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  • ‘बदलाव के साथ ही रिलीज हो पद्मावती’, स्मृति को राजे की चिट्ठी

    ‘बदलाव के साथ ही रिलीज हो पद्मावती’, स्मृति को राजे की चिट्ठी

     

     

    फिल्म ‘पद्मावती’ पर विवाद राजनीतिक रूप लेता जा रहा है. कांग्रेस नेता शशि थरूर, ज्योतिरादित्य सिंधिया और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बाद अब राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे इस विवाद में कूद पड़ी हैं. उन्होंने फिल्म की रिलीज को लेकर स्मृति ईरानी को चिट्ठी लिखी है.

    सीएम वसुंधरा राजे ने सूचना व प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी से गुजारिश की है कि ‘पद्मावती’ फिल्म जरूरी बदलाव के साथ ही रिलीज हो. ताकि, किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे. राजे ने लिखा- “इस संबंध में सेंसर बोर्ड को भी फिल्म प्रमाणित करने से पहले इसके सभी संभावित नतीजों पर विचार करना चाहिए.”

    फिल्म पर विचार के लिए बने कमेटी
    राजस्थान की सीएम ने लिखा- “प्रसिद्ध इतिहासकारों, फिल्मी हस्तियों और पीड़ित समुदाय के सदस्यों की एक कमेटी गठित की जाए, जो इस फिल्म और इसकी स्क्रिप्ट पर विस्तार से विचार करे.”

    किसी की भावनाएं न हो आहत
    वसुंधरा राजे ने लिखा- “फिल्म निर्माताओं को अपनी समझ के अनुसार फिल्म बनाने का अधिकार है, लेकिन इससे कानून व्यवस्था, नैतिकता और नागरिकों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए. अगर ऐसा होता है तो तर्क के आधार पर नियंत्रण रखने का प्रावधान भारत के संविधान में है. ऐसे में पद्मावती फिल्म की रिलीज पर पुनर्विचार किया जाए.”

    योगी सरकार ने भी जताई थी आपत्ति
    बता दें कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी मौजूदा हालात में फिल्म के रिलीज होने को राज्य की शांति व्यवस्था के लिए खतरा बताया था. यूपी के गृह विभाग ने इस बारे में केंद्रीय सूचना व प्रसारण सचिव को चिट्ठी भी लिखी थी.

    महाराजाओं पर कमेंट से निशाने पर आ गए थे थरूर
    बता दें कि फिल्म ‘पद्मावती विवाद’ के बीच राजपूतों और महाराजाओं पर कमेंट को लेकर कांग्रेस नेता शशि थरूर को कई नेताओं ने निशाने पर लिया था. पहले थरूर को उनके ही पार्टी के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लताड़ा. फिर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी शशि थरूर से भिड़ गई थीं. उन्होंने थरूर के कमेंट को लेकर ट्विटर पर तीन कांग्रेसी नेताओं से जवाब मांगा था.

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    किसी भी कारण नहीं टलेगी ‘पद्मावती’ की रिलीज

    ‘पद्मावती’ का विरोध कोलकाता तक पहुंचा

    हॉलीवुड भी पद्मावती के सपोर्ट में, रूबी रोज ने किया ट्वीट

  • अकाली दल ने किया दयाल सिंह कॉलेज के नाम बदलने का विरोध

    अकाली दल ने किया दयाल सिंह कॉलेज के नाम बदलने का विरोध

     

     

    शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली के दयाल सिंह (ईवनिंग) कॉलेज का नाम बदलकर ‘वंदे मातरम महाविद्यालय’ करने के फैसले का विरोध किया है.

    सिरसा ने कहा कि यह एस दयाल सिंह मजीठिया के प्रयासों का नतीजा है कि इस कॉलेज को 1960 में लीज पर जमीन मिली. उन्होंने एक बयान में कहा कि मजीठिया ने देश के एक प्रमुख समाजसेवी के रूप में बड़ा योगदान दिया.

    उन्होंने कहा, यह कॉलेज दयाल सिंह ट्रस्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा है. नाम बदलने का मतलब उनकी विरासत को नकारना है. इसे कोई बर्दाश्त नहीं करेगा.

  • गुजरात चुनाव से पहले होगी राहुल की ताजपोशी, CWC ने बुलाई मीटिंग

    गुजरात चुनाव से पहले होगी राहुल की ताजपोशी, CWC ने बुलाई मीटिंग

     

     

    गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले ही राहुल गांधी की ताजपोशी हो सकती है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने सोमवार को अहम मीटिंग बुलाई है. मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के 10 जनपथ में सोमवार सुबह 10:30 बजे बुलाई गई है. सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग में राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने पर मुहर लग सकती है.

    बता दें कि कांग्रेस सेंट्रल इलेक्शन कमेटी ने सोनिया गांधी को चुनाव का प्रस्तावित शेड्यूल दे दिया था. इसपर उन्होंने विचार कर लिया है. अब कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में इसपर मुहर लगाई जाएगी. इसके बाद कल तय हो जाएगा कि राहुल गांधी कब कांग्रेस अध्यक्ष बनेंगे.

    कल होगा चुनाव के शेड्यूल का ऐलान
    कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग के बाद पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के शेड्यूल का ऐलान होगा, जो करीब 10 से 15 दिन का होगा. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए किसी अन्य नेता ने नॉमिनेशन फाइल नहीं किया, तो राहुल गांधी का अध्यक्ष बनना तय है.9 दिसंबर के पहले ही हो सकते हैं चुनाव
    संभावना ये ही जताई जा रही है कि राहुल के खिलाफ कोई भी नेता पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में खड़ा नहीं होगा. सूत्रों के मुताबिक, चुनाव 9 दिसंबर यानी गुजरात चुनाव के पहले ही कराए जा सकते हैं. बता दें कि 9 दिसंबर को गुजरात में पहले चरण के चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे.

    पार्टी अध्यक्ष बनने पर राहुल के लिए चुनौती होगा गुजरात चुनाव
    कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद गुजरात चुनाव राहुल गांधी की साख का सवाल हो जाएगा. ‘घर घर कांग्रेस’ कैंपेन के साथ कांग्रेस गुजरात चुनाव में भावनात्मक रूप से लोगों के साथ जुड़ने की पूरी कोशिश कर रही है. हालिया रैलियों में उन्होंने गुजरात में काफी माहौल बनाया है. उनकी छवि दिनोंदिन और बेहतर होती जा रही है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी इन चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं.

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  • गुजरात: कांग्रेस या BJP, किस तरफ जाएं मुस्लिम?

    गुजरात: कांग्रेस या BJP, किस तरफ जाएं मुस्लिम?

     

     

    पूर्वी सूरत के विधानसभा क्षेत्र 159 से वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलीम भाई पटेल पूछते हैं, ‘यह गुजरात है या उत्तर प्रदेश?’ वह कांग्रेसी नेताओं द्वारा गुजराती वोटरों के संप्रदायों में बांटे जाने के बारे में बात कर रहे हैं. एक ओर हार्दिक पटेल हैं जो कि पाटीदारों को कांग्रेस के पक्ष में लाने में जुटे हुए हैं, दूसरी ओर, अल्पेश ठाकुर ओबीसी और जिग्नेश मेवानी दलित नेता के तौर पर उभरे हैं.

    इन तीन युवा तेज तर्रार नेताओं के कांग्रेस की तरफ झुकाव से गुजरात में पार्टी की जीत की उम्मीदें पैदा हो रही हैं. राहुल गांधी नरम हिंदुत्व का सहारा लेते हुए पूरे गुजरात में एक के बाद एक मंदिरों में जा रहे हैं.

    पिछले 22 साल से गुजरात पर बीजेपी का शासन है. ऐसे में सपोर्ट के लिए मुस्लिम वोटरों को कांग्रेस में एकमात्र उम्मीद नजर आ रही थी. अब पार्टी का ध्यान दूसरे समूहों पर बढ़ने के साथ मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना घर कर रही है. दक्षिणी गुजरात में पहले चरण में 9 दिसंबर को चुनाव होने हैं और 21 नवंबर नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख है.

    सलीम के विधानसभा क्षेत्र 159 में 2.6 लाख वोटरों में करीब 92,000 मुस्लिम हैं. कुछ दिन पहले इसी इलाके के नानपुरा के चौक बाजार जैसी जगहों पर कांग्रेस विरोधी पोस्टर नजर आए. इन पोस्टरों में कांग्रेस को संदेश दिया गया था कि अगर पार्टी मुस्लिमों को प्रतिनिधित्व नहीं देगी तो उसे मुस्लिम वोट भी नहीं मिलेंगे.हालांकि, स्थानीय कांग्रेस नेताओं द्वारा समझाए जाने पर इन पोस्टरों को हटा लिया गया. लेकिन, माहौल में तनाव नजर आ रहा है क्योंकि इस बात के कयास हैं कि कांग्रेस सूरत वेस्ट से किसी मुस्लिम उम्मीदवार को उतार सकती है.

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    मुस्लिम इलाकों में पहुंचने पर साफ सुथरे, विकसित सूरत वाली तस्वीर नहीं दिखतीं

    इस इलाके में करीब 5,000 से 10,000 मुस्लिम हैं. इस इलाके में रहने वाले और करीब एक दशक से कांग्रेस से जुड़े हुए मुकद्दर रंगूनी कहते हैं, ‘इस इलाके से मुस्लिम कैंडिडेट जीत सकता है. हमारे लिए अपने प्रतिनिधित्व को जिंदा रखना जरूरी है. बीजेपी हमारी मौजूदगी से ही इनकार करती है. उनकी पार्टी से कोई यहां नहीं आया. यहां तक कि बाढ़ के दौरान सड़कों पर जलभराव होने पर भी कोई यहां नहीं आया. यहां के लोगों ने गुजरात पर शासन करने वाले विधायकों, सांसदों की शक्ल तक नहीं देखी है. इन लोगों के लिए उम्मीद की एकमात्र किरण कांग्रेस है और अगर वे हमें निराश करेंगे तो इसके बुरे परिणाम निकल सकते हैं.’

    रंगूनी के घर तक पहुंचने के लिए आपको गलियों से होकर गुजरना पड़ता है जहां पर फर्नीचर, टायर और कबाड़ी वालों की दुकानें सड़कों तक पसरी हुई हैं. गलियां ग्रीस, मुर्गे-मुर्गियों के पंखों की गंदगी से पटी हुई हैं और बकरियां इधर-उधर बैठी नजर आती हैं. इस इलाके में अकेले मुकद्दर ही नाखुश नहीं हैं.

    रोड-रास्ता-गटर के साथ ही यहां के लोग नौकरियों की भी मांग कर रहे हैं. इनका आरोप है कि निचले स्तर की नौकरियां हिंदुओं को दी जाती हैं. वहीं निजी एंप्लॉयर्स उनके पिनकोड के चलते उन्हें नौकरियां देने से इनकार कर देते हैं.

    सीधी सड़क के दूसरे छोर पर हिंदू कहार समाज के लोग रहते हैं. मुकद्दर बताते हैं, ‘2014 में इस इलाके में दंगे हुए और उस वक्त भी कांग्रेस या बीजेपी का कोई बड़ा नेता मतभेदों को खत्म कराने यहां नहीं आया.’ मुकद्दर पूर्वी सूरत मलिन बस्तियों में हिंदू-मुस्लिम एकता समाज चलाते हैं.

    मुकद्दर एक और प्रमुख मसले की ओर संकेत करते हैं. वह शहरी निकाय के सीमांकन में हुए बदलावों के बारे में बताते हैं. यह काम हर पांच-छह साल में होता है. वह पूछते हैं, ‘गोपीपुरा पारंपरिक रूप से बीजेपी का वोट बेस है, इसे हमारे इलाके में क्यों मिला दिया गया है?’ वह बताते हैं कि ओबीसी, झुग्गी और मुस्लिमों की गैरमौजूदगी वाले इलाकों को कांग्रेस के वोट कम करने के लिए उनके क्षेत्र से मिला दिया है. इस तबके को पारंपरिक तौर पर कांग्रेस का समर्थक माना जाता है.

    पूराने सूरत पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों की सत्ता देख चुके एक वरिष्ठ नागरिक नूर मुहम्मद कहते हैं कि शासन ने पूरी तरह से मुस्लिमों के अस्तित्व को ही नकार दिया है. उन्हें लगता है कि बीजेपी ने कई तरीकों से यह संदेश दिया है कि ‘आपका वोट हमें नहीं चाहिए.’ इनमें से एक तरीका निश्चित तौर पर किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं देने का है. लेकिन, वोट नहीं मांगने का मतलब यह नहीं है कि वोट बेस ही नहीं है. यहां के स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीजेपी स्थानीय लोकप्रिय नेताओं को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए रिश्वत देती है. कुछ को 50,000 रुपये मिलते हैं, तो कुछ को 1-2 लाख रुपये भी उनकी लोकप्रियता के हिसाब से दिए जाते हैं.

    यहां के ज्यादातर नागरिकों की अभी भी प्रतिक्रिया यही है कि ‘हम तो अभी भी कांग्रेस को ही वोट देंगे.’ वे भले ही निराश हैं और गुस्से में हैं, लेकिन पूर्वी सूरत में 42 फीसदी वोटरों के लिए किसी विकल्प के न होने से शायद वे अभी भी कांग्रेस को छोड़कर कहीं और जाने की स्थिति में नहीं हैं.

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    सूरत के मुस्लिम इलाकों के कई आवेदन उनके पिनकोड देखकर कैंसल हो जाते हैं.

    दूसरी ओर, बीजेपी को लगता है कि सांप्रदायिक सोच के चलते वे अभी भी कांग्रेस से जुड़े हुए हैं. इस इलाके से मौजूदा बीजेपी विधायक रंजीत भाई गिलितवाला ने कहा कि पार्टी ने मुस्लिमों तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे.

    [object Promise]गुजरात में हिंदू घरों में जिन मटकों से पानी पिया जाता है, वे मुस्लिमों के बनाए हुए होते हैं. जब कारोबार की बात आती है तो दोनों समुदाय सौहार्द से काम करते हैं. केवल चुनाव के मौके पर कांग्रेस बीजेपी को एक सांप्रदायिक पार्टी साबित करती है.


    बीजेपी विधायक रंजीत भाई गिलितवाला

    वह बताते हैं कि लगातार इस तरह की छवि बनाने से मुस्लिम वोटर्स पार्टी से दूर बने हुए हैं.

    1997 में बने गुजरात अल्पसंख्यक वित्त और विकास निगम की वित्तीय सहयोग योजना का 400 करोड़ रुपये का फंड है. यह एजेंसी छोटे कारोबारों और स्वरोजगार के लिए 3 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद देने की स्कीम चलाती है. इसके अलावा भारत में उच्च शिक्षा और वोकेशनल ट्रेनिंग के लिए 7.50 लाख रुपये, कृषि विकास के लिए 5 लाख रुपये तक, किराए पर चलाने के मकसद से खरीदी जाने वाली गाड़ियों के लिए 5 लाख रुपये तक और दिमागी रूप से कमजोर लोगों की मदद के लिए 3.5 लाख रुपये तक की मदद वाली योजनाएं यह एजेंसी चलाती है.

    अल्पसंख्यकों के लिए सरकार के उठाए गए कदमों के बारे में गुजरात गवर्नमेंट माइनॉरिटी फाइनेंस एंड डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन एम के चिश्ती, जो कि एक सूफी संत हैं, हज कोटा के बारे में बताते हैं. वह कहते हैं कि गुजरे तीन साल में यह कोटा 4,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है. वह कहते हैं कि बीजेपी सदस्यता अभियान से राज्य में मुस्लिम प्राइमरी वोटरों की संख्या बढ़कर 5 लाख हो गई है. वह यह भी बताते हैं कि गुजरात कर्फ्यू और हिंसा मुक्त पहला राज्य बन गया है और मुस्लिमों की साक्षरता दर करीब 80 फीसदी पर पहुंच गई है. वह कहते हैं कि बीजेपी मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति दिलाने जैसे ठोस काम कर रही है, जबकि राहुल गांधी केवल सॉफ्ट-हिंदुत्व का सहारा ले रहे हैं जिससे वोटर्स नाराज हो रहे हैं.

    विधानसभा क्षेत्र 159 के काफी नजदीक जीवन ज्योति थियेटर के दूसरी ओर बीजेपी हेडक्वॉर्टर पर सूरत के पार्टी अध्यक्ष नितनभाई ठाकर ने स्थानीय मुस्लिमों द्वारा लगाए गए कांग्रेस विरोधी पोस्टरों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. उन्होंने इसे पार्टी और मुस्लिमों के बीच का मसला बताया.

    सत्ताधारी पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर किसी मसले पर लोगों के विरोध के बारे में क्या ज्यादा उत्सुकता नहीं होनी चाहिए? मुकद्दर कहते हैं कि पूर्वी सूरत की दिक्कत यह है कि हम वोटर पहले हैं और नागरिक बाद में. वह कहते हैं कि सूरत नगरपालिका से पूछा जाना चाहिए कि गुजरे सालों में निचले स्तर की हजारों नौकरियों में कितने मुस्लिमों को मौका मिला है.

    नौकरी के आवेदनों को पिनकोड के आधार पर खारिज किए जाने के चलते बीकॉम और बीए डिग्री धारकों को सफाई कर्मचारी या बिस्कुट बेचने जैसे काम अपनाने पड़ रहे हैं. वह बताते हैं कि लैंडलाइन टेलीफोन की रिक्वेस्ट भी अधिकारी इस आधार पर खारिज कर देते हैं क्योंकि वे ‘एम क्लास’ (एमः मुस्लिम) से ताल्लुक रखते हैं.

    कांग्रेस को लेकर वफादारी पहले इमोशनल थी जो अब बेचैनी भरी हो गई है. लोग किसी भी ऐसे शख्स को चाहते हैं जो कि सेफ्टी और विकास की उन्हें गारंटी दे सके. हालांकि, जिस पार्टी पर उन्हें पूरा भरोसा था उन्हें निराशा मिली है, लेकिन एक वर्ग ऐसा है जो कि ‘काम करो आने वोट ले जाओ’ (काम करो और वोट पाओ) को मानता है.

    यह गुजरात की उस मानसिकता को दिखाता है जिसमें काम को प्रभावी और शांतिपूर्ण तरीके से करने को तरजीह दी जाती है. इस इलाके के 26 साल के एडवर्टाइजिंग आंत्रप्रेन्योर मुहम्मद साहिब को लगता है कि कोई हिंदू कैंडिडेट शायद ज्यादा बेहतर आइडिया है क्योंकि कोई मुस्लिम चेहरा इस इलाके को और सांप्रदायिक कर सकता है, जबकि निचले तबके के मुस्लिमों की तमाम जरूरतों को पूरा करने वाले किसी संवेदनशील शख्स की आज जरूरत ज्यादा है.

    (Pallavi Rebbapragada)

  • गुजरात: ‘कुछ नहीं होगा मोदीजी है’ वीडियो पर बवाल

    गुजरात: ‘कुछ नहीं होगा मोदीजी है’ वीडियो पर बवाल

     

     

    गुजरात में एक और विवादास्पद वीडियो सामने आया है. वीडियो को धार्मिक उन्माद बढ़ाने वाला बताते हुए एक वकील ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग और प्रशासन से भी की है. इस वीडियो में एक डरी हुई लड़की तेज कदमों से अपने घर की तरफ बढ़ रही है और बैकग्राउंड में अज़ान से मिलती जुलती आवाज़ आ रही है.

    इस वीडियो से बीजेपी ने किनारा कर लिया लेकिन कांग्रेस ने ये कहकर बीजेपी पर उंगली उठाई की इस वीडियो से किसको फायदा होगा ये सबको पता है. दरअसल गुजराती भाषा में सवा मिनट के इस वीडियो को आप भले ही न समझ पाएं लेकिन इसका मतलब और मकसद समझना बेहद आसान है.

    वीडियो में एक डरी सहमी हुई लड़की अज़ान से मिलती आवाज़ के बीच जब घर पहुंचती है तो पर्दे पर कृष्ण की तस्वीर भी दिखती है. सही सलामत घर पहुंचने पर मां-बाप राहत की सांस लेते हैं.

    वीडियो में लड़की के पिता को ये कहते दिखाया गया है कि 22 साल पहले ये होता था और अगर ‘वो’ वापस सत्ता में आए तो फिर हो सकता है. इसके बाद लड़की जवाब देती है कि यहां कोई नहीं आएगा क्योंकि मोदी यहां हैं.

    इस वीडियो को धार्मिक सद्भावना को बिगाड़ने वाला करार देते हुए स्थानीय वकील गोविंद परमार ने चुनाव आयोग से शिकायत की है.

    वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी का ज़िक्र आने पर कांग्रेस उंगली उठा रही है लेकिन बीजेपी को बदनाम करने के इरादे से भी ये वीडियो बनाया गया हो सकता है. अब जब प्रदेश का सियासी तापमान पहले से ही बढ़ा है तो इसकी तपिश भी महसूस की जा रही है.

    चुनाव में वोटरों को रिझाने, भड़काने और गोलबंद करने की कोशिश लगभग हर चुनाव में होती है लेकिन प्रशासन को समय रहते इन्हें काबू करना होगा वर्ना माहौल बिगाड़ने से नही रोका जा सकता. साइबर युग के दौर में डिजिटल घृणा रोकने के भी पुख्ता इंतेज़ाम करने होंगे.

    अरुण कुमार सिंह

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    इंदिरा की जयंती पर वरुण गांधी का इमोशनल ट्वीट- ‘…मिस यू दादी’

  • कश्मीर: दो और आतंकियों से घर लौटने की गुजारिश

    कश्मीर: दो और आतंकियों से घर लौटने की गुजारिश

     

     

    आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हुए कश्मीरी फुटबॉलर माजिद खान के सरेंडर के बाद दो अन्य आतंकियों के परिवार को नई उम्मीद जगी है. उन्होंने अपने बेटों की घर वापसी के लिए सोशल मीडिया पर इमोशनल अपील की है.

    बता दें कि 20 साल के उभरते कश्मीरी फुटबॉलर माजिद इरशाद खान ने कुछ महीने पहले बंदूक थाम ली थी. उसके दोस्तों ने सोशल मीडिया पर उसके घर लौट आने की गुजारिश की थी. जिसके बाद शुक्रवार को माजिद ने सुरक्षा बलों के सामने सरेंडर कर दिया.

    माजिद के दोस्तों ने उसकी मां की रोती हुई एक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उसे घर लौट आने के लिए कहा था. अब इससे प्रेरित होकर लश्कर आतंकी आशिक हुसैन भट और मंजूर अहमद बाबा के परिवार ने सोशल मीडिया पर अपने बेटों से घर लौट आने की गुजारिश की है.

    शोपियां का रहने वाला है आशिक हुसैन भटआशिक हुसैन भट का परिवार जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले का रहने वाला है. वह करीब एक हफ्ते पहले गायब हो गया था. बाद में उसने लश्कर-ए-तैयबा ज्वाइन कर लिया. आशिक हुसैन की मां फहमीद कहती हैं, ‘9 नवंबर की दोपहर मेरा बेटा दुकान में कुछ सामान लेने गया था. लेकिन, आज तक नहीं लौटा.’

    वह कहती हैं, ‘आशिक के बिना हमारे जीना का कोई मतलब नहीं है. मैं चाहती हूं कि वह जल्द घर वापस आ जाए. अगर वो नहीं आया तो या तो हम जहर खा लेंगे या ये जगह छोड़कर कहीं और चले जाएंगे.’

    आशिक हुसैन भट के पिता मोहम्मद इशाक के मुताबिक, ‘आशिक पूरे घर की रौनक था. पूरे परिवार का पेट वही पालता था. उसकी बीवी भी हमारे साथ रहती है. उसके बिना परिवार का बुरा हाल है.’

    कुछ महीनों पहले लापता हो गया था मंजूर
    वहीं, 20 साल का मंजूर अहमद बाबा पुलवामा का रहने वाला है. फल बेचकर वह अपने परिवार का गुजारा करता था. कुछ दिनों पहले वह घर छोड़कर कहीं चला गया. बाद में उसके आतंकी संगठन में भर्ती होने की जानकारी मिली.

    मंजूर अहमद बाबा की मां जोहरा बानो ने सोशल मीडिया के जरिए अपने बेटे से लौट आने की अपील की है. लश्कर-ए-तैयबा से गुजारिश करते हुए जोहरा कहती हैं, ‘अगर वह इस आतंकी संगठन में है, तो उसे आने दिया जाए. क्योंकि बच्चों के अलावा मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है.” जोहरा का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.

    माजिद के दोस्तों ने किया था फेसबुक पोस्ट
    बता दें कि कश्मीरी फुटबॉलर माजिद के दोस्तों ने सोशल मीडिया पर उससे आतंक की दुनिया से लौट आने की गुजारिश की थी. उसके एक दोस्त ने फेसबुक पर लिखा था- ‘आज मैंने तुम्हारी मां और अब्बू को देखा. वो बुरी तरह से टूट चुके हैं. प्लीज लौट आओ. इस तरह अपने मां-बाप को मत छोड़ो. प्लीज वापस आ जाओ. तुम अपने मां-बाप की इकलौती उम्मीद हो. वो तुमसे बिछड़ना नहीं सह पाएंगे. जब मैंने उन्हें देखा तब वो रो रहे थे. प्लीज माजिद उनके लिए लौट आओ. हम सब तुम्हें बहुत प्यार करते हैं.’

    ऐसा माना जा रहा है कि माजिद ने अपने परिवार और दोस्तों की गुजारिश मानते हुए शुक्रवार को सरेंडर किया है.

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  • कोई भी छात्र गुणवत्ता की शिक्षा से वंचित नहीं होगा: मुख्यमंत्री

    कोई भी छात्र गुणवत्ता की शिक्षा से वंचित नहीं होगा: मुख्यमंत्री

     

     

    दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को मेरिट-कम-मीन आय-लिंकेड वित्तीय सहायता योजना के लिए एक वेब पोर्टल लॉन्च किया और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के द्वारका परिसर में दिल्ली उच्च शिक्षा और कौशल विकास गारंटी योजना को संशोधित किया।

    पोर्टल की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वित्तीय संकट की वजह से दिल्ली के छात्रों को गुणवत्ता की शिक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा।

    तीन श्रेणियां

    “दोनों योजनाएं भारी राहत प्रदान करेगी अगर दिल्ली में सफल हो, तो आने वाले दिनों में इस योजना को दूसरे राज्यों में दोहराया जा सकता है। ”

    सरकार ने कहा कि योग्यता-सह-आय आय योजना उच्च शिक्षा का पीछा करने योग्य और जरूरतमंद छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस योजना के तहत, दिल्ली उच्च शिक्षा ट्रस्ट, दिल्ली सरकार के उच्च शिक्षा निदेशालय के माध्यम से, छात्रों द्वारा दी गई आंशिक या पूरी तरह से ट्यूशन शुल्क की प्रतिपूर्ति करेगा।

    प्रतिपूर्ति योजना में तीन श्रेणियां हैं: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के योग्य छात्रों के लिए 100% ट्यूशन शुल्क प्रतिपूर्ति; 50% तक की वार्षिक परिवार की आय वाले योग्य छात्रों के लिए ट्यूशन फीस का 50% प्रतिपूर्ति और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत आने वाले नहीं; और ₹ 2.50 लाख से ऊपर वार्षिक ₹ 6 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले मेधावी छात्रों के लिए ट्यूशन फीस का 25% प्रतिपूर्ति।

    उच्च शिक्षा योजना उन छात्रों के लिए होती है जो भारत में डिप्लोमा या डिग्री स्तर के पाठ्यक्रम या विशिष्ट कौशल-विकास पाठ्यक्रम का पीछा करना चाहते हैं, और दिल्ली से अपना दसवीं और कक्षा बारावी पूरा कर चुके हैं।

    इस योजना के तहत, उच्च शिक्षा और कौशल विकास ऋण गारंटी फंड 10 लाख तक छात्र ऋण के लिए बैंक गारंटी प्रदान करेगा।

    श्री केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार ने निजी स्कूलों की स्थापना की है, जो राज्य के संस्थानों की स्थापना कर रहे हैं, जो गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के लिए नि: शुल्क है।

    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जब आम आदमी पार्टी सत्ता में आई, तब से “क्रांतिकारी” परिवर्तन हुए, जो विश्व स्तर पर और पूरे देश में चर्चा की जा रही हैं।

    ‘बंद निजीकरण’

    “इससे पहले, सरकारी स्कूलों को जानबूझकर एक व्यवस्थित ढंग से और पूरे शिक्षा क्षेत्र में खराब होने की इजाजत दी गई, यह प्राथमिक, माध्यमिक, कॉलेज और तकनीकी हो, यह निजीकरण की ओर बढ़ रहा था। इन संस्थानों पर शुल्क इतना अधिक था कि आम आदमी इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता था। लेकिन जब से हम सत्ता में आए, हमने भारत में शिक्षा के निजीकरण की लहर को बदल दिया है, “केजरीवाल ने कहा।

    उन्होंने दावा किया कि पहली बार लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में सरकार के मॉडल के लिए स्थानांतरित कर रहे थे – जहां एक बच्चा, चाहे एक गरीब परिवार या अमीर परिवार से, गुणवत्ता की शिक्षा मुफ्त में प्राप्त हो।

  • इंदिरा गांधी को 100वीं जयंती पर पीएम, राहुल और ममता बनर्जी ने दी श्रद्धांजलि

    इंदिरा गांधी को 100वीं जयंती पर पीएम, राहुल और ममता बनर्जी ने दी श्रद्धांजलि

     

     

    पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और ममता बनर्जी ने श्रद्धांजलि श्रद्धांजलि अर्पित की.

    प्रधानमंत्री ने ट्विट किया, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी जयंती के मौके पर श्रद्धांजलि.

    कांग्रेस उपाध्याक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व राष्ट्रपति प्रनव मुखर्जी ने रविवार सुबह शक्तिस्थल पर पहुंच कर इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि दी.

    इंदिरा गांधी की 100वीं जयंती पर राहुल गांधी ने अपनी दादी को याद करते हुए ट्वीट किया कि, आप ही मेरी गुरु और गाइड हैं,आपने ही मुझे शक्ति दी.

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी जन्मशती के मौके पर याद किया.

    ममता ने सुबह अपने ट्विटर हैंडल पर कहा, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी 100वीं जयंती पर याद कर रही हूं.

    इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को हुआ था. वह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और अपने पिता पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद सबसे ज्यादा वक्त तक इस पद पर रहने वाली दूसरी प्रधानमंत्री थीं.

    वह जनवरी 1966 से मार्च 1977 और 14 जनवरी 1980 से वर्ष 1984 में अपनी हत्या तक प्रधानमंत्री रहीं.

  • गुजरात चुनाव: ‘व्यापारी अगर GST के फॉर्म ही भरेगा तो कारोबार कब करेगा’

    गुजरात चुनाव: ‘व्यापारी अगर GST के फॉर्म ही भरेगा तो कारोबार कब करेगा’

     

     

    राजकोट जिले के जेतपुर में साड़ी प्रिंटिंग की इंडस्ट्री चलाने वाले मनसुखभाई उनदाड़ इन दिनों काफी नाराज हैं. उनके भीतर की उलझन और परेशानी जीएसटी को लेकर है. एक तो जीएसटी देना पड़ रहा है, उल्टे इसको भरने की पूरी प्रक्रिया ही काफी उलझा देने वाली है.

    पिछले एक जुलाई से जब से जीएसटी लागू हुआ, तभी से ही इनके कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ा है. फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान मनसुखभाई उनदाड़ कहते हैं कि ‘जीएसटी ने हमारे कारोबार की कमर तोड़ कर रख दी है. पहले नोटबंदी की मार से उबर ही रहे थे कि अब जीएसटी ने तो कारोबार पर दोहरी चोट दे डाली.’ मनसुखभाई की नाराजगी उनकी बातों से झलकती है जब वो कहते हैं ‘मोदी ने पहले नोटबंदी पर मार डाला और अब तो जीएसटी पर मार डाला.’

    जीएसटी से कारोबारी परेशान, धंधा हुआ मंदा
    मनसुखभाई की जेतपुर में साड़ी प्रिंटिंग का एक प्लांट है जिसमें अब उनके साथ उनका बेटा विकास भाई उनदाड़ भी हाथ बंटाने लगा है. जब जीएसटी को लेकर हमने युवा कारोबारी विकास से उनकी परेशानी जानने की कोशिश की तो उनकी तरफ से भी कुछ ऐसा ही जवाब मिला.विकास का कहना है कि ‘पहले साल भर में हमें 6 से 7 करोड़ का टर्न ओवर होता था, लेकिन, अब तो हालात बदल गए हैं. जीएसटी लागू होने के बाद डिमांड कम हो गई है जिससे इस साल बमुश्किल 4 करोड़ तक का ही टर्न ओवर मिलने की उम्मीद है.’

    जेतपुर में साड़ी प्रिंटिंग का बड़ा कारोबार है. यहां करीब 1200 प्लांट हैं लेकिन, सबका एक सा ही हाल है. जेतपुर में अलग-अलग जगहों का दौरा करने के बाद पता चला कि सरकार की तरफ से जीएसटी की दर में बदलाव करने से राहत तो है लेकिन, कच्चे माल पर लगने वाली जीएसटी की दर को लेकर कारोबारियों में परेशानी है. सरकार ने प्रोडक्टस पर जीएसटी घटाकर 18 फीसदी की जगह 5 फीसदी कर दिया. लेकिन, साड़ी प्रिंटिंग के लिए सप्लाई होने वाले कच्चे माल पर अभी भी जीएसटी 18 फीसदी तक बनी हुई है.

    लागत बढ़ने से कारोबार पर असर
    साड़ी प्रिंटिंग के लिए कच्चे माल की सप्लाई करने वाले किशोर भाई भी जीएसटी के लागू होने के बाद काफी परेशान दिख रहे हैं. वो भी कारोबारियों के ही सुर में सुर मिलाते हुए सीधे जीएसटी का विरोध भी कर रहे हैं और इसे गैरजरूरी बता रहे हैं.

    दरअसल, जेतपुर के कारोबारियों की शिकायत है कि कच्चे माल पर जीएसटी की दर 18 फीसदी होने से उनकी लागत बढ़ गई है. ऐसे में जब साड़ी पूरी तरह प्रिंटिंग के बाद तैयार हो जाती है तो उस पर पहले की तरह वो डिस्काउंट देने के हालात में नहीं हैं. लिहाजा जो व्यापारी उनके यहां से साड़ी खरीदते हैं उनको होने वाला मुनाफा भी कम हो गया है. डिस्काउंट कम होने या खत्म होने से यही हाल रिटेल सेक्टर के कारोबारियों का भी है. लिहाजा अब डिमांड पहले से कम हो गई है.

    जीएसटी की जटिल प्रक्रिया से उलझन
    जीएसटी के बाद इन कारोबारियों को जीएसटी दाखिल करने में भी काफी परेशानी हो रही है. जीएसटी दाखिल करने की प्रक्रिया में हो रहे लगातार बदलाव से भी कारोबारी परेशान हैं. जीएसटी की जटिल प्रक्रिया ने इन कारोबारियों को परेशान कर दिया है. हालाकि इसके लिए इन लोगों ने एडवाइजर भी रख लिया है.

    जेतपुर के ही रहने वाले मुकेश भाई मेर पेशे से एडवोकेट हैं, लेकिन, अब इन कारोबारियों को जीएसटी दाखिल करने में उनकी मदद कर रहे हैं. बतौर जीएसटी सलाहकार मुकेश भाई भी इन कारोबारियों की परेशानियों से दो-चार होते रहे हैं. फर्स्टपोस्ट से बातचीत में मुकेशभाई कहते हैं ‘एक जुलाई से जीएसटी लागू हुआ, लेकिन, नवंबर तक आते-आते इसमें कई बदलाव होते गए. इससे पहले से ही जटिल प्रक्रिया और जटिल हो गई. इसके अलावा वेबसाइट में भी फेरबदल होने से जीएसटी दाखिल करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.’

    पहले जीएसटी भरने के लिए चार तरह के फॉर्म भरने पड रहे थे. 3 B, GSTR-1, GSTR-2, और GSTR-3 फार्म भरने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था. लेकिन, अब 3 B और GSTR-1 ही दाखिल करना पड़ रहा है. कारोबारियों का मानना है कि बार-बार के बदलाव से काफी परेशानी हो रही है. कारोबारी किशोर भाई का कहना है कि ‘जीएसटी भरने के लिए केवल एक फॉर्म होना चाहिए जिससे कारोबारी इस बात को समझ सके वरना कारोबारी तो महज जीएसटी भरने में रह जाएगा तो फिर कारोबार क्या करेगा?’

    राजकोट शहर में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. राजकोट में मूंगफली से तेल बनाने वाले प्लांट में भी कारोबारी जीएसटी से परेशान दिख रहे हैं. सौराष्ट्र इलाके में इस तरह के लगभग 200 प्लांट हैं, जहां जीएसटी के बाद कारोबार में कमी दिख रही है. सौराष्ट्र ऑयल मील एसोसिएशन (SOMA) के अध्यक्ष समीर भाई शाह कहते हैं ‘जीएसटी के चलते रिटेल मार्केट में डिमांड कम हो गई है, जिससे कारोबारियों में परेशानी बढ़ गई है.’

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    जेतपुर की साड़ी फैक्ट्री

    चुनाव के वक्त बीजेपी की बढ़ी परेशानी
    हालाकि गांधीनगर में अपनी रैली में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए जीएसटी की दर को घटाकर 18 से 5 फीसदी करने का फैसला किया था, तो उसके बाद थोड़ी राहत जरूर मिली है. इसे चुनाव के वक्त नाराजगी कम करने की कोशिश के तौर पर ही देखा गया था.

    लेकिन, इसके बावजूद कारोबारी इस बात को मानते हैं कि यह मुद्दा चुनाव में बड़ा मुद्दा रहेगा. कांग्रेस की तरफ से लगातार नोटबंदी और जीएसटी के मुद्दे पर बीजेपी को घेरा जा रहा है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इसे गब्बर सिंह टैक्स बताकर कारोबारी समाज की सहानुभूति लेने में लगे हैं. उन्हें इस बात की आस बढ़ गई है कि अबतक बीजेपी के साथ रहने वाले कारोबारियों को इस बार जीएसटी के जंजाल के वक्त अपने पाले में लाया जा सकता है.

    लेकिन, बीजेपी जीएसटी को सरल टैक्स बता रही है. बीजेपी की तरफ से जीएसटी में जरूरी सुधार का प्रचार कर कारोबारियों को मनाने की कवायद भी हो रही है. राजकोट और जेतपुर इलाके में चुनाव पहले चरण में 9 दिसंबर को ही होने वाला है. लेकिन, कारोबारी किसको वोट देंगे इस सवाल पर वो अभी कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं. लेकिन, अबतक पूरी तरह से बीजेपी के साथ रहे कारोबारियों की नाराजगी को लेकर बीजेपी परेशान जरूर दिख रही है.

    (Amitesh)

  • बद्रीनाथ धाम को मजार बताने वाले मौलाना ने मांगी माफी

    बद्रीनाथ धाम को मजार बताने वाले मौलाना ने मांगी माफी

     

     

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद स्थित दारूल उलूम निसवा के वाइस चांसलर लतीफ कासमी ने बद्रीनाथ धाम के बारे में दिए गए अपने बयान के लिए माफी मांगी है. मीडिया से बातचीत करते हुए लतीफ कासमी ने कहा कि किसी का दिल दुखाना उनका मकसद नहीं था.

    कासमी ने हिंदुओं के धार्मिक स्थल बद्रीनाथ धाम को इस्लामिक स्थल बताते हुए बदरूद्दीन की मजार बताया था. इस बयान को लेकर जहां पूरे देश में रोष था और मौलाना की तीखी आलोचना हुई थी. वहीं, विश्व हिंदू परिषद ने मौलाना का पुतला फूंकते हुए उनके बयान की निंदा की थी.

    बता दें, दारूल उलूम के मुफ्ती अब्दुल लतीफ ने कहा था कि बद्रीनाथ तो बदरूद्दीन शाह हैं. यह मुसलमानों का धार्मिक स्थल है. हिंदुओं को इसे मुसलमानों के हवाले कर देना चाहिए.

    इस मामले पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि यह सब बेकार की बातें हैं. लतीफ ने पब्लिसिटी के लिए ऐसी बातें कही हैं. इस तरह के बयान देने वालों को सलाखों के पीछे भेजना चाहिए.