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  • बड़ा खुलासा, मालेगांव ब्लास्ट में योगी अौर भागवत को फंसाने की थी साजिश

    इंदौर। मालेगांव ब्लास्ट में शामिल होने का आरोप लगाकर एटीएस ने 15 दिन कस्टडी में रखा। रातभर पट्टे से पीटा और उलटा लटका दिया। पत्नी-बच्चों को आरोपी बनाने की धमकी देकर भाजपा नेता, उत्तर प्रदेश के वर्तमान सीएम और संघ प्रमुख सहित कई बड़े नेताओं के नाम कबूलने का दबाव बनाया, लेकिन आखिरकार सच की जीत हुई। यह कहना है मालेगांव धमाके के आरोपों से बरी हुए आरोपी श्याम साहू का। 2008 में गिरफ्तारी के बाद तीन साल जेल में रहे साहू को 2011 में जमानत मिल गई थी। मकोका कोर्ट ने बुधवार को उसे केस से बरी कर दिया।

    साउथ तुकोगंज निवासी साहू को मुंबई एटीएस ने उस वक्त गिरफ्तार किया था जब केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) मालेगांव सहित कई स्थानों पर बम धमाकों में हिंदूवादी संगठनों के सदस्यों की तलाश में देशभर में छापे मार रही थी। तत्कालीन एटीएस चीफहेमंत करकरे (मुंबई) की टीम साहू को घंटाघर स्थित मोबाइल दुकान से पकड़ कर ले गई।

    आरोप था कि साहू ने साध्वी प्रज्ञा सिंह की मदद से सितंबर 2008 में मालेगांव के भीकू चौक में बम प्लान किया था। उसके साथी रामजी कलसांगरा व संदीप डांगे (फरार) ने बाइक में बम लगाए और साहू ने चौक में जाकर खड़ी कर दी। साहू के मुताबिक सबसे पहले एटीएस ने साध्वी को हिरासत में लिया। उनसे मिली जानकारी के बाद एटीएस उसे भी उठा कर ले गई। दोनों को काला चौकी मुख्यालय में बंद रखा जाता था।

    तत्कालीन एटीएस चीफ हेमंत करकरे, एसीपी सचिन कदम व टीआई मोहन कुलकर्णी रातभर पूछताछ करते थे। शरीर के सारे कपड़े उतरवाकर रातभर पट्टे से पिटाई करते थे। परिवार के किसी भी सदस्य को मिलने भी नहीं दिया। पत्नी व बच्चों को मुलजिम बनाने की धमकी दी और कहा कि ‘तुम इतना कबूल कर लो कि इस बम ब्लास्ट में योगी आदित्यनाथ (वर्तमान उप्र के सीएम), मोहन भागवत (संघ प्रमुख), इंद्रेश कुमार (संघ नेता) व अन्य भाजपा नेताओं का हाथ है’। उन्होंने कोरे कागजों पर साइन भी करवा लिए। कोर्ट पेशी पर पता चला उसे धमाकों के अन्य आरोपियों को सिम उपलब्ध कराने और षड्यंत्र का आरोपी बना दिया है।

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    एटीएस ने इस मामले में श्याम साहू के अलावा साध्वी प्रज्ञासिंह, कर्नल प्रसाद पुरोहित, रि. मेजर रमेश उपाध्याय, अमृतानंद, समीर कुलकर्णी, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, जगदीश म्हात्रे, प्रवीण करालकी, राकेश धावड़े, शिवनारायण कलसांगरा को आरोपी बनाया गया था। जबकि रामजी कलसांगरा और संदीप डांगे को फरार घोषित कर दिया। दोनों पर समझौता, मालेगांव (2006), हैदराबाद मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ धमाकों का भी आरोप है। श्याम के मुताबिक उसकी रामजी से दोस्ती थी। दोनों एक साथ कारोबार करते थे। रामजी के साथ आरएसएस की शाखाओं में जाता था। दोस्ती के चलते रामजी उसकी दुकान से मोबाइल सिम रिचार्ज करवाता था। सिम भी उसकी दुकान से खरीदता था।

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  • सावधान: रेलवे की पेंट्रीकार में इस पानी से पकाया जाता है यात्रियों के लिए खाना

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    नई दिल्ली । हरिद्वार-पुरी उत्कल एक्सप्रेस के यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। मंगलवार को फिर ट्रेन की सफाई करने वाले पानी से पेंट्रीकार में खाना पक रहा था। इसके लिए पांच हजार रुपये जुर्माना भी किया गया। इसके अलावा प्लास्टिक चावल उपयोग करने के संदेह पर सैंपल जांच के लिए कोलकाता भेजा गया है। गंदगी व खानपान की क्वालिटी को लेकर उत्कल एक्सप्रेस शुरू से सुर्खियों में रही है।

    यही वजह है कि जोनल स्टेशन में इस ट्रेन की बीच-बीच में औचक जांच होती है। मंगलवार को भी आइआरसीटीसी के एरिया मैनेजर राजेंद्र बोरबन ने इस ट्रेन की पेंट्रीकार की व्यवस्था परखने के लिए निरीक्षण किया। एरिया मैनेजर पेंट्रीकार में पहुंचे।

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    कर्मचारी हाईड्रेन पाइप से पेंट्रीकार में रखे बर्तनों में पानी भर रहे थे। चूल्हे में खाना पक रहा था। इसमें भी वे इसी का पानी का इस्तेमाल कर रहे थे। इस पर पेंट्रीकार मैनेजर को जमकर फटकार लगाई। इस लापरवाही पर पांच हजार रुपये जुर्माना किया गया।

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    हालांकि कुछ कर्मचारी सफाई देने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच किसी यात्री ने खाने की क्वालिटी को लेकर शिकायत की, जिस पर सब्जियां व चावल मंगाया और जांच करने लगे। सब्जी तो ठीक थी। लेकिन जैसे ही उन्होंने चावल को हाथ से दबाया उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि यह प्लास्टिक चावल है।
    संदेह के आधार पर चावल का सैंपल लिया गया। लैब में इसकी जांच कराई जाएगी। उत्कल एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में संदेह के बाद अचानक आइआरसीटीसी सतर्क हो गया। इसके बाद उन्होंने दुर्ग-जम्मूतवी एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस दोनों की पेंट्रीकार की औचक जांच कर वहां पकने वाले चावल का सैंपल लिया गया।
    इसके अलावा जनआहार केंद्र व कमसम फूड प्लाजा में दबिश देकर वहां से भी सैंपल लिया। इन्हें जांच के लिए कोलकाता भेजा गया।

  • खत्म हुआ तलाक तलाक तलाक.. लोकसभा में पास हुआ ऐतिहासिक बिल

      

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      नई दिल्ली । तीन तलाक पर मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है। लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद तीन तलाक पर ऐतिहासिक श्मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिजश् बिल पास हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को पेश किया। बिल के खिलाफ सभी 19 संशोधन खारिज हो गए। एमआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भी 2 संशोधन थे। ओवैसी के पक्ष में दो और विरोध में 247 वोट पड़े। इसके साथ ही बीजू जनता दल के सांसद भ्रातृहरि महताब और कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव का संशोधन प्रस्ताव भी वोटिंग में खारिज हो गए। इसके बाद बिल के पक्ष में हुई वोटिंग में ये पास हो गया। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इसकी जानकारी देते हुए सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बिल पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सभी इस्घ्लामी मुल्घ्कों में भी तीन तलाक नहीं है। वहां भी तलाक से पहले नोटिस देते हैं। इससे तलाक पीड़ितों को मदद मिलेगी न कि शरिया में दखल दिया जाएगा। कानून मंत्री ने आगे कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक पर रोक लगाने के बावजूद अभी भी यह जारी है। आज सुबह मैंने अखबार में रामपुर का एक मामला देखा जिसमें देर से जगने पर पत्घ्नी को तलाक दे दिया।

    कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड्गे ने कहा बिल में कुछ खामियां हैं जो कमेटी दूर कर सकती है हम इसके समर्थन में हैं। कांग्रेस की ओर से की गयी इस मांग को सरकार ने ठुकरा दिया और कहा कि जो भी चर्चा हो सदन में ही होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस सांसद सुष्घ्मिता देव ने कहा, ‘इस विधेयक में तिहरे तलाक को अपराध घोषित किया जा रहा है लेकिन मुआवजे को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है। 1986 के कानून में मुआवजा देने का स्पष्ट प्रावधान है। अधिकतर मुस्लिम देशों में तलाक देने वाले पति को नोटिस देकर सूचना देने का प्रावधान रखा गया है।‘ इसका मसौदा गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले एक अंतर-मंत्री समूह ने तैयार किया है। प्रस्तावित कानून एक बार में तीन तलाक या श्तलाक ए बिद्दतश् पर लागू होगा। इसके तहत पीड़िता अपने व अपने नाबालिग बच्चों के लिए संरक्षण व गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है। इस मामले पर मजिस्घ्ट्रेट अंतिम फैसला करेंगे। इसके तहत किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा। तीन तलाक गैरकानूनी होगा और ऐसा करने पर पति को तीन साल की जेल की सजा हो सकती है।

  • जब तीन तलाक बिल को कानून मंत्री ने बताया ऐतिहासिक कदम

    दिल्ली ।  लोकसभा में तीन तलाक के संबंधित बिल को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया। विधेयक पेश करते हुए उन्होंने कहा कि ये कानून महिलाओं के अधिकार और न्याय के लिए है, किसी प्रार्थना, धर्म या धार्मिक प्रथाओं से संबंधित नहीं है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कानून मंत्री ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। हम एक ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जिसमें  मुस्लिम समाज की महिलाएं सम्मान के साथ जिंदगी बिता सकें। इसके साथ ही इस कानून के जरिए दशकों से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। ये बात अलग है कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने  बिल के कुछ प्रावधानों से ऐतराज जताया।

    बिल के विरोध में विपक्षी

    एआइएमआइएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह बिल न केवल मौलिक अधिकारों का हनन करता है। बल्कि कानूनी तौर पर भी कमजोर है।

    कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि बिल का सिर्फ इस लिए समर्थन नहीं किया जा सकता है कि सत्ता पक्ष ये समझाने में कामयाब रहा कि तीन तलाक को अपराध घोषित कर किस तरह से महिलाओं को मदद की जा सकती है। अगर किसी शख्स को तीन तलाक कहने के जुर्म में जेल में डाल दिया जाता है तो उसके परिवार का भरण-पोषण कौन करेगा।

    बीजू जनता दल के नेता भर्तुहरि महताब ने कहा कि इस बिल में कई दोष हैं, बिल में ऐसे कई प्रावधान हैं जो आपस में एक दूसरे के विरोधी हैं।

    बिल में प्रावधान

    -तलाक ए बिद्दत यानि कि एक ही बार में तीन तलाक बोलने पर शौहर को तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
    -पीड़ित महिला अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी और गुजारा भत्ते का दावा भी कर सकेगी।
    -एक बार में तीन तलाक किसी भी सूरत में गैर कानूनी माना जाएगा। इसमें बोलकर या वाट्सऐप, ईमेल और एसएमएस के जरिए तीन बार तलाक देना शामिल है।

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     सुप्रीम कोर्ट के बेंच की राय
    तीन जजों के मुताबिक तुरंत ट्रिपल तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक गैर कानूनी और इस्लाम के खिलाफ थे।  यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है और इसलिए मुस्लिम इस तरीके से तलाक नहीं ले सकते हैं।अब सवाल यह उठता है कि मुस्लिमों में अब तलाक कैसे होगा? भारतीय मुसलमान दो और तरीकों से तलाक ले सकते हैं: तलाक-ए-एहसन और तलाक-ए-हसना।

    तलाक-ए-एहसन- एक बार में एक तलाक बोला, इसके बाद तीन महीने तक इंतजार किया। इस दौरान अगर पति-पत्नी के बीच सुलह हो जाए तो तलाक नहीं होगा। अगर सुलह नहीं हुई तो तीन महीने के बाद तलाक हो जाएगा।

    तलाक-ए-हसना- पत्नी के मासिक धर्म के बाद तलाक बोला, इसके बाद अगले मासिक धर्म के बाद तलाक बोला और फिर तीसरे महीने के मासिक धर्म के बाद तलाक बोला। इस तरह तीन महीने तक लगातार तलाक बोलने के बाद तलाक हो जाएगा।

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    इन महिलाओं ने लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया

    शायरा बानो
    35 वर्षीय शायरा बानो की शादी इलाहाबाद के रहने वाले वाले रिजवान अहमद से हुई थी। वह मूल रूप से उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं। शादी के बाद 15 साल बाद उनके पति ने 2015 में तीन तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर दिया। इसके बाद शायरा ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपनी याचिका में उन्होंने तलाक-ए बिदत, बहुविवाह और निकाह हलाला को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की। शायरा के दो बच्चेा भी हैं।


    इशरत जहां

    30 वर्षीय इशरत जहां पश्चिम बंगाल के हावड़ा की रहने वाली हैं। उनके पति ने दुबई से ही फोन पर तलाक देकर रिश्ताी खत्म् कर दिया। इसके बाद उन्होंैने 2016 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनके चार बच्चे हैं। उन्होंाने अपने पति पर बच्चों को जबरन अपने पास रखने का आरोप लगाया है। इशरत के पति दूसरी शादी कर ली है। उन्होंंने अपनी याचिका में बच्चों को वापस दिलाने और पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि तीन तलाक गैरकानूनी है और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन है।

    जाकिया सोमन
    जाकिया सोमन भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की संस्थापक हैं। उनकी संस्था ने लगभग 50 हज़ार मुस्लिम महिलाओं के हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा था। ज्ञापन में तीन तलाक को ग़ैर क़ानूनी बनाने की मांग की गई थी। इस पर मुस्लिम समाज के कई पुरुषों ने भी हस्ताक्षर किए थे। यह संस्था पिछले 11 सालों से मुस्लिम महिलाओं के बीच काम कर रही है।

    आफरीन रहमान
    राजस्थान के जयपुर की रहने वालीं 26 वर्षीय आफरीन रहमान ने एक मैट्रिमोनियल पोर्टल के जरिए 2014 में शादी की थी। हालांकि दो-तीन महीने बाद ही उनके ससुराल वालों ने दहेज को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसके बाद वह अपने माता-पिता के पास वापस लौट आईं। पिछले साल मई में उन्हें स्पीाड पोस्टन के जरिए एक खत मिला, जिसमें तलाक का एलान किया गया था। इसके बाद उन्होंनने कोर्ट का रुख किया।

    गुलशन परवीन
    उत्तनर प्रदेश के रामपुर की रहने वालीं 31 वर्षीय गुलशन परवीन ने 2013 में शादी की थी और दो साल तक दहेज को लेकर घरेलू हिंसा का शिकार होती रहीं। इसके बाद 2015 में उन्हेंप 10 रुपए के एक स्टादम्पक पेपर पर पति की तरफ से तलाकनामा मिला।

    ऐसी ही कई और मुस्लिम महिलाएं हैं, जिन्होंदने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट का रुख किया और अंजाम सबके सामने है। पिछले कुछ समय में कई मुस्लिम महिलाएं खुलकर इस प्रथा के विरोध में खड़ी हो गई हैं। आज जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो कुछ महिलाओं ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई और फैसले की सराहना की।

    तीन तलाक पर बेंच में थे मतभेद

    चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर जहां तीन तलाक की प्रथा पर छह माह के लिए रोक लगाकर सरकार को इस संबंध में नया कानून लेकर आने के लिए कहने के पक्ष में थे, वहीं जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आर एफ नरीमन और जस्टिस यूयू ललित ने इस प्रथा को संविधान का उल्लंघन करार दिया। बहुमत वाले इस फैसले में कहा गया कि तीन तलाक समेत हर वो प्रथा अस्वीकार्य है। तीन जजों ने यह भी कहा कि तीन तलाक के जरिए तलाक देने की प्रथा स्पष्ट तौर पर स्वेच्छाचारी है। यह संविधान का उल्लंघन है और इसे हटाया जाना चाहिए।

    इन देशों में भी लगा है प्रतिबंध

    तीन तलाक के ऊपर दुनिया के कई देशों ने प्रतिबंध लगाया हुआ है। इनमें एल्जिरिया, बांग्लादेश, ब्रुनेई, साइप्रस, इजिप्ट, इंडोनेशिया, इरान, इराक, जोर्डन, मलेशिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, सीरिया, ट्यूनिशिया, तुर्की और यूएई शामिल है। अब दुनिया के इन देशों की सूची में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से तीन तलाक को असंवैधिक करार देने के बाद भारत भी शामिल हो गया है।

  • 5000 करोड़ का घोटाला!

    सोनिया के सलाहकार अहमद पटेल और उनके बेटे

    नयी दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल उनके बेटे और दामाद पर ईडी (एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट) का शिकंजा कस सकता है. मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में एक कॉपोरेट कर्मचारी ने अहमद पटेल उनके बेटे फैजल पटेल और दामाद इरफान सिद्दीकी का नाम ले लिया. संदेसरा ग्रुप के कर्माचारी सुनील यादव ने अपने लिखित बयान में माना है कि इन्होंने इन लोगों को काफी पैसे दिये हैं.
    अपने लिखित बयान में सुनील ने कहा, मैने फैजल के ड्राइवर को पैसे दिये हैं जिसे अहमद पेटल तक पहुंचाना था. सुनील ने यह भी दावा किया है कि संदेसरा ग्रुप के चेतन संदेसरा हमेशा अहमद पटेल से मिलते थे. पटेल के घर को संदेसरा अपना हेडक्वॉर्टर 23 बताता था. सुनील के इस पूरे बयान को मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के सेक्शन 50 के तहत दर्ज किया है. इस पूरे मामले पर अहमद पटेल ने टिप्पणी से इनकार कर दिया वहीं उनके बेटे और दामाद की तरफ से भी अबतक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है. दूसरी तरफ समन जारी करने के बाद भी चेतन संदेसरा जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं. कंपनी पर 500 करोड़ रुपये बैंक लोन पर धोखाधड़ी का आरोप है. ईडी इस मामले की जांच में लगा है. इस मामले में अहमद पटेल का नाम सामने आने के बाद राजनीति भी तेज है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में एक अहमद पटेल 19 साल तक कांग्रेस अध्यक्ष रही सोनिया गांधी के राजनैतिक सलाहकार रहे हैं. उन्हें गांधी परिवार के काफी करीब माना जाता है.।

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  • जाधव पर राज्‍यसभा में सुषमा बोलीं- मां-पत्‍नी को विधवा की तरह किया गया पेश

    दिल्‍ली । विदेश मंत्री Sushma Swaraj ने कहा  Kulbhushan Jadhav पर राज्‍यसभा में बयान देते हुए कहा कि पाकिस्‍तान ने इस मुलाकात को प्रोपेगेंडा बनाया। उन्‍होंने बताया कि सरकार कुलभूषण जाधव मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट तक लेकर गई, जिसके बाद उनपर जारी किए गए फांसी के फैसले को टाल दिया गया है। मुश्किल समय में सरकार ने परिवार का साथ नहीं छोड़ा। हमने परिवार के सदस्यों की जाधव से मिलने की इच्छा को पूरा किया। लेकिन इस मुलाकात के दौरान पाकिस्‍तान ने बेअदबी की सारी हदें पार कर दीं।

    सुषमा स्‍वराज ने कहा कि पाकिस्तानी मीडिया ने कुलभूषण जाधव के परिवार से दुर्व्यवहार किया। हमारे बीच स्पष्ट समझौता था कि मीडिया को आने की अनुमति नहीं मिलेगी, लेकिन इस समझौते का उल्लंघन हुआ। कुलभूषण ने सबसे पहला सवाल पूछा कि ‘बाबा कैसे हैं’। सुषमा ने कहा कि जाधव की मां और पत्‍नी की बिंदी और मंगलसूत्र उतरवा लिए गए। जाधव की मां सिर्फ साड़ी पहनती हैं, लेकिन इस मुलाकात से पहले उन्‍हें सलवार-कुर्ता पहनने के लिए मजबूर किया गया। इन दोनों सुहागनों को एक विधवा की तरह पेश किया गया। जाधव की मां अपने बेटे से मराठी में बात करना चाहती थी। इस पर उन्‍हें बार-बार टोका गया और जब वह बात करती थी, तो इंटरकोम को बंद किया गया।

    उन्‍होंने कहा, ‘पाकिस्‍तान यहीं तक नहीं रुका, उन्‍होंने कुलभूषण जाधव की पत्नी के जूते तक उतरवा लिए और उन्‍हें वापस नहीं किया। पाकिस्तान का कहना है कि जूते में एक कैमरा या एक रिकॉर्डर था। इससे ज्यादा बेतुकी बात क्‍या हो सकती है, क्योंकि उन जूतों को पहनकर ही उन्‍होंने 2 फ्लाइट्स में सफर किया था। यह उपाय से परे एक मूर्खता है। कुलभूषण के परिवार के साथ जो कुछ हुआ, वो अमानवीय था। परिवार के सदस्यों के मानवाधिकारों का बार-बार उल्लंघन किया गया और उनके लिए वहां एक भय का वातावरण बनाया गया।

    राज्‍यसभा में कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कुलभूषण जाधव पर जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे झूठे और फर्जी हैं। पाकिस्तान में कोई लोकतंत्र नहीं है, हम पाकिस्तान को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। जाधव की मां-पत्नी के साथ जो भी हुआ है, वो पूरे देश का अपमान है।

    सुषमा स्‍वराज आज 12 बजे लोकसभा में मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखेंगी। इस बारे में खुद सुषमा स्‍वराज ने ट्वीट कर जानकारी दी। उन्‍होंने कहा, मैं गुरुवार को इस मामले में संसद के दोनों सदनों में अपना बयान दूंगी।

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    बुधवार को कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में कहा कि कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, हम उसकी निंदा करते हैं। जाधव को भारत वापस लाना चाहिए। वहीं कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता कपिल सिब्‍बल ने कहा, ‘देखिए, हम पाकिस्‍तान से किसी भी तरह के अच्‍छे व्‍यवहार की उम्‍मीद नहीं कर सकते हैं। कुलभूषण जाधव की मां और पत्‍नी के साथ, जिस तरह का व्‍यवहार किया गया वो शर्मनाक है।’

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    इधर समाजवादी पार्टी के वरिष्‍ठ नेता नरेश अग्रवाल ने कहा, ‘देखिए, किसी देश की क्‍या नीति है ये उस देश का अपना मुद्दा है। अगर उन्‍होंने (पाकिस्‍तान) कुलभूषण जाधव को एक आतंकवादी अपने देश में माना है, तो वे उनके साथ उसी तरह का व्‍यवहार करेंगे। हमारे देश में भी आतंकवादियों के साथ ऐसा ही व्‍यवहार करना चाहिए। कड़ा व्‍यवहार करना चाहिए। लेकिन मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि मीडिया सिर्फ कुलभूषण यादव पर ही क्‍यों बात कर रहा है? पाकिस्‍तान की जेलों में सैकड़ों हिंदुस्‍तानी बंद हैं, सबकी बात होनी चाहिए मेरा ऐसा मानना है।’

    बता दें कि मुलाकात से पहले कुलभूषण की मां और पत्‍नी की बिंदी, मंगलसूत्र और कान की बालियां तक उतरवा दी गईं। कुलभूषण की पत्नी के जूते भी जब्‍त कर लिए गए। पाकिस्‍तान की मीडिया ने भी काफी बुरा व्‍यवहार किया। मुलाकात के बाद जाधव की मां से शर्मनाक तरीके से पाकिस्तानी पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह ‘कातिल’ बेटे से मिलकर खुश हैं।

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    गौरतलब है कि पाकिस्तान के मिलिट्री कोर्ट ने कुलभूषण जाधव को जासूसी और विध्वंसकारी साजिश रचने के आरोप में दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई है। पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में उन्हें एक साल से भी अधिक समय से हिरासत में रखा है। कुलभूषण जाधव को 10 अप्रैल को फांसी की सजा सुनाई गई थी। पाकिस्तान ने जाधव को 3 मार्च, 2016 को गिरफ्तार किया गया था। जाधव को किस जगह से गिरफ्तार किया गया, इसको लेकर भी पाकिस्‍तान की ओर से अलग-अलग बयान सामने आए हैं।

  • ‘मोदी और कांग्रेस नेताओं में मूंछ और पूंछ के बाल जैसा अंतर’

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    नवनिर्वाचित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर उनका नाम लिए बगैर निशाना साधते हुए केंद्रीय पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेताओं के बीच उतना ही अंतर है, जितना मूंछ और पूंछ के बाल के बीच होता है और इस अंतर को कांग्रेस पाट नहीं पाएगी.

    शिवपुरी जिले के कोलारस में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तोमर ने शनिवार को कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेताओं के बीच मूंछ और पूंछ के बाल जैसा अंतर है. इस अंतर को कांग्रेस नहीं पाट पाएगी.’

    उन्होंने यह बात कांग्रेस द्वारा हाल ही में गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव में तीन युवा नेताओं-पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, ऊना दलित आंदोलन से चर्चा में आए नेता जिग्नेश मेवानी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के नेता अल्पेश ठाकोर- के साथ समझौता कर बीजेपी को दी गई चुनौती पर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को एक उदाहरण देते हुए कही. हालांकि उदाहरण देते समय तोमर का इशारा राहुल की ओर था, लेकिन उन्होंने उनका नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया. गुजरात में हुए इस चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से हार का सामना करना पड़ा था.

    हालांकि, ‘जब तोमर से इस मामले में उनका रुख स्पष्ट करने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने सोमवार समाचार एजेंसी पीटीआई को फोन पर बताया, ‘मैंने किसी का नाम नहीं लिया है. मैं मोदी जी के व्यक्तित्व एवं कांग्रेस नेताओं के व्यक्तित्व में जो फर्क है, उसके बारे में बोल रहा था.’

    गुजरात एवं उत्तरप्रदेश में हुए हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए तोमर ने कहा कि कांग्रेस ने उत्तरप्रदेश में राहुल गांधी को आगे कर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से समझौता कर चुनाव लड़ा. इसके पीछे उम्मीद थी कि युवाओं का साथ मिलेगा. इसके बाद गुजरात में भी तीन युवा लड़कों का साथ लेकर चुनाव लड़ा.

    नरेंद्र तोमर की फेसबुक वॉल से साभार

    उन्होंने कहा, ‘लेकिन इन दोनों राज्यों के चुनाव परिणामों ने बता दिया कि देश की जनता नरेंद्र मोदी के साथ है.’ तोमर ने कहा, ‘कांग्रेस एक परिवार की पार्टी है. वहां पर एक ही परिवार का अध्यक्ष बन सकता है, लेकिन बीजेपी में एक चाय बेचने वाला गरीब परिवार का बालक प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच सकता है.’

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    उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में कोई योग्य नेता नहीं हैं. लेकिन परिवारवाद की राजनीति के चलते दूसरे नेताओं को मौका ही नहीं मिलता.’ उन्होंने कहा कि देश में कांग्रेस धराशायी हो चुकी है और वर्ष 2014 के बाद से देश में कांग्रेस का पतन जारी है.

    तोमर ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां पर सांसद पर्यटकों की तरह आते हैं और शिलान्यास व भूमिपूजन कर चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि सिंधिया यह नहीं बताते कि ये शिलान्यास और योजनाएं किन सरकारों की देन है. वह यहां की जनता को यह भी बताएं कि ये केंद्र की मोदी व प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकारों की योजनाएं हैं.

    कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद कोलारस में जब पत्रकारों तोमर से पूछा कि गुजरात का चुनाव बीजेपी ने बड़ी मुश्किल से जीता है, ऐसे में मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी रहेगी क्या? इस पर अपनी प्रतिक्रिया में तोमर ने कहा, ‘मध्य प्रदेश में कोई एंटी इंकमबेंसी नहीं है.

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    हमने गुजरात व हिमाचल का चुनाव जीता. अब भाजपा कोलारस व मुंगावली का उपचुनाव भी इसी तरह जीतेगी. इसके अलावा, वर्ष 2018 में मध्यप्रदेश मे होने वाले विधानसभा चुनाव जीत कर एवं वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव जीत कर भी भाजपा सत्ता में आएगी.’

    मालूम हो कि शिवपुरी जिले के कोलारस और अशोकनगर जिले के मुंगावली विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव होने वाले हैं. ये दोनों सीटें कांग्रेस के पास रही हैं. बीजेपी इन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है. कांग्रेस विधायक महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद मुंगावली सीट खाली हो गई है, जबकि कांग्रेस विधायक रामसिंह यादव के निधन के बाद कोलारस सीट खाली हुई है.

  • नीति आयोग : मुफ्त में वेतन ले रहे हैं अधिकारी

     नई दिल्ली, सरकार नीति आयोग पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन काम के मामले में इसकी रफ्तार बहुत सुस्त है। ऐसा लगता है कि इसके अधिकारी व कर्मचारी मुफ्त में वेतन ले रहे हैं।  भारत सरकार का विचार मंच नेशनल इंस्टीट्यूटशन फॉर ट्रांसफॉर्मिग इंडिया यानी नीति आयोग जन-शिकायतों का निपटारा करने में 52 केंद्रीय मंत्रालयों में सबसे सुस्त रहा है। यह बात केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट से प्रकाश में आई है।

    केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण व निगरानी तंत्र की रिपोर्ट के मुताबिक नीति आयोग को एक जनवरी 2014 से 28 दिसंबर 2017 तक 5,883 शिकायतें मिली थीं, जिनमें आयोग द्वारा सिर्फ 54 फीसदी शिकायतों का ही निपटारा हो सका। रिपोर्ट में बताया गया कि 2,677 मामलों में से 774 मामले एक साल से लंबित हैं।  नीति आयोग के बाद अन्य सुस्त विभागों में कोयला मंत्रालय द्वारा शिकायतों के निपटारे की दर 84 फीसदी, अंतरिक्ष विभाग और जनजातीय मामलों के मंत्रालय दोनों में प्रत्येक द्वारा जन शिकायत निपटारे की दरें क्रमश: 88 फीसदी और परमाणु ऊर्जा विभाग की 93 फीसदी रही हैं।

    52 केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों की ओर से जन शिकायतों के निपटारे की औसत दर 97 फीसदी रही है। सरकार के पास पिछले तकरीबन चार साल में 23,87,513 जन शिकायतें आयीं जिनमें से 23,22,751 शिकायतों का निपटारा किया गया और 4,111 शिकायतें करीब एक साल से लंबित हैं। जन शिकायतों के निपटारे के मामले में विदेश मंत्रालय सबसे तेज रहा है। मंत्रालय को मिली 49,558 शिकायतों से से सिर्फ एक मामला पिछले एक साल से लंबित है जबकि 174 शिकायतें दो महीने से भी कम समय से लंबित हैं। विदेश मंत्रालय ने 99 फीसदी शिकायतों का निपटारा किया है।

    पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय ने भी 99 फीसदी जन शिकायत के मामलों का समाधान किया है। मंत्रालय को मिली 13,590 शिकायतों में से सिर्फ 113 मामले एक साल से लंबित हैं। साथ ही, सूक्ष्म, लघु व मझोले उद्यम मंत्रालय ने 99 फीसदी मामलों का निपटारा किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा 97 फीसदी जन शिकायत के मामलों का निपटारा किया गया, जबकि मंत्रालय को सबसे ज्यादा 5,42,370 शिकायतें मिली थीं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पास 1,50,399 शिकायतें आयी थीं जिनमें से 98 फीसदी का निपटारा किया गया। रेल मंत्रालय ने 1,81,415 जन शिकायतों में से 96 फीसदी मामलों का निपटारा किया। गृह मंत्रालय द्वारा 95,882 शिकायतों में से 95 फीसदी का निपटारा किया गया। स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय को कुल 82,224 जन शिकायतें मिली थीं जिनमें से मंत्रालय ने 97 फीसदी का निपटारा किया। वहीं, पर्यावरण मंत्रालय ने 24,996 शिकायतों में से 98 फीसदी का निपटारा किया जबकि सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 25,418 जन शिकायतों में से 97 फीसदी का निपटारा किया गया।

  • नितिन पटेल मामले में हार्दिक पटेल पर भड़की भाजपा, दिया ये करारा जवाब

    नई दिल्‍ली । पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने गुजरात के उप मुख्‍यमंत्री नितिन पटेल को कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का न्‍योता देकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। हालांकि इस मामले में भाजपा ने उन्‍हें करारा जवाब दिया है और प्रस्‍ताव को खारिज करते हुए कहा है कि उनके सभी पार्टी नेता वफादार हैं व किसी के बहकावे में नहीं आ सकते हैं।

    स्‍वामी बोले- नितिन हमें नहीं कर सकते निराश

    भाजपा नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने रविवार को कहा कि हार्दिक के बयान को अहमियत नहीं देनी चाहिए, क्‍योंकि वह मुश्किल वक्‍त से गुजर रहे हैं। स्‍वामी ने कहा, हार्दिक पटेल जो भी कहते हैं मैं उन्‍हें अहमियत नहीं देता हूं। मेरे ख्‍याल से नितिन पटेल हमारे एक पुराने कार्यकर्ता हैं और वह हमें निराश नहीं कर सकते हैं। अगर वह नाराज हैं तो हमें इसका पता लगाना चाहिए और उनकी नाराजगी को दूर करना चाहिए।

    मुरलीधर राव ने कहा- यह भाजपा है कांग्रेस नहीं

    पार्टी नेता मुरलीधर राव ने भी हार्दिक की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस के विपरीत भाजपा वफादार और ईमानदार नेताओं की पार्टी है। राव ने कहा, यह भाजपा है कांग्रेस नहीं। हमारे पार्टी नेता वफादार और ईमानदार हैं। वे लालच में नहीं आ सकते हैं। हम हमारे आंतरिक मामलों को अपने बीच ही सुलझा सकते हैं।

    हार्दिक पटेल ने नितिन को दिया था ये प्रस्‍ताव

    हार्दिक ने शनिवार को कहा था कि अगर नितिन पटेल अपने साथ भाजपा के 10 विधायकों को ला सकते हैं तो उन्‍हें कांग्रेस पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए।

    इस वजह से नितिन के नाराज चलने की हैं अटकलें

    इस तरह कि अटकलें हैं कि नितिन पटेल को गुजरात की नवनिर्वाचित सरकार में जो पदभार सौंपा गया है कि उससे वह खुश नहीं हैं। कहा जा रहा है कि वह वित्‍त, शहरी विकास और पेट्रोलियम मंत्रालय वापस लिए जाने से नाराज चल रहे हैं। शुक्रवार को सभी मंत्रियों ने अपना पदभार संभाल लिया, मगर वह नहीं आए। इस वजह से अटकलें और भी तेज हो गई हैं।

    हाल ही में मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी के नेतृत्‍व में गुजरात कैबिनेट का गठन हुआ है। भाजपा लगातार छठी बार राज्‍य में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही है।

  • जानिए इस लड़की के साथ कांस्टेबल ने ऐसा क्या किया कि सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा ये फोटो !

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    मुंबई.। गुरुवार रात को लोअर परेल कमला मिल्स कंपाउंड के पब व्दम ।इवअम में भयानक आग लग गई थी. अचानक से लगी आग से लोगों में भगदड़ मच गई. हर तरफ लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई देने लगी. लोग किसी तरह अपनी जान बचाने की कोशिश करने लगे. खुद को बचाने की इस जद्दोजहद में 14 लोगों ने अपनी जान गंवा दी जबकि 21 लोग बुरी तरह घायल हो गए. इस दहशत भरे माहौल को कुछ लोग जहां दूर से खड़े देखते रहे वहीं एक शख्स ऐसा भी था जो अपनी जान की परवाह किये बगैर घायलों की मदद करता रहा।

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    मुंबई पुलिस के कांस्टेबल सुदर्शन शिंदे ने अपनी जान को खतरे में डालकर कई लोगों की जान बचाई. अगर वह ऐसा नहीं करता तो आज मरने वालों की संख्या 14 न होकर उससे कहीं ज्यादा हो सकती थी. कांस्टेबल सुदर्शन शिंदे की घायलों को आग से बचाकर निकालने की यह एक फोटो बहुत तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इस फोटो को देखने के बाद लोग बहादुर सिपाही के जज्बे को सलाम कर रहे हैं और हिम्मत की दाद दे रहे हैं. उसकी इस हिम्मत और बहादुरी के लिए सोमवार शाम सुदर्शन शिंदे को मुंबई के मेयर ने सम्मानित किया. सुदर्शन शिंदे वर्ली पुलिस स्टेशन का कांस्टेबल है. न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान उसने बताया कि जब वह उस जगह गया तो हर तरफ आग लगी थी. बाहर खड़े लोग अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए सोच रहे थे पर किसी की भी हिम्मत अंदर जाने की नहीं हो रही थी. । लेकिन वह फायर ब्रिगेड की मदद के लिए सीढ़ियों पर चढ़ गया. स्ट्रेचर्स को ऊंचाई वाली सीढ़ियों पर ले जाना नामुमकिन था इसलिए उसने उन लोगों में से कुछ को उठाकर बचाया जिनकी आग और धुंए की चलते काफी बुरी हालत हो गई थी.।

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