Category: national

  • Aadhar Card नहीं तो अंतिम संस्कार भी नहीं!

    देश में मोबाइल, बैंकिंग सुविधाओं से लेकर अनेक सुविधाओं में आधार कार्ड जरूरी किया जा रहा है, मगर औद्योगिक नगरी फरीदाबाद (हरियाणा)में अंतिम संस्कार के लिए भी ‘आधार’अनिवार्य किया गया है। पुराना फरीदाबाद के खेड़ी रोड स्थित स्वर्गाश्रम में बाकायदा प्रबंधन ने बोर्ड लगाकर सचेत किया है- मृतक का आधार कार्ड लाना जरूरी है, नहीं तो संस्कार नहीं होगा- आदेशानुसार फरीदाबाद नगर निगम, फरीदाबाद।1शुक्रवार सुबह सेक्टर-17 निवासी संदीप सिंघल के पिता राजाराम सिंघल के अंतिम संस्कार पर खेड़ी रोड स्थित स्वर्गाश्रम में एकत्र शहरवासियों ने जब यह बोर्ड देखा तो कई प्रबुद्ध नागरिकों ने इस आदेश की कानूनी वैधता की जानकारी ली। हालांकि इसी दौरान स्वर्गाश्रम का प्रबंधन देख रही फरीदाबाद वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान आरपी बतरा ने लोगों को बताया कि यदि लोग मृतक का विवरण रजिस्टर में सही दर्ज करा देते हैं तो आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है। बिना आधार भी अंतिम संस्कार करने दिया जाता है।

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    बतरा के अनुसार अब तक किसी का अंतिम संस्कार रोका नहीं गया है मगर अक्सर ऐसा होता है कि गमगीन माहौल में लोग मृतक का नाम पूरा नहीं लिखवाते या फिर उनका पता या पिता का नाम गलत लिखवा देते हैं। इससे उन्हें नगर निगम में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी होती है और वे लोग फिर से स्वर्गाश्रम में हुए संस्कार की पर्ची पर नाम व पता ठीक कराने आते हैं। इससे स्वर्गाश्रम प्रबंधन को काफी परेशानी होती है। उनकी संस्था ने लोगों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए ही यह निर्णय लिया है। इसमें नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाली शाखा को भी सहूलियत होती है। जो विवरण आधार में होता है वही विवरण स्वर्गाश्रम की पर्ची में होता है तो मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में आसानी रहती है। स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम, फरीदाबाद आनंद स्वरूप का कहना है कि फरीदाबाद नगर निगम ने अंतिम संस्कार में आधार की अनिवार्यता संबंधी कोई आदेश जारी नहीं किया है। खेड़ी रोड स्थित स्वर्गाश्रम के बोर्ड में जो अनिवार्यता की बात लिखी है उसे ठीक कराया जाएगा। आधार अनिवार्य नहीं बल्कि सही विवरण देना अनिवार्य होना चाहिए।

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  • चार दिन में रच दी गई थी अरबों रुपये के व्यापम घोटाले की साजिश

    Plot of the Vyapam scam of the billions of rupees in Madhya Pradesh

    नईदुनिया (भोपाल)। मध्य प्रदेश में हुए अरबों रुपये के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (Vyapam) घोटाले की साजिश महज चार दिन, 23 से 26 अप्रैल 2012 में रच दी गई थी। यह पर्दाफाश सीबीआइ की चार्जशीट में हुआ है। इसे व्यापम मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायधीश डीपी मिश्रा की कोर्ट में पेश किया गया है। पूरे घोटाले को पीएमटी-2012 परीक्षा फॉर्म भरने के तरीके में बदलाव कर अंजाम दिया गया। बदलाव के पीछे की वजह सरकार के नए नियमों को बताया गया।

    घोटाले की कहानी शुरू होती है पांच अप्रैल 2012 को चिकित्सा शिक्षा के उपसचिव एसएस कुमरे द्वारा जारी किए उस पत्र से, जिसमें उन्होंने सरकार के नए नियमों का हवाला देते हुए व्यापम को पीएमटी आयोजित कराने को कहा गया। इसी पत्र पर 23 अप्रैल को व्यापम के संयुक्त नियंत्रक संतोष गांधी सक्रिय होते हैं। आनन-फानन में वह परीक्षा की निर्देशिका (रूल बुक) तैयार कर देते हैं। जिसके अनुसार परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन भरवाए जाने थे। ऑफलाइन के बजाय ऑनलाइन फॉर्म भरवाना साजिश का अहम हिस्सा था।Mann ki baat में बोले पीएम मोदी- छोटे बच्चों को भी देश की समस्याएं पता

    डॉक्टरों ने मुखौटे, ‘खराब हवा’ दिनों पर इनडोर गतिविधियों का आग्रह किया

    परीक्षा निर्देशिका में बदलाव के लिए नियंत्रक पकंज त्रिवेदी द्वारा केवल मौखिक निर्देश दिए गए। इस नीतिगत बदलाव को व्यापम की चेयरमैन रंजना चौधरी ने भी 23 अप्रैल को ही मंजूरी दे दी। इसके बाद ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। लेकिन, इसकी सूचना चिकित्सा शिक्षा विभाग, पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय जबलपुर को भी नहीं दी गई, जबकि विभाग व विवि के द्वारा पारित नियमों में यह स्पष्ट था कि परीक्षा फॉर्म ऑफलाइन ही भरवाए जाने हैं। इसके बाद परीक्षा ऑनलाइन करने के लिए फाइल 25 अप्रैल को प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा को भेज दी गई।

    यहां घोटाले की साजिश को अंतिम रूप दिया गया। नितिन महिंद्रा यह जानता था कि परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन भरवाए गए तो सवाल खड़े हो जाएंगे, क्योंकि इस बदलाव के लिए कार्यकारी परिषद की मंजूरी आवश्यकता थी। लिहाजा 26 अप्रैल को इसमें भी नियंत्रक पकंज त्रिवेदी ने रास्ता निकाला और निर्देशिका में भी बिना चेयरमैन रंजना चौधरी की मंजूरी लिए बदलाव कर दिया। यह बदलाव परीक्षा फॉर्म में 25 से 30 शब्द आवेदक से लिखवाकर ऑनलाइन भरवाने का किया गया, ताकि बगैर किसी बाधा के परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन लिए जा सकें। इसके बाद 30 अप्रैल 2012 को परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया गया।
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  • डॉक्टरों ने मुखौटे, ‘खराब हवा’ दिनों पर इनडोर गतिविधियों का आग्रह किया

    डॉक्टरों ने मुखौटे, ‘खराब हवा’ दिनों पर इनडोर गतिविधियों का आग्रह किया

     

     

  • 1000 crore सट्टा लगाया जा रहा गुजरात चुनाव पर

    नई दिल्ली। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सट्टेबाजों का कहना है कि भाजपा साल 2012 में पाई जीत को दोहरा नहीं सकती, लेकिन वह जीतेगी इसके पूरे आसार दिख रहे हैं। हालांकि देश में सट्टेबाजी गैरकानूनी है, लेकिन क्रिकेट ही नहीं अब चुनाव में जीत-हार पर भी इसका काला खेल अपनी जड़े मजबूत कर चुका है। इस बार करीब 1000 करोड़ रुपये का काला कारोबार गुजरात चुनाव में खेला जा सकता है। गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत-हार पर सट्टेबाजों की भी नजर है। सट्टेबाजों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य की सत्ता पर फिर काबिज होगी। सट्टेबाजों का दावा है कि भाजपा इस बार 118 से 120 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। वहीं कांग्रेस को 80 से 100 सीटें मिल सकती है।

    सट्टेबाजों के रेट के मुताबिक अगर भाजपा पर 1 रुपया लगाया जाता है तो उसका 1 रुपये 25 पैसे मिलेंगे, वहीं कांग्रेस पर ये रेट 1 रुपये पर 3 रुपये है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस की हार का खतरा नवंबर में ज्यादा उछल रहा था, इसलिए उस समय रेट 1 रुपये लगाने 7 रुपये मिलने का चल रहा था।

    जिन पार्टियों की जीत के यहां कम उम्मीद है उनमें आम आदमी पार्टी (आप) और शिव सेना शामिल हैं, इसलिए आप की जीत के लिए 1 रुपये पर 25 रुपये और शिवसेना के लिए 30 रुपये दिए जा रहे हैं। एक सट्टेबाज का कहना है कि चुनाव के नजदीक आने और भाजपा-कांग्रेस का प्रदर्शन जितना बेहतर होगा वैसे ही ये रेट बदलते रहेंगे। बताया जा रहा है कि हार्दिक के कांग्रेस को समर्थन दिए जाने के बाद रेट्स में कई बदलाव आए हैं।

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    सट्टेबाजों का यह भी कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी ने गुजरात की कई जगहों में भाजपा की पकड़ को कमजोर किया है। एक सट्टेबाज ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से शहरी इलाकों में भाजपा कमजोर हुई है और ये उसे नीचे भी गिरा सकता है।

  • सर्दियों में पालतू गर्म रखने के लिए एक स्तरित दृष्टिकोण

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