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  • गुजरात चुनाव: बीजेपी ने प्रत्याशियों की एक और लिस्ट जारी की, यहां पढ़ें

    गुजरात चुनाव: बीजेपी ने प्रत्याशियों की एक और लिस्ट जारी की, यहां पढ़ें

     

     

    गुजरात चुनाव के लिए बीजेपी ने शुक्रवार को प्रत्याशियों की एक और लिस्ट जारी कर दी है. बीजेपी की केंद्रीय चुनाव कमेटी ने 13 सीटों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की है.

    इस लिस्ट में 4 लोगों को रिपीट किया गया है. इसमें पंकज देसाई, वल्लभ काकडिया, रणछोड़ रबारी और नरान पटेल को दोबारा प्रत्याशी बनाया गया है. बता दें कि नारान पटेल ने कहा था कि वह चुनाव लड़ना नहीं चाहते. लेकिन बीजेपी ने फिर भी उन्हीं को उम्मीदवार बनाया है. नारान पटेल की उम्र 75 साल से ज्यादा है.

    हितु कनोडिया को भी टिकट मिला है. वह गुजरात के जानेमाने फिल्म एक्टर नरेश कोनडिया के बेटे हैं. वह मॉर्डन गुजराती फिल्मों में एक्टर हैं. उनके चाचा महेश कनोडिया पाटन जिले से एमपी हैं.

    विधानसभा सीट                                                                               प्रत्याशी1. धानेरा                                                                                       मावजीभाई देसाई (रबारी)
    2. वडगाम (एससी)                                                                        विजयभाई हरखाभाई चक्रवर्ती
    3. पाटण                                                                                       रणछोड़भाई रबारी
    4. उंझा                                                                                         नारायणभाई एल. पटेल
    5. कडी (एससी)                                                                             करशनभाई पुंजाभाई सोलंकी
    6. विजापुर                                                                                     रमणभाई पटेल
    7. इडर (एससी)                                                                            हितेशभाई कनोडिया
    8. दहेगाम                                                                                    बलराजसिंह कल्याणसिंह चौहाण
    9. माणसा                                                                                    अमितभाई चौधरी
    10. ठक्करबापानगर                                                                     वल्लभभाई जी काकडीया
    11. धंधुका                                                                                   कालुभाई डाभी
    12. नडीयाद                                                                                 पंकजभाई देसाई
    13. कालोल                                                                                  सुमनबेन प्रविण सिंह चौहाण

  • यूथ कांग्रेस के ट्वीट पर गुजरात के चाय वाले क्यों हैं खफा?

    यूथ कांग्रेस के ट्वीट पर गुजरात के चाय वाले क्यों हैं खफा?

     

     

    राजकोट से द्वारका जाने के क्रम में जामनगर के फल्ला गांव में सड़क किनारे एक चाय की दुकान पर चाय पीने के लिए हम बैठे तो वहां चर्चा चाय वाले की होने लगी. चुनावी माहौल में जामनगर हाईवे पर ही मौजूद चाय वाले हरपाल सिंह ने बिना लाग लपेट के कह दिया, ‘मोदी शिवभक्त हैं, राष्ट्रभक्त हैं, उनके खिलाफ कांग्रेस के लोग अपमान वाली बात बोलते हैं तो गुस्सा आता है, दर्द होता है.’

    यह गुजरात के भीतर एक चाय वाले का गुस्सा था जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस के एक ट्वीट के जवाब के तौर पर सामने आ रहा था. यूथ कांग्रेस के विवादित ट्वीट को हालांकि बाद में हटा दिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाय वाला बताकर उनका मजाक उड़ाया गया था. लेकिन उस ट्वीट ने गुजरात की राजनीति में बवाल मचा दिया है.

    लेकिन इस तरह का भाव केवल चाय वाले का ही नहीं था. चाय पीने आए बाकी लोग भी इस बात को मान रहे थे कि इस तरह की भाषा ठीक नहीं. कांग्रेस को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा.

    चाय पीने आए नारायण भाई जाटिया ने कहा, ‘उम्मीदवार कोई भी आवे, मत भाजप में दीता. मोदी ने वोट आपसू, कांग्रेस ने आपो जवाब आपो जो से, जे आवस्तु बोइला छे, ए नो जवाब पब्लिक आपसे.’नारायण भाई का कहना था- उम्मीदवार कोई भी आवे हम वोट तो बीजेपी को ही देंगे. लेकिन, मोदी के बारे में जो कांग्रेस बोल रही है उसका जवाब पब्लिक देगी.

    कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया हमें जामनगर शहर और आगे देवभूमि द्वारका में भी देखने को मिली. अहीर समाज के भीकाजी भाई ने द्वारका में कहा कि निजी तौर पर हमला कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है.
    कुछ यही हाल अहमदाबाद और बाकी इलाकों में भी देखने को मिला. वहां भी आम गुजराती के साथ-साथ चाय वाले भी, चाय वाला बताकर प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ाने वाले कांग्रेस के उस ट्वीट को लेकर नाराज दिखे.

    मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं बीजेपी
    गुजरात चुनाव के बीच मंझधार में बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं. चुनाव के वक्त ही कांग्रेस अध्यक्ष बनने जा रहे राहुल गांधी पहले से ही अपने कार्यकर्ताओं को नसीहत दे रहे थे कि प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर कोई निजी हमला नहीं करें. लेकिन, उनके उपदेश का असर नहीं हुआ. कांग्रेस ने यहीं गलती कर दी, जिसे लपकने के लिए बीजेपी पहले से ही तैयार बैठी थी.

    22 साल से गुजरात की सत्ता में काबिज बीजेपी को इस बार चुनाव में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में बीजेपी अपने गेम प्लान के मुताबिक पहले से इस बात की तैयारी में है कि कांग्रेस कोई गलती करे और फिर वही गलती गेम चेंजर हो जाए.

    गलतियों से सबक नहीं लेती कांग्रेस
    बीजेपी के रणनीतिकारों को 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर का वह बयान आज भी याद है जब अय्यर ने कांग्रेस अधिवेशन के दौरान मोदी को बाहर टी-स्टाल लगाने के लिए कहा था. बीजेपी ने इस बयान को गरीबों के खिलाफ कांग्रेस की सोच के तौर पर लपक लिया. नतीजा कांग्रेस सफाई देती रह गई लेकिन, कोई सुनने वाला नहीं मिला.

    2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव के वक्त भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जब मौत का सौदागर वाला बयान दिया था तो उस वक्त भी बीजेपी इसे लपक ले गई. मोदी ने इस बयान को सीधे गुजरात की अस्मिता से जोड़ दिया और नतीजा कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी.

    इस विवादित ट्वीट के सामने आते ही गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी से लेकर बीजेपी के सभी बड़े नेता सामने आ गए. प्रधानमंत्री मोदी के अपमान को बीजेपी सीधे गरीबों का अपमान बता रही है. गुजराती अस्मिता से जोड़कर बीजेपी एक बार फिर से अपने पाले में कांग्रेस को खेलने पर मजबूर कर रही है. सूरत में इस बात का नजारा दिखा जब दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजेंदर बग्गा ने सूरत में कांग्रेस के दफ्तर के बाहर पहुंचकर चाय बांटना शुरू कर दिया. बीजेपी की तरफ से इस बात का अनोखा विरोध प्रदर्शन हो रहा है. बीजेपी इस मुद्दे को किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने देना चाहती. उसे तो लग रहा है जैसे उसे वो सब मिल गया जिसका इंतजार वो लंबे वक्त से कर रही थी.

    हालांकि कांग्रेस डैमेज कंट्रोल की पूरी कोशिश में है. लेकिन अभी भी उसकी तरफ से कहा जा रहा है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. गुजरात कांग्रेस के सचिव पाल भाई बातचीत के दौरान कहते हैं, ‘कार्टून का कोई फर्क नहीं पड़ेगा. जब तक नरेंद्र मोदी यहां थे तब तक बीजेपी मजबूत थी. लेकिन, अब बीजेपी बिखर रही है. उसके कई सांसद टिकट बंटवारे के बाद नाराज हैं जबकि विजय रुपाणी, आनंदी बेन पटेल और नितिन पटेल का अलग-अलग गुट बना हुआ है.’

    लेकिन लगता है कांग्रेस यहीं गलती कर रही है. कांग्रेस गुजरात चुनाव में उस नब्ज को नहीं पकड़ पा रही है जहां से माहौल को अपने पक्ष में बदला जा सके. अपने-आप को फक्र के साथ चायवाला बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी रैलियों में जब इस पर कांग्रेस को घेरेंगे तो उस वक्त कांग्रेस के लिए जवाब देना मुश्किल होगा. लगता है इस बार भी कांग्रेस सेल्फ गोल मारने की अपनी आदत से बाज नहीं आने वाली है.

    (फर्स्टपोस्ट के लिए अमितेश और पल्लवी रेब्बाप्रगाडा)

  • पद्मावतीः जयपुर के किले पर लटका मिला शव, पत्‍थरों पर लिखा- हम पुतले नहीं जलाते

    पद्मावतीः जयपुर के किले पर लटका मिला शव, पत्‍थरों पर लिखा- हम पुतले नहीं जलाते

     

     

    राजस्थान में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ का विरोध खूनी रूप लेता जा रहा है. शुक्रवार को जयपुर के नाहरगढ़ किले पर एक शख्स की लाश लटकती हुई मिली है. दीवार पर फिल्म ‘पद्मावती’ के विरोध में मैसेज भी लिखे हैं.

    जिस जगह पर लाश लटकी मिली है, उसके नजदीक पत्थर पर लिखा है- ‘हम पुतले नहीं जलाते, लटकाते हैं.’ वहीं, दूसरे पत्थर पर लिखा है- ‘पद्मावती का विरोध’.

    पुलिस के मुताबिक, लाश की शिनाख्त चेतन सैनी के रूप में हुई है. पुलिस को उसकी जेब से पुलिस को मुंबई की एक फिल्म का टिकट भी मिला है. पहुंची पुलिस ने लाश को किले से उतार लिया है. इसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है.

    पद्मावती फिल्म से जुड़ी धमकियां जो पत्थर पर लिखी मिली हैं, वो इस व्यक्ति से संबंधित है या नहीं, यह कहना मुश्किल है.

    लाश की नहीं हुई शिनाख्त.

    दिल्ली हाईकोर्ट ‘पद्मावती’ पर बैन लगाने वाली याचिका खारिज
    उधर, दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘पद्मावती’ फिल्म पर बैन लगाने वाली याचिका खारिज कर दी है. हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की याचिकाओं को लगाकर आप हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं. कोर्ट ने कहा, ‘अभी मामला सेंसर बोर्ड के पास पेंडिंग है. जब इस तरह की याचिका सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है, तो सुनवाई की जरूरत नही है, इसलिए हम इस याचिका को ख़ारिज कर रहे हैं.’

    यूके पहुंचा पद्मावती विवाद

    संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ पर मचा बवाल अब यूनाइटेड किंगडम पहुंच गया है. लंदन में राजपूत ग्रुप ब्रिटिश सेंसर बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा है.

    पत्थर पर लिखा स्लोगन.

    यूनाइटेड किंगडम में राजपूत सेना के अध्यक्ष महेंद्र सिंह जडेजा ने ‘सीएनएन न्यूज 18; से बात करते हुए कहा, ‘हम राजपूत समाज के लोग पद्मावती को लेकर बहुत चिंतित हैं. हमने बीबीएफसी को लेटर लिखा है. हम योजना बना रहे हैं कि फिल्म को यूके में भी रिलीज होने न दें. इसके लिए कैंपेन और प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं.’

    लाश को उतारती पुलिस.

    बता दें कि ब्रिटिश सेंसर बोर्ड ने फिल्म को बिना किसी कट के पास कर दिया है और एक दिसंबर से रिलीज को हरी झंडी दे दी है.ब्रिटिश सेंसर बोर्ड ने फिल्म को 12 A रेटिंग दी है. इसका मतलब है कि फिल्म को 12 साल से कम उम्र के बच्चे किसी बालिग व्यक्ति के साथ ही देख सकेंगे. हालांकि, लंदन राजपूत समाज ने ब्रिटिश सेंसर बोर्ड को चिट्ठी लिखी है और अपने निर्णय पर दोबारा विचार करने को कहा है.

    करणी सेना सहित कई राजपूत ग्रुप फिल्म के विरोध में हैं. उनका मानना है कि इसमें इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया गया है. हालांकि, पद्मावती को बनाने वाली ‘वायकॉम 18’ ने कहा है, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) से क्लियर हुए बिना फिल्म को ग्लोबल लेवल पर रिलीज करने की कोई योजना नहीं है.

    किले की दीवार पर लिखा स्लोगन.

    पीटीआई ने उसके एक सोर्स के हवाले से कहा है, फिल्म को यूके सेंसर बोर्ड ने बिना किसी कट के रिलीज कर दिया है. लेकिन, भारत में इसे सेंसर क्लियरेंस का इंतजार है. इसके बाद ही आगे इस पर कोई विचार होगा.

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  • ज्योतिष ने की भविष्यवाणी, तो क्या सच में मोदी को है जान का खतरा ?

    Prime Minister Narendra Modi  द्वारा काले धन के मुद्दे पर अपनी जान के खतरे को लेकर जो बयान दिया है, वो जान का खतरा प्रधानमंत्री बनने के बाद से नहीं बल्कि उस दिन से है जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। प्रधानमंत्री बनने से पहले भी नरेंद्र मोदी को जान का खतरा था. दो बार उन्हें जान से मारने का प्रयास किया गया है। लेकिन दोनों ही बार मोदी को मारने की साजिश कामयाब नहीं हुई। सबसे पहले वर्ष 2004 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उनको मारने की साजिश हुई थी।

    क्या कहती है उनकी कुण्डलीः

    नरेंद्र मोदी का जन्म 17.9.1950 में मेहसाणा में हुआ था। उनकी राशी वृश्चिक है, और पंडितों के अनुसार उनकी राशी में शनि का गोचर है। उनकी कुण्डली में चन्द्रमा नीच का एवं मंगल उसके साथ ही स्थित है। नरेंद्र मोदी का शनि गोचर बहुत जल्द उतरने वाला है। एक भविष्य वाणी के अनुसार मोदी का शनि गोचर 27.1,2017 को उतर जाएगा। और जैसे ही शनि मोदी की कुण्डली से निकाशी करेगा वैसे ही मोदी पहले से भी ज्यादा प्रभावशाली नेता बन जाएगे। और आगे आने वाले राज्यों के चुनाव में उनकी पार्टी को उनकी वजह से ज्यादा सफलताएं प्राप्त होंगी।

    आज दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा नरेंद्र मोदी की होती है। नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नोट-बंदी करके भारत की मीडिया में ही नहीं विश्व भर की मीडिया में खूब सुर्खियाँ बटोरी है। यहाँ तक की पाकिस्तान की मीडिया भी मोदी की तारीफ में चुकी नहीं। एक रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र मोदी के नोट बंद करने के बाद उनकी जान को बहुत ही ज्यादा खतरा बढ़ गया है। योग गुरु बाबा रामदेव ने भी कुछ नाम बताये थे जिनकी वजह से नरेंद्र मोदी की जान को खतरा है। खतरा अभी का नहीं है!

    पहले भी हमले हो चुके है मोदी पर
    शायद आप समझ रहे होंगे की नरेंद्र मोदी पर अभी जान का खतरा बढ़ा है तो आपको यह गलतफहमी हो सकती हैं। नरेंद्र मोदी की जान को खतरा तब से है जब वो गुजरात के प्रधानमन्त्री हुआ करते थे। आपको शायद याद होगा 2002 में एक गुजरात दंगा हुआ था। 2002 के दंगे के बाद नरेंद्र मोदी के दुश्मनों की संख्या बढती गई। नरेंद्र मोदी ने फिर भी हार नहीं मानी और अपने काम में लगे रहे पर इसी बीच मोदी के दुश्मन निरंतर बढ़ते गये।1-ीउसं

    2004 में हुआ था पहला हमला
    नरेंद्र मोदी पर 2004 में पहला हमला हुआ जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उसके बाद नरेंद्र मोदी पर एक और हमला किया गया पर मोदी पर हमला करने में दोनों कोशिश बेकार गई। अमेरिकी आंतकवादी डेविड हेडली ने शिकागो में भारतीय अधिकारीयों को बताया की गुजरात मुठभेड़ में मारी जाने वाली इशरत जहाँ, आंतकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की सदस्य थी। और उसे नरेंद्र मोदी को मारने के लिए भेजा गया था।
    पटना में हुआ दूसरा हमला दृ नरेंद्र मोदी को मारने के लिए दुश्मनों ने प्रयास तो बहुत किये है। आपको याद होगा की 2014 में जब नरेंद्र मोदी पटना में रैली करने गये तब, गाँधी मैदान में लगातार बम फटे, पर नरेंद्र मोदी की जान बच गई थी। ऐसे में मोदी की आज भी सेक्युरिटी सबसे ज्यादा है।

     

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  • अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग योजना

    अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग योजना

     

     

  • कांग्रेस ने PM मोदी को बताया सीरियल एब्यूजर

    कांग्रेस ने PM मोदी को बताया सीरियल एब्यूजर

     

     

    कांग्रेस ने पीएम मोदी पर बार बार अपशब्द कहने और भाजपा पर अशिष्ट बयानों की जननी होने का आरोप लगाया है. कांग्रेस ने मांग की है कि सार्वजनिक विमर्श की गरिमा को गिराने के लिए सत्तारूढ़ दल को माफी मांगनी चाहिए.

    उधर सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई और कहा कि मोदी विपक्ष की हमलों का शिकार हैं. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने यहां मोदी पर सीरियल एब्यूजर होने का आरोप लगाया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बहरहाल, उन्हें यह उम्मीद नहीं है कि, भाजपा माफी मांगेगी क्योंकि उसने विगत में ऐसा कभी नहीं किया.

    सिंघवी का यह हमला भाजपा नेताओं के विवादास्पद बयानों की पृष्ठभूमि में है. इस कड़ी में भाजपा सांसद परेश रावल ने भी एक विवादास्पद ट्वीट कर बाद में उसे वापस ले लिया था. सिंघवी ने कहा, भाजपा अशिष्ट, अशोभनीय, अपमानजनक बयानों की जननी है. निरंतर आपत्तिजनक बयानबाजी करने वाली भाजपा ने आज तक अपनी किसी भी अभद्र टिप्पणी के लिए माफी नहीं मांगी है.

    कांग्रेस प्रवक्ता ने अपनी बात के समर्थन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पूर्व में कथित रूप से दिये गये अपमानजनक बयानों का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ‘नाइट वाचमैन’, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को ‘जर्सी गाय’ तथा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ‘संकर बछड़ा’ बताया था. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को ‘‘दीमक’’ करार दिया था.सिंघवी ने कहा, प्रधानमंत्री इन अपशब्दों का प्रयोग करते हैं और उनके मंत्री गण इस पर ताली बजाते हैं. क्या यही राजनीतिक शुचिता का पर्यायवाची है? क्या यही स्वच्छ अभियान है राजनीतिक शुचिता का. क्या भाजपा को इस पर माफी नहीं मांगनी चाहिए? उन्होंने इसी सिलसिले में परेश रावल एवं भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष नित्यानंद राय द्वारा दिये बयानों का भी हवाला दिया.

    प्रधानमंत्री की पृष्ठभूमि को लेकर युवा कांग्रेस से जुड़े ट्विटर हैंडल की एक विवादास्पद मीम के जवाब में रावल ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा था, चायवाला आपके बारवाला से सदा ही बेहतर है. राय ने कहा था कि जो भी हाथ या अंगुली प्रधानमंत्री की ओर उठेगी उसे काट दिया जाएगा. बहरहाल, बाद में रावल और राय ने अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांग ली थी.

    सिंघवी ने इस बात पर बल दिया कि कांग्रेस ने सार्वजनिक विमर्श की मर्यादा को हमेशा बरकरार रखा है और उसके एवं भाजपा के बीच भारी अंतर है. उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे मीम विवाद में कांग्रेस ने माफी मांग ली.

    उधर, भाजपा ने इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया जतायी.  केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा, आजादी के बाद यदि किसी को सबसे अधिक परेशान किया गया है, तो वह हैं नरेन्द्र मोदी. वह पीड़ित हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को मौत का सौदागर कहा जबकि उनके बेटे राहुल गांधी ने मोदी पर ‘खून की दलाली ’ करने का आरोप लगाया. प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ ‘नीच’ शब्द का इस्तेमाल किया.

  • भीम सेना की राजधानी कैपिटल

    भीम सेना की राजधानी कैपिटल

     

     

  • 50 मिनट में 3 पराठे खाने पर इस जगह आपकों जिंदगीभर मिलेगा फ्री खाना

    नई दिल्ली। पराठे का नाम सुनकर ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. खाने पीने के शौकिन लोगों के लिए दिल्ली रोहतक बाइपास रोड पर मौजूद तपस्या पराठा जंक्शन पर पराठे को लेकर चैलेंज दिया जा रहा है. अगर आप इस चैलेंज को पूरा कर लेते है तो आपको उम्रभर खाना फ्री मिलेगा. । तपस्या पराठा जंक्शन में आपको यहां आलू के पराठे से लेकर प्याज के पराठे तक खाने को मिलेंगे. चैलेंज यह है कि आपको 50 मिनट में 3 पराठे खाने होगे. लेकिन ये चैलेंज पूरा करना इतना आसान नहीं है. अगर आप इस चैलेंज को पूरा कर लेते है तो उम्रभर आपको फ्री खाना मिलेगा. अब तक कई लोग इस चैलेंज को ट्राइ कर चुके हैं, लेकिन ज्यादातर असफल ही हुए हैं. इस दुकान में हिंदुस्तान का सबसे बड़ा पराठा मिलता है, जिसका साइज 1 फुट 6 इंच है. इस दुकान में पराठे देसी घी में बनाए जाते हैं. इसके चलते ये काफी हेवी हो जाते हैं, इसलिए कोई भी व्यक्ति आसानी से 3 पराठे नहीं खा सकता. ये दुकान लगभग पिछले 10 सालों से चल रही हैं. लेकिन आज तक इस चैलेंज को कोई भी पूरा नहीं कर पाया है.।

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  • केंद्रीय मंत्री ने कहा, हार्दिक को आरक्षण चाहिए तो मेरे या पीएम के पास आएं

    केंद्रीय मंत्री ने कहा, हार्दिक को आरक्षण चाहिए तो मेरे या पीएम के पास आएं

     

     

    गुजरात चुनाव में आरक्षण के मुद्दे पर पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने कांग्रेस को समर्थन करने का ऐलान कर दिया है. हार्दिक के समर्थन पर जमकर सियासत हो रही है. बीजेपी के कई बड़े नेता दावा कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के मुताबिक 50 फिसदी से ज्यादा आरक्षण मुमकीन नहीं है.

    गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितीन पटेल ने तो आरक्षण के मुद्दे पर हार्दिक को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से मुर्ख तक कह दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में पाटीदारों को आरक्षण देना मुमकीन है? और क्या केंद्र में विपक्ष में बैठी कांग्रेस ऐसा कर पाएगी? इन्हीं सवालों के बीच एनडीए सरकार के एक मंत्री ने हार्दिक को आरक्षण देने का दावा किया है.

    आरक्षण चाहिए तो मेरे पास आएं हार्दिक
    एनडीए सरकार में केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने न्युज 18 इंडिया से बातचित में कहा कि पाटीदारों को आरक्षण मिले ये मेरी मांग है जो मैं बरसों से उठा रहा हूं. मैं हार्दिक को कहना चाहता हूं कि कांग्रेस को समर्थन करने से पाटीदारों को आरक्षण नहीं मिलेगा. आरक्षण के लिए हार्दिक को प्रधानमंत्री और मेरे पास आना होगा. हमसे बातचित करना पड़ेगा. हम संसद में आरक्षण का प्रस्ताव लाएंगें.आठवले के मुताबिक, कांग्रेस को समर्थन का ऐलान कर हार्दिक ने साफ कर दिया है कि उसे आरक्षण से कोई लेना देना नहीं है. आरक्षण चाहिए तो हार्दिक अपनी भुमिका बदलें. संसद में मैं उनके लिए लडुंगा. आठवले ने भरोसा दिलाया कि वह 75 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में हैं. SC,ST,NT,OBC के 50 पर्सेंट के बाद बचे हुए 25 पर्सेंट अतिरिक्त आरक्षण समाज के उस तबके को देना चाहिए जो सामाजिक और आर्थिक तौर पर कमज़ोर हैं.

  • दिल्ली में यहां बरसों से सो रहा है अलाउद्दीन खिलजी!

    दिल्ली में यहां बरसों से सो रहा है अलाउद्दीन खिलजी!

     

     

    संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर देशभर में हो रहे हंगामे के बीच अलाउद्दीन खिलजी फिर से सुर्खियों में है. जमाने भर में उसके नाम पर बवाल मचा है, लेकिन उसकी कब्र के करीब से लोगों का हुजूम खामोशी से गुजर जाता है. कब्र के चारों ओर लोग खड़े होकर दिल्ली सल्तनत के बिखरे पन्नों के साथ सेल्फी लेने में मशगूल हैं लेकिन किसी को खबर नहीं कि वो सामने ही अलाउद्दीन खिलजी अपनी कब्र में सोया हुआ है, जिसे वक्त की एक छोटी सी करवट ने शैतान बना दिया है.

    दक्षिणी दिल्ली में एक इलाका है महरौली और यहीं कुतुब मीनार है. ममलुक वंश के कुतुबुद्दीन ऐबक ने इस विशाल मीनार की आधारशिला रखी थी. कुतुब मीनार को देखने देस-परदेस से हजारों लोग रोजाना आते हैं. कुतुब मीनार से सटे परिसर में ‘अलाउद्दीन खिलजी का मदरसा’ है.

    मदरसे के बाहर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से एक पत्थर लगा है जिस पर कुछ यूं लिखा है, ‘ये चतुर्भुजीय अहाता जो ऊंची दीवारों से घिरा है, यह मूल रूप से एक मदरसा था जिसका प्रवेश द्वार पश्चिम में है. इसका निर्माण पारंपरिक तालीम देने के लिए अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316) द्वारा करवाया गया था. अहाते के दक्षिणी हिस्से के बीच में शायद खिलजी का मकबरा है. मदरसे के साथ ही मकबरे के चलन का यह हिंदुस्तान में पहला नमूना है. यह शायद सलजुकियान रवायत से मुत्तासिर है.’

    दोपहर होने को है….. उधर खिलजी अपनी कब्र में आराम फरमा रहे हैं और बगल से स्कूली बच्चे एक दूसरे का हाथ पकड़े जा रहे हैं. ढह चुकी इमारतों और पत्थरों के बीच से गुजरते ये बच्चे दक्षिणी दिल्ली के ही जल विहार इलाके के प्राइमरी स्कूल से आए हैं.बच्चों को नहीं मालूम कि किसकी कब्र है. उनके साथ चल रही उनकी मास्टरनी साहिबा को भी इल्म नहीं है कि उस कमरे के बीचों बीच कौन इतनी बेफिक्री से सोया हुआ है. जब उन्हें बताया गया कि ये पद्मावती वाले अलाउद्दीन खिलजी हैं तो वह कुछ हैरानी से कहती हैं, ‘ओहो, अच्छा तो ये है वो!’

    औरतबाज नहीं था खिलजी
    दिल्ली के इतिहास को अपने कदमों से नापने वाले स्तंभकार और आम आदमी के इतिहासकार आर वी स्मिथ से जब अल्लाउद्दीन खिलजी को लेकर बात हुई तो उन्होंने खिलजी का कुछ इस तरह बखान किया, ‘अलाउद्दीन खिलजी औरतबाज नहीं था, जैसा कि पद्मावती फिल्म में उसे दिखाया गया है. पद्मावती फिल्म ने एक ऐसे बादशाह की छवि को बिगाड़ कर रख दिया है जिसने मंगोलों से हिंदुस्तान की हिफाजत की. अगर अलाउद्दीन खिलजी नहीं होता तो आज हिंदुस्तान की शक्ल कुछ और होती.’

    ‘दिल्ली दैट नो वन नोज’ और ‘दिल्ली: अननोन टेल्स ऑफ अ सिटी’ जैसी किताबों के लेखक आर वी स्मिथ कहते हैं, ‘खिलजी ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए चित्तौड़ पर आक्रमण किया था, पद्मावती को जीतने के लिए नहीं. और चित्तौड़ के राजा रतन सिंह को हराने के बाद जब उन्होंने रानी पद्मिनी की खूबसूरती के चर्चे सुने तो वह उत्सुकतावश उसे देखना चाहता था.’ जैसा कि सब किस्सों कहानियों में सुनते आए हैं कि राजपूत रानी एक विशाल आईने के सामने आकर खड़ी हो गई और खिलजी ने उस आईने में केवल रानी पद्मिनी का अक्स देखा था.

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    अलाउद्दीन खिलजी की कब्र.

    स्मिथ कहते हैं कि खिलजी की मौत के करीब ढाई सौ साल बाद भक्तिकाल की निर्गुण प्रेमाश्रयी धारा के कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने ‘पद्मावत’ की रचना की और उसे रोचक बनाने के लिए उसमें बहुत सी काल्पनिक बातें जोड़ी. फिल्म उसी काल्पनिक कहानी पर आधारित है.

    वह इस आम धारणा को भी गलत बताते हैं कि अलाउद्दीन खिलजी के हाथों में पड़ने से बचने के लिए रानी पद्मावती ने जौहर किया था. वह राजपूत राजा रतन सिंह के जंग में हार जाने के बाद रवायत के चलते महल की बाकी महिलाओं के साथ चिता में कूद गई थी.

    लौह स्तंभ के पास खड़े एक गार्ड से जब खिलजी की दरगाह का पता पूछा तो उसने हाथ का इशारा किया लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि उसमें क्या खास बात है. पता चलने पर उनके चेहरे पर हैरानी कुछ इस तरह की थी, ‘अच्छा, ये वही अलाउद्दीन खिलजी है!’

    जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर राकेश बाताबयाल पद्मावती को लेकर छिड़े विवाद में कहते हैं कि इस विषय में इतिहासकारों के लिए कुछ बोलने की गुंजाइश ही नहीं बची है क्योंकि यह अभिव्यक्ति की आजादी, कलात्मकता और राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है.

    प्रोफेसर बाताबयाल कहते हैं, ‘हिस्ट्री इज प्रोडक्शन ऑफ नॉलेज लेकिन आज देश में ऐसी ताकतें पैदा हो गई हैं जो इतिहास को नहीं मानतीं.’ उनका कहना है कि इतिहास के ज्ञान के नाम पर जहालत इतनी है कि फिल्मों को ही इतिहास मान लिया जाता है. हमें यह समझना होगा कि फिल्म इतिहास नहीं है.

    खिलजी ने कालाबाजारी, लूट-खसोट बंद करवाई
    वह बताते हैं, ‘खिलजी दिल्ली का पहला ऐसा शासक था जिसने कालाबाजारी रोकने के लिए वस्तुओं के दाम तय किए और कीमतें घटाईं. साहूकारों की लूट-खसोट को रोकने के लिए उन्होंने घोड़ों को दागने की प्रथा की शुरूआत की.’ इतिहास बताता है कि अलाउद्दीन खिलजी ने अक्तूबर, 1296 में अपने चाचा जलालुद्दीन की हत्या धोखे से उस समय करवा दी थी जब वो उससे गले मिल रहे थे. उसने अपने सगे चाचा के साथ विश्वासघात कर खुद को सुल्तान घोषित कर दिया और दिल्ली में स्थित बलबन के लालमहल में अपना राज्याभिषेक 22 अक्तूबर, 1296 को सम्पन्न करवाया.

    दिल्ली के निजामुद्दीन बस्ती इलाके में स्थित बलबन का यह लाल महल भी ढह चुका है. घनी बस्ती के बीच लाल महल के निशान ढूंढ पाना मुश्किल है.

    ओकिडा जापान से आई हैं. अपने मित्र के साथ खिलजी के मदरसे की गिरती हुई दीवारों को देख रही हैं लेकिन वह भी बेखबर हैं कि सामने ये किसकी कब्र है? कब्र को चारों ओर से दीवारों ने घेर रखा है. मकबरे के गुंबद को वक्त के थपेड़े कब का उड़ा ले गए लेकिन बगल की एक दीवार पर किसी ने लिख दिया है, ‘गुड्डू लव्स रिंकी.’

    मदरसे के कोनों में कई और जोड़े खड़े हैं. ‘अबे, औरंगजेब ने बनवाई थी कुतुब मीनार.’ पास से कुछ बड़े स्कूली बच्चे एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखे जा रहे हैं. यह सुनकर खिलजी को बेहद सुकून मिला होगा कि जब कुतुब मीनार जैसी विशाल मीनार को बनवाने का सेहरा मुगल शासक औरंगजेब के सिर बांधा जा रहा है तो ऐसे में उसका गुमनाम रहना ही बेहतर होगा.

    (नरेश कौशिक की रिपोर्ट)

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