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  • जन्मदिन विशेष: मास्टर से मुख्यमंत्री तक मुलायम का कठिन सफ़र

    जन्मदिन विशेष: मास्टर से मुख्यमंत्री तक मुलायम का कठिन सफ़र

     

     

    समाजवादी पार्टी आज बेशक आंतरिक कलह से जूझ रही है लेकिन एक दौर में राजनीति में मुलायम सिंह का सिक्का पुजता था. वो किंग से लेकर किंग मेकर तक की भूमिका अदा कर चुके हैं. आज की राजनीति में ज़मीनी स्तर का उनसे बड़ा समाजवादी नेता कोई नहीं है.

    76 साल पहले आज ही के दिन साल 1939 में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में मुलायम सिंह यादव का जन्म हुआ था. उनका परिवार पहले बेशक राजनीति राजनीति से न जु़ड़ा हो. लेकिन आज उनके परिवार के कण-कण में राजनीति बसती है. देश में उनके परिवार से बड़ा राजनीतिक परिवार शायद ही हो.

    भाई, भतीजा, बेटा और बहु हर कोई ब्लॉक और पंचायत स्तर से लेकर संसद तक प्रतिनिधित्व कर रहा है. आज मुलायम जहां खड़े हैं बेशक वो पायदान राजनीति में काफी ऊंचा है लेकिन उनकी उड़ान ज़मीन से शुरू हुई थी. जो काफी विस्तारित दिखाई देती है. नज़र डालिए उनके निजी से राजनीति जीवन पर एक नज़र.

    मालती देवी से शादी के बाद साल 1973 में मुलायम सिंह के घर उनके इकलौते बेटे अखिलेश यादव ने जन्म लिया. लेकिन तब तक वो राजनीति की दुनिया में अपने कदम जोरदार तरीके से जमा चुके थे. राजनीति में कूदने के लिए उन्हें प्रेरित करने वाली शख्सियत का नाम राम मनोहर लोहिया था.
    साल दर साल राजनीतिक सफ़र

    1960: मुलायम सिंह राजनीति में उतरे
    1967: पहली बार विधानसभा चुनाव जीते, MLA बने
    1974: प्रतिनिहित विधायक समिति के सदस्य बने
    1975: इमरजेंसी में जेल जाने वाले विपक्षी नेताओं में शामिल
    1977: उत्तर प्रदेश में पहली बार मंत्री बने, कॉ-ऑपरेटिव और पशुपालन विभाग संभाला
    1980: उत्तर प्रदेश में लोकदल का अध्यक्ष पद संभाला
    1985-87: उत्तर प्रदेश में जनता दल का अध्यक्ष पद संभाला
    1989: पहली बार UP के मुख्यमंत्री बनकर कमान संभाली
    1992: समाजवादी पार्टी की स्थापना कर, विपक्ष के नेता बने
    1993-95: दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री पद पर काबिज़ रहे
    1996: मैनपुरी से 11वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने गए. केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री का पद संभाला
    1998-99: 12वीं और 13वीं लोकसभा के लिए फिर सांसद चुने गए
    1999-2000: पेट्रोलियम और नेचुरल गैस कमेटी के चेयरमैन का पद संभाला
    2003-07: तीसरी बार यूपी का मुख्यमंत्री पद संभाला
    2004: चौथी बार 14वीं लोकसभा में सांसद चुनकर गए
    2007: यूपी में बसपा से करारी हार का सामना करना पड़ा
    2009: 15वीं लोकसभा के लिए पांचवीं चुने
    2009: स्टैंडिंग कमेटी ऑन एनर्जी के चेयरमैन बने
    2014: उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ से सांसद बने
    2014: स्टैंडिंग कमेटी ऑन लेबर के सदस्य बने
    2015: जनरल पर्पस कमेटी के सदस्य बने

  • दिल्ली सरकार को बस टर्मिनल के लिए और अधिक जमीन मिलती है

    दिल्ली सरकार को बस टर्मिनल के लिए और अधिक जमीन मिलती है

     

     

  • ‘डीयूएसयू के पास अपने निधियों तक कोई पहुंच नहीं है’

    ‘डीयूएसयू के पास अपने निधियों तक कोई पहुंच नहीं है’

     

     

  • योगी की रैली में पुलिस ने सबके सामने महिला से उतरवाया बुर्का

    योगी की रैली में पुलिस ने सबके सामने महिला से उतरवाया बुर्का

     

     

    उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली में पुलिस ने चेकिंग के नाम पर सरेआम एक महिला का बुर्का उतरवा दिया. महिला बीजेपी समर्थक बताई जा रही हैं.

    महिला का कहना है कि वह रैली में मुख्यमंत्री योगी को सुनने आई थीं.  हमेशा बुर्का पहनकर ही बाहर निकलती हैं. आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी ने सबके सामने उनका बुर्का उतरवाया हो. इस घटना के बाद वह थोड़ी असहज हुईं.

    मंगलवार को बलिया में मंगलवार की दोपहर सीएम योगी की रैली हुई. रैली ग्राउंड में सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे. इसी दौरान सायरा नाम की महिला बुर्के में वहां पहुंची.

    महिला पुलिसकर्मियों ने बुर्के पर जताई थी आपत्तिउसे देखते ही तीन महिला पुलिस कर्मियों ने उसे रोक दिया. महिला पुलिसकर्मियों ने सायरा से बुर्का उतारने को कहा. इसपर सायरा ने बुर्के का ऊपरी हिस्सा उतार दिया और अपना सिर साड़ी के पल्लू से ढंक लिया.

    दूसरी महिलाओं ने खींचकर उतारा बुर्का
    इस पर एक महिला पुलिसकर्मी ने उसे पूरा बुर्का उतारने को कहा. सायरा का बुर्का फंस गया था. रैली में उनके पास बैठी दूसरी महिलाओं ने उनका बुर्का खींच कर उतारा.

    पुलिस ने जब्त कर लिया बुर्का
    महिला पुलिसकर्मियों ने उसे बुर्का अपने पास रखने को दे दिया, लेकिन इसी बीच वहां पहुंचे एक पुरुष पुलिसकर्मी ने बुर्का जब्त कर लिया.

    मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने की आलोचना
    सायरा ने इस बात को ज्यादा तूल नहीं दी, लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस घटना पर आपत्ति जताई है. बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगीमहली ने कहा, “पूरी दुनिया में चाहे कितना भी आजाद ख्याल मुल्क क्यों न हो, हर एयरपोर्ट पर महिलाओं की तलाशी एक पर्दे वाले इनक्लोजर के अंदर होती है. रैली की भीड़ में किसी महिला का बुर्का उतरवा कर छीन लेना गैर कानूनी है. इसके लिए पुलिस वालों को सजा मिलनी चाहिए.’

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  • अलाउद्दीन खिलजी को सिर्फ खलनायक मानना भी गलत है

    अलाउद्दीन खिलजी को सिर्फ खलनायक मानना भी गलत है

     

     

    इतिहास को कभी काले और सफेद में नहीं बांटा जा सकता है. उसमें हर किरदार के कई ऐसे रंग होते हैं जो एक दूसरे से बिलकुल अलग होते हैं. अभी विवादों में चल रहे अलाउद्दीन खिलजी भी इतिहास में एक ऐसा ही नाम है. इसमें कोई शक नहीं एक शासक के तौर पर खिलजी ने क्रूरता के नए मानक बनाए. मगर सल्तनत काल के हर सफल सुल्तान ने लौह और रक्त की नीति ही अपनाई. जिसने नहीं अपनाई वो शासन नहीं कर पाया.

    अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी की हत्या कर गद्दी पाई थी. इसके अलावा सुल्तान बनते ही उसने सबसे पहले मुल्तान पर हमला किया और उसके सुल्तान, उसके पूरे परिवार, सारे ताकतवर अमीरों को जड़ से खत्म कर दिया. एक के बाद एक हमले कर रहे अलाउद्दीन खिलजी के लिए एक सशक्त सेना और संतुष्ट जनता रखना सबसे बड़ी जरूरत थी. इसके चलते उसने ऐसे कई सुधार किए जो अर्थव्यवस्था और सेना के लिए आज भी उदाहरण माने जाते हैं.

    शासन, सेना और बाजार प्रणाली
    इतिहासकार बरनी के अनुसार अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए सबसे पहले खिलजी ने ही धर्म और शासन को अलग किया. उसने सेना और दरबार के पदों में सबसे पहले खानदान नहीं योग्यता के आधार पर लोगों को रखा.खिलजी ऐसा शासक था जिसने बाजार प्रणाली को कड़ाई से नियंत्रित किया और महंगाई को लंबे समय तक बढ़ने नहीं दिया. खिलजी की बनाई हुई मंडियों में अनाज तौलने के निश्चित बांट होते थे जिनकी हर साल जांच होती थी. मुनाफे की दर तय थी. मिलावट करने वालों को कड़ी सजा दी जाती थी. ये प्रणाली आज भी चल रही है.

    खिलजी की सेना में सैनिकों का हुलिया लिखकर रखा जाता था. इसके साथ ही सेना के घोड़ों को दाग कर निशान लगाया जाता था. उससे पहले सैनिक अच्छी नस्ल के घोड़े सेना के अस्तबल से ले जाते और खराब घोड़े जमा करवा देते थे.

    खिलजी पहला शासक था जिसने स्थाई सेना सालाना तन्ख्वाह पर रखी. इसके अलावा वो जीतने पर लूटे गए खजाने का भी एक निश्चित हिस्सा भी सैनिकों को देता था.

    राशनिंग और डाक व्यवस्था के लिए मशहूर अलाउद्दीन खिलजी को दिल्ली के सीरी फोर्ट के लिए भी जाना जाता है. 1316 को ड्रॉप्सी, जलोदर के चलते खिलजी की मौत हो गई. खिलजी के करीबी माने जाने वाले मलिक काफूर ने इसके बाद गद्दी पर कब्जा कर लिया.

    राजनीति में इतिहास का इस्तेमाल खतरनाक
    कई इतिहासकार मानते हैं कि काफूर ने ही खिलजी को धीमा जहर दिया था. काफूर ने इसके बाद खिलजी के पूरे खानदान को खत्म करना शुरू किया. 36 दिन तक बादशाह रहे काफूर ने आदेश दिया कि शहजादों की आंखें तरबूज की तरह चीर कर निकालीं जाए. खिलजी के बेटों में एक मुबारक खिलजी इस बीच बच निकला. उसने अपने पिता के वफादार सैनिकों की मदद से सोते समय मलिक काफूर की गर्दन काट दी.

    हमारे देश के इतिहास में सिर्फ रक्तपात के लिए ही आम लोगों के मानस में बसे खिलजी की खूबियां कम ही लोगों को याद होंगी. मुल्क हजारों सालों में बनते हैं. लेकिन जब इतिहास का इस्तेमाल राजनीति के लिए होता है तो शासकों और बादशाहों की सिर्फ गढ़ी हुई तस्वीरें ही याद रह जाती हैं.

    (फर्स्टपोस्ट के लिए अनिमेष मुखर्जी)

  • बीजेपी नेता के खिलाफ मामला दर्ज़, कहा- मैं किसी को ‘पद्मावती’ नहीं देखने दूंगा

    बीजेपी नेता के खिलाफ मामला दर्ज़, कहा- मैं किसी को ‘पद्मावती’ नहीं देखने दूंगा

     

     

    गुड़गांव पुलिस ने
    फिल्म ‘पद्मावती’ के निर्देशक संजय लीला भंसाली और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का सिर कलम करने वालों को कथित तौर पर
    10 करोड़ रुपए इनाम देने की घोषणा करने वाले हरियाणा बीजेपी नेता सूरजपाल सिंह अमू के खिलाफ मामला दर्ज़ किया है.

    एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि भंसाली के एक प्रशंसक की ओर से बीजेपी हरियाणा इकाई के मुख्य मीडिया संयोजक अमू के खिलाफ शिकायत पर यहां सेक्टर 29 थाने में आईपीसी के तहत एक मामला दर्ज़ किया गया. हालांकि अमू अपने बयान पर कायम हैं और उन्होंने हरियाणा पुलिस को गिरफ्तार करने की चुनौती दी.

    वहीं कारण बताओ नोटिस मिलने के बावजूद सूरजपाल अमू ने मंगलवार को कहा कि वो किसी को फिल्म ‘पद्मावती’ नहीं देखने देंगे. उन्होंने दावा किया कि रानी पद्मावती के किरदार को फिल्म में गलत तरीके से दिखाया गया है.

    उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं फिल्म नहीं देखना चाहता और मैं किसी को भी इसे देखने नहीं दूंगा. अगर आप इसे गुंडागर्दी कहते हैं तो मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता.’ उन्होंने कहा, ‘फिल्म का ट्रेलर टेलीविजन और सिनेमा हॉल में दिखाया जा रहा है. ट्रेलर में जिस तरह का दृश्य मैंने देखा है, मुझे आपसे कहते हुए शर्म आती है.’उन्होंने कहा, ‘अगर फिल्म दिखायी गयी, आप जानते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है. समूचा क्षत्रिय समाज देश के सभी सिनेमा हॉलों को बर्बाद कर देगा.’

    (एजेंसी इनपुट के साथ)

  • ‘प्रदूषित हवा एक बच्चे के फेफड़ों को खतरे में डालती है’

    ‘प्रदूषित हवा एक बच्चे के फेफड़ों को खतरे में डालती है’

     

     

  • बढ़ेगा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों का वेतन, मोदी सरकार ने दी मंजूरी

    बढ़ेगा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों का वेतन, मोदी सरकार ने दी मंजूरी

     

     

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि को मंजूरी प्रदान कर दी.

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षा में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई.

    विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वेतन में वृद्धि के संदर्भ में संसद में एक विधेयक पेश किया जायेगा.

    उल्लेखनीय है कि साल 2016 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने इस बारे में सरकार को पत्र लिखा था और उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि की मांग की थी.उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को अभी वेतन और भत्ते से सभी तरह की कटौती के बाद प्रति माह 1.5 लाख रुपए प्राप्त होते हैं . प्रधान न्यायाधीश को थोड़ा अधिक वेतन प्राप्त होता है.

  • ओडिशा को ‘जगन्नाथ रसगुल्ला’ के लिए GI टैग की आस

    ओडिशा को ‘जगन्नाथ रसगुल्ला’ के लिए GI टैग की आस

     

     

    ओडिशा सरकार ने अब ओडिशा रसगुल्ला के बजाए जगन्नाथ रसगुल्ला के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग के लिए आवेदन करने का फैसला किया है. एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. इस मुद्दे पर कानूनी विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों के विचारों के बाद तैयार एक व्यापक रिपोर्ट के आधार पर उद्योगों के निदेशक ने ‘जगन्नाथ रसगुल्ला’ के लिए जीआई टैग के लिए एमएसएमई विभाग की फाइल की सिफारिश की है.

    एमएसएमई सचिव एल. एन. गुप्ता को लिखे पत्र में उद्योग के निदेशक स्मृति रंजन प्रधान ने कहा कि ‘ओडिशा रसगुल्ला’ का पंजीकरण होने की संभावना बहुत अधिक नहीं है. पत्र में कहा गया है, ‘जब तक यह स्थापित नहीं हो जाता है कि ओडिशा के रसगुल्ला में कुछ विशिष्ट गुण, अभिलक्षण और ख्याति है और अनिवार्य रूप से यह ओडिशा राज्य से जुड़ा हुआ है, तब तक ओडिशा रसगुल्ला को जीआई पंजीकरण मिलना मुश्किल है.’

    पत्र में कहा गया है कि चूंकि ओडिशा में तैयार किए जाने वाले बहुत सारे अलग-अलग प्रकार के मीठे व्यंजन हैं, इसलिए इस मिठाई से जुड़े किसी निश्चित विशिष्टता की पहचान करना मुश्किल होगा, इसलिए ओडिशा रसगुल्ला नाम से आवेदन करने का कोई लाभ नहीं मिलेगा. इसलिए यह सिफारिश की जाती है कि प्राचीन जगन्नाथ रसगुल्ला की अनोखी पहचान के लिए जीआई टैग के लिए आवेदन किया जाए, क्योंकि यह ओडिशा की जगन्नाथ संस्कृति का एक प्रमुख अनुष्ठान भी है.

    उद्योगों के निदेशक ने सुझाव दिया कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) या यहां तक कि सेवाकार संघ राज्य की ओर से भी जीआई टैग के लिए आवेदन दाखिल किया जा सकता है. एमएसएमई मंत्री प्रफुल्ल सामल ने कहा, ‘बंगाली रसगुल्ला पूरे देश का नहीं है. यह साबित करना जरूरी है कि रसगुल्ला का उद्गम भगवान जगन्नाथ के पवित्र गढ़ से है. इसलिए, मैं इतिहासकारों और शोधकतार्ओं से यह साबित करने के लिए अपील करता हूं कि रसगुल्ला की उत्पत्ति जगन्नाथ पीठ से हुई है. मेरा व्यक्तिगत विचार है कि रसगुल्ला ओडिशा का है.’कानून मंत्री प्रताप जेना ने कहा कि एमएसएमई विभाग को पुरी भगवान जगन्नाथ के रसगुल्ला के लिए जीआई टैग हासिल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

    जेना ने कहा कि इस हिसाब से एमएसएमई अधिकारियों ने पुरी में पहले ही एक निरीक्षण किया है. इसके अलावा, हमें जगन्नाथ मंदिर में रसगुल्ला के उपयोग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जांच करने की आवश्यकता है. यह महाप्रभु की निलाद्रि शुभ अवसर पर प्रमुख भोग (दिव्य भेंट) है.

  • पहली बार सुखोई-30 फाइटर जेट से हुआ ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण

    पहली बार सुखोई-30 फाइटर जेट से हुआ ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण

     

     

    ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का बुधवार को सुखोई-30 फाइटर जेट से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया. ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट से किया गया हो. इस मिसाइल को दो इंजनों वाले सुखोई विमान से बंगाल की खाड़ी में छोड़ा गया.

    ये मिसाइल दुश्मन की सीमा में घुसकर लक्ष्य भेदने में सक्षम है. ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की गति से करीब तीन गुना ज्यादा 2.8 मारक की गति से हमला कर सकती है. फाइटर जेट से मार करने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल के इस परीक्षण को ‘डेडली कॉम्बिनेशन’ कहा जा रहा है.

    ब्रह्मोस मिसाइल अंडरग्राउंड परमाणु बंकरों, कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर और समुद्र के ऊपर उड़ रहे एयरक्राफ्ट्स को दूर से ही निशाना बना सकती है. इस मिसाइल का वजन 2.9 टन होता है, लेकिन जिस मिसाइल का परीक्षण हुआ, उसका वजन 2.4 टन था.

    सेना ने 290 किलोमीटर की रेंज में जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को पहले ही अपने बेड़े में शामिल कर लिया है. इस मिसाइल के लिए 27,150 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए गए हैं.

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