Category: national
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क्यों कांग्रेस के नेताओं ने भगवत मान से की मुलाकात
देश– लक्ष्य 2024 को केंद्रित करते हुए कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा का शुभारंभ किया। दक्षिण में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को लोगों का भरपूर समर्थन मिला। वही अब भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में प्रवेश कर चुकी है। बताया जा रहा है कि जनवरी के पहले सप्ताह भारत जोड़ो यात्रा पंजाब में होगी।वही पंजाब में भारत जोड़ो यात्रा के आगमन से पूर्व कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवत मान से मुलाकात की है। बताया जा रहा है यह मुलाकात इसलिए की गई है जिससे भगवत मान सरकार के सहयोग से पंजाब में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा सकुशल पूर्ण हो सके।कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में पार्टी के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की और उनसे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को ठीक से संपन्न कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री से आम आदमी की तरह यात्रा को सकुशल पूर्ण कराने और सुरक्षा के सम्बंध में अनुग्रह किया गया है। -
Solar Rooftop Scheme: बिजली बिल से हैं परेशान, सरकार दे रही जबर्दस्त सब्सिडी
डेस्क। Solar Rooftop Scheme: हम सभी लोग अपने घर में एसी,कूलर,गीजर, हीटर और फ्रिज का इस्तेमाल तो करते ही हैं वहीं इस कारण हर महीने घर का बिजली बिल काफी ज्यादा भी आता है, जिसका सीधा असर हमारी जेब पर दिखाई पड़ता है।आज के दौर में जब महंगाई काफी तेजी से बढ़ रही है तो ऐसे में अतिरिक्त मात्रा में आने वाला बिजली का बिल एक अलग खर्चा हमारे लिए हो जाता है। वहीं इसीलिए आज हम आपको सरकार की एक बड़ी ही खास स्कीम के बारे में बताने भी जा रहे हैं।बता दें इस योजना का नाम सोलर रूफटॉप स्कीम (Solar Rooftop Scheme) है। इस योजना का लाभ लेकर आप अपने घरों में सरकारी सब्सिडी की सहायता से सोलर पैनल भी लगवा सकते हैं। इस स्कीम के तहत अपने छतों पर सोलर पैनल लगवाने के बाद आपको हर महीने आने वाले बिजली के बिल से पूरी तरह की आजादी मिल जाएगी। वहीं देश में कई लोग इस स्कीम का लाभ उठा भी रहे हैं। तो आइए जानते हैं सोलर रूफटॉप स्कीम के बारे में…क्या होती है Solar Rooftop Scheme?सोलर रूफटॉप एक खास तरह की स्कीम बताई गई है। इसकी शुरुआत भारत सरकार और नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय ने मिलकर करी है। इस योजना के तहत 3KW तक के सोलर रूफटॉप के पैनल को छत पर इंस्टॉल करवाने पर लाभार्थी को 40 प्रतिशत तक सरकारी सब्सिडी भी दी जाती है जो व्यक्ति 3KW से 10KW तक सोलर रूफटॉप को अपनी छत पर लगवाते हैं।इस सोलर रूफटॉप सब्सिडी योजना में खर्च का भुगतान 5-6 साल में करा जाएगा। इस सोलर पैनल योजना के लिए आपको बिजली वितरण कंपनी के नजदीकी कार्यालय से संपर्क भी करना पड़ेगा।सरकार मोनोपर्क बाइफीशियल टेक्नोलॉजी वाले सोलर पैनल लगाने पर सब्सिडी भी देती है। वहीं इसके रियर और बैक में पावर जनरेटर मौजुद होता है। इसे 4 सोलर पैनल को एक साथ जोड़कर के बनाया जाता है। वहीं इसके 2 किलोवॉट के 4 सोलर पैनल रोजाना 6 से 8 यूनिट बिजली भी पैदा करते हैं। और इससे 2 से 3 पंखे, फ्रिज, 6 से 8 लाइट पानी की मोटर, एसी, गीजर, हीटर टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवास आराम से चलाए जा सकते हैं।जानिए कैसे करे आवेदन (Solar Rooftop Scheme)सबसे पहले आपको Solarrooftop.gov.in पर जाना पड़ेगा। अब आपको बता दें कि बिजली कंपनियों की वेबसाइट पर उपभोक्ता संख्या डालते ही आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। आवश्यक लोड, तस्वीर, पहचान पत्र वबिजली बिल अपलोड कर 500 रुपये आवेदन शुल्क को जमा करते है जिसके बाद उनका आवेदन प्रोसेस में आ जाएगा।इसके आगे की प्रक्रिया के लिए उनको बिजली कंपनी में सूचीबद्ध वेंडरों में से किसी एक का चयन करना होता है। इसके बाद एजेंसी के द्वारा स्थल निरीक्षण कर सोलर प्लांट लगाने की मंजूरी भी दी जायेगी और पूरी प्रक्रिया को वेबसाइट पर ट्रैक भी किया जा सकेगा। -
कौन है बिना हिजाब के तालिबानी नेताओं से मिलने वाली रब्बानी खार
डेस्क। कबुल। हिजाब को लेकर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के रवैए में नरमी दिखाई दी है।वहीं पाकिस्तानी विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खार ने मंगलवार को अफगानिस्तान के उपप्रधानमंत्री, कार्यवाहक विदेश मंत्री और अन्य मंत्रियों से मुलाकात भी की। इस दौरान हिना रब्बानी ने हिजाब नहीं पहना हुआ था।हिजाब तो दूर हिना रब्बानी ने मुलाकात के समय सिर पर दुपट्टा भी नहीं किया। अफगानिस्तान से आई इस तस्वीर के बाद यह कहा जा रहा है कि हिजाब को लेकर अफगानिस्तान के रवैए में काफी नरमी आई है।वहीं यह उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में महिलाओं पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं। यहां लड़कियों के स्कूल और कॉलेज जाने पर भी पाबंदी है। साथ ही महिलाएं अकेली बाजार तक नहीं जा सकती। वहीं उनके लिए हिजाब पहनना भी अनिवार्य है। और दुनिया में इसका जबरदस्त विरोध भी हो रहा है। साथ ही इसी वजह से तालिबान सरकार को दुनिया के अन्य देशों से मान्यता नहीं मिल सकी है।जानिए कौन हैं हिना रब्बानी खार :पाकिस्तान के मुल्तान में 19 नवंबर 1977 को जन्मीं हिना जाट परिवार से हैं। उनके पिता गुलाम नूर रब्बानी खार भी सांसद रह चुके हैं। उन्होंने लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज से बीएससी इकनॉमिक्स ऑनर्स की पढ़ाई करी है। वहीं इसके बाद एमएससी करने के लिए वह अमेरिका भी चली गईं।2002 में हिना रब्बानी खार ने राजनीति की दुनिया में भी कदम रखा। वह पहली बार मुजफ्फरगढ़ से सांसद भी चुनी गईं। इसके अलावा उन्हें शौकत अजीज की सरकार में इकनॉमिक अफेयर्स मामलों का राज्यमंत्री भी बनाया गया था। वहीं 2008 में वह मुस्लिम लीग छोड़कर पीपीपी से भी जुड़ गई। 2008 में चुनाव जीतकर वह सांसद बनी और हिना को केंद्रीय वित्त और उद्योग विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया। वहीं अब अप्रैल 2022 में जब शाहबाज शरीफ सरकार सत्ता में आई तो हिना को विदेश राज्यमंत्री बनाया गया है। विदेश मंत्रालय फिलहाल बिलावल भुट्टो जरदारी के पास में है।जानकारी के लिए बता दें 2012 में आसिफ अली जरदारी और पाकिस्तान की मरहूम प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी 2 बच्चों की मां हिना रब्बानी खार के इश्क में कैद हुए थे।खबरों में यह दावा भी पेश किया गया था कि बिलावल न सिर्फ पाकिस्तान की पहली महिला विदेश मंत्री हिना की खूबसूरती पर इस कदर लट्टू हो गए थे बल्कि उनसे निकाह करने के बारे में भी सोचने लग गए थे। यह भी कहा गया था कि इसके लिए हिना रब्बानी ने भी अपनी रजामंदी जाहिर की थी। -
कोई गुनाह नहीं तब भी अमेरिका में सजा काट रहे हैं रूसी नागरिक
विदेश– रूस और अमेरिका के मध्य विवाद किसी से छुपा नहीं है। दोनो ही देश एक दूसरे को नीचा दिखाने का हर सम्भव प्रयास करते हैं। वही इन दोनों के मध्य का विवाद सिर्फ हथियारों का नहीं है। अपितु इस विवाद में सबसे ज्यादा तकलीफ अगर कोई झेल रहा है तो वह है आम नागरिक।क्योंकि दोनो ही देश आम नागरिकों को जसूसी, ड्रग केस या अन्य कई तरह के केसों में हिरासत में लेते हैं और यह नागरिक बिना वजह के कई साल तक सजा काटते रहते हैं। वही अब जब युक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिका का रूस विरोधी हस्तक्षेप सामने आया है। तो इन नागरिकों की समस्या और बढ़ती दिखाई दे रही है व अब कोई गुंजाइश नहीं जताई जा रही है कि यह लोग जल्द छूटेंगे।सूत्रों का कहना है कि आज अमेरिका के लोग रूसी लोगों से नफरत करते हैं। जिन लोगों का रिश्ता रूस के लोगों से है वह उनके साथ दुर्व्यवहार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वही आज दशा यह है कि रूस के नागरिक स्वयं को अमेरिका में असुरक्षित महसूस करते हैं और अत्याचारों के विरोध में अपनी आवाज बुलंद नहीं कर पा रहे हैं। -
सबसे कम बेरोजगार वाला राज्य बना छत्तीसगढ़
देश: विपक्ष बार बार बेरोजगारी का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरता रहता है। विपक्ष का दावा है कि मोदी सरकार ने युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है। जबसे इनकी सरकार आई है युवाओं को न तो रोजगार मिल रहा है और न उनकी कहीं सुनवाई हो रही है।वही अब देश में बेरोजगारी की समस्या को लेकर सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (CMIE) ने एक सर्वे किया है। इस सर्वे में खुलासा हुआ है कि बेरोजगारी के मामले में कौन सा राज्य अव्वल है और शहर की अपेक्षा बेरोजगारी के परिपेक्ष्य में गांव की क्या दशा है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शहर की तुलना में गांव में बेरोजगारी दर कम है। क्योंकि वर्तमान समय मे शहर में बेरोजगारी दर 8.96 फीसदी पहुंच गई है। जबकि गांव में बेरोजगारी दर 7.21 फीसदी है।वही अगर हम बात अक्टूबर महीने की करें तो इस महीने के बाद से बेरोजगारी दर में इजाफा हुआ है। वही छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, ओडिशा, कर्नाटक और मेघालय ऐसे राज्य हैं जहां बेरोजगारी दर काफी कम रही है। -
आज एंट्री करेगा डिजिटल रुपया, क्या आप कर पाएंगे यूज
डेस्क। डिजिटल रुपये (Digital Rupees) में आम आदमी कब से लेन-देन कर पाने में सक्षम होगा? यह सवाल पिछले एक महीने से चर्चा में बना हुआ है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जिस रफ्तार के साथ डिजिटल करेंसी (Digital Currency) पर काम कर रहा है उससे कई उम्मीदें भी बंध गई हैं कि वह दिन दूर नहीं जब गांव में बैठा एक किसान भी डिजिटल रुपये में लेने-देने कर पाने में सक्षम होगा।डिजिटल रुपये के होलसेल ट्रायल के बाद अब एक दिसंबर यानी आज से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया 4 बैंकों के साथ चुनिंदा शहरों में रिटेल सेक्शन (खुदरा) के लिए ट्रायल भी शुरू कर रहा है।जानिए क्या होता है डिजिटल रुपया?अभी हम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से जारी 100, 200 रुपये के नोट्स और सिक्के का उपयोग करते हैं पर इसी का डिजिटल स्वरूप ही डिजिटल रुपया कहलाएगा। आप टेक्निकल भाषा में इसे सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) भी कह सकते हैं। जिसका अर्थ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म है, जिसे हम बिना स्पर्श किए यूज कर सकेंगे।जानिएआम-आदमी कैसे कर पाएंगे लेन-देन?जब भी हमें कोई सामान खरीदना और बेचना होता है तो हम आपस में आरबीआई के द्वारा जारी नोटों के जरिए लेन-देन करते हैं। वहीं लेकिन डिजिटल रुपये में कोई फिजिकल नोट तो रहेगा नहीं फिर कैसे लेन-देन कैसे होगा? तो इसका जवाब यह है कि ई-वालेट जो सरल शब्दों में कहा जाए तो डिजिटल तिजोरी होती है। वहीं अगर ग्राहक अपने बैंक से अनुरोध करके अपना ई-वॉलेट एक्टिव करवा पाएंगे तो इसी ई-वॉलेट में आपका डिजिटल रुपया एकदम सुरक्षित रहेगा।जानिए कहां से मिलेगा डिजिटल रुपया?सामान्य नोट की तरह डिजिटल रुपया भी बैंकों से ही आपको मिलेगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पहले इसे बैंकों को देगा फिर बैंक इसे ग्राहकों के ई-वॉलेट में ट्रांसफर करेंगे।डिजिटल रुपये से एक दूसरे को भेजेंगे पैसा?डिजिटल रुपये से सिर्फ पर्सन टू पर्सन (व्यक्ति से व्यक्ति) ही नहीं पर्सन टू मर्चेंट (व्यक्ति से दुकानदार) भी आराम से पैसा भेज सकेंगे। कोई भी आदमी सब्जी बाजार से लेकर शेयर मार्केट तक हर जगह डिजिटल रुपये से लेन-देन कर सकेगा।जानिए किन शहरों में शुरू होगा ट्रायल?रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में जानकारी दी गई है कि इसके लिए 8 बैंकों का चयन किया गया है। लेकिन शुरुआती दौर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक और आईडीएफसी बैंक के साथ इसका ट्रायल शुरू किया जाना है। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक और यूनियन बैंक इस ट्रायल का बाद में हिस्सा भी बनेंगे।आपको जानकारी के लिए बता दें, रिटेल ट्रायल पहले मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरू और भुवनेश्वर में शुरू होगा। बाद में इसका विस्तार अहमदाबाद, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदाराबाद, इंदौर, कोच्चि, लखनऊ, पटना और शिमला तक किया जाना है। -
शी जिनपिंग की बढ़ी मुश्किलें चीन में शुरू हुआ विरोध लगे कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो के नारे
विदेश– चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तानाशाही से चीन के लोग काफी परेशान हैं। अब तो लोगों का गुस्सा उनकी नीतियों पर उबाल मार रहा है। क्योंकि कोरोना का कहर कम होने के बाद भी शी जिनपिंग ने अपनी जीरो कोविड पॉलिसी के तहत लोगों को उनके घरों में कैद कर रखा है।वही अब चीन के पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र में भीषण आग लगने की घटना से लोगों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया। लोग शी जिनपिंग की जीरो कोविड पॉलिसी का विरोध करने लगे और सड़कों पर उतर आए हैं। वही लोगों ने इसके विरोध के लिए अनोखा तरीका अपनाया है।जीरो कोविड पॉलिसी के विरोध में लोगों ने पुलिस को अपना निशाना बनाया है। वह सरकार की नीतियों पर व्यंग कर रहे हैं और उनसे अधिक से अधिक कोविड टेस्ट करवाने की मांग उठा रहे हैं। इतना ही नहीं अब कोरोना के कारण चीन की पाबंदी के विरोध की आंच ज्यादातर हिस्सो में देखने को मिल रही है।लोग सड़कों पर शी जिनपिंग सरकार का विरोध कर रहे हैं। वही सोशल मीडिया पर उनके इस्तीफे की मांग वाले वीडियो भी जमकर वायरल हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो, शिनजियांग से लॉकडाउन हटाओ, चीन से लॉकडाउन हटाओ, हम पीसीआर (जांच) नहीं कराना चाहते, स्वतंत्रता चाहते हैं और प्रेस की स्वतंत्रता सहित कई नारे लगाए. -
साल 2023 में सस्ता होगा डीजल पेट्रोल
देश– नया साल आने वाला है। वहीं सूत्रों के हवाले से खबर सामने आ रही है कि साल 2023 में पेट्रोल और डीजल के दामों में गिरावट आने वाली है और सरकार टैक्स छूट में कटौती करने जा रही है। जिसके चलते अब पूरे भारत मे पेट्रोल, डीजल के दाम 10 रुपये तक नीचे खिसक सकते हैं।जानकारी के लिये बता दें क्रूढ ऑयल के दाम 40 फीसदी नीचे गिर चुके हैं। वही अनुमान है कि यह आंकड़ा 50 फीसदी तक पहुंच सकता है। वहीं बुधवार को बंद हुए बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में ढाई फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है जिसकी वजह से दाम 77.17 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं।वहीं दूसरी ओर डब्ल्यूटीआई के दाम में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है. 72.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं।जानकारों की मानें तो क्रूड ऑयल का यह लेवल एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।आने वाले दिनों में इसमें और भी गिरावट देखने को मिल सकती है। -
गुजरात विधानसभा चुनाव रिजल्ट : बीजेपी के एक मंत्री को छोड़कर सभी ने हासिल की जीत
गांधीनगर, 8 दिसंबर (आईएएनएस) | गुजरात विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है। हालांकि, इस चुनाव में बीजेपी के जिन मंत्रियों ने चुनाव लड़ा था उनमें से केवल एक मंत्री को हार का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 12 दिसंबर को फिर से भूपेंद्र पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने को तैयार हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भूपेंद्र पटेल मंत्रालय में मुख्यमंत्री समेत कुल 25 मंत्री थे। जिनमें से पांच मंत्रियों को टिकट नहीं दिया गया था। अन्य 20 में से मुख्यमंत्री और 18 अन्य विधानसभा के लिए फिर से चुने गए हैं। हालांकि, एक मंत्री जीत हासिल करने में विफल रहे।भूपेंद्र पटेल ने 1,92,263 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की है। जबकि अन्य सहयोगी जिन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है उनमें पूर्णेश मोदी (104,637 मतों से जीते), हर्ष संघवी (131,675 मतों से जीते), कानू देसाई (97,164 मतों से जीते), नरेश पटेल (93,166 मतों से जीते), और मनीष वकील ( 98,597 मतों से जीते) शामिल हैं।
वहीं जीतने वाले अन्य मंत्रियों में जीतू वघानी, ऋषिकेश पटेल, राघवजी पटेल, किरित सिंह राणा, अर्जुन सिंह चौहान, जगदीश पांचाल, जीतू चौधरी, मुकेश पटेल, निमिशा सुथार, कुबेरभाई दिंडोर, गजेंद्र सिंह परमार, विनुभाई मोराडिया और देवभाई मालम शामिल हैं। हालांकि, मंत्री कीर्ति सिंह वाघेला 4,792 मतों के अंतर से हार चुनाव हार गए।
भाजपा ने एक प्रेस बयान में पार्टी की भारी जीत के कई कारण बताए हैं। जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फेक्टर, जल प्रबंधन, सुरक्षित और सुरक्षित गुजरात, लगातार बिजली की आपूर्ति, कृषि विकास, गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाना, अच्छी शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आदिवासियों का सशक्तिकरण और ‘वाइब्रेंट गुजरात’ आदि शामिल हैं।
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हिमाचल में 40 सीटों के साथ कांग्रेस को बहुमत, भाजपा 25 पर सिमटी
शिमला, 8 दिसंबर (आईएएनएस)| कांग्रेस ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल कर 40 सीटों पर जीत हासिल की, जो 68 सदस्यीय सदन में 34 के आधे से अधिक के आंकड़े से छह अधिक है, जबकि निवर्तमान सत्ताधारी भाजपा 25 सीटों पर सिमट गई है। निवर्तमान मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने प्रतिकूल जनादेश को स्वीकार करते हुए यहां मीडिया से कहा, “मैं जनादेश का सम्मान करता हूं और मैं पिछले पांच वर्षो के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व को धन्यवाद देना चाहता हूं। हम राजनीति से परे राज्य के विकास के लिए खड़े रहेंगे। हम अपनी कमियों का भी विश्लेषण करेंगे और अगले कार्यकाल में सुधार करेंगे।”ठाकुर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे पर निर्भर थे। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया, जिन्होंने इसे स्वीकार कर लिया।
सुरेश भारद्वाज, राम लाल मारकंडा, सरवीन चौधरी, राकेश पठानिया, गोविंद ठाकुर, वीरेंद्र कंवर और राजीव सैजल सहित कई निवर्तमान मंत्री चुनाव हार गए।
भाजपा के दो बागी और एक कांग्रेस सहित तीन निर्दलीय विजयी हुए।
हिमाचल प्रदेश ने 1985 के बाद से किसी भी मौजूदा सरकार को सत्ता में वापस नहीं लाया है।
ठाकुर (57) ने मंडी में अपने गढ़ सिराज को बरकरार रखा, जहां से उन्होंने लगातार छह चुनाव – 1998, 2003, 2007, 2012, 2017 और 2022 – कांग्रेस के चेत राम पर 22,000 से अधिक मतों के अंतर से जीते।
प्रमुख विजयी कांग्रेस नेताओं में पत्रकार से नेता बने और भावी मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री (60) हरोली से – चौथी बार, पूर्व राज्य पार्टी प्रमुख सुखविंदर सिंह सुक्ख (58) नादौन से, वह सीट हमीरपुर जिले में चौथी बार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, धर्मशाला से पूर्व शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, सुजानपुर से राजिंदर सिंह राणा, सोलन से 82 वर्षीय कर्नल धनी राम शांडिल और छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह के पुत्र दूसरी बार विधायक बने विक्रमादित्य सिंह शामिल हैं।
छह बार की कांग्रेस विधायक आशा कुमारी अपने गढ़ डलहौजी से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और भाजपा उम्मीदवार डी.एस. ठाकुर से 9,918 मतों के अंतर से हार गईं। मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में आशा कुमारी भी थीं।
2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 44 और कांग्रेस ने 21 सीटें जीती थीं, जिसमें एक सीट माकपा और दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पास गई थी।
चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया : “मैं भाजपा के लिए स्नेह और समर्थन के लिए हिमाचल प्रदेश के लोगों को धन्यवाद देता हूं। हम आने वाले समय में राज्य की आकांक्षाओं को पूरा करने और लोगों के मुद्दों को उठाने के लिए काम करते रहेंगे।”
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जिन्होंने राज्य में प्रचार नहीं किया, ने कांग्रेस की जीत के लिए मतदाताओं को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, “इस निर्णायक जीत के लिए हिमाचल प्रदेश की जनता का हार्दिक धन्यवाद। सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को हार्दिक बधाई। आपकी मेहनत और लगन वास्तव में इस जीत के लिए शुभकामनाओं की पात्र है। मैं आपको फिर से विश्वास दिलाता हूं, जनता से किया गया हर वादा पूरा होगा।”
परिवार की विरासत और योगदान को ध्यान में रखते हुए, कांग्रेस की राज्य इकाई की प्रमुख प्रतिभा सिंह ने अपने पति वीरभद्र सिंह द्वारा मुख्यमंत्री के रूप में अपने छह कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्योँ पर वोट मांगा था।
प्रतिभा सिंह, जिन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है, को संभावित मुख्यमंत्री के रूप में भी पेश किया गया है।
लगातार दूसरी बार अपनी शिमला (ग्रामीण) सीट बरकरार रखने के बाद खुलकर सामने आते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा, “हम पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएंगे .. वह (प्रतिभा सिंह) मुख्यमंत्री पद की दावेदारों में से एक हैं।”
2021 के लोकसभा उपचुनाव में मंडी सीट जीतने वाली प्रतिभा सिंह ने मतदाताओं को यह याद दिलाने का कोई मौका नहीं छोड़ा कि विधानसभा चुनाव में जीत वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा, न केवल कांग्रेस समर्थकों, बल्कि अन्य दलों के लोगों ने भी वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि के तौर पर हमें वोट दिया।
प्रतिभा सिंह ने पार्टी की सीधी जीत के बाद मीडिया से कहा कि वीरभद्र सिंह के परिवार ने इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और राज्य के लिए वीरभद्र सिंह के योगदान को देखते हुए तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था।
विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, कांग्रेस ने तीन बार के सांसद को राज्य इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
प्रतिभा सिंह ने वीरभद्र सिंह की विरासत पर चुनाव अभियान की अगुवाई की थी, मतदाताओं को उनके दिवंगत पति द्वारा शुरू किए गए विकास और कार्यो की याद दिलाने का अवसर कभी नहीं छोड़ा।
उन्होंने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को वापस लाने के पार्टी के वादे पर भरोसा किया, जिससे 225,000 कर्मचारियों को लाभ होगा, जो एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है।
पार्टी विधायकों पर विश्वास जताते हुए प्रतिभा सिंह ने मीडिया से कहा, “लोगों ने हमें जनादेश दिया है। हम सरकार बनाने जा रहे हैं।”