Category: national

  • BJP का बड़ा नेता कर रहा साजिश, हत्या के मामले में भिजवाना चाहता है जेल: प्रवीण तोगड़िया

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    विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी में ‘उच्च स्तर पर विराजमान कोई’ उनके खिलाफ साजिश रच रहा है। परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि इस व्यक्ति की कोशिश है कि 1996 के हत्या के प्रयास के एक मामले में अदालत द्वारा जारी समन उन तक न पहुंचे और वह इसमें फंसकर जेल चले जाएं। अदालत ने शुक्रवार को तोगड़िया के खिलाफ जारी एक गैर जमानती वारंट को निरस्त कर दिया।

    तोगड़िया ने कहा, “आज (शुक्रवार को) अदालत ने वारंट को निरस्त कर दिया और मुझे अदालत में जब कभी मामले की सुनवाई होगी, पेश होना होगा। गैर जमानती वारंट इसलिए मेरे खिलाफ जारी हुआ क्योंकि मैंने इसके पहले जारी समन का जवाब नहीं दिया।” उन्होंने कहा, “पुलिस ने वो समन मुझे दिए ही नहीं। मुझे इस आशय की सूचना मिली है कि यह (राज्य के) गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के दखल के बिना किसी उच्च पदस्थ द्वारा जान बूझकर किया गया।”

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    तोगड़िया ने कहा, “ऐसा ही पाटीदार आंदोलन के समय हुआ था जब (तत्कालीन) मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने कहा था कि उन्होंने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज का आदेश नहीं दिया था। यह वैसा ही मामला है।” उन्होंने कहा, “(उप मुख्यमंत्री) नितिन पटेल, (मुख्यमंत्री) विजय रूपाणी ऐसा नहीं करेंगे। मैं अहमदाबाद में था और फिर भी मुझे समन नहीं दिया गया, क्यों? मुझे कई बार लगता है कि मेरी आवाज को दबाया जा रहा है। मैं बाद में खुलासा करूंगा कि इस सब के पीछे कौन है।”

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    हत्या के प्रयास का यह मामला तोगड़िया समेत 39 लोगों पर चल रहा है। इसमें भाजपा के कई नेता शामिल हैं। याचिकाकर्ता भी भाजपा के पूर्व विधायक जगरूप सिंह राजपूत हैं। वह बीते महीने हुए चुनाव में कांग्रेस के हिम्मत सिंह पटेल के हाथों हार गए।

    घटना तब हुई थी जब शंकर सिंह वाघेला ने भाजपा से विद्रोह कर दिया था। वाघेला समर्थकों पर भाजपा समर्थकों ने हमला किया था। वाघेला के समर्थक आत्माराम पटेल को बुरी तरह पीटा गया था। तोगड़िया ने कहा, “भाजपा को आम चुनाव में स्पष्ट जनादेश के बावजूद, वे चुनावी वादे क्यों नहीं पूरे कर रहे हैं। मैं इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाता रहा हूं और इसीलिए जान बूझकर मेरी आवाज दबाई जा रही है।”

  • इस कलयुगी प्रोफेसर ने अपनी बीमार मां को चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया, कारण जानकर हो जायेंगे हैरान !

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    अहमदाबाद । गुजरात के राजकोट शहर में एक कलयुगी बेटे का खौफनाक चेहरा सामने आया है। उसने बीमार मां की सेवा करने के बजाय उसे चैथी मंजिल से फेंक दिया। यह घटना तीन महीने पहले की है। इस मामले में पहले पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज किया था, लेकिन थाने में आई एक गुमनाम चिट्ठी के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो इस घटना का पर्दाफाश हुआ। राजकोट पुलिस ने मां की हत्या के आरोप में प्रोफेसर बेटे को गिरफ्तार कर लिया है।

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    जानकारी के मुताबिक, राजकोट के 150 फीट रोड नानावटी चैके के पास स्थित रामेश्वर अपार्टमेंट में जयश्रीबेन (64) अपने बेटे संदीप नाथवाणी (35) और बहू के साथ रहती थीं। जयश्री बेन सेवानिवृत शिक्षक थीं, जबकि बेटा संदीप राजकोट के बीके मेडकिल गवर्नमेंट कॉलेज में असिसटेंट प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत है। जयश्री बेन को दिमागी बीमारी थी। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था। सितंबर महीने में उनकी चैथी मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। उस समय पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज कर जांच की थी।

    राजकोट डीसीपी करण सिंह वाघेला ने बताया कि घटना के तीन महीने बाद एक जागरूक नागरिक ने पुलिस कंट्रोल रूम को पत्र लिखकर बताया कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। इसके आधार पर पुलिस ने अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की, तो पता चला कि जयश्रीबेन तबीयत खराब होने से चल भी नहीं पा रही थीं। लेकिन संदीप उन्हें उठाकर इमारत की चैथी मंजिल पर ले गया। वहां से उसने अपनी मां को नीचे धक्का दे दिया और इसके बाद वह अपनी मां की चप्पल पहनकर लिफ्ट से नीचे उतरा व अपने कमरे में आ गया।

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    डीसीपी के मुताबिक, आरोपी संदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में उसने कुबूल किया है कि मां को दिमागी बीमारी थी। मां के इलाज के लिए वे परिवार के साथ जामनगर से राजकोट आ गए थे। राजकोट में चार से 14 सितंबर तक उसकी मां अस्पताल में भर्ती थी। आरोपी ने कहा कि वह अपनी मां की सेवा करते-करते परेशान हो गया था। इसलिए अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसने मां को चैथी मंजिल पर ले जाकर धक्का दे दिया। पुलिस ने आरोपी बेटे का बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • लालू यादव को साढ़े तीन साल की जेल और पांच लाख रुपये जुर्माना

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    नई दिल्ली. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाला मामले में रांची सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने साढ़े तीन साल की सजा और पांच लाख का जुर्माना लगाया है. जुर्मान नहीं देने पर छह महीने और जेल में गुजारना होगा. लालू यादव समेत 16 दोषियों की सजा पर बहस पूरी हो गई चुकी थी लेकिन सजा का ऐलान कल नहीं हो पाया. वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आज सजा सुनाई गई. लालू के वकील ने उनकी खराब सेहत का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की मांग की है.
    चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में रांची की सीबीआई कोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को तीन साल की सजा और पांच लाख का जुर्माने का फैसला सुनाया है. इस मामले में अदालत ने फूल चंद, महेश प्रसाद, सुनील कुमार, बांकी जूलियस, सुधीर कुमार और राजा राम को भी साढ़े तीन साल और पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. पूर्व विधायक जगदीश शर्मा को अदालत ने सात साल की सजा सुनाई है.
    सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में शुक्रवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद समेत अन्घ्य आरोपियों को जेल से ही वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया था. अदालत ने एक-एक कर लालू समेत अन्य शेष सात अभियुक्तों की भी सजा के बिन्दु पर उनकी उपस्थिति में बहस सुनी. अदालत ने सजा के बिंदु पर लालू के वकीलों की बहस सुनी जिसमें उन्होंने उनकी लगभग 70 वर्ष की उम्र होने और बीमार होने की बार-बार दुहाई दी. लालू के वकील चितरंजन प्रसाद ने बताया कि अदालत ने सजा के बिन्दु पर सभी की बहस सुनने के बाद इस मामले में आदेश के लिए शनिवार दोपहर दो बजे का समय निर्धारित किया है्.
    इस मामले में जहां पांच आरोपियों बेक जूलियस, गोपीनाथ, ज्योति कुमार, जगदीश शर्मा एवं कृष्ण कुमार प्रसाद की सजा के बिन्दु पर उनके वकीलों ने गुरुवार को बहस पूरी कर ली थी. वहीं वर्णक्रम अनुसार लालू प्रसाद की बारी सातवें नंबर पर आई. अदालत ने आज लालू प्रसाद, आरके राणा के अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद, पूर्व सरकारी अधिकारी सुबीर भट्टाचार्य एवं चारा आपूर्तिकर्ताओं त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, सुशील कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, संजय अग्रवाल एवं सुनील गांधी के वकीलों की बहस सजा के बिन्दु पर सुनी.
    वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से पशु चारे के नाम पर निकासी के इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर 1997 को मुकदमा दर्ज किया था और लगभग 21 साल बाद इस मामले में गत 23 दिसंबर को फैसला आया.
    सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में 23 दिसंबर को लालू प्रसाद समेत तीन नेताओं, तीन आईएएस अधिकारियों के अलावा पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, पशु चिकित्साधिकारी सुबीर भट्टाचार्य तथा आठ चारा आपूर्तिकर्ताओं सुशील कुमार झा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय कुमार अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी तथा त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को अदालत ने दोषी करार देकर जेल भेज दिया था.
    इससे पहले चाईबासा कोषागार से 37 करोड़ 70 रुपये अवैध ढंग से निकासी करने के चारा घोटाले के एक अन्य मामले में लालू प्रसाद, जगदीश शर्मा, राणा, पूर्व मुख्यमंत्री डा .जगन्नाथ मिश्रा समेत अन्घ्य आरोपियों को सजा हो चुकी है और वे हाईकोर्ट से जमानत प्राप्त कर रिहा हुए हैं.
    देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये के फर्जीवाड़े के मामले से जुड़े इस मुकदमे में 23 दिसंबर को सीबीआई के विशेष न्यायाधीष शिवपाल सिंह ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चैधरी, सरस्वती चंद्र एवं साधना सिंह को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था.
    इससे पूर्व जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने निचली अदालत को इसकी सुनवाई नौ माह में पूरी करने के निर्देश दिये थे. इस मुकदमे में लालू, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा एवं ध्रुव भगत, आरके राणा, तीन आईएएस अधिकारी फूलचंद सिंह, बेक जूलियस एवं महेश प्रसाद एवं 29 अन्य आरोपी थे. कुल 38 आरोपियों में से सुनवाई के दौरान जहां 11 की मौत हो गयी, वहीं तीन सीबीआई के गवाह बन गये तथा दो ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था जिसके बाद उन्हें 2006-07 में ही सजा सुना दी गयी थी.
    शिवपाल सिंह की अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों के गवाहों के बयान दर्ज करने और बहस के बाद अपना फैसला 13 दिसंबर को सुरक्षित रख लिया था. सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि देवघर कोषागार से फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से धन निकालने के इस मामले में लालू प्रसाद एवं अन्य के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक साजिश, गबन, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य छिपाने, पद के दुरुपयोग आदि से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 409, 418, 420, 467, 468, 471, 477ए, 201, 511 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था.
    सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में गबन की धारा 409 में दस वर्ष तक की और धारा 467 के तहत आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है.
    चाईबासा कोषागार से 37 करोड़, 70 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में लालू तथा जगन्नाथ मिश्रा को 30 सितंबर, 2013 को दोषी ठहराये जाने के बाद तीन अक्तूबर को क्रमशरू पांच वर्ष कैद, 25 लाख रुपये जुर्माने तथा चार वर्ष कैद की सजा सुनायी गई थी. चारा घोटाले में लालू के खिलाफ यह दूसरा ऐसा मामला है जिसमें अब कल सजा सुनाये जाने की संभावना है.
    इसके अलावा उनके खिलाफ रांची में डोरंडा कोषागार से 184 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी से जुड़ा मामला, दुमका कोषागार से तीन करोड़, 97 लाख रुपये निकासी एवं चाईबासा कोषागार से अवैध रूप से 36 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से संबंधित मुकदमे अभी चल रहे हैं जिनकी सुनवाई अंतिम दौर में है.
    अदालत ने 23 दिसंबर को संबंधित मामले में फैसला सुनाते हुए देवघर के तत्कालीन उपायुक्त सुखदेव सिंह को भी सीआरपीसी की धारा 319 के तहत समन भेजकर पूछा है कि क्यों न उन पर भी इस मामले में सह अभियुक्त के तौर पर मुकदमा चलाया जाये. इसने कहा कि आखिर देवघर कोषागार से फर्जीवाड़ा कर सरकारी धन निकाले जाने के बारे में उन्होंने कोई पत्र सरकार को क्यों नहीं लिखा. उन्होंने समय रहते इस मामले में आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की? अब इस मामले में सुखदेव सिंह को अदालत में 23 जनवरी को अपना पक्ष रखना होगा. अदालत के संतुष्ट न होने पर उन पर इस मामले में मुकदमा भी चलाया जा सकता है. साथ ही अदालत ने सीबीआई द्वारा कुल 38 आरोपियों में से सरकारी गवाह बनाये गये तीन लोगों की 1990 से 1994 के बीच की अर्जित संपत्ति की जांच कर उसे जब्त करने और नीलाम कर उससे प्राप्त राशि को सरकारी खजाने में जमा करने के आदेश दिये थे. इस मामले में सीबीआई ने डा. एसके सिंह, आर के दास एवं शैलेन्द्र कुमार को सरकारी गवाह बनाया था. इसके अलावा अदालत ने अदालती फैसले के खिलाफ मीडिया में बयानबाजी करने पर तीन जनवरी को राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं लालू के बेटे तेजस्वी यादव, राजद के नेता शिवानंद तिवारी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी को अवमानना नोटिस जारी कर उन्हें व्यक्तिगत रूप से 23 जनवरी को अदालत में पेश होने के निर्देश दिये हैं.

  • मुश्किल में फंसी विराट-अनुष्का की शादी, दोबारा करनी पड़ सकती है

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    नयी दिल्ली. टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने पिछले साल 13 दिसंबर को इटली में शादी की. ये शादी काफी गुपचुप तरीके से हुई यहां तक कि विराट और अनुष्का के कई नजदीकी रिश्तेदारों को इसका पता तब चला जब दोनों की शादी हो चुकी थी.

    खबरों की मानें तो विराट-अनुष्का ने शादी के बीच एक ऐसी गलती कर दी है जिसके चलते शायद दोनों को दोबारा शादी करनी पड़ सकती है. दरअसल विराट-अनुष्का ने दूसरे मुल्क में जाकर शादी तो कर ली लेकिन इसकी सूचना रोम स्थित भारतीय दूतावास को नहीं दी.

    इसका मतलब ये हो सकता है कि दोनों की शादी के रजिस्ट्रेशन में दिक्कत आ सकती है. अगर ऐसा होता है तो विराट और अनुष्का को एक बार फिर से शादी (कोर्ट मैरिज) करनी पड़ सकती है.

    एक रिपोर्ट के मुताबिक नियमों के मुताबिक यदि कोई भारतीय शख्स दूसरे देश में जाकर शादी करता है तो वह विदेशी विवाह अधिनियम-1969 के तहत रजिस्टर्ड की जाती है.

    लेकिन विराट-अनुष्का की यह शादी इस अधिनियम के तहत नहीं हुई. ऐसे में अब विराट कोहली-अनुष्का देश के जिस राज्य में रहेंगे, वहां उन्हें उसी राज्य के नियमानुसार शादी रजिस्टर्ड करवाने के लिए दोबारा विवाह करना पड़ सकता है.

  • “Padmavat” 25 जनवरी को होगी रिलीज, फिल्म को मिला सर्टिफिकेट

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    मुंबई. फिल्म पद्मावत (पहले- पद्मावती) के रुपहले पर्दे पर दिखाने का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है. इसके साथ ही संजयलीला भंसाली की इस फिल्म की रिलीज डेट तय हो गई है. लंबे विवाद के बाद अब यह फिल्म 25 जनवरी को पर्दे पर आएगी. इससे पहले फिल्म को 1 दिसंबर को रिलीज किया जाना था, लेकिन बढ़ते विवाद के कारण इसे टाल दिया गया था.

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    विवाद के बाद सेंसर बोर्ड ने फिल्म दिखाने के लिए एक पैनल बनाया था, जिसमें इतिहासकार भी मौजूद थे. इस स्क्रीनिंग के बाद फिल्म को 5 संशोधन के बाद सर्टिफिकेट के साथ रिलीज की मंजूरी मिल गई. इससे पहले फिल्म को 12 जनवरी को रिलीज करने की भी बात सामने आई थी, लेकिन अब यह 25 जनवरी को रिलीज होगी.

    सर्टिफिकेट के लिए फिल्म में 5 बदलाव करने की बात की गई थी-. फिल्म में एक डिस्क्लेमर लगाया जाएगा जिसमें यह बताया जाएगा कि फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता का दावा नहीं करती है. -फिल्म का नाम पद्मावती से बदलकर पद्मावत किया जाएगा. -फिल्म में दिखाए गए गलत और भ्रमित करने वाले ऐतिहासिक स्थलों में बदलाव किया जाएगा. पांचवें बदलाव के तौर पर फिल्म में एक डिस्क्लेमर देने को कहा गया था कि यह किसी भी तरह से सती प्रथा का समर्थन या उसे महिमामंडित नहीं करती है.

    अब यह फिल्म 25 जनवरी को रिलीज होगी और अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन के साथ पर्दे पर टकराएगी. खबर यह भी है कि नीरज पांडे द्वारा निर्देशित फिल्म अय्यारी की रिलीज को 26 जनवरी से 9 फरवरी के बीच के लिए टाल दिया गया है. यह फिल्म भी 26 जनवरी को रिलीज होने वाली थी.

  • हॉस्टल और मैस की सेवाओं पर 5 फ़ीसदी जीएसटी

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    नई दिल्ली । जीएसटी से अब विद्यार्थी और कर्मचारी भी नहीं बच सकेंगे। कॉलेज और स्कूल के छात्रों को मैस  की सेवाओं पर 5 फ़ीसदी जीएसटी चुकानी होगी। इसी तरह कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी 5 फ़ीसदी जीएसटी मैस सेवा पर चुकानी होगी।
    वित्त मंत्रालय के अनुसार शैक्षणिक संस्थान की ओर से भी यदि मेस संचालित हो रहे हो, या कोई बाहर का ठेकेदार मैस की सेवाएं संचालित कर रहा हो उसको भी जीएसटी के दायरे में शामिल किया गया है। वित्त मंत्रालय के इस नोटिफिकेशन के बाद 5 फ़ीसदी जीएसटी मेस की सभी सेवाओं पर छात्रों और कर्मचारियों को अदा करनी होगी।

  • बिहार के सीएम नीतीश के काफिले पर हमला

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    बक्सर । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कापफिले पर कल कुछ लोगों ने पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले में मुख्यमंत्री बाल-बाल बच गए लेकिन उनके काफिलें शामिल कुछ लोग घायल हो गए। नीतिश विकास समीक्षा यात्रा के दौरान शुक्रवार को बक्सर जिले में थे। हालात उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गए, जब नंदन गांव से गुजर रहे मुख्यमंत्री के काफिले पर स्थानीय लोगों ने जमकर पथराव कर दिया। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने नीतीश कुमार को वहां से सुरक्षित निकाल लिया। गुस्साए लोगों की मांग थी कि नीतीश उनके गांव में कुछ देर रुकें और वहां की समस्याएं सुनें। नीतीश कुमार के काफिले पर हमले को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक तरफ दुख व्यक्त किया है, तो दूसरी ओर कहा है कि उनके साथ यह तो होना ही था।तेजस्वी का कहना है कि बिहार में सरेआम मुख्यमंत्री पर हमला हो रहा है, लेकिन इस महा जंगलराज स्थिति पर किसी भी टीवी चैनल पर कोई डिबेट नहीं होता है, क्योंकि जंगलराज का राग अलापने वाले बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी इस वक्त प्रदेश के उप मुख्यमंत्री है। नीतीश और सुशील मोदी पर तंज कसते हुए तेजस्वी ने कहा कि कहीं मुख्यमंत्री पर हमले इसीलिए तो नहीं हो रहे कि वह उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को अपने साथ विकास समीक्षा यात्रा में लेकर नहीं जा रहे हैं?

    तेजस्वी ने ली चुटकी, बोले- ये तो होना ही था

    तेजस्वी ने कहा कि जिस दिन से नीतीश कुमार ने समीक्षा यात्रा की शुरुआत की है, उसी दिन से उन्हें लोगों के विरोध, प्रदर्शन और नारेबाजी का सामना करना पड़ रहा है। नीतीश पर तंज कसते हुए तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले अपने व्यक्तित्व और राजनीतिक चरित्र की समीक्षा करनी चाहिए, उसके बाद बिहार के विकास की समीक्षा। उन्होंने कहा कि विकास समीक्षा यात्रा के दौरान नीतीश कुमार की सभा में कहीं जूते-चप्पल चलते हैं, तो कहीं भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस वालों को हवाई फायरिंग करनी पड़ती है। मगर सरकारी तंत्र बहुत ही शातिर तरीके से मुख्यमंत्री के विरोध प्रदर्शन को खबर नहीं बनने देता है। तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश को आत्मचिंतन और मनन और करना चाहिए कि आखिर हर जगह, हर पल और हर क्षेत्र में लोग उनका विरोध क्यों और किस वजह से कर रहे हैं? उन्होंने पूछा कि आखिर मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि किस असुरक्षा की भावना से ग्रस्त होकर वह शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और रोजगार जैसे अति जरूरी और गंभीर मसलों को छोड़कर दूसरे मसलों पर राग अलाप रहे हैं?

  • अमर सिंह का सनसनीखेज खुलासा: कहा-अमिताभ असल जिंदगी में फेंके हुए पैसे लेकर ही बने अमीर

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    नई दिल्ली। सियासत दिलो में कितनी दूरी और कड़वाहट ला देती है इसके कई उदाहरण देश-दुनिया में मिल जाएंगे। लेकिन आज हम बाते कर रहे हैं अमिताभ बच्चन और अमर सिह की। कभी एक दूसरे के सच्चे और अच्छे दोस्त होने की बात करते है। तो वहीं आज अमर सिंह और अमिताभ के बीच की दूरिया इतनी बढ़ गई है कि दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते। दरअसल अमिताभ के जिगरी दोस्त अमर सिंह ने एक खुलासा किया है। उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि बेशक दीवार फिल्म में अमिताभ बच्चन कहते हैं, मैं आज भी फेंके पैसे नहीं उठाता, लेकिन असल जिदंगी में तो वो फेंके हुए पैसे लेकर ही अमीर बने हैं।

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    किसी से 100-100 करोड़ लिए तो किसी से 250 करोड़ रुपए मांग रहे थे। अमर सिंह ने कहा, अमिताभ बच्चन ने एक पार्टी में खुलासा करते हुए एक बड़े आदमी के बारे में कहा था कि वो उन्हें रुपए देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने नहीं लिए।जबकि ये झूठ है। अमिताभ उस शख्स से 250 करोड़ रुपए मांग रहे थे, जबकि वो इन्हें 25 करोड़ रुपए ही देना चाहता था। अगर अमिताभ में हिम्मत है तो उस शख्स का नाम बताएं, जिसके पैसे लेने से इंकार किया था। नहीं तो मैं उस शख्स की चिठ्ठी दिखाता हूं, जिसमें उन्होंने 25 करोड़ रुपए देने की बात कही थी।

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    अमर ने आगे कहा मेरे पास बैंक के लेन-देन से जुड़े वो सारे सुबूत हैं जिसमें अमिताभ ने करोड़ों रुपए लिए हैं। 100 करोड़ रुपए तो इन्होंने आज तक नहीं लौटाए हैं। मेरे पास मौजूद सबूत सार्वजनिक रूप से अमिताभ को एक्सपोज कर देंगे। सितंबर 2011 में तिहाड़ जेल को याद करते हुए अमर सिंह कहते हैं, उन चार दिनों ने मेरे व्यक्तिव और चरित्र को बदल दिया। अमेरिका-भारत न्यूक्लियर डील और कांग्रेस की सरकार बचाने के इनाम के रूप में मुझे तिहाड़ जेल में एक चटाई, बाल्टी और एक मग मिला था। अफसोस इस बात का है कि मैं उन्हीं दिनों किडनी ट्रांसप्लांट कराकर सिंगापुर से लौटा था। बावजूद इसके मुझे एक मग दिया गया था कि ‘अगर प्यास लगे तो पी लेना और शौच लगे तो धो लेना।’ उस घटना से मुझे इतनी पीड़ा हुई थी कि जैसे एक जिंदा बलात्कार पीड़िता अपने दर्द को महसूस करती है।

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  • डोनाल्ड ट्रंप को पीछे छोड़ा नरेन्द्र मोदी ने

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    गुजरात चुनाव के परिणामों पर नजर डालें तो कह सकते हैं कि श्मोदी मैजिकश् कमजोर तो हुआ है, लेकिन लोकप्रियता की बात करें तो भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पीछे छोड़ दिया है।

    आठ भाषाओं में किए गए वेबदुनिया के वार्षिक ऑनलाइन सर्वेक्षण में अंतरराष्ट्रीय स्तर मोदी को कोई भी नेता चुनौती देता नजर नहीं आया। हिन्दी पाठकों की बात करें तो 77 फीसदी से ज्यादा ने मोदी को दुनिया की लोकप्रिय हस्ती बताया, वहीं ट्रंप के पक्ष में मात्र 10 फीसदी लोगों ने अपनी राय जाहिर की।

    चैंकाने वाली बात यह रही कि तमिल के पाठकों ने मोदी के मुकाबले ट्रंप को ज्यादा पसंद किया। यहां 28 फीसदी से ज्यादा लोगों ने ट्रंप को दुनिया की सबसे चर्चित हस्ती माना तो मोदी के पक्ष में 24 प्रतिशत लोगों ने अपना वोट दिया। ब्लादिमीर पुतिन इस सूची में तीसरे स्थान पर रहे।

    गुजराती भाषियों में यूं तो मोदी का पलड़ा भारी रहा, लेकिन मात्र 39 प्रतिशत लोगों ने ही उनके पक्ष में वोट किया। इन लोगों ने ट्रंप के मुकाबले चीन के मुखिया शी जिनपिंग को ज्यादा पसंद किया। जिनपिंग के पक्ष में जहां 12 फीसदी लोगों ने वोट किया, वहीं ट्रंप के पक्ष में माघ्त्र 8 फीसदी लोग ही दिखे।

    वहीं मराठी, कन्नड़, मलयालम, तेलुगू और अंग्रेजी में क्रमश: 86ः, 73ः, 40ः, 46ः और 82 प्रतिशत लोगों ने मोदी के पक्ष में वोट किया। इस सूची में मार्क जुकरबर्ग, किम जोंग उन, सऊदी अरब के किंग सलमान, थेरेसा मे जैसी हस्तियां शामिल थीं।

  • 100वां सेटेलाइट लॉन्च कर, ISRO ने रचा इतिहास

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    श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज यहां के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-40 सी के जरिये पृथ्वी अवलोकन उपग्रह कार्टोसैट-2 सहित 31 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया। इसरो ने बताया कि पीएसएलवी-सी40 ने कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह को सूर्य स्थैतिक कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। पीएसएलवी-सी40 रॉकेट का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 9:28 पर अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण किया गया जो बादलों से भरे आसमान को चीरता हुआ अपने गंतव्य की ओर बढ़ गया।

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    इस रॉकेट के जरिए कार्टोसैट-2 के साथ 28 अंतर्राष्ट्रीय सह-यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं। इसके साथ ही दो अन्य भारतीय उपग्रह-पांच किलो वजनी नैनो अंतरिक्ष यान और लगभग 100 किलो वजनी सूक्ष्म उपग्रह शामिल हैं। सभी 31 उपग्रहों का वजह 1323 किलोग्राम है।

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    31 अगस्त, 2017 को इसी तरह के राकेट से नौवहन उपग्रह आई.आर.एन.एस.एस.1-एच लांच किया गया था, लेकिन हीट शील्ड न खुलने की वजह से सैटेलाइट राकेट के चौथे चरण में असफल हो गया था। पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष सफल परियोजना है। सैटेलाइट केन्द्र निदेशक एम. अन्नादुरई ने बताया कि माइक्रो उपग्रह अंतरिक्ष में भारत का 100वां उपग्रह है। अंतरिक्ष वैज्ञानिक और इंजीनियरों ने गुरुवार को राकेट के निचले, मध्य और ऊपरी हिस्से की तेल की टंकी में द्रव्य और ठोस ईंधन गुरुवार को ही भरना शुरू कर दिया था। बता दें कि 15 फरवरी 2017 को एक साथ 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजकर ISRO ने ऐसा इतिहास लिखा था, जिसे अब तक कोई दोहरा नहीं सका है।

    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भारत द्वारा 3 कार्टोसैट-2 श्रृंखला के अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रहों को अंतरिक्ष भेजे जाने की योजना का मकसद  सैन्य  इस्तेमाल है और सभी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां दोहरे इस्तेमाल की क्षमता से युक्त हैं। भारतीय उपग्रहों में 100 किलोग्राम का एक माइक्रो सैटेलाइट और 5 किलोग्राम का एक नैनो सैटेलाइट भी शामिल है। बाकी 28 सैटेलाइट कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमरीका के हैं। सभी उपग्रहों का कुल वजन 1323 किलोग्राम है। पाक ने कहा कि यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए न किया जाए, अगर ऐसा होता है कि इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा।

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