Category: national

  • पीएम का इस्तीफा दे रहा है क्या संकेत

    देश- न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने बीते सप्ताह अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जब उनका इस्तीफा सामने आया तो हर ओर चर्चा का विषय बन गया। इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा, अब मेरे पास कुछ खास नही बचा है जो मैं दे सकूं।
    भाषण में वह बोलीं राजनेता सामान्य इंसान होता है। उसके पास भावनाएं होती हैं। मुझसे जहां तक हो सका मैंने किया। लेकिन एक वक्त ऐसा आता है जब हम खाली हो जाते हैं। हमारा कार्यकाल साढ़े पांच वर्ष पूर्ण हो गया है।
    ये बड़ी बात है कि नेता ने यह स्वीकार किया है कि अब वह थक गया है। लेकिन इस बात का क्या परिणाम होगा यह कोई नहीं जानता है। एक नेता के पास काफी काम होता है। न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री इस बात को भली भांति जानती हैं। 
    जानकारों का कहना है कि न्यूजीलैंड की पीएम का इस्तीफा देश के लिए सबक है। कि व्यक्ति को पद की नही काम करने की क्षमता की भूख होनी चाहिए। लोगों को उनसे सीखने की आवश्यकता है। क्योंकि उन्होंने यह बता दिया है कि जब आप स्वयं को जनता के लिए समर्पित न कर पाएं तो आप स्वयं को उस पद से मुक्त कर दें।

  • रोजगार मेला बना हमारी सरकार की पहचान- पीएम

    राजनीति- केंद्र में एनडीए की सरकार है। भाजपा नेता बार-बार अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनवाते नजर आते हैं। वहीं अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की तरीफ करते हुए कहा, हमने जो भी कहा वह पूरा किया। हम सिर्फ संकल्प नहीं लेते बल्कि उसे पूरा भी करते हैं।
    तीसरे रोजगार मेला के शुभारंभ के दौरान पीएम मोदी ने यह बात कहीं। उन्होंने अपनी बात को आगे बढाते हुए कहा, यह वर्ष 2023 का पहला रोजगार मेला है। यह देश के 71 हजार परिवारों के लिए खुशियों की नई सौगात लेकर आया है। जिसने परिवार के युवाओं को सरकारी सेवा में काम करने का मौका मिला है।
    आगामी समय मे अन्य रोजगार सृजित होंगे। लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी का मौका मिलेगा। केंद्र में एनडीए सरकार है और भाजपा शासित राज्यों में लगातार रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है। रोजगार मेला हमारी सरकार की पहचान बन गई है। आने वाले कुछ समय में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तराखंड जैसे राज्यों में आयोजन होने हैं।

  • Republic Day 2023: पीएम क्यों नहीं फहराते गणतंत्र दिवस पर तिरंगा

    डेस्क। 74th Republic Day 2023: kya आपने कभी सोचा है कि 26 जनवरी के दिन प्रधानमंत्री झंडा क्‍यों नहीं फहराते हैं।
    Difference between flag hoisting & flag unfurling: आपने बचपन से ही देखा होगा कि 15 अगस्‍त के दिन प्रधानमंत्री लाल किले से ध्वजारोहण भी करते हैं। वहीं साथ ही 26 जनवरी यानी रिपब्लिक डे पर वे झंडा नहीं फहराते हैं और इस दिन राष्ट्रपति राजपथ से झंडा भी फहराते हैं।
    साथ ही इन दोनों में बहुत ही छोटा सा डिफरेंस भी होता है, लेकिन ज्‍यादातर लोगों को इस बारे में पता नहीं होता है और 15 अगस्‍त के दिन प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं। वहीं बता दें 26 जनवरी के दिन राष्ट्रपति ध्वजारोहण करते हैं। इसमें क्‍या अंतर होता है तो आइए जानते हैं।
    प्रधानमंत्री क्‍यों नहीं फहराते हैं 26 जनवरी के दिन ध्‍वज 
    हमारा देश 15 अगस्‍त 1947 के दिन स्‍वतंत्र हुआ था और उस समय देश के मुखिया प्रधानमंत्री ही थे वहीं इसी के चलते उस दिन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने ही लाल किले से ध्वजारोहण भी किया था।
    वहीं 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति के तौर पर शपथ भी ले चुके थे और वे देश के संवैधानिक प्रमुख भी थे इसलिए 26 जनवरी के दिन देश के राष्ट्रपति झंडा भी फहराते हैं। साथ ही रिपब्लिक डे के दिन झंडा राजपथ पर फहराया भी जाता है।
    ध्वजारोहण और फहराने में है अंतर 
    26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस (Republic Day) के दिन राष्ट्रीय ध्वज को ऊपर बांधा जाता है और उसे वहां से ही फहराया जाता है। साथ ही इसी वजह से रिपब्लिक डे पर ध्वजारोहण नहीं बल्कि झंडा फहराया (Flag Unfurling) भी जाता है। साथ ही 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस (Indipendence Day) के दिन राष्ट्रीय ध्वज को ऊपर की तरफ खींचा भी जाता है और फिर इसे फहराया भी जाता है। 
    वहीं जिस दिन हमारा देश स्‍वतंत्र हुआ था उस दिन ब्रिटिश सरकार ने अपना झंडा उतारकर इंडियन फ्लैग को ऊपर चढ़ाया था और इसी वजह से हर साल 15 अगस्त के दिन तिरंगा को ऊपर की तरफ खींचा जाता है और फिर फहराया जाता है यानी 15 अगस्‍त को ध्वजारोहण (Flag Hoisting) किया जाता है और 26 जनवरी के दिन झंडा फहराया (Flag Unfurling) जाता है।

  • धीरेंद्र शास्त्री को लेकर क्या बोल गए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

    देश- भारत की परिधि पूर्ण रूप से बदल चुकी है। धर्म सेंसर बोर्ड का गठन हो चुका है। यह धार्मिक फिल्मों का सेंसर करने के लिए तैयार किया गया है। वहीं बाबा धीरेंद्र शास्त्री इस समय सुर्खियों में हैं। उनके चमत्कार की स्त्यता कई टीवी चैनल प्रमाणित करने में जुट गए हैं।
    वहीं अब बोर्ड के मुखिया ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, सेंसर बोर्ड अपना काम कर रहा है। यदि यह न होता तो पता नहीं भारत मे कितनी मनमानी होती।
    अभी इसमें कोई धार्मिक विशेषज्ञ नहीं है। इसलिए हम यह तो नही कह सकते कि कौन सा धार्मिक विषय किसके मन मे चुभ जाएगा। बोर्ड में 10 लोग इतिहास और पुरातत्व से जुड़े शामिल हैं।
    ओटीटी प्लेटफार्म आजाद घूम रहे हैं। उनपर कोई लगा नही है। वह अपनी मनमानी कर रहे हैं। हम उनपर लगाम कसने के लिए विचार कर रहे हैं।
    वहीं जब पत्रकारों ने उनसे बाघेश्वर धाम के शास्त्री धीरेंद्र शास्त्री के विषय मे सवाल किया तो वह बोले अगर वह चमत्कारी हैं तो वह जोशीमठ में आई दरारों को भर दें। हम उनका स्वागत करेंगे। उनके लिए फूल बिछाएंगे।
    उन्होंने कहा, “सारे देश की जनता चमत्कार चाहती है कि कोई चमत्कार हो जाए. कहां हो रहा है चमत्कार. जो चमत्कार हो रहे हैं, अगर जनता की भलाई में उनका कोई विनियोग हो तो हम उनकी जय-जयकार करेंगे, नमस्कार करेंगे. नहीं तो ये चमत्कार छलावा है, इससे ज्यादा कुछ नहीं है।

  • क्यों कुश्ती संघ के विरोध में जारी प्रदर्शन रुका

    देश- केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से लगातार दो दिन मुलाकात करने के बाद जंतर मंतर पर धरना दे रहे देश के पहलवानों ने कल देर रात प्रदर्शन वापस ले लिया है।
    अनुराग ठाकुर ने इस परिपेक्ष्य में साफ किया है कि अगले चार सप्ताह में किश्ती संघ के प्रमुख पर जो लगाए गए हैं। उनकी जांच होगी। वहीं तब तक वह कुश्ती संघ से दूर रहेंगे। 
    वहीं प्रदर्शन वापस लेने के संदर्भ में बजरंग पुनिया ने कहा, सरकार ने हमें आश्वासन दिया है की हमारे साथ न्याय होगा। हमें उनपर विश्वास है। अभी हम अपना प्रदर्शन रोक रहे हैं।
    जानकारी के लिए बता दें कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न सहित कई अन्य गंभीर आरोप लगे थे।

  • बीजेपी प्रति वोट देगी 6000

    राजनीति- कर्नाटक में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। पक्ष- विपक्ष की बयानबाजी से हड़कंप मचा हुआ है। वहीं अब बीजेपी के एक पूर्व मंत्री ने कुछ ऐसा बयान दिया है जो तूल पकड़े है। 
    पूर्व जल संसाधन मंत्री रमेश जारकीहोली ने कहा, बीजेपी आगमी चुनाव में प्रति वोट पर 6000 हजार देगी। इनके इस बयान से राजनीति में हलचल मच गई है। बता दें बीजेपी के पूर्व मंत्री ने साल 2021 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और राजनीति से दूरी बना ली थी।
    उन्होंने कहा, मैं देख रहा हूं कि वह निर्वाचन क्षेत्र में अपने मतदाताओं को उपहार बांट रही है. अब तक, उन्होंने लगभग 1,000 रुपये मूल्य के कुकर और मिक्सर जैसे रसोई के उपकरण दिए होंगे. वह उपहारों का एक और सेट दे सकती हैं।
     इन सभी को मिलाकर लगभग ₹3,000 खर्च हो सकते हैं. मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अगर हम आपको 6,000 रुपये नहीं देते हैं तो हमारे उम्मीदवार को वोट न दें.” हालांकि सिंचाई मंत्री गोविंद करजोल ने तुरंत इस बयान का खंडन किया है।
    उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी में इस तरह की चीजों के लिए कोई जगह नहीं है. हमारी पार्टी एक विचारधारा पर बनी है, जिसके कारण यह देश की सत्ता में आई है और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आई है.” मंत्री ने कहा, “2023 के चुनावों में भी हम स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आएंगे।

  • जयंती विषेश: कैसे बने बोस युवाओं की पहली पसन्द

    डेस्क। सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ था। और उनेक पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती दत्त था। बता दें वह भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ थे। और उनकी देशभक्ति, अचल साहस और वीरता ने उन्हें एक राष्ट्रीय नायक भी बनाया। द्वितीय विश्व युद्ध के समय नाजी पार्टी और इंपीरियल जापान की मदद से उन्होंने अंग्रेजों से आजादी के लिए अथक प्रयास भी किए। 
    वहीं उनका नाम सुनकर हर भारतीय को गर्व भी महसूस होता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें अक्सर गांधीजी के साथ विचारधाराओं के टकराव का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह से उन्हें वह पहचान नहीं मिली जिसके वह असल में हकदार थे।
    सुभाष चंद्र बोस की शिक्षा
    सुभाष चंद्र बोस जानकीनाथ बोस और प्रभावती दत्त की चौदह संतानों में से नौवें बच्चे थे।
    उन्होंने कटक में अपने अन्य भाई-बहनों के साथ प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल में पढ़ाई की, जिसे अब स्टीवर्ट हाई स्कूल भी कहा जाता है। वह एक मेधावी छात्र थे और उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में दूसरा स्थान भी हासिल किया था। उन्होंने कलकत्ता में प्रेसीडेंसी कॉलेज (अब विश्वविद्यालय) में एडमिशन लिया था। साथ ही जब वह 15 वर्ष के थे, तब स्वामी विवेकानंद और श्री रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं और दर्शन से बहुत ज्यादा प्रभावित भी हुए।
    आपको बाद में उन्हें ओटेन नाम के एक प्रोफेसर पर हमला करने के आरोप में कॉलेज से निष्कासित भी कर दिया गया था। हालांकि उन्होंने अपील की थी कि वह इस हमले में भागीदार बिल्कुल नहीं थे, केवल वहां खड़े थे। इस घटना ने उनमें विद्रोह की भावना को प्रज्वलित भी कर दिया और अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर हो रहे दुर्व्यवहार से वह काफी परेशान भी थे। साथ ही उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के तहत स्कॉटिश चर्च कॉलेज में प्रवेश लिया जहां पर उन्होंने वर्ष 1918 में दर्शनशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी करी।
    इसके बाद वे अपने भाई सतीश के साथ भारतीय सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए लंदन भी चले गए। वहां उन्होंने परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में अच्छे अंकों के साथ पास हो गए लेकिन उनके मन में अभी भी मिश्रित भावनाएं थीं क्योंकि उन्हें अब अंग्रेजों द्वारा स्थापित सरकार के तहत काम भी करना होगा। जिसे वह पहले से ही तिरस्कृत करना शुरू कर चुके थे। वही इसलिए 1921 में उन्होंने कुख्यात जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना के बाद अंग्रेजों के बहिष्कार के प्रतीक के रूप में भारतीय सिविल सेवा से इस्तीफा भी दे दिया था।
    सुभाष चंद्र बोस का परिवार
    उनके पिता जानकी नाथ बोस, उनकी माता प्रभावती देवी थीं और उनकी 6 बहनें और 7 भाई भी थे। उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न परिवार था जो कायस्थ जाति से था।
    सुभाष चंद्र बोस की पत्नी
    सुभाष चंद्र बोस ने एमिली शेंकेल नामक महिला से विवाह किया था। क्रांतिकारी नेताजी की पत्नी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है हालांकि, उनकी एक बेटी है जिसका नाम अनीता बोस भी  है। वह हमेशा अपने निजी जीवन को बेहद निजी रखना पसंद करते थे और कभी सार्वजनिक मंच पर ज्यादा बात नहीं करते थे। 
    स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
    सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी से काफी प्रभावित थे और वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) में शामिल भी हो गए। उन्होंने “स्वराज” नामक समाचार पत्र शुरू किया, जिसका अर्थ है स्व-शासन जो राजनीति में उनके प्रवेश का प्रतीक है। चितरंजन दास उनके गुरु थे। वर्ष 1923 में वह अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने और स्वयं सीआर दास द्वारा शुरू किए गए समाचार पत्र “फॉरवर्ड” के संपादक भी बने।

  • 26 जनवरी को पेश होगी भारत की नोजल वैक्सीन

     INCOVACC vaccine launch: देश की पहली नाक से दी जाने वाली वैक्सीन इनकोवैक गणतंत्र दिवस के दिन लॉन्च होने के लिए तैयार है। साथ ही भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने यह जानकारी भी दी है।
    साथ ही शनिवार को भोपाल में मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बात भी कही। इनकोवैक भारत बायोटेक की इंट्रानेजल वैक्सीन है, जो कोरोना महामारी के खिलाफ बूस्टर डोज के रूप लोगों को दी जाएगी। वहीं हाल ही में डीजीसीए ने इस नेजल वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी भी दी थी।
    भारत बायोटेक की नेजल कोविड-19 वैक्सीन INCOVACC के 26 जनवरी को लॉन्च होने की संभावना जताई गई है। कंपनी के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्णा एल्ला ने शनिवार को एक कार्यक्रम में यह भी कहा एला ने भोपाल में मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में छात्रों को बताया, “नाक का टीका आधिकारिक तौर पर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर लॉन्च भी किया जाएगा।”
    डीजीसीए ने INCOVACC को प्राथमिक दो-खुराकों के बाद बूस्टर खुराक के रूप में मंजूरी भी दी है। साथ ही फार्मास्युटिकल कंपनी भारत बायोटेक ने पिछले साल दिसंबर में घोषणा की थी कि उसका नाक से दिया जाने वाला टीका जनवरी के चौथे सप्ताह तक लॉन्च भी किया जाएगा। वही एला ने कार्यक्रम में यह भी कहा कि मवेशियों में गांठदार त्वचा रोग के लिए एक स्वदेशी टीका लुम्पी-प्रोवाइंड के अगले महीने लॉन्च होने की भी संभावना है।
    जानिए कितनी होगी कीमत
    केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा खरीद के लिए INCOVACC की कीमत ₹325 प्रति खुराक और निजी टीकाकरण केंद्रों में ₹800 होने वाली है। वहीं भारत बायोटेक ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन की दो खुराक लेने के बाद यह नेजल वैक्सीन 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए बूस्टर शॉट का काम भी करेगी। इसे 28 दिनों के अंतराल पर दो बार लोगों को दिया भी जाएगा।

  • पाक को लेकर राजनाथ सिंह ने दिया बड़ा बयान हम नहीं चाहते कोई भूंख से तड़पे

    देश- पाकिस्तान की हालत गम्भीर होती जा रही है। लोग भूख से तड़प रहे हैं। महंगाई आसमान छू रही है। कर्ज का बोझ इतना बढ़ गया है कि पाक की रीढ़ टूट गई है। वहीं अब पाकिस्तान के परिपेक्ष्य में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़ा बयान दिया है।
    पत्रकार ने जब पाक के हालातों के विषय मे राजनाथ सिंह से सवाल किया तो वह बोले- हम किसी का अहित नहीं चाहते हैं। चाहें पीओके हो या पाकिस्तान हम बस यही चाहते हैं कि जनता सुखी रहे। भारत ने सदैव विश्व का कल्याण चाह है। 
    हमारा उद्देश्य विश्व मे शांति स्थापित करना है। हम कभी नहीं चाहते विश्व मे कोई भूख से तड़प जाए। हम बस यही चाहते हैं कि जनता खुश रहे। क्योंकि हम पूरी दुनिया को अपना परिवार मानते हैं। उन्होंने आगे कहा, हम विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 
    हमारी अर्थव्यवस्था साल 2027 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरेगी। वहीं चीन के सवाल पर उन्होंने कहा, उनके विषय मे कुछ भी कहने की आवश्यकता नहीं है।

  • कल 21 द्वीपों का नामकरण परम वीर चक्र शहीदों के नाम पर किया जाएगा, पीएम ने की घोषणा

    डेस्क। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की याद में मनाए जाने वाले पराक्रम दिवस के अवसर पर अंडमान निकोबार के 21 बेनाम द्वीपों का नामकरण 21 परम वीर चक्र सम्मानित शहीदों के नाम पर होने जा रहा है।
    बता दें 23 जनवरी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन द्वीपों का नामकरण करने वाले हैं। वहीं इस क्रम में सबसे बड़े बेनाम द्वीप का नाम पहले वीर चक्र सम्मानित मेजर सोमनाथ शर्मा के नाम पर भी होगा। वही दूसरे सबसे बड़े द्वीप का नाम दूसरे वीर चक्र सम्मानित करम सिंह के नाम पर और इसी तरह होगा भी।
    जानकारी के अनुसार मोदी सरकार के काल में नेताजी को अलग अलग माध्यमों से लगातार सम्मान दिया जा रहा है। वही उनकी जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला इसी सरकार के काल में हुआ और उनसे जुड़े दस्तावेज भी सार्वजनिक भी किए गए हैं। सरकार के इस काम को बंगाल की राजनीति से भी जोड़ा जाता रहा है। साथ ही अंडमान के रास आइलैंड का नाम पहले ही सुभाष चंद्र बोस के नाम पर किया भी जा चुका है। उसी तरह नील आइलैंडऔर हेवलाक आइलैंड का नाम शहीद द्वीप और स्वराज द्वीप भी किया जा चुका है।
    साथ ही आपको बता दें अमृतकाल में सरकार ने ऐसे वीरों को सामने लाने की कोशिश भी रही है जिन्हें भुला दिया गया है। वहीं इस क्रम में बड़े 21 द्वीपों का नामकरण परमवीर चक्र से सम्मानित शहीदों के नाम पर होगा। 
    वहीं उसी दिन प्रधानमंत्री बोस द्वीप पर उनकी याद में राष्ट्रीय संग्रहालय का भी उदघाटन भी करेंगे। मालूम हो कि युवाओं के लिए संसद के दरवाजे खोलने के लिए कई अहम कदम उठाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऐसी ही एक और पहल के रूप में आगामी 23 जनवरी को 80 युवाओं को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने का अवसर प्रदान किया है। इन युवाओं का चयन पूरे देश से किया गया है और जिनमें 35 लड़कियां और 45 लड़के भी शामिल हैं।