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  • मोदी सबसे लोकप्रिय नेता, आसपास भी नहीं राहुल-केजरीवाल

    एक अमेरिकी थिंक टैंक के सर्वे की माने तो पीएम मोदी भारतीय राजनीति में अब भी सबसे लोकप्रिय हस्ती हैं ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अब भी बरकरार है. एक अमेरिकी थिंक टैंक के सर्वे की माने तो पीएम मोदी भारतीय राजनीति में अब भी सबसे लोकप्रिय हस्ती हैं. यह सर्वे थिंक टैंक ‘प्यू रिसर्च सेंटर’ ने किया है. सर्वे में भारत में करीब 2,464 लोगों को शामिल किया गया था.।
    सर्वे इस साल 21 फरवरी से 10 मार्च के बीच कराया गया था. जिसमें सामने आया है कि 88 प्रतिशत के आंकड़े के साथ पीएम मोदी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी (58 प्रतिशत) से 30 और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (57 प्रतिशत) से 31 अंक आगे हैं. वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (39 प्रतिशत) पर 49 अंकों की बढ़त मिली हुई है.।
    प्यू ने कहा कि जनता द्वारा मोदी का सकारात्मक आकलन भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती संतुष्टि से प्रेरित है. हर दस में से आठ लोगों ने कहा कि आर्थिक दशाएं अच्छी हैं. ऐसा महसूस करने वाले लोगों में 2014 के चुनाव के ठीक पहले से 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसमें कहा गया कि अर्थव्यवस्था को बहुत अच्छा (30 प्रतिशत) बताने वाले वयस्कों के आंकड़े में पिछले तीन साल में तीन गुनी वृद्धि हुई है.।
    प्यू ने कहा कि कुल मिलाकर हर दस में से सात भारतीय देश में चल रही चीजों को लेकर संतुष्ट हैं. भारत की दिशा को लेकर सकरात्मक आंकलन में 2014 से करीब दोगुनी वृद्धि हुई है.।

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  • तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं की कमी पर NGT ने अमरनाथ बोर्ड को लगाई फटकार

    तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं की कमी पर NGT ने अमरनाथ बोर्ड को लगाई फटकार

     

     

    राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दक्षिण कश्मीर में हिमालय में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा तक जाने वाले तीर्थयात्रियों को उचित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के लिए बुधवार को
    अमरनाथ श्राइन बोर्ड को फटकार लगाई.

    हरित अधिकरण ने उच्चतम न्यायालय के वर्ष 2012 में दिए गए निर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए बोर्ड से पूछा कि इन वर्षों में उसने इस बारे में क्या कदम उठाए हैं.

    अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘मंदिर के नज़दीक आप ने दुकानें खोलने की इजाज़त दे रखी है. शौचालय की कोई उचित सुविधा नहीं है. क्या आप जानते हैं कि महिलाओं के लिए ये कितनी परेशानी की बात है. आपने तीर्थयात्रियों को उचित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध क्यों नहीं कराई. आप तीर्थयात्रियों के बजाए व्यावसायिक गतिविधियों को तवज्जो दे रहे हैं. ये गलत है. मंदिर की पवित्रता का ध्यान रखा जाना चाहिए लेकिन आप लोगों को समुचित दर्शन से वंचित नहीं कर सकते.’ हरित अधिकरण ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया है जो तीर्थयात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने संबंधी कार्ययोजना पेश करेगी.

    इस समिति में अन्य लोगों के साथ ही जम्मू-कश्मीर के पर्यावरण सचिव, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से वरिष्ठ वैज्ञानिक, जी बी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, अमरनाथ श्राइनबोर्ड के सीईओ, सेना का एक अधिकारी (जो ब्रिगेडियर रैंक से नीचे का न हो), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव भी शामिल होंगे.पीठ ने कहा कि समिति को जांच के बाद उचित मार्ग, गुफा के इर्दगिर्द के स्थल को साइलेंट जोन घोषित करने और मंदिर के निकट स्वच्छता बनाए रखने जैसे पहलुओं पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया. समिति से इलाके में इको-फ्रेंडली शौचालय के निर्माण के बारे में विचार करने के लिए भी कहा गया है.

    अधिकरण ने श्राइन बोर्ड से कहा कि शीर्ष अदालत के 2012 के निर्देशों के अनुपालन संबंधी स्थिति रिपोर्ट दिसंबर के पहले हफ्ते में पेश की जाए. अधिकरण ने ये निर्देश पर्यावरण कार्यकर्ता गौरी मौलेखी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए. इस मामले में अगली सुनवाई पांच दिसंबर को तय की गयी है.

  • माल्या को वापस लाने के लिए ब्रिटेन से ये कहेगा भारत

    माल्या को वापस लाने के लिए ब्रिटेन से ये कहेगा भारत

     

     

    भारत जल्दी ही ब्रिटेन की अदालत को सूचित करेगा कि भगोड़ा शराब व्यवसायी विजय माल्या को अगर 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज चूक मामले में अगर प्रत्यर्पण किया जाता है तो जेल में उनके जीवन को कोई खतरा नहीं होगा.

    क्राउन प्रोस्क्यूशन सर्विस (सीपीएस) के जरिये भारत सरकार का यह आश्वासन वेस्टमीनिस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत को दिया जाएगा. सीपीएस भारत सरकार की तरफ से प्रत्यर्पण मामले में पक्ष रख रहा है.

    गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक में इस आशय का फैसला किया गया. कल हुई इस बैठक में विदेश मंत्रालय समेत विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

    बैठक में ब्रिटेन की अदालत में रखे गये जवाब पर विचार विमर्श किया गया. इसमें माल्या की इस आशंका को खारिज किया गया कि अगर उन्हें 9,000 करोड़ रुपये के किंगफिशर ऋण चूक मामले में सुनवाई के लिये भारत वापस भेजा जाता है तो वह भारतीय जेल सुरक्षित नहीं होंगे.अधिकारी ने कहा कि मुंबई के आर्थर रोड स्थित जेल तथा दिल्ली के तिहाड़ जेल में कैदियों की सुरक्षा के विस्तृत आंकलन के साथ भारत सरकार ब्रिटेन की अदालत के समक्ष कहेगी कि माल्या को आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा जहां उन्हें विचाराधीन कैदी के रूप में पूरी सुरक्षा दी जाएगी.

    वेस्टमीनिस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत चार दिसंबर से प्रत्यर्पण कार्यवाही की सुनवाई शुरू करेगी.

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  • गुजरात चुनाव 2017: सीडी की राजनीति और लोकतंत्र

    गुजरात चुनाव 2017: सीडी की राजनीति और लोकतंत्र

     

     

    गुजरात चुनाव के ऐन मौके पर दर्शकों के मनोरंजन के लिए नई मसालेदार सेक्स सीडी मीडिया के हाथ लगी है. यह सीडी किसी महिला के साथ ‘कमरे में बंद’ कथित रूप में हार्दिक पटेल की बताई गई है. हालांकि, हार्दिक पटेल ने सीडी मार्केट में आने के दो दिन पहले ही अपने चरित्र पर साइबर अटैक की आशंका जता दी थी. अब सीडी नमूदार हो जाने और उसमें खुद के किसी महिला के साथ कमरे में बंद होने का वे सिरे से खंडन कर रहे हैं.

    उसके बाद कुछ लोगों के साथ शराब का गिलास थामे कथित रूप में हार्दिक की सीडी भी नमूदार हो गई है. हार्दिक इसे सरासर बीजेपी की गटर राजनीति बता रहे हैं जबकि बीजेपी सीडी पॉलिटिक्स से अपना पल्ला झाड़ रही है. हार्दिक ने ऐसी और कई सीडी बाजार में दर्शकों के मनोरंजन के लिए आने के प्रति फिर आगाह किया है.

    बिलो द बेल्ट अटैक करने वाली इन सीडियों और इलेक्ट्रॉनिक स्टिंग ऑपरेशन ने अनेक नेताओं की राजनीतिक कमाई को विमुद्रीकरण की तरह रातोंरात जीरो किया है. ऐसे नेताओं में बीजेपी के ही गुजरात प्रभारी संजय जोशी, बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष रहे बंगारू लक्ष्मण, समता पार्टी की अध्यक्ष जया जेटली, रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीज, सांसद और छत्तीसगढ़ बीजेपी के कद्दावर नेता दिलीप सिंह जुदेव, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी दिग्गज अजीत जोगी और प्रश्न कांड तथा नारद कांड में नोट लेते स्टिंग का दंश झेल रहे सांसद एवं अन्य नेता हैं.

    इन सबसे भी पहले अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन 1980 के दशक में स्टिंग के दंश से अपना पद गंवा चुके हैं. उत्तराखंड के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री हरीश रावत का विधायकों का समर्थन पाने की सौदेबाजी का स्टिंग, समाजवादी के पूर्व महासचिव अमर सिंह, क्रिकेट मैच फिक्सिंग, हार्दिक के साथी नरेंदर पटेल की बीजेपी कद्दावर द्वारा उन्हें कथित रूप में खरीदने संबंधी बातचीत का सीडी और नकदी आदि मामले भी स्टिंग की बदौलत ही उजागर हुए हैं. जेसिका लाल और प्रियदर्शिनी मट्टू के जघन्य हत्याकांडों में स्टिंग ऑपरेशन की बदौलत ही दोषियों को लंबी सजा हो पाई है.इस लिहाज से देखें तो इलेक्ट्रॉनिक स्टिंग आपरेशनों के जरिए जहां भारतीय राजनीति की सफाई से लोकतंत्र का भविष्य उज्जवल तथा कभी-कभी नेताओं का चरित्रहनन भी हो रहा है. वहीं लैंगिक न्याय और मानवाधिकारों की भी रक्षा हो रही है.

    बहरहाल हार्दिक का दावा है कि यह उनके ही किसी पुराने साथी की हिमाकत है जो दिल्ली जाकर बीजेपी में शामिल हुआ है. वैसे सीडी की इस टुटपुंजिया राजनीति को उन्होंने गुजरात की स्त्रियों का अपमान बताकर खुद भी राजनीतिक रंग दे दिया है.

    अन्य ट्वीट में वे साफ कह रहे हैं कि उन्होंने अभी शादी तो नहीं की मगर वे नपुंसक नहीं हैं. हार्दिक ने मुनासिब समय पर इन सीडियों के फर्जी होने और किसी अन्य के चौखटे पर उनका चेहरा चस्पां करने की साजिश का सबूत देने का भी दावा किया है.

    पाटीदार अनामत आंदोलन के मुख्य चेहरे हार्दिक की उम्र अभी महज चौबीस साल है और कथित कमराबंदी सीडी के जरिए दूसरी बार उनका चरित्र हनन किया गया है. इससे पहले 2015 में जब पाटीदार आंदोलन उफान पर था तक भी कथित रूप में उनकी ऐसी ही सीडी बाजार में आई थी. उसके बावजूद हार्दिक न सिर्फ जमे हुए हैं बल्कि बीजेपी नेतृत्व को उन्होंने दर-दर वोट मांगने पर मजबूर कर दिया है.

    उत्तरी गुजरात की 53 सीटों पर उलटफेर में समर्थ पाटीदारों के नेता हार्दिक कोई बीजेपी के संजय जोशी तो हैं नहीं कि सीडी के ब्रह्मास्त्र से धराशाई होकर गुजरात ही छोड़ने पर मजबूर हो जाएं. संजय जोशी को सीडी की यह कुत्सित राजनीति इतनी भारी पड़ी कि उनका गुजरात ही नहीं बल्कि राजनीति से भी सफाया हो गया.

    सीडी युद्ध में खेत रहे संजय जोशी अकेले नेता नहीं हैं. उन्हीं की पार्टी बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष रहे बंगारू लक्ष्मण भी ऐसे ही इलेक्ट्रॉनिक स्टिंग में हाथ जलने पर बड़े बेआबरू होकर पद से हटे थे. उन्हें तहलका डॉट कॉम वेबसाइट पर रक्षा सौदों को प्रभावित करने के लिए एक लाख रुपए जितने नोटों की गड्डियां थामते पूरी दुनिया ने देखा था.

    तहलका कांड के नाम से मशहूर उस स्टिंग में रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीज और उनकी हमसफर और समता पार्टी की अध्यक्ष जया जेटली को भी अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा था.
    जॉर्ज फर्नांडीज के लिए यह झटका बेहद मर्मांतक इसलिए था कि वे तो भ्रष्टाचार से लड़ने में हमेशा आगे रहे थे. चाहे आपातकाल में सर्वसत्तात्मक इंदिरा गांधी हों या बोफोर्स तोप सौदे में कथित दलाली में बदनाम हुए राजीव गांधी, उन्होंने डटकर उनका विरोध किया था.

    तहलका स्टिंग ऑपरेशन रक्षा सौदों और भारतीय राजनीति में पैसे के अवैध लेनदेन पर इतना बड़ा खुलासा था कि प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के चेहरे का रंग कई दिन तक उड़ा रहा था. वाजपेयी की अगुआई में बीजेपी ने कांग्रेस के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ दशकों लंबे संघर्ष के बाद सत्ता हासिल की थी. सबको वाजपेयी और बीजेपी के इकबाल पर बड़ा नाज था मगर एक ही स्टिंग का दंश इतना गहरा लगा कि उसकी छवि पल भर में किरचे-किरचे हो गई.

    हार्दिक की सीडी से ऐन पहले दिल्ली में पत्रकार विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ के बड़े नेता की अश्लील सीडी रखने और उसे ब्लैकमेल करने के आरोप में गिरफ्तार किए जा चुके हैं. हालांकि छत्तीसगढ़ के मंत्री राजेश मूणत ने ऐसी किसी सीडी या ब्लैकमेलिंग की कोशिश की जानकारी से इंकार किया तो भी विनोद को अभी तक जमानत नहीं मिली.

    सीडी की टुटपुंजिया राजनीति ने ही साल 2003 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद दिलीप सिंह जूदेव के नीचे से मुख्यमंत्री की कुर्सी आते-आते खिसकवा दी थी. पूरी दुनिया ने जूदेव को नोटों की गड्डी माथे पर लगाते और यह डायलॉग बोलते सुना, ‘पैसा, खुदा तो नहीं पर खुदा से कम भी नहीं.’ इसी के साथ जूदेव की तकदीर में बट्टा लग गया और बीजेपी के स्टार कैंपेनर से मुख्यमंत्री बनते-बनते वे कोने में बैठा दिए गए.

    छत्तीसगढ़ से ही पूरे देश ने 2003 में खुली आंखें टीवी पर कांग्रेसी मुख्यमंत्री अजित जोगी की बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायकों की सौदेबाजी करती आवाज सुनी थी. राज्य में कांग्रेस के चुनाव हारने पर बीजेपी विधायक दल ने रमन सिंह को अपना नेता चुन लिया था. अजित जोगी तब भी बस्तर के सांसद बलिराम कश्यप से बीजेपी विधायकों को खरीदने की सौदेबाजी कर रहे थे.

    पूरी बात बीजेपी नेताओं ने सीडी में रिकॉर्ड कर ली. उसी रात अरुण जेटली से रायपुर में प्रेस कांफ्रेंस करवा के बीजेपी ने नोटों से भरा बोरा और वो सीडी जारी करवा दी. फिर बीजेपी की रमन सिंह सरकार ने उस कांड की जांच सीबीआई को सौंप दी जिसका आजतक कोई नतीजा नहीं निकला.

    इलेक्ट्रॉनिक स्टिंग ऑपरेशन ने ही सिनेमा उद्योग में शक्ति कपूर और अमन वर्मा जैसे लोगों को कास्टिंग काउच यानी काम की तलाश में भटकती लड़कियों का शोषण करते पकड़ा.

    स्टिंग से भष्टाचार विरोधी मुहिम ऐसी छिड़ी कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो लोगों से रिश्वत मांगने वाले अफसरों और नेताओं का स्टिंग करके सीडी उन्हें भेज देने की अपील कर डाली. यह बात दीगर है कि उन्हीं के दो मंत्री अब तक स्टिंग में दुराचार और भ्रष्टाचार के आरोप में पद से हटाए जा चुके हैं.

    बाजार में जासूसी उपकरण अब बहुतायत में उपलब्ध हैं. ऊपर से स्मार्टफोन में भी अब हाथोंहाथ वीडियो बनाकर वायरल करने की सुविधा के चलते बड़े-बड़ों के होश ठिकाने लगा दिए हैं. कुल मिलाकर सीडी की कमरतोड़ राजनीति पर कवियत्री संध्या सिंह की यह उक्ति सही सिद्ध हो रही है,‘राजनीति के खेल में धर्म सीढ़ी है और सीढ़ी निन्यानबे से एकदम नौ पर ला पटकती है.’

    फर्स्टपोस्ट हिंदी के लिए अनंत मित्तल

  • अजमेर दरगाह दीवान बोले- ‘पद्मावती’ का विरोध करें मुसलमान

    अजमेर दरगाह दीवान बोले- ‘पद्मावती’ का विरोध करें मुसलमान

     

     

    राजस्थान के अजमेर स्थित सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के दीवान ने मुसलमानों से ‘पद्मावती’ फिल्म का विरोध करने की अपील की. उन्होंने फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली की तुलना विवादित लेखक सलमान रुश्दी, तस्लीमा नसरीन और तारिक फतह से की.

    हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के वंशज एवं वंशानुगत सज्जादा नशीन दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फिल्म ‘पद्मावती’ के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग भी की.

    खान ने कहा कि फिल्म के विरोध में देश के मुसलमानों को राजपूतों का समर्थन करना चाहिए. दरगाह दीवान ने कहा कि फिल्म का मकसद किसी समुदाय की भावना को आहत करना नहीं होता है.

    खान ने आज जारी बयान में कहा कि भंसाली का किरदार वैसा ही है जैसा विवादित लेखक सलमान रुश्दी, तस्लीमा नसरीन और तारिक फतह का है. जिस तरह भंसाली ने इतिहास को तोड़-मरोड़ कर ‘पद्मावती’ फिल्म का निर्माण किया है और देश के राजपूत समुदाय की भावनाओं को आहत किया है. उसी तरह अभिव्यक्ति की आजादी का सहारा लेकर रुश्दी और तस्लीमा ने इस्लाम धर्म के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करके मुसलमानों की ‘धार्मिक’ भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की है.उन्होंने कहा कि ‘पद्मावती’ फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के प्रस्तुत किए गए कथित चित्रण से राजपूत समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचना स्वाभाविक है.

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  • पाक सेना ने फिर तोड़ा सीजफायर, गोलीबारी जारी

    पाक सेना ने फिर तोड़ा सीजफायर, गोलीबारी जारी

     

     

    पाकिस्तानी सेना ने जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा के पास के क्षेत्रों में गोलियां चलाईं और गोलेबारी की, जिसका भारतीय सेना ने माकूल जबाब दिया, सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि गोलीबारी अभी जारी है.

    उन्होंने कहा, पाकिस्तानी सेना ने सुबह आठ बजकर 15 मिनट पर बिना उकसावे के एलओसी के पास छोटे, स्वचालित हथियारों से गोलियां चलाईं और मोर्टार के गोले दागे. भारतीय सेना मजबूती के साथ और प्रभावी तरीके से जवाबी कार्रवाई कर रही है.

    गौरतलब है कि दो नवंबर को पाकिस्तानी रेंजर्स ने सांबा सेक्टर में बीएसएफ के गश्ती दल पर गोलियां चलाईं थीं, जिसमें बीएसएफ के रेंजर तपन मंडल शहीद हो गए थे.

  • लड़की के साथ 65 साल के विधायक ने लगाए ठुमके, वीडियो हुआ वायरल

    बेंगलुरु। कर्नाटक के कांग्रेस विधायक एमएच अंबरीश का दो महिलाओं के साथ डांस करने को लेकर विवादों में घिर गए हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्टी के साथ-साथ 65 साल के विधायक को लोगों के तीखे कमेंट्स का सामना करना पड़ रहा है। राजनीति गलियारों में चर्चा छिड़ने के बाद पार्टी भी उनके बचाव में उतर आई है। यूजर्स का कहना है कि जब असेंबली का विंटर सेशन चल रहा है तो उस दौरान एमएलए का ऐसे प्रोग्राम में जाना गलत है। हालांकि, वीडियो किस वक्त का है इसकी पुष्टि नहीं हुई है।दरअसल, कांग्रेस विधायक अंबरीश एक म्यूजिक लॉन्चिंग के प्रोग्राम में गए थे, जहां वे खुद को थिरकने से रोक न सके। विधायक महोदय ने स्टेज पर ही एक लड़की और महिला के साथ गाने की धुनों पर डांस करना शुरू कर दिया।

    गुजरात चुनाव 2017: सीडी की राजनीति और लोकतंत्र

    इस वीडियो के वायरल होने के बाद विधायक अंबरीश का ट्विटर पर ट्रोल किया जा रहा है। बता दें कि अंबरीश पहले कन्नड़ एक्टर थे और इसके बाद वे राजनीति में आ गए। एमएच अंबरीश मौजूदा समय में कर्नाटक की मंड्या विधानसभा से कांग्रेस के विधायक हैं। वे सीएम सिद्धारमैया की सरकार में 2013 से 2016 तक मिनिस्टर भी रह चुके हैं। इसके अलावा विधायक बनने से पहले अंबरीश तीन बार सांसद रहे और मनमोहन सिंह सरकार में वे सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री बने थे। उधर, विवाद होने पर कांग्रेस पार्टी अपने विधायक के बचाव में उतर आई है। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव का कहना है कि अंबरीश का मामला अलग है, क्योंकि वे एक एक्टर हैं। इसलिए उन पर नियम लागू नहीं होते। गौरतलब है कि साल 2015 में भी विधायक अंबरीश विधानसभा सत्र के बीच मोबाइल पर एक वीडियो देखते पाए गए थे।

    यह भी पढ़ेे: मुसलमानों को ‘पद्मावती’ फिल्म का विरोध करना चाहिए: दरगाह दीवान

  • बाल दिवस कार्यक्रम में बोले पर्रिकर, ‘हमने भी देखी हैं एडल्ट फिल्में’

    बाल दिवस कार्यक्रम में बोले पर्रिकर, ‘हमने भी देखी हैं एडल्ट फिल्में’

     

     

    गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने मंगलवार को बाल दिवस कार्यक्रम में अपने युवा समय में एडल्ट फिल्म देखने का अनुभव साझा किया.

    ‘हम सिर्फ फिल्में नहीं देखते थे, एडल्ट फिल्में भी देखते थे’
    कार्यक्रम में पहुंचे पर्रिकर से स्कूली बच्चों पूछा कि वो अपनी यंग एज में किस तरह की फिल्में देखते थे. इस पर पर्रिकर ने जवाब दिया, हम सिर्फ फिल्में नहीं देखते थे, हमने उस समय की एडल्ट फिल्में भी देखीं हैं. आज के समय में आप अब बहुत सी चीजें टीवी पर देख रहे हैं, जो पुराने समय में एडल्ट फिल्म में दिखाया जाता था.

    भाई के साथ एडल्ट फिल्म देखने गए थे पर्रिकरपर्रिकर ने कहा, एक लोकप्रिय एडल्ट फिल्म थी. मैं उस समय वयस्क था. मैं व मेरा भाई इसे देखने गए थे. इंटरवल के दौरान, जब लाइट जली तो मैंने एहसास किया कि मेरा पड़ोसी मेरे बगल में बैठा है. यह पड़ोसी अक्सर मेरी मां के साथ शाम को बात करता था. मैंने खुद से कहा, हम मारे गए.

    पड़ोसी को देख सिनेमा हाल से भागे थे सीएम
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वह और उनका भाई अवधूत फिल्म बीच ही में छोड़कर सिनेमा हाल से भागे. घर जाते समय उन्होंने संकट से निपटने के लिए पहले से ही योजना बना ली थी.

    खुद को बचाने के लिए मां से बोला झूठ 
    उन्होंने कहा, जब हम घर पहुंचे तो मैंने अपनी मां से कहा कि हम फिल्म देखने गए थे और हम नहीं जानते थे कि फिल्म अश्लील है. हमने फिल्म बीच में ही छोड़ दी. मैंने बहुत ही सहज रूप से उन्हें बताया कि हमारे पड़ोसी भी वहां थे और मैं चुप हो गया.

    मां ने लगाई पड़ोसी को फटकार
    उन्होंने कहा, अगले रोज हमारे पड़ोसी ने बहुत उत्साहित होकर हमारी मां को बुलाया और कहा कि मनोहर व अवधूत वयस्क फिल्म देखने गए थे. मेरी मां ने उनसे कहा कि मैं जानती हूं कि वह कौन सी फिल्म देखने गए थे, लेकिन आप क्यों वह फिल्म देखने गए थे? आपको कुछ चीजें पहले से सोचनी होंगी.

  • एयरबेस में घुसने की कोशिश कर रहे शख्स को मारी गोली, जाना चाहता था सऊदी

    एयरबेस में घुसने की कोशिश कर रहे शख्स को मारी गोली, जाना चाहता था सऊदी

     

     

    गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस में दीवार फांदकर घुस रहे एक संदिग्ध को एयरफोर्स स्‍टाफ ने गोली मार दी. गोली व्यक्ति के पैर में लगी. उसकी पहचान उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी सुजीत के रूप में हुई है.

    बता दें कि मंगलवार रात को सुजीत दीवार फांदकर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था. यह देखकर स्‍टाफ ने उसे उतारने की कोशिश की और जब नहीं उतरा तो उसके पैर में गोली मार दी.

    फिलहाल सुजीत को एयरफोर्स हॉस्‍पिटल में भर्ती कराया गया है. उसकी हालत स्थिर है. बताया जा रहा है कि सुजीत की मानसिक हालत ठीक नहीं है. जब उससे हिंडन एयरबेस में घुसने का कारण पूछा गया तो उसने कहा कि वह सउदी अरब जाना चाहता है. वह एयरबेस में जाकर सऊदी अरब के लिए फ्लाइट में बैठना चाहता था.

  • हिमाचल : ‘पद्मावती’ का विरोध, राजपूत सभा ने कहा-नहीं होने देंगे रिलीज

    हिमाचल : ‘पद्मावती’ का विरोध, राजपूत सभा ने कहा-नहीं होने देंगे रिलीज

     

     

    बॉलीवुड फिल्म ‘पद्मावती’ के विरोध की आग हिमाचल प्रदेश भी पहुंच गई है. हिमाचल प्रदेश का राजपूत समुदाय भी फिल्म के रिलीज के विरोध में खड़ा हो गया है.

    राजपूत सभा के प्रधान और प्रदेश राजपूत कल्याण बोर्ड के सदस्य केएस जम्बाल ने फिल्म को लेकर राजस्थान की करणी सेना व संघर्षरत राजपूत क्षत्रिय संगठनों के विरोध को समर्थन देने की घोषणा की है.

    उन्होंने कहा कि नवबंर के अंत में सुंदरनगर में प्रदेश राजपूत सभा की एक विशेष बैठक बुलाई जा रही है, जिसमें इस मुद्दे को लेकर संघर्ष की आगामी रुपरेखा तैयार की जाएगी. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में इस फिल्म को रिलीज नहीं करने दिया जाएगा.

    जो भी सिनेमा फिल्म रिलीज करने की कोशिश करेगा, उसे प्रदेश के राजपूत समुदाय के विरोध का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि देश के राजपूतों का अपना एक गौरवमयी इतिहास है, जिसके साथ किसी भी तरह के खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने मांग की है केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार इस मामले में संज्ञान लेते हुए राजपूत समुदाय की भावनाओं की कद्र करते हुए इस फिल्म के प्रसारण पर पूरी तरह से रोक लगाए, अन्यथा इसके विरोध में होने वाले आंदोलन के लिए सरकार ही जिम्मेदारी होगी.