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  • नई मुसीबत 2000 के नोट पर आई , बैंक देंगे छोटे नोट

    चंडीगढ़ । नोटबंदी के बाद जारी किए गए 2000 के नोटों पर नई मुसीबत आ गई है। लिहाजा बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राहकों को फिलहाल 2000 के नोट कम से कम दिए जाएं। इसकी जगह अधिकांश भुगतान छोटे नोटों में किए जाएं। हालांकि बैंकों को जारी यह नया निर्देश लोगों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकता है, लेकिन कालेधन पर लगाम लगाने आसानी होगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया चंडीगढ़ के एक अधिकारी के मुताबिक, 2000 रुपए के नोटों के बारे में एक अहम फैसला लिया गया है। इससे हो सकता है, आमलोगों की टेंशन बढ़ जाए, लेकिन काले धन पर लगाम लगाने में यह फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस बारे में सभी बैंकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत अब लोगों को आगामी तीन महीने तक बैंकों में छोटे नोट ही मिलेंगे, क्योंकि रिजर्व बैंक ने 2000 के नोटों की छपाई बंद कर दी गई है।
    अधिकारी के मुताबिक, यह कदम इसलिए उठाया गया है, क्योंकि 2000 के नोटों की लगातार शॉर्टेज हो रही है। रिजर्व बैंक का फोकस छोटे नोटों पर है। मौजूदा वित्त वर्ष में 2000 के और नोट नहीं छापे जाएंगे। अधिकारी ने बताया कि बैंकों को कैश काउंटर से बड़े नोट ग्राहकों को न देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि 2000 और 500 रुपये के नोट एटीएम में जरूर मिलेंगे, ताकि अचानक किल्लत न हो और बाजार पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े।

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  • प्रदेश भाजपा सरकार ने चार साल में जनता को छलने का काम किया है: पायलट

    जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि सरकार ने चार साल में जनता को छलने का काम किया है एक बयान में पायलट ने कहा कि भाजपा सरकार की कोई भी एक ऐसी उपलब्धि नहीं है जिसे लेकर सरकार दावा कर सके कि उसने गत् चार वर्षों में जनहित में कोई काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार को चार वर्ष पूरे होने वाले हैं, परन्तु प्रदेश सरकार द्वारा रिसर्जेंट राजस्थान के दौरान किये गये 3,38,000 के 470 एमओयू में से मात्र 9.56 प्रतिशत में ही निवेश हुआ है, जबकि सरकार खुद रिसर्जेंट राजस्थान के आयोजन पर करोड़ों रुपये खर्च चुकी है।

    पायलट ने कहा कि सिर्फ आयोजन करने से निवेश नहीं आता, निवेश के लिये माकूल वातावरण होना भी अनिवार्य है। प्रदेश की कानून-व्यवस्था की उड़ती धज्जियों के कारण प्रदेश में कोई भी निवेशक निवेश करने का इच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार दावे कर रही है कि गत् चार वर्षों में विकास हुआ है लेकिन सच्चाई यह है कि गरीबों को आवास प्रदान करने में सरकार पूरी तरह से नाकाम रही है।

    पायलट ने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर जो काम किये जा रहे हैं उनमें भी प्रदेश में हैरीटेज संरक्षण को दरकिनार किया गया है। राजधानी में पूर्व कांग्रेस सरकार की परियोजनाओं को गति प्रदान करने में सरकार पूरी तरह से विफल रही है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर जो काम किये जा रहे हैं उनमें भी प्रदेश में हैरीटेज संरक्षण को दरकिनार किया गया है। पायलट ने कहा कि सरकार ने जितने भी वादे सुराज संकल्प पत्र में किये थे उसकी तुलना में सरकार अपने लक्ष्य को हासिल कर पाने में पूरी तरही से नाकाम रही है।

  • स्थानीय भाषाओं में भी हो कोर्ट की सुनवाई: राष्ट्रपति कोविंद

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या  

    देवघाट में 395 करोड की लागत से 35 एकड में बनने वाली न्याय ग्राम की राष्ट्रपति ने रखी आधार शिला
     

    President Ramnath Kovind

    राष्ट्रपति ने राज्यपाल व सीएम के साथ किया गंगा पूजन

    इलाहाबाद। दो दिवसीय दौरे पर इलाहाबाद पहुंचे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने दूसरे दिन शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयोजित न्याय ग्राम के आधार शिला कार्यक्रम में पहुंचे। राष्ट्रपति ने अपनी पत्नी सविता कोविंद और पुत्र के साथ दीप प्रज्वलित किया। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के जज आर के अग्रवाल और सुप्रीम कोर्ट के जज अशोक भूषण, राज्यपाल राम नाईक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशिष्ट अतिथि के रुप में मौजूद हैं। इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले शहीद अन्य जज, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सहित अन्य मौजूद हैं।
    राष्ट्रपति ने देवघाट (झलवा) में बनने वाले न्याय ग्राम का बटन दबाकर शिलान्यास किया। शिलान्यास पश्चात राष्ट्रपति ने राम नाथ कोविंद ने कहा कि अदालतो को मुअक्किलों को जागरूक करने के लिए स्थानीय भाषा में कोर्ट में सुनवाई करनी चाहिए। उनका यह भी कहना है की अदालतों में होने वाले फैसलों की कॉपी अगर स्थानीय भाषा में दी जाय तो इससे न्यायिक प्रक्रिया को समझने में भी मदद मिलेगी। राष्ट्रपति ने कहाकि लोकतंत्र की अहम कड़ी है न्याय पालिका। जिसकी चैखट में आम आदमी इन्साफ के लिए आता है। लेकिन कई बार अदालतों के चक्कर काटने के बाद उस न्यायिक कवायद को नहीं समझ पाता है। जिसे उसे समझना जरूरी है। इसके लिए अदालतों को स्थानीय भाषा में कोर्ट में सुनवाई करने की सलाह दी है। यह भी कहा कि हाईकोर्ट में लम्बित पडे मुकदमों को देखते हुये जजों की संख्या बढाई जाएगी।

    President Ramnath Kovind

    इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी न्याय ग्राम की अहमियत को सामने रखा। जिससे न्यायिक प्रकिया को सरल बनाने में हो सकती है। इसके पहले योगी गवर्नर राम नाइक और राष्ट्रपति संगम किनारे कुम्भ की तैयारियों का जायजा लेने त्रिवेणी तट पर पहुंचे। जहाँ उन्होने त्रिवेणी की आरती करने के बाद लेटे हनुमान मंदिर में दर्शन भी किये। योगी ने कुम्भ को दुनिया की अमूर्त विरासतों में शामिल करने पर यूनेस्को का आभार जाहिर किया।
    गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थापना के करीब डेढ़ सौ साल हो चुके हैं। आज इलाहाबाद हाईकोर्ट को न्याय ग्राम के रूप में एक बड़ी सौगात मिल रही है। गौरतलब है की न्याय ग्राम की स्थापना इलाहाबाद के देवघाट में हो रही है। 395 करोड़ से अधिक की लागत से 35 एकड़ में बसाये जा रहे इस न्याय ग्राम में एक न्यायिक अकेडमी और एक ऑडोटोरियम की स्थापना की जाएगी। इस टाउनशिप में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों और कर्मचारियों की आवास के साथ कई अन्य आवासी के साथ कई अन्य आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इसके अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्याय ग्राम में एक ज्यूडीशियल एकेडमी के साथ ही कई छोटे कांफ्रेन्स हाल भी बनाये जाएंगे। इसके अलावा पंद्रह सौ लोगों के बैठने की क्षमता का ऑडीटोरियम व लाइब्रेरी का भी निर्माण होगा। ज्यूडिशियल एकेडमी में प्रदेश के तीन हजार से ज्यादा न्यायिक अधिकारियों के ट्रेनिंग और रिफ्रेशर कोर्स संचालित करने के साथ ही उन्हें कानूनों में बदलावों और हाईकोर्ट के फैसलों की जानकारी भी प्रदान की जायेगी।

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    अपने दो दिवसीय दौरे पर इलाहाबाद पहुंचे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने दूसरे दिन शनिवार सुबह परिवार संग संगम दर्शन किए। देश में मंदिर दर्शन पर मचे सियासी घमासान के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने धर्म की नगरी इलाहाबाद में देव नदी गंगा की पूजा-अर्चना व आरती किया। साथ ही पौराणिक महत्व के लेटे हुए हनुमान मंदिर में माथा टेककर बजरंग बली का आशीर्वाद लिया। गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर बिताए गए आस्था के पलो के दौरान राष्ट्रपति कोविंद ने अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों के साथ ही दूसरे साधू-संतों से मुलाकात भी की। राष्ट्रपति कोविंद की पूजा अर्चना के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व कई दूसरे लोग भी उनके साथ थे। राष्ट्रपति और सीएम योगी ने इस मौके पर संगम की रेती पर लगने वाले कुंभ मेले की स्थली को करीब से देखा। रामनाथ कोविंद, डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बाद दूसरे ऐसे राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने संगम पर पूजा अर्चना की है। राष्ट्रपति कोविंद और सीएम योगी संगम क्षेत्र में तकरीबन पैंतालीस मिनट तक रहे। इस दौरान मिल रही आध्यात्मिक ऊर्जा उनके चेहरों पर साफ नजर आ रही थी।

    देश के प्रथम नागरिक रामनाथ कोविंद सुबह सबसे पहले गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर पहुंचे और वहा मां गंगा की पूजा अर्चना व आरती की। राष्ट्रपति और सीएम योगी यहां करीब पच्चीस मिनट तक रूके। हालांकि उन्होंने संगम की धारा में डुबकी नहीं लगाई और पूजा अर्चना के बाद आचमन कर वापस चले गए। मां गंगा की आराधना के बाद राष्ट्रपति व सीएम योगी संगम क्षेत्र में ही स्थित पौराणिक महत्व के लेटे हुए हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने वहां हनुमान जी के दर्शन कर उनकी पूजा अर्चना की और आशीर्वाद लिया।
    मंदिर में ही उन्होंने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि व दूसरे साधू संतों से मुलाकात की। साधू संतों ने राष्ट्रपति कोविंद को साल भर बाद यहां लगने जा रहे कुंभ मेले में आने का न्यौता दिया। राष्ट्रपति कोविंद ने कल ही इलाहाबाद में हुए एक समारोह में यहां के कुंभ मेले को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल होने को पूरे देश के लिए गौरव का पल होने की बात कहीं थी। राष्ट्रपति के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री, गवर्नर राम नाइक, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी, महापौर अभिलाषा गुप्ता नन्दी भी मौजूद रहीं। इस दौरान पूरे संगम क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए थे।

    Raed More : मेरी मां ही रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी : प्रियंका गांधी

  • मेरी मां ही रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी : प्रियंका गांधी

    प्रियंका गांधी ने मां के राजनीति से रिटायरमेंट की अटकलों को किया खारिज,   रिटायर नहीं हो रहीं सोनिया, प्रियंका गांधी ने कहा- रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी मां

    नई दिल्ली । कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी साल 2019 में अपनी परंपरागत सीट रायबरेली से ही चुनाव लड़ेंगी। सोनिया की बेटी प्रियंका गांधी ने अपनी मां के राजनीति से रिटायरमेंट की अटकलों को खारिज किया है। प्रियंका ने कहा कि 2019 में रायबरेली से उनकी मां चुनाव लड़ने जा रहीं हैं।

    दरअसल, ऐसी खबरें आई थीं कि सोनिया गांधी राहुल को कांग्रेस की कमान सौंपने के बाद राजनीति से संन्यास लेंगी। साथ ही ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि राहुल का साथ देेने के लिए उनकी बहन प्रियंका राजनीति में कदम रखेंगी और वो अपनी मां की सीट रायबरेली से अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगी।

    राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी के दौरान पार्टी दफ्तर में हुए एक कार्यक्रम के बाद प्रियंका ने कहा ‘मेरे पास साल 2019 में चुनाव लड़ने का कोई सवाल ही नहीं है। मेरी मां ही रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी।’ प्रियंका ने अपनी मां को बहादुर बताते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष के 19 साल के कार्यकाल के दौरान कई कठिनाईयों का सामना किया।

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    गौरतलब है कि शुक्रवार को सोनिया गांधी ने कहा था कि वो अब रिटायर हो रही हैं उनके इस बयान के बाद कयास लगाए जा रहे थे उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने का मन बना लिया है। हालांकि, पार्टी ने इन कयासों को खारिज करते हुए कहा था कि वो सिर्फ अध्यक्ष पद से रिटायर हो रही हैं, राजनीति से नहीं।

  • “Religion” बदलना है तो पहले लेनी होगी मंजूरी, हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

    जयपुर। धर्म परिवर्तन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने आज एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ये फैसला ऐसे मामले में दिया है, जिसे लव जिहाद से जोड़कर देखा जा रहा था। धर्म परिवर्तन कर निकाह करने के मामले में शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि धर्म परिवर्तन करने से पूर्व जिला कलेक्टर को आवेदन करना पड़ेगा। इसके बाद अनुमति मिलने पर धर्म परिवर्तन किया जा सकेगा।
    हाईकोर्ट ने ये निर्देश पायल सिंघवी के आरिफा बनने के बहुचर्चित मामले में दिया। इस मामले में हुए धर्म परिवर्तन को लेकर एडवोकेट नीलकमल बोहरा ने राजस्थान हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।
    इस मामले में जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास ने संज्ञान लेते हुए धर्मपरिवर्तन को गंभीरता से लिया था। इस गृह सचिव को तलब कर सरकार से धर्मपरिवर्तन कानून के बारे में जानकारी मांगी थी। सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत कर दिया गया।
    इस मामले में अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवकुमार व्यास व वरिष्ठ अधिवक्ता मेघराज सिंघवी ने धर्मपरिवर्तन के बारे में गाइडलाइन जारी करने की गुहार की थी। सुनवाई के दौरान आज जस्टिस व्यास व जस्टिस वीरेन्द्र कुमार माथुर की खंडपीठ ने इस मामले में आज गाइडलाइन जारी करते हुए आदेश पारित किया।

  • ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में फार्म भरने का झंझट खत्म, जानिए नए नियम

    केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने की जटिला को समाप्त करने के लिए मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव करने जा रही है। नया कानून लर्निग डीएल, नया डीएल, डीएल नवीनीकरण आदि से लोगों अलग-अलग फार्म (प्रपत्र) भरने के झंझट से मुक्ति दिलाएगा।

     

    वहीं, आवेदनकर्ता को डीएल बनवाने के लिए आधार कार्ड देना होगा। इससे देशभर में फर्जी डीएल बनाने के सिलसिले पर अंकुश लगेगा। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में राज्यों के क्षेत्रीय परिवहन कार्यायलों (आरटीओ) में लर्निग डीएल बनाया जाता है।

    एक निश्चित अवधि के बाद स्थायी डीएल पाने के लिए आवेदनकर्ता को नया फार्म भरना पड़ता है। इसी प्रकार डीएल के नवीनीकरण, मोटरसाइकिल-स्कूटर से कार का लाइसेंस बनाना, पता बदलने, डीएल में नाम बदलने, डुप्लीकेट डीएल बनाने के लिए हर बार फार्म भरना पड़ता है। उन्होंने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम 1989 में बदलाव किया जा रहा है।
    नए कानून
    – नए कानून में अधिनियम के रूल 10,14 (1), 17 (1) व 18 को समाप्त कर दिया जाएगा।

    – इसके स्थान पर नया फार्म -2 लागू होगा। उपरोक्त तमाम कार्यो के लिए आवेदनकर्ता को सिर्फ उक्त फार्म 2 भरना होगा।

    – इस नए फार्म में नए कॉलम हैं। इसमें आवेदनकर्ता को अपना आधार कार्ड नंबर, ईमेल, मोबाइल नंबर लिखना होगा।

    -पहली बार डीएल बनवाने वाले व्यक्ति के लिए सड़क हादसे में मृत्यु होने पर अंगदान करने की घोषणा करने का विकल्प होगा। इस कॉलम में हां अथवा नहीं का विकल्प होगा। वर्तमान में यह व्यवस्था नहीं है।

    उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने संबंधित पक्षों से सुझाव-शिकायतों के लिए मसौदा संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। इसके पश्चत नया कानून लागू कर दिया जाएगा।
    सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सार्वजनिक सभाओं में कई बार कह चुके हैं कि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों में गड़बड़ी के चलते देश में 30 फीसदी लोग फर्जी डीएल का इस्तेमाल कर रहे हैं। केंद्र सरकार देशभर के आरटीओ को कंप्यूटरीकृत के जरिए ऑनलाइन जोड़ रही है। डीएल सहित वाहनों से जुड़े तमाम दस्तावेज मोबाइल एप पर उपलब्ध होंगे।

    विशेषज्ञों ने अच्छी पहल माना
    परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञ अनिल चिकारा ने कहा कि सरकार की यह पहल अच्छी है। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी। आधार कार्ड को जोड़ने से व्यवसायिक वाहनों का डीएल बनवाने में आसानी होगी। फर्जी डीएल बनाने का धंधा करने वाले दलालों पर नकेल सकेगी। वहीं, सड़क हादसों में हिट एंड रन केस करने वालों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।

  • रेलवे की लापरवाही, टूटे स्प्रिंग पर दौड़ती रही शताब्दी, हादसे का शिकार होने से बची

    देहरादून । नई दिल्ली से देहरादून आ रही शताब्दी एक्सप्रेस बड़े हादसे का शिकार होने से बच गई। ट्रेन के सी-11 कोच के डेस्कपोट का हेलीकल स्प्रिंग टूटा हुआ था और उसी पर ट्रेन दून पहुंच गई। जब यहां मेंटेनेंस स्टॉफ ने बोगी चेक की तो सच्चाई सामने आई। जिसके बाद आनन-फानन में रवाना होने वाली ट्रेन से इस कोच को हटा दिया गया। इस कोच के यात्री दूसरे कोचों में शिफ्ट किए गए।  तकनीकी जानकारों की मानें तो यदि उसी स्थिति में ट्रेन रवाना कर दी जाती तो डोईवाला तक का सफर करना भी मुश्किल रहता। शुक्र है कि वक्त रहते लापरवाही पकड़ में आ गई। लगातार हो रहे रेल हादसों के बावजूद रेलवे की कार्यप्रणाली सुधरने का नाम नहीं ले रही। सोमवार को शताब्दी एक्सप्रेस का मामला बड़ी लापरवाही का ही नतीजा है। गनीमत रही कि ट्रेन और यात्री सकुशल दून पहुंच गए। शताब्दी एक्सप्रेस दोपहर करीब पौने एक बजे दून पहुंचती है और प्लेटफार्म नंबर तीन पर ही खड़ी होती है।  दरअसल, इस ट्रेन में 18 कोच आते हैं, जबकि दून आने वाली सामान्य ट्रेनों में 12-13 कोच आते हैं। चूंकि, बाकी प्लेटफार्म की लंबाई छोटी है, लिहाजा शताब्दी का मेंटेनेंस कार्य प्लेटफार्म नंबर तीन पर ही किया जाता है।  सोमवार दोपहर ट्रेन आने के बाद मेंटेनेंस स्टॉफ बोगी के नीचे जांच कर रहा था कि तभी देखा कि सी-11 कोच का हेलीकल स्प्रिंग पूरी तरह क्रैक था। तकनीकी स्टॉफ हैरान रह गया कि इस हालात में गाड़ी दून तक कैसे आ गई। उन्होंने तत्काल आला अधिकारियों को सूचना दी।  तकनीकी जानकारों के अनुसार, ट्रेन की बोगी का पूरा लोड हेलीकल स्प्रिंग पर होता है। यह डेस्कपोट के अंदर लगा होता है। अगर यह टूट जाए तो बोगी के साथ ही पूरी ट्रेन डीरेल हो सकती है।
    दून में नहीं है ठीक करने की व्यवस्था
    जिस कोच में यह समस्या आई, वह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच है। रेलवे के मुताबिक, इस कोच में झटके कम लगते हैं और सफर आरामदायक रहता है। विडंबना ये है कि इस कोच को ठीक करने की पूरी व्यवस्था दिल्ली में है। इसी वजह से कोच को देहरादून में ठीक नहीं किया जा सका।  रेलवे अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली से तकनीकी स्टॉफ आएगा, तभी कोच दुरुस्त किया जाएगा। तब तक यह कोच देहरादून में ही खड़ा रहेगा। देहरादून में एलएचबी के एक्स्ट्रा कोच की भी व्यवस्था नहीं है। इसलिए ट्रेन में एक्स्ट्रा कोच नहीं जोड़ा जा सका।
    दूसरे कोच में शिफ्ट किए यात्री
    सी-11 कोच में जाते हुए 70 सीट बुक थीं, जबकि इस कोच में 78 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। बताया गया कि दूसरे कोचों में करीब 90 सीटें खाली थीं। इसलिए उनमें यात्रियों को शिफ्ट किया गया। वहीं, कोच हटाने के चलते टिकट बुकिंग के करंट काउंटर बंद करने पड़े। जिससे यात्रियों को असुविधा हुई।
    चेकिंग में मिला टूटा स्प्रिंग
    स्टेशन उपाधीक्षक देहरादून सीताराम के मुताबिक मेंटेनेंस स्टॉफ को चेकिंग में हेलीकल स्प्रिंग टूटा हुआ मिला। इसके बाद कोच हटा दिया गया। कोच में जाने वाले सभी यात्रियों को दूसरे कोचों में शिफ्ट कर नई दिल्ली रवाना कर दिया गया।

  • India’s Most Wanted फेम सुहैब इलियासी पत्नी अंजू की मौत के मामले में दोषी करार, 20 दिसंबर को सजा!

    Suhaib file photo

    लगभग 20 साल पहले टीवी शो ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ होस्ट कर घर-घर लोकप्रिय हुआ यह सितारा, पत्नी अंजू इलियासी की हत्या के आरोप में अपनी चमक खो बैठा.बहरहाल, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने टीवी शो होस्ट और निर्माता सुहैब इलियासी को पत्नी अंजू की मौत के मामले में दोषी करार दिया है.साल 2000 में हुई पत्नी अंजू इलियासी की मौत के मामले में कोर्ट 20 दिसंबर को सुहेब इलियासी को सजा सुनायेगा.

    गौरतलब है कि आज भले ही टेलीविजन की दुनिया पर कपिल शर्मा-कृष्णा अभिषेक जैसे दिग्गज कलाकारों का दबदबा है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि भारतीय टेलीविजन पर रिएलिटी शो की शुरुआत सुहेब इलियासी ने ही की थी।

    suhaib -anju file photo

    एक समय टीवी की दुनिया के सुपरस्टार रहे सुहैब इलियासी ने अपने शो के माध्यम से खोजी पत्रकारिता की मिसाल पेश कर अपनी पहचान बनायी थी.सुहेब की पैदाइश दिल्ली की है और उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इसके बाद वो लंदन चले गए जहां उन्होंने टीवी एशिया में काम किया।

    जल्द ही वो इस चैनल के प्रोग्राम प्रोड्यूसर बन गए। 1996 में शोएब भारत आए और एक क्राइम बेस्ड रिएलिटी शो पर काम शुरू किया। बाद में ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ देश का सबसे चर्चित कार्यक्रम बन गया।

    टीवी पर क्राइम शो होस्ट करते-करते कब वह जुर्म की गलियों में खो गये, इसका पता शायद उन्हें भी नहीं चला होगा. वर्ष 2000 में पत्नी की हत्या के आरोप के बाद उनका करियर पूरी तरह से चौपट हो गया.

    कोर्ट-कचहरी के चक्कर में उनका जहां उनका शो बंद हो गया, वहीं उन्हें बदनामी भी झेलनी पड़ी.

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  • महिलाओं की सुरक्षा पर प्रभावशाली निर्णय ले प्रधानमंत्री : स्वाति मालीवाल

    छह महीने के भीतरबलात्कारियों को फांसी होनी चाहिए

    नयी दिल्ली। दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने 16 दिसंबर सामूहिक बलात्कार मामले में दोषियों को सजा देने में हुई ‘‘देरी’’ पर दुख जताते हुए दावा किया कि लंबी चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से अपराधियों को लगता है कि वह इस तरह के बर्बर अपराधों के बाद सजा से बच जाएंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री से ऐसा कानून लाने को कहा जिससे सुनिश्चित हो कि नाबालिगों के साथ बलात्कार के दोषियों को छह महीने के भीतर मौत की सजा हो जाए। पैरामेडिकल छात्रा निर्भया के साथ 16 दिसंबर, 2012 की रात को दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया गया था।

    वह अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर लौट रही थी जब यह बर्बर घटना हुई।घटना के 13 दिन बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। मामले में गिरफ्तार किए गए छह लोगों में से एक राम सिंह ने मार्च, 2013 में जेल में फांसी लगा ली थी जबकि एक दूसरे व्यक्ति जो घटना के समय नाबालिग था, को उस साल अगस्त में दोषी करार दिया गया। उसे सुधार गृह में अधिकतम तीन साल की सजा काटने के बाद पिछले साल रिहा कर दिया गया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सितंबर, 2013 में चार दूसरे लोगों-अक्षय, विनय शर्मा, पवन और मुकेश को दोषी करार दिया गया और मौत की सजा सुनायी गयी।

    उच्चतम न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। स्वाति ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘यह निर्भया की पांचवीं बरसी है और सच्चाई यह है कि इस देश में कुछ नहीं बदला है। हर दिन इस देश में लड़कियों एवं महिलाओं के साथ बर्बर रूप से बलात्कार हो रहा है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि शहर में फास्ट ट्रैक अदालतों की जरूरत है ताकि बलात्कारियों को तत्काल दंडित किया जा सके। डीसीडब्ल्यू प्रमुख ने फोरेंसिक विभाग की रिपोर्ट जल्द से जल्द भेजने की व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही बेहतर करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा, ‘‘व्यवस्था ने अपराधियों को यह विश्वास भर दिया है कि उन्हें लगता है कि वे महिलाओं या बच्चों के साथ किए गए अपराधों के लिए सजा से बच सकते हैं। स्वाति ने पत्र में लिखा, ‘‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि खुद निर्भया को इस देश में इंसाफ नहीं मिला। निर्भय की मां अब भी अपनी प्यारी बेटी के लिए न्याय सुनिश्चित करने की खातिर दर दर भटक रही है।’’ उन्होंने कहा कि कम से कम नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार को लेकर देश में ऐसे कानून होने चाहिए जिसके तहत इस तरह के बलात्कारियों को दंडित किया जा सके और छह महीने के भीतर मौत की सजा सुनायी जाए।

    डीसीडब्ल्यू प्रमुख ने प्रधानमंत्री से दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करने की अपील की जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, पुलिस आयुक्त और डीसीडब्ल्यू के प्रतिनिधि सदस्य हों और जो महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दों पर प्रभावशाली निर्णय ले। उन्होंने अब तक इस्तेमाल में नहीं लाए गए निर्भया कोष की तरफ प्रधानमंत्री का ध्यान दिलाते हुए राज्यों को तत्काल धन हस्तांतरित करने की अपील की क्योंकि ऐसा ना होने पर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम अपना महत्व खो देगा।

  • ट्रिपल तलाक दिया तो होगी 3 साल की जेल, मोदी कैबिनेट ने बिल पर लगाई मुहर, अब संसद में होगा पेश

      
    Banning Instant Triple Talaq
    नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तीन तलाक पर रोक लगाने एवं उसे दंडनीय अपराध बनाने संबंधी विधेयक के मसौदे को आज स्वीकृति प्रदान कर दी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां संसदीय सौध में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया. यह जानकारी सूत्रों ने दी.

    तीन तलाक पर रोक लगाने एवं उसे दंडनीय अपराध बनाने संबंधी विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. सरकार ने इस विधेयक को मानवता और मानवाधिकार से जुड़ा विषय बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से इसे पारित करने में सहयोग की अपील की है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाना चाहती है. यह राजनीति नहीं बल्कि मानवता और मानवाधिकार से जुड़ा विषय है. सभी दलों को तीन तलाक से जुड़े विधेयक को पारित कराने में सहयोग करना चाहिए. विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम महिलाओं में इसके कारण भाजपा के प्रति आकर्षण बढ़ा है। देखने की बात यह होगी कि कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दल संसद में क्या रुख दिखाते हैं। खासकर तीन साल की सजा को लेकर। संसद सत्र चालू होने और विधेयक के वहां पेश होने का हवाला देते हुए कानून रविशंकर प्रसाद ने विधेयक के बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इसमें गैरकानूनी ढंग से तीन तलाक देकर बेसहारा छोड़ी गई मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा और संरक्षण और बच्चों की कस्टडी हासिल करने का खास प्रावधान किया गया है।

    विधेयक के प्रारूप पर राज्यों की राय भी ले ली गई है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कई राज्यों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। सूत्रों के अनुसार विधेयक में तीन तलाक के पुराने मामलों में भी पीडि़त महिला मजिस्ट्रेट की अदालत में भरण-पोषण औरच्बच्चों की कस्टडी की मांग करने के अधिकार का प्रावधान है।

    विधेयक के अहम प्रावधान

    1- विधेयक का नाम मुस्लिम वुमेन प्रोटेक्शन आफ राइटस आन मैरिज है।

    2- यह सिर्फ एक साथ एक बार में तीन तलाक यानी तलाक ए बिद्दत के मामलों में ही लागू होगा।

    3- एक बार में तीन तलाक हर रूप में गैरकानूनी होगा चाहे वो लिखित हो, बोला गया हो या फिर इलेक्ट्रनिक रूप में हो

    4- जो भी व्यक्ति अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक देगा उसे तीन साल तक की कैद और जुर्माने की सजा होगी

    5- कानून बन जाने के बाद तीन तलाक संज्ञेय और गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आ जाएगा।

    6- पीडि़त महिला को गुजारा भत्ता और नाबालिग बच्चों की कस्टडी की पाने का अधिकार होगा

    7- यह जम्मू कश्मीर को छोड़ कर पूरे देश में लागू होगा। 

    विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम महिलाओं में इसके कारण भाजपा के प्रति आकर्षण बढ़ा है। देखने की बात यह होगी कि कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दल संसद में क्या रुख दिखाते हैं। खासकर तीन साल की सजा को लेकर। संसद सत्र चालू होने और विधेयक के वहां पेश होने का हवाला देते हुए कानून रविशंकर प्रसाद ने विधेयक के बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इसमें गैरकानूनी ढंग से तीन तलाक देकर बेसहारा छोड़ी गई मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा और संरक्षण और बच्चों की कस्टडी हासिल करने का खास प्रावधान किया गया है।

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    विधेयक के प्रारूप पर राज्यों की राय भी ले ली गई है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कई राज्यों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। सूत्रों के अनुसार विधेयक में तीन तलाक के पुराने मामलों में भी पीडि़त महिला मजिस्ट्रेट की अदालत में भरण-पोषण औरच्बच्चों की कस्टडी की मांग करने के अधिकार का प्रावधान है।