Category: national

  • कांग्रेस का आधिकारिक यूट्यूब चैनल क्यों हुआ डिलीट

    Congress YouTube Channel Deleted: कांग्रेस को सोशल मीडिया प्लेटफार्म यूट्यूब पर बड़ा झटका मिला है। यहां पार्टी का आधिकारिक यूट्यूब अकाउंट अचानक डिलीट हो गया है। साथ ही गौर करने वाली बात यह है कि कांग्रेस को खुद ये जानकारी नहीं है कि आखिर उनका अकाउंट डिलीट कैसे हो गया। 

    लंबे समय बाद अकाउंट डिलीट होने के बारे में जानकारी देते हुए पार्टी ने कहा कि इस बारे में यूट्यूब और गूगल से संपर्क किया जा रहा है। पार्टी ने ट्वीट कर बताया है कि इस बारे में जानकारी भी जुटाई जा रही है कि अकाउंट आखिर डिलीट कैसे हो गया।

    एकाउंट डिलीट होने के बाद कांग्रेस अपने यूट्यूब अकाउंट को फिर से रीस्टोर करने की लगी है। पार्टी ने इस बारे में आधिकारिक बयान भी जारी कर कहा कि हमारा यूट्यूब चैनल ‘Indian National Congress’ डिलीट हो गया है, हम इसे ठीक करने के प्रयास में लगे हैं। इस बारे में यूट्यूब और गूगल से बातचीत भी की जा रही है। और यह जांच की जा रही है कि ये तकनीकी खराबी के कारण हुआ या फिर इसके पीछे कोई साजिश रही।

  • हिन्दू धर्म के सभी देवी-देवता SC/ST : बोलीं JNU की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित

    डेस्क। जेएनयू वीसी शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित का विवादित बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म का ‘कोई भी भगवान ऊंची जाति का नहीं है।’ वह ‘डॉ. बी आर आंबेडकर्स थॉट्स आन जेंडर जस्टिस: डिकोडिंग द यूनिफॉर्म सिविल कोड’ शीर्षक वाले डॉ. बी आर आंबेडकर लेक्‍चर सीरीज में बोल रही थीं जिस दौरान उन्होंने यह विवादित बयान दिया।

    बता दें कि समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करना लैंगिक न्याय के प्रति सबसे बड़ा उपकार होगा और यह मानना है जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की कुलपति शांतिश्री धूलिपदी पंडित का। 

    साथ ही उन्‍होंने सोमवार को डॉ. बी आर आंबेडकर व्याख्यान श्रृंखला में यह भी कहा कि कानूनों की एकरूपता लोगों को प्रगतिशील और उनकी सोच को विस्तृत करने के लिए है। जेएनयू कुलपति ने कहा कि आंबेडकर समान नागरिक संहिता को लागू करना चाहते थे। 

    साथ ही उन्होंने कहा, ‘गोवा में समान नागरिक संहिता है जो पुर्तगालियों द्वारा लागू की गई थी, इसलिए वहां हिंदू, ईसाई और बौद्ध सभी ने इसे स्वीकार किया है, तो हर जगह ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा।’ 

    जेएनयू वीसी ने आगे कहा कि ‘देवी-देवता उच्‍च जातियों से नहीं हैं’ और ‘भगवान शिव भी अनुसूचित जाति या जनजाति से हो सकते हैं।’ इसके साथ ही उन्‍होंने मनुस्मृति में ‘महिलाओं को शूद्रों का दर्जा’ दिए जाने को प्रतिगामी भी बताया।

    शांतिश्री धूलिपदी पंडित ने यह भी कहा, ‘जब तक हमारे पास सामाजिक लोकतंत्र नहीं है, हमारा राजनीतिक लोकतंत्र केवल एक मृगतृष्णा है। कभी न कभी ऐसा समय आएगा जब आपको ये इतना उल्टा पड़ जाएगा कि आप उसे संभाल नहीं पाएंगे।’ 

    देश में जाति-संबंधी हिंसा की घटनाओं के संबंध में पंडित ने यह भी कहा कि ‘मानव-विज्ञान की दृष्टि से’ देवता उच्च जाति से नहीं हैं और भगवान शिव भी अनुसूचित जाति या जनजाति से हो सकते हैं। 

    उन्होंने यह भी कहा, ‘मैं सभी महिलाओं को बता दूं कि मनुस्मृति के अनुसार सभी महिलाएं शूद्र हैं, इसलिए कोई भी महिला यह दावा नहीं कर सकती कि वह ब्राह्मण या कुछ और है। 

  • क्या पठान भी चढ़ जाएगी सोशल मीडिया बायकॉट की बली?

    डेस्क। बॉलीवुड और सोशल मीडिया इन दिनों एक दूसरे के दुश्मन बने बैठे हैं। सोशल वीडियो पर बॉलीवुड स्टार्स के पुराने बयानों के आधार पर उनकी फिल्में को बायकॉट करने का सिलसिला जारी है। इन दिनों शाहरुख खान का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो भारत पर टिप्पणी करते दिख रहे हैं। 

    जिसके बाद से ही शाहरुख की फिल्म ‘पठान’ का बहिष्कार करने की मांग जारी है। इसी बीच फिल्म एक्टर प्रकाश राज ने ट्विटर पर यूजर्स से शाहरुख की फिल्मों को बायकॉट करने पर कई सवाल उठाए है।

    वहीं प्रकाश राज ने एक यूजर का ट्वीट शेयर किया है, जिसमें शाहरुख खान का वीडियो पोस्ट किया गया है। वीडियो में एक्टर एक डांस रिएलिटी शो में व्हील चेयर पर बैठी दिव्यांग लड़की के साथ ‘छैया-छैया’ गाने पर डांस करते हुए दिखाई दे रहें हैं। 

    साथ ही यूजर ने वीडियो के कैप्शन में लिखा है कि ”लोग इन्हें और इनके परिवार को कैसे परेशान कर सकते हैं, वहीं एक्टर देश को इस तरह प्यार और खुशी दे रहे हैं।” 

    लोग उनके इस ट्वीट पट प्रतिक्रिया दे रहें हैं वहीं एक यूजर ने उनको स्वरा भास्कर का मेल वर्जन भी बताया है। 

    जानकारी के लिए आपको यह भी बता दें कि आमिर खान, अक्षय कुमार की फिल्मों की तरह ही शाहरुख खान की आने वाली फिल्म ‘पठान’ भी नफरत की बली चढ़ने को तैयार हैं। 

  • सोनाली फोगाट की मौत की वजह हार्ट अटैक या रेप

    बीजेपी: सोशल मीडिया स्टार और भाजपा नेता सोनाली फोगाट की मौत की गुत्थी खुलने का नाम नही ले रही है। आय दिन इनकीं मौत से जुड़ा नया रहस्य सामने आ रहा है। जहाँ अभी तक यह दावा किया जा रहा था कि इनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। वही अब सोनाली के परिजनों का दावा है कि उनकी हत्या हुई है और उनका रेप किया गया है।

    सोनाली के परिजनों ने पुलिस में तहरीर दर्ज करवाते हुए कहा, सोनाली के पीए सुधीर सांगवान और सुखविंदर ने सोनाली का रेप किया और उनकी हत्या कर दी है। सोनाली के भाई ने दावा किया है कि उनके पीए ने पहले उन्हें नशे की दवाई दी फिर उनका रेप किया और उसका वीडियो बनाया। वह सोनाली को इस वीडियो को लेकर बार बार धमकी दे रहा था कि इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा।
    सोनाली के भाई रिंकू ने दावा किया है कि मौत से कुछ घण्टे पूर्व सोनाली ने अपने परिजनों से बात की थी। अपनी मां और बहन से वह अपने स्टाफ की शिकायत भी कर रही थी। वही परिजनों के दावे के बाद गोवा पुलिस ने सोनाली के पीए सुधीर और उनके दोस्त सुखविंदर को गिरफ्तार कर लिया गया है और हत्या का केस (Murder Case) भी दर्ज किया गया हैं। फोगाट की मौत से जुड़े मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) जोड़ी गई है।

  • पाकिस्तान सिर्फ एक धर्म को करता टारगेट

    देश: आर्थिक संकट से जूझ रहे श्री लंका में नागरिकों को अनेको समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। वही श्री लंका में रह रहे भारत के लोगो की सुरक्षा को लेकर भारत ने बड़ा बयान दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, भारत श्री लंका की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। भारत को श्री लंका के हालातों का पता है। 

    वही श्री लंका में रह रहे भारत के लोगो की सुरक्षा भारत सरकार के लिए अहम है। भारत सरकार उनकी सुरक्षा के लिये हर सम्भव कदम उठाएगी। लेकिन श्री वहां रह रहे लोगो को सावधान रहने की आवश्यकता है। क्योंकि स्थिति अभी भी नाजुक है।
    उन्होंने श्री लंका में रह रहे भारतीयों के संदर्भ में कहा, भारतीय यात्री वहां मुद्रा कन्वर्जन और ईंधन के हालात जैसी सभी ज़रूरी बातों की पड़ताल कर ले। हम उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखेगे। हमारी नजर उनकी गतिविधियों पर है। श्री लंका में अभी तक किसी को कोई नुकसान नही हुआ है और सभी सुरक्षित है।
    उन्होंने श्री लंका के साथ पाक में सिख समुदाय की महिला के अपहरण पर टिप्पणी करते हुए कहा, यह चिंताजनक है। पाकिस्तान में जिस प्रकार से एक धर्म को टारगेट करके उस धर्म के अनुयायियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। यह वास्तव में ह्रदय को झझकोर देता है। 

  • काबुल में दिखने लगा तालिबान राज का दुष्प्रभाव

     

    डेस्क। पिछले वर्ष अगस्त में जब तालिबान लड़ाके काबुल में घुसे तब अफगानिस्तान की शिक्षित‚ सक्षम और समर्थ माने जाने वाली लड़कियां देश–विदेश में रह रहे अपने परिचितों–रिश्तेदारों को एक संदेश भेज रही थीं कि–‘ बस हमको यहां से निकालो‚ नहीं तो तालिबानी हमें मार डालेंगे।’ 

    अफगानिस्तान की शिक्षित और जागरूक महिलाओं–लड़कियों को इसका अंदेशा था कि दोहा में अमेरिकी प्रतिनिधियों और तालिबान के मध्य वार्ता में उनके हक और हिफाजत से जुड़े मुद्दे कोई नहीं उठाएगा।  

    इस कारण से वे अलग-अलग मंचों से तालिबान की राजनीतिक प्रक्रिया में वापसी की पहल के बीच अपनी सुरक्षा और शिक्षा के मुद्दे को बराबर उठा रही थीं। उधर‚ दोहा वार्ता के दौर में और काबुल पर काबिज हो जाने के शुरुआती दिनों में लड़कियों की शिक्षा और कामकाजी महिलाओं को लेकर तालिबान के अलग–अलग नेता कई प्रकार के लगातार बयान दे रहे थे।

    कुछ तालिबान नेताओं का कहना था कि लड़कियों को पढ़ने का अधिकार है तो कुछ इसको मना करने में जुटे थे। कुछ नेता बोले वे पहले की तरह पढ़ सकती हैं‚ तो कुछ ने उनको हिजाब–बुरखा में दफ्तर में काम करने की दलील पेश की। 

    पिछले दो दशकों में मौजूदा चुनौतियों के बावजूद महिला उद्यमी‚ वकील‚ डॉक्टर‚ कलाकार‚ पत्रकारों की एक नई पीढ़ी तैयार होने को आतुर है पर  कुछ को इसके लिए देश छोड़ना पड़ा है और कुछ अभी भी उसी स्थान पर उपस्थित हैं। 

    बता दें कि वर्तमान समय में अफगानिस्तान में अकेले महिला को यात्रा करने की मनाही है और अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से पूर्ण वापसी के ऐलान के साथ ही तालिबान ने बंदूक के बल पर सत्ता पाई। 

    बता दें कि मौजूदा वक्त में तालिबानी महिलाओं और पुरुषों की स्तिथि बहुत बिगड़  चुकी है। 

    विश्वविद्यालयों में क्लास में लड़कियों और लड़कों को अलग–अलग कतार में बताया जाता है और उनके बीच पर्दा है। वहीं कई जगहों पर लड़कियों के सेकेण्ड्री स्कूल में जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब लड़कियों को केवल प्राथमिक शिक्षा लेने की ही इजाजत है। महिलाओं ने खतरा मोल लेते हुए पहले भी काबुल की सड़कों पर कई बार जुलूस निकाला पर तालिबान की सरकार तस से मस नहीं हुई। ऐसे में यह स्तिथि बिगड़ती ही जा रही है और आने वाला समय क्या कहानी कहेगा कोई नहीं जानता। 

  • भारत सरकार ने इस बड़ी वजह से लगाया गेंहू और आटे के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध

    राष्ट्रीय: देश मे महंगाई उफान पर है। आम आदमी महंगाई के तहिमाम से कराह रहा है। वही अब केंद्र सरकार ने बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिये बड़ा फैसला लिया है और गेहूं व आटे के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्र सरकार ने कल यानी गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया और कहा गेंहू और आटे के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य इसके बढ़ते दामो को स्थिर करना है।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने इस मामले में आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि कैबिनेट की बैठक में सरकार में गेहूं और आटे के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार के इस फैसले से हर उस परिवार को लाभ मिलेगा जिसकी आय कम है और वह महंगाई से परेशान है। क्योंकि इससे गेंहू और आटे के दामो में गिरावट आएगी।
    जानकारी के लिए बता दें रूस और युक्रेन हमारे देश से सबसे ज्यादा गेहूं और आटे का निर्यात करते है। इन दोनों देशों के मध्य बीते 6 महीने से युद्ध जारी है। इस युद्ध का प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव गेहूं के एक्सपोर्ट पर पड़ा है और गेहूं की खपत बढ़ी है। जिसके कारण गेंहू की कीमतों में उछाल आया है। गेहूं के एक्सपोर्ट में 2021 की इसी अवधि की तुलना में 200 फीसदी का उछाल देखने को मिला है।

  • बिजली संकट से जूझ रहा जर्मनी क्यों बेच रहा है फ़्रांस को बिजली

    विदेश: फ्रांस जो की इस समय बिजली संकट से जूझ रहा है। अचानक से आये इस बिजली संकट ने फ्रांस की हालत खस्ता कर दी है। वही फ़्रांस की इस दशा का पड़ोसी देश खूब फायदा उठा रहे हैं जर्मनी और इटली जो अब फ़्रांस के साथ बिजली का धंधा कर रहे हैं और अपने देश की बिजली फ़्रांस को बेच रहे हैं। 

    रूस और जर्मनी इस समय दूसरे देशों की गैस सप्लाई में कटौती करके। फ़्रांस के साथ अपना बिजली व्यापार कर रहे हैं। इन देशों की इस नीति के कारण अन्य देशों को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। 
    एनर्जी एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिजली के दामो में बढ़ोतरी का कारण देशो में ईंधन की कमी है। अगर इसी तरह से चलता रहा तो विश्व स्तर पर बड़ा बिजली संकट आ सकता है।
    एक ओर जहां जर्मनी ने अपने देश के लोगो के लिए बिजली बचाने की गाइडलाइंस जारी की है। लोगो को हिदायत दी है कि वह फजूल में बिजली बर्बाद न करें। स्वीमिंग पुल में पानी गर्म करने पर रोक लगाई गई है। वही यह आदेश जारी किया गया है कि बिजली की कटौती की जाए जिससे हम सर्दियों में इसका सही इस्तेमाल कर सके।
    एक ओर जर्मनी अपने देश के लोगो को बिजली बचाने की हिदायत दे रहा है उनके लिए गाइडलाइंस जारी कर रहा है। वही दूसरी ओर प्राकृतिक गैस से बिजली का निर्माण करके फ़्रांस को बेच रहा है। जर्मनी का कहना है कि हम कभी भी यह नही चाहते हैं कि फ़्रांस का बिजली बाजार थम जाए और फ़्रांस बड़े संकट से जूझे। 
    जर्मनी ने दावा किया है कि वह भाईचारे के चलते फ़्रांस को बिजली दे रहे हैं। हम यह निर्यात जारी रखेंगे। आज हम उनकी मदद कर रहे हैं कल जब हम इसकी आवश्यकता होगी तो वह हमारी मदद करेंगे। यह हमारे बीच समन्वय है।

  • गुलाम नबी आजाद की डोर मोदी के हाथ मे

    राजनीति: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कल पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस से अपना रिश्ता खत्म कर दिया। नबी के इस्तीफे से कांग्रेस नेताओं में गुस्सा है और वह अब नबी पर तरह तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। वही अब इस बीच नबी को लेकर पवनखेड़ा ने कहा है कि, पार्टी कार्यकर्ता इस्तीफे के पीछे के सच को जानते हैं।

    क्योंकि इस समय पार्टी को छोड़ने का सीधा मतलब यही है कि उनका कंट्रोल नरेंद्र मोदी के हाथ मे है। गुलाम नबी आजाद के मोदी प्रेम को हमने देखा है। इससे पूरी पार्टी परिचित हैं। वही आज उनके इस पांच पन्ने के इस्तीफे ने यह साबित कर दिया है कि उनका प्रेम सत्य था। 
    उन्होंने आगे कहा, उनकी राज्यसभा सदस्यता पूरी हो गई थी। इसके बाद वह बिलख उठे और उन्होंने संघर्ष के समय कांग्रेस का साथ छोड़ दिया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को कमजोर करने का काम किया है लेकिन कांग्रेस अब उन्हें कभी नही माफ करेगी।

  • जस्टिस ललित के बाद जस्टिस वाईवी चंदचूड़

    सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस यूयू ललित सुप्रीम कोर्ट के 49 वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मुख मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ ग्रहण की है।

    यूयू ललित ऐसे दूसरे मुख्य न्यायाधीश हुए हैं जो वकील से सीधे मुख्य न्यायाधीश बने हैं। जस्टिस यूयू ललित से पूर्व जस्टिस एसएम सिकरी के ऐसे जज थे जो वकील से सीधे इस पद पर पहुंचे थे।

    जानकारी के लिए जस्टिस उदय उमेश ललित इस पद पर 73 दिनों तक यानी 8 नवंबर, 2022 तक रहेंगे। यूयू ललित का कार्यकाल काफी कम समय के लिये होगा।
    जस्टिस यूयू ललित को मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना की जगह नियुक्त किया गया है। सूत्रों ने दावा किया है कि यूयू ललित के कार्यकाल की समाप्ति के बाद जस्टिस वाईवी चंदचूड़ इस पद को संभालेंगे।