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  • करंसी में ‘महात्मा’ शब्द के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका मद्रास हाईकोर्ट में खारिज़

    करंसी में ‘महात्मा’ शब्द के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका मद्रास हाईकोर्ट में खारिज़

     

     

    मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को वो जनहित याचिका खारिज़ कर दी जिसमें भारत संघ को भारतीय
    करंसी में ‘महात्मा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था.

    मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एम सुंदर की पीठ ने याचिका खारिज़ करते हुए याचिकाकर्ता पर 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया और ये राशि उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार में जमा करने का निर्देश दिया.

    याचिकाकर्ता एस मुरुगनाथम ने भारत में सभी तरह की करंसी में एमके गांधी के नाम के आगे ‘महात्मा’ लगाने की संवैधानिक वैधता का मुद्दा उठाया था. मुरुगनाथम कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर हैं.

    उन्होंने करंसी नोट, सिक्कों और डाक टिकटों में ‘महात्मा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करने का सरकार निर्देश देने की मांग की थी. पीठ ने याचिका खारिज़ करते हुए कहा कि इसमें कोई जनहित नहीं है.

  • क्या रविशंकर पर लगेगा 5 करोड़ जुर्माना ?

    श्री श्री रविशंकर की संस्घ्था आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम से यमुना को हुए नुकसान और संस्घ्था पर पांच करोड़ जुर्माना लगाए जाने के मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुनवाई पूरी कर ली है। सोमवार को एनजीटी की विशेष बेंच ने आर्ट ऑफ लिविंग मामले की सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। हालांकि इस मामले में एनजीटी कब फैसला सुनाएगा यह साफ नहीं किया है। बता दें कि बीते 11 से 13 मार्च के बीच दिल्ली में यमुना तट पर आर्ट ऑफ लिविंग के स्घ्थापना दिवस के मौके पर विश्व संस्कृति महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया था।
    इस आयोजन को लेकर आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर को बड़े विवाद का सामना करना पड़ा। कड़े विरोध और विवाद पैदा होने के बावजूद आर्ट ऑफ लिविंग ने तीन दिनों तक यमुना के तट पर कार्यक्रम का आयोजन किया। उस दौरान एनजीटी ने कार्यक्रम के आयोजन से यमुना और पर्यावरण को नुकसान की बातें कहीं। एनजीटी ने कहा था कि दिल्ली में यमुना तट पर विश्व संस्कृति महोत्सव आयोजन करने की वजह से यमुना तट को जो नुकसान हुआ है उसे दोबारा तैयार करने में 42.02 करोड़ रुपए लग जाएंगे। कार्यक्रम से यमुना तट को हुए नुकसान के लिए एनजीटी ने श्रीश्री रविशंकर की संस्घ्था आर्ट ऑफ लिविंग पर 5 करोड़ रुपये का जुमार्ना भरने का आदेश दिया। एनजीटी के आदेशों की अवहेलना कर आर्ट ऑफ लिविंग ने जुमार्ना नहीं भरा। पिछले साल से शुरु हुए इस विवाद में वघ्शिेषज्ञों ने एनजीटी को बताया कघ् िइस समारोह के आयोजन से यमुना तट को 13.29 करोड़ का नुकसान हुआ। बता दें कि यह समारोह पिछले साल 11 से 13 मार्च के बीच आयोजित किया गया था। अब एनजीटी ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रविशंकर को 5 करोड़ का जुमार्ना देना होगा यह एनजीटी के फैसले के बाद साफ हो पाएगा।

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  • रवींद्रनाथ टैगोर के लंदन का घर खरीदना चाहती हैं ममता बनर्जी

    रवींद्रनाथ टैगोर के लंदन का घर खरीदना चाहती हैं ममता बनर्जी

     

     

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंदन में उस मकान को खरीदना चाहती हैं जहां नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार रवींद्रनाथ ठाकुर रहे थे.

    वह इस मकान को ठाकुर की याद में संग्रहालय-सह-स्मारक में तब्दील करना चाहती हैं. ठाकुर 1912 में कुछ महीनों के लिए उत्तरी लंदन के नबर-3 हीथ विलाज में रहे थे.

    ममता ने कल ब्रिटेन में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के साथ मुलाकात के दौरान इस मकान को खरीदने का इरादा जाहिर किया. दोनों के बीच बातचीत से अवगत एक सूत्र ने बताया, ‘इस मकान का बहुत ऐतिहासिक महत्व है और मुख्यमंत्री इसे ठाकुर के स्मारक के तौर पर बदलने को उत्सुक हैं.’ कुछ साल पहले इस संपत्ति की कीमत 27 लाख पाउंड थी.

    साल 2015 में ममता के लंदन दौरे के समय भी इस मकान को लेकर चर्चा हुई थी. इस मकान पर पहले से ही नीले रंग की एक पट्टिका लगी हुई है जिस पर लिखा है कि यहां भारतीय कवि रवींद्रनाथ ठाकुर रहे थे.ये भी पढ़ें: सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति की बेटी अब करेंगी एयर इंडिया की ग्राउंड ड्यूटी

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  • जैसा कि एनजीटी योजनाओं के उपाय, भल्सा लैंडफिल जलता है

    जैसा कि एनजीटी योजनाओं के उपाय, भल्सा लैंडफिल जलता है

     

     

    उत्तर-पश्चिम दिल्ली के भल्सा में लैंडफिल साइट ने शनिवार की दोपहर को फिर से आग लगा दी और शहर में पहले से ही उच्च स्तर के प्रदूषण को जोड़ा। लैंडफिल ने कथित तौर पर अनुमेय ऊंचाई से 30 मीटर ऊँचा किया है।

    एक आधिकारिक अधिकारी के मुताबिक, उन्हें करीब 1 बजे सतर्क कर दिया गया था और छह फायर टेंडर को मौके पर पहुंचा दिया गया। “यह हमें फैलाने के लिए लगभग छह घंटे तक आग लगा दी थी क्योंकि यह फैल रहा था। अब तक आग का कारण पता नहीं चला है। ”

    उत्तर दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि मीथेन की अत्यधिक रिहाई के कारण लैंडफिल पर आग लग जाती है। “पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार साइट ने न्यूनतम 30 मीटर तक अनुमेय ऊंचाई को पार कर लिया है। कचरा एक दैनिक आधार पर यहां फेंक दिया जाता है क्योंकि लोगों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है “।

    उसी दिन लैंडफिल में आग लग गई क्योंकि एनजीटी ने सभी नागरिक निकायों और डीडीए को सभी जमीनफिल स्थलों पर विशेष बल पोस्ट करने के लिए निर्देशित किया ताकि वहां आग की रोकथाम सुनिश्चित हो सके।

    एनजीटी के अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार कुमार की अगुवाई में एक पीठ ने कहा, “यदि कोई आग या अपशिष्ट जलाया जा रहा है, तो विशेष रूप से लैंडफिल साइटों के संबंध में, ट्रिब्यूनल के नोटिस में लाया जाता है, संबंधित हर अधिकारी प्रभारी के अनुसार उत्तरदायी होगा। कानून। ”

  • असम में पंचायत प्रमाणपत्र वाले भी एनआरसी में शामिल हों: येचुरी

    असम में पंचायत प्रमाणपत्र वाले भी एनआरसी में शामिल हों: येचुरी

     

     

    सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने असम में
    राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) अपडेट करने का काम जल्द पूरा करने की मांग करते हुए सोमवार को कहा कि नागरिकों की सूची में उन सभी लोगों को शामिल किया जाना चाहिए जिनके पास पंचायत की ओर से दिए गए प्रमाणपत्र हैं.

    ‘डेल्ही एक्शन कमिटी फ़ॉर असम’ (डीएसीए) की ओर से एनआरसी के मुद्दे पर आयोजित एक कार्यक्रम में येचुरी ने कहा, ‘असम में एनआरसी का काम जल्द पूरा होना चाहिए. 31 दिसंबर की समयसीमा की बात की गई है और ऐसे में इस समयसीमा के भीतर ये काम पूरा हो जाना चाहिए.’

    उन्होंने कहा, ‘लाखों लोग ऐसे हैं जिनके पास पंचायत की ओर से दिए गए प्रमाणपत्र हैं. बताया गया है कि इनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं. हमारी मांग है कि सूची में पंचायत के प्रमाणपत्र वालों को भी शामिल किया जाना चाहिए.’ डीएसीए के अनुसार असम में ऐसे 27 लाख लोग हैं जिनके एनआरसी से बाहर रहने का ख़तरा है. उसका कहना है कि इनके पास पंचायत के मुखिया की ओर से दिया गया प्रमाणपत्र है और इनमें अधिकतर महिलाएं हैं.

    इस कर्यक्रम में स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा, ‘जिस तरह ये देश विविधताओं से भरा है, उसी तरह असम भी है. ये सिर्फ असम का मुद्दा नहीं है. धर्म या भाषा के नाम पर किसी को अलग नहीं किया जा सकता. इसको लेकर उन सभी लोगों को चिंतित होना चाहिए जो ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ में विश्वास करते हैं.’ गौरतलब है कि एनआरसी और नागरिकता का ये मुद्दा उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है.असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने हाल में कहा था कि एनआरसी को अपडेट करने का काम साल के आखिर तक पूरा हो जाएगा और किसी भी वास्तविक नागरिक को परेशानी नहीं होगी.

  • मोदी सरकार ने गुजरात चुनाव में हार से बचने के लिए GST कम की: शिवसेना

    मोदी सरकार ने गुजरात चुनाव में हार से बचने के लिए GST कम की: शिवसेना

     

     

    शिवसेना ने दावा किया कि केंद्र की बीजेपी सरकार ने गुजरात चुनाव में हार से बचने के लिए जीएसटी की दरों में कटौती की है. शिवसेना ने बीजेपी को किसी भी मुद्दे से ‘राजनीतिक लाभ उठाने और प्रचार पाने में विशेषज्ञ’ करार दिया.

    बता दें, उपभोक्ताओं और कारोबारियों को राहत प्रदान करने के क्रम में जीएसटी की दरों में अब तक के सबसे बड़े बदलाव के तहत 10 नवंबर को 200 से अधिक वस्तुओं पर कर दरों में कटौती कर दी गई. रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली 178 वस्तुओं को शीर्ष कर दर 28 प्रतिशत के दायरे से बाहर कर 18 प्रतिशत कर की श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया गया. जबकि सभी रेस्तराओं के लिए समान कर, पांच प्रतिशत निर्धारित किया गया.

    शिवसेना ने कर कटौती के समय पर सवाल उठते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि उसने अब ‘झुकने’ का फैसला क्यों किया. पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा, ‘ये लोग किसी भी मुद्दे से राजनीतिक लाभ उठाने और प्रचार पाने में विशेषज्ञ हैं.’ मुखपत्र ने कहा, ‘यह सरकार अब क्यों झुक गई, जिसने कहा था कि वह मुद्दे (जीएसटी) पर समझौता नहीं करेगी और विरोध को नजरअंदाज करेगी. इसका उत्तर इसमें है कि गुजरात चुनावों में उन्हें जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है.’

    शिवसेना ने दावा किया कि बीजेपी नेताओं को गांवों में नहीं घुसने दिया जा रहा है. उन्हें संवाददाता सम्मेलन नहीं करने दिए जा रहे हैं, उनके पोस्टरों को हटाया जा रहा है. केंद्र सरकार में सहयोगी शिवसेना ने कहा कि विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री गुजरात चुनाव प्रचार में भाग लेने के लिए देश से संबंधित मुद्दों को छोड़ देंगे.शिवसेना ने कहा, ‘जीएसटी से महंगाई बढ़ी है और आम आदमी का बजट गड़बड़ा गया है. जो लोग संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था की तारीफ कर रहे हैं, वे देश के दुश्मन हैं.’ संपादकीय में कहा गया कि जीएसटी ने गरीब लोगों और छोटे कारोबारियों की ‘कमर तोड़ दी है’ और इससे देश में गुस्सा बढ़ा है. गुजरात में छोटे कारोबारी सड़कों पर उतरे हैं और लाठियों से उनकी पिटाई की गई है.

    संपादकीय में दावा किया, ‘इन लाठियों के परिणाम के डर और प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी के किसी भी अभियान के काम न करने की आशंका के चलते सरकार को जीएसटी के मुद्दे पर झुकना पड़ा.’ गुजरात विधानसभा चुनाव के तहत राज्य में नौ और 14 दिसंबर को दो चरणों में मतदान होगा. मतों की गिनती 18 दिसंबर को होगी.

  • एनजीटी ने दिल्ली सरकार से पूछा – ‘सिर्फ दिखावा है ऑड-ईवन?’

    एनजीटी ने दिल्ली सरकार से पूछा – ‘सिर्फ दिखावा है ऑड-ईवन?’

     

     

    दिल्ली में स्मॉग और प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार के उठाए गए कदमों को लेकर सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में सुनवाई हुई. इस दौरान दिल्ली सरकार के वकील के नहीं पहुंचने पर एनजीटी ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.

    एनजीटी ने कहा, “ऑड-ईवन लागू करने को लेकर नए आवेदन के साथ दिल्ली सरकर के वकील क्यों नहीं पहुंचे? क्या यह सिर्फ मीडिया के लिए ही था? क्या सरकार हमारे पास आएगी या फिर मंत्री ने सिर्फ प्रेस के लिए ही बयान जारी किया था?”

    बता दें कि ऑड-ईवन स्कीम का फैसला वापस लेने के बाद सरकार ने कहा था कि वह सोमवार को ग्रीन कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी. लेकिन, आज जब सुनवाई शुरू हुई, तो दिल्ली सरकार के वकील ही नहीं पहुंचे.

    सुबह एनजीटी ने दिल्‍ली सरकार से पूछा कि वह मीडिया को ऑड-ईवन पर रिव्‍यू पिटीशन के बारे में जानकारी क्‍यों दे रही थी, जबकि कोई रिव्‍यू पिटीशन अब तक दायर नहीं की गई है.

    बता दें कि इससे पहले शनिवार को एनजीटी ने दिल्ली सरकार को ऑड-ईवन लागू करने की मंजूरी दे दी थी. एनजीटी ने शर्त रखी थी कि इस बार महिलाओं और टू-व्हीलर्स को भी छूट नहीं मिलेगी. हालांकि, शनिवार शाम तक सरकार ने असमर्थता जताते हुए ऑड-ईवन का प्लान टाल दिया था.

    वहीं, आज प्रदूषण को लेकर पराली जलाने और निर्माण कार्यों को रोकने की मांग वाली याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई होनी है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच इसपर सुनवाई करेगी.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदूषण की अनदेखी नहीं की जा सकती. अदालत ने कहा कि नियमित मामलों की सुनवाई के बाद इस केस पर सुनवाई की जाएगी.

    बता दें कि दिल्ली में प्रदूषण ने इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. रविवार को एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 57 पॉइंट की बढ़ोतरी के साथ 460 तक जा पहुंचा. सोमवार को भी कई इलाकों में विजिबिलिटी बहुत कम है. हालांकि, रविवार के मुकाबले सोमवार को स्थिति सुधरी है.

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    स्मॉग के चलते 69 ट्रेनें लेट, 22 का समय बदला

  • जॉब छोड़कर एमबीए पास लड़की रोड पर लगाती हैं फूड स्टॉल

    नई दिल्लीं। राधिका अरोड़ा ने एमबीए की पढ़ाई करने के बाद एचआर प्रोफेशनल की नौकरी छोड़ ठेले पर खाना खिलाने का काम शुरू किया और आज अपने इस फैसले से संतुष्ट होने के साथ-साथ वो गर्व भी महसूस करती हैं। राधिका का खाना इतना स्वादिष्ट होता है कि शुरुआती दिनों में खाना कुछ घंटों में ही खत्म हो जाया करता था। शुरू में वह रोजाना सिर्फ 70 प्लेट खाना तैयार करती थीं लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई। अपनी पहली सफलता से बेहद खुश राधिका ने कहा कि अब वह इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी हाथ आजमाना चाहती हैं। इसके लिए वे पूरी तैयारी से लग गई हैं। चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज से एमबीए करने के बाद नौकरी के सिलसिले में राधिका को चंडीगढ़ में रहना पड़ता था। वह पीजी में रहा करती थीं। लेकिन उन्हें वहां का खाना पसंद नहीं आता था। इस वजह से वह या तो बाहर का खाना खाती थीं या फिर कहीं से टिफिन मंगवाती थीं। राधिका बताती हैं, ‘जब मैं यहां काम कर रही थी तो मैं घर में मां के हाथ से बने खाने को काफी मिस किया करती थी। इसी मुश्किल से मुझे खाने की शॉप खोलने का ख्याल आया।’ राधिका ने हिम्मत करके नौकरी छोड़ दी और मोहाली के फेज-8 इंडस्ट्रियल एरिया में एक छोटे से ठेले से अपनी दुकान की शुरुआत कर दी। उन्होंने इसका नाम रखा – मां का प्यार।
    राधिका का खाना इतना स्वादिष्ट होता है कि कुछ घंटों में ही खाना खत्म हो जाया करता था। वह शुरू में रोजाना 70 प्लेट खाना तैयार करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई। वह कहती हैं कि मुझे दूसरों के लिए घर जैसा खाना खिलाने में काफी खुशी मिलती है। राधिका के इस वेंचर की सफलता का राज यही है कि वह घर जैसा खाना बनाती हैं और किसी भी तरह से समझौता नहीं करतीं। उनके ठेले पर राजमा-चावल, कढ़ी, चना, भिंडी जैसी डिशेज रहती हैं।

    इसके लिए उन्होंने बकायदा कुक रखा है जो सभी के लिए खाना तैयार करता है। लेकिन राधिका की शुरुआत इतनी आसान भी नहीं थी। उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेने से लेकर सड़क पर पहले से ठेला लगाने वालें से उन्हें संघर्ष करना पड़ा। लेकिन राधिका कहती हैं कि उन्होंने यह सारा काम बड़े धैर्यपूर्वक किया। राधिका ने 1 लाख रुपए से अपने बिजनेस की शुरुआत की थी। उनके पैरेंट्स भी राधिका के इस फैसले से चिंतित थे। उन्हें लगता था कि एमबीए की पढ़ाई करने के बाद उनकी लड़की ठेला कैसे लगा सकती है। खैर, राधिका के अंदर खुद का काम शुरू करने का जुनून था इसलिए उन्होंने किसी की बात नहीं मानी और खुद पर यकीन करते हुए पूरी शिद्दत के साथ लगी रहीं। घरवालों का कहना था कि अच्छी खासी पढ़ी-लिखी लड़की ऐसा काम कैसे कर सकती है। उन्हें लगा कि सर्दी, गर्मी बरसात किसी भी मौसम में सड़क पर खड़े होकर काम करना पड़ेगा। लेकिन जब कुछ दिनों तक उनके इस फूड स्टाल से ठीक-ठाक पैसे आने लगे तो उनके घरवालों को भी लगा कि उनकी बेटी ने शायद सही फैसला किया है। यही वजह है कि एक बार सफलता का स्वाद चख लेने के बाद राधिका के परिवार वालों को आज उन पर गर्व होता है। आज राधिका के दो स्टॉल हैं। पहला इंडस्ट्रियल एरिया मोहाली में और दूसरा वीआईपी रोड जीरकपुर में। उनका खाना इतना स्वादिष्ट होता है कि जो भी खाने के लिए आता है वह बिना तारीफ किए नहीं जाता। उनकी टीम में कुल पांच लोग हैं जो पूरे काम को हैंडल करते हैं।

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  • Rahul Gandhi ने बदल दी गुजरात की चुनावी हवा, घूम-घूम कर खुद पोस्टर लगाने लगे अमित शाह

    एक तरफ जहां वो खुद डोर-टू-डोर कैंपेन चला रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ शाह दिवारों पर पोस्टर चिपका कर अपने कार्यकर्ताओं में नई उर्जा के संचार करने की कोशिश कर रहे हैं।

    अगले महीने होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह से राहुल गांधी ने गुजरात में प्रचार कमान संभाली है उससे राज्स में कांग्रेस का अंडर करंट दिखने लगा है। हाल ही में कांग्रेस के इंटरनल सर्वे में जैसे ही पार्टी को 110-120 सीटें मिलने की बात सामने आई उससे कांग्रेसियों का उत्साह और बढ़ गया है। राहुल के अक्रामक प्रचार को देखते हुए इधर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी कमान सीधे अपने हाथों में ले ली है। अमित शाह गुजरात की जनता को साधने के लिए खुद मैदान में उतर चुके हैं। एक तरफ जहां वो खुद डोर-टू-डोर कैंपेन चला रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ शाह दिवारों पर पोस्टर चिपका कर अपने कार्यकर्ताओं में नई उर्जा के संचार करने की कोशिश कर रहे हैं।
    हाल ही में मध्यप्रदेश के चित्रकुट विधानसभा सीच पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। हालांकि ये सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है। इस सीट पर कभी बीजेपी जीत नहीं पाई है, लेकिन गुजरात चुनाव से ठीक पहले इस जीत को कांग्रेस एक बड़ी जीत की तरह प्रोजेक्ट कर रही है।
    गुजरात चुनाव में कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल ली है। इस बार राहुल गांधी गुजरात के हर मंदिरों में जा रहे हैं और भगवान का आशिर्वाद ले रहे हैं। ऐसे में बीजेपी के हिंदु वोट बैंक पर निशाना साधने की कोशिश अगर सफल होती है तो कांग्रेस को फायदा मिल सकता है।

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  • मसाज करा रहा था अफसर, महिला होमगार्ड से

    नई दिल्ली।. तेलंगाना के जोगुलांबा गडवाल में एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक एएसआई एक महिला होम गार्ड से मसाज ले रहा है. यह वीडियो जैसे ही वायरल हुआ स्थानीय एसपी ने जांच के आदेश दे दिए हैं.।

    एएसआई की पहचान हसन के रूप में हुई है. वीडियो में दिखाई दे रहे हसन जिला मुख्यालय की आर्म्ड रिवर्स यूनिट में पदस्थ है. वीडियो में दिख रहा है कि हसन एक बेंच पर लेटा हुआ है और महिला होम गार्ड उसे मसाज दे रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक हसन इस दौरान बंदोबस्त ड्यूटी से लौटकर आया था और पुरुष बैरक में आराम कर रहा था. हसन ने यहां महिला होम गार्ड से मसाज लेने की बात कबूल की है. यह वीडियो 5 नवंबर का बताया जा रहा है. फिलहाल मामला सामने आने के बाद एएसआई को सस्पेंड किया गया है और जांच की जा रही है.
    पूरे वाकये पर एसपी विजय कुमार ने एएसपी भास्कर को जांच करने और रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं. बता दें कि इससे पहले भी कथित तौर पर सरूरनगर के इंस्पेक्टर एस लिंगैया की वीडियो वायरल हुई थी जिसमें भी एक महिला होम गार्ड मालिश कर रही थी.
    हाल ही में आए इन दो वीडियोज के जरिए यह समझा जा सकता है कि यहां पर महिला कर्मचारियों के लिए असुरक्षा का महौल है.यह वीडियो 5 नवंबर का बताया जा रहा है. फिलहाल मामला सामने आने के बाद एएसआई को सस्पेंड किया गया है और जांच की जा रही है.
    पूरे वाकये पर एसपी विजय कुमार ने एएसपी भास्कर को जांच करने और रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं. बता दें कि इससे पहले भी कथित तौर पर सरूरनगर के इंस्पेक्टर एस लिंगैया की वीडियो वायरल हुई थी जिसमें भी एक महिला होम गार्ड मालिश कर रही थी.
    हाल ही में आए इन दो वीडियोज के जरिए यह समझा जा सकता है कि यहां पर महिला कर्मचारियों के लिए असुरक्षा का महौल है.यह वीडियो 5 नवंबर का बताया जा रहा है. फिलहाल मामला सामने आने के बाद एएसआई को सस्पेंड किया गया है और जांच की जा रही है.पूरे वाकये पर एसपी विजय कुमार ने एएसपी भास्कर को जांच करने और रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं. बता दें कि इससे पहले भी कथित तौर पर सरूरनगर के इंस्पेक्टर एस लिंगैया की वीडियो वायरल हुई थी जिसमें भी एक महिला होम गार्ड मालिश कर रही थी.हाल ही में आए इन दो वीडियोज के जरिए यह समझा जा सकता है कि यहां पर महिला कर्मचारियों के लिए असुरक्षा का महौल है।