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  • UN महासचिव ने की आईआईटी-बॉम्बे के छात्रों की तारीफ, साथ ही डाला मानवाधिकार के मुद्दे पर प्रकाश

    डेस्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं वहीं गुटेरेस ने बुधवार को कहा कि अपने यहां मानवाधिकारों के सम्मान के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाकर ही दुनियाभर में भारत की बात को स्वीकार्यता और विश्वसनीयता हासिल हो रही है।
    गुटेरेस ने यहां आईआईटी-बॉम्बे के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “मानवाधिकार परिषद का एक निर्वाचित सदस्य होने के नाते भारत पर वैश्विक मानवाधिकारों को आकार देने और अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों समेत सभी व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करने और इन्हें बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भी है।” उन्होंने यह भी कहा, “बहुलता का भारतीय मॉडल एक सरल लेकिन गहरी समझ पर आधारित होता है। विविधता एक ऐसी खूबी है जो आपके देश को और मजबूत बनाती है। यह समझ रखना हर भारतीय का जन्मसिद्ध अधिकार भी है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है और इसे हर दिन बेहतर, मजबूत बनाना चाहिए।”
    गुटेरेस ने आगे कहा, “महात्मा गांधी के मूल्यों को अपनाकर, सभी लोगों विशेष रूप से सबसे कमजोर वर्ग के लोगों के अधिकारों तथा सम्मान को सुरक्षित व बरकरार रखकर, समावेश के लिए ठोस कदम उठाकर, बहु-सांस्कृतिक, बहु-धार्मिक और बहु-जातीय समाजों के विशाल मूल्य और योगदान को पहचान कर और अभद्र बयानबाजी की निंदा करके ऐसा आराम से कर सकते है।”
    गुटेरेस ने पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, छात्रों और शिक्षाविदों के अधिकारों व स्वतंत्रता की रक्षा करने और भारत की न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी काफी जोर दिया।
    साथ ही उन्होंने कहा, ” पूरी दुनिया की तरह भारत में लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है वहीं यह नैतिक रूप से अनिवार्य भी है। यह समृद्धि और स्थिरता का एक पैमाना है। वहीं महिलाओं, पुरुषों, लड़कियों और लड़कों के लिए समान अधिकारों व स्वतंत्रता के बिना कोई भी समाज पूरी तरह समृद्ध नहीं हो सकता है।”

  • क्यों ब्रिटेन की गृह मंत्री ने अपने पद से दिया इस्तीफा

    विदेश– बीते महीने भारतीय मूल की सुएला ब्रेवरमैन ने ब्रिटेन की गृह मंत्री का पद संभाला था और अब अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 
    उनके इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में हलचल मच गई। क्योंकि अभी हाल ही में बोरिस जॉनसन की सरकार गिरी थी और लिज ट्र्स ब्रिटेन की नई मुख्यमंत्री बनी। 
    बताया जा रहा है कि सुएला ब्रेवरमैन ने अपने पद से इस्तीफा इसलिए दिया है क्योंकि वह नई सरकार के काम से संतुष्ट नही है। उन्हें नहीं समझ आ रहा वह किस दिशा में जा रहे हैं। यह चिंता की बात है।
    उन्होंने कहा, सरकार अपने वादे पूरे नही कर रही है। ऊपर प्रवासियों के लिए उदार नीति अपनाने का दबाव था, जिसकी वजह से उन्होंने इस्तीफ़ा दिया. हाल ही में भारतीय प्रवासियों को लेकर दिए उनके बयान से भी ख़ूब विवाद हुआ था।

  • टारगेट किलिंग से गुस्साए कश्मीरी पंडितों ने हुर्रियात कॉन्फ्रेंस के कार्यालय पर बोला हमला

     

    Jammu and Kashmir: कश्मीर में जारी टारगेट किलिंग को लेकर कश्मीरी पंडितों का गुस्सा फूट रहा है।  वहीं आपको बता दें, सोमवार को कश्मिरी पंडितों के एक समूह ने कुछ सामाजिका कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर श्रीनगर में अलगाववादी हुर्रियात कॉन्फ्रेंस के कार्यालय पर भी हमला बोल दिया। कश्मीरी पंडितों ने दफ्तर में जमकर तोड़-फोड़ मचाई और वहां लगे बोर्ड को भी उखाड़कर फेंक दिया। इसी के साथ राजबाग मोहल्ला में स्थित कार्यालय के सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ही कश्मीरी पंडितों ने जमकर उत्पात भी मचाया।
    सामाजिक कार्यकर्ता कश्मीरी पंडितों के साथ हुर्रियत कार्यालय के बाहर भी जमा हो गए। इतना ही नहीं ये कार्यकर्ता कश्मीर घाटी में हो रही टारगेट किलिंग के विरोध में इकट्ठा भी हुए थे। टारगेट किलिंग से नाराज कश्मीरी पंडितों और सामाजिका कार्यकर्ताओं के समूह ने कहा है कि हुर्रियत नेताओं ने कश्मीर के लोगों को पिछले 30 सालों से धोखा दिया है।
    साथ ही उन्होंने आगे यह भी कहा कि ये अलगाववादी संगठन ही कश्मीर में निर्दोष लोगों की होने वाली हत्याओं के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं।
    इसके पहले शनिवार (15 अक्टूबर) को केएफएफ (कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स) आतंकी संगठन ने घाटी में पूरन कृष्ण भट नामके कश्मीरी पंडित की हत्या कर दी थी।
    वहीं इसके बाद से ही आए दिन हो रही टारगेट किलिंग को लेकर कश्मीरी पंडितों में आक्रोश देखा गया है। वहीं वे जम्मू में सड़क पर उतर आए हैं और पाकिस्तान के विरोध में नारेबाजी भी कर रहे हैं। इसके साथ ही एक कश्मीरी पंडित ने यहां तक कह दिया कि अब कड़ी निंदा का वक्त चला गया है और अब प्रशासन को जागना पड़ेगा। 
    वहीं पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला ने न्यूज एजेंसी एनआई से बातचीत करते हुए बताया, ‘जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक घाटी में हत्याएं होती रहेंगी।’ उन्होंने मीडिया से बातचीत में पूछा आखिर कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने के बाद भी स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा? आगे उन्होंने बताया की बीजेपी ने कश्मीर में ऑर्टिकल 370 को ही टारगेट किलिंग का जिम्मेदार ठहराया था इसलिए ऐसी स्तिथि है।

  • पीएम ने की मिशन लाइफ की शुरुआत, एक करोड़ लोगों को किया जाएगा शामिल

     

    डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय गुजरात दौरे पर हैं, वहीं इस दौरान पीएम मोदी ने केवडिया में वैश्विक अभियान मिशन लाइफ की शुरुआत कर दी है। मिशन LiFE, पर्यावरण संरक्षण का काफी बड़ा अभियान है, जिससे करीब 1 करोड़ लोगों के जुड़ने का अनुमान भीं लगाया जा रहा है। वहीं इस अभियान को शुरू करने के दौरान मिशन लाइफ (Mission LiFE) के वैश्विक लांंच के मौके पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres) भी वहां मौजूद थे। इसके साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर और सीएम भूपेंद्र पटेल भी वहां उपस्थित रहेंगे।
    गुजरात में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि विकसित देशों को भारत जैसे देशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता देनी चाहिए। उन्‍होंने यह भी कहा कि हमें एक नवीकरणीय क्रांति लाने की जरूरत है और इस पर भारत के साथ काम करने के लिए यूएन तैयार भी है।
    साथ ही इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का मुद्दा हर जगह देखा जा रहा है, हमारे ग्लेशियर पिघल रहे हैं साथ ही नदियां भी सूख रही हैं, मिशन लाइफ जलवायु संकट से लड़ने में काफी मदद करेगी। उन्‍होंने यह भी कहा है कि कुछ लोग एसी के तापमान को 17 डिग्री तक गिराना पसंद करते हैं, लेकिन इसका पर्यावरण पर बहुत गलत प्रभाव पड़ता है। उन्‍होंने कहा कि समस्‍याओं से निपटने के लिए पर्यावरण के लिए मिशन लाइफ की शुरुआत की जा रही है।

  • अगर नाटो नही आया अपनी हरकत से बाज तो होगी वैश्विक तबाही

    विदेश– रूस और युक्रेन के मध्य बीते कई महीनों से युद्ध चल रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई बार युक्रेन को चेतावनी दे चुके हैं। वही क्रीमिया ब्रिज पर युक्रेन द्वारा हमला किए जाने के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का गुस्सा तेज हो गया है और उन्होंने वैश्विक तबाही की चेतावनी दी है।
    उन्होंने नाटो को सीधे चुनौती देते हुए कहा, अगर नाटो की सेना ने रूस के सैनिकों से भिड़ने की कोशिश की तो यह उचित नही होगा। उनकी यह हरकत वैश्विक तबाही का कारण बन सकती है। नाटो की सेना की रूस के साथ तकरार पूरी दुनिया के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है।
    उन्होंने आगे कहा, जो लोग ऐसा करने का विचार कर रहे हैं उन्हें इतना समझदार होना चाहिए कि वह इस तरह का कदम न उठाएं। क्योंकि यह विश्व के लिए खतरा है। उन्होंने युक्रेन के खिलाफ परमाणु हमले की चेतावनी देते हुए संयुक्त राष्ट्र की आलोचना भी की है।
    रूस ने भारत और चीन का जिक्र किया और कहा यह दोनो देश रूस के करीबी है। एशिया के मजबूत देश है। दोनो ने इस मसले को शान्ति पूर्ण हल करने की बात कही है। लेकिन अगर नाटो अपनी हरकत से बाज नही आया तो इसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ेगा।

  • Delhi Air Pollution: कैसे दिखेगी खुशियों की लहर दिवाली से पहले दिल्ली की हवा हुई जहर

    Delhi Air Pollution Updated:– सर्दियों की दस्तक के साथ महापर्व दिवाली आने वाला है। जहां दिवाली प्रकाश और खुशियों का प्रतीक है .वही दिवाली से पूर्व दिल्ली की हवाओ में जहर घुल गया है और दीवाली की खुशियों में मानो इन हवाओ ने विघ्न डाल दिया है। लगातार दिल्ली और दिल्ली के आसपास के इलाको की हवा जहरीली होती जा रही है लोगो का इस हवा में साँस लेना मुश्किल हो रहा है। हर और धुंध छाई हुई है और कोविड के तांडव से मुक्ति मिलने के बाद भी दिल्ली के लोगो को मास्क से मुक्ति नहीं मिली है. वही वायु गुणवत्ता के परिपेक्ष्य में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट में दिल्ली को भारत का सबसे प्रदूषित राज्य बताया गया और इस राज्य की वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। 
     
    विशेषज्ञ यह अनुमान लगा रहे है की आगामी कुछ दिनों में दिल्ली की हवा और खराब होगी और लोग इससे काफी प्रभावित भी होंगे। इस खराब होती वायु की गुणवत्ता का प्रभाव लोगो पर भी देखने को मिल रहा है. क्योंकि हवा की खराब गुणवत्ता के कारण लोगो को असाध्य रोगो की पीड़ा झेलनी पड़ रही है। स्वस्थ दिखने वाले लोग ह्रदय , फेफड़ो और अस्थमा जैसी बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे है। वही सरकार दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार हेतु कई कदम उठा रही है। 

    जाने दिल्ली में वायु प्रदूषण रोकने हेतु सरकार ने क्या की पहल –

    दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने हेतु कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने कई अहम निर्णय लिए है। दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-1 लागू किया गया है. इसके साथ ही दिल्ली में चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगाई गई है और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को सड़को पर दौड़ाने से प्रतिबंध लगाया गया है। 
    इसके साथ ही यह निर्देश दिया गया है की यदि दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं आया और स्थित गंभीर हुई तो वर्क फ्रॉम होम किया जाएगा और सस्कूल और कॉलेज को बंद किया जाएगा। इसके साथ ही दिल्ली में डस्ट अभियान जारी है और जहां बड़े स्तर पर निर्माण कार्य किया जा रहा है वहां स्मॉग गन के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए है। वही परौली को जलाने की जगह उसमे डिकम्पोजर डालने की बात कही गई है। क्योंकि यह परौली को गला देता है और इससे खेतो में नमी बरकरार रहती है। 

    सरकार का प्रयास क्या जनता के लिए बन रहा राहत –

    दिल्ली घनी आबादी वाला राज्य है। यहाँ वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने हेतु सरकार जो भी कदम उठा रही है उसे इतनी आसानी से लागू करना शायद मुमकिन नहीं है। क्योंकि सरकार कारखानों , मेट्रो अस्पतालों को अकास्मिक रूप से बंद नही कर सकती है और ही बड़े बड़े कंस्ट्रक्शन के कामो पर प्रतिबंध लगा सकती है। सरकार एक और जहां पेड़ो की रोपाई कर रही है वही दूसरी ओर इन पेड़ो की कटाई हो रही है। लोगो के घरो में धड़ाके के साथ एसी का इस्तेमाल हो रहा है. जिससे क्लोरो फ्लोरो कार्बन हवाओ में फ़ैल रही है और सरकार का एयर फ़िल्टर कॉन्सेप्ट शून्य होता दिखाई दे रहा है। 
    दिल्ली सरकार जो भी कदम वायु की बेहतर गुणवत्ता के लिए उठा रही है। वह कही न कही उचित है लेकिन दिल्ली का आबादी के वह लचक खा रहे है और दिल्ली के लोगो को कही न कही इस खराब गुणवत्ता के साथ अपने स्वास्थ्य का दाव खेलते हुए जीवन यापन करना पड़ रहा है। 

    वायु प्रदूषण से बचने हेतु खुद से उठाएं यह कदम –

    यदि आप दिल्ली स शहर में है और दिल्ली की हवाओ ने आपको चिंता में डाल दिया है तो आप दिल्ली की जहरीली हवाओ से बचने के लिए सुरक्षा के इन नियमो का पालना अवश्य करें. 

    कोशिश करें की आप बेवजह घर से बाहर न निकलने।

    घर से बाहर जाते वक्त मास्क का उपयोग करे।

     

    अपने वाहनों का इस्तेमाल कम करे।

     

    बच्चो और बुजुर्गो को बेवजह बाहर न भेजे।

     

    ज्यादा से ज्यादा पानी पियें।

    खुले में रखी वस्तुओ को खाने से परहेज करे.

  • कई धर्मों से जुड़ा येरूशलम बढ़ा रहा अंतराष्ट्रीय स्तर पर तनाव

    डेस्क। येरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्‍यता वापस करने के आस्‍ट्रेलिया के फैसले ने एक बार फिर इस मुद्दे को विवाद का काम किया है।
    वहीं इस पर विश्‍व के देशों की राय भी एक समान नहीं है। जहां कुछ इसको लेकर इजरायल के समर्थन में हैं तो कुछ विरोधी भी हैं तो कुछ की राय बिल्‍कुल ही अलग है। वहीं इस मुद्दे पर फलस्‍तीन और इजरायल दोनों ही झुकने को तैयार नहीं हैं और दोनों ही इसको अपनी राजधानी और अपने लिए एक पवित्र जगह भी बताते हैं। ऐसे में ये जानना बहुत बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर येरूशलम में ऐसा क्‍या खास है जिस पर दोनों ही देश अपना न तो रुख बदलने को तैयार हैं और न ही कोई समझौता करने को तैयार हैं।

    दशकों पुराना है येरूशलम का ये मुद्दा

    येरूशलम का मुद्दा दोनों के बीच तभी से है जब से इजरायल फलस्‍तीन से अलग होकर एक आजाद राष्‍ट्र के रूप में अस्तित्‍व में आया था। तभी से लेकर आज तक ये मुद्दा गरमाया हुआ है।
    आपको यह भी बता दें कि ये एक ऐसी जगह है जो दुनिया के सबसे पुराने नगरों में से एक है। ये दुनिया में तीन धर्मों को मानने वालों के लिए बेहद पवित्र स्थान है। इनमें यहूदी, इसाई और मुस्लिम धर्म शामिल हैं। इसी वजह से इस्‍लाम बहुल फलस्‍तीन के लिए और यहूदी बहुल इजरायल के लिए ये पवित्र स्‍थल है। बता दें यहां पर Jewish लोगों की मौजूदगी अधिक है। वहीं यह करीब 61 फीसद हैं और इस्‍लाम को मानने वाले करीब 38 फीसद लोग हैं।
    इस जगह के इतिहास की बात करें तो ये दो बार उजड़ कर फिर से बसाया गया था। इस पर करीब 52 बाहरी लोगों ने हमला किया और इसको बर्बाद भी कर दिया। इसी कड़ी में अलग-अलग समय पर इसके नाम भी इतिहास में बदलते रहे हैं। जैसे कभी सिटी आफ डेविड, Urusalim आदि। Judah शासन का ये कभी केंद्र हुआ करता था। 1538 में यहां पर सिटी आफ वाल्‍स का निर्माण भी करवाया गया। उस वक्‍त इस पर ओटोमन साम्राज्‍य के सुलेमान का राज हुआ करता था। ये दीवार आज अर्मेनियत, क्रिस्चियन, जुविश और इस्‍लाम को अलग भी करने वाली है। 
    साथ ही क्या आप जानते हैं हिब्रु में लिखी बाइबल में इसके किंग डेविड द्वारा जीते जाने का जिक्र मिलता है। वहीं किंग सोलोमन ने यहां पर एक पवित्र मंदिर का निर्माण भी करवाया था, जिसे बाद में रोमन साम्राज्‍य ने नष्‍ट कर दिया साथ ही इस्‍लाम धर्म में सुन्‍नी समुदाय के लिए ये जगह मक्‍का और मदीना के बाद धरती पर तीसरी सबसे पवित्र जगह बन गई। ऐसा भी कहा जाता है कि यहां पर इब्राहिम ने अपने बेटे को कुर्बान कर अल्लाह से बात की थी।

    इसाइयों से भी जुड़ी है जगह

    इसाई धर्म में इस जगह की खासियत इसलिए भी खास है क्‍योंकि इसको ताल्‍लुक यीशु के बचपन से जोड़कर देखा जाता रहा है। इस्‍लाम में इस जगह का ताल्‍लुक मोहम्‍मद साहब से बताया जाता है। वहीं यह भी कहा जाता है कि यही से हजरत मोहम्‍मद साबह जन्‍नत गए थे। वहीं Mandaeans को मानने वाले यह भी मानते हैं कि उनके Chief prophet John the Baptist का जन्‍म यहीं पर हुआ था और यीशु के जन्‍म के बाद वे यहां से चले भी गए थे।
    इसी कड़ी में बता दें यहां पर करीब 158 गिरजाघर और करीब 73 मस्जिद भी हैं। इस्‍लाम को मानने वालों के लिए यहां पर उनकी पवित्र अल-हरम मस्जिद भी मौजूद है। इसको गोल्‍डन टैंपल और डोम आफ द राक के नाम से भी पुकारा जाता है।  

  • अगले पांच वर्षों में कहां पहुंच जाएगी भारतीय मुद्रा एवं अर्थव्यवस्था : रिपोर्ट में जानिए

    डेस्क। सुधारों और आर्थिक वृद्धि पर ध्यान देकर भारत अगले पांच वर्षों में 475 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) हासिल कर चुका है। EY और CII की संयुक्त रूप से तैयार रिपोर्ट – ‘विजन विकसित भारत – एमएनसी के लिए अवसर तथा अपेक्षाएं’ में यह अनुमान भी जताया गया है।
    इस रिपोर्ट के आधार पर 71 प्रतिशत बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने वैश्विक विस्तार के लिए भारत को एक आकर्षक इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन भी माना है, जबकि 96 प्रतिशत ने यह कहा है कि वे काफी लंबे समय के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में सकारात्मक भी हैं।
    एमएनसी ने जीएसटी लागू किए जाने, विभिन्न क्षेत्रों में सरकार द्वारा डिजिटल प्रथाओं को बढ़ावा देने और कराधान में पारदर्शिता सहित अन्य सुधारों की सराहना करने का काम किया है। वहीं इस सर्वेक्षण के अनुसार ज्यादातर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लगता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले तीन-पांच वर्षों में काफी बेहतर प्रदर्शन  करने वाली है।
    ईवाई-सीआईआई की रिपोर्ट यह कहती है, ”भारत सुधार और आर्थिक वृद्धि पर ध्यान देकर अगले पांच वर्षों में 475 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई पाने का अवसर तैयार कर सकता है।” वहीं भारत में पिछले दशक में एफडीआई में लगातार वृद्धि भी देखी गई है। वहीं ईवाई इंडिया के पार्टनर (कर एवं नियामक सेवाएं) सुधीर कपाड़िया ने कहा कि, ”भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एक उभरते हुए विनिर्माण केंद्र, बढ़ते उपभोक्ता बाजार और सरकारी तथा निजी क्षेत्रों के डिजिटल परिवर्तन में एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में भी देखा जा रहा है.”
    क्या हैं बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सरकार से कुछ अपेक्षाएं
    सर्वेक्षण में कहा गया कि एमएनसी को सरकार से उम्मीद है कि वह कारोबारी सुगमता को जारी रखे, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा भी कर रहे हैं। वहीं मुक्त व्यापार समझौते शीघ्रता से किए जाएं तथा जीएसटी में भी सुधार जरूरी हो गया है।
    इस सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि भारत हाल ही में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और आर्थिक विकास की तेज गति के साथ 2025 में जर्मनी को पछाड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान भी लगाया गया है।

  • धर्मांतरण हिंदूओ के लिए समस्या बन रहा

    देश– राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रयागराज में जनसंख्या वृद्धि को लेकर कहा है कि इसके पीछे का कारण कही न कही तेजी से बढ़ता धर्मांतरण और बांग्लादेश की ओर से हो रही घुसपैठ है।
    देश मे इससे असंतुलन पैदा हो रहा है। इसे रोकने हेतु सरकार को धर्मांतरण कानून सख्ती के साथ लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा है कि धर्मांतरण हिंदूओ के लिए समस्या बन रहा है। कई जगहों पर हिन्दू की आबादी घटती जा रही है। घुसपैठ के बढ़ने से सामाजिक असंतुलन पैदा हो रहा है।
    वही बढ़ती जनसख्या के कारण देश का विभाजन हुआ है और इसमे भारत भी शामिल हैं।उन्होंने कहा कि पिछले 40 से 50 सालों में जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देने के कारण परिवारों का औसत आकार 3.4 सदस्यों से 1.9 सदस्य हो गया है. इसके कारण आने वाले सालों में देश में युवाओं से ज़्यादा बुज़ुर्गों की संख्या बढ़ने की आशंका है. इसलिए जनसंख्या में संतुलन बनाए रखना ‘युवा देश’ होने के लिए ज़रूरी है।
    उन्होंने बताया कि आरएसएस ने अपने कार्यकर्ताओं को आर्य समाज और धर्म जागरण विभाग जैसी संस्थाओं में जाने के लिए कहा है जो धर्मांतरण रोकने पर काम करती हैं. इसके कारण ”घर वापसी” में अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं.
    होसबाले ने कहा कि आरएसएस का मानना है कि धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को आरक्षण का फायदा नहीं मिलना चाहिए.
    महिला सशक्तिकरण के मसले और सामाजिक गतिविधियों पर उनकी भागीदारी पर होसबाले ने कहा कि महिलाओं में शिक्षा, खासकर हिंदुओं में, बढ़ी है और वो समाज के सभी क्षेत्रों में काम कर रही हैं.

  • केदारनाथ हेलीकॉप्टर क्रैश: इतनों की हुई मौत, जानिए पूरा अपडेट

     

     

    डेस्क। केदारनाथ हेलीकॉप्टर क्रैश में पायलट समेत 7 लोगों की मौत की पुष्टि की जा रही है। जानकारी के मुताबिक हादसा, केदारनाथ से करीब 2 किलोमीटर दूर गरुड़चट्टी के करीब घटित हुआ था। वहीं अभी हादसे की ठोस वजह नहीं पता चल सकी है। साथ ही बता दें कि अनुमान यह लगाया जा रहा है कि खराब मौसम के चलते यह दुर्घटना हुई है।
    यह दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर एक निजी कंपनी का था और यह गुप्तकाशी से केदारनाथ की ओर जा रहा था। वहीं केदारघाटी में गरुड़चट्टी के करीब अचानक यह क्रैश देखने को मिला है। 
    प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो जिस वक्त हादसा हुआ, उस समय वहां बारिश हो रही थी और फॉग भी था। विजिबिलिटी भी कम हो चुकी थी। 
    वहीं शुरुआती छानबानी में फॉग को ही हादसे का जिम्मेदार भी बताया गया है।
    जानकारी के लिए बता दें कि उत्तराखंड के सीएम के विशेष प्रमुख सचिव अभिनव कुमार ने हादसे में 7 लोगों के निधन की पुष्टि भी की है और यह कहा है कि राहत और बचाव कार्य इसके लिए चलाया जाएगा।
    वहीं गरुड़चट्टी के नजदीक हुए इस हादसे के बाद केदारनाथ में हेलीकॉप्टर सेवाओं को रोका गया है। साथ ही प्रदेश सरकार के तमाम उच्च अधिकारी घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं।
    आपको यह भी बता दें कि पीएम मोदी 21 और 22 अक्टूबर को केदारनाथ का दौरा करने वाले हैं। उनके दौरे से ठीक पहले यह हादसा हुआ है।