोसी के अनुरूप आवश्यक हैं। यह देखते हुए कि मुस्लिम राज्यों ने तेहरान-रियाद संबंधों के सामान्यीकरण का व्यापक रूप से स्वागत किया है, रायसी ने क्षेत्रीय राज्यों के बीच सहयोग और संवाद के माध्यम से पश्चिम एशिया के सामने आने वाली कठिनाइयों और समस्याओं पर काबू पाने में विश्वास व्यक्त किया। सऊदी विदेश मंत्री ने अपनी ओर से द्विपक्षीय संबंधों की बहाली और तेहरान की अपनी यात्रा पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि ईरान के साथ सहयोग बढ़ाना दोनों देशों के एजेंडे में है।

    उन्होंने कहा कि सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद ने ईरान के साथ संबंधों को विकसित करने के लिए विभिन्न कार्य समूहों के गठन का आदेश दिया है, यह देखते हुए कि उनका देश द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक स्तर तक सुधारने के प्रयास कर रहा है। सऊदी विदेश मंत्री शनिवार दोपहर तेहरान पहुंचे, जो सात साल से अधिक समय में ईरानी राजधानी की पहली यात्रा कर रहे हैं। बाद में दिन में, उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दोलाहियन से मुलाकात की, जिसके बाद दो शीर्ष राजनयिकों ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में भाग लिया। ईरान और सऊदी अरब ने अप्रैल में तत्काल प्रभाव से राजनयिक संबंधों को फिर से शुरू करने की घोषणा की।

  • नदी में डूबी नाव, 103 लोगों की मौत

    देश के केंद्रीय राज्य क्वारा में एक नाव पलटने से कम से कम 103 लोगों की मौत हो गई और करीब 100 अन्य को बचा लिया गया। क्वारा में पुलिस के प्रवक्ता अजय ओकासनमी ने मंगलवार को शिन्हुआ को बताया कि दुर्घटना सोमवार सुबह राज्य के पाटिगी स्थानीय सरकार क्षेत्र में एक नदी में हुई, जब यात्री मध्य क्षेत्र में पड़ोसी नाइजर राज्य से घर लौट रहे थे। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, ओकासनमी ने कहा कि कुछ अन्य लापता हैं। बचाव अभियान चल रहा है।

    पुलिस अधिकारी ने कहा, मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि इस घटना में 200 से अधिक लोग शामिल है। हम शेष को बचाने और अन्य शवों को बरामद करने के लिए बचाव दल और सरकार की अन्य एजेंसियों के साथ सहयोग जारी रखें हैं।

    पहले के एक बयान में, क्वारा राज्य के गवर्नर अब्दुलरहमान अब्दुलराजक ने कहा कि घटना के पीड़ित पड़ोसी नाइजर में एक शादी समारोह से लौट रहे थे, जब यह घटना हुई।

    इस पश्चिम अफ्रीकी देश में अक्सर नाव दुर्घटनाओं की खबरें आती रहती हैं।

  • क्या नेताजी वामपंथी थे?

    देश : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बीते  दिन बयान दिया कि यदि नेता जी जिन्दा होते तो देश का बंटवारा नही होता। उनके बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता  जयराम रमेश ने कहा – जो लोग चुप रहते हैं अधिक बोलते नहीं है वह अब बिगाड़ने वाले लोगों की जमात में शामिल हो गए हैं। उन्हें याद होना चाहिए कि बंगाल बटवारे का जिम्मेदार कौन है जन संघ नेता श्यामा प्रसाद की वजह से ही बंगाल विभाजन हुआ। 

    क्या बोले जयराम रमेश : 

    क्या नेताजी ने गांधी को चैंलेंज किया था? बेशक, उन्होंने किया था.
    क्या नेताजी वामपंथी थे? बेशक, वे थे.
    क्या नेताजी सेक्युलर थे? बेशक, और डटकर थे.
    अगर नेताजी जिंदा होते तो क्या बंटवारा नहीं होता? कौन कह सकता है क्योंकि 1940 तक नेताजी फॉरवर्ड ब्लॉक बना चुके थे. इस पर आपकी राय हो सकती है लेकिन यह एक विरोधाभासी सवाल है.

    जयराम रमेश ने आगे लिखा, एक बात डोभाल ने नहीं कही. नेताजी के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के कड़े विरोध के बावजूद बंगाल के विभाजन का समर्थन करने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे. मैं डोभाल को रुद्रांशु मुखर्जी की 2015 की बेहतरीन किताब पैरेलल लाइव्स की एक प्रति भेज रहा हूं. उन्हें कम से कम कुछ वास्तविक इतिहास जान लेना चाहिए.

  • रोजगार के मुद्दे पर भड़के राहुल गाँधी

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रोजगार के मुद्दे पर एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने पीएसयू सेक्टर में रोजगार के अवसरों की कमी को लेकर ट्वीट किया है. जिसमें उन्होंने सरकार पर देश में रोजगार घटने का आरोप लगाया था। उन्होंने ट्वीट किया, ”पीएसयू भारत का गौरव हुआ करते थे और रोजगार के लिए हर युवा का सपना होता था। लेकिन, आज वे सरकार की प्राथमिकता नहीं हैं। 2022 में केवल 1.46 मिलियन बचे हैं। क्या एक प्रगतिशील देश में रोजगार घटता है?” “बीएसएनएल ने 1,81,127 नौकरियां खोई हैं, सेल ने 61,928, एमटीएनएल ने 34,997, एसईसीएल ने 29,140, ​​एफसीआई ने 28,063, ओएनजीसी ने 21,120। हर साल 2 करोड़ नौकरियों के झूठे वादे करने वालों ने उन्हें बढ़ाने के बजाय 2 लाख नौकरियां पैदा की हैं।” उससे ज्यादा खत्म करो!”

    RAHUL GANDHI TWEET:

    पीएसयू भारत की शान हुआ करते थे और रोज़गार के लिए हर युवा का सपना हुआ करते थे। मगर, आज ये सरकार की प्राथमिकता नहीं हैं। देश के पीएसयू में रोज़गार, 2014 में 16.9 लाख से कम हो कर 2022 में मात्र 14.6 लाख रह गए हैं। क्या एक प्रगतिशील देश में रोज़गार घटते हैं? BSNL में 1,81,127 रोज़गार घटे SAIL में 61,928 MTNL में 34,997 SECL में 29,140 FCI में 28,063 ONGC में 21,120 हर साल 2 करोड़ रोज़गार का झूठा वादा करने वालों ने नौकरियां बढ़ाने की जगह 2 लाख से ज़्यादा खत्म कर दीं! इसके ऊपर इन संस्थानों में कॉन्ट्रैक्ट भर्तियां लगभग दोगुनी कर दीं। क्या कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी बढ़ाना आरक्षण का संवैधानिक अधिकार छीनने का तरीका नहीं है? क्या ये आखिर में इन कंपनियों के निजीकरण की साज़िश है? उद्योगपतियों का ऋण माफ, और PSU’s से सरकारी नौकरियां साफ! ये कैसा अमृतकाल? अगर यह वाकई में ‘अमृतकाल’ है तो नौकरियां इस तरह गायब क्यों हो रही हैं? देश इस सरकार के दौर में रिकॉर्ड बेरोज़गारी से जूझ रहा है क्योंकि लाखों युवाओं की उम्मीदों को कुछ पूंजीपति मित्रों के फायदे के लिए कुचला जा रहा है। भारत के पीएसयू को अगर सरकार से सही वातावरण और समर्थन मिले, वो अर्थव्यवस्था और रोज़गार दोनों को बढ़ाने में समर्थ हैं। पीएसयू देश और देशवासियों की संपत्ति हैं, उन्हें आगे बढ़ाना है, ताकि वो भारत की प्रगति के मार्ग को मज़बूत कर सकें।

     

  • केजीएमयू में एचसीवी दवाओं का स्टॉक खत्म, मरीज परेशान

    किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में दवाओं का स्टॉक खत्म होने से यहां आने वाले हेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी) से पीड़ित मरीज वापस लौटने को मजबूर हैं और खुले बाजार से लगभग 8,000-10,000 रुपये की कीमत पर दवाएं खरीद रहे हैं। लिवर सिरोसिस के एडवांस स्टेज में मरीजों को उनके इलाज के लिए दो जरुरी दवाओं की आवश्यकता होती है। वर्तमान में, लगभग 200-250 एचसीवी मरीजों का केजीएमयू में इलाज चल रहा है और इतनी ही संख्या में नए मरीज यहां हर महीने पंजीकृत होते हैं।

    विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत केंद्र से दवाएं मिलती हैं, लेकिन मौजूदा स्टॉक केवल पुराने मरीजों के लिए ही है। अधिकारियों ने बताया कि नया स्टॉक 30 दिन पहले आने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केजीएमयू के अधिकारियों ने दवा के स्टॉक को फिर से भरने की तत्काल आवश्यकता को संबोधित करते हुए एनएचएम को एक अनुरोध पत्र सौंपा है। केजीएमयू में एचसीवी के लिए उपचार का एक विशिष्ट कोर्स तीन महीने तक चलता है, जो नए मरीजों के लिए इलाज शुरू करने के लिए दवा के समय पर आगमन के महत्व पर जोर देता है।

    केजीएमयू में हेपेटाइटिस कंट्रोल कैंपेन के नोडल अधिकारी प्रोफेसर सुमित रूंगटा ने बताया कि मौजूदा और नए हेपेटाइटिस सी मरीजों की मांगों को पूरा करने के लिए दवा का मौजूदा स्टॉक अपर्याप्त है।हम केवल पंजीकृत मरीजों को दवा वितरित कर रहे हैं, ताकि उनके इलाज में रुकावट न आए। संपर्क करने पर, राज्य हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी विकासेंदु अग्रवाल ने कहा: केंद्र सरकार से मांग की गई है और एक या दो दिन में मध्य प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और पश्चिम बंगाल से नया स्टॉक आने की संभावना है।उन्होंने कहा कि उन्हें देरी के सटीक कारण की जानकारी नहीं है, लेकिन सप्लाई चेन या टेंडर प्रोसेस में कोई समस्या हो सकती है।

  • यूपीए सरकार की तुलना में मोदी सरकार ने दी ज्यादा नौकरी- जितेंद्र सिंह

    बेरोजगारी के आंकड़े को लेकर विपक्षी दलों की तरफ से लगातार राजनीतिक हमलों का सामना कर रही मोदी सरकार की तरफ से पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया है कि पिछले 9 सालों के दौरान मोदी सरकार ने यूपीए सरकार की तुलना में ज्यादा लोगों को नौकरियां दी है। भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यूपीए सरकार के पहले 9 वर्ष के दौरान 6,02,045 भर्तियां की गईं। जबकि, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 9 वर्षों के दौरान 8,82,191 भर्तियां की गईं। नौकरियों के गणित और गुणवत्ता, दोनों ही मामलों में मोदी सरकार, यूपीए सरकार की तुलना में कई गुना ज्यादा बेहतर रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने नौकरियों के बारे में विस्तार से बताते हुए दावा किया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2004 से 2013 के दौरान एसएससी द्वारा 2,07,563 भर्तियां की गई थी। जबकि, मोदी सरकार के 9 वर्षों के दौरान 4,00,691 भर्तियां की गई है। इसी तरह से यूपीए सरकार ने यूपीएससी के द्वारा 45,431 नौकरियां दी थी। जबकि, मोदी सरकार में यह संख्या बढ़कर 50,906 पहुंच गई।

    उन्होंने आगे कहा कि यूपीए सरकार ने आरआरबी के द्वारा 3,47,251 नौकरियां दी थी। लेकिन, मोदी सरकार ने आरआरबी के जरिए इससे कहीं ज्यादा यानी 4,30,594 लोगों को नौकरियां दी है।

    इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने पेंशन, कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि, कर्मचारी कल्याण, भ्रष्टाचार मुक्त नियुक्ति प्रक्रिया, अच्छे और ईमानदार कर्मचारियों को बढ़ावा देने और शिकायतों के उचित निवारण की व्यवस्था का दावा करते हुए यह भी यह भी जोड़ा कि भारत में ग्रीवांस सेल में जहां एक साल में पूरे देश से सिर्फ 2 लाख शिकायतें दर्ज होती थीं। अब इसको कंप्यूटराइज्ड कर, पांच दिन के अंदर ही शिकायतों का निवारण करने की व्यवस्था बनाई गई है और इसकी वजह से आज सालाना देश भर से करीब 5 लाख तक शिकायतें दर्ज हो रही हैं।

    उन्होंने स्टार्टअप्स से जुड़ी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को जागरूक किया कि रोजगार का अर्थ सिर्फ सरकारी नौकरी ही नहीं है और इसका परिणाम यह हुआ है कि आज देश में स्टार्टअप्स की संख्या 350 से बढ़कर 1 लाख हो चुकी है। इसके साथ ही ‘अरोमा मिशन’ के तहत 3 हजार एग्रीटेक स्टार्टअप भी शुरू हो चुके हैं।

  • नेपाल में पूरी तरह से बंद ‘आदिपुरुष’ की स्क्रीनिंग

    फिल्म ‘आदिपुरुष’ में सीता के जन्मस्थान को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद नेपाल में फिल्म की स्क्रीनिंग बंद कर दी गई है। नेपाल में फिल्म के एकमात्र वितरक मनोज राठी ने बताया कि पूरे देश में स्क्रीनिंग रोक दी गई है।काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने 15 जून को नेपाल की राजधानी में सिनेमा हॉल को निर्देश दिया था कि जब तक निर्माता सीता के जन्मस्थान की गलती को सुधार नहीं लेते, तब तक फिल्म की स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 5 और 56 (6) का हवाला देते हुए, शाह ने कहा कि संघीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करें और बिना किसी बदलाव के फिल्म की स्क्रीनिंग की अनुमति देने से नेपाल की राष्ट्रीयता, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय पहचान को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

    मेयर की चेतावनी के एक दिन बाद, काठमांडू के सभी सिनेमाघरों ने सुरक्षा कारणों से ‘आदिपुरुष’ की स्क्रीनिंग बंद कर दी। मेयर ने रविवार को फिल्म के खिलाफ अपने विरोध का आह्वान किया और सिनेमा हॉल से फिल्म को प्रदर्शित नहीं करने का आग्रह किया, जब तक कि फिल्म निर्माता कथित गलती को ठीक नहीं कर लेते।

    नेपाल के सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म की स्क्रीनिंग की मंजूरी को वापस लेने का फैसला किया है। नेपाल फिल्म यूनियन के वाइस चेयरमैन भास्कर धुनगाना ने कहा, हमने सुरक्षा कारणों से फिल्म की स्क्रीनिंग बंद करने का फैसला किया है। रामायण के अनुसार, सीता का जन्म जनकपुर में हुआ था, जो नेपाल में पड़ता है और भगवान राम ने आकर उनसे विवाह किया था।