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  • जहरीला धुएं में डूबी रही दिल्‍ली, सरकार के पास पड़े रहे 1500 करोड़

    जहरीला धुएं में डूबी रही दिल्‍ली, सरकार के पास पड़े रहे 1500 करोड़

     

     

    वायु प्रदूषण से निपटने के लिए हरित कोष के तौर पर दिल्ली में अथॉरिटी के पास 1,500 करोड़ रुपये से अधिक राशि इस्तेमाल नहीं होने के कारण पड़ी हुई है जबकि दिल्ली जहरीली धुंध से राहत पाने के लिए मशक्कत कर रही है. इस रकम का बड़ा हिस्सा और 1,003 करोड़ रुपया पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ईसीसी) से आया, जिसे उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों पर 2015 में लगाया था वहीं, बाकी राशि प्रति लीटर डीजल बिक्री पर लगाए गए उपकर से मिला है.

    यह उपकर 2008 से प्रभावी है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली – एनसीआर में 2000 सीसी और इससे अधिक की क्षमता वाले इंजन के साथ डीजल कार बेचने वाले डीलरों से इकट्ठा किए एक फीसदी उपकर से 62 करोड़ रुपये जमा किए. यह कदम पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद उठाया गया था.

    सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरनमेंट (सीएसई) में शोधार्थी उस्मान नसीम ने बताया कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम ईसीसी एकत्र करता है और यह रकम शहर के परिवहन विभाग को हर शुक्रवार को जमा करता है.

    डीजल पर उपकर की घोषणा शीला दीक्षित सरकार ने दिसंबर 2007 में कही थी. इसने वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मद्देनजर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की कोशिश के तहत यह कदम उठाई थी.नसीम ने बताया कि ‘एयर एंबीयेंस फंड’ का रखरखाव दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) करती है. इसके पास फिलहाल करीब 500 करोड़ से अधिक की राशि है.

    संपर्क किए जाने पर दिल्ली परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए इस कोष का इस्तेमाल करने का फैसला कल लिया गया. ‘‘हम इलेक्ट्रिक बसों के लिए इस कोष का उपयोग करेंगे. ’’ हालांकि, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि कितनी संख्या में ई-बसें खरीदने की सरकार की योजना है और इसके लिए कितनी राशि की जरूरत है.

    उच्चतम न्यायालय के साल 2016 के आदेश के मुताबिक ईसीसी से करीब 120 करोड़ रुपये का इस्तेमाल ट्रकों पर ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन डिवाइस’ लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा ताकि प्रभावी और विश्वसनीय ‘लेवी’ वसूल हो सके.

    वहीं, सीपीसीबी की योजना हरित कोष का इस्तेमाल क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में बेहतरी और प्रबंधन को लेकर अध्ययन पर खर्च करने की है.

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  • हवा की गुणवत्ता में सुधार के बाद ईपीसीए ने ‘इमरजेंसी’ उपाय हटाए

    हवा की गुणवत्ता में सुधार के बाद ईपीसीए ने ‘इमरजेंसी’ उपाय हटाए

     

     

    दिल्ली में लगातार दूसरे दिन हवा की गुणवत्ता ‘आपात’ श्रेणी से बाहर रहने के बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा अधिकृत ईपीसीए ने निर्माण गतिविधियों, ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध और समूचे दिल्ली-एनसीआर में पार्किंग का बढ़ा हुआ शुल्क आज वापस ले लिया.

    प्रदूषण स्तरों में इजाफा के बाद इसके आपात श्रेणी में पहुंचने और धुंध की मोटी परत छाने के कारण स्तरीय प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के तहत आठ नवंबर से यह उपाय लागू किये गये थे.

    ईपीसीए के अध्यक्ष भूरे लाल ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब एवं हरियाणा के मुख्य सचिवों को आज सुबह लिखे पत्र में उन्हें निर्देश दिया कि चूंकि हवा की मौजूदा गुणवत्ता को देखते हुए ऐसी सख्त कार्रवाई आवश्यक नहीं है. इसलिए इन उपायों को ‘‘तत्काल प्रभाव’’ से हटाया जाये.

    ईपीसीए ने कहा कि जीआरएपी की ‘गंभीर’ श्रेणी के तहत लागू इन उपायों के तहत बदरपुर ताप बिजली संयंत्र को बंद करने, ईंट-भट्ठों पर प्रतिबंध, गर्म मिश्रित संयंत्र और स्टोन क्रशर्स पर प्रतिबंध बने रहेंगे.इसने कहा, ‘‘हमलोग स्थिति पर बहुत सावधानी से नजर रख रहे हैं और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग एवं भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान ने हमें सूचना उपलब्ध करायी है कि हवा में नमी बढ़ने के कारण आगामी दिनों में प्रदूषण में फिर से इजाफा हो सकता है.’’ भूरे लाल ने लिखा, ‘‘हालांकि अगर स्थिति में ऐसे ही लगातार सुधार होता रहा और हवा की गुणवत्ता स्थिर बनी रही तो हम ‘गंभीर’ श्रेणी के तहत उन उपायों की समीक्षा करेंगे और इसके मुताबिक आपको सूचित करेंगे.’’

  • फसल जलने पर खट्टर से मुलाकात के लिए केजरीवाल

    फसल जलने पर खट्टर से मुलाकात के लिए केजरीवाल

     

     

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि वह हरियाणा के समकक्ष मनोहर लाल खट्टर को बुधवार को चंडीगढ़ में मिलेंगे।

    केजरीवाल ने 8 नवंबर को हरियाणा के मुख्यमंत्री और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह दोनों को लिखा था, जिससे मौजूदा प्रदूषण के बारे में चर्चा करने के लिए एक बैठक की स्थापना की जाए।

    श्री केजरीवाल ने लिखा था कि हरियाणा और पंजाब के किसानों द्वारा फसलों को जलाने से दिल्ली में प्रदूषण की रफ्तार में बढ़ोतरी हुई है, राज्यों को समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

    खट्टार ‘बहुत व्यस्त’

    जब पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा था कि केंद्र को आगे बढ़ना चाहिए और एक बैठक बुलाई जाए, तो खट्टर ने सोमवार तक अपनी मां को रखा था, जब उन्होंने केजरीवाल को एक पत्र लिखा था। अपने पत्र में, श्री खट्टर ने कहा कि वह सोमवार और मंगलवार को दिल्ली में थे और केजरीवाल के साथ बैठक के लिए खुला था।

    सोमवार शाम को, केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा कि श्री खट्टर ने बुलाया और कहा कि हालांकि वह मंगलवार तक दिल्ली में होंगे, वह बहुत व्यस्त थे। श्री केजरीवाल ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री ने बुधवार को उन्हें चंडीगढ़ में मिलने के लिए कहा था।

    दिन पहले, दिल्ली के श्रम एवं विकास मंत्री गोपाल राय ने संभावित खंभे के बारे में पूछे जाने पर श्री खट्टर पर हमला किया था। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में श्री राय ने कहा कि यह प्रकट हुआ कि श्री खट्टर ने “संन्यास” या निर्वासन लिया था।

    “दिल्ली सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है … हरियाणा सरकार क्या कर रही है? पंजाब सरकार क्या कर रही है? उन राज्यों में हवा की गुणवत्ता खराब है, “उन्होंने कहा, रविवार को रोहतक यात्रा के अपने अनुभव का हवाला देते हुए।

    ‘दिल्ली में छोटे होल्डिंग्स’

    अपने पत्र में, श्री खट्टर ने फसल को जलाने को रोकने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए उपायों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि खेती के तहत लगभग 40,000 हेक्टेयर जमीन है। यह केजरीवाल के जवाब में था कि हरियाणा और पंजाब सरकारें किसानों को फसल के अवशेषों को जलाने के लिए एक आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकल्प देने में नाकाम रही हैं।

    श्री खट्टर के सवाल का जवाब देते हुए, श्री राय ने कहा: “हमने दिल्ली में फसल के किसी भी दृश्य को नहीं देखा है”। सरकारी स्रोतों के अनुसार, दिल्ली के किसानों के पास छोटे होल्डिंग होते हैं और केवल सब्जियां पैदा होती हैं, वे मैकेनिकल हार्वेस्टर का इस्तेमाल नहीं करते हैं, जो अवशेष छोड़ते हैं जिन्हें जला दिया जाना चाहिए।

  • वायरल वीडियो पर UP के मंत्री नंदी ने दी ये सफाई

    वायरल वीडियो पर UP के मंत्री नंदी ने दी ये सफाई

     

     

    यूपी के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी का कार्यकर्ताओं से पैर दबवाने वाला वीडियो तेजी से सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. इस वायरल वीडियो पर नंदी ने विपक्ष को आड़े हाथ लिया है.

    मंत्री ने बताया कि इलाहाबाद नगर निगम चुनाव में भाजपा से मेयर पद के लिए किस्मत आजमा रहीं उनकी पत्नी अभिलाषा गुप्ता नंदी के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे, इस दौरान उनके पैर पर मोच आ गई थी. इस मोच को पार्टी के कार्यकर्ता ठीक करने का प्रयास कर रहे थे, तभी विरोधी धड़े के किसी शख्स ने यह वीडियो बना लिया.

    नंदी ने बताया, नामांकन के दिन से मैं चुनाव प्रचार के लिए प्रतिदिन 10-12 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहा हूं. पैदल चलते समय मेरे पांव में मोच आ गई और मैं एक रिश्तेदार के घर सो गया. मेरे पैर में तकलीफ देखकर किसी ने मेरे पांव की मोच दूर करने की कोशिश की और विरोधी दल के किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया.

    वर्तमान महापौर और अपनी पत्नी अभिलाषा गुप्ता के कामकाज को लेकर मंत्री ने कहा, मौजूदा महापौर ने नगर में इतना काम किया है कि विपक्ष को उन्हें हराने का कोई मुद्दा नहीं मिल रहा. यही वजह है कि वे लोग हताश होकर इस तरह की हरकत कर रहे हैं.

    उन्होंने कहा, मायावती सरकार में मंत्री रहते मेरे ऊपर बम से हमला किया गया था, जिससे मेरे हाथ ठीक तरह से काम नहीं करते. यहां तक कि मेरी शर्ट का बटन कोई और लगाता है. गौरतलब है कि पिछले नगर निकाय चुनाव में महापौर के पद पर निर्दलीय जीतने वाली अभिलाषा गुप्ता को इस बार भाजपा ने महापौर पद के लिए अपना प्रत्याशी बनाया है.

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  • भीम आर्मी के चन्द्रशेखर का फोटो लगाया तो दर्ज हो गया मुकदमा

    भीम आर्मी के चन्द्रशेखर का फोटो लगाया तो दर्ज हो गया मुकदमा

     

     

    सहारनपुर के नकुड थाना क्षेत्र के अम्बहेटा पीर कस्बे में कांग्रेस प्रत्याशी को भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्रशेखर उर्फ रावण का फोटो अपने पोस्टर पर लगाना भारी पड़ गया. भीम आर्मी के रामपुर विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है.

    दरअसल, इन दिनों निकाय चुनाव की सरगर्मियां तेज़ है. हर प्रत्याशी अपने वोटर को लुभाने में लगा है. ऐसे में कांग्रेस के अंबेहटा पीर क्षेत्र के नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी चौधरी इनाम शाकिर ने दलित वोटरों को लुभाने के वास्ते पोस्टर में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण की फोटो भी लगाई गई है.

    जैसे ही ये जानकारी भीम आर्मी के विधानसभा प्रभारी रोहित राज गौतम को हुई तो उन्होंने थाना नकुड़ में तहरीर दी. उनकी तहरीर पर नकुड़ थाना पुलिस ने कांग्रेस के अम्बेहटा नगर पंचायत चेयरमैन प्रत्याशी चौधरी इनाम शाकिर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है.

    दरअसल, इस निकाय चुनाव से पहले भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण के समर्थन में कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद ने कई बार आवाज उठाई थी. चंद्रशेखर की हालत बिगड़ने पर वे उसे देखने के लिए अस्पताल भी पहुंचे.इतना ही नहीं चंद्रशेखर को जब डलहौजी से एसटीएफ ने गिरफ्तार किया तो उसी दिन रावण की मां और भाई के अलावा अन्य कार्यकर्ता इमरान मसूद के आवास पर पहुंचे थे और यहां आयोजित एक प्रेसवार्ता में इमरान मसूद ने यह मांग की थी कि चंद्रशेखर के साथ पुलिस कोई दुर्व्यहार ना करे. साथ ही चेतावनी भी दी गई थी कि यदि ऐसा हुआ तो कांग्रेस चंद्रशेखर और दलित समाज की लड़ाई लड़ेगी.

    इतना ही नहीं शब्बीरपुर प्रकरण के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी दलित परिवारों से मिलने के लिए सहारनपुर आए थे. यह अलग बात है कि प्रशासन ने उन्हें शब्बीरपुर तक नहीं जाने दिया था. ऐसे में अब कांग्रेस ने सहारनपुर में निकाय चुनाव में दलित वोटों के लिए भीम आर्मी का सहारा लेना चाहा तो भीम आर्मी सामने आ गई और कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ नकुड़ थाने में तहरीर दे दी.

  • Prime Minister Narendra Modi के लिए नास्त्रेदमस विश्व विख्यात भविष्यवक्ता ने ये की है भविष्यवाणी ! जानिये

    नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी कभी गलत साबित नहीं हुई.। 14 दिसंबर 1503 को फ्रांस में जन्में नास्त्रेदमस ने कई छंदों में अनेक शब्दों की भविष्यवाणियां की है. कहते हैं नास्त्रेदमस ने तीसरे विश्वयुद्ध की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि 2012 से 2025 के बीच महा युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और उस तृतीय विश्वयुद्ध में भारत शांति स्थापक की भूमिका निभा सकता है. नास्त्रेदमस ने अपने ऐसी भविष्यवाणी में एक और बात कही है जिसमें एक ऐसे महान राजनेता के जन्म की बात कही गई है जो दुनिया का मुखिया होगा और विश्व में शांति कायम करने में अहम भूमिका निभाएगा। भविष्यवक्ताओं की सूची में यदि सबसे ऊपर किसी का नाम आता है तो वह है नास्त्रेदमस. जाने-माने भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस एक जमाने में डॉक्टर एवं शिक्षक भी रह चुके थे. यह प्लेग जैसी बीमारियों का इलाज भी करते थे.ं लेकिन ऐसा व्यक्ति किस देश में जन्म लेगा इस बात की पुष्टि नहीं हुई है.।
    उसे लेकर काफी मतभेद है.। वैसे ज्यादातर जानकारों का मानना है कि दुनिया का मुक्तिदाता भारत में ही जन्म लेगा या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि उस महान व्यक्ति ने जन्म ले लिया हो.
    विभिन्न शोधकर्ताओं की माने तो नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी नरेंद्र मोदी की ओर इशारा करती है. दोस्तों नास्त्रेदमस के द्वारा 2017 की भविष्यवाणियों की बात करें तो उन्होंने सभी देशों के लिए अलग-अलग भविष्यवाणियां की है. उनमें से कुछ देशों की भविष्यवाणियों के बारे में हम आपको अपने इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं.ं।

    भारत के लिए नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी

    अब बात आती है भारत देश की. नास्त्रेदमस ने भारत के लिए 2017 से जुड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि यह वर्ष सालों – साल याद रखा जाएगा. 2017 में कुछ ऐसा होगा जो भारतीयों को दुनिया के सामने बड़े स्तर पर ले आएगा. इसके बाद नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणियों में भारतीय सत्ता की बात करते हुए कही है, जिसके अनुसार नरेंद्र मोदी एक बेहतरीन सत्ताधारी साबित होंगे. नरेंद्र मोदी भारत के सत्ता संभालने के बाद अगले 12 सालों तक देश के हित में कार्य करेंगे। यानी साल 2026 तक मोदी सरकार भारत के सत्ता पर आसीन होगी.। मतलब साफ है कि आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री काल काफी लंबा होने वाला है.। भारत देश और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए की गई नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी कितनी सच साबित होती है, ये तो वक्त ही बताएगा.। लेकिन फिलहाल नरेंद्र मोदी के बढ़ते कदमों की रफ्तार से तो साफ जाहिर होता है, कि यह रफ्तार अभी थमनेवाली नहीं है.।
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    नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी:
    चीन के लिए
    नास्त्रेदमस के अनुसार वर्ष 2017 में चीन अपने देश के हित में एक बड़ी तस्वीर उजागर करेगा. जो पूरे विश्व के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है. साथ हीं नास्त्रेदमस ने यह भी कहा की विश्व प्रसिद्ध सम्मेलन मे चीन का झंडा सबसे अधिक चमकेगा. तो संभव है कि साल 2017 चीन के लिए बहुत खास होने वाला है.।
    दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया की भविष्यवाणी
    ये दोनों देश अपनी पुरानी लड़ाई को छोड़ देंगे. और दोनों में समझौता हो जाएगा. यह मुमकिन है या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा.।
    लेटिन अमेरिका
    नास्त्रेदमस के अनुसार लातिन अमेरिका 2017 में कुछ खास कदम उठाने वाला है. लेकिन उसका लाभ सिर्फ लातिन अमेरिका को ही मिलेगा.
    रूस के लिए
    यह साल काफी खास बताया है. नास्त्रेदमस के अनुसार रूस और युक्रेन एक विशेष समझौते की ओर बढ़ेंगे. दस्तावेजों के माध्यम से दोनों एक-दूसरे से हाथ मिलाएंगे और दोनो देशों के इस फैसले को अमेरिका अस्वीकार करेगा लेकिन दूसरे यूरोपीय देशों का इसे समर्थन मलेगा.
    इटली
    तो वहीं नास्त्रेदमस ने इटली के लिए भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि 2017 इटली के लिए कुछ खास नहीं होगा. बल्कि इटली को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा. जिससे उसे उभरने में सालों लग जाएंगे.
    नास्त्रेदमस की अलग-अलग भविष्यवाणियों में युद्ध का जिक्र सामान्य पाया गया है. इसमें 2017 से भी जुड़ी है. यह युद्ध अन्य लड़ाइयों से अलग होगा, लेकिन युद्ध किसके बीच में होगा. इस पर शोधकर्ताओं ने कुछ भी खुलकर नहीं कहा है.।
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  • अमरिंदर ने केजरीवाल से बात करने से इंकार कर दिया

    अमरिंदर ने केजरीवाल से बात करने से इंकार कर दिया

     

     

    पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए उनके साथ एक बैठक से इनकार करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को वायु प्रदूषण के मुद्दे को राजनीति से बचाने के लिए कहा।

    केजरीवाल के ट्वीट के जवाब में कैप्टन सिंह ने कहा, “मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि क्यों दिल्ली मुख्यमंत्री अपने हाथों को मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं, यह जानकर कि कोई ऐसी चर्चा अर्थहीन और बेकार होगी।”

    क्षुद्र राजनीति: पंजाब के मुख्यमंत्री

    “श्री। कैपिटल सिंह ने कहा, “केजरीवाल की छोटी सी राजनीति में शामिल होने की प्रवृत्ति अच्छी तरह से ज्ञात है,” आम आदमी पार्टी (एएपी) नेता प्रदूषण को रोकने में अपनी सरकार की विफलता से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि “प्रतिक्रिया नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गैर-कल्पनायुक्त अजीब-भी योजना के लिए ”

    कैप्टन सिंह ने कहा कि दिल्ली और पंजाब के प्रदूषण की समस्याएं पूरी तरह से अलग नहीं थीं क्योंकि बैठक की कोई बैठक नहीं थी।

    “पंजाब के विपरीत, दिल्ली की समस्या मुख्य रूप से शव प्रदूषण का परिणाम है, जिसके कारण अनुचित परिवहन और अनियोजित औद्योगिक विकास होता है। कैप्टन सिंह ने कहा कि इन मुद्दों को हल करने पर अपना ध्यान केंद्रित करने के बजाय, केजरीवाल को बेकार चर्चा करने के लिए समय बर्बाद करना है।

    जबरदस्त जल पर, कैप्टन सिंह ने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, क्योंकि केजरीवाल इसे प्रोजेक्ट करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन “एक आर्थिक समस्या जिसकी आर्थिक समाधान की आवश्यकता है, जो कि केंद्र सरकार अकेले प्रदान करने की स्थिति में है”।

  • सीडीकांड: हार्दिक बोले- साहेब चुनाव न हारे इसलिए ये सब हो रहा है

    सीडीकांड: हार्दिक बोले- साहेब चुनाव न हारे इसलिए ये सब हो रहा है

     

     

    गुजरात में पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल का एक और कथित वीडियो क्लिप सामने आया है. जिसमें पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता की तरह दिखने वाला एक व्यक्ति बिस्तर पर दो पुरुषों और एक महिला के साथ आराम फरमाते और शराब पीते नजर आ रहे हैं. इससे पहले सोमवार को भी हार्दिक पटेल का एक कथित सेक्स वीडियो सामने आया था. जिस पर उन्होंने कहा था कि इसे भाजपा के इशारे पर छेड़छाड़ से तैयार कर फैलाया गया और उन्हें बदनाम करने के लिए भाजपा गंदी राजनीति कर रही है.

    वहीं ताजा जारी हुए वीडियो में एक सिर मुंडवाए हुए व्यक्ति को बिस्तर पर बैठकर पानी पीते हुए देखा जा सकता है. हार्दिक पटेल ने आरक्षण आंदोलन के दौरान उनके समुदाय के सदस्यों पर हुए कथित पुलिस अत्याचारों के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए इस साल मई में अपने समर्थकों के साथ सिर मुंडवाया था. इस नए वीडियो को लेकर हार्दिक पटेल ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है.

    मुझे बदनाम किया जा रहा है

    उन्होंने कहा, साहेब (पीएम मोदी) गुजरात में चुनाव न हारे, इसलिए उनके (बीजेपी) द्वारा नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. हार्दिक ने कहा कि बीजेपी मुझे बदनाम कर रही है. मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता. मेरा ध्यान किसानों और युवाओं के लिए लड़ी जा रही लड़ाई पर है. अगर उनको (बीजेपी) व्यक्तिगत रूप से मुझसे कोई परेशानी है, तो मैं खुद से इसे सुलझाउंगा.पाटीदार नेता का सवाल 

    पाटीदार आंदोलन के नेता ने कहा, बीजेपी राहुल गांधी पर गुजरात में राजनीति करने का आरोप लगा रही है. तो फिर मोदी आए दिन गुजरात क्यों आ रहे हैं. क्या वो सौराष्ट्र में पेस्टीसाइड छिड़कने आ रहे हैं. हार्दिक ने कुछ दिनों पहले इस बात की आशंका जताई थी कि चुनाव से पहले उनसे जुड़ी कोई सेक्स सीडी सामने आ सकती है. मीडिया में आई खबरों के अनुसार, हार्दिक के इस कथित वीडियो को इसी साल 16 मई को बनाया गया है. गुजरात विधानसभा चुनाव की 182 सीटों के लिए मतदान दो चरणों, 9 और 14 दिसंबर को होगा. वोटों की गिनती 18 दिसंबर को होगी.

  • क्या आपको पता है , नया देश ‘किंगडम ऑफ दीक्षित’ कहां है और किसने बनाया !

    इस भारतीय लड़के ने बनाया अपना नया देश- पापा को बनाया राष्ट्रपति, खुद बना राजा. इस भारतीय … इतना ही नहीं सुयश ने एक वेबसाइट बनाकर लोगों से इस देश की नागरिकता के लेने का आवदेन करने को भी कहा है।

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  • जब स्वामी ने गांधी हत्या पर नए विवाद को हवा दी, हिंदू महासभा हुई नाराज

    जब स्वामी ने गांधी हत्या पर नए विवाद को हवा दी, हिंदू महासभा हुई नाराज

     

     

    नाज़िम नकवी 

    मानव-इतिहास में ऐसे लोग अनगिनत हैं जिन्हें याद करते रहना हमारी आपकी मजबूरी बन जाती है. ये नाम, अच्छे-बुरे, सही-गलत, तर्क-अतर्क की सरहदों से बाहर आकर एक ऐसा मुकाम हासिल कर लेते हैं कि अगर उन्हें भुला दिया जाए तो इतिहास आगे बढ़ने से इनकार कर देता है.

    आज ये विचार शिद्दत से इसलिए आ रहा है क्योंकि आज ही के दिन यानी 15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे को अंबाला जेल में फांसी पर लटकाया गया था. यही वो दिन है जिस दिन नाथूराम गोडसे इतिहास की उस फेहरिस्त में दर्ज हो गया जिसके बिना इतिहास आगे बढ़ने से इनकार कर देता है. यह कुछ ऐसा ही है जैसे कोई अंतरिक्ष-यान प्रक्षेपास्त्र के बाद अपनी कक्षा में स्थापित हो जाए.

    जो है वो वैसा क्यों है?लेकिन ‘जो है- वो वैसा ही क्यों है’ की मानसिकता के साथ हर विषय को कुरेदने वाले हमेशा एक नयी थ्योरी गढ़ लाते हैं. शिव की तीसरी आंख की तर्ज़ पर ‘तिरछी-नजर’ रखने वाले हमारे सुब्रमण्यम स्वामी ने 8 सितंबर, 2015 को एक ट्वीट करके ‘नया-विवाद’ की दस्तक दी.
    उन्होंने ट्वीट किया कि ‘मैं गांधी-हत्या केस को दुबारा खोलने की अपील कर सकता हूं क्योंकि कुछ तस्वीरों में पाया गया है कि गांधी जी के शरीर पर चार जख्म हैं जबकि केस तीन गोलियों पर चला था, ऐसा क्यों?’
    सुब्रमण्यम स्वामी का ट्वीट ट्रोल होना शुरू हुआ तो फिर तो उन्होंने सवालों की झड़ी ही लगा दी. इतिहास में ऐसी भी बहुत सी मिसालें हैं जिनमें बंद मान लिए गए केस फिर से खुले और नए तथ्यों ने फैसलों को प्रभावित भी किया. और फिर जो सवाल स्वामी उठा रहे हैं, उन्हें नए सिरे से समझने में आखिर हर्ज ही क्या है?
    लेकिन ये बात ‘हिन्दू-महासभा’ के गले से किसी भी तरह नहीं उतर पाई. उसने स्वामी के साथ-साथ बीजेपी और आरएसएस को भी इस मसले से दूर रहने की हिदायत दी. हिंदू महासभा का कहना है कि बीजेपी और आरएसएस जानबूझकर चौथी गोली की थ्योरी पैदा कर इस मामले को उलझाना चाहती हैं.

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    नाथुराम गोडसे

    किसकी विरासत है ये?
    हिंदू-महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक शर्मा ने कहा, ‘यह हर किसी को पता है कि महासभा के नाथूराम गोडसे ने ही बापू की हत्या की थी. यह हमारी विरासत है. बीजेपी और आरएसएस इसे हमसे नहीं छीन सकती. बापू की हत्या में चौथी गोली की बात करके दोनों सगठन संशय पैदा कर रहे हैं.’
    ‘ऐसे में उनके चेहरे पर से मुखौटे हटाने का वक्त आ गया है. नाथूराम गोडसे का हिंदू-महासभा से अभिन्न रिश्ता था. अब बीजेपी और आरएसएस गोडसे को किनारे कर महात्मा गांधी से संबंधित सारा क्रेडिट खुद लेना चाहते हैं. उन्हें पता है कि गोडसे को हटाकर महासभा अधिकारहीन हो जाएगी. हम ऐसा नहीं होने देंगे.’
    गौरतलब है कि सात-दशक पहले राष्ट्रपिता की हत्या ने दुनिया को हिलाकर रख दिया था. लेकिन क्या वो हत्या गोडसे ने ही की थी? स्वामी की ही तरह यह सवाल ‘अभिनव-भारत’ के डॉ पंकज फडनीस भी उठाकर, रक्त-रंजित इस इतिहास में फिर से झांकने की कोशिश कर रहे हैं. उनका सुझाव है कि गांधी के हत्यारों में से एक, नारायण आप्टे, ब्रिटिश-गुप्त-संगठन का एजेंट था, जिसे फोर्स-136 नाम दिया गया था. फडनीस का यह भी यही तर्क है कि गांधी पर चार गोलियां चलीं और यह चौथी गोली नाथूराम गोडसे की 9 मिमी बेरेटा से नहीं, किसी अन्य पिस्तौल से चली थी.

    70 साल बाद क्यों खोला ये मामला?
    ये सारे तर्क सुप्रीम कोर्ट के उस सवाल के जवाब में दिए जा रहे थे, जिसमें उसने पूछा था कि 70 साल बाद इस मामले को फिर क्यों खोला जाए? दरअसल हर मर्डर एक स्पेस देता है. क्रिमिनोलॉजी के विशेषज्ञ कहते हैं कोई चाहे जितनी निपुणता से कोई योजना बना ले, फिर भी हत्या अक्षरशः योजना के मुताबिक नहीं होती.

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    1944 में शिमोगा में ली गई हिंदू महासभा की फोटो. (विकीपीडिया)

    आइए लौटते हैं गोडसे और हिन्दू-महासभा की मानसिकता की ओर. दरअसल गांधी की हत्या एक विचार है जिसे अंजाम देने वाले का नाम है नाथूराम गोडसे. हालांकि अब तो वह विचार भी सामने आकर और छाती पीट-पीटकर कह रहा है कि गोडसे हमारी विरासत का हिस्सा है, उसे हमसे छीना नहीं जा सकता. इसी विचार को लगभग एक दशक पहले, एक कहानीकार ने अपनी कल्पना का सहारा लेकर दिलचस्प तरीके से खोलने की कोशिश की थी.

    दिलचस्प है ये कहानी
    इस कहानीकार का नाम है ‘असगर वजाहत’. उन्होंने एक नाटक लिखा ‘गोडसे@गांधी.कॉम.’ असगर ने अपनी बात कहने के लिए 30 जनवरी की उस दर्दनाक घटना से ही शुरुआत की, गांधी को गोली लगी और फिर लोग उन्हें लेकर आनन-फानन में अस्पताल की तरफ भागे. यहां से शुरू होती है असगर की कल्पना, जिसके मुताबिक, गांधी मरे नहीं, डॉक्टरों ने उन्हें बचा लिया. असगर वजाहत के नाटक का पहला सीन कुछ इस तरह शुरू होता है –

    सीन- एक
    (मंच पर अंधेरा है. उद्घोषणा समाचार के रूप में शुरू होती है.) ‘ये ऑल इंडिया रेडियो है. अब आप देवकी नंदन पांडेय से खबरें सुनिए. समाचार मिला है कि ऑपरेशन के बाद महात्‍मा गांधी की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है. उन पर गोली चलानेवाले नाथूराम गोडसे को अदालत ने 15 दिन की पुलिस हिरासत में दे दिया है. देश के कोने-कोने से हजारों लोग महात्‍मा गांधी के दर्शन करने दिल्‍ली पहुंच रहे हैं.’

    (आवाज फेड आउट हो जाती है और मंच पर रोशनी हो जाती है. गांधी के सीने में पट्टि‍यां बंधी हैं. वे अस्‍पताल के कमरे में बिस्‍तर पर लेटे हैं. उनके हाथ में अखबार है.)

    अद्भुत शैली में लिखे गए नाटक के जरिए, असगर वजाहत, अपने पहले ही सीन से अपना इरादा साफ कर देते हैं. अस्पताल में गांधी के साथ साए की तरह रहने वाले प्यारे लाल, नेहरु, पटेल और मौलाना मौजूद हैं. इस सबके साथ गांधी की बातचीत के सहारे नाटक आगे बढ़ता है. पटेल गांधी को बताते हैं-

    पटेल : बापू.. नाथूराम गोडसे ने सब कुबूल कर लिया है.
    गांधी : कौन है ये? क्‍या करता था?
    पटेल : पूना का है.. वहां से एक मराठी अखबार निकालता था… सावरकर उसके गुरू हैं हिंदू महासभा से भी उसका संबंध है… ये वही हैं जिन्‍होंने प्रार्थना सभा में बम विस्‍फोट किया था… बहुत खतरनाक लोग हैं….
    गांधी : (कुछ सोचकर) मैं गोडसे.. से मिलना चाहता हूं….
    सब : (हैरत से) …जी?
    गांधी : हां…. मैं गोडसे से मिलना चाहता हूं… परसों ही मिलूंगा, डिस्‍चार्ज होते ही.
    कुल-मिलाकर नाटक के पहले ही सीन से असगर वजाहत दर्शकों को बांध लेते हैं. ये तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि अगर वाकई गांधी बच जाते तो शायद अपनी पहली इच्छा यही रखते. असगर का यह नाटक अत्यंत महत्वपूर्ण है, अपने आप में एक दस्तावेज है, एक धरोहर है.
    बहरहाल नाटक गांधी के स्वभाव के अड़ियलपन के साथ कोई छेड़छाड़ किए बगैर नाटक के दूसरे ही सीन में गोडसे और गांधी को आमने-सामने ला खड़ा करता है. पाठकों की रुचि के लिए हम यहां सीधे-सीधे असगर वजाहत की स्क्रिप्ट को ही रख देते हैं. ज़रा देखिए किस तरह के संवाद बन पड़े हैं इसमें-
    सीन- दो
    (धीरे-धीरे गांधी जी नाथूराम के सामने खड़े हो जाते हैं. नाथूराम उनकी तरफ नफरत से देखता है और मुंह फेर लेता है. गांधी भी उधर मुड़ जाते हैं, जिधर गोडसे ने मुंह मोड़ा है. अंतत: दोनों आमने-सामने आते हैं. गांधी हाथ जोड़कर गोडसे को नमस्‍कार करते हैं. गोडसे कोई जवाब नहीं देता.)
    गांधी : नाथूराम..परमात्‍मा ने तुम्‍हें साहस दिया.. और तुमने अपना अपराध कुबूल कर लिया.. सच्‍चाई और हिम्‍मत के लिए तुम्‍हें बधाई देता हूं.
    नाथूराम : मैंने तुम्‍हारी बधाई पाने के लिए कुछ न‍हीं किया था.
    गांधी : फिर तुमने अपना जुर्म कुबूल क्‍यों किया है?
    नाथूराम : (उत्तेजित होकर) जुर्म.. मैंने कोई अपराध नहीं किया है. मैंने यही बयान दिया है कि मैंने तुम पर गोली चलाई थी. मेरा उद्देश्‍य तुम्‍हारा वध करना था…
    गांधी : तो तुम मेरी हत्‍या को अपराध नहीं मानोगे?
    नाथूराम : नहीं…
    गांधी : क्‍यों?
    नाथूराम : क्‍योंकि मेरा उद्देश्‍य महान था..
    गांधी : क्‍या?
    नाथूराम : तुम हिंदुओं के शत्रु हो.. सबसे बड़े शत्रु.. इस देश को और हिंदुओं को तुमसे बड़ी हानि हुई है… हिंदू, हिंदी, हिंदुस्तान अर्थात हिंदुत्व को बचाने के लिए एक क्‍या मैं सैकड़ों की हत्‍या कर सकता हूं.
    गांधी : ये तुम्‍हारे विचार हैं.. मैं विचारों को गोली से नहीं, विचारों से समाप्‍त करने पर विश्‍वास करता हूं…
    नाथूराम : मैं अहिंसा को अस्‍वीकार करता हूं.
    गांधी : तुम्‍हारी मर्जी… मैं तो यहां केवल यह कहने आया हूं कि मैंने तुम्‍हें माफ कर दिया.
    नाथूराम : (घबराकर) … नहीं-नहीं.. ये कैसे हो सकता है?
    गोडसे और हिन्दू-महासभा की घबराहट एक है. लेकिन यह घबराहट क्यों? यह दुनिया का अकेला ऐसा देश है जहां का संविधान गांधी और गोडसे, दोनों को ही समाहित कर लेने की योग्यता रखता है. परेशान मत हो गोडसे, यहां तुमसे तुम्हारी पिस्तौल कोई नहीं छीनेगा.