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  • हाईकोर्ट का फैसला आते ही शशिकला के पति की बिगड़ी तबीयत

    हाईकोर्ट का फैसला आते ही शशिकला के पति की बिगड़ी तबीयत

     

     

    आय से अधिक संपत्ति मामले में जेल में कैद एआईएडीएमके नेता वीके शशिकला की तरह उनके पति एम नटराजन की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं. मद्रास हाईकोर्ट ने टैक्स चोरी के एक पुराने मामले में नटराजन के खिलाफ 2 साल की सजा को बरकरार रखा है. कोर्ट का फैसला आने के बाद नटराजन की तबीयत खराब हो गई, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

    बता दें कि हाल ही में एम नटराजन की चेन्नई के एक अस्पताल में किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट की सर्जरी हुई थी. तब पति का हाल-चाल लेने शशिकला भी 5 दिन के पैरोल पर जेल से बाहर आई थीं.

    शशिकला के पति नटराजन से जुड़ा यह मामला साल 1994 का है. नटराजन पर लंदन से एक लग्जरी कार मंगाने और उसके बिल में धोखाधड़ी के आरोप थे. इस मामले में लोअर कोर्ट ने उन्हें साल 2010 में 2 साल की सजा सुनाई थी.

    इस केस में उनके एक रिश्तेदार को भी सजा हुई है. नटराजन ने लोअर कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. शनिवार को हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट की सजा को बरकरार रखा.

    गौरतलब है कि आय से अधिक संपत्ति मामले में शशिकला को सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल कैद की सजा सुनाई है.

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  • GST लाने की जल्दबाजी से धीमी हुई अर्थव्यवस्था : मनमोहन सिंह

    GST लाने की जल्दबाजी से धीमी हुई अर्थव्यवस्था : मनमोहन सिंह

     

     

    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दावा किया कि नोटबंदी के ठीक बाद जीएसटी को जल्दबाजी में लागू करने से अर्थव्यवस्था धीमी पड़ गई है.

    मनमोहन सिंह ने यह भी कहा कि फिलहाल अर्थव्यवस्था इस स्थिति से बाहर आते हुए नहीं दिखाई दे रही है.

    केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की ओर से आयोजित एक सभा में सिंह ने मोदी सरकार पर निशाना साधा और 1,000 एवं 500 रुपये के नोट चलन से बाहर किए जाने के फैसले को ‘बड़ी, ऐतिहासिक भूल’ करार दिया.

    उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने जल्दबाजी में जीएसटी लागू कर लोगों पर नया बोझ डाल दिया.इसके साथ ही सिंह ने देश के वाम दलों का आह्वान किया कि वे केंद्र की भाजपा सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर लड़ने में कांग्रेस नेतृत्व के साथ सहयोग करें.

  • कॉलेजियम प्रणाली से हो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति: कुरैशी

    कॉलेजियम प्रणाली से हो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति: कुरैशी

     

     

    पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने ‘तटस्थता की अवधारणा’ को बरकरार रखने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सहित चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम प्रणाली गठित करने की हिमायत की. कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक नियुक्तियों का एक ‘अवांछित टैग’ मिलता है और वक्त आ गया है, जब सीईसी सहित सभी चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियां एक कॉलेजियम प्रणाली के जरिए की जाए.

    साल 2010 से 2012 तक इस संवैधानिक संस्था के प्रमुख रहे कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए शानदार काम कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘लेकिन एक चीज मुझे हैरान करती है कि हमारे पास एक ऐसी प्रणाली नहीं है, जहां आयुक्तों को कॉलेजियम प्रणाली के जरिए नियुक्त किया जाए. हमें राजनीतिक नियुक्तियों का एक अवांछित टैग मिला है और यह सुनना वाकई में खराब लगता है. कुरैशी ने उपनगर जुहू में पृथ्वी थियेटर में आयोजित ‘मुंबई लिटफेस्ट’ में यह बात कहा.

    उन्होंने कहा कि दुनिया भर में चुनाव आयोगों के प्रमुख और यहां तक कि भारत में केंद्रीय सतर्कता आयोग और केंद्रीय सूचना आयोग जैसी अन्य संस्थाओं के प्रमुखों को एक कॉलेजियम प्रणाली के जरिए चुना जाता है, और जहां चयन में सरकार एवं विपक्षी नेता की आमराय होती है. लेकिन दुर्भाग्य से चुनाव आयोग को इस व्यवस्था से वंचित रखा गया है.

    कुरैशी ने ‘ऐन अनडॉक्युमेंटेड वंडर- द मेकिंग ऑफ द ग्रेट इंडियन इलेक्शन’ पुस्तक लिखी है. वह ‘काउंटिंग एवरी वोट’ विषय पर प्रख्यात पत्रकार एन राम के साथ अपने विचार रख रहे थे. कुरैशी ने प्रत्येक वोट के महत्व का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता सीपी जोशी की हार को याद किया जो 2008 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में एक वोट से हार गए थे. दिलचस्प है कि उनकी पत्नी और बेटी ने कथित तौर पर अपना-अपना वोट नहीं डाला था.पूर्व आईएएस अधिकारी ने कहा, ‘जिस दिन मैंने आयोग का प्रभार संभाला था, मेरे पास दो चुनौतियां थी- पहली चुनौती धन के इस्तेमाल पर रोक लगाना था और दूसरी चुनौती मतदान करने के प्रति मतदाताओं की उदासीनता थी. हम इन चुनौतियों से निपटने में काफी सफल हुए. लेकिन अब भी काफी कुछ किए जाने की जरूरत है.’ कुरैशी ने देश में विचाराधीन कैदियों के मताधिकार का समर्थन किया और कहा कि जेलों के अंदर भी मतदान केंद्र बनाए जाने चाहिए, ताकि वे लोग भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें.

    वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने कहा कि चुनाव आयोग काफी अच्छा काम कर रहा है. लेकिन यह धन के इस्तेमाल और मतदाताओं को रिश्वत दिए जाने पर रोक लगाने में नाकाम रहा है. उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसके लिए चुनाव आयोग ही सिर्फ जिम्मेदार है. मुझे लगता है कि मतदाताओं को दी जाने वाली रिश्वत पर रोक लगाने में आयोग नाकाम रहा है. वोट डालने से पहले हर मतदाता को किसी न किसी तरह से रिश्वत दी जाती है. यह भ्रष्टाचार के चलते होता है.’ उन्होंने राजनीतिक दलों को मिलने वाले कोष में बेहिसाबी धन का भी मुद्दा उठाया और कहा कि नकद चंदे की सीमा 2,000 रुपये करना एक मजाक है.

  • सुप्रीम कोर्ट: अगस्‍ता हेलीकाप्टर की खरीद से संबंधित फाइल पेश की जाए

    सुप्रीम कोर्ट: अगस्‍ता हेलीकाप्टर की खरीद से संबंधित फाइल पेश की जाए

     

     

    सुप्रीम कोर्ट ने 2006-07 में विशिष्ट व्यक्तियों के इस्तेमाल के लिये अगस्‍ता हेलीकाप्टर खरीदने के बारे में छत्तीसगढ़ सरकार से गुरुवार को अनेक तीखे सवाल किये .साथ ही इस सौदे से संबंधित मूल फाइल पेश करने का निर्देश दिया.

    शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि सिर्फ एक अगस्‍ता हेलीकाप्टर खरीदने के लिये ही एक ग्लोबल टेंडर क्यों जारी किया गया और सभी कंपनियों से टेंडर आमंत्रित करने की राज्य के मुख्य सचिव को कैसे ‘दरकिनार’ किया गया.

    न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ इस हेलीकाप्टर की खरीद में कथित अनियमित्ताओं और विदेशी बैंक खाते, जो कथित रूप से मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र से जुडे थे, की जांच के लिये दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

    पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह तकनीकी पहलू पर नहीं जा रही है परंतु सिर्फ यह जानना चाहती है कि क्या इस सौदे में कोई धोखाधड़ी या छल कपट हुआ था.

    बैंच ने कहा, ‘आप (राज्य) फाइलें पेश कीजिये. हम उन्हें देख लेंगे. हम सिर्फ यह देखना चाहते हैं कि कहीं कोई धोखाधडी या छलकपट तो नहीं था. इसीलिस हम फाइलें देखना चाहते हैं. यदि आप हलफनामा दायर करना चाहते हैं तो उसे और फाइलों को तैयार रखिये. छत्तीसगढ सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी से पीठ ने जानना चाहा कि निविदा आमंत्रित करने का नोटिस सिर्फ अगस्टा पर ही क्यों केन्द्रित था?’

    न्याय पीठ ने यह भी सवाल किया कि मुख्य सचिव कहते हैं कि सिर्फ अगस्‍ता नहीं, अगस्‍ता के आगे भी जायें. मुख्य सचिव के नोट को बाद में क्यों दरकिनार किया गया?’’ पीठ ने यह भी कहा, ‘‘सभी के लिये निविदा आमंत्रित करने के नोटिस की बजाये यह फैसला लिया गया कि निविदा सिर्फ अगस्टा के लिये ही होगी? हम यह जानना चाहते हैं.’’ इस पर जेठमलानी ने कहा कि वह कुछ बिन्दुओं पर निर्देश लेंगे और एक संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करेंगे.

    इससे पहलु, सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करते हुये अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सिर्फ एक अगस्‍ता हेलीकाप्टर खरीदने के लिये वैश्विक निविदा जारी की गयी थी और बेल एंड यूरोकाप्टर जैसे दूसरों की बोली पर विचार ही नहीं किया गया था. उन्होंने इस सौदे में गैरकानूनी तरीके से रिश्वत का आरोप लगाया और कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे ने इसी दौरान विदेशी बैंक खाता खोला था.

    भूषण ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस सौदे में दस लाख डालर से अधिक राशि का कमीशन दिया गया और यह गैरकानूनी रिश्वत थी. उन्होंने जब यह दावा किया कि यह हेलीकाप्टर 50 लाख अमेरिकी डालर से अधिक की कीमत पर खरीदा गया तो पीठ ने सवाल किया कि क्या आपके पास ऐसी कोई सूचना है कि इसकी कीमत बढाई गयी थी और बाजार में सस्ते हेलीकाप्टर भी उपलब्ध थे?

    इस पर भूषण ने दावा किया कि झारखण्ड ने इससे कहीं कम दाम पर हेलीकाप्टर खरीदा था. उन्होंने कहा कि सीबीआई पहले से ही केन्द्र द्वारा अगस्‍ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर की खरीद मे कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है.

    पीठ ने वेणुगोपाल से दस्तावेज के विवादित होने के बारे में पूछा तो  वेणुगोपाल ने कहा कि ये दस्तावेज ‘सब प्रतियां’ हैं और कोई भी मूल दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि विभागों में कुछ असंतुष्ट कर्मचारी हो सकते हैं जो इन दस्तावेजों को हासिल कर रहे हैं.

    पीठ ने इस पर सवाल किया, ‘‘क्या आपने इस बारे में कोई कार्रवाई की है? क्या ये आधिकारिक तौर पर गोपनीय चिन्हित हैं?’’ इसका जवाब देते हुये अटार्नी जनरल ने कहा, ‘‘मेरी समझ के अनुसार कैबिनेट नोट विशेषाधिकार वाले दस्तोवज हैं. वह यह नहीं बता रहे कि सूचना के अधिकार कानून के तहत कौन से दस्तावेज प्राप्त किये गये हैं.’’

    पीठ ने जब यह कहा कि क्या छत्तीसगढ़ सरकार यह सवाल उठा रही है कि ये दस्तावेज सही नहीं है, तो वेणुगोपाल ने कहा कि वह राज्य सरकार की ओर से नहीं बल्कि केन्द्र की ओर से पेश हो रहे हैं.

    न्यायालय से इस पहलू पर विचार करने का अनुरोध करते हुये उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के स्रोत महत्वपूर्ण हैं. हम इस मामले को लेकर चिंतित हैं. हमारी चिंता दस्तावेजों को लेकर है. वेणुगोपाल ने सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के निवास पर रखे प्रवेश रजिस्टर का भी उदाहरण दिया जो शीर्ष अदालत के समक्ष विचार के लिये आया था.

    वेणुगोपाल ने दस्तावेजों के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के कुछ फैसलों की ओर ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उसने सूचना के अधिकार कानून के तहत दस्तावेज प्राप्त किये हैं, परंतु इस कानून के तहत मिले जवाब न्यायालय में दाखिल नहीं किये गये.

    सुनवाई के अंतिम चरण में पीठ ने भूषण से कहा कि वह याचिकाकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार कानून के तहत मिले जवाब देखना चाहेगी और भूषण से कहा कि इन्हें तैयार रखा जाये.

  • वेंकैया नायडू: ‘बैलट में बुलेट से ज्यादा ताकत’

    वेंकैया नायडू: ‘बैलट में बुलेट से ज्यादा ताकत’

     

     

    उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार को नक्सलियों-माओवादियों से देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हिंसा से कोई परिवर्तन नहीं लाया जा सकता और बैलेटे में बुलेट से कहीं ज्यादा ताकत है.

    दिल्ली हाट में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से आयोजित ‘आदि महोत्सव’ के उद्घाटन के मौके पर नायडू ने कहा कि आदिवासी इलाकों में कुछ लोग चरमपंथ, आतंकवाद को प्रोत्साहित करते हैं. उनका कहना है कि लोकतंत्र में बंदूक के द्वारा सफलता मिलेगी. लोकतंत्र में बंदूक के द्वारा कभी सफलता नहीं मिलती. इससे नुकसान होता है.

    उप राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैं हमेशा कहता हूं कि ‘बैलेट इज मोर पावरफुल दैन बुलेट’ (बैलेट गोली से कहीं ज्यादा ताकतवर है). बैलट द्वारा आप परिवर्तन ला सकते हैं. इस लोकतंत्र में बड़े बड़े नेताओं को लोगों ने बैलट द्वारा हराया और आम लोगों जिताया है. बंदूक से कोई फायदा नहीं होने वाला है. मैं आदिवासी मित्रों से आग्रह करता हूं कि हिंसा की प्रवृत्ति वाले लोगों को किसी तरह से प्रोत्साहन नहीं मिलना चाहिए.

    [object Promise]ये जो नक्सलवादी, माओवादी हैं, अगर उनका सचमुच परिवर्तन के सिद्धांत में विश्वास है और वे परिवर्तन लाना चाहते हैं तो उनको लोकतंत्र में आना चाहिए, चुनाव जीतना चाहिए, फिर अपनी विचारधारा पर अमल के लिए प्रयास करना चाहिए. परंतु सड़क को उड़ाना, पुल को उड़ाना, अस्पताल को नुकसान पहुंचाना, सरकार की योजनाओं को आदिवासियों तक नहीं पहुंचने देना, इन सबसे गरीबों और आदिवासियों का नुकसान होता है. यह गलत धारा है.-


    वेंकैया नायडू

    नायडू ने कहा कि जब प्रधानमंत्री कहते हैं- सबका साथ, सबका विकास, तो उसका मतलब सभी भारतवासियों का विकास है. जब हम कहते हैं- भारत माता की जय, वंदे मातरम या राष्ट्रवाद तो इसका मतलब कुछ वर्गों का उत्थान नहीं है, बल्कि इसका मतलब यह है कि देश में रहने वाले 130 करोड़ लोगों का विकास और उत्थान होना चाहिए.

    [object Promise] विविधता में एकता भारत की विशेषता है. इसलिए मैं लोगों से कहता हूं कि आदिवासियों की कला, संस्कृति और परंपरा का अध्ययन करें और इनमें से जो अच्छा लगे उनको प्रोत्साहित करें.


    उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

    उप राष्ट्रपति ने आदिवासियों को देश का ‘मूल निवासी’ करार देते हुए कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि आदिवासियों को सिखाना चाहिए, लेकिन मैं कहता हूं कि उनसे सीखना चाहिए. आदिवासियों को यह महसूस होना चाहिए कि देश के विकास में उनकी भागीदारी है. सरकार की तरफ से उनके विकास के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं और प्रयास भी हो रहे हैं, लेकिन समाज को भी योगदान देना होगा.

    नायडू ने ‘आदि महोत्सव’ में देश भर के आदिवासी शिल्पकारों-कारीगरों के सामानों की तारीफ की और कहा कि देश में इनकी कला को जो स्थान मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला पाया है.

    उन्होंने कहा कि आदिवासियों में जो प्रतिभा है उसको प्रोत्साहन मिलना चाहिए. मुझे बताया गया कि मंत्रालय की ओर से इनको प्रोत्साहित किया जा रहा है. विदेश में इनके सामानों की मांग है, लेकिन दुर्भाग्य है कि देश में ऐसा नहीं हो पाया हैं. अंग्रेजों ने 200 साल तक शासन किया. जाते-जाते वे धन लूटकर ले गए, लेकिन ऐसा लगता है कि दिमाग लूटकर लेकर चले गए. यही वजह है कि यह कमजोरी (अपनी संस्कृति को समझने की) आई है.

    इस मौके पर जनजातीय कार्य मंत्री जुआल ओराम ने कहा, ‘‘मुझे यह बात बोलने में अतिश्योक्ति नहीं लग रहा है कि लोग आजकल माइनिंग और टिम्बर बिजनेस में लगे हुए है, लेकिन उससे कई गुना ज्यादा ताकतवर वन उपज है. मुझे पूरा भरोसा है कि वन उपज को बढ़ावा मिलने से देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान मिलेगा.’’ उन्होंने कहा कि महोत्सव के आयोजन का मकसद देश की राजधानी में रहने वाले लोगों को आदिवासी कला, संस्कृति और व्यंजनों से रूबरू कराना है.

  • DDA जमीन को सुरक्षित रखने का रिकॉर्ड हैरान करने वाला है : हाई कोर्ट

    DDA जमीन को सुरक्षित रखने का रिकॉर्ड हैरान करने वाला है : हाई कोर्ट

     

     

    दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस बात पर हैरानी जताई कि डीडीए दिल्ली में अपनी जमीन को सुरक्षित रखने में असफल रहा है. अदालत ने इसके साथ ही उसे भूमि प्रबंधन नीतियों के निर्माण तथा सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए एक इकाई बनाने का निर्देश दिया.

    न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट और एसपी गर्ग की खंडपीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली सरकार और केन्द्र को निर्देश जारी किया, जिसमें कहा गया है कि इकाई या प्रकोष्ठ को वैधानिक दर्जा दिया जाए और इसमें उच्च पदस्थ अधिकारियों को शामिल किया जाए.

    अदालत ने कहा कि केंद्र को अपने कर्मियों के साथ ऐसा एक संगठन बनाने की व्यवहार्यता पर विचार करना चाहिए.

    खंडपीठ ने कहा, अदालत के विचार में इस इकाई या प्रकोष्ठ को डीडीए की भूमि प्रबंधन नीतियों की लगातार निगरानी करनी चाहिए और जब कभी भी जरूरत हो तब सुनिश्चित करें कि अदालत का आदेश लागू हो और वह अन्य सभी प्रासंगिक पहलुओं की भी निगरानी करें.अदालत ने 12 साल पुरानी एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई करते हुये यह निर्देश दिया. पीआईएल में कहा गया था कि डीडीए दिल्ली में अपनी भूमि को सुरक्षित रखने में असमर्थ है और 42,000 एकड़ तक की भूमि पर या तो अतिक्रमण कर लिया गया है या इसका उस पर उसका कोई अधिकार नहीं है.

  • अरुणाचल प्रदेश सरकार ने बढ़ाई पेंशनभोगियों की पेंशन

    अरुणाचल प्रदेश सरकार ने बढ़ाई पेंशनभोगियों की पेंशन

     

     

    अरुणाचल प्रदेश कैबिनेट ने वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए पेंशन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की कल हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई.

    राज्य सरकार ने पेंशन में वृद्धि के लिए केंद्र सरकार की तीन पेंशन योजनाओं में राज्य के हिस्से को जोड़ा है. तीन योजनाओं में वृद्धावस्था पेंशन योजना, राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना शामिल हैं.

    एक आधिकारिक बयान में आज बताया गया कि 60-79 वर्ष के लिए वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत पहले 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है. इसी तरह 80 साल और ज्यादा उम्र वाले लोगों के लिए वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये कर दी गई है।

  • महेश मूर्ति के खिलाफ NCW ने महाराष्‍ट्र डीजीपी से कार्रवाई की मांग

    महेश मूर्ति के खिलाफ NCW ने महाराष्‍ट्र डीजीपी से कार्रवाई की मांग

     

     

    राष्ट्रीय महिला आयोग ने सीडफंड के मालिक महेश मूर्ति के खिलाफ कदम उठाने की मांग की है. आयोग ने महाराष्‍ट्र के डीजीपी को दी गई शिकायत में कहा है कि मूर्ति  ने महिलाओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर बहुत ही भद्दे, अपमानजनक और आपत्तिजनक शब्‍द कहे हैं.

    आयोग ने डीजीपी को लिखा है कि दिल्‍ली की एक महिला ने मूर्ति के खिलाफ आयोग में शिकायत दी है. इसी शिकायत की कॉपी के साथ ही कई मीडिया रिपोर्ट्स की कॉपी भी डीजीपी को भेजी गई हैं. इनमें कहा गया है कि महेश मूर्ति अक्‍सर महिलाओं के खिलाफ ऐसे शब्‍द इस्‍तेमाल करते हैं.

    आयोग का कहना है कि मूर्ति ने सोशल मीडिया पर की गई पोस्‍ट को लेकर माफी भी सोशल प्‍लेटफॉर्म पर पोस्‍ट की है, लेकिन बता दें कि इससे पहले भी मूर्ति द्वारा एेसे अपमानजनक शब्‍द इस्‍तेमाल करने पर अन्‍य महिला ने शिकायत की थी. ऐसे में इस मामले में दखल देते हुए डीजीपी मामले की जांच करें और आरोपी के खिलाफ उचित कदम उठाएं.

    इसके साथ ही आयोग ने कहा है कि 15 दिन के भीतर डीजीपी मामले की जांच के साथ ही इस पर एक्‍शन टेकन रिपोर्ट के साथ पूरी जानकारी आयोग को भेजें.

  • एंटिबायोटिक के इस्तेमाल पर बनेगा नया कानून

    एंटिबायोटिक के इस्तेमाल पर बनेगा नया कानून

     

     

    एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर सरकार नया कानून लाने की तैयारी कर रही है. सीएनबीसी-आवाज़ की एक्सक्लूसिव खबर के मुताबिक अब चिकन, मटन जैसे नॉन-वेजिटेरियन उत्पादों में मिल रहे एंटिबायोटिक और उसके खतरनाक परिणामों को देखते हुए सरकार ने कानून बनाने का फैसला लिया है.

    स्वास्थ्य राज्य मंत्री


    अश्विनी चौबे

     कहते है कि 

    [object Promise]खाद्य पदार्थों में एंटीबायोटिक के साथ ही पेस्टिसाइड्स के बेतहाशा इस्तेमाल और उससे हो रहे नुकसानों को लेकर सजग है. यही वजह है कि सरकार इससे जुड़े मानक बनाने जा रही है.

    आएगा नया कानून
    नए प्रस्तावित कानून के तहत सभी नॉन-वेजिटेरियन उत्पादों में एमआरएल यानी एंटीबायोटिक की अधिकतम मात्रा तय की जाएगी. जिस भी चिकन-मटन शॉप, रेस्टोरेंट या फूड ऑउटलेट पर इससे ज्यादा एमआरएल पाया गया उनके खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी.मैक्डॉनल्ड और KFC समेत छोटे रेस्टोरेंट भी आएंगे दायरे में
    बीते हफ्ते इस मसले पर स्वास्थ्य मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक भी हो चुकी है. सरकार प्रस्तावित ड्राफ्ट पर लोगों से मिले सुझाव के बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही नोटिफिकेशन जारी कर देगी. इस कानून के दायरे से मैक्डॉनल्ड और केएफसी से लेकर छोटे रेस्टोरेंट भी आएंगे.

    क्या है मामला
    बकरों और मुर्गों को संभावित रोगों से दूर रखने और इस तरह इनमें गोश्त की मात्रा बढ़ाने के लिए तेजी से इंडस्ट्री में बिना रोकटोक इन दवाओं का इस्तेमाल होता है. इससे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की स्थिति पैदा हो रही है. जिसका मतलब है कि बैक्टीरिया पहले इन दवाओं से लड़ने के लिए खुद को तैयार कर चुका होगा. और जब ये बैक्टीरिया आपको बीमार करेगा और जब आप इन दवाओं को खाएंगे तो आप पर ये दवाएं बेअसर साबित होंगी.

  • ‘एनसीआर शहरों को अजीब-भी लागू करने के लिए बताएं’

    ‘एनसीआर शहरों को अजीब-भी लागू करने के लिए बताएं’

     

     

    दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) की अध्यक्ष, भूर लाल को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्य शहरों को अजीब-से-एक भी योजना को लागू करने के लिए सलाह देने को कहा है।

    एनजीटी द्वारा जांच

    बुधवार को एक पत्र में, श्री गहलोत ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का उल्लेख किया – आपातकालीन प्रदूषण नियंत्रण योजना है कि ईपीसीए को कार्यान्वयन और निगरानी के साथ सौंपा गया है – जो कहता है कि सभी एनसीआर शहरों को अजीब-यहां तक ​​कि कार राशन करना है योजना जब प्रदूषण का स्तर उच्चतम गंभीर + या आपातकालीन स्तर दर्ज करता है

    एनजीटी की छानबीन के तहत दिल्ली सरकार के फैसले का भी अंदाज़ा लगाया गया था और अंततः इसे बंद कर दिया गया था, श्री गहलोत ने कहा कि ईपीसीए एनसीआर शहरों पर चुप रहा था।

    “इस बात की सराहना की जानी चाहिए कि जब तक सभी एनसीआर शहरों में ग्राप लागू नहीं किया जाता है, दिल्ली में प्रदूषण स्तर और पड़ोसी शहरों को नीचे नहीं लाया जा सकता है”

    ग्राप के अनुसार यदि प्रदूषण के आपातकालीन स्तर को 48 घंटों के लिए दर्ज किया जाता है तो दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश को रोक दिया जाना है, निर्माण रोक दिया गया है और अजीब-यहां तक ​​कि एनसीआर शहरों में भी शुरू किया गया है।

    ‘कोई छूट नहीं’

    9 नवंबर को 48 घंटे से ज्यादा के लिए गंभीर + या आपातकालीन स्तर पर प्रदूषण के बाद मनाया जाने के बाद दिल्ली सरकार ने 13 नवंबर से 17 नवंबर को भी अजीब का कार्यान्वयन करने की घोषणा की थी। एनजीटी ने सरकार से दोपहिया वाहनों को छूट देने के फैसले पर सवाल उठाया था। और महिलाओं द्वारा संचालित कारें चूंकि एनजीटी ने आदेश दिया कि कोई भी छूट नहीं दी जा सकती है, सरकार ने 11 नवंबर को भी अजीब बंद किया। तब से, वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, आपातकाल से गंभीर और फिर बहुत गरीब