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  • IFS अधिकारी का दावा, CVC ने बंद किए एम्स में भ्रष्टाचार के मामले

    IFS अधिकारी का दावा, CVC ने बंद किए एम्स में भ्रष्टाचार के मामले

     

     

    भ्रष्टाचार के मामलों के खुलासे के लिए रेमन मैग्सायसाय अवॉर्ड से नवाजे जा चुके भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने दावा किया है कि सीवीसी ने एम्स में भ्रष्टाचार के मामले बंद कर दिए हैं.

    संजीव ने कहा है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग ने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हुए भ्रष्टाचार के कई ऐसे मामले बंद कर दिए जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी कथित तौर पर शामिल थे.

    केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के. वी. चौधरी के खिलाफ जांच की मांग कर रहे संजीव ने अपने दावे के समर्थन में करीब 1,000 पन्नों के दस्तावेज हाल ही में राष्ट्रपति कार्यालय को भेजे हैं, उन्होंने राष्ट्रपति सचिवालय से सात मामलों का ब्यौरा साझा किया है. इन सात मामलों में एक उस वक्त का है जब एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पद पर संजीव की तैनाती के दौरान उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा था.

    भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सीवीसी की इकाई के तौर पर संजीव ने जुलाई 2012 से अगस्त 2014 तक एम्स में सीवीओ के रूप में सेवाएं दी थीं. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के कई मामले सीबीआई के संज्ञान में लाए. गहन जांच के बाद सीबीआई ने सीवीसी की ओर से बंद किए जा चुके चार मामलों में विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की और उनमें अधिकारियों एवं वरिष्ठ शिक्षकों को नामजद किया. संजीव द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के जरिए हासिल किए गए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है.सतर्कता नियमावली के मुताबिक, आपराधिक पहलू वाले भ्रष्टाचार के मामले संगठन के सीवीओ की ओर से पहले सीबीआई को भेजे जाते हैं. विभागीय कार्रवाई के मामलों पर सीवीसी के निर्देश के आधार पर कार्रवाई की जाती है. सीवीसी ने अपने जवाब में कहा कि हर मामले में रिपोर्ट का परीक्षण किया गया और उचित स्तर पर इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया गया. अपनी प्रतिक्रिया में सीवीसी ने कहा, ऐसी रिपोर्टें गोपनीय दस्तावेज होती हैं और आयोग की ओर से सलाह दिए जाते वक्त उचित अधिकारी की राय पर गौर किया जाता है.

  • डेंगू के इलाज का बिल 18 लाख रुपये, फिर भी नहीं बच सकी बच्‍ची

    डेंगू के इलाज का बिल 18 लाख रुपये, फिर भी नहीं बच सकी बच्‍ची

     

     

    डेंगू से पीड़ित सात साल की बच्ची के माता-पिता उस समय चौंक गए जब उनकी बेटी के इलाज के लिए डॉक्टरों ने उन्हें 18 लाख रुपए का बिल थमा दिया. ये मामला दिल्ली से सटे गुरुग्राम के फॉर्टिस हॉस्पिटल का है. हालांकि इसके बावजूद भी डॉक्टर आद्या नाम की इस बच्ची को बचा भी नहीं पाए.

    बच्ची के माता-पिता को जो बिल दिया गया वो करीब 19 पन्नों का था. इसमें 661 सीरिंज 2,700 दस्ताने और कुछ अन्य चीजों की कीमत शामिल थी जिसे कथित तौर पर इलाज के समय इस्तेमाल किया गया.

    दिल्ली के द्वारिका में रहने वाले बच्ची के पिता जयंत सिंह ने इलाज का खर्च एडवांस में दिया. हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में बिल की राशि बढ़ाई गई और मनमानी की गई. उन्होंने कहा इतने महंगे बिल के बाद भी आद्या की सेहत का ठीक तरह से ख्याल नहीं रखा गया.

    स्वास्थ्य मंत्री ने दिया कार्रवाई का आश्वासनइस घटना को संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ट्वीट किया कि कृपया घटना की सारी जानकारी मुझे hfwminister@gov.in पर दें. इस मामले में जरूरी कार्रवाई की जाएगी.

    इस मामले में अस्पताल प्रशासन ने किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया. अस्पताल की ओर से कहा गया कि इलाज के दौरान मानक चिकित्सा प्रक्रिया का पालन किया गया.

    अपने बयान में अस्पताल ने कहा कि बच्ची को काफी गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. बच्ची के इलाज में सारे स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल और गाइडलाइंस का ध्यान रखा गया.

    बच्ची के पिता का बयान
    न्यूज 18 से बात करते हुए बच्ची के पिता ने बताया कि फोर्टिस में रुकना हमारे लिए शुरुआत से ही नर्क जैसा था. बच्ची को डेंगू टाइप IV हो गया है इसका पता चलने के बाद 31 अगस्त को फोर्टिस अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था. द्वारका के रॉकलैंड अस्पताल के डॉक्टर्स ने उसे अस्पताल के पेडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट(पीआईसीयू) में शिफ्ट कराने के लिए कहा था.

    उन्होंने आगे बताया कि फोर्टिस आने पर काफी जोर देने पर आद्या को पीआईसीयू में भर्ती किया गया. उसे हर दिन 40 इंजेक्शन दिए जाने लगे. सस्ती दवाओं का विकल्प होने के बावजूद भी जानबूझकर बिल बढ़ाने के लिए उसे अस्पताल द्वारा महंगी दवाइयां दी गईं.

    फॉर्टिस का बयान
    इस मामले में फोर्टिस अस्पताल ने कहा कि आद्या डेंगू शॉक सिंड्रोम से जूझ रही थी. उसकी हालत को स्थिर बनाए रखने के लिए उसे लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था.

    बच्ची के परिवार को उसकी गंभीर हालत के बारे में और ऐसी स्थिति में इलाज के बारे में बता दिया गया था. परिवार को हर दिन बच्ची की सेहत के बारे में जानकारी दी जा रही थी.

    अस्पताल की तरफ से बयान में कहा गया कि 14 सितंबर को परिवार ने मेडिकल सलाह के खिलाफ जाकर बच्ची को अस्पताल से ले जाने का फैसला लिया और उसी दिन बच्ची की मौत हो गई.

  • दिल्‍ली हाईकोर्ट के 5 जजों को भेजा ‘पैगाम-ए-मौत’

    दिल्‍ली हाईकोर्ट के 5 जजों को भेजा ‘पैगाम-ए-मौत’

     

     

    दिल्‍ली में हाईकोर्ट के पांच जजों को धमकी भरा पत्र भेजने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है. बिना तारीख के इस अंतर्देशीय पत्र में जजों से 80 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई है. पैसे न देने पर जजों की मौत की धमकी दी है.

    जजों को भेजे गए इस पत्र पर पैगाम-ए-मौत लिखा है. धमकी भरी चिठ्ठी पाने वाले इन पांच लोगों में एक महिला जज भी शामिल हैं. मामले की गंभीरता देखते हुए दिल्‍ली पुलिस ने थाना तिलक नगर में एफआईआर दर्ज कर ली है.

    एफआईआर में दर्ज जानकारी के मुताबिक दिल्‍ली हाईकोर्ट के जज जीएस सिस्‍टानी,  जस्टिस गीता मित्‍तल, जस्टिस रविंद्रन, जस्टिस संजीव खन्‍ना, जस्टिस मुरलीधर को पैगाम ए मौत और तुम्‍हारी मौत नाम से पत्र भेजे गए हैं.

    इन पत्रों में लिखा है कि 80 लाख रुपये की रकम धौला कुंआ गे पार्क में लेकर आएं अौर प्रमोद व राजेंद्र से मिलें. जस्टिस सिस्‍टानी को लिखा गया है कि वे रकम लेकर आएं, वरना मरने के लिए तैयार रहें. धमकी दी गई कि जस्टिस और उनके स्‍टाफ को जहर देकर मौत की नींद सुला दिया जाएगा.पुलिस ने आइपीसी की धारा 387/506/507 के तहत मामला दर्ज कर लिया है. इसके साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है. वहीं पुलिस धमकी भरे पत्रों में दिए गए दोनों नामों और नंबरों की भी जांच की जा रही है.

  • हैदराबाद: 26 लाख रुपये के साथ फर्जी CBI ऑफिसर गिरफ्तार

    हैदराबाद: 26 लाख रुपये के साथ फर्जी CBI ऑफिसर गिरफ्तार

     

     

    हैदराबाद के आरजीआई हवाई अड्डे पर पुलिस ने फर्जी सीबीआई अधिकारी मखनवाजुल्ला नागेश्वर राव को 26 लाख रुपए की नकदी के साथ गिरफ्तार किया है. आरोपी के पास से सीबीआई का फर्जी आईडी कार्ड भी बरामद हुआ है.

    आरोपी हैदराबाद से विजयवाड़ा जा रहा था, एयरपोर्ट में चेकिंग के दौरान उसके पास के 26 लाख रुपए की  नकदी मिली. पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि, उसका कोई जमीन विवाद है, जिसके लिए 26 लाख रुपयों की जरूरत है, इतना ही नहीं आरोपी ने पुलिस को सीबीआई का कार्ड दिखाकर रौब झाड़ने की कोशिश की और यही उसे महंगा पड़ गया.

    पुलिस ने सीबीआई डिपार्टमेंट से आरोपी के बारे में पूछा तो पता चला कि इस आईडी नंबर का कोई ऑफिसर नहीं है. तब पुलिस ने उन्हें रोककर आयकर विभाग के हवाले कर दिया.

    आरोपी ने इस फर्जी कार्ड के माध्यम से न सिर्फ पैसे कमाए, बल्कि पंचायत विभाग के कर्मचारी और आंध्रप्रदेश सचिवालय में भी काम किया. फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है.

  • गुजरात: टिकट बंटते ही पाटीदार नेताओं में फूट, कांग्रेस में भी उठापटक

    गुजरात: टिकट बंटते ही पाटीदार नेताओं में फूट, कांग्रेस में भी उठापटक

     

     

    गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की पहली सूची जारी होने के साथ ही हंगामा और बवाल भी शुरू हो गया है. पाटीदार अनामत आंदोलन समिति(पास) के सदस्‍यों में फूट पड़ गई है. कांग्रेस ने ललित वसोया और अमित ठुम्‍मर सहित तीन लोगों को टिकट दिया है.

    सूरत में पाटीदारों ने कांग्रेस कार्यालय पर हंगामा किया और तोड़फोड़ की. सूरत की कामरेज सीट से पास संयोजक नीलेश कुम्‍भाणी को टिकट दिया गया है. पास कार्यकर्ताओं ने उन्‍हें टिकट दिए जाने का विरोध है.

    हंगामा बढ़ने के बाद पाटीदार नेता दिनेश बाभणिया ने प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष भरत सिंह सोलंकी से मुलाकात की है. उन्‍होंने बताया कि पास की अनुमति के बिना कोई भी संयोजक फॉर्म नहीं भरेगा.

    पाटीदार आंदोलन से जुड़े नेताओं को टिकट देने को लेकर रविवार शाम को कांग्रेस और पाटीदार नेताओं ने बैठक की थी.इधर, भरुच में किरण ठाकोर को टिकट मिलने पर युसूफ मलिक विरोध में उतर आए हैं, उन्‍होंने निर्दलीय को समर्थन देने का ऐलान किया है. भावनगर में भी पाटीदारों ने कांग्रेस कार्यालय पर हंगामा किया.

    बता दें कि कांग्रेस ने 77 उम्‍मीदवारों की पहली सूची जारी की है. इसमें सबसे ज्‍यादा 20 पटेलों को टिकट दिया गया है. इसके बाद ओबीसी का नंबर आता है इस वर्ग से 19 प्रत्‍याशी उतारे गए हैं.

  • सुपरबॉग्ज अस्पताल से बाहर निकलते हुए कहते हैं, अध्ययन कहते हैं

    सुपरबॉग्ज अस्पताल से बाहर निकलते हुए कहते हैं, अध्ययन कहते हैं

     

     

    ड्रग प्रतिरोधी उपभेदों में उच्च मृत्यु दर है – जिनमें से ज्यादातर मामलों में आम तौर पर लोगों के बीच देखा जाता था जो हाल ही में एक अस्पताल में थे – अब उन लोगों तक फैल रहे हैं जिनके पास तीन महीने से अधिक समय तक किसी भी स्वास्थ्य सेवा केंद्र से कोई संपर्क नहीं है, हाल ही में एक अध्ययन पता चला।

    सामुदायिक-प्राप्त संक्रमणों के 201 रोगियों पर क्रिटिकल केयर विभाग, सर गंगा राम अस्पताल और इसकी संबद्ध सिटी हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है। जर्नल ऑफ़ क्रिटिकल केयर

    सर गंगा राम अस्पताल विभाग के अध्ययन और उपाध्यक्ष के उपाध्यक्ष डॉ सुमित राय ने कहा, “समुदाय द्वारा अधिग्रहीत और अस्पताल द्वारा अधिग्रहीत संक्रमणों के बीच का अंतर तेजी से धुंधला हो रहा है।” इसके मुख्य कारण क्लासिकल ‘अस्पताल’ उपभेदों, विशेष रूप से प्रतिरोधी क्लेबसीला और ई। कोली, समुदाय में और इसके विपरीत में फैल रहे हैं और लंबे समय से स्थायी अंतर्निहित बीमारियों वाले अस्पतालों में व्यक्तियों का दोबारा प्रवेश।

    बिल्डिंग प्रतिरोध

    “इसके अलावा, मेडिकल पर्यवेक्षण के बिना अक्सर आसानी से उपलब्ध एंटीबायोटिक दवाओं के माध्यम से समुदाय को एंटीबायोटिक प्रतिरोध का योगदान संभावित संक्रमणों के बढ़ते जलाशय के रूप में हुआ है,” डॉ रे ने कहा।

    उन्होंने कहा कि समुदाय में मरीजों द्वारा अनुबंधित जीवों द्वारा उच्च अंत एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोध “चिंता का कारण है और आगे की शोध और उचित कार्य योजना की आवश्यकता है”

    बहु-औषध प्रतिरोधी जीवों के कारण संक्रमण दुनिया भर में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन गए हैं।

    अध्ययन – समुदायों में विस्तारित स्पेक्ट्रम बीटा लैक्टामेस (ईएसबीएल) सकारात्मक संस्कृतियों के साथ उच्च मृत्यु की एसोसिएशन – समुदाय में माइक्रोबियल प्रतिरोध पैटर्न के स्पेक्ट्रम की जांच और मृत्यु दर पर उनके प्रभाव की जांच के लिए आयोजित किया गया था।

    अध्ययन में यह लिखा गया है कि बहु-औषध प्रतिरोधी जीवों के कारण संक्रमण, विशेष रूप से विस्तारित स्पेक्ट्रम बीटा लैक्टमैसेस का उत्पादन दुनिया भर में प्रमुख चिंता का विषय है।

    नई पीढ़ी

    ईएसबीएल ऐसे जीव हैं जो विभिन्न नए पीढ़ी के एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हैं और आसानी से समुदाय को स्थानांतरित कर सकते हैं।

    इन प्रतिरोधी संक्रमणों ने इन रोगियों के उपचार में चिकित्सकों के लिए चिकित्सीय चुनौतियों का सामना किया है और इसलिए उच्च रोग और मृत्यु दर से जुड़ा हो सकता है।

    डॉ। रे ने कहा, “हमारे परिणामों में उल्लेखनीय बिंदु ईकाली के उभरते समुदाय के सबसे आम बैक्टीरिया के रूप में हैं, जो बीसीटीएल के नकारात्मक मुकाबले की तुलना में बैक्टेरामेमी, श्वसन और मूत्र पथ के संक्रमण और ईएसबीएल सकारात्मक उत्पादकों में उच्च मृत्यु दर पैदा करते हैं।”

    201 रोगियों में से अध्ययन किया गया, 63.44% ई। कोलाई को अनुबंधित किया गया था ESBL उत्पादक

    समाज में चलना

    यह अस्पताल-अधिग्रहीत संक्रमणों में उच्च अंत एंटीबायोटिक दवाओं में वृद्धि हुई प्रतिरोध पैटर्न को दर्शाता है क्योंकि तीसरे पीढ़ी के बीटा लैक्टम एंटीबायोटिक दवाओं जैसे किफ्लोस्पोरिन का अनजान प्रारंभिक उपयोग होने के कारण, जो कि इसके “समुदाय के मध्यस्थता हस्तांतरण संयुग्मन के दौरान आनुवांशिक सामग्री “, अध्ययन ने नोट किया

    डॉ। देबाशीष धर, क्रिटिकल केयर विभाग में सलाहकार, सिटी अस्पताल, जो अनुसंधान दल और कागज के सह-लेखक का हिस्सा थे, ने कहा था: “हमारे अध्ययन में, समुदाय द्वारा अधिग्रहीत संक्रमणों से पृथक मुख्य रोगजनन ई थे। कोली (46.2%) के बाद क्लेबसीला निमोनिया (13.9%) और एस। ऑरियस (13.9%)। ”

  • मुस्लिम परिवार कानून के लिए विधेयक लाए सरकार :BMMA

    मुस्लिम परिवार कानून के लिए विधेयक लाए सरकार :BMMA

     

     

    भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने तीन तलाक को लेकर विधेयक लाए जाने की सरकार की योजना का स्वागत किया है. बीएमएमए ने कहा कि सरकार हिंदू विवाह कानून की तर्ज पर एक ‘मुस्लिम परिवार कानून’ बनाने के लिए ऐसा विधेयक लायें, जो कुरान पर आधारित हो और देश के संविधान से भी मेल खाता हो.

    बीएमएमए की संस्थापक जकिया सोमन ने कहा, सरकार का कदम स्वागत योग्य है. लेकिन मामला सिर्फ तीन तलाक का नहीं है. निकाह हलाला, बहुविवाह और कई दूसरे ऐसे मुद्दे हैं जिनका समाधान मुस्लिम महिलाओं के लिए जरूरी है. ऐसे में हमारी मांग है कि सरकार हिंदू विवाह कानून की तर्ज पर मुस्लिम परिवार कानून बनाने के लिए विधेयक लाए जो कुरान पर आधारित हो और हमारे देश के संविधान से भी मेल खाता हो.

    उन्होंने कहा, हाल ही में हमने सभी महिला सांसदों, कानून मंत्री और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री को पत्र लिखकर कानून बनाने की मांग की थी. तीन तलाक के मामले में बीएमएम पिछले कई वर्षों से अभियान चला रहा है. सरकारी सूत्रों ने कहा कि सरकार एक बार में तीन तलाक की प्रथा को खत्म करने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने पर विचार कर रही है और इसको लेकर मंत्री स्तरीय समिति का गठन किया गया है.

    यह भी पढ़ें: तीन तलाक रोकने के लिए संसद में बिल लाएगी सरकार

  • एससी में सरकार के खिलाफ अवमानना ​​याचिका दायर करने के लिए भाजपा

    एससी में सरकार के खिलाफ अवमानना ​​याचिका दायर करने के लिए भाजपा

     

     

    बीजेपी ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (एएपी) सरकार पर पर्यावरण सेस निधि का “उपयोग नहीं” करने पर हमला किया और कहा कि वह मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना ​​याचिका दायर करेगा।

    “20 अक्टूबर 2015 को, दिल्ली सरकार ने दिल्ली में प्रवेश करने वाले सभी सामानों के वाहनों पर एक पर्यावरण उपकर लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एक अधिसूचना जारी की। दिल्ली से भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि सरकार एससी को एकत्रित सेस के त्रैमासिक खाते दे सकती है।

    सड़कों की सफाई और मरम्मत के अतिरिक्त सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए यह निधि का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन केजरीवाल की अगुवाई वाली सरकार ने एससी को उपकर दे दिया और न ही इन क्षेत्रों में सुधार के लिए कुछ भी किया। जोड़ा।

    ‘लोगों का विश्वासघात’

    श्री तिवारी ने कहा कि भाजपा दिल्ली के लोगों के “विश्वासघात” के खिलाफ एससी को आगे बढ़ाएगा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी अवमानना ​​याचिका दायर करेगी। सूत्रों ने बताया कि पार्टी अगले सप्ताह एससी के पास जाने का इरादा है।

    “सत्ता में आने के बाद, केजरीवाल की अगुवाई वाली सरकार का इरादा दिल्ली में बस सेवा का निजीकरण था इस सरकार ने प्रीमियम ऐप बस सेवा के नाम पर निजीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी देने की कोशिश की, जिसे भाजपा ने मजबूत विपक्ष के कारण वापस ले लिया था। “तिवारी ने कहा

    दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में डीटीसी और क्लस्टर योजना के तहत बसों की कुल संख्या 5,500 थी और वर्तमान में डीटीसी के पास 260 एकड़ के डिपो क्षेत्र में 7,500 बसें पार्क करने की सुविधा थी।

    उन्होंने कहा कि सरकार अगले 2 साल तक 2,000 नए बसों को पार्क करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराएगी।

    ‘डिपो के लिए पर्याप्त जमीन’

    “इसके अलावा, डीडीए रोहिणी में बस डिपो के लिए सरकार को 32 एकड़ जमीन दे रही है। द्वारका और रानी खेड़ा में बस डिपो के लिए भूमि आवंटित की गई है, लेकिन एएपी सरकार ने इन साइटों पर कोई काम नहीं किया है, जहां 1,000 बसों को पार्क किया जा सकता है। इस तरह, वर्तमान में सरकार 9,000 बसों के लिए पार्किंग की जगह है। ”

    रोहिणी के विधायक ने कहा कि बस डिपो के लिए जमीन की कमी के बारे में एएपी सरकार की शिकायत है और 132 एकड़ जमीन की मांग के कारण “प्रदूषण संकट को हल करने में असफलता से जनता का ध्यान हटाने की प्रेरणा थी”।

  • MP में Nathuram Godse की मूर्ति जब्त, 6 दिन पहले बना था बापू के हत्यारे का मंदिर

    Seize the statue of Nathuram Godse in MP

    मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुलिस ने हिंदू महासभा के कार्यालय से Nathuram Godse की मूर्ति जब्त कर ली है. महासभा ने बगैर अनुमति के गोडसे का मंदिर बनाया था और यहां सोमवार से आरती और पूजा भी शुरू कर दी गई थी.
    महात्मा गांधी के हत्यारे का मंदिर बनने की खबर से पूरे देश में बवाल मच गया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने हिंदू महासभा को नोटिस जारी कर कहा था कि यह मंदिर निर्माण पूरी तरह अवैध है, क्योंकि इसके लिए किसी से अनुमति नहीं ली गई है. हिंदू महासभा ने नोटिस का जवाब दिया है, जिससे प्रशासन संतुष्ट नहीं था.

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    विडियो: अस्पताल के गेट पर ही कराया महिला का प्रसव

    कांग्रेस कर रही है विरोध

    गोडसे का मंदिर बनाये जाने पर भड़की कांग्रेस सूबे में सत्तारुढ़ भाजपा के खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इसके खिलाफ बयान दिया है और सूबे के हर जिले में मौन प्रदर्शन भी किया. कांग्रेसियों ने ऐलान किया है कि यदि तय समयसीमा में गोडसे की मूर्ति नहीं हटाई गई तो उसे तोड़ दिया जाएगा.

    read more-यूपी के पूर्व सीएम एनडी तिवारी की हालत गंभीर, सीएम योगी मिलने पहुंचे

    भाजपा कार्यकर्ताओं की समस्याओं का तुरंत हो निदान

  • कार और मोटरसाइकिल रैली ‘लिंग-तटस्थ’ कानूनों की तलाश है

    कार और मोटरसाइकिल रैली ‘लिंग-तटस्थ’ कानूनों की तलाश है