Category: national

  • वैश्विक सुरक्षा पहल से चीन को उम्मीद रखना बेमानी नहीं

    अप्रैल 2022 में जब चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वैश्विक सुरक्षा(International security) की पहल को लेकर अपना विचार दिया था तो दुनिया के कई देशों में इसकी ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया था। ऐसा माना गया कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग का यह प्रस्ताव वक्त के गर्द में डूब जाएगा। लेकिन चीन सरकार इस दिशा में काम करती रही। इसका ही नतीजा है कि जब पूरी दुनिया मातृभाषा दिवस मना रही थी, चीन सरकार ने 21 फरवरी को वैश्विक सुरक्षा पहल का अवधारणा पत्र जारी किया।

    वैश्विक सुरक्षा पहल में चीन सरकार(Government og chinna) ने दुनिया के सामने सहयोग के लिए एक रोड मैप पेश किया है, जिसके तहत बीस प्रमुख क्षेत्रों और बिंदुओं पर वैश्विक सहयोग की बात की गई है। मानवता के लिहाज सुरक्षा हर व्यक्ति की जरूरत है और इसे लेकर वैश्विक स्तर पर एकरूपता होनी चाहिए। शायद चीन सरकार ऐसी ही सोच पर आगे बढ़ रही है। शायद यही वजह है कि वैश्विक सुरक्षा पहल में चीन ने दुनिया से उम्मीद की है कि वह सामान्य तरीके से व्यापक स्तर पर सहयोगी, किंतु टिकाऊ सुरक्षा की अवधारणा पर आगे बढ़े। इस पहल की खास बात यह भी है कि इसमें वैश्विक स्तर पर हर देश की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता के सम्मान की भी बात की गई है।

    वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए अक्सर कहा जाता है कि संयुक्त राष्ट्र अपने गठन के उद्देश्यों को पूरा करने में नाकाम हुआ है। चीन की वैश्विक सुरक्षा पहल में दुनिया के सभी देशों से अपील की गई है कि वे संयुक्त राष्ट्र उद्देश्यों और सिद्धांतों का पालन करें। संभवत: चीन को लगता है कि संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों का ईमानदारी से पालन ही दुनिया में शांति और सुरक्षा की गारंटी दे सकता है। जब संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्यों का पालन होगा, वैश्विक स्तर पर मानवीय सुरक्षा की गारंटी होगी तो फिर युद्ध की कोई जरूरत ही नहीं रहेगी। शायद यही कारण है कि चीन ने अपनी इस पहल में दुनिया से शांतिपूर्ण तरीकों से देशों के आपसी मतभेदों और विवादों को हल करने की भी अपील की गई है। इसके साथ ही चीन सरकार ने इस पहल में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में सुरक्षा को बनाए रखने पर भी जोर दिया है। कहना न होगा कि ये सारे प्रस्ताव मानवता के लिहाज से ज्यादा मुफीद हैं।

    राष्ट्रपति शी चिनफिंग की पहल के बाद से दुनिया के करीब 80 देशों का इसे समर्थन मिल चुका है। चीन को ऐसे यह उम्मीद करना बेमानी नहीं है कि इसे और देशों का साथ मिलेगा। क्योंकि यह वैश्विक सुरक्षा और सहयोग के साथ ही सहकार की भावना से जुड़ा मामला है। चूंकि सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और मानवता को बचाने की ओर आज दुनिया का ध्यान कहीं ज्यादा है, इसलिए इस पहल से चीन सरकार को वैश्विक समर्थन की उम्मीद करना सहज ही है।

    (लेखक: उमेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ भारतीय पत्रकार)

  • Umesh pal Murder:- उमेश पाल की हत्या से हरे हुए 18 साल पहले के जख्म

    प्रयागराज के बहुचर्चित राजू पाल हत्याकांड (Raju Pal Murder) के मुख्य गवाह उमेश पाल (Umesh pal Murder) की शुक्रवार शाम गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। उसने कहा कि धूमनगंज थानाक्षेत्र में उमेश पाल के घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने बम और गोली से उन पर हमला किया। उसके अनुसार इस हमले में उमेश पाल के अलावा उनके दो सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए।

    शुक्रवार को ही इस मामले की अंतिम बहस चल रही थी। दिनदहाडे़ हुए इस हमले ने आज से 18 साल पहले की वह घटना याद दिला दी जब बसपा विधायक राजू पाल को घेर कर उनके शरीर को छलनी कर दिया गया था। उसी मामले में बाहुबली नेता अ‍तीक अहमद (Atique Ahmed) पर केस चल रहा था।
    25 जनवरी 2005 को राजू पाल अपनी समर्थकों के साथ स्‍वरूप रानी अस्‍पताल से वापस आ रहे थे। वह क्‍वालिस गाड़ी में थे। यह कार वह खुद चला रहे थे। उनके साथ आगे उनके मित्र की पत्‍नी रुखसाना बैठी थीं जो रास्‍ते में मिली थीं। पीछे की सीट पर संदीप यादव और देवीलाल बैठे थे। राजू पाल के पीछे स्‍कॉर्पियो चल रही थी उसमें उनके कुछ और सहयोगी थे।
    सुलेम सराय मोहल्‍ले में अमितदीप मोटर्स के सामने राजू की कार के सामने एक कार अड़ गई। जब तक राजू समझ पाते उसमें से 5 हथियारबंद हमलावर निकले और गोलियों की बौछार कर दी। तीन लोगों ने राजू की कार पर और दो लोगों ने पीछे स्‍कॉर्पियो पर गोलियां बरसाईं।
    दिनदहाडे़ अंधाधुंध फायरिंग से हड़कंप मच गया। हमलावर हमला करके फरार हो गए। राजू पाल का शरीर गोलियों से छलनी हो गया था। उनके शव से 19 गोलियां निकली थीं। कई गोलियां सीने के पार हुई, इसलिए मौके पर ही मौत हो गई। उनके साथ बैठे संदीप यादव और देवीलाल भी मारे गए। बाकी लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
    इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई राजू पाल की पत्‍नी पूजा पाल ने। हत्‍या से महज 10 दिन पहले ही राजू और पूजा की शादी हुई थी। राजू पाल की पत्नी पूजा ने उस समय के सांसद अतीक अहमद, उनके भाई अशरफ के अलावा तीन दूसरे लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया था। इस हत्याकांड के पीछे वजह यह थी कि सांसद बनने से पहले अतीक अहमद शहर पश्चिम से विधायक हुआ करता था। जब वह सांसद बना तो सीट खाली हो गई। 
    सीट उसी के पास रहे इसलिए उसने अपने भाई अशरफ को चुनाव में खड़ा किया लेकिन राजू पाल ने बसपा के टिकट पर अशरफ को हरा दिया। साल 2004 में हुए इस चुनाव का बदला ही 2005 में लिया गया। इसी मामले में उमेश पाल मुख्‍य गवाह थे। लेकिन 24 फरवरी को उनकी भी उसी अंदाज में हत्‍या कर दी गई।
    यह खबर नवभारत टाइम्स से ली गई है। टीम का इसमें कोई योगदान नहीं है।

  • केरल के मुख्यमंत्री ने सिसोदिया की गिरफ्तारी की निंदा की

    केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन(kerla chief minister Pinarayi Vijayan) ने सोमवार को शराब नीति मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया( DELHI DEPTUY CHIEF MNISTER MANISH SISODIYA) की गिरफ्तारी की निंदा की। उन्होंने ट्विटर पर कहा, “सीबीआई(CBI ARRESTED MANISH SISODIYA) द्वारा ससोदिया की गिरफ्तारी इस बात का एक और उदाहरण है कि कैसे बीजेपी4इंडिया(BJP4INDIA) विपक्ष को डराने के लिए केंद्र सरकार(CENTRAL GOVERNMENT USE GOVERNMENT AGENCY) की एजेंसियों का दुरुपयोग करता है। यह सत्ता का घोर दुरुपयोग और लोकतंत्र(ATTACK OF DEMOCRACY) पर हमला है। इस तरह का दमन नींव को बहुत कमजोर करता है। हमारे राष्ट्र का और इसका विरोध किया जाना चाहिए।”

    उनका ट्वीट उनके सहायक निजी सचिव सी. एम. रवींद्रन(C.M RAVINDRAN) के कोच्चि(KOCCHI) कार्यालय में पेश होने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सम्मन को छोड़ देने के घंटों बाद आया। इसके बजाय, रवींद्रन(RAVINDRAN) ने यह कहते हुए एक ई-मेल भेजा(SEND EMAIL) कि चूंकि वह चल रहे विधानसभा सत्र में व्यस्त हैं, जिसकी बैठक सोमवार को विराम के बाद फिर से शुरू हुई, इसलिए वह इसके सामने पेश नहीं हो पाएंगे। रवींद्रन का ईमेल ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री(kerla chief minister Pinarayi Vijayan) के पूर्व प्रधान सचिव एम. शिवशंकर, जो 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए थे, इस महीने की शुरुआत में तीन दिन की पूछताछ के बाद विजयन-लाइफ मिशन मामले में अब विवादास्पद पालतू परियोजना में जेल में हैं। कथित तौर पर बड़ी मात्रा में धन का आदान-प्रदान हुआ था, जिसका खुलासा सोने की तस्करी और लाइफ मिशन फ्लैट रिश्वत मामले में स्वप्ना सुरेश ने किया था।

  • टॉप 100 यूनिवर्सिटी की लिस्ट में यूपी का नाम नहीं, लखनऊ विश्वविद्यालय और काशी विधापीठ की स्थिति

    देश- उत्तरप्रदेश(uttarpradesh) भारत का सबसे बड़ा राज्य है। देश की राजनीति(politics) का ह्रदय कहे जाने वाले उत्तरप्रदेश(uttarpradesh) में मेडिकल कॉलेज(medical College) से लेकर कई बड़े शिक्षण संस्थान हैं। अलग-अलग राज्यों से लोग उत्तरप्रदेश(education in uttarpradesh) में शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। लेकिन अगर हम यूपी की यूनिवर्सिटी(uttarpradesh universities ranking) की रैंकिंग की बात करें तो उसके मुताबिक उत्तरप्रदेश(uttarpradesh education system) की शिक्षण व्यवस्था बदहाल है और यूपी की कोई भी स्टेट यूनिवर्सिटी देश के टॉप 100 (top 100 University list) में नहीं शामिल है।

    अभी हाल ही में सीएजी(CAG) ने जब टॉप 100 यूनिवर्सिटी(Top hundred universities) की लिस्ट निकाली। तो इसमें यूपी की कोई भी यूनिवर्सिटी नहीं दिखी। वहीं इस रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षा के मामले में सबसे खराब स्थिति लखनऊ विश्वविद्यालय(Lucknow University) और महात्मा गांधी काशी विश्विद्यालय(Mahatma Gandhi Kashi Vidyapeeth University) की दिखाई गई है। यह दोनों यूनिवर्सिटी ऐसी है जिनमे हर वर्ष करीब 60 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई करके बाहर निकलते हैं। 
    रिपोर्ट के मुताबिक इन संस्थानों से निकले छात्रों(students) को रोजगार(employment) नहीं मिल पा रहा है। वहीं संस्थानों को इसका बोध नहीं है कि संस्थान से निकले छात्र अपने बेहतर भविष्य के लिये क्या कर रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है काशी विद्यापीठ(Kashi Vidyapeeth) के 70 से 80 फीसदी और लखनऊ विश्वविद्यालय के 50 से 60 फीसदी छात्र पोस्ट मेट्रिक स्कॉलरशिप का लाभ उठा रहे हैं।
    क्यों नहीं मिल रहा रोजगार-
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन विश्विद्यालय(universities) से निकले छात्रों को रोजगार(employment) न मिलने का अमुख कारण उनके अंदर स्किल्स की कमी होना है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय(University) में उनकी क्लास परंपरागत तरीके से नहीं होती हैं। प्रोफेसर का फोकस किताबी ज्ञान देने में रहता है। छात्रों को कोई भी स्किल डिवेलपमेंट का कोर्स नहीं करवाया जाता है।

  • 2024 में यूपी की सड़कें अमेरिका की तरह चमकेंगी, बात लिख लो वादा पूरा न हो तो चलाना ब्रेकिंग न्यूज़

    देश- बीते कई महीनों पहले केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी(Nitin gadkari) ने कहा था कि साल 2024 तक उत्तरप्रदेश(uttarpradesh) की सड़कें अमेरिका(America) जैसी हो जाएगी। वहीं अब उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए कहा- 2024 तक उत्तरप्रदेश विकास(Development of uttarpradesh) के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगा। प्रदेश(uttarpradesh) की सड़कें अमेरिका की जैसी हो जाएगी।

    उन्होंने आगे कहा, यूपी(up) विकास को स्पर्श कर रहा है। आज यूपी हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। हमारा प्रयास है कि किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जा दाता बने। ऊर्जा के निर्यात में उत्तरप्रदेश(uttarpradesh) की अहम भूमिका रही है। 
    साल 2014 से पहले देश का विकास स्थिर था। यूपी(uttarpradesh) की सड़कों की हालत खस्ता थी। लेकिन मोदी जी के नेतृत्व में यूपी(uttarpradesh) निरंतर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। साल 2024 के अंत तक यूपी की सड़कें अमेरिका(America) की तरह हो जाएगी।
    उन्होंने आगे कहा, मैं किसी को भी झूठा आश्वासन नहीं देता हूँ और न ही झूठी दिलासा बंधाता हूँ। मैं जो कहता हूँ वही करता हूँ। मेरी बात रिकॉर्ड करलो। अगर यह वादा पूरा न हो तो आप लोग इसे ब्रेकिंग न्यूज़ में चलाना।

  • धर्मांतरण और आरक्षण पर दो दिवसीय सम्मेलन- विधिवेता, शिक्षाविद, शोध छात्र और स्वयंसेवी संगठन होंगे शामिल

    धर्म परिवर्तन करने वाले अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए अथवा नहीं, इस विषय पर चर्चा के लिए 4 और 5 मार्च को ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया जा रहा है। इसकी जानकारी देते हुए कार्यक्रम के संयोजक व जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉ प्रवेश चौधरी ने बताया कि इस राष्ट्रीय बौद्धिक विमर्श में देश भर के विधिवेता, शिक्षाविद, शोध छात्र एवं स्वयंसेवी संगठन भी शामिल हो रहे है।

    उन्होंने कहा कि हम सब को विदित है की यह विषय सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है। इस पर समाज की राय जानने हेतु, सरकार ने पूर्व न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन भी किया है। इसी पर विचार विमर्श हेतु आगामी 4 और 5 मार्च को ग्रेटर नोएडा में देश भर के बौद्धिक जगत के नाम-चीन लोग जुटेंगे। इसका विषय- ‘धर्मांतरण और आरक्षण: के जी बालाकृष्णन आयोग के विशेष सन्दर्भ में’ रखा गया है। उन्होंने आगे बताया कि इस दो दिवसीय परिचर्चा में उनका प्रयास है कि धर्मांतरण और आरक्षण पर बिन्दुवार चर्चा हो। धर्मान्तरित ईसाई एवं मुसलमानों को आरक्षण मिले अथवा न मिले इसको लेकर सच्चर कमेटी, रंगनाथ मिश्रा आयोग के गठन और उसकी अनुशंसा के बाद देश में अनुसूचित जाति के बंधुओं के मध्य एक उहापोह की स्थिति का निर्माण हुआ है। समाज में इस पर एक विस्तृत विमर्श भी हो रहा है।

    दरअसल, कुछ लोगों का मानना है कि धर्मान्तरित ईसाई एवं मुसलमान हिन्दू धर्म से धर्मान्तरित होने के बावजूद भी अपने सामाजिक स्तर में कोई परिवर्तन नहीं पाते है। रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों पर, उसकी वैधता, अध्ययन, अध्ययन की पद्धति, समय अवधि को लेकर समाज में तमाम प्रश्न खड़े हुए हैं। वहीं देश का बहुसंख्यक समाज यह मानता है की अनुसूचित जाति जिनका धर्म हिन्दू है, ऐसे लोगों को ही तमाम संविधान प्रदत्त सुविधाएं, प्रतिनिधित्व एवमं आरक्षण मिलना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में भारत सरकार ने इन्हीं प्रश्नों के समाधन हेतु के. जी बालाकृष्णन आयोग का गठन किया है। ऐसे में समाज के बौद्धिक वर्ग को एक स्वतंत्र मंच देने के लिए ही यह विमर्श आयोजित किया जा रहा है। इस विमर्श की विशेषता यह है कि इसमें सम्पूर्ण भारत के प्रत्येक राज्य के विश्व-विद्यालयों में पढ़ाने वाले प्रोफेसर, स्कूलों के डीन, विभाग अध्यक्ष, कुलपति, शोधार्थी एवं गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं। इसमें कई पूर्व न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हो रहे हैं। प्रस्तावित परिचर्चा की जानकारी देते समय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्व-विद्यालय के प्रोफेसर डॉ कौशल पंवार तथा विश्व संवाद केंद्र के विजय शंकर तिवारी भी मौजूद रहे।

  • वाइस एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने पश्चिमी नौसेना कमान प्रमुख का पदभार संभाला

    वाइस एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने मंगलवार को वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह की जगह पश्चिमी नौसेना कमान के नए फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार संभाला। समारोह में शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में आईएनएस शिकरा में आयोजित प्रभावशाली औपचारिक परेड का आयोजन किया गया। पदभार संभालने के तुरंत बाद, वाइस एडमिरल त्रिपाठी ने नौसेना डॉकयार्ड में ‘गौरव स्तंभ’ (विक्ट्री एट सी मेमोरियल) पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी जवानो को श्रद्धांजलि दी।

    अपने नए कार्यभार से पहले, वाइस एडमिरल त्रिपाठी नौसेना मुख्यालय में कार्मिक प्रमुख थे। सैनिक स्कूल, रीवा, (मध्य प्रदेश) और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला के पूर्व छात्र, त्रिपाठी को 1 जुलाई, 1985 को भारतीय नौसेना में नियुक्त किया गया था।

    संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ, उन्होंने विभिन्न क्षमताओं में भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर सेवा की और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, आईएनएस मुंबई के कार्यकारी अधिकारी और प्रधान युद्ध अधिकारी रहे। उन्होंने आईएनएस विनाश, आईएनएस किरश और आईएनएस त्रिशूल जैसे जहाजों की कमान संभाली है, और वर्षों से मुंबई और नई दिल्ली में महत्वपूर्ण परिचालन और स्टाफ नियुक्तियां की हैं।

    रियर एडमिरल के रूप में पदोन्नति के बाद, उन्होंने सहायक सीएनएस, एफओसी ईस्टर्न फ्लीट, इंडियन नेवल एकेडमी, केरल के कमांडेंट, डीजी, नेवल ऑपरेशंस जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, यह सुनिश्चित करते हुए कि भारतीय नौसेना युद्ध के लिए तैयार, एकजुट और विश्वसनीय बल बनी रहे, किसी भी चुनौती से निपटें। डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन के स्नातक, वाइस एडमिरल त्रिपाठी ने यूएस नेवल वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट में विशेष पाठ्यक्रमों में भी भाग लिया, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित रॉबर्ट ई. बेटमैन अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। वाइस एडमिरल त्रिपाठी की शादी कलाकार और गृहिणी शशि से हुई और इस जोड़े का एक बेटा है जो पेशेवर वकील हैं।

  • हिंदूओ के लिये नर्क है यह देश

    विदेश– पाकिस्तान(Pakistan) की बदहाल स्थिति किसी से छुपी नहीं है। आम जनमानस रोटी को टतरस रहा है। महंगाई असमान छू रही है। कर्ज का बोझ पाकिस्तान(Pakistan economy) की रीढ़ तोड़ रहा है। राजनेता अपने स्वार्थ के लिए जनता का उपयोग कर रहे हैं। आतंकवाद बढ़ता जा रहा है और बंदूक की नोक पर महिलाओं(women) के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है। आज स्थिति ऐसी है कि आगामी समय में पाकिस्तान का अस्तित्व रहेगा या नहीं यह कह पाना बेहद मुश्किल हो गया है।

    आर्थिक समस्याओं(Pakistan economy crisis) से जूझ रहे पाकिस्तान में जहां महिलाओं के साथ अपराध बढ़ते जा रहे हैं। वहीं बंदूक की नोक पर हिन्दू महिलाओं के जबरन धर्म परिवर्तन करवाने, उनके साथ रेप करने, उनको घर से उठाकर ले जाने की घटनाएं रोजाना सामने आ रही हैं। 
    बीते दिनों पाकिस्तान(Pakistan economy system) में एक नाबालिग हिन्दू लड़की को जबरन धर्म परिवर्तित करवाकर शादी करवाने का मामला सामने आया। लड़की के माता पिता का कहना है कि उनकी बेटी नाबालिग है और जबरन उसको घर से उठाकर उसकी शादी करवाई गई है। पाकिस्तान(Pakistan economy) में आज खाने के संसाधन नहीं हैं लेकिन इसके बाद भी हिंदूओ के साथ अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। लोग यहां हमारे धर्म को केंद्रित करते हुए हमारा शोषण करते हैं।

    क्या है पूरा मामला-

    लकड़ी पक्ष का दावा है कि उनकी बेटी नाबालिग है। ज़बरन उसका धर्म परिवर्तित करवाकर शादी करवाई गई है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि लड़की की उम्र 19 वर्ष है। उसने अपनी मर्जी से इस्लाम कुबूल किया है और शादी की है।
    लड़की का नाम करिश्मा है। जो सिंध के मीरपुरख़ास ज़िले के नौकोट क़स्बे की है। लड़की के पिता का दावा है उनके घर मे कुछ लोग जबरन घुस आए। उनके हाथ में हथियार थे। उन्होंने उनकी बेटी को उठाया और उसका धर्म परिवर्तित करवाकर उसकी शादी करवाई। लड़की के परिजनों के मुताबिक उसकी उम्र अभी महज 16 वर्ष है।
    करिश्मा के पिता का कहना है उन्होंने पुलिस से मदद की गुहार लगाई। थाने में जब वह तहरीर दर्ज करवाने गए तो उन्हें सख्त कार्यवाही की दिलासा दी गई और उन्हें घर भेज दिया गया। लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई है। लेकिन बाद में पता चला कि उनकी बेटी ने इस्लाम कबूल कर लिया है और अब वह मुस्लिम बन गई है।
    क्या है पाकिस्तान में हिन्दू की दशा-
    आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में हिन्दू को हीन भाव से देखा जाता है। हर ओर उनका शोषण होता है। महिलाओं के साथ बंदूक की नोक पर रेप की घटनाएं आय दिन सामने आती हैं। वहीं हैरान करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान सरकार हिन्दू हित के लिए कभी नहीं खड़ी होती है। हिंदुओं को न तो सरकार का समर्थन मिलता है और न ही कानून में उनके लिए कोई ऐसा प्रावधान है। पुलिस से लेकर कोई भी सरकारी संस्थान हिंदूओ की मदद के लिए आगे नहीं आता है।

  • जिन धाराओं के तहत हुई मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी, जाने उनके क्या है सजा

    देश- बीते दिनों दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया(Delhi deputy chief minister Manish sisodiya) को सीबीआई(CBI) ने शराब घोटाले मामले में हिरासत में ले लिया। सीबीआई(CBI) ने 8 घण्टे की पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लिया है। सूत्रों के अनुसार उन्हें धारा 120B और 477B तहत गिरफ्तार(CBI arrested Manish sisodiya) किया गया है। लेकिन इस परिपेक्ष्य में अभी सीबीआई(CBI) की ओर से कोई बयान नहीं आया है।

    बता दें धारा 120B तब लगाई जाती है जब यह महसूस होता है कि आरोपी कोई षड्यंत्र रच रहा है। इसके तहत आरोपी को अधिक व्यक्त के लिये गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। अगर आरोप साबित हो जाता है तो आरोपी को 6 माह की सजा सुनाई जाती है या आर्थिक दंड सहिंता लगाई जाती है। कई बार आरोपी पर यह दोनों लगाई जाती हैं।
    धारा 477A, ’खातों का फर्जीवाड़ा’ के अपराध को परिभाषित और दंडित करती है। इसके प्रावधान के अनुसार, जो कोई क्लर्क, अधिकारी या नौकर होने के नाते, या उस क्षमता में कार्यरत या कार्य कर रहा है, जानबूझकर और किसी भी पुस्तक, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, कागज, लेखन, या जो उसके कब्जे में है, जानबूझकर और धोखाधड़ी के इरादे से, यदि वह ऐसा करने के लिए उकसाता है, तो उसे कारावास से दंडित किया जा सकता है। इस आरोप में सात साल तक की सजा हो सकती है और अर्थदंड भी लगाया जा सकता है।

  • संजीव कपूर का फ्लाइट में खराब खाना परोसे जाने को लेकर एयर इंडिया पर निशाना

    जाने-माने शेफ संजीव कपूर(sanjeev kapoor) ने सोमवार को नागपुर से मुंबई जा रहे एक विमान में खराब खाना परोसे जाने पर एयर इंडिया(india) पर निशाना साधा। उन्होंने अपने खाने की तस्वीरें साझा कीं, उन्होंने ठंडा चिकन टिक्का, बहुत कम भरने वाला सैंडविच(sandwich) और मिठाई जिसे चीनी सिरप(chini surup) कहा।

    कपूर ने ट्विटर पर कहा, जागो एयर इंडिया(jago air india)। नागपुर-मुंबई(Nagpur-Mumbai) 0740 फ्लाइट। ठंडा चिकन टिक्का तरबूज, ककड़ी, टमाटर और सेव सैंडविच के साथ मेयो शुगर सिरप स्पंज के साथ कटी हुई पत्तागोभी के साथ मीठी क्रीम और पीले ग्लेज से रंगा हुआ।

    उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा- सचमुच! क्या भारतीयों को नाश्ते में यही खाना चाहिए? पिछले हफ्ते तृणमूल कांग्रेस की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने उड़ान के दौरान खाने में बाल पाए जाने पर सोशल मीडिया पर शिकायत की थी। अभिनेता से राजनेता बनीं मिमी ने कहा कि उन्हें एमिरेट्स की फ्लाइट में परोसे गए भोजन में बाल मिले। इससे जुड़ी तस्वीरें उन्होंने ट्विटर पर भी शेयर की थीं।