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  • गुजरात चुनाव: BJP के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस को हार्दिक की ‘हां’

    गुजरात चुनाव: BJP के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस को हार्दिक की ‘हां’

     

     

    गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर पाटीदार अनामत आंदोलन समिति की कांग्रेस को समर्थन देने की चर्चा कई दिनों से हो रही है. बुधवार को हार्दिक पटेल ने भी इसपर मुहर लगा दी. हार्दिक ने गुजरात विधानसभा चुनाव में साफतौर पर कांग्रेस को समर्थन देने की बात तो नहीं कही. लेकिन, इतना जरूर कहा कि उनकी लड़ाई बीजेपी की नीतियों के खिलाफ है.

    हार्दिक पटेल ने कहा, ‘हम सिर्फ बीजेपी के खिलाफ हैं. इसे आप अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस को समर्थन देना कह सकते हैं.”

    ढाई साल तक कोई पार्टी ज्वॉइन नहीं करेंगे हार्दिक
    हार्दिक ने ये बातें अहमदाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही. अपने चुनाव लड़ने की अटकलों को लेकर हार्दिक ने कहा, “मैं कई बार साफ कर चुका हूं कि अगले ढाई साल तक कोई भी पार्टी नहीं ज्वाइन करूंगा.”गुजरात में सरकार बनने पर कांग्रेस लाएगी आरक्षण बिल
    पाटीदार आरक्षण को लेकर हार्दिक पटेल का कहना है कि कांग्रेस ने उनकी सारी बातें मान ली हैं. गुजरात में सरकार बनने के बाद कांग्रेस आरक्षण बिल पेश करेगी.

    आरक्षण पर कांग्रेस का फॉर्मूला मंजूर
    पाटीदार आरक्षण को लेकर हार्दिक ने कहा कि हमने कांग्रेस का फॉर्मूला मान लिया है. उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण हैं. ऐसे में कांग्रेस ने उसी तर्ज पर हमें आरक्षण देने की बात कही है.

    ‘मैं कांग्रेस का एजेंट नहीं’
    हार्दिक पटेल ने कहा, “मुझे अक्सर कांग्रेस का एजेंट बताया जाता है. मैं कांग्रेस का कोई एजेंट नहीं हूं. मैं जनता का एजेंट हूं.” उन्होंने बताया, “बीजेपी ने मुझे खरीदने की कोशिश की थी. कई सौ करोड़ रुपये ऑफर भी किए थे. लेकिन, मैं बिकाऊ नहीं हूं.”

    हमने कांग्रेस से नहीं मांगा टिकट
    हार्दिक पटेल ने टिकट बंटवारे के बाद अपने समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झपड़ पर भी बात की. उन्होंने कहा कि हम लोगों ने कांग्रेस से एक भी टिकट नही मांगा. हम सिर्फ युवा नेतृत्व चाहते हैं.
    पिछले 7 से 8 दिन से टिकट बंटवारे में जो माहौल बनाया गया, जो गलत था. टिकट को लेकर अंदरुनी बवाल है. साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा है.

    बीजेपी की नीतियों के खिलाफ है लड़ाई
    हार्दिक पटेल ने कहा कि हमारी लड़ाई बीजेपी के खिलाफ नहीं, बल्कि इसकी नीतियों के खिलाफ है. बीजेपी ने पाटीदारों के स्वाभिमान पर हमला किया है. ये उड़ाई उसके खिलाफ है.

    24 नवंबर को राहुल गांधी का गुजरात दौरा
    दरअसल, राहुल गांधी 24 नवबंर को गुजरात में चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं. कांग्रेस इस कोशिश में लगी है कि राहुल की यात्रा से पहले हार्दिक और कांग्रेस के बीच तस्वीर साफ हो जानी चाहिए.

  • RSS का फिल्म फेस्टिवल: संस्कारी फिल्मों के लिए इंडस्ट्री में एंट्री करेगा संघ

    RSS का फिल्म फेस्टिवल: संस्कारी फिल्मों के लिए इंडस्ट्री में एंट्री करेगा संघ

     

     

    संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर उपजे विवादों के बीच आरएसएस अब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आने की तैयारी कर रहा है. संघ का मानना है कि फिल्म समाज का आईना है और सामाजिक और बौद्धिक बदलाव इससे लाया जा सकता है. साथ ही साथ फिल्म ही वह सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए आज की युवा पीढ़ी में बेहतर सामाजिक मूल्य और संस्कार भी विकसित किए जा सकते हैं. इसलिए अब संघ इस दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है.

    ऐसा नही है कि संघ की तरफ से पहली बार इस ओर रुझान दिखाया गया है. समय-समय पर संघ की तरफ से फिल्मों पर टिप्पणी की जाती रही है. हालांकि, इस क्षेत्र में पदार्पण का फैसला पहली बार किया गया है. मई 2017 में बीजेपी नेता और अभी गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा की किताब के आधार पर एक राजमाता विजया राजे सिंधिया पर फिल्म बनाई गई थी.

    ‘एक थी रानी ऐसी भी’ नाम की फिल्माई गई इस फिल्म को राजमाता सिंधिया की जीवनी को बड़ी ही खूबसूरती से उकेरा गया था. इसमें बीजेपी सांसद हेमा मालिनी और दिवंगत नेता और अभिनेता विनोद खन्ना मुख्य भूमिका में थे. इस फिल्म को संघ परिवार ने हाथों हाथ लिया था.

    चित्र साधना के जरिए शुरुआतअब संघ बॉलीवुड में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए आगे आ रहा है. इस ओर पहले कदम के तौर पर संघ फिल्म फेस्टिवल का आयोजन करेगा. संघ के इस फिल्म फेस्टिवल में तड़क-भड़क वाली मुंबइया फिल्मों को नहीं, बल्कि संस्कार और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाली फिल्मों को ज्यादा तवज्जो दी जाएगी. फिल्म फेस्टिवल के आयोजन के लिए संघ ने भारतीय चित्र साधना नाम से एक विशेष संगठन बनाया है. इस संगठन का कार्य देश के अलग-अलग हिस्सों में फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कर बॉलीवुड में पैठ बनाना रहेगा.

    नंद कुमार को मिली जिम्मेदारी
    इसके लिए संघ ने नंद कुमार को नई जिम्मेदारी दी है. नंद कुमार संघ के तेज तर्रार स्वंयसेवक हैं और अभी प्रज्ञा प्रवाह के प्रमुख के रुप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उनके साथ दिल्ली प्रांत के सह प्रांत संघ चालक आलोक कुमार को बतौर सह संयोजक के रूप में जोड़ा गया है. इसके अलावा जिन शहरों या प्रांतों में फेस्टिवल का आयोजन होगा, वहां राज्य और स्थानीय समिति बनाई जाएगी. इस तरह का पहला आयोजन दिल्ली में 19 दिसंबर को होगा.

    इससे पहले भी हो चुका है प्रयोग
    इससे पहले ऐसा प्रयोग इंदौर में किया गया था. लेकिन आयोजन को उतनी सफलता नही मिली. इसलिए संघ ने भारतीय चित्र साधना के बैनर तले इसका आयोजन दिल्ली में करने का निर्णय लिया है. इसके लिए दिल्ली में पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है. इस समिति में बंगाली एक्टर सुदीप्तो सेन, ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर की पत्नी आयुषी केतकर, अरुण कुमार और आदित्य झा को रखा गया है.

    कई शहरों में होगा आयोजन
    दिल्ली विश्वविद्यालय की राजनीति में रहे आदित्य झा अभी दिल्ली बीजेपी में राजनीति कर रहे हैं तो अरुण कुमार पर दिल्ली में संघ के सह प्रचार प्रमुख का दायित्व है. सूत्र बताते हैं कि दिल्ली के अलावा संघ मुंबई, कोलकाता, जयपुर और दक्षिण के शहरों में फिल्म फेस्टिवल का आयोजन करेगा.

  • गुजरात चुनाव: जब 15 किलो सिक्के लेकर नामांकन के लिए पहुंचा प्रत्याशी

    गुजरात चुनाव: जब 15 किलो सिक्के लेकर नामांकन के लिए पहुंचा प्रत्याशी

     

     

    गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. बीजेपी, कांग्रेस और दूसरी पार्टियों सहित निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन भरना शुरू कर दिया है. इस बीच इलेक्शन डिपॉजिट (चुनावी जमानत राशि) को लेकर दो प्रत्याशियों की चुनाव अधिकारियों से नोकझोंक हो गई. दोनों प्रत्याशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेश इकोनॉमी का हवाला दे रहे थे. एक ने इसके पक्ष में बात की तो दूसरे ने विरोध स्वरूप पांच हजार रुपये फुटकर जमा करवाए.

    बता दें कि नामांकन के समय कैंडिडेट को कैश या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से बना ड्राफ्ट डिपॉजिट करना होता है.

    नवसारी विधानसभा से निर्दल प्रत्याशी ने रिटर्निंग अफसर से मांग की है कि उसका पेमेंट चेक से स्वीकार किया जाए. इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेस इकॉनमी का हवाला दिया. वहीं, जलालपुर से बीएसपी के कैंडिडेट 5000 रुपये फुटकर के रूप में जमा करना चाहते थे.

    मंगलवार को निर्दल प्रत्याशी क्रुतिका वैद्य नामांकन फाइल करने पहुंचे. इस दौरान जब रिटर्निंग अफसर ने उनसे डिपॉजिट जमा करने को कहा तो उन्होंने चेक दे दिया. इस पर दोनों में बहस शुरू हो गई. रिटर्निंग अफसर ने नामांकन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने वैद्य को कहा कि वह डिपॉजिट चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक ही जमा करें.जब रिटर्निंग अफसर ने इस पर सहूलियत देने से इनकार कर दिया तो वैद्य के वकील कुनुभाई सुखड़िया बात को आगे कैशलेस ट्रांजेक्शन की तरफ ले गए. इस दौरान अफसर और वकील के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई. इसके बाद वकील को नामांकन की जगह से लगभग बाहर कर दिया गया. हालांकि, मामला बढ़ता देख प्रत्याशी ने कैश जमाकर स्थिति संभाल ली.

    सुखड़िया ने कहा, आज हम कैशलेस इकॉनमी की बात कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि यह सरकार की प्राथमिकता है. इसे ही देखते हुए वैद्य चेक से डिपॉजिट जमा करना चाह रहे थे. लेकिन रिटर्निंग अफसर ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया. नरेंद्र मोदी ने कैशलेस इकॉनमी का नारा दिया है, लेकिन जमीन पर अधिकारी इसे फॉलो नहीं कर रहे हैं.

    दूसरी तरफ जलालपुर विधानसभा से बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार गुनवंत राठौर ने कैशलेस इकॉनमी का अलग ही तरीके से विरोध किया. सरकार की तरफ से कैशलेस इकॉनमी के लिए दबाव डाले जाने पर राठौर पांच हजार रुपये का फुटकर लेकर पहुंचे.

    राठौर के पास 1 रु, 2 रु और 5 रु के सिक्के थे. सभी सिक्कों का वजन 15 किलोग्राम था. तकनीकी तौर पर राठौर गलत नहीं थे, क्योंकि वह कैश में पेमेंट कर रहे थे. इसलिए उनका नामांकन वैध करार दिया गया. हालांकि, रिटर्निंग अफसर को उनके दिए पैसे को गिनने के लिए अलग से स्टाफ लगाना पड़ा.

  • गांगुली के घर डेंगू लार्वा मिलने पर नोटिस भेजेगा कोलकाता नगर निगम

    गांगुली के घर डेंगू लार्वा मिलने पर नोटिस भेजेगा कोलकाता नगर निगम

     

     

    कोलकाता नगर निगम ने
    टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के घर डेंगू फैलाने वाले मच्छरों का लार्वा पाए जाने के बाद उन्हें नोटिस भेजने का फैसला किया है.

    सौरव के बड़े भाई और पूर्व रणजी खिलाड़ी स्नेहाशीष को डेंगू हुआ है और उनका अभी शहर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है.

    निगम की मेयर परिषद (स्वास्थ्य) के सदस्य अतिन घोष ने बताया, ‘हमें 19 नवंबर को जांच के दौरान बेहाला स्थित गांगुली के घर से डेंगू के मच्छरों का लार्वा मिला था और हमने उनसे जगह को साफ रखने को कहा.’ लेकिन गुरुवार के निरीक्षण में केएमसी के अधिकारियों ने उस बड़े परिसर में डेंगू के मच्छरों के लार्वा देखे.

    घोष ने बताया कि इसलिए नियमों के मुताबिक हम उन्हें नोटिस भेजेंगे.उधर अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक स्नेहाशीष गांगुली को बुधावार को तेज़ बुखार के साथ शरीर में दर्द की शिकायत के बाद वहां भर्ती कराया गया. टेस्ट के बाद पाया गया कि उन्हें डेंगू है और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है.

    राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जनवरी से अब तक पश्चिम बंगाल में डेंगू संबंधित 35 मौतें हुई हैं.

  • कौन संभालेगा जयललिता की विरासत? 21 दिसंबर को वोटर्स करेंगे फैसला

    कौन संभालेगा जयललिता की विरासत? 21 दिसंबर को वोटर्स करेंगे फैसला

     

     

    तमिलनाडु के आरके नगर विधानसभा सीट पर 21 दिसंबर को उपचुनाव होगा. 24 दिसंबर को वोटों की गिनती होगी. चुनाव आयोग ने तारीखों की घोषणा कर दी है. बता दें कि इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता चुन कर आती थीं. उनके निधन के बाद यह सीट खाली है.

    माना जा रहा है कि यह चुनाव जयललिता की विरासत के लिए लड़ा जाएगा. एक तरफ जेल की सजा काट रही शशिकला की भतीजे दिनाकरन हैं तो दूसरी तरफ काफी विवाद के बाद एक हुए ई पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम का गुट है.

    हालांकि, ईपीएस-ओपीएस कैंप को बुधवार को पहली जीत मिल गई है, जब चुनाव आयोग ने ‘दो पत्ती’ चुनाव चिन्ह उनके गुट को आवंटिट कर दिया.

    बता दें कि पहले 12 अप्रैल को यहां उप चुनाव होने थे. लेकिन चुनाव आयोग ने वोटर्स को पैसे देने के मामले को संज्ञान में लेते हुए चुनाव कैंसिल कर दिया था. तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के यहां रेड मारा गया था और वहां से 89 करोड़ रुपये बरामद हुए थे. आरोप था कि ये पैसे वोटर्स को देने के लिए वहां रखे गए थे.

  • 1 साल में आतंकवाद से 340 लोगों ने गंवाई अपनी जान

    1 साल में आतंकवाद से 340 लोगों ने गंवाई अपनी जान

     

     

    ग्लोबल टेररिज़्म रिपोर्ट 2017 के मुताबिक भारत आतंकवाद से प्रभावित दुनिया के शीर्ष 10 मुल्कों में शुमार है. बीते साल 2016 में भारत में 929 आतंकी हमले हुए जिनमें 340 लोगों को जान गंवानी पड़ी.

    ग्लोबल टेररिज़्म इंडेक्स 2017 के हिसाब से 10 के स्कोर के साथ इराक दुनिया में सबसे ज़्यादा आतंकवाद से जूझने वाला मुल्क है. ऐसे शीर्ष 5 मुल्कों में इराक के अलावा अफ़गानिस्ता, नाइजीरिया, सीरिया और पाकिस्तान शामिल हैं. रैंकिंग के मामले में भारत आठवें नंबर पर है.  नज़र डालिए रिपोर्ट पर और समझिए कि दुनिया में कैसे तबाही मचा रहा है आतंकवाद?

    पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की बात करें तो वो दुनिया में आतंकवाद से सबसे प्रभावित पांचवां देश है. स्कोर के मामले में पाकिस्तान जहां 8.40 पर है तो वहीं भारत 7.53 पर मौजूद है. बीते साल भारत में 340 लोगों ने आतंकवाद के चलते अपनी जान गंवायी वहीं पाकिस्तान में ऐसे पीड़ितों की संख्या 956 थी. साल 2000 से 2016 के दौरान की बात करें तो आतंकवाद का शिकार बनने वालों की कुल तादाद 8238 थी.

    दुनिया के सबसे ख़तरनाक आतंकी संगठन
    वैसे तो दुनिया में सैकड़ों की संख्या में आतंकी संगठन हैं लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक 4 संगठन सबसे ज़्यादा मानवता के लिए ख़तरा बने हुए हैं. जो चार आतंकी संगठन सबसे ज़्यादा ख़तरा हैं, उनमें ISIS, बोको हरम, तालिबान और अल कायदा शामिल हैं.

    इस्लामिक स्टेट की इराक, जॉर्डन, सीरिया, तुर्की, यमन, बेल्जियम, जॉर्जिया जैसे मुल्कों में मौजूदगी है. बोको हरम कैमरून, नाइजीरिया और निगर जैसे मुल्कों में हिंसा फैला रहा है. आतंकी संगठन तालिबान की बात करें तो उसकी गतिविधि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में मौजूद है. आखिरी संगठन अल कायदा की बात करें तो वो अल्जीरिया, बांग्लादेश, केन्या, माली, निगर, पाकिस्तान, रूस, सीरिया, युगांडा, यमन और बुर्किना फासो में मौजूद है.

    1 साल में आतंक की भेंट चढ़े हज़ारों
    बीते एक साल में आतंकवाद के चलते दुनिया में हज़ारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. आतंकवाद से त्रस्त शीर्ष 10 देशों की बात करें तो उनकी तादाद करीब 22 हज़ार है. सबसे ज़्यादा 9765 जान इराक में गई. वहां घायलों की तादाद 13314 है. आतंकियों के निशाने पर लोगों की बात करें तो रिपोर्ट के मुताबिक पहले नंबर पर आम लोग और निजी संपत्ति थे. उसके अलावा पुलिस, अज्ञात, सरकार और अन्य लोग शामिल है.

  • UK में भी पद्मावती का विरोध करेगी राजपूत सेना, प्रदर्शन की तैयारी

    UK में भी पद्मावती का विरोध करेगी राजपूत सेना, प्रदर्शन की तैयारी

     

     

    संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ पर मचा बवाल अब यूनाइटेड किंगडम पहुंच गया है. लंदन में राजपूत ग्रुप ब्रिटिश सेंसर बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा है. बता दें कि ब्रिटिश सेंसर बोर्ड ने फिल्म को बिना किसी कट के पास कर दिया है और एक दिसंबर से रिलीज को हरी झंडी दे दी है.

    ब्रिटिश सेंसर बोर्ड ने फिल्म को 12 A रेटिंग दी है. इसका मतलब है कि फिल्म को 12 साल से कम उम्र के बच्चे किसी बालिग व्यक्ति के साथ ही देख सकेंगे. हालांकि, लंदन राजपूत समाज ने ब्रिटिश सेंसर बोर्ड को चिट्ठी लिखी है और अपने निर्णय पर दोबारा विचार करने को कहा है.

    यूनाइटेड किंगडम में राजपूत सेना के अध्यक्ष महेंद्र सिंह जडेजा ने सीएनएन न्यूज 18 से बात करते हुए कहा, हम राजपूत समाज के लोग पद्मावती को लेकर बहुत चिंतित हैं. हमने बीबीएफसी को लेटर लिखा है. हम योजना बना रहे हैं कि फिल्म को यूके में भी रिलीज होने न दें. इसके लिए कैंपेन और प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं.

    उन्होंने कहा, हमने लिगल ओपिनियन की भी बात की है और इसपर कानून के अंतर्गत ही रोक लगाने का प्रयास कर रहे हैं. यह पहला मौका नहीं है जब भंसाली ने इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया है. इस बार हमें विश्वास है कि उन्होंने पूरी कहानी के साथ छेड़छाड़ की होगी. हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लोग सच्चे इतिहास से वाकिफ हों न कि ऐसी क्रिएटिव स्टोरी से जो कि सिर्फ पैसे कमाने के लिए लिखी गई हो.पद्मावती की रिलीज पर भारत में काफी गतिरोध है. करणी सेना सहित कई राजपूत ग्रुप फिल्म के विरोध में हैं. उनका मानना है कि इसमें इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया गया है.

    हालांकि, पद्मावती को बनाने वाली वायकॉम 18 ने कहा है, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) से क्लियर हुए बिना फिल्म को ग्लोबल लेवल पर रिलीज करने की कोई योजना नहीं है. पीटीआई ने उसके एक सोर्स के हवाले से कहा है, फिल्म को यूके सेंसर बोर्ड ने बिना किसी कट के रिलीज कर दिया है. लेकिन, भारत में इसे सेंसर क्लियरेंस का इंतजार है. इसके बाद ही आगे इस पर कोई विचार होगा.

  • अभी राजनीति में नहीं उतरेंगे रजनीकांत, बर्थडे बाद फैन्स से करेंगे बात

    अभी राजनीति में नहीं उतरेंगे रजनीकांत, बर्थडे बाद फैन्स से करेंगे बात

     

     

    सुपरस्टार रजनीकांत ने राजनीति में उतरने की तमाम अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है. चेन्नई एयरपोर्ट पर पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा, इस समय में राजनीति में उतरने की कोई आवश्यक्ता नहीं है. बता दें कि पिछले कई महीने से यह कहा जा रहा था कि रजनीकांत जल्द ही अपनी राजनैतिक पार्टी बनाएंगे.

    रजनीकांत ने कहा, मैं अपने बर्थडे ’12 दिसंबर’ के बाद अपने फैन्स से मुलाकात करूंगा. पहले सूत्रों से ऐसी जानकारी मिल रही थी कि रजनीकांत अपनी पार्टी बनाएंगे, फिर बीजेपी से गठबंधन कर लेंगे. इसका कारण है कि रजनीकांत ने जबसे राजनैतिक पार्टी बनाने या राजनीति में एंट्री करने का संकेत दिया है, तबसे भगवा पार्टी उन्हें लुभाने की कोशिश कर रही है.

    हालांकि, रजनीकांत इन दिनों अपनी फिल्म 2.0 के रिलीज को लेकर ही व्यस्त हैं. फिर भी फिल्म मर्सेल को लेकर उन्होंने कुछ ट्वीट जरूर किए हैं. वह हासन के साथ भी हंसी-मजाक करते दिखे थे. जब उन्होंने कहा था कि राजनीति में एंट्री के लिए नाम और प्रसिद्धि ही जरूरी नहीं है. आपको राजनीति में सफल होना है तो प्रसिद्धि और पैसे से भी ज्यादा चीजों की आवश्यकता होती है. एक कलाकार को राजनीति में जाने के लिए कुछ बड़ा करना होता है.

    वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था, यदि रजनीकांत राजनीति में शामिल होना चाहेंगे तो पार्टी में उनका तहे दिल से स्वागत है. पार्टी में हर अच्छे सदस्य का स्वागत है. उन्होंने कहा कि पार्टी में शामिल होना है या नहीं इसका अंतिम फैसला रजनीकांत के हाथ में है. उन्होंने माना कि राज्य में बीजेपी की स्थिति कमजोर है.नितिन गडकरी ने कहा था, पार्टी में रजनीकांत के लिए विशेष स्थान है. उनका राजनीति में स्वागत है और मेरा उनसे निवेदन है कि वह भाजपा के बारे में सोचें. भाजपा में उनके लिए विशेष स्थान है.

  • ऐप आधारित बस सेवा के साथ पुलिस साझेदारी

    ऐप आधारित बस सेवा के साथ पुलिस साझेदारी

     

     

  • 15 दिसंबर से शुरू हो सकता है शीतकालीन सत्र, केंद्र ने दिए संकेत

    15 दिसंबर से शुरू हो सकता है शीतकालीन सत्र, केंद्र ने दिए संकेत

     

     

    केंद्र सरकार 15 दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र बुलाने की संभावना पर विचार कर रही है जो गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के एक दिन बाद है. सरकारी सूत्रों ने इस आशय की जानकारी दी.

    गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में संसदीय मामलों पर संसदीय समिति :सीसीपीए: की आज बैठक में शीतकालीन सत्र की तिथि के बारे में चर्चा की गई. उन्होंने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि संसद सत्र 15 दिसंबर से 5 जनवरी तक हो सकता है.

    सूत्र ने बताया कि इस बारे में एक दो दिनों में निर्णय लिये जाने की संभावना है. बाद में कैबिनेट के निर्णय के बारे में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र का कार्यक्रम ऐसा होगा कि इसका विधानसभा चुनाव से टकराव नहीं हो और यह नियमित सत्र होगा.

    उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जब चुनाव होते हैं, तब राजनीतिक दलों को सीधे लोगों को संबोधित करना होता है, सामान्य तौर पर चुनाव और संसद सत्र की तिथियों में टकराव नहीं होता.जेटली ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि संसद का शीतकालीन सत्र नियमित हो लेकिन चुनाव और सत्र की तिथि में टकराव नहीं हो.

    कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए जेटली ने कहा कि गुजरात चुनाव भाजपा के लिये महत्वपूर्ण है और वह वहां प्रचार में व्यस्त रहेगी लेकिन वे इस बात के प्रति आश्वस्त नहीं है कि विपक्ष भी वहां प्रचार में व्यस्त होगा.

    यह पूछे जाने पर कि क्या सत्र दिसंबर से जनवरी तक चलेगा और राष्ट्रपति के संबोधन के बिना होगा, तो जेटली ने कहा कि इस विषय का निपटारा बहुत पहले हो चुका है.

    सरकार से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिया कि शीतकालीन सत्र की औपचारिक घोषणा तब होगी जब कैबिनेट के समक्ष आज पेश किये गए दो अध्यादेश जारी हो जायेंगे. संसद सत्र की तिथि की घोषणा के बाद अध्यादेश जारी नहीं किया जा सकता है.

    संसद के शीतकालीन सत्र की घोषण में देरी को लेकर विपक्ष सरकार को निशाना बना रही है जबकि भाजपा इन आरोपों को आधारहीन बता चुकी है. भाजपा का कहना है कि संप्रग और उससे पहले की सरकारों के दौरान में भी ऐसा हुआ है.