Category: national

  • Selfie लेने के लिए जैसे ही “मुंह” बनाया सामने खड़ी महिला गई भड़क और लड़की को जड़ दिए थप्पड़

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    फरीदाबाद । दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद में सेल्फी लेने के दौरान अजीब वाक्या पेश आया है। हुआ यूं कि एक लड़की ने मोबाइल फोन से सेल्फी लेने के लिए जैसे ही मुंह बनाया तो उसे ऐसा करते देख सामने खड़ी महिला भड़क गई। उसे लगा कि यह लड़की उसे चिढ़ा रही है। फिर क्या था फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर सेल्फी लेते समय मुंह बनाने पर भड़की महिला ने लड़की को थप्पड़ जड़ दिए।

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    थप्पड़ मारने से नाराज लड़की ने भी पलटवार शुरू कर दिया। उसने भी महिला को स्टेशन पर ही पीटना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच करीब 10 मिनट तक प्लैटफॉर्म नंबर 3 पर लड़ाई होती रही और दोनों एक दूसरे पर लात-घूंसे बरसाते रहे।

    दोनों के बीच हो रही लड़ाई के दौरान शकूरबस्ती दिल्ली से पलवल जाने वाली ईएमयू प्लैटफॉर्म पर आई तो महिला ने उसमें बैठकर भागने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस पर लड़की ने चलती ईएमयू से महिला को खींचने की कोशिश की। इस दौरान ईएमयू में सवार एक यात्री ने उसे धक्का दे दिया, जिससे ट्रेन के नीचे आने से बाल-बाल बची।

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    गिरकर लड़की हुई बेहोश

    जानकारी मिली है कि रेलवे प्लेटफॉर्म पर गिरने की वजह से किशोरी को काफी चोट आई और कुछ देर के लिए वह बेहोश हो गई। हालांकि, कुछ देर बाद होश में आने पर किशोरी अपनी रिश्तेदार के साथ बगैर शिकायत दिए घर लौट गई।

    यूं घटी 10 मिनट की घटना

    संजू दिल्ली में अपनी बहन के घर गई थीं। वापसी में 15 साल की बेटी आरती के साथ प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर ट्रेन से उतरीं। ट्रेन से उतरने के बाद आरती प्लैटफॉर्म पर सेल्फी लेने लगीं। काफी देर तक आरती मुंह बनाकर सेल्फी लेती रहीं।

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    इस दौरान पास में खड़ी महिला को लगा कि आरती उसे देखकर मुंह बना रही है। इस पर महिला ने आरती के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरती ने भी पलटवार शुरू कर दिया। हालांकि, मारपीट की सूचना पर जवान तुरंत मौके पर पहुंच गए थे। दोनों पक्षों में से किसी ने भी शिकायत नहीं दी है।

    बढ़ रही है सेल्फीसाइड नाम की बीमारी

    डॉ. दिनेश त्यागी के अनुसार युवाओं में मानसिक व्यग्रता रोग का इलाज काउंसिलिंग के जरिये संभव है। यदि कुछ सावधानियां बरती जाएं तो काफी हद तक सेल्फीसाइड नाम के विकार से बचाव किया जा सकेगा। सेल्फी का क्रेज ठीक है, लेकिन लोगों को सेल्फी से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक होना भी जरूरी है। यह न हो कि क्रेज के चक्कर में जान पर ही बन आए।

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  • मुंडन करवाना महिला अध्यापकों को पड़ा महंगा, जानिए कितनी चुकाई कीमत

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    भोपाल : मध्य प्रदेश में आंदोलन करना भी अब आसान नहीं रह गया है। अपनी मांगों की तरफ ध्यान दिलाने के लिए जिन महिलाओं सहित पुरुष अध्यापकों ने सामूहिक मुंडन कराया, उन्हें जगह का किराया एक लाख 40 हजार रुपये देना पड़ा। भुगतान की रसीदें सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। आजाद अध्यापक संघ ने शनिवार को जम्बूरी मैदान में प्रदर्शन किया था और इस दौरान महिला अध्यापकों सहित अन्य ने मुंडन कराया था। संगठन को जम्बूरी मैदान का किराया भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स (भेल) को चुकाना पड़ा।
    एक लाख 40 हजार रुपये भुगतान के बावत पूछे जाने पर भेल के जनसंपर्क अधिकारी विनोदानंद झा ने सोमवार को कहा, जम्बूरी मैदान में कोई भी कार्यक्रम करने की फीस निर्धारित है, जिसका भुगतान करना होता है। अध्यापक संघ ने भी उतनी राशि का भुगतान किया होगा। माक्र्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव बादल सरोज ने आंदोलनकारी अध्यापकों से शुल्क वसूली को लोकतंत्र का गला घोंटना करार दिया है।  उन्होंने कहा, राज्य सरकार के इशारे पर भोपाल जिला प्रशासन ने अध्यापकों को अपनी सभा करने के लिए पहले तो कोई स्थान नहीं दिया, बाद में भेल का जम्बूरी मैदान जाने के लिए कहा गया। अब पता चला है कि उनसे एक लाख 40 हजार रुपये वसूले गए।

    माकपा नेता ने कहा कि राज्य में भाजपा किस तरह लोकतंत्र का गला घोंट रही है, यह घटना उसकी एक बानगी है। भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। भ्रष्टाचार में लिप्त, किसानों की हत्यारी और शिक्षा व रोजगार की दुश्मन बनी भाजपा सरकार पूरे प्रदेश में सार्वजनिक सभाओं, धरनों और जुलूसों को लगभग प्रतिबंधित किए हुई है। ज्यादातर जगह बेमियादी धारा 144 थोप दी गई है। राजधानी तक में आंदोलन या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है।

    बादल सरोज ने कहा, इस तरह की तानाशाही बंद की जानी चाहिए। शिक्षकों से वसूल की गई राशि उन्हें लौटाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सोचना चाहिए कि बच्चों का भविष्य संवार रहीं महिलाओं में इतना आक्रोश क्यों है कि उन्होंने अपना मुंडन करवा लिया। प्रदेश के सभी लोकतंत्र हितैषी संगठनों और व्यक्तियों को मिलकर सरकार के इस रवैए के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

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  • बीजेपी के पूर्व यूपी अध्यक्ष, योगी सरकार में मंत्री की गिरफ्तारी-कुर्की का आदेश, 24 साल पुराना है मामला

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    उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री सूर्यप्रताप शाही के खिलाफ एक स्थानीय अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। साथ ही संपत्ति भी कुर्क करने के आदेश दिए गए हैं। यह आदेश कुशीनगर की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंगलवार (16 जनवरी) को  जारी किए।

    मंत्री के खिलाफ 1994 में कसया थाने में संग्रह अमीन चंद्रिका सिंह की ओर से मामला दर्ज करवाया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न की। इस मामले में पुलिस ने साल 2004 में आरोप पत्र दायर किया और मुकदमे की कार्यवाही शुरू हुई।

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    इसके बाद मंत्री शाही कोर्ट में हाजिर हुए और जमानत हासिल कर ली, लेकिन 14 मई 2007 के बाद से वह सुनवाई के दौरान कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। इसके बाद मंगलवार को सुनवाई के दौरान एसीजेएम चंद्रमोहन चतुर्वेदी ने मंत्री के 11 सालों तक गैरहाजिर रहने चलते गैर जमानती वारंट जारी कर दिया और कसया एओ को उनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए। साथ ही उनको 19 फरवरी, 2018 को न्‍यायालय के समक्ष हाजिर करने का आदेश दिया।

    सूर्य प्रताप शाही फिलहाल योगी सरकार में कृषि मंत्री हैं और उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से राजनीति में दस्तक दी और भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। इसके अलावा वे राम जन्‍मभूमि आंदोलन में सक्रिय रहे हैं और 1985 में पहली बार विधायक बने और दो साल बाद यूपी सरकार में मंत्री भी बने। शाही उत्तर प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष भी रहे हैं।

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बुधवार (17 जनवरी) को गुजरात दौरे के लिए राज्य में दोनों के स्वागत की जबरदस्त तैयारी की गयी है। इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू भारतीय पीएम मोदी के साथ महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे। इजराइली पीएम के स्वागत में अहमदाबाद के एक स्कूल के बच्चे इजराइली फोक डान्स पेश करेंगे। दोनों देशों के प्रधानमंत्री हवाईअड्डे से साबरमती आश्रम तक भव्य रोड शो निकालेंगे और इसके बाद एक उद्यमिता केंद्र व बागवानी केंद्र का दौरा करेंगे। इसके मद्देनजर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। विधानसभा चुनाव के बाद मोदी का अपने गृह राज्य का यह पहला दौरा होगा। दोनों प्रधानमंत्री सुबह 10.15 बजे अहमदाबाद हवाईअड्डे पहुंचेंगे। वहां से वे एक खुले वाहन में साबरमती के गांधी आश्रम जाएंगे। अहमदाबाद नगर निगम और गुजरात सरकार ने रास्ते में पचास जगहों पर स्टेज सजाए हैं जहां लोग इनका स्वागत करेंगे।

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  • जम्मू-कश्मीर: पाकिस्तान की गोलीबारी में 10,000 लोग हुए बेघर एक जवान शहीद, 3 की मौत

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    नई दिल्ली. पाकिस्तान ने शनिवार को संघर्षविराम (सीजफायर) का उल्लंघन करते हुए नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर गोलीबारी की, जिसमें भारतीय सेना का एक जवान शहीद हो गया, तीन नागरिक मारे गए और दर्जन भर से अधिक लोग घायल हो गए.

    शहीद जवान की पहचान सिपाही मंदीप सिंह के रूप में हुई है. वह पुंछ जिले के कृष्णा घाटी (केजी) सेक्टर में पाकिस्तानी गोलीबारी में शहीद हो गए.

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    जम्मू में जिला प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तीन नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि की है.पाकिस्तान की गोलीबारी के बीच बीते दो दिनों में सीमावर्ती गांवों के 10,000 से अधिक बाशिंदों को अपने मवेशियों, खेतों और घरों को छोड़कर गांवों से पलायन करना पड़ा है.जम्मू क्षेत्र में स्कूलों को बंद कर दिया गया है. पुलिस ने कहा कि नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा शुक्रवार को की गई गोलीबारी में दो सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे, जबकि दो नागरिक मारे गए थे.

    रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘पाकिस्तान द्वारा संघर्षविराम का उल्लंघन सुबह 8.20 बजे किया गया. उन्होंने छोटे एवं स्वचालित हथियारों से भारतीय चौकियों को निशाना बनाया. हमारे जवानों ने करारा जवाब दिया. हालांकि, पंजाब से ताल्लुक रखने वाले सिपाही मनदीप सिंह (23) गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया.’

    इससे पहले राज्य में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा की गई गोलीबारी में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का एक जवान और तीन नागरिक घायल हो गए थे. पुलिस सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि सीमा पर शनिवार को बढ़ी हिंसा में नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों सहित दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं.

    एक पुलिस अधिकारी ने कहा, अखनूर से लेकर आरएस पुरा तक पाकिस्तानी रेंजर्स ने अंधाधुंध गोलाबारी और गोलीबारी कर भारतीय नागरिकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.

    अधिकारी ने बताया कि परगवाल इलाके में बीएसएफ का एक जवान घायल हो गया, जबकि अखनूर सेक्टर के कानाचक में एक नाबालिग लड़की सहित तीन नागरिक घायल हो गए. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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  • विकास की दौड़ में सबसे आगे खड़े होने वाले पिछड़े जिले को गिफ्ट में मिलेंगे पीएम नरेंद्र मोदी

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    नई दिल्ली। नक्सल प्रभावित 35 जिलों समेत 115 जिलों में विकास की रफ्तार तेज करने को यूं तो पूरा सरकारी तंत्र लगा है। लेकिन उनके बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ा दी गई है। तय हुआ है कि जो जिला कसौटी पर सबसे आगे खड़ा होगा वहां 14 अप्रैल को बाबा साहेब आंबेडकर जयंती मनाने खुद प्रधानमंत्री मोदी जाएंगे। जिम्मेदारी के लिहाज से इन जिलों को नीति आयोग समेत 14 मंत्रालयों व विभागों में बांटा गया है।

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    इसके साथ हर केंद्रीय मंत्री के निजी सचिवों को भी जरूरत के मुताबिक अपने वजीरों का ध्यान केंद्रित करते रहने को कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इन सचिवों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने इन जिलों से संबंधित ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने को कहा जहां उनका मंत्रालय दखल देकर विकास कार्य की गति को तेज कर सकता है।सरकार ने इन जिलों का चयन स्वास्थ्य व पोषण, शिक्षा, कृषि व इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों, वित्तीय समावेशन व कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के आधार पर किया है।

    इन जिलों को एस्पिरेशनल डिस्टिक्ट का नाम दिया गया है। इन जिलों के लिए छह फोकस एरिया तय किए गए हैं, जिनमें काम होना है। इनमें स्वास्थ्य व पोषण, शिक्षा, बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि व जल संसाधन, वित्तीय समावेशन व कौशल विकास और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए रणनीति तैयार करना है। इन जिलों के विकास के लिए धनराशि देने के साथ-साथ ‘डिस्टिक्ट एक्शन प्लान’ भी बनाए जाएंगे। साथ ही सामाजिक-आर्थिक विकास के अलग-अलग पैमाने पर समयबद्ध लक्ष्य तय कर रैंकिंग की जाएगी।

    कामकाज का प्रदर्शन तय करने के लिए नीति आयोग ने 48 प्रमुख इंडीकेटर की सूची बनाई है। इनकी रियल टाइम निगरानी के लिए आयोग एक तंत्र विकसित कर रहा है। सरकार ने इन जिलों की स्थिति सुधारने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों में तैनात अतिरिक्त और संयुक्त सचिव स्तर के अफसरों को प्रत्येक पिछड़े जिले का ‘प्रभारी अधिकारी’ भी बनाया है।

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  • पद्म पुरस्कार पाने वालों की पूरी लिस्ट, इलैयाराजा, गुलाम मुस्तफा खान को पद्म विभूषण, शारदा सिन्हा, धोनी को पद्म भूषण

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    भारत आज अपना 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कला, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, खेल, विज्ञान इत्यादि क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले 85 नागरिकों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किए जाने की मंजूरी दी है। भारत सरकार द्वारा जारी की गयी सूची के अनुसार इस साल तीन विशिष्ट जनों को पद्म विभूषण, नौ को पद्म भूषण और 73 को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। ये तीनों पुरस्कार क्रमशः भारत के दूसरे, तीसरे और चौथे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार हैं। इस साल 14 महिलाओं को पद्म पुरस्कार दिये गये हैं। पद्म पुरस्कार पाने वालों में 16 विदेशी नागरिक भी हैं।

    हम आपको बताते हैं कि पद्म पुरस्कार 2017 के लिए किन-किन लोगों को चुना गया है और उस क्षेत्र से संबंधित हैं।

    पद्म पुरस्कार 2017: पद्म विभूषण पाने वालों की सूची-

    1- इलैयाराजा- कला एवं संस्कृति- तमिलनाडु

    2- गुलाम मुस्तफा खान- कला एवं संस्कृति- महाराष्ट्र

    3- परमेश्वरन परमेश्वरन – साहित्य एवं शिक्षा- केरल

    पद्म पुरस्कार 2017: पद्म भूषण पाने वालों की सूची-

    4- पंकज आडवाणी- खेल (बिलियर्डस एवं स्नूकर)- कर्नाटक

    5- फिलीपोज मार क्रिसॉसटॉम- आध्यात्मिक योगदान (योग)

    6- महेंद्र सिंह धोनी – खेल (क्रिकेट)

    7- एलेक्जेंडर कदाकिन – लोक प्रशासन (रूस)

    8- रामचंद्रन नागास्वामी- वास्तुशिल्प (तमिलनाडु)

    9- वेद प्रकाश नंदा- साहित्य एवं शिक्षा (अमेरिका)

    10- लक्ष्मण पाई – कला एवं चित्रकला (गोवा)

    11- अरविंद पारिख- कला एवं संगीत (महाराष्ट्र)

    12- शारदा सिन्हा – कला एवं संगीत (बिहार)

    पद्म पुरस्कार 2017: पद्म श्री पाने वालों की सूची-

    13- रानी और अभय बांग- मेडिसिन (अफोर्डेबल हेल्थकेयर)

    14- दामोदार गणेश बापट- समाज सेवा (छत्तीसगढ़)

    15- प्रफुल्ल गोविंद बरुआ – साहित्य एवं पत्रकारिता (असम)

    16- मोहन स्वरूप भाटिया- कला एवं लोक संगीत (उत्तर प्रदेश)

    17- सुधाशुं बिस्वास- समाज सेवा (पश्चिम बंगाल)

    18- सिखोम मीराबाई चानू- खेल (वेटलिफ्टिंग) (मणिपुर)

    19- पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी – साहित्य, शिक्षा एवं पत्रकारिता (छत्तीसगढ़)

    20- जोस मा जोई कॉन्सेप्शन (विदेशी)- वाणिज्य एवं उद्योग (फिलीपींस)

    21- लॉन्ग पोकलॉक पाम- कला एवं कताई ) (मणिपुर)

    22- सोमदेव देव वर्मन – खेल- टेनिस (त्रिपुरा)

    23- यसी धोधेन – चिकित्सा (हिमाचल प्रदेश)

    24- अरुप कुमार दत्ता- साहित्य (असम)

    25- दोदारंग गौड़ा- कला-गीतकार (कर्नाटक)

    26-अरविंद गुप्ता- साहित्य एवं शिक्षा (अफोर्डेबल एजुकेशन)

    27-दिगम्बर हंसदा – साहित्य एवं शिक्षा (झारखण्ड)

    28-रामली बिन इब्राहिम (विदेशी)- कला एवं नृत्य (मलेशिया)

    29- अनवर जलालपुरी- साहित्य एवं शिक्षा (उत्तर प्रदेश)

    30- पीटी जामिर- साहित्य एवं शिक्षा (नागारलैंड)

    31- एसएस जोदाथी- समाज सेवा (कर्नाटक)

    32- मालती जोशी- साहित्य एवं शिक्षा (मध्य प्रदेश)

    33- मनोज जोशी – कला एवं अभिनय (महाराष्ट्र)

    34- रामेश्वर लाल काबरा- वाणिज्य एवं उद्योग (महाराष्ट्र)

    35- पीके कौल- कला (जम्मू-कश्मीर)

    36- बी कोकांगा (विदेशी)- वास्तुशिल्प (लाओस)

    37- विजय किचलू- कला एवं संगीत (पश्चिम बंगाल)

    38- टोमी को (विदेशी)- पब्लिक अफेयर्स (सिंगापुर)

    39- लक्ष्मीकुट्टी- चिकित्सा (सर्पदंश)

    40- जॉयश्री गोस्वामी- साहित्य एवं शिक्षा (असम)

    41- नारायण दास महाराज- अध्यात्म ( राजस्थान)

    42- पीके महाराणा- कला एवं वास्तुशिल्प (ओडिशा)

    43- हुन मेनी (विदेशी)- पब्लिक अफेयर्स (कंबोडिया)

    44- नोफ मारवाई (विदेशी)- योग (सऊदी अरब)

    45- जावेरी लाल मेहता- साहित्य, शिक्षा एवं पत्रकारिता (गुजरात)

    46- केबी मिश्रा- साहित्य एवं शिक्षा (पश्चिम बंगाल)

    47- एसपी मिश्रा- कला एवं सिनेमा (महाराष्ट्र)

    48- सुहासिनी मिस्त्री- सोशल वर्क (पश्चिम बंगाल)

    49-  टोमियो मिजोकामी (विदेशी)- साहित्य एवं शिक्षा (जापान)

    50- एसपी माहा (विदेशी)- अध्यात्म (थाईलैंड)

    51- केशव राव मुसलगांवकर- साहित्य एवं शिक्षा ( मध्य प्रदेश)

    52- थंथ मिंट यू (विदेशी) – पब्लिक अफेयर्स (म्यांमार)

    53- वी नाना मल- योग (तमिलनाडु)

    54- सुलागट्टी नारासम्मा- मेडिसीन (कर्नाटक)

    55- विजयलक्ष्मी नवनीताकृष्णन- लिटरेचर एंड एजुकेशन (अफोर्डेबल एजुकेशन)

    56- आई न्यूमान नोरता (विदेशी)- कला एवं वास्तुशिल्प (इंडोनेशिया)

    57- मलाई हाजी अब्दुल्ला (विदेशी)- समाज सेवा (ब्रेुनेई)

    58- गोवर्धन पानीका – कला एवं बुनाई-कताई (ओडिशा)

    59- भवानी चरण पटनायक – पब्लिक अफेयर्स (ओडिशा)

    60- मुरलीकांत पेटकर- खेल-तैराकी (महाराष्ट्र)

    61- हबीबुल्लाह राजाबो (विदेशी)- साहित्य एवं शिक्षा (ताजिकस्तान)

    62- एमआर राजागोपाल – चिकित्सा (केरल)

    63- संपत रामटेके- सोशल वर्क (महाराष्ट्र)

    64- चंद्र शेखर रथ- साहित्य (ओडिशा)

    65- एसएस राठौर- सिविल सर्विस (गुजरात)

    66- अमिताभ रॉय- विज्ञान एवं अभियांत्रिकी (पश्चिम बंगाल)

    67- संदूक रूट (विदेशी)- चिकित्सा (नेपाल)

    68- आर सत्यनारायण- कला एवं संगीत (कर्नाटक)

    69- पंकज एम शाह- चिकित्सा (गुजरात)

    70- भज्जूश्याम- कला (पेंटिंग-गोंड आर्ट) (मध्य प्रदेश)

    71- महाराव रघुवीर सिंह- साहित्य एवं शिक्षा (राजस्थान)

    72- किदाम्बी श्रीकांत – खेल-बैडमिंटन (आंध्र प्रदेश)

    73- इब्राहिम सुतार- खेल (कर्नाटक)

    74- सिद्धेश्वर स्वामी जी – अध्यात्म (कर्नाटक)

    75- लेंटिना ठक्कर- सोशल वर्क (नागालैंड)

    76- वीसी ठाकुर- विज्ञान एवं अभियांत्रिकी (उत्तराखंड)

    77- आरएन थारानाथन- कला एवं संगीत (कर्नाटक)

    78- न्गुइन तिन थिन (विदेशी)- अध्यात्म (वियतनाम)

    79- भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी- साहित्य एवं शिक्षा (उत्तर प्रदेश)

    80- राजगोपाल वासुदेवन-साइंस एंड इंजीनियरिंग (तमिलनाडु)

    81- मानस बिहारी वर्मा – विज्ञान एवं अभियांत्रिकी (बिहार)

    82- पीजी विठोबाजी- साहित्य एवं शिक्षा (महाराष्ट्र)

    83- आरएर विटाकर- वन्य जीव संरक्षण (तमिलनाडु)

    84- बाबा योगेंद्र- कला (मध्य प्रदेश)

    85- ए जाकिया – साहित्य एवं शिक्षा (मिजोरम)

  • पद्मावत पर MP, राजस्थान की याचिका खारिज, अब पूरे देश में रिलीज होगी फिल्म

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    नई दिल्ली. फिल्म पद्मावत को लेकर विवादों में फंसे संजय लीला भंसाली को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और मध्य प्रदेश की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें इस फिल्म को इन दोनों राज्यों में बैन करने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आप कुछ संगठनों की धमकी और हिंसा का हवाला दे रहे हैं हम इस याचिका सुनवाई क्यों करें. एक संवैधानिक संस्था ने फिल्म की रिलीज के लिए हरी झंडी दी. कोर्ट ने आदेश दिया फिर भी आप पहले से अंदेशा जता रहे हैं. कानून-व्यवस्था बनाए रखना आपकी जिम्मेदारी हैं.

    आपको बता दें कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में लगी बैन पर रोक लगा दी थी और फिल्म को पूरे देश में रिलीज करने का आदेश दिया था. इस फैसले से पद्मावत के मेकर्स को कुछ राहत मिलेगी. बता दें कि राजस्थान सरकार और एमपी सरकार की दलील थी कि फ़िल्म की रिलीज़ से राज्य में हिंसा हो सकती है. दोनों सरकारों का दावा था कि खुफिया विभाग ने भी इस तरह की रिपोर्ट दी है.

    करणी सेना का रिएक्शन- करणी सेना के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह काल्वी ने कहा, आज पद्मावत शर्मिंदा हो रही होगी. हमारे पास प्रोटेस्ट का रास्ता खुला है. अब हमें किसी और से नहीं बल्कि सिनेमाहॉल के मालिकों से उम्मीद है कि वो इस फिल्म को ना लगाएँ. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर करणी सेना के महिपाल सिंह ने कहा कि हम जनता की अदालत में जाएंगे. हमें केंद्र सरकार से उम्मीद है.

    क्या है विवाद- डायरेक्टर भंसाली पर आरोप है कि इसमें इतिहास से छेड़छाड़ की गई है. राजपूतों और करणी सेना का मानना है कि ​फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच आपत्तिजनक सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है. हालांकि फिल्म के मेकर्स कई बार इस पर सफाई पेश कर चुके हैं और ये कह चुके हैं कि इस फिल्म में ऐसा कोई सीन नहीं है. बता दें कि ये फिल्म पहले 1 दिसंबर 2017 को रिलीज होने वाली थी लेकिन देश भर के कई राज्यों में फिल्म का जबरदस्त विरोध किया गया. इसके बाद मेकर्स ने फिल्म की रिलीज को टाल दिया था और बाद में एलान किया था कि ये फिल्म 24 जनवरी को रिलीज की जाएगी. इस फिल्म की एडवांस बुकिंग भी शुरू हो चुकी है. इस फिल्म में मुख्य भूमिका में दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर हैं. सेंसर बोर्ड ने जो भी बदलाव करने को कहा था वो सब मेकर्स ने कर दिया है लेकिन उसके बावजूद विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है.

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  • ‘शहनवाज’ बनी ‘सुनीता’, संकुचित सोच की वजह से बदला लिया धर्म

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    उत्तराखंड के बनभूलपुरा की रहने वाली एक मुस्लिम महिला ने धर्म बदलकर हिंदू धर्म को अपना लिया है। शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट को शपथपत्र देकर महिला ने इस बात की जानकारी दी। उसने साथ यह भी बताया कि उसे अपने परिजनों से खतरा है। महिला का कहना है कि मुस्लिम धर्म में महिलाओं के प्रति संकुचित सोच और वहां स्वतंत्रता से जीने का अधिकार न होने की वजह से हिंदू धर्म को अपनाया है। उसने अपना नाम बदलकर शहनवाज से सुनिता कर लिया है। सिटी मजिस्ट्रेस ने मामले की जांच पुलिस को सौंप दी है।

    स्थानीय मीडिया के मुताबिक बनभूलपुरा के रहने वाले  मकबूल अहमद की 22 साल की बेटी शहनवाज कुछ लोगों के साथ सिटी मजिस्ट्रेट ऑफिस में पहुंची और धर्म परिवर्तन की बात बताई। शपथ पत्र में उसने बताया है कि मुस्लिम धर्म में महिलाओं को अजादी के लिए कोई जगह नहीं है। यहां महिलाओं को  खुल कर जीने का हक भी नहीं दिया जाता है।

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    महिला का कहना है कि धर्म परिवर्तन के संबंध में वह पहले ही जिलाधिकारी को शपथ पत्र भेज चुकी है। धर्म परिवर्तन किए जाने पर परिजनों द्वारा उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई है। अपने धर्म के संकुचित सोच से परेशान होकर महिला ने पहले सारी धर्मों की जानकारी लेने के बाद उसने हिंदू धर्म अपनाने का फैसला लिया। उसे जो जानकारी ली उसके मुताबिक हिंदू धर्म में महिलाओं को सबसे ज्यादा आजादी है और इस धर्म में किसी तरह की कोई धार्मिक रोक टोक भी नहीं है। महिला ने मोदी सरकार की तारिफ करते हुए यह भी कहा कि ट्रिपल तलाक के फैसले से मुस्लिम महिलाओं की हालत में काफी सुधार होगा।

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  • संघ दिखाएगा तोगडिय़ा समेत तीन को बाहर का रास्ता!

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    नई दिल्ली, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगडिय़ा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगना महंगा पड़ सकता है। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर लगाए गए आरोपों के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तोगडिय़ा को उनके पद से हटाने की योजना बना रहा है। तोगडिय़ा के अलावा आरएसएस ने भारतीय मजदूर संघ के जनरल सेक्रेटरी विरजेश उपाध्याय और वीएचपी के अध्यक्ष राघव रेड्डी को उनके पद से मुक्त करने की योजना बनाई है। सूत्रों का कहना है कि आरएसएस के पदाधिकारी यह देखकर खुश नहीं हैं कि ये तीन लोग अपना खुद का एजेंडा चलाते हुए सरकार को शर्मिंदा कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन दोनों संगठन का संघ की विचारधारा के प्रचार के लिए उपयोग नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद की कार्यकारी बैठक फरवरी के अंत तक आयोजित की जाएगी, जहां पर आरएसएस परिषद के फिर से चुनाव करने को लेकर दवाब बनाएगा ताकि राघव रेड्डी को हटाकर नए अध्यक्ष का चुनाव किया जा सके।

    इसके साथ ही रेड्डी के तोगडिय़ा समेत अन्य समर्थकों को भी हटाने की पूरी योजना बनाई जा रही है। आरएसएस ने उन सभी लोगों को संघ से बाहर का रास्ता दिखाने का निर्णय लिया है, जो कि भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सामने आए हैं। संघ चाहता है कि उनके संगठन सरकार के साथ टकराव करने से बचें और अगर कोई मतभेद हैं तो उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह 2019 के आम चुनाव हैं। गौरतलब है कि हाल ही में प्रवीण तोगडिय़ा ने आरोप लगाया था कि उन्हें पुलिस एंकाउंटर में मारने की योजना बनाई जा रही है। चर्चा है कि आने वाले समय में संघ अपने इन पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाकर अनुशासन का पाठ पढ़ा सकता है।

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