Category: national

  • केंद्रीय मंत्री ने कहा- पद्मावती की शान बढ़ाएगी भंसाली की फिल्म

    केंद्रीय मंत्री ने कहा- पद्मावती की शान बढ़ाएगी भंसाली की फिल्म

     

     

    एक तरफ जहां पूरे देश में संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के खिलाफ आंदोलन हो रहें हैं और दीपिका पादुकोण और भंसाली को जान से मारने की धमकीयां मिल रही हैं. तो दूसरी तरफ सत्तारुढ़ बीजेपी के कई बड़े नेता दावा कर रहे हैं कि फिल्म से राजपूतों की भावनाएं आहत होंगी. वहीं एक ऐसा भी नेता है जिसे लगता है कि पद्मावती के शौर्य और त्याग को दिखाने के लिए ये फिल्म दिखाना बहुत जरूरी है.

    ये नेता कोई और नहीं बल्कि मोदी सरकार में केंद्रीय समाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले हैं. आठवले ने न्युज 18 इंडिया से एक्सक्लुसीव मुलाकात में कहा कि वह डायरेक्टर भंसाली के साथ हैं. वह बड़े डायरेक्टर-प्रोड्युसर हैं. फिल्म को बनाने में उन्होंने बहुत मेहनत की है. ढेर सारा पैसा भी खर्च हो चुका है. ऐसे में कुछ भी बड़ा फैसला लेने से पहले जरूर सोचें.

    रामदास आठवले ने कहा, फिल्म को दिखाना या न दिखाना सरकार के हाथ में नहीं हैं. फिल्म पर अंतिम मुहर भी सेंसर बोर्ड लगाएगा. सब कुछ सेंसर बोर्ड के हाथ में ही है.

    बहुत शानदार फिल्म है पद्मावतीआठवले ने कहा, फिल्म के कलाकारों को धमकी देना बहुत गलत है. मुझे उम्मीद है कि भंसाली की फिल्म से पद्मावती की शान बढ़ेगी. बस भंसाली इस फिल्म में दिखाए गए विवादित सीन को कट कर दें. क्योंकि ये पद्मावती की इमेज बढ़ाने वाली फिल्म है. फिल्म पर लग रहे बैन पर आठवले ने कहा कि बीजेपी को चुनाव में इससे वोट मिले या न मिले, लेकिन पद्मावती का अपमान नहीं होना चाहिये.

     

  • वैदिक का फिल्म रिव्यू: ‘पद्मावती देखकर खुश हो जाएंगे राजपूत’

    वैदिक का फिल्म रिव्यू: ‘पद्मावती देखकर खुश हो जाएंगे राजपूत’

     

     

    (वेद प्रताप वैदिक)

    पद्मावती मुझे काफी अच्‍छी फिल्‍म लगी. पहली बात तो इसमें हमारी संस्‍कृति का परिचय मिलता है. दूसरी, सुंदर वेशभूषा, आभूषण, सजावट, युद्ध के प्रचंड दृश्‍य दिखाई देते हैं. ये ऐसी फिल्‍‍म है कि ढाई-तीन घंटे तक ध्‍यान भटकता नहीं है, टिका रहता है. फिल्‍म की कहानी बांधे रखती है. ऐसा लगता है कि फिल्‍म देखते रहें और इसमें डूबे रहें.

    हालांकि ये फिल्‍म शुरू से ही विवादों के घेरे में रही है. लेकिन फिल्‍म देखने के बाद मैं कह सकता हूं कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है. एक भी ऐसा दृश्‍य नहीं कि विवाद किया जाए. कुछ समय पहले पद्मावती और खिलजी के बीच किसी ड्रीम सीक्‍वेंस की बात कही गई और प्रेम प्रसंग के दृश्‍यों की अफवाह उड़ने के बाद बवाल शुरू हुआ था लेकिन जहां तक मेरा मानना है, फिल्‍म में ऐसा कुछ भी नहीं है.

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    रानी पद्मावती को लेकर करणी सेना और राजपूत संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं.

    मैं दावे से कह सकता हूं कि जब राजपूत संगठन इस फिल्‍म को देखेंगे तो वो खुशी से गदगद हो जाएंगे. यहां तक कि फिल्‍म देखने के बाद राजपूत संगठन और विरोध कर रही करणी सेना के लोग इस फिल्‍म के निर्माता-निर्देशकों और किरदार निभा रहे अभिनेता-अभिनेत्री को बधाई देंगे. इसमें राजपूतों का गौरव दिखाया गया है. राजा रतन सिंह को बहादुर, साहसी और उदार राजा दिखाया गया है.

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    फिल्‍म में खिलजी का किरदार बेहद ही वीभत्‍स दिखाया गया है. खिलजी को ठग, हत्‍यारा और धूर्त दिखाया गया है.

    जबकि खिलजी का किरदार इतना वीभत्‍स दिखाया है कि देखकर घृणा हो जाए. उसे आक्रामक, स्‍वार्थी, धूर्त ठग, हत्‍यारा, जाहिल किस्‍म का दिखाया गया है. वो अपने चाचा की हत्‍या करता है, चचेरी बहन से शादी करता है, जिसे गुरु मानता है उसे ही मार देता है. खिलजी के ऐसे चित्रण के बाद राजा और रानी का किरदार इसमें और भी ऊंचा हो गया है.

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    पद्मावती और राजा रतन सिंह के किरदार में दीपिका और शाहिद

    जहां तक बात पद्मावती की है तो वो इस फिल्‍म में देवी की तरह स्‍थापित होती हैं. मलिक मोहम्‍मद जायसी के पद्मावत और इतिहास के विभिन्‍न लेखों में पढ़ा था कि पद्मावती अप्रतिम सुंदरी थीं, लेकिन इस फिल्‍म से पता चलता है कि वो महान रणनीतिकार भी थीं. वो एक वीर-बहादुर महिला थीं. इस फिल्‍म में दिखाया गया है कि वो अपने 700 सैनिकों को लेकर खिलजी के पास जाती हैं और बंदी राजा रतन सिंह को छुड़ा लाती हैं.

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    पद्मावती फिल्‍म में रानी पद्मावती की छवि और खिलजी के साथ दृश्‍यों की अफवाह पर बवाल पैदा हुआ.

    पूरी फिल्‍म में पद्मावती का सामना खिलजी से सिर्फ एक बार ही होता है. वहीं एक बार वो राजा रतन सिंह की मांग पर अतिथि बनकर आए खिलजी को दर्पण में मुख दिखाती हैं, वो भी कुछ ही सेकेंड का दृश्‍य है. इस मूवी में कुछ भी अश्‍लील या फूहड़ नहीं है. यहां तक कि घूमर नृत्‍य दिखाते वक्‍त भी ध्‍यान रखा गया है कि महल में सिर्फ महिलाएं ही हों.

    ये फिल्‍म राजपूतों की शान की तरह है. इसका अंदाजा लोगों को तभी होगा, जब वो इसे देखेंगे.

    (वेद प्रताप वैदिक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं, इन्‍होंने हाल ही में एक निजी स्‍क्रीनिंग के दौरान पद्मावती फिल्‍म देखी है. Hindi.News18.com फिल्म पर वैदिक के विचारों को आप तक पहुंचा रहा है. )

    (प्रिया गौतम से बातचीत पर आधारित)

  • स्कूल यौन शोषण मामला: बाल अधिकार आयोग ने प्रिंसिपल को समन भेजा

    स्कूल यौन शोषण मामला: बाल अधिकार आयोग ने प्रिंसिपल को समन भेजा

     

     

    दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने उस निजी स्कूल के प्रिंसिपल और स्टाफ के तीन सदस्यों को समन भेजा है जहां चार
    साल की लड़की का उसकी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ने कथित तौर पर
    यौन शोषण किया.

    लड़की की मां ने बुधवार को पुलिस से संपर्क किया था और उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को उसकी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ने अनुचित तरीके से छुआ. लड़की की मां के अनुसार, जब लड़की स्कूल से लौटी तो उसने अपने गुप्तांग में दर्द होने की शिकायत की. उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसके साथ यौन शोषण होने की पुष्टि की.

    स्कूल को भेजे गए नोटिस में कहा गया है, ‘आयोग को आपके स्कूल में एक नाबालिग के यौन शोषण के संबंध में एक शिकायत मिली है. मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आपको 27 नवंबर को आयोग के समक्ष पेश होने और दो संबंधित शिक्षकों तथा आया को साथ में लाने के लिए कहा जाता है.’

    मां की शिकायत के आधार पर द्वारका (दक्षिण) पुलिस थाने में एक मामला दर्ज़ कराया गया है. स्कूल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का मामला दर्ज़ किया गया है. बहरहाल, स्कूल प्रशासन ने बच्ची की मां के दर्ज़ कराई गई शिकायत में लापरवाही और सहयोग ना करने के आरोपों को खारिज़ किया है.स्कूल के कानूनी सलाहकार आर राजापा ने कहा, ‘हम पुलिस के साथ सहयोग कर रहे हैं और हमसे मांगी गई वीडियो फुटेज तथा अन्य सबूत उन्हें दे दिए गए हैं. कथित घटना की जांच में मदद करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.’ आयोग ने पुलिस थाना प्रभारी को सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देने के लिए भी नोटिस जारी किया है.

  • असम के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- ‘भगवान का न्याय है कैंसर’, चिदंबरम ने दिया जवाब

    असम के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- ‘भगवान का न्याय है कैंसर’, चिदंबरम ने दिया जवाब

     

     

    कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने बुधवार को असम के मंत्री हिमंत विश्व शर्मा के उस बयान कि निंदा की जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ लोग अतीत के अपने पापों के चलते कैंसर के शिकार हो जाते हैं. चिदंबरम ने कहा, ‘पार्टी बदलने से किसी व्यक्ति के साथ यही होता है.’

    कांग्रेस में रह चुके हिमंत विश्व शर्मा पिछले साल बीजेपी में शामिल हो गए थे. चिदंबरम ने ट्वीट किया, ‘असम के मंत्री शर्मा कहते हैं कि कैंसर पापों के लिए ईश्वर का इंसाफ है. व्यक्ति के दल बदलने से यही होता है.’

    बता दें कि असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने यह टिप्पणी करके विवाद खड़ा कर दिया कि कुछ लोग कैंसर जैसी घातक बीमारियों से इसलिए ग्रस्त हैं क्योंकि उन्होंने अतीत में पाप किये हैं और यह ‘ईश्वर का न्याय’ है.

    शर्मा ने कहा था, ‘जब हम पाप करते हैं तो भगवान हमें सजा देता है. कई बार हम देखते हैं कि युवाओं को कैंसर हो गया या कोई युवा हादसे का शिकार हो गया. अगर आप पृष्ठभूमि देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि यह ईश्वर का न्याय है और कुछ नहीं. हमें ईश्वर के न्याय का सामना करना होगा.’

  • गुजरात चुनाव: कांग्रेस की ‘हार्दिक डील’ से क्यों घबराई है BJP?

    गुजरात चुनाव: कांग्रेस की ‘हार्दिक डील’ से क्यों घबराई है BJP?

     

     

    ‘तुम खुद को क्या समझते हो? तुम्हारी हैसियत क्या है, तुम खत्म हो जाओगे. तुम मूर्ख हो. तुम पाटीदारों को धोखा दे रहे हो, वो तुम्हें खत्म कर देंगे. मैंने 50 साल के अपने राजनीतिक जीवन में तुम जैसे कइयों को आते-जाते देखा है.’

    ‘मूर्खों ने एक फॉर्मूला दिया और मूर्खों ने उसे मान लिया. सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष वकीलों का कहना है कि आरक्षण नहीं दिया जा सकता. तुम सिर्फ ग्रेजुएट हो. मुझे यह नहीं पता कि तुमने परीक्षा पास की है या नहीं.’

    ‘हमने कई चीजें दी हैं, 500 मामले वापस लिए, गैर-आरक्षित समुदायों के लिए आयोग का गठन किया, पुलिस अत्याचार की जांच के लिए एक समिति गठित की.’

    ‘तुम्हारे द्वारा अपमान और हमारे कार्यालयों में तोड़फोड़ के बावजूद हम तुमसे अपील कर रहे हैं. यह मत सोचो कि हम जवाब नहीं दे सकते. इसलिए कि हम पद पर हैं, हमें मर्यादा बनाए रखनी है.’ एक के बाद एक ये बयान गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के हैं.हार्दिक को मंजूर कांग्रेस का आरक्षण फॉर्मूला
    उनके ये बयान हार्दिक पटेल की प्रेस कांफ्रेंस के तुरंत बाद आए. नितिन पटेल के चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी. हार्दिक ने इस प्रेस कांफ्रेंस में ऐलान किया कि कांग्रेस ने आरक्षण का एक फॉर्मूला दिया है, जिस पर संविधान के भीतर अमल किया जा सकता है. कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए घोषणा पत्र में भी इसे जगह देने का वादा किया है.

    हार्दिक की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं
    बीजेपी के पास अब घबराने की कई वजहें हैं. पाटीदारों के दो सामाजिक संगठनों- खोदालधाम ट्रस्ट और उमैयाधाम ट्रस्ट- ने कहा है कि पटेलों को आरक्षण मिलना चाहिए. दोनों संगठनों ने हार्दिक पटेल के आरक्षण आंदोलन को सही ठहराया है. इन संगठनों का पाटीदारों के दोनों हिस्सों- कडुआ और लेउवा- पर खासा प्रभाव है.

    बीजेपी में जा सकते हैं हार्दिक के दो खास
    हार्दिक के दो खास साथी बीजेपी में जा चुके हैं, जबकि हाल ही में कथित रूप से हार्दिक की तीन सेक्स सीडी सार्वजनिक हुई है. लेकिन हार्दिक के समर्थकों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है. वास्तव में इन वीडियो के बाद उनकी रैलियों में भीड़ और बढ़ गई है.

    इन मु्द्दों से खुद को जुड़ा महसूस करते हैं हार्दिक
    हार्दिक अपनी रैलियों में जो मुद्दे उठाते हैं, लोग तुरंत उनसे खुद को जुड़ा महसूस करते हैं, खासकर गुजरात के ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों के पाटीदार उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं. उदाहरण के लिए, मंगलवार रात अहमदाबाद के पास एक गांव की रैली में हार्दिक ने कई मुद्दों पर गुजरात सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि बढ़ती बेरोजगारी, शिक्षा का बढ़ता खर्च, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और ग्रामीण इलाकों में खस्ताहाल बुनियादी ढांचा जनविरोधी सरकार के उदाहरण हैं, जो निजीकरण में लगी है.

    हार्दिक ने कहा ‘वो पूछते हैं कि आरक्षण क्यों चाहिए? नौकरियां नहीं हैं. पढ़ाई पूरी होने के बाद आपके बच्चे क्या करेंगे. उन्हें फोर्ड और नैनो में भेजकर देखिए? वहां बाहरी लोगों को नौकरी मिल जाएगी, लेकिन हमें नहीं.’

    कांग्रेस की रणनीति
    इस तेजतर्रार नेता की दो यूएसपी है- उनकी उम्र उन्हें चुनाव लड़ने से रोकती है और उन्होंने कांग्रेस में शामिल नहीं होना सुनिश्चित किया. लेकिन हार्दिक के लगातार आंदोलन ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में युवाओं की पूरी पीढ़ी को सोचने पर मजबूर कर दिया है, खासकर उनकी कोर टीम के सदस्यों को जो राजनीतिक करियर बनाना चाहते हैं.

    इससे यह भी साफ होता है कि कांग्रेस को चार सीटों पर अपने उम्मीदवार इसलिए बदलने पड़े क्योंकि वह हार्दिक पटेल की पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) को अपने साथ रखना चाहती है. कांग्रेस ने सोमवार को 13 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की. इसमें बदले गए चार उम्मीदवारों के नाम भी हैं. कांग्रेस ने जूनागढ़, भरूच, कामरेज और वराछा रोड जैसी अहम विधान सभी सीटों पर उम्मीदवार बदले.

    ये सीट है फसाद की जड़
    हालांकि, फसाद की जड़ सौराष्ट्र इलाके की बोटाड सीट रही. कांग्रेस ने यहां पहले एनसीपी से आए मनहर पटेल को टिकट देने का फैसला किया था, लेकिन पीएएएस के विरोध के कारण उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई. आखिरकार पीएएएस के दिलीप सबवा को यहां से टिकट दिया गया.

    इसे लेकर गतिरोध बना हुआ था. सोमवार को हार्दिक पटेल पीएएएस का कांग्रेस को समर्थन का एलान करने वाले थे. एक दिन पहले आरक्षण को लेकर दोनों पक्षों में सहमति बन गई थी, लेकिन गतिरोध के चलते ये मामला बुधवार तक टल गया. हार्दिक के आंदोलन का असर इससे समझा जा सकता है कि दोनों प्रमुख पार्टियों ने चुनाव में पटेलों को बड़ी तादाद में उम्मीदवार बनाया है.

    अब तक 134 उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है बीजेपी
    बीजेपी ने अब तक 134 उम्मीदवारों का ऐलान किया है. इनमें 34 पाटीदार हैं. कांग्रेस ने बुधवार तक 89 उम्मीदवारों का ऐलान किया था. पार्टी ने अब तक 24 पाटीदारों को टिकट दिया है. गुजरात की आबादी में पटेल 14 फीसदी हैं. कम से कम 71 विधान सभा सीटों में पेटलों के 15 फीसदी से अधिक वोट हैं.

    (फर्स्टपोस्ट के लिए दर्शन देसाई)

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    VIDEO: गुजरात में सिर्फ हार्दिक ही ‘पटेल’ नहीं

     

  • Free में मिलेगा Petrol 24 नवंबर तक, अभी टैंक फुल करवा लें !

    पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच यह खबर काफी राहत देने वाली है. अगर आप पेट्रोल जितने का पेट्रोल भरवाएं और आपको पूरे पैसे वापस मिल जाए तो इससे बड़ी खुशखबरी तो हो ही नहीं सकती है. ये कोई फेक या झूठी खबर नहीं है, बस आप इस तरीके से फ्री में पेट्रोल-डीजल भरवा सकते हैं. मोबिक्विक के इस ऑफर से डिजिटल ट्रांजेक्शन करने वालों की संख्यां में इजाफा होने की संभावना है.।

    क्या है फ्री पेट्रोल पाने का तरीका- पेट्रोल की ऑनलाइन पेमेंट करने पर आपको छूट मिलती है. लेकिन, यही पेमेंट अगर आप मोबिक्विक वॉलेट से करेंगे तो आपका पूरा पैसा वापस आपके वॉलेट में आ जाएगा. जी हां कंपनी ने पेट्रोल के लिए खास स्कीम चलाई है. जिसमें शाम 6 बजे से लेकर रात 9 बजे के बीच पेट्रोल डलवाने पर आपको सुपरकैश ऑफर मिलेगा. इसमें 100 प्रतिशत कैशबैक का ऑफर है।

    यह भी पढ़ेे:……..तो पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता खत्म ! जानिए कैसे !

    कब तक मिलेगा फ्री पेट्रोल- मोबिक्विक ने यह ऑफर सिर्फ पांच दिन के निकाला है. हालांकि, अब इस ऑफर की वैधता में सिर्फ दो दिन बचे हैं. 24 नवंबर को यह ऑफर खत्म हो जाएगा. ऑफर का फायदा उठाने के लिए आपको कम से कम 10 रुपए का पेट्रोल डलवाना होगा।

    कैसे मिलेगा फायदा- ऑफर का फायदा उठाने के लिए आपको कोई कूपन कोड नहीं चाहिए. बल्कि पेट्रोल पंप पर पेमेंट के वक्त सिर्फ क्यूआर कोड स्कैन करना होगा. इसके बाद आपने जितनी राशि का पेट्रोल डलवाया है उतना अमाउंट एंटर करना होगा. हालांकि, कंपनी ने इसके लिए अधिकतम 100 रुपए के कैशबैक की कैप लगाई है. कैशबैक आने पर उसका इस्तेमाल आप दूसरी बार पेट्रोल डलवाने पर कर सकते हैं. इसके लिए आपको कम से कम 200 रुपए का पेट्रोल डलवाना होगा.।

    कैशबैक के अलावा भी छूट- पेट्रोल डलवाने पर आपको वॉलेट में कैशबैक तो मिलेगा ही, साथ ही 0.75 प्रतिशत की ऑनलाइन पेमेंट छूट का भी फायदा मिलेगा. यह फायदा आपके वॉलेट में 5 वर्किंग डेज में क्रेडिट कर दिया जाएगा. वहीं, कैशबैक के लिए आपको सिर्फ 24 घंटे का इंतजार करना होगा।

    यह भी पढ़ेे: Killer Tree : हत्यारा पेड़, जो हर हफ्ते ले लेता है एक जान

  • Free में मिलेगा Petrol 24 नवंबर तक, अभी टैंक फुल करवा लें !

    पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच यह खबर काफी राहत देने वाली है. अगर आप पेट्रोल जितने का पेट्रोल भरवाएं और आपको पूरे पैसे वापस मिल जाए तो इससे बड़ी खुशखबरी तो हो ही नहीं सकती है. ये कोई फेक या झूठी खबर नहीं है, बस आप इस तरीके से फ्री में पेट्रोल-डीजल भरवा सकते हैं. मोबिक्विक के इस ऑफर से डिजिटल ट्रांजेक्शन करने वालों की संख्यां में इजाफा होने की संभावना है.।

    क्या है फ्री पेट्रोल पाने का तरीका- पेट्रोल की ऑनलाइन पेमेंट करने पर आपको छूट मिलती है. लेकिन, यही पेमेंट अगर आप मोबिक्विक वॉलेट से करेंगे तो आपका पूरा पैसा वापस आपके वॉलेट में आ जाएगा. जी हां कंपनी ने पेट्रोल के लिए खास स्कीम चलाई है. जिसमें शाम 6 बजे से लेकर रात 9 बजे के बीच पेट्रोल डलवाने पर आपको सुपरकैश ऑफर मिलेगा. इसमें 100 प्रतिशत कैशबैक का ऑफर है।

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    कब तक मिलेगा फ्री पेट्रोल- मोबिक्विक ने यह ऑफर सिर्फ पांच दिन के निकाला है. हालांकि, अब इस ऑफर की वैधता में सिर्फ दो दिन बचे हैं. 24 नवंबर को यह ऑफर खत्म हो जाएगा. ऑफर का फायदा उठाने के लिए आपको कम से कम 10 रुपए का पेट्रोल डलवाना होगा।

    कैसे मिलेगा फायदा- ऑफर का फायदा उठाने के लिए आपको कोई कूपन कोड नहीं चाहिए. बल्कि पेट्रोल पंप पर पेमेंट के वक्त सिर्फ क्यूआर कोड स्कैन करना होगा. इसके बाद आपने जितनी राशि का पेट्रोल डलवाया है उतना अमाउंट एंटर करना होगा. हालांकि, कंपनी ने इसके लिए अधिकतम 100 रुपए के कैशबैक की कैप लगाई है. कैशबैक आने पर उसका इस्तेमाल आप दूसरी बार पेट्रोल डलवाने पर कर सकते हैं. इसके लिए आपको कम से कम 200 रुपए का पेट्रोल डलवाना होगा.।

    कैशबैक के अलावा भी छूट- पेट्रोल डलवाने पर आपको वॉलेट में कैशबैक तो मिलेगा ही, साथ ही 0.75 प्रतिशत की ऑनलाइन पेमेंट छूट का भी फायदा मिलेगा. यह फायदा आपके वॉलेट में 5 वर्किंग डेज में क्रेडिट कर दिया जाएगा. वहीं, कैशबैक के लिए आपको सिर्फ 24 घंटे का इंतजार करना होगा।

    यह भी पढ़ेे: Killer Tree : हत्यारा पेड़, जो हर हफ्ते ले लेता है एक जान

  • चेकबुक सुविधा वापस लेने का सरकार का कोई इरादा नहीं: अरुण जेटली

    चेकबुक सुविधा वापस लेने का सरकार का कोई इरादा नहीं: अरुण जेटली

     

     

    वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि बैंक
    चेकबुक सुविधा वापस लेने का सरकार का कोई इरादा नहीं है, जो एक महत्वपूर्व भुगतान प्रक्रिया है. सरकार की तरफ से ये स्पष्टीकरण मीडिया में आए उन ख़बरों के बाद आया है जिसमें कहा जा रहा था कि
    डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सरकार निकट भविष्य में चेकबुक सुविधा वापस ले सकती है.

    एक बयान में सरकार ने इस बात से पूरी तरह इनकार करते हुए पुष्टि की कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.

    वित्त मंत्रालय की तरफ से ट्वीट में कहा गया, ‘भारत सरकार ये पुष्टि करती है कि बैंकों की तरफ से चेकबुक सुविधा वापस लेने का उसके पास कोई प्रस्ताव नहीं है.’ नोटबंदी के बाद सरकार नकद के कम इस्तेमाल की मंशा लिए डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में जुटी है.

    मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार देश को लेस कैश अर्थव्यवस्था में बदलने पर प्रतिबद्ध है और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना चाहती है पर लेकिन चेक भुगतान प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है.इसमें कहा गया है कि व्यापार एवं वाणिज्य के लिए चेक रीढ़ की हड्डी है और जो अक्सर व्यापार लेनदेन को सुरक्षित बनाता है.

    वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के लिए अपने बजट भाषण में कहा था कि जैसे देश तेज़ी से डिजिटल लेनदेन और चेक पेमेंट की तरफ बढ़ रहा है, इस बात को भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ‘डिसऑनर्ड चेक’ प्राप्तकर्ता को अदायगी मिल सके.

  • गुजरात में सेल्फ गोल मारने की कांग्रेस की आदत अभी गई नहीं है!

    गुजरात में सेल्फ गोल मारने की कांग्रेस की आदत अभी गई नहीं है!

     

     

    राजकोट से द्वारका जाने के क्रम में जामनगर के फल्ला गांव में सड़क किनारे एक चाय की दुकान पर चाय पीने के लिए हम बैठे तो वहां चर्चा चाय वाले की होने लगी. चुनावी माहौल में जामनगर हाईवे पर ही मौजूद चाय वाले हरपाल सिंह ने बिना लाग लपेट के कह दिया, ‘मोदी शिवभक्त हैं, राष्ट्रभक्त हैं, उनके खिलाफ कांग्रेस के लोग अपमान वाली बात बोलते हैं तो गुस्सा आता है, दर्द होता है.’

    यह गुजरात के भीतर एक चाय वाले का गुस्सा था जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस के एक ट्वीट के जवाब के तौर पर सामने आ रहा था. यूथ कांग्रेस के विवादित ट्वीट को हालांकि बाद में हटा दिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाय वाला बताकर उनका मजाक उड़ाया गया था. लेकिन उस ट्वीट ने गुजरात की राजनीति में बवाल मचा दिया है.

    लेकिन इस तरह का भाव केवल चाय वाले का ही नहीं था. चाय पीने आए बाकी लोग भी इस बात को मान रहे थे कि इस तरह की भाषा ठीक नहीं. कांग्रेस को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा.

    चाय पीने आए नारायण भाई जाटिया ने कहा, ‘उम्मीदवार कोई भी आवे, मत भाजप में दीता. मोदी ने वोट आपसू, कांग्रेस ने आपो जवाब आपो जो से, जे आवस्तु बोइला छे, ए नो जवाब पब्लिक आपसे.’नारायण भाई का कहना था- उम्मीदवार कोई भी आवे हम वोट तो बीजेपी को ही देंगे. लेकिन, मोदी के बारे में जो कांग्रेस बोल रही है उसका जवाब पब्लिक देगी.

    कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया हमें जामनगर शहर और आगे देवभूमि द्वारका में भी देखने को मिली. अहीर समाज के भीकाजी भाई ने द्वारका में कहा कि निजी तौर पर हमला कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है.
    कुछ यही हाल अहमदाबाद और बाकी इलाकों में भी देखने को मिला. वहां भी आम गुजराती के साथ-साथ चाय वाले भी, चाय वाला बताकर प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ाने वाले कांग्रेस के उस ट्वीट को लेकर नाराज दिखे.

    मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं बीजेपी
    गुजरात चुनाव के बीच मंझधार में बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं. चुनाव के वक्त ही कांग्रेस अध्यक्ष बनने जा रहे राहुल गांधी पहले से ही अपने कार्यकर्ताओं को नसीहत दे रहे थे कि प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर कोई निजी हमला नहीं करें. लेकिन, उनके उपदेश का असर नहीं हुआ. कांग्रेस ने यहीं गलती कर दी, जिसे लपकने के लिए बीजेपी पहले से ही तैयार बैठी थी.

    22 साल से गुजरात की सत्ता में काबिज बीजेपी को इस बार चुनाव में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में बीजेपी अपने गेम प्लान के मुताबिक पहले से इस बात की तैयारी में है कि कांग्रेस कोई गलती करे और फिर वही गलती गेम चेंजर हो जाए.

    गलतियों से सबक नहीं लेती कांग्रेस
    बीजेपी के रणनीतिकारों को 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर का वह बयान आज भी याद है जब अय्यर ने कांग्रेस अधिवेशन के दौरान मोदी को बाहर टी-स्टाल लगाने के लिए कहा था. बीजेपी ने इस बयान को गरीबों के खिलाफ कांग्रेस की सोच के तौर पर लपक लिया. नतीजा कांग्रेस सफाई देती रह गई लेकिन, कोई सुनने वाला नहीं मिला.

    2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव के वक्त भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जब मौत का सौदागर वाला बयान दिया था तो उस वक्त भी बीजेपी इसे लपक ले गई. मोदी ने इस बयान को सीधे गुजरात की अस्मिता से जोड़ दिया और नतीजा कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी.

    इस विवादित ट्वीट के सामने आते ही गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी से लेकर बीजेपी के सभी बड़े नेता सामने आ गए. प्रधानमंत्री मोदी के अपमान को बीजेपी सीधे गरीबों का अपमान बता रही है. गुजराती अस्मिता से जोड़कर बीजेपी एक बार फिर से अपने पाले में कांग्रेस को खेलने पर मजबूर कर रही है. सूरत में इस बात का नजारा दिखा जब दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजेंदर बग्गा ने सूरत में कांग्रेस के दफ्तर के बाहर पहुंचकर चाय बांटना शुरू कर दिया. बीजेपी की तरफ से इस बात का अनोखा विरोध प्रदर्शन हो रहा है. बीजेपी इस मुद्दे को किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने देना चाहती. उसे तो लग रहा है जैसे उसे वो सब मिल गया जिसका इंतजार वो लंबे वक्त से कर रही थी.

    हालांकि कांग्रेस डैमेज कंट्रोल की पूरी कोशिश में है. लेकिन अभी भी उसकी तरफ से कहा जा रहा है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. गुजरात कांग्रेस के सचिव पाल भाई बातचीत के दौरान कहते हैं, ‘कार्टून का कोई फर्क नहीं पड़ेगा. जब तक नरेंद्र मोदी यहां थे तब तक बीजेपी मजबूत थी. लेकिन, अब बीजेपी बिखर रही है. उसके कई सांसद टिकट बंटवारे के बाद नाराज हैं जबकि विजय रुपाणी, आनंदी बेन पटेल और नितिन पटेल का अलग-अलग गुट बना हुआ है.’

    लेकिन लगता है कांग्रेस यहीं गलती कर रही है. कांग्रेस गुजरात चुनाव में उस नब्ज को नहीं पकड़ पा रही है जहां से माहौल को अपने पक्ष में बदला जा सके. अपने-आप को फक्र के साथ चायवाला बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी रैलियों में जब इस पर कांग्रेस को घेरेंगे तो उस वक्त कांग्रेस के लिए जवाब देना मुश्किल होगा. लगता है इस बार भी कांग्रेस सेल्फ गोल मारने की अपनी आदत से बाज नहीं आने वाली है.

    (फर्स्टपोस्ट के लिए अमितेश और पल्लवी रेब्बाप्रगाडा)

  • ये रहे हैं गुजरात चुनाव के गेम चेंजर

    ये रहे हैं गुजरात चुनाव के गेम चेंजर

     

     

    आज कल हर जुबान पर एक ही चर्चा है- गुजरात का ताज किसके हाथ लगेगा? कोई कहता है नोटबंदी और जीएसटी को लेकर नाराजगी भीतर तक समा गई है, इसलिए बीजेपी की हार तय है. तो कोई कह रहा है पाटीदारों की नाराजगी और हार्दिक पटेल की युवाओं और पाटीदारों में अपील बीजेपी पर भारी पड़ेगी. चर्चा ये भी हो रही है कि ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर या फिर दलित नेता जिग्नेश मवानी का कांग्रेस को समर्थन कांग्रेस की नाव पार लगा सकता है.

    दिल्ली में मंथन का दौर जारी है. लेकिन दूर गुजरात में हर किरदार लगा है अपनी भूमिका को और धार देने में. राहुल गांधी के रोड शो में हार्दिक और अल्पेश की धूम रहती है. इसमें कांग्रेस की अदरूनी लड़ाई की बातें सामने नजर नहीं आ रहीं हैं. लेकिन जानकार तो यही पुछ रहे हैं कि कांग्रेस के कार्यकर्ता कहां हैं?

    राहुल गांधी के रोड शो में भीड़ तो उमड़ रही है, लेकिन वे हार्दिक, अल्पेश या फिर जिग्नेश के समर्थक हैं. इस भीड़ को वोट में बदलने के लिए जिस कार्यकर्ता की कांग्रेस को जरूरत है, आखिर वो कहां हैं. बीजेपी और संघ की इस प्रयोगशाला में जाति आधारित वोटिंग की राह पर ले जाने की कांग्रेस की ये कोशिश कितनी रंग लाएगी ये साफ नहीं. क्योंकि अब तक कांग्रेस आयात किए गए किरदारों के सहारे ही आगे बढ़ रही है. हर चुनाव में ऐसा लगता है कि राहुल या फिर सोनिया गांधी भारी पड़ने लगे हैं और कोई मुद्दा ऐसा उभर आता है जो गेम चेंजर साबित होता है.

    हम बताते हैं साल 2002 से अब तक के मोदी राज के गुजरात के गेम चेंजर क्या-क्या रहे हैं…2002 के विधानसभा चुनाव
    एक ऐसा चुनाव जहां पूरी ताकतें लगीं थी मुख्यमंत्री मोदी के हराने में. 26 जनवरी 2001 के भूकंप के झटके से गुजरात उबर तक नहीं पाया था. नरेंद्र मोदी जो बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव थे उन्हें भूकंप राहत के लिए बनी समिति का अध्यक्ष बना कर अहमदाबाद भेजा गया था. लेकिन तब पार्टी और प्रशासन दोनों पर मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल का कब्जा था. लिहाजा मोदी का रोल सिमट कर ही रह गया. लेकिन जब वो मुख्यमंत्री बन कर लौटे तो कई स्थानीय नियाय के चुनावों में बीजेपी का हार का सामना करना पड़ा. बीजेपी का ग्राफ गिरने लगा था. ऐसे में गोधरा की घटना हो गई और उसके बाद गुजरात में जो हुआ उसने सबको हिला कर रख दिया. पूरी दुनिया को मौका मिल गया सीएम मोदी पर हल्ला बोलने का. पार्टी के भीतर तक उन्हें हटाने की मुहिम तक चली. लेकिन बचते बचाते मोदी आगे बढते गए. लेकिन इस घटना ने गुजरात का ऐसा ध्रुविकरण किया कि मोदी को उखाड़ फेंकने की कांग्रेस से लेकर तमाम ताकतों की कोशिशों को वोटरों ने नकार दिया. हिंदू हृदय सम्राट बन कर उभरे मोदी पर गुजरात की जनता ने इतना भरोसा किया कि बहुमत की चिंता करनी ही नहीं पड़ी. यानी साल 2002 का गेमचेंजर रहा गोधरा कांड.

    साल 2007
    पांच साल की एंटी इनकंबेंसी थी. ऊपर से मोदी की कार्यशैली को लेकर अपने ही सवाल उठाने लगे थे. सीएम मोदी की कार्यशैली को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल ने गुजरात में मिनी इमरजेंसी की बात कर दी थी. गुजरात के वरिष्ठ नेता लगे थे सीएम मोदी को बदलने की मुहिम में. लेकिन आडवाणी, जेटली और गुजरात के प्रभारी महासचिव ओम माथुर ने साथ दिया और पार्टी के भीतर का विरोध को समाप्त कर दिया. चुनावों तक पार्टी के भीतर विरोध समाप्त हो गया था. लेकिन कांग्रेस खामोश नहीं थी. सोहराबुद्दीन और कुछ दूसरे इनकाउंटरों को लेकर कांग्रेस सवाल उठा रही थी. केंद्र में कांग्रेस सत्ता में थी और न ही उनके पास रिसोर्स की कमी थी. मोदी लगे थे बुथ स्तर तक पार्टी कार्यकर्ताओं को जोश दिलाने में और हर सीट की रणनीति बनाने में. इस बार वो अकेले स्टार प्रचारक थे. कांग्रेस ने अपने ट्रंप कार्ड सोनिया गांधी को मैदान में उतारा. एक रैली में उन्होंने नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागार क्या कहा पूरा चुनावी माहौल ही बदल गया. मोदी ने एक बार फिर गुजरात की जनता को भरोसा दिलाने में सफल रहे कि वही गुजरात के असली नेता हैं. एक बार फिर मोदी सीएम बन गए. साल 2007 का गेम चेंजर रहा सोनिया गांधी का मोदी को मौत का सौदागर कहना.

    साल 2012
    साल 2007 के बाद मोदी की नजरें दिल्ली पर टिक गईं. 2011 में अहमदाबाद में उन्होंने 3 दिनों का सद्भावना अनशन भी किया. वह भी उस वक्त जब आडवाणी ने अपनी देश भर की यात्रा शुरू की थी. साल 2009 की हार के बाद आडवाणी 2014 में भी नेतृत्व संभालने को तैयार थे. लेकिन मोदी इस बार पीछे नहीं हटने वाले थे. दोनों नेताओं के बीच तनातनी साफ नजर आने लगी थी. दूसरे की पार्टी के शीर्ष नेता के सामने खड़े होकर उन्होंने जता दिया कि वो नेतृत्व संभालने के लिए तैयार हैं. पूरे परिवार में संदेश भी यही गया. ये एक ऐसा अनशन था जहां उन्होने सभी धर्मों के लोगों को मंच पर न्यौता दिया. दिल्ली से लेकर मुंबई और सूदूर चेन्नई तक से उनके सभी राजनीतिक मित्र इसमें शामिल हुए. इसने न सिर्फ उनका राष्ट्रीय स्तर पर कद बढ़ा दिया बल्कि दिल्ली जाने की उनका मंशा भी साफ कर दी. तो दूसरी तरफ एक मौलाना के हाथों से टोपी न पहन कर अपने वोटरों को भी संदेश दे दिया. 2012 तक गुजरात की जनता को मोदी ने यही संदेश दिया पहले गुजरात जीतेंगे फिर दिल्ली की बारी. पटेलों के सबसे बड़े नेता केशूभाई पटेल भी अलग पार्टी बना कर लगे थे मोदी को हराने में. लेकिन पटेल वोट बीजेपी से नहीं खिसके. गुजरात की जनता ने सीएम मोदी पर एक बार फिर भरोसा जताया. वोट पार्टी नहीं मोदी के नाम पर मिले क्योंकि गुजरात के वोटरों और कार्यकर्ताओं को दिल्ली में पीएम की कुर्सी नजर आने लगी थी. 2012 का गेमचेंजर रहा अब दिल्ली की बारी है का नारा.

    2014 लोकसभा चुनाव
    गुजरात की जनता के सभी 26 सीटें बीजेपी को दीं, क्योंकि उन्हें मोदी बतौर पीएम चाहिए था.

    2017 विधानसभा चुनाव
    नतीजे आने बाकी हैं. कांग्रेस पुराने खाम फार्मुले को दोहराने में लगी है. पाटीदार, ओबीसी और दलितों के शीर्ष नेताओं को साथ लेकर चल भी रही है. 2014 से अब तक दो सीएम बदल चुकी बीजेपी विजय रुपाणी के नेतृत्व में चुनावों में कूद चुकी है. लेकिन अभी तुरूप का पत्ता यानी पीएम मोदी खुल कर मैदान में नहीं उतरे हैं. उनके मैदान में कूदने से पहले ही कांग्रेस ने विकास पागल हो गया है, युथ कांग्रेस ने एक बार फिर चाय़वाला के नाम से ट्वीट कर मजाक उड़ाया है. बीजेपी नेता मान रहे हैं कि चायवाले वाला ट्वीट भी गेम चेंजर साबित हो सकता है. आखिर मोदी से बड़ा ओबीसी नेता देश में कौन होगा. पटेलों को केशूभाई पटेल नहीं तोड़ सके तो हार्दिक कितने अलग कर पाएंगे.

    ऐसे में सवाल यही उठता है कि मोदी आखिर कहेंगे क्या? मोदी जानते हैं थोड़ी नाराजगी जीएसटी को लेकर थी, आरक्षण को लेकर पटेल भी बीजेपी से नाराज हैं. 27 से जब पीएम मोदी मैदान में कूदेंगें तो पूरी पार्टी को उम्मीद है कि हवा बदल जाएगी. अब सवाल यही उठता है कि मोदी आखिर कहेंगे क्या? 27 से लेकर प्रचार के अंत कर पीएम मोदी की 25-30 रैलियां होंगी और ये गुजरात के कोने-कोने में होंगी. यानी वो चेहरा जिसे दिल्ली भेजा है वो उन्हें नहीं भूली. सूत्र बताते हैं कि मोदी जब कहेंगे कि आपने मुझे दिल्ली भेजा और आपको जो दिक्कतें हैं उसे मुझ तक पहुंचाने वाला बीजेपी का उम्मीदवार होगा. इसलिए बीजेपी को जिताएं ताकि मैं दिल्ली में भी रहूं तो आपका हाल मिलता रहे. जानकार बताते हैं व्यापारी हों या फिर वोटर कोई अस्थिरता नहीं चाहता. सब चाहते हैं कि दोनो जगह पर एक ही पार्टी की सरकार रहे. यानी गेमचेंजर वही चेहरा होगा नरेंद्र मोदी का.

    इतने चुनावों को देखने के बाद गुजरात चुनावों को एक ही तस्वीर साफ दिखती है और वो ही नरेन्द्र मोदी. मुद्दे भले ही हर चुनाव में अलग रहे लेकिन उसका केन्द्र मोदी ही रहे. एक बार फिर पार्टी ने उन्हीं पर दांव लगाया है. अमित शाह लगे हैं बूथ मैनेजमेंट और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में और मोदी की ड्यूटी है गुजरात के वोटरों को आश्वस्त करना जिसमें में अब तक हर बार सफल होते आए हैं.