Category: national

  • राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पीएम मोदी को किया जाएगा आमंत्रित

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज अयोध्या में राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए जाने वाले रामलला के सप्ताह भर चलने वाले ‘प्राण-प्रतिष्ठा’ समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा। सप्ताह भर चलने वाला समारोह जनवरी 2024 में मकर संक्रांति से या उसके एक दिन बाद शुरू होगा। ट्रस्ट प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए एक शुभ तिथि तय करने के लिए ज्योतिषियों से परामर्श कर रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के मुताबिक, ट्रस्ट देशभर के मंदिरों में ‘अयोध्या प्राण-प्रतिष्ठा’ का आयोजन भी करेगा।

    यह निर्णय लिया गया है कि राम लला की मूर्ति की स्थापना के लिए सात दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाएगा। ट्रस्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भेजेगा। राय ने कहा, चूंकि अभी तक आयोजन की कोई तारीख तय नहीं की गई है, प्रधान मंत्री को दिसंबर (2023) और 26 जनवरी (2024) के बीच कार्यक्रम की संभावित तिथि के बारे में अवगत कराया जाएगा।

    राम मंदिर के चल रहे निर्माण कार्य में गुरुवार से मंदिर के भूतल के फर्श का काम शुरू होने की संभावना है। राय ने कहा, राजस्थान के सफेद मकराना मार्बल का इस्तेमाल राम मंदिर के फर्श के लिए किया जाएगा। उन्हें विश्वास है कि राम मंदिर के भूतल का निर्माण कार्य इस साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।

  • शिक्षा समाज के लोगों की भावनाओं को समझने का जरिया है: मुख्यमंत्री

    एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना के युवा संगम कार्यक्रम के निमित्त मंगलवार को आईआईटी पलक्कड़ केरल व लक्षदीप के 45 विद्यार्थी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास, 5 कालिदास मार्ग पर मिले। यहां सबसे पहले मुख्यमंत्री ने सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों से परिचय प्राप्त किया। 45 में से 35 केरल व 10 लक्षदीप के छात्र हैं। इनमें 25 छात्र व 20 छात्राएं शामिल रहीं। मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने उन्हें सफल जीवन के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों से संवाद किया। साथ ही उनके मन की जिज्ञासाओं को भी शांत किया।

    सीएम ने कहा कि पीएम मोदी की प्रेरणा से शिक्षा मंत्रालय ने यह अभिनव प्रयोग प्रारम्भ किया है। आप जिस केरल से आये हैं, वहीं से कई वषों पहले शंकराचार्य भी आये थे और उन्होंने चार मठ स्थापित किए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा समाज के लोगों की भावनाओं को समझने का जरिया है। ये नई शिक्षा नीति को ही परिलक्षित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपमें से कई लोग पहली बार यूपी आये होंगे। कोई किसी भी राज्य का हो पर उनका भाव देश प्रेम का ही होगा। जब देश संकट में आता है तो सभी राज्य एक होकर खड़े हो जाते हैं।

    कहा कि आपने उत्तर प्रदेश को देखा। केरल की तरह ही उत्तर प्रदेश भी देश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। आबादी (25 करोड़) के लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा राज्य है। यहां छह करोड़ मुस्लिम आबादी है। इसके बावजूद यहां न कर्फ्यू है और न ही दंगा। सीएम ने बताया कि छह वर्ष पहले तक यहां ऐसे हालात नहीं थे। धार्मिक अवसरों पर हिंसा होती थी। लोगों का पलायन होता था। 6 वर्षों में हमने इसे बदलने का प्रयास किया। इसमें युवाओं और आम लोगों का भी भरपूर साथ मिला है। इसी की वजह से आज उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। सुरक्षा के लिये हमने हर जाति, मजहब से संवाद स्थापित किया। संवाद से ही सभी रास्तों का हल निकाला जाता है। सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर बिना भेदभाव कार्रवाई करते हैं। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आज 25-30 लाख लोग स्नान कर रहे होंगे। आज ही के दिन गंगा का स्वर्ग से धरती पर अवतरण हुआ। श्रद्धाभाव से आयोजन हो रहे, कोई समस्या नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में तकनीक का इस्तेमाल तेजी से शुरू हुआ है। इसके कारण रोजगार सुलभ हुए हैं। तकनीक के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार भी कम हुआ है। आज डीबीटी के माध्यम से पूरा पैसा लाभार्थी को मिल रहा है। आज हम डिजिटल लेनदेन के दौर में पहुंच चुके हैं। सीएम ने सुझाव दिया कि जब हम कोई ट्रेड तय करते हैं, तभी लक्ष्य निर्धारित कर लें। 2 करोड़ युवाओं को हम टेबलेट अथवा स्मार्टफोन उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि युवा तकनीक के साथ तालमेल बिठा सके। तकनीक के प्रयोग से लोगों में नया उत्साह दिख रहा है। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की शुरूआत हुई है, जो प्रदेश की तरक्की में सकारात्मक बदलाव है। यूपी में आज विकास हो रहा है। ओडीओपी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 96 लाख एमएसएमई के माध्यम से प्रदेश में रोजगार की संभावनाएं कई गुना बढ़ गयी हैं। एक्सपोर्ट लगभग तीन गुना हो गया है। योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

    केरल व लक्षदीप के बच्चे योगी आदित्यनाथ से मिलकर फूले न समाए। बच्चों ने काफी उत्सुकता से मुख्यमंत्री से सवाल किए। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत के संन्यास का पहला धर्म सेवा है। हम सेवा को प्राथमिकता पर रखते हैं। धर्म का आशय कर्तव्य से है। कर्तव्य को सेवा से जोड़कर बढ़ाया है, इसलिए उत्तर प्रदेश विरासत का सम्मान कर तेजी से विकास के पथ पर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के प्रवास के सुखदायी होने की कामना की।

    45 विद्यार्थियों का यह समूह 26 से 31 मई तक मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज में शैक्षणिक, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन के बारे में जानने आये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप लोगों ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ, गंगा आरती समेत लखनऊ, प्रयागराज के संग्रहालय-संगम समेत विभिन्न हिस्सों में भ्रमण किया। प्रयागराज विश्वविद्यालय में आपको वहां के प्रवक्ताओं के अनुभव भी जानने के अवसर मिले होंगे। निश्चित तौर पर आपको भविष्य में इसका लाभ मिलेगा। सीएम ने कहा कि आप उत्तर प्रदेश की विधानसभा को अवश्य देखें। यह देश की पहली पेपरलेस विधानसभा है। जल्द ही इसके 100 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने उपस्थित छात्रों व प्रतिनिधियों को ओडीओपी के उत्पाद भी भेंट किए।

    प्रतिनिधिमंडल में मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के कार्यवाहक निदेशक रवि प्रकाश तिवारी, शिक्षा मंत्रालय से सुरेंद्र नायक, अखिल भारतीय तकनीक शिक्षा परिषद के असिस्टेंट डायरेक्टर जॉन बी डब्लू आदि मौजूद रहे।

  • गोवा के राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने राज्य के स्थापना दिवस पर दीं शुभकामनाएं

    गोवा के राज्यपाल पी.एस. श्रीधरन पिल्लई और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने मंगलवार को तटीय राज्य के स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में, राज्यपाल ने कहा, देश के अन्य राज्यों की तुलना में राज्य के सामाजिक आर्थिक संकेतक बहुत प्रभावशाली हैं। गोवा में देश में प्रति व्यक्ति आय का उच्चतम अनुमान है, जो एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था को चित्रित करता है। राज्यपाल ने कहा कि 30 मई, 1987 को गोवा केंद्र शासित प्रदेश से भारतीय संघ का 25वां राज्य बना था।

    अपने संदेश में, मुख्यमंत्री सावंत ने कहा कि यह दिन एक महत्वपूर्ण अवसर है जो हमारे सांस्कृतिक रूप से विविध और जीवंत राज्य के इतिहास में बहुत महत्व रखता है।

    एक ट्वीट में उन्होंने कहा, आज, हम उस दिन को याद कर रहे हैं, जब गोवा आधिकारिक तौर पर भारत का 25वां राज्य बन गया था। यह एक महत्वपूर्ण अवसर है जो हमारे सांस्कृतिक रूप से विविध और जीवंत राज्य के इतिहास में बहुत महत्व रखता है। इस गोवा राज्य दिवस पर, मैं गोवा के प्रत्येक नागरिक को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आइए हम इस दिन को उत्साह के साथ मनाएं, अपने प्यारे राज्य की समृद्ध विरासत और आशाजनक भविष्य को संजोए।

  • भारत, यूएई, अमेरिका व सऊदी के सहयोग का उद्देश्य क्षेत्र का विकास है : यूएनएससी अध्यक्ष

    सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष लाना नुसेबीह के अनुसार भारत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और अमेरिका के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की बैठक बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत करने और क्षेत्र के विकास में सहयोग करना है। सुरक्षा परिषद में संयुक्त अरब अमीरात के स्थायी प्रतिनिधि नुसेबीह, जिन्होंने गुरुवार को परिषद के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला, ने कहा कि इन देशों के हित वास्तव में साझा हैं। रियाद और आई2यू2 क्वाड में उस बैठक के बारे में अध्यक्ष पद संभालने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि यह बहुपक्षीय प्रणाली क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के बारे में है।

    उन्होंने कहा,यह अर्थव्यवस्था, व्यापार और लोगों से लोगों के प्रवाह में सीमाओं और बाधाओं को कम करने के तरीकों की तलाश कर रहा है। सऊदी अरब के एक बयान के अनुसार, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, संयुक्त अरब अमीरात के तहनून बिन जायद अल नाहयान और अमेरिका के जैक सुलिवान ने पिछले महीने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ क्षेत्र में विकास और स्थिरता पर चर्चा करने के लिए रियाद में मुलाकात की।

    हालांकि वे औपचारिक रूप से एक समूह के रूप में एक साथ नहीं आए। पिछले साल भारत, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के नेताओं ने क्वाड लॉन्च किया। नुसेबीह ने कहा कि इन पहलों में शामिल देश नवीकरणीय ऊर्जा, हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकी, रोजगार और विकास में सहयोग पर चर्चा की जाती है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि ये ऐसी साझेदारियां हैं, जो हमारी आबादी में बहुत रुचि पैदा करेंगी।

  • क्यों राहुल पर भड़के एस जयशंकर

    Congress On Jaishankar: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार (8 जून) को एक बार फिर राहुल गांधी के अमेरिका में दिए बयानों को लेकर निशाना साधा, जिस पर कांग्रेस ने नाराजगी जताते हुए पलटवार किया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा जिस व्यक्ति ने राष्ट्रीय राजनीति को देश से बाहर ले जाने की प्रथा शुरू की, उसी ने उन्हें (जयशंकर को) मंत्री पद दिया. जयराम रमेश का ताजा हमला एस जयशंकर के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी को विदेश में भारत की बुराई करने की आदत है.

    गुरुवार (8 जून) को विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के अमेरिका में दिए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि मुझे नहीं लगता कि विदेश जाकर भारत की बुराई करने से देश में उनकी महत्वा बढ़ेगी. उन्होंने यह भी कहा था कि विदेश में जाकर घरेलू मुद्दों को रखना सही नहीं है.

    पीएम मोदी पर निशाना

    विदेश मंत्री के बयान पर जयराम रमेश ने बिना नाम लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ट्विटर पर लिखा, “जिस व्यक्ति ने राष्ट्रीय राजनीति को देश से बाहर ले जाने की प्रथा शुरू की, वो कोई और नहीं, बल्कि वही है, जिसने आपको (जयशंकर को) आपका मंत्री पद दिया. मंत्री महोदय आप इसे जानते हैं, लेकिन इसे स्वीकार नहीं करेंगे.

    जयशंकर के बयान पर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी प्रतिक्रिया दी है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने सुरजेवाला के हवाले से लिखा, भारतीय जनता पार्टी ने विदेश मंत्री को पुरानी स्क्रिप्ट दे दी है और उन्हें अब एक नई पढ़नी चाहिए.

    सुरजेवाला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों का मज़ाक उड़ाया है और देश के 70 साल से अधिक पुराने इतिहास की बात की है. राहुल गांधी ने जो कहा है वह केवल सच है कि हमारे संवैधानिक निकायों पर सुनियोजित व्यवस्थित हमला हो रहा है.”

    क्या कहा था विदेश मंत्री ने ?

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि “उनकी (राहुल गांधी) आदत है कि जब वो बाहर जाते हैं तो वे देश की आलोचना करते हैं, हमारी राजनीति के बारे में टिप्पणी करते हैं. दुनिया देख रही है कि इस देश में चुनाव होते हैं और चुनाव में कभी एक पार्टी जीतती है, कभी दूसरी पार्टी. अगर देश में लोकतंत्र नहीं है तो ऐसा परिवर्तन तो नहीं आना चाहिए.” इसके साथ ही उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव में एक बार फिर जीत का दावा किया और कहा, हमें पता है कि 2024 के चुनाव का नतीजा तो वही होगा.

  • मणिपुर में हिंसा खत्म करने की कवायद में महिलाएं आगे

    मणिपुर में महिलाएं हमेशा केंद्र में रही हैं, और पूर्वोत्तर राज्य में चल रही जातीय हिंसा के बीच शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में भूमिका निभाने में भी यह कोई अपवाद नहीं है। 3 मई को संघर्ष शुरू होने के बाद से 100 से अधिक लोग मारे गए हैं और 320 से अधिक अन्य घायल हुए हैं।

    इम्फाल में स्थित दुनिया के सबसे बड़े महिलाओं द्वारा संचालित बाजार इमा कैथल या मदर्स मार्केट के लगभग 4,000 विक्रेताओं ने मंगलवार को मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति की बहाली की मांग को लेकर तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू किया।

    आंदोलनकारी महिला विक्रेताओं ने नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने और म्यांमार, नेपाल और बांग्लादेश से घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस बुलाने की भी मांग की।

    मणिपुरी बुद्धिजीवी और लेखक राजकुमार कल्याणजीत सिंह ने कहा, 500 से अधिक वर्षों के इतिहास वाले इमा मार्केट में विक्रेताओं को ‘इमा’ या माताओं के रूप में जाना जाता है, और अधिकतर विक्रेता 50 से 70 वर्ष की आयु के बीच की हैं। उन्होंने कहा, 1891 में, अंग्रेजों ने कड़े राजनीतिक और आर्थिक सुधार पेश किए, जिससे बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

    कल्याणजीत सिंह, जो मणिपुरी समाचार पत्र ‘मारूप’ के संपादक भी हैं, ने कहा, उच्च कराधान सहित कई उपायों को लागू किया गया, जिसने अंतत: राज्य के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को सामान्य रूप से और विशेष रूप से मणिपुरी समाज को परेशान किया। इन सभी ने अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ विद्रोह करने के लिए 1939 में ‘नूपी लाना’ (महिला युद्ध) आंदोलन शुरू किया। ब्रिटिश नीतियों की निंदा करने के लिए विरोध रैलियां, जन सभाएं और अभियान आयोजित किए गए। अंग्रेजों ने आंदोलन को विफल करने के लिए बाजार की इमारतों को बाहरी खरीदारों और विदेशियों को बेचने की कोशिश की, लेकिन मणिपुर की महिलाएं उनके खिलाफ खड़ी हुईं और आक्रामक रूप से अपने बाजार का बचाव किया।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हिंसाग्रस्त राज्य के चार दिवसीय दौरे (29 मई से 1 जून) के दौरान मिले 47 नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) में से बड़ी संख्या में सीएसओ महिलाओं द्वारा संचालित निकाय हैं।

    मणिपुर में महिलाएं, कई अन्य सामाजिक बुराइयों के अलावा, 1970 के दशक से शराब के खिलाफ भी लड़ रही हैं, जिसके कारण आरके रणबीर सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन मणिपुर पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार को 1991 में मणिपुर शराब निषेध अधिनियम पारित करने के लिए मजबूर किया।

    कानून अभी भी लागू है।

    1991 में, मणिपुर आधिकारिक रूप से केवल पारंपरिक उद्देश्यों के लिए शराब बनाने के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लोगों के लिए छूट के साथ एक शुष्क राज्य बन गया। हालांकि, निषेध के बावजूद, शराब की खपत को सफलतापूर्वक नियंत्रित नहीं किया जा सका और शराब व्यापक रूप से उपलब्ध रही, जिससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में शराब से संबंधित खतरों के खिलाफ आंदोलन हुए।

    मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली वर्तमान मणिपुर सरकार ने पिछले साल शराबबंदी को आंशिक रूप से हटाने का फैसला किया था क्योंकि सरकार को सालाना 600 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हो रहा था। सरकार के निर्णय के अनुसार, शराब की बिक्री जिला मुख्यालयों और कुछ अन्य चिन्हित स्थानों जैसे पर्यटन स्थलों, रिसॉर्ट्स, सुरक्षा शिविरों और कम से कम 20 बिस्तरों वाले होटलों तक सीमित होगी।

    कोएलिशन अगेंस्ट ड्रग्स एंड अल्कोहल (सीएजीए) सहित कई महिला कार्यकर्ताओं और संगठनों ने दोहराया कि वे सरकार के फैसले को कभी स्वीकार नहीं करेंगी क्योंकि इससे आने वाली पीढ़ियों को नुकसान होगा।

    इन संगठनों का अनुमान था कि अगर सरकार अपने फैसले को लागू करती है, तो यह आबादी के एक बड़े हिस्से, खासकर युवा पीढ़ी के लिए मौत की घंटी होगी।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, ज्यादातर महिला विधायक, भाजपा सरकार की नीति के आलोचक हैं।

    महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए, महिला नागरिकों ने 1970 के दशक के अंत में अखिल मणिपुर महिला सामाजिक सुधार और विकास समाज या नूपी समाज का गठन किया।

    ‘मीरा पैबिस’ (महिला मशालवाहक) ने रात में गांवों में गश्त की और शराबी और शराब तस्करों को हिरासत में लिया और यहां तक कि उन्हें सजा भी दी। अभियुक्तों को मैं शराबी हूं, मैं एक बूटलेगर हूं चिल्लाते हुए खाली बोतलों की माला पहनाकर मेंढक मार्च करने के लिए कहा गया था।

    ब्रिटिश शासन के बाद से, तत्कालीन रियासतों में महिलाएं समाज में एक प्रमुख भूमिका निभाती रही हैं। आर्थिक गतिविधियों से लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन, घरेलू मामलों से लेकर खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों तक, नशीली दवाओं के खतरे और उग्रवाद के खिलाफ लड़ने के लिए सामाजिक जागरूकता में महिलाओं की प्रमुख भूमिका रही है। हालांकि, एक पुरुष-प्रधान समाज में, उनके (महिलाओं) पास विधायक या मंत्री बनने या कम से कम एक प्रभावशाली प्रशासनिक स्थिति में होने का एक महत्वहीन मौका है।

    पद्म श्री अवार्डी (2007) और 13 खेल हस्तियों और पदक विजेताओं, जिनमें ज्यादातर महिला खिलाड़ी हैं, के साथ प्रमुख रंगमंच कलाकार सावित्री हेसनम ने केंद्रीय गृह मंत्री से जल्द से जल्द मणिपुर में शांति और सद्भाव बहाल करने और कुकी उग्रवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया। साथ ही चेतावनी दी, कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो वे अपने पदक और पुरस्कार लौटा देगीं।

    सेलिब्रिटी खेल हस्तियों में अर्जुन पुरस्कार विजेता भारोत्तोलक कुंजारानी देवी, भारतीय महिला फुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान ओइनम बेम बेम देवी, मुक्केबाज एल सरिता देवी, ध्यानचंद पुरस्कार विजेता अनीता चानू, ओलंपियन जुडोका लिकमाबम शुशीला देवी, ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता (मुक्केबाजी) एल इबोम्चा सिंह शामिल हैं।

    मणिपुर की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम चानू शर्मिला 4 नवंबर 2000 से अगस्त 2016 तक 16 साल तक भूख हड़ताल पर रहीं, 2017 के मणिपुर विधानसभा चुनाव से पहले पीपुल्स रिसर्जेस एंड जस्टिस अलायंस बनाने से पहले सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम 1958 को रद्द करने की मांग कर रही थीं।

    चानू ने हाल ही में मणिपुर की महिलाओं से आग्रह किया, चाहे उनकी जातीय पहचान कुछ भी हो, राज्य में शांति लाने के लिए मिलकर काम करें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री शाह से समस्या को समझने और उन्हें हल करने के लिए मणिपुर का दौरा करने का अनुरोध किया था।

  • यूरोपीय संघ ने जुकरबर्ग को दी ‘प्रतिबंधों’ की चेतावनी

    यूरोपीय संघ (ईयू) ने मेटा के संस्थापक और सीईओ मार्क जुकरबर्ग को चेतावनी दी है कि वे इंस्टाग्राम पर बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करें या ‘प्रतिबंधों’ का सामना करने के लिए तैयार रहे। यह चेतावनी उन रिपोर्ट्स के बाद आई है जिनमें कहा गया था कि इंस्टाग्राम के रिकमेंडेशन एल्गोरिदम कथित रूप से पीडोफाइल के नेटवर्क को बढ़ावा दे रहे हैं, जो पॉपुलर इमेज शेयरिंग प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज कंटेंट को कमीशन और बेचते हैं।

    वॉल स्ट्रीट जर्नल ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स एमहस्र्ट विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर इंस्टाग्राम अकाउंट्स के ऐसे नेटवर्क का पदार्फाश करने के लिए काम किया। एक ट्वीट में, यूरोपीय संघ के आंतरिक बाजार आयुक्त थिएरी ब्रेटन ने कहा कि कंपनी का चाइल्ड प्रोटेक्शन पर वॉलंट्री कोड काम नहीं कर रहा है।

    उन्होंने ट्वीट में कहा, मार्क जुकरबर्ग को अब स्पष्टीकरण देना चाहिए और तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। मैं 23 जून को मेनलो पार्क में मेटा के मुख्यालय में उनके साथ चर्चा करूंगा। 25 अगस्त के बाद, डिजिटल सेवा अधिनियम (डीएसए) के तहत, मेटा को अब उपायों का प्रदर्शन करना होगा या फिर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

    बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) के प्रसार को रोकने में विफलता के संबंध में डीएसए के अनुपालन न करने पर जुर्माना सोशल मीडिया कंपनी के वैश्विक वार्षिक कारोबार का 6 प्रतिशत तक हो सकता है। डब्ल्यूएसजे की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम अंडरऐज सेक्स कंटेंट के कमीशन और खरीदारी के लिए खुले तौर पर समर्पित अकाउंट्स के एक विशाल नेटवर्क को जोड़ने और बढ़ावा देने में मदद करता है।

    जांचकर्ताओं ने 128 अकाउंट्स को ट्विटर पर चाइल्ड सेक्स एब्यूज मटेरियल बेचने की पेशकश करते हुए पाया, जो उन्हें इंस्टाग्राम पर मिली संख्या के एक तिहाई से भी कम है। मेटा ने जर्नल को बताया कि वह इन रिपोर्ट्स पर कार्रवाई करने में विफल रही थी और अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रही थी।

  • Wrestlers Protest 10 प्वॉइंट्स में पूरी

    • मंगलवार (6 जून) को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्वीट कर लिखा, सरकार पहलवानों से चर्चा के लिए इच्छुक है. मैंने एक बार फिर पहलवानों को बातचीत के लिए बुलाया है.
    • इसके पहले 3 जून को सरकार की तरफ से डेडलॉक खोलने की कोशिश के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पहलवानों के बीच एक मुलाकात हुई. हालांकि इसमें कोई फैसला नहीं हुआ था.
    • गृह मंत्री से मुलाकात के दो दिन बाद 5 जून को साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया रेलवे में अपनी नौकरी से जुड़े कुछ काम निपटाने के लिए ऑफिस गए थे. दावा किया जाने लगा कि इन पहलवानों ने खुद को प्रदर्शन से दूर कर लिया. हालांकि, दोनों ने साफ कर दिया था कि उन्होंने अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी है
    • पहलवान साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने ट्वीट कर इन अफवाहों का खंडन किया. उन्होंने कहा कि वो अपना कुछ बचा हुआ काम करने के लिए रेलवे के ऑफिस गए थे. न्याय मिलने तक हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा. अगर इसके लिए हमें नौकरी भी छोड़नी पड़ी तो छोड़ देंगे.
    • रेसलर्स के आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत 21 अप्रैल को हुई थी जब वे बृजभूषण के खिलाफ एफआईआर लिखाने दिल्ली पुलिस के सामने पहुंचे थे. इस दौरान उनकी एफआईआर नहीं लिखी गई थी. इसके दो दिन बाद 23 अप्रैल को पहलवानों ने जंतर मंतर पर धरना शुरू कर दिया था.
    • धरने के साथ ही पहलवानों ने सुप्रीम बृजभूषण के खिलाफ एफआईआर लिखाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की मांग की. सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद दिल्ली पुलिस ने बताया कि वह एफआईआर लिखने को तैयार है. 28 अप्रैल को कनॉट प्लेस थाने में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हुई. इसमें एक एफआईआर नाबालिग पहलवान की शिकायत पर है, जिसके आधार पर बृजभूषण के खिलाफ पॉक्सो एक्ट लगाया गया है.
    • 3-4 मई की दरमियानी रात जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हो गई. पहलवानों ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि उन्होंने बारिश के चलते कुछ फोल्डिंग बेड मंगवाए थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसे नहीं लाने दिया. उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उनके साथ बल प्रयोग किया.
    • 28 मई को जब संसद के नए भवन का उद्घाटन हो रहा था, उसी दिन पहलवानों ने नई संसद के सामने महिला सम्मान महापंचायत का ऐलान किया. पहलवानों ने दिन में साढ़े 11 बजे के करीब संसद की तरफ मार्च शुरू किया लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया. इस दौरान बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट को हिरासत में ले लिया गया. सभी को बाद में छोड़ दिया गया. 28 मई को ही दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर से पहलवानों का प्रदर्शन हटा दिया. उनके सामान को वहां से हटाकर दूसरी जगह भेज दिया गया. दिल्ली पुलिस ने कहा कि अब पहलवानों को जंतर मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं होगी.
    • 30 मई को पहलवानों ने ऐलान किया कि वे अपने पदक गंगा में प्रवाहित कर देंगे. उसी दिन शाम को पहलवान अपने पदकों के साथ हरिद्वार के हर की पौड़ी पर पहुंचे. इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत और दूसरे खाप प्रतिनिधि वहां पहुंच गए और पहलवानों को पदक गंगा में प्रवाहित करने से रोका. इसके बाद नरेश टिकैत ने सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम दिया कि पहलवानों से बात करके मुद्दे का हल किया जााए.
    • 2 जून को बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या में होने वाली रद्द करने का ऐलान किया. बृजभूषण ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, पुलिस आरोपों की जांच कर रही है और सुप्रीम कोर्ट के गंभीर निर्देशों का सम्मान करते हुए “जन चेतना महारैली, 5 जून, अयोध्या चलो” कार्यक्रम कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है.

  • भारत निभा रहा है विश्व में महत्वपूर्ण भूमिका

    इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए राष्ट्रपति जो बाइडेन के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा भारत के साथ अमेरिका के संबंधों को दुनिया में सबसे बेहतर साबित करेगी। कर्ट कैंपबेल ने हडसन इंस्टीट्यूट थिंक टैंक को बताया कि भारत वैश्विक स्तर पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    इससे पहले अमेरिकी राज्य विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा था कि भारत के साथ साझेदारी अमेरिका के लिए सबसे अधिक परिणामी संबंधों में से एक है। वाशिंगटन आर्थिक संबंधों को गहरा करने और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है। पटेल ने कहा था कि, “हम इस महीने के अंत में पीएम मोदी की राजकीय यात्रा की मेजबानी करने के लिए बहुत उत्सुक हैं।

  • Conversion Racket: ऑनलाइन गेम के जरिए धर्मांतरण के मास्टरमाइंड बद्दो की कॉल डीटेल निकाल रही पुलिस

    Conversion Racket: गेमिंग ऐप के जरिए धर्मांतरण की जांच लगातार तेज होती जा रही है, इस मामले में पूरे रैकेट का सरगना शाहनवाज उर्फ बद्दो अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. जिसकी तलाश लगातार जारी है. बद्दो पर आरोप है कि उसने गेमिंग ऐप के जरिए जाल बिछाकर कई युवकों को धर्म परिवर्तन के लिए राजी किया. अब गाजियाबाद पुलिस इस मास्टरमाइंड के पीछे है. पुलिस के मुताबिक, बद्दो की कॉल डीटेल निकाली जा रही है, जिससे कई बड़े खुलासे हो सकते हैं.  

    पुलिस कर रही है तलाश 
    पिछले कई दिनों से शाहनवाज उर्फ बद्दो की गिरफ्तारी की कोशिश हो रही है, लेकिन वो लगातार पुलिस को चकमा दे रहा है. गाजियाबाद पुलिस महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस की मदद से ठाणे में लगातार रेड कर रही है. अब तक 10 जगहों पर छापेमारी की जा चुकी है. लगातार छापेमारी के बाद जल्द बद्दो की गिरफ्तारी हो सकती है. 

    जांच में क्या हुआ खुलासा
    गाजियाबाद पुलिस की जांच में शाहनवाज उर्फ बद्दो को लेकर कई खुलासे हुए हैं. जिनमें बताया गया है कि आरोपी अपना नाम बदलकर युवकों को झांसे में फंसाता था, वो किसी हिंदू नाम के जरिए गैर मुस्लिम नाबालिग लड़को का धर्मपरिवर्तन करवा रहा था. पुलिस के दावे के मुताबिक बद्दो ने हिन्दू नाम से कई फेक ID भी बना रखी थी. जिनका इस्तेमाल वो अलग-अलग बार करता था. 

    क्या है पूरा मामला
    धर्म परिवर्तन के इस बड़े रैकेट का तब खुलासा हुआ जब गाजियाबाद में रहने वाले एक युवक के पिता पुलिस में शिकायत लेकर आए. पिता ने पुलिस को जो बताया वो काफी हैरान करने वाला था. उन्होंने बताया कि उनका बेटा पिछले कई दिनों से दिन में पांच बार घर से बाहर निकलता था, जब उससे पूछा गया तो उसने बताया कि वो जिम जा रहा है. दिन में पांच बार जिम जाने की बात जब पिता को हजम नहीं हुई तो उन्होंने उसका पीछा किया, तब पता चला कि वो जिम नहीं बल्कि मस्जिद में नमाज पढ़ने जा रहा था. मामला पुलिस तक पहुंचा तो जांच शुरू हुई, नाबालिग ने बताया कि उसने मुंबई के एक शख्स से एक ऑनलाइन गेम खरीदा था, जिसके बाद शख्स लगातार बच्चे के संपर्क में था और धर्म परिवर्तन के लिए उसका ब्रेन वॉश कर रहा था. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि आरोपी शख्स ने कई और बच्चों को भी इसी तरह टारगेट किया था.