Category: national

  • अमेरिका ने खोला वीजा का खजाना भारत को मिलेंगे 10 लाख वीजा

    विदेश- भारत के ज्यादातर नागरिक अमेरिका जाकर पढाई कर रहे हैं और वहीं अपना करियर बना रहे हैं। भारतीय नागरिकों के लिए अब अमेरिका ने वीजा का खजाना खोल दिया है। अमेरिका ने ऐलान किया है कि वह भारत के 10 लाख लोगों को वीजा देगा।

    समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस में अमेरिका दूतावास के प्रवक्ता द्वारा दिए बयान के मुताबिक- भारत और अमेरिका के सम्बंध बेहतर है। हमारे दूतावास ने पहले ही वाणिज्य दूतावास में 2 लाख से अधिक आवेदन को सहमति दी है। लेकिन अब 2023 में हमने 10 लाख गैर-अप्रवासी वीजा मुहैया करवाने का लक्ष्य रखा है।
    अमेरिका दूतावास के मुताबिक- अमेरिका का उद्देश्य इस साल भारत के नागरिकों को 10 लाख से अधिक वीजा मुहैया करवाना है। इस लक्ष्य में हमने गैर-अप्रवासी वीजा की सभी श्रेणियों को रखा है।
    जानकारी के लिए बता दें 2022 में यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने पूरी दुनिया से करीब 90 लाख अप्रवासी वीजा प्रोसेस किए थे। इन वीजा में बिजनेस, ट्रेवल, स्टूडेंट और क्रू वीजा शामिल हैं।

  • पेपर लीक : विपक्ष ने असम के मंत्री के इस्तीफे की मांग की

    10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का विज्ञान का प्रश्न पत्र लीक होने के बाद असम में विपक्ष ने सरकार के खिलाफ आक्रामक शुरुआत की और सोमवार को राज्य के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू के इस्तीफे की मांग की। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, असम (एसईबीए) ने पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद रविवार देर रात सोमवार की परीक्षा रद्द करने की घोषणा की।

    राज्य में 10वीं बोर्ड की परीक्षा शुरू होने के बाद अन्य विषयों के पेपर लीक होने को लेकर कई तरह के आरोप सामने आए हैं। हालांकि, शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने दावों को असत्य बताया और आरोपों का खंडन किया कि परीक्षा के पेपर लीक हो गए थे।

    असम विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन सोमवार को विपक्षी पार्टियां पेपर लीक के मुद्दे पर बीजेपी नीत सरकार पर अक्रमक हो गईं। कांग्रेस नेताओं देवव्रत सैकिया और रकीबुल हुसैन ने दावा किया कि विपक्ष इस मामले को सदन में उठाना चाहता था, लेकिन उसे ऐसा करने से रोका गया।

    कांग्रेस ने हाईकोर्ट के न्यायाधीश की देखरेख में स्थिति की गहन जांच का अनुरोध किया है। शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने मांग की, शिक्षा मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए। गोगोई ने कहा, असम के मुख्यमंत्री वह हैं जो हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। वह अपनी सारी प्रशंसा करते हैं। फिर उन्हें प्रश्नपत्र लीक की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस बीच, एसबीईए ने विज्ञान के पेपर के लिए एक नई परीक्षा तिथि निर्धारित की है। छात्र 30 मार्च को परीक्षा में शामिल होंगे।

  • Bhopal Gas Tragedy:- मुआवजे को लेकर आज आएगा फैसला

    Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस त्रिासदी को अगर कोई आज भी याद कर ले तो उसका दिल दहल जाए। हर ओर तबाही थी। मौत का मंजर था। वहीं आज भोपाल गैस त्रिासदी के पीड़ितों को मुआवजा मिलेगा या नहीं इस परिपेक्ष्य में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा।

    बता दें 1984 में भोपाल गैस त्रिासदी हुई। पीड़ितों को मुआवजे के लिए यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन की उत्तराधिकारी फर्मों से अतिरिक्त 7 हजार 844 करोड़ रुपए की मांग की। यह मुआवजे की मांग केंद्र सरकार द्वारा की गई थी।
    वहीं आज आज जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ में इस याचिका पर सुनवाई होगी। बता दें बीते दिनों इस याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेके महेश्वर ने केंद्र के फैसले को सुरक्षित रखा था।
    जानकारी के लिए बता दें केंद्र सरकार साल 1989 में समझौते के तहत अमेरिकी कंपनी से मिले 470 मिलियन अमरीकी डॉलर (715 करोड़ रुपए) के अलावा यूसीसी की उत्तराधिकारी फर्मों से मुआवजे के रूप में 7 हजार 844 करोड़ रुपए चाहता है।

  • महाराष्ट्र के किसानों ने मुख्यमंत्री की खैरात ठुकराई, नासिक-मुंबई के बीच ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू

    महाराष्ट्र के किसानों ने मुख्यमंत्री की खैरात को ठुकरा दिया है। सरकार ने संकटग्रस्त प्याज की खेती करने वालों के लिए 300 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी देने घोषणा की, जिससे नाखुश हजारों किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में सोमवार दोपहर से नासिक से मुंबई तक पैदल मार्च शुरू किया। अखिल भारतीय किसान सभा के नेता और सात बार के पूर्व सीपीआई (एम) विधायक जीवा पांडु गावित ने कहा कि विभिन्न किसान समूहों के साथ चर्चा के बाद, यह निष्कर्ष निकाला गया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है और ‘लॉन्ग मार्च’ निर्धारित समय के अनुसार जारी रहेगा।

    वॉकेथॉन के दौरान गावित ने आईएएनएस को बताया कि हमने एक या दो रुपये में प्याज बेचे जाने पर तत्काल राहत के रूप में 600 रुपये प्रति क्विंटल और अगले सीजन से 2000 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी मांगा है। सरकार ने अभी केवल 300 रुपये/क्विंटल की पेशकश की है और एमएसपी पर एक शब्द नहीं कहा है।

    माकपा प्रवक्ता पी.एस. प्रसाद ने कहा कि सरकार का 300 रुपये प्रति क्विंटल का आश्वासन संकटग्रस्त किसानों को कोई राहत नहीं है। पांच साल में तीसरी बार, हजारों किसान अपनी विभिन्न मांगों के लिए फिर से मुंबई की सड़क पर हैं।

    रिपोट के अनुसार, किसान मार्च के दौरान लगभग 175 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे, जोकि राज्य के किसानों को आकर्षित करेगा जो रविवार को नासिक में एकत्रित हुए थे।

    मांगों में प्याज उत्पादकों के लिए अगले सीजन से 600 रुपये प्रति क्विंटल की तत्काल सब्सिडी और 2000 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी, किसानों के कर्ज को माफ करना, सभी कृषि उपज के लिए उपयुक्त पारिश्रमिक, बिजली बिल माफी, बेमौसम बारिश-ओलावृष्टि से फसल के नुकसान के लिए त्वरित मुआवजा, वन भूमि अधिकार आदि शामिल है।

    गावित के नेतृत्व में, प्रतिभागियों में आशा कार्यकर्ता, और असंगठित क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जो ‘प्याज को एमएसपी दें’ आदि के नारों के साथ पार्टी के झंडे और तख्तियां लहराते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

    गावित और अन्य किसान नेताओं ने कहा, सब्सिडी और एमएसपी के अलावा, हम मांग करते हैं कि प्याज का विस्तृत निर्यात होना चाहिए, इसे एनएएफईडी (नेफेड) से एमएसपी पर थोक में खरीदा जाना चाहिए।

    किसानों ने 7/12 दस्तावेजों में नाम सहित चार हेक्टेयर तक की वन भूमि पर अतिक्रमणकारियों को नियमित करने, बिजली के बिल माफ करें और खेती के लिए रोजाना 12 घंटे बिजली उपलब्ध कराएं, किसानों का पूरा कृषि कर्ज माफ कर 7/12 का भुगतान करें।

    उन्होंने बेमौसम बारिश और साल भर किसानों को प्रभावित करने वाली अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण सभी फसल क्षति के लिए मुआवजे की एनडीआरएफ राशि की भी मांग की है। इसके अलावा गाय के दूध का न्यूनतम मूल्य 47 रुपये और भैंस के दूध का न्यूनतम मूल्य 67 रुपये करने की मांग की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले और 2018 और 2019 में, लगभग बड़ी संख्या में किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर मुंबई की ओर कूच किया था। अब यह किसानों का तीसरा ‘लॉन्ग मार्च’ है।

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने वाणिज्यिक अदालतों की मांग वाली जनहित याचिका पर अधिकारियों को नोटिस जारी किया

    दिल्ली उच्च न्यायालय ने वाणिज्यिक मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में 42 और वाणिज्यिक अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को अपनी रजिस्ट्री, केंद्र और केजरीवाल सरकार को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने एक सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अमित साहनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया।

    पिछले आदेश के संदर्भ में वाणिज्यिक अदालतें क्यों नहीं स्थापित की गईं, इस पर जवाब दाखिल करने के लिए अदालत ने रजिस्ट्री को चार सप्ताह का समय दिया है। जनहित याचिका में दिल्ली सरकार के 13 अप्रैल, 2021 के नोटिस के अनुसार, वाणिज्यिक मामलों का त्वरित निवारण सुनिश्चित करने के लिए और अधिक वाणिज्यिक अदालतें स्थापित करने के निर्देश मांगे गए हैं।

    याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के 5 जुलाई, 2022 के आदेश के बावजूद, उसके रजिस्ट्रार जनरल, एनसीटी दिल्ली सरकार और अन्य को छह महीने के भीतर 42 वाणिज्यिक अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने के बावजूद, आज तक ऐसा नहीं किया गया है। इससे पहले, इसी पीठ ने अपने प्रशासनिक पक्ष की दलील पर गौर किया था, जिसमें कहा गया कि अदालत कक्षों की कमी तुरंत अतिरिक्त वाणिज्यिक अदालतें शुरू करने के रास्ते में आ रही है, जो बुनियादी ढांचे के पूरा होने के बाद स्थापित की जाएंगी।

    याचिकाकर्ता ने कहा, न्याय के वितरण में होने वाली देरी ने समय-समय पर उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय का ध्यान इस ओर खींचा है और देश के विभिन्न न्यायालयों में लंबित रिक्तियों की भर्ती के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। राजधानी में फिलहाल 22 कमर्शियल कोर्ट काम कर रहे हैं।

    याचिका में कहा गया है, 164 दिनों के वाणिज्यिक विवादों के निपटान के लिए समयसीमा के संबंध में दुनिया के सर्वोत्तम अभ्यास के विपरीत, दिल्ली को एक वाणिज्यिक विवाद को निपटाने में 747 दिन लगते हैं। मुंबई में औसतन केवल 182 दिन लगते हैं। याचिकाकर्ता ने कहा, जिला न्यायालयों, दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की अदालतों पर अत्यधिक बोझ डाला गया है।

  • राष्ट्रपति मुर्मू दो दिवसीय दौरे पर केरल पहुंचीं

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को केरल पहुंचीं। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अन्य शीर्ष अधिकारियों ने उनकी अगवानी की। उसके आने के तुरंत बाद, तीनों नेवल एयर स्टेशन आईएनएस गरुड़ के लिए रवाना हो गए। वह स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत का दौरा करने वाली हैं और बाद में आईएनएस ध्रणाचार्य को राष्ट्रपति का रंग प्रदान करेंगी, जिसके बाद वह राज्य की राजधानी शहर के लिए रवाना होंगी। शुक्रवार को उनके कई कार्यक्रम हैं और इसके बाद वह कोच्चि लौट जाएंगी और वहां से लक्षद्वीप के लिए रवाना हो जाएंगी।

  • मजदूरों से काम करवाने के लिए दिए जाते हैं बिजली के झटके

    विदेश– समय बदल गया है। अब किसी के साथ जोर जबर्दस्ती नहीं की जा सकती। लोग आज अपने जीवन को अपने नीति नियमों के अनुकूल जीने के लिए स्वतंत्र हैं। वह जहां चाहें वहां काम कर सकते हैं। काम के लिए कोई उनपर दवाब नहीं बना सकता। लेकिन क्या आपको पता है ब्राजील के शहर बेंटो गोंकाल्वेस ने आज भी मजदूरों से जबरन काम करवाया जा रहा है।

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 22 फरवरी के दिन ब्राजील के बेंटो गोंकाल्वेस में 200 से अधिक मजदूरों को बचाया गया। कहा जा रहा है कि इन मजदूरों से जबरन का करवाया जा रहा था। मजदूरों को बेहद कष्ट दिया जाता है। इसके साथ अभद्रता की जाती है और मजदूरों के साथ शारीरिक हिंसा की जाती थी।
    मजदूरों से शराब बनवाई जाती थी। उन्हें 15 घंटे की शिफ्ट करनी होती है। उनके काम के मुताबिक उनको भुगतान नहीं मिलता है। मजदूरों की रखवाली के लिए गार्ड लगाए जाते। काम करवाने वाले लोगों को यह भय रहता की कहीं उनके अत्याचारों से परेशान मजदूर भाग न जाएं।
    बीबीसी की रिपोर्ट के आधार पर वहां काम करने वाले मजदूर नीको का कहना है कि यह बेहद भयावह है। जो मजदूर उनका विरोध करते हैं। यह काम करने से डरते हैं। उनको बिजली के झटके दिए जाते हैं मार पीट की जाती है। 
    वो लोग बिजली के अनोखें उपकरण का प्रयोग करते हैं। जिससे हमको नींद न आए और उनका काम नियमित तरीके से चलता रहे।
    उन्होंने कहा, यह कंपनी ब्राजील के तीन सबसे बड़े शराब निर्माता ऑरोरा, गैरीबाल्डी और सैलटन के लिए मज़दूर मुहैया करती है। हालाकि तीनों शराब निर्माता कंपनियों ने मज़दूरों के शोषण की जानकारी न होने की बात कही और सारा दोष कांट्रैक्टर पर मढ़ दिया है।
    मज़दूर मुहैया करने वाली कंपनी फेनिक्स सर्विसेज़ ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि,”आरोपों की जांच चल रही है और कंपनी किसी भी अनियमितता को दूर करने के लिए ज़रूरी सभी उपाय करेगी।

  • Demi Xpander, Mitsubishi Bakal Mengimpor Kembali Pajero Sport – Jansandeshonline

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    Peningkatan penjualan yang sangat signifikan untuk small MPV PT Mitsubishi Motors Krama Yudha Deals Indonesia( MMKSI), Xpander sepertinya bakal berpengaruh terhadap model lain pabrikan berlambang tiga berlian ini.

    Pasalnya, beredar rencana untuk mengejar produksi pesaing Toyota Avanza ini, Pajero Sport bakal kembali berstatus impor alias CBU.

    Menurut Direktur of Sales & Marketing Division PT MMKSI, Irwan Kuncoro, hingga saat ini Pajero Sport masih diproduksi di Indonesia.

    Jadi, kalaupun dikaitkan dengan rencana ada impor itu, sebetulnya itu rencana untuk sementara, karena itu bagian dari peningkatan kapasitas untuk Xpander, ” jelas Irwan di sela- sela media gathering, di bilangan Jakarta Pusat, belum lama ini.

    Lanjut Irwan, rencana status Pajero Sport yang kembali impor memang belum terealisasi. Dan berbicara sampai kapan, memang harus dilihat dahulu, kapan waktu mulainya, karena hingga saat ini memang belum dilaksanakan( impor Pajero Sport).


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  • 2023 के पहले दो महीनों में चीन का एफडीआई 6.1 फीसदी बढ़ा

    वास्तविक उपयोग में चीनी मुख्य भूमि में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 2023 के पहले दो महीनों में सालाना आधार पर 6.1 प्रतिशत बढ़कर 268.44 अरब युआन हो गया है, वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में, एफडीआई प्रवाह साल दर साल 1 प्रतिशत बढ़कर 39.71 अरब डॉलर हो गया।

    सेवा उद्योग ने पहले दो महीनों के दौरान साल दर साल एफडीआई प्रवाह में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी, जबकि उच्च तकनीक वाले उद्योगों में एक साल पहले की तुलना में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई, मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है।

    विशेष रूप से, हाई-टेक मैन्युफैक्च रिंग में एफडीआई एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में 68.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि हाई-टेक सर्विस सेक्टर में साल दर साल 23.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस अवधि के दौरान, बेल्ट एंड रोड देशों और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के संघ से निवेश साल दर साल क्रमश: 11 प्रतिशत और 11.8 प्रतिशत बढ़ गया।

  • असम के मुख्यमंत्री ने विज्ञापन पर खर्च किए 132 करोड़

    राजनीति- देश मे राजनेताओं का सबसे अधिक पैसा विज्ञापन पर खर्च होता है। कई बार राजनेता अपने बीते रिकॉर्ड को तोड़ देते हैं या पूर्व मुख्यमंत्री के रिकॉर्ड को तोड़ते हैं। वहीं अब ऐसा ही कुछ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ हुआ है।

    हिमंत बिस्वा सराम ने बीते दो साल में विज्ञापन पर 130.59 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जो असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के विज्ञापन के रिकॉर्ड को तोड़ता है। सर्बानंद सोनोवाल ने विज्ञापन पर महज 125.6 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
    सूचना एवं जनसम्पर्क मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा, वर्तमान सरकार ने विज्ञापन पर 132 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जबकी पिछली सरकार ने विज्ञापन पर 125 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। हिमंत बिस्वा सरमा के यह विज्ञापन टीवी, समाचार पत्र, मैगजीन, एफएम रेडियो में दिए गए हैं।