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  • सोशल मीडिया को लेकर कोहली ने युवाओं को दी ये नसीहत

    सोशल मीडिया को लेकर कोहली ने युवाओं को दी ये नसीहत

     

     

    क्रिकेट कौशल के अलावा अपने बेहतरीन फिटनेस के लिए पहचान बनाने वाले भारतीय कप्तान विराट कोहली ने देश के युवाओं को सलाह दी कि वे आउटडोर स्पोर्ट्स खेलें और सोशल मीडिया पर अधिक समय बर्बाद नहीं करें.

    यहां अपने लाइफस्टाइल ब्रांड वन8 के लांच के दौरान कोहली ने कहा, ‘आजकल आपने देखा होगा कि बच्चे बाहर खेलने की जगह वीडियो गेम अधिक खेलते हैं. शारीरिक गतिविधि काफी महत्वपूर्ण है और मेरा संदेश सिर्फ युवाओं के लिए नहीं बल्कि देश के प्रत्येक व्यक्ति के लिए है.’

    कोहली ने युवाओं को सोशल मीडिया से दूर रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा, ‘किसी को भी सोशल मीडिया पर सीमित समय ही बिताना चाहिए. मैं भी सोशल मीडिया पर काफी समय बिताता था लेकिन अब मैंने महसूस किया कि यह समय की बर्बादी है.’

    यहां के एक लोकप्रिय मॉल में लॉन्च के दौरान कोहली अपने ब्रांड के कपड़ों में दिखे और उन्होंने लड़के और लड़कियों के साथ बास्केटबॉल और फुटबॉल खेली.

  • ‘पद्मावती’ फिल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है

    ‘पद्मावती’ फिल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है

     

     

    मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य और पद्मिनी के वंशज विश्वराज सिंह ने शनिवार को कहा कि रानी पद्मिनी पर बनी फिल्म ‘पद्मावती’ में इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.

    उन्होंने शनिवार को कहा कि फिल्म की रिलीज से पहले गाने, पोस्टर देखने से पता चलता है कि रानी पद्मावती का जीवन चरित्र गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है. फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली ने ऐसा अपने फायदे के लिए किया है.

    विश्वराज सिंह ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्रियों स्मृति ईरानी, प्रकाश जावडेकर, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ तथा राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष प्रसून जोशी को पत्र लिखकर सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म पद्मावती को जारी सर्टिफिकेट को रोकने की मांग की है.

    जयपुर के पूर्व राजघराने की सदस्य और भाजपा विधायक राजकुमारी दीया कुमारी ने फिल्म ‘पद्मावती‘ के रिलीज का विरोध करने के लिए आज जयपुर में गोविंद देव जी मंदिर से हस्ताक्षर अभियान शुरू किया. दीया कुमारी ने इस मौके पर कहा कि हस्ताक्षर अभियान को डिपार्टमेंट लेवल पर भी आयोजित किए जाएंगे. उन्होंने फिल्म भंसाली से आग्रह किया कि वह फिल्म की रिलीज से पूर्व इतिहासकारों के फोरम के सामने उसे प्रदर्शित करें.ये भी पढ़ें-
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  • ‘जब तक गब्बर सिंह टैक्स GST में तब्दील नहीं हो जाता तब तक आराम से नहीं बैठूंगा’

    ‘जब तक गब्बर सिंह टैक्स GST में तब्दील नहीं हो जाता तब तक आराम से नहीं बैठूंगा’

     

     

    कई चीजों पर जीएसटी दरें कम करने के केन्द्र के फैसले का श्रेय लेने का प्रयास करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि जब तक पांच स्लैब का गब्बर सिंह टैक्स’ 18 प्रतिशत सीमा के साथ ‘वस्तु एवं सेवा कर’ में नहीं बदलता तब तक वह आराम से नहीं बैठेंगे.

    गांधीनगर में आज अक्षरधाम मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद उत्तरी गुजरात का चुनावी दौरा शुरू करने वाले राहुल ने एक बार फिर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की एक कंपनी का मुद्दा उठाया.

    उन्होंने उत्तरी गुजरात के इस शहर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने केन्द्र पर दबाव बनाया, गुजरात की जनता, छोटे दुकानदारों ने दबाव बनाया और उन्हें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कई चीजों को जीएसटी के तहत 28 प्रतिशत स्लैब से हटाकर 18 प्रतिशत स्लैब में डाला है.

    राहुल ने कहा कि पांच स्लैब के साथ, यह गब्बर सिंह टैक्स है, लेकिन एक टैक्स से यह जीएसटी है. न तो गुजरात,ना ही भारत को गब्बर सिंह टैक्स की जरूरत है. कांग्रेस ने भाजपा को स्पष्ट कहा है कि 18 प्रतिशत सीमा और साधारण टैक्स वाला एक टैक्स होना चाहिए.’’ अमेठी से सांसद राहुल ने कहा कि गब्बर सिंह टैक्स ने गुजरात और देश के अन्य भागों में छोटे और मंझोले कारोबारियों को नुकसान पहुंचाया है.उन्होंने कहा कि यह गब्बर सिंह टैक्स इस देश के छोटे लोगों को लूट रहा है. इस गब्बर सिंह टैक्स का एकमात्र उद्देश्य गुजरात और देश के अन्य भागों के छोटे और मंझोले उद्योगों की रीढ़ तोड़ना है.

    उन्होंने कहा, ‘‘इस जीएसटी ने गुजरात और भारत को नुकसान पहुंचाया है. अच्छा है कि उन्होंने केन्द्र कल इसमें कुछ बदलाव किये. लेकिन हम यहीं नहीं रूकेंगे. हम केवल तब रूकेंगे जब गुजरात और भारत को जीएसटी मिलेगा, गब्बर सिंह टैक्स नहीं.’’

  • मोदी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ में UN विशेषज्ञ ने निकाली कमियां

    मोदी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ में UN विशेषज्ञ ने निकाली कमियां

     

     

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय अभियान ‘स्वच्छ भारत’ को संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष विशेषज्ञ की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसने कहा कि मिशन में ‘मानव अधिकारों के प्रति सर्वांगीण रुख की कमी है.’ स्वच्छ जल और स्वच्छता के मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष अधिकारी (यूएनएसआर) लियो हेल्लर ने एक संवाददाता सम्मेलन में अपने भारत दौरे पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जहां उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा शौचालय निर्माण को दिया जा रहा महत्त्व सभी के लिए पेयजल उपलब्ध कराने के मुद्दे को कमजोर न कर दे.

    उन्होंने कहा कि पिछले दो हफ्तों में मैंने ग्रामीण और शहरी इलाकों, झुग्गियों और पुनर्वास शिविरों का दौरा किया, जहां ऐसे लोग निवास करते हैं जिनके बारे में ज्यादा सूचना नहीं मिलती. मैंने पाया कि इन प्रयासों में मानव अधिकारों के नजरिए की काफी कमी है. इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के उच्चायुक्त के कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति को सरकार की ओर से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. यह विज्ञप्ति संवाददाता सम्मेलन में वितरित की गई.

    विज्ञप्ति में हेलर के हवाले से कहा गया, ‘मैं जहां भी गया, मैंने स्वच्छ भारत मिशन का लोगो- (महात्मा) गांधी के चश्मे को देखा. मिशन लागू होने के तीसरे साल में, अब यह जरूरी हो गया है कि उन चश्मों को मानव अधिकारों के लेंस से बदला जाए.’

    स्वच्छ भारत मिशन के लोगो पर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने एक बयान जारी कर इसकी निंदा की और कहा कि यह ‘हमारे राष्ट्रपिता के प्रति गहरी असंवेदनशीलता’ दर्शाता है. बयान में कहा गया कि पूरा विश्व जानता है कि महात्मा गांधी मानवाधिकारों के प्रधान समर्थक थे.

  • खेती और किसानों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत : नायडू

    खेती और किसानों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत : नायडू

     

     

    उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि सरकार को कृषि तथा किसानों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. साथ ही खेती करने वालों के मसलों पर वैधानिक समितियों तथा मीडिया में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए.

    उन्होंने कहा कि गांवों और कृषि पर विशेष ध्यान देना चाहिए. उपराष्ट्रपति ने देश में कृषि उत्पादों के आवागमन के प्रतिबंधों को हटाने का भी सुझाव दिया.

    यहां खेती पर आयोजित एग्रोविजन नामक एक सम्मेलन के उद्घाटन में पहुंचे नायडू ने कहा मैं स्वयं एक किसान हूं और मुझे इस बात का गर्व है कि किसान देश के अन्नदाता हैं. भारत की मूल संस्कृति कृषि है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों की चिंता को देखे.

  • क्या ऑड-ईवन ही केजरीवाल का ब्रह्मास्त्र है?

    क्या ऑड-ईवन ही केजरीवाल का ब्रह्मास्त्र है?

     

     

    जरूरी नहीं कि आप शांतिनिकेतन के ‘बोधिवृक्ष’ के नीचे बैठे नौसिखुआ नौजवान हों तो ही आपको यह पता चले कि इतिहास अपने को दोहराता है- पहली दफे वह एक त्रासदी (ट्रेजडी) होता है और दूसरी दफे एक प्रहसन (फार्स) के तौर पर.

    शांतिनिकेतन से कई गुना धूपछांही तो फिलहाल दिल्ली में है जहां इतिहास अपने को तीसरी दफे दोहरा रहा है. दिल्ली सरकार ने अपनी ऑड-ईवन योजना फिर शुरू करने की कोशिश की थी लेकिन फिर इसे वापस ले लिया.

    ऑड-ईवन स्कीम पहली बार 2016 में शुरू हुई. तब 15 दिन तक चलने वाली इस योजना से राहत महसूस हुई थी. साउथ और सेंट्रल दिल्ली में अपनी मोबाइल यूनिट्स के जरिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हवा की गुणवत्ता के जो आंकड़े जुटाए वे बता रहे थे कि पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे महीन कणों के एतबार से वायु-प्रदूषण कम हुआ है.

    इस वक्त पहली बार खुली जगहों की हवा की गुणवत्ता को मापने के लिए गंभीर प्रयास हुए. धूल-कण के सैंपल लेने के लिए मोबाइल डस्ट सैंपलर्स ने रोशनी बिखरने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया था. उस वक्त दिल्ली में वसंत विहार, भीकाजी कामा स्थित दिल्ली फायर स्टेशन, पालिका केंद्र, डिफेंस कॉलोनी, मंगलापुरी, घिटोरनी सहित कुछ 15 जगहों से हवा के नमूने जुटाए गए.योजना के पहले चरण में सामने आया कि उत्तरप्रदेश की सीमा से लगते पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली की छह जगहों पर हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा साउथ और सेंट्रल दिल्ली की तुलना में ज्यादा है.

    लेकिन दूसरे चरण की शुरुआत हुई तो वही स्कीम एक बेवजह की दखलंदाजी जान पड़ी. इंडिया स्पेंड ने अपने आंकलन के आधार पर जो आंकड़े पेश किए उनसे पता चला, ‘ऑड-ईवन योजना के 15 से 29 अप्रैल की अवधि में दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 की मौजूदगी 68.98 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है. यह वायु-प्रदूषण की साधारण दशा का संकेत है. 1 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 कणों की मात्रा 56.17 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर थी जिसका संकेत था कि दिल्ली में हवा की गुणवत्ता औसत दर्जे की है.’

    ऑड-ईवन योजना को अब तीसरी बार लाने की तैयारी थी और इस पर 13 नवंबर से 17 नवंबर तक अमल किया जाना था. 8 नवंबर को अमेरिकी दूतावास के एयर मॉनिटर के पर्दे पर पीएम 2.5 का स्तर 726 नजर आया जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की निर्धारित सीमा से 70 गुना ज्यादा है. लेकिन फिर कोहरा आ धमका, उसने अपनी मनमानी की और अब दबे पांव पीछे के दरवाजे से भाग निकलने की तैयारी में है.

    अमेरिकी दूतावास के मॉनीटर के पर्दे पर 11 नवंबर की तारीख में पीएम 2.5 की मात्रा 316 दिख रही है (यह नुकसानदेह तो है लेकिन घातक नहीं). ऑड-ईवन योजना जब तक सड़कों पर अमल में आएगी तब तक पीएम 2.5 की मात्रा और भी ज्यादा घट चुकी होगी.

    बीते 8 नवंबर को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि सड़कों पर आवाजाही की वजह से होने वाला प्रदूषण तो धूल-धुंध और धुएं के गुबार यानी स्मॉग का एक छोटा सा हिस्सा भर है, सो अभी के वक्त में ऑड-ईवन योजना लाना मददगार नहीं होगा. मंत्री ने कहा था, ‘अगर पीएम (2.5) 600 है तो इसमें ट्रैफिक का योगदान महज 100 ही है जो कि कुल के 15 से 20 फीसद से ज्यादा नहीं. मतलब, आप बाकी 80 फीसद के लिए कुछ नहीं कर सकते. अगर आप इस आंकड़े को आधा भी करते हैं तब भी उससे कोई असर नहीं होने वाला.’

    स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने उस वक्त यह भी कहा था कि ऑड-ईवन योजना प्रदूषण में तभी मददगार हो सकती है जब पराली जलाने सरीखे बाहरी वजहों का समाधान किया जाए. इसके बावजूद ऑड-ईवन का फैसला लिया गया और वह भी एक हफ्ते की देरी से.

    तो फिर क्या यह एकदम आखिरी लम्हे में उठाया गया कदम था और इसलिए उठाया जा रहा था कि दिल्ली या पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने कोई एहतियाती कदम नहीं उठाये ? इस तथ्य को नकारना मुश्किल है कि इस किस्म की जहरीली धुंध ने पिछले साल भी दिल्ली का दम घोंटा था, पिछले साल पीएम 2.5 की मात्रा 999 तक जा पहुंची थी.

    पिछले साल जो बहस चली उसके एक सिरे पर यह था कि दिल्ली के निवासी पटाखे बहुत फोड़ते हैं तबकि इसके प्रतिवाद में बहस के दूसरे सिरे से कहा जा रहा था कि कांग्रेस के शासन वाले पंजाब और बीजेपी के शासन वाले हरियाणा में किसान पराली जला रहे हैं.

    फ़र्स्टपोस्ट से अपनी बातचीत में सत्येंद्र जैन ने जोर देकर कहा था कि उत्तर भारत की 800 किलोमीटर लंबी पूरी पट्टी को धूल और धुएं के धुंधलके ने घेर रखा है और आरोप लगाया कि पंजाब और हरियाणा की सरकारें किसानों को सहायता राशि नहीं दे रहीं सो किसानों के पास पराली जलाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह गया है.
    इस साल दिवाली के चंद रोज पहले से ही दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के थोक और खुदरा बिक्री पर रोक लगा दी गई. ऐसे में दिल्ली के प्रदूषण के जिम्मेदार के तौर पर शक की पहली अंगुली पड़ोसी राज्यों के किसानों की ओर उठायी जा रही है.

    जैन ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा कि दूसरे राज्यों को चिट्ठी भेजी गई थी लेकिन इन सरकारों ने पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना लगाने के अतिरिक्त और कुछ नहीं किया—पिछले साल हरियाणा में तकरीबन 1400 किसानों पर जुर्माना लगा था.

    अगर हरियाणा और पंजाब की सरकारों ने लापरवाही दिखाई और दिल्ली की सरकार को इसका पता था तो फिर राजधानी दिल्ली में एहतियातन तैयारियां क्यों नहीं की गईं ? केजरीवाल ने 9 नवंबर के दिन 20 एयर-मॉनिटरिंग स्टेशन का उद्घाटन किया, क्या ये मॉनिटरिंग-स्टेशन्स दिवाली के पहले ही नहीं कायम किए जा सकते थे ?

    आम आदमी पार्टी के बनाए 158 मोहल्ला क्लीनिक्स का नेटवर्क या फिर 38 सरकारी अस्पताल कई रोज पहले से ही मेडिकल मॉस्क बांट सकते थे और घरों के बाहर की हवा में मौजूद इंडोक्राइन डिसर्पटिंग केमिकल्स(ईडीसी) के बारे में लोगों को जागरुक कर सकते थे.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ‘भोजन, धूल और पानी के जरिए व्यक्ति ईडीसी की चपेट में आ सकता है, हवा में मौजूद कण तथा गैसों को सांस के रूप में ग्रहण करने अथवा इनका चमड़ी के संपर्क में आने से भी कोई व्यक्ति ईडीसी की चपेट में आ सकता है. ईडीसी गर्भवती महिला के पेट में पल रहे भ्रूण तक गर्भनाल के जरिए या नवजात शिशु के शरीर में मां के दूध के सहारे पहुंच सकता है. गर्भवती महिला और बच्चों को विकास-कार्यों से पैदा हानिकारक रसायनों का सबसे ज्यादा खतरा होता है और ईडीसी से होने वाला नुकसान जीवन के बाद के वर्षों में जाहिर होता है.’

    दिल्ली जिस परेशानी से गुजर रही है उसके लिए दोषी ठहराए जा रहे किसानों के पास फसल को काट-पीटकर बाजार तक पहुंचाने के लिए 15 दिन का समय होता है. फिलहाल यह फसल गेहूं की है. जमाना मशीनों के जरिए होने वाली खेती का है और ऐसे में गेहूं की पराली खेत में ही छूट जाती है. इसे जानवर नहीं खाते, सो पराली को जला देना सबसे आसान और सस्ता उपाय है.

    अभी पिछले हफ्ते ही नेशनल अकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज ने एक रिपोर्ट जारी की है. यह रिपोर्ट धान-गेहूं की पराली को सुरक्षित तरीके से जलाने की नई युक्तियों के बारे में है. रिपोर्ट का शीर्षक है ‘इनोवेटिव वायवल सॉल्यूशन टू राइस रेजिड्यू बर्निंग इन राइस-ह्वीट क्रॉपिंग सिस्टम थ्रू कन्करेन्ट यूज ऑफ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम-फिटेट कम्बाइन्स एंड टर्बो हैप्पी सीडर’.

    रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘आंकलन के मुताबिक भारत के पश्चिमोत्तर के राज्यों में सालाना 2 करोड़ 30 लाख टन धान की पराली जलाई जाती है. इतनी बड़ी मात्रा में पराली जुटाना और उनका भंडारण करना न तो व्यावहारिक रूप से संभव है न ही आर्थिक लिहाज से उचित.’

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आंकलन के मुताबिक धान की 80 फीसद पराली पंजाब के किसान जलाते है जबकि पश्चिमोत्तर के बाकी राज्यों में भी अच्छी खासी मात्रा में धान की पराली जलाई जाती है. रिपोर्ट में इस बात को स्वीकार किया गया है कि फसलों की पराली जलाने से प्रदूषण पैदा करने वाली मुख्य चीजें जैसे कि कार्बन डायआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, मीथेन, नाइट्रस आक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड और नाइट्रोजन डायआक्साइड, सल्फर डायआक्साइड, ब्लैक कार्बन, नॉन मिथाइल हाइड्रोकार्बन, वोलाटाइल आर्गेनिक कंपाउंड(वीओसी) तथा पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और पीएम 10) हवा में जा मिलते हैं.

    ये रसायन ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन) के लिए भी जिम्मेदार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक धान-गेहूं उपजाने के फसली-चक्र में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम फिटेड कंबाइन्स और टर्बो हैप्पी सीडर के इस्तेमाल से धान की छाड़न और पराली जलाने में कमी आएगी. पंजाब जैसे राज्यों में लगा पराली जलाने पर प्रतिबंध फिलहाल कारगर नहीं हो पाया है.

    इस तकनीक के इस्तेमाल पर तकरीबन 470 करोड़ रुपए की लागत आएगी. यह एक ज्यादा टिकाऊ विकल्प जान पड़ता है लेकिन बहुत संभव है किसान पराली जलाने के कहीं ज्यादा सस्ते विकल्प को ही चुनें. साल 2016 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक देश के 17 राज्यों में पांच सदस्यों वाले किसान-परिवार की औसत सालाना आमदनी 20 हजार रुपए है.

    ट्विटर पर जारी किए जा रहे बयानों की दुनिया किसानों की चिंता से बेखबर दिख रही है. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल में ट्वीट किया कि हालत गंभीर तो है लेकिन पंजाब का किसान मजबूर है क्योंकि समस्या व्यापक है और राज्य सरकार के पास पराली के रख-रखाव के लिए किसानों को सहायता राशि देने लायक धन नहीं है. एक और ट्वीट में उन्होंने दोष दूसरे पर मढ़ने के अंदाज में लिखा कि समस्या के राष्ट्रव्यापी स्वरूप को देखते हुए सिर्फ केंद्र सरकार ही इसका समाधान कर सकती है.

    केंद्र सरकार में पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने ट्वीट किया कि एक ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान(कार्ययोजना) बनाया गया है और मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी की है. समस्या से जुड़े सभी पक्षों को इसपर सख्ती से अमल करना होगा.

    यह कार्य-योजना हवा की गुणवत्ता से संबंधित अलग-अलग श्रेणियों के मद्देनजर क्रियान्वयन के लिए तैयार की गई है. कार्य-योजना में ऑड-ईवन स्कीम से लेकर ईंट भट्ठों और ऊर्जा-संयंत्रों को बंद करने और पार्किंग फीस बढ़ाने से लेकर बिन खड़ंजे की सड़कों पर पानी के छिड़काव करने जैसे बहुत से उपाय बताये गए हैं. थोड़े में कहें तो कार्य-योजना यह सुझाती है कि प्रदूषण का स्तर हद से ज्यादा बढ़ जाए तो प्रतिक्रिया के तौर पर क्या-क्या किया जाना चाहिए. लेकिन प्रदूषण के हालात गंभीर न हों—ऐसा सुनिश्चित करने वाले उपाय कहां हैं ?

    अगर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब या फिर केंद्र की सरकार ने मसले पर इस नुक्ते से सोचा होता तो दिल्ली इस तरह अपने ही हाथों अपना गला घोंटते नजर नहीं आती !

    (Pallavi Rebbapragada for Hindi.firstpost.com)

     

     

  • रेलवे के साथ ट्विटर पर अमूल की बातचीत, भेजी मक्खन की खेप

    रेलवे के साथ ट्विटर पर अमूल की बातचीत, भेजी मक्खन की खेप

     

     

    डेयरी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अमूल ने देश के विभिन्न हिस्सों में सामान पहुंचाने के लिये रेलवे की परिवहन सेवाओं का इस्तेमाल शुरू किया है. इसके तहत रेलवे के रेफ्रीजिरेटिड पार्सल डिब्बे में मक्खन की पहली खेप भेजी गई है.

    दरअसल, डेयरी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अमूल ने करीब महीने भर पहले भारतीय रेलवे को ट्विटर पर देश के विभिन्न हिस्सों में माल पहुंचाने के लिए रेलवे की सेवाओं का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव भेजा था. इसमें अमूल ने पूछा था कि वह देशभर में मक्खन पहुंचाने के लिए रेलवे के रेफ्रीजिरेटिड पार्सल डिब्बे का इस्तेमाल करना चाहता है.

    अमूल ने ट्वीटर में लिखा, ’17 मीट्रिक टन अमूल मक्खन का पहला शीतित डिब्बा पालनपुर से दिल्ली के लिए हमारी दूध रेलगाड़ी के साथ रवाना कर दिया गया है. इसके लिए अमूल ने त्वरित कदम उठाने के वास्ते भारतीय रेलवे का धन्यवाद किया.’

    अमूल ने 23 सितंबर को भारतीय रेलवे को भेजे अपने कारोबारी प्रस्ताव में पूछा था- ‘वह भारत में ‘अमूल मक्खन’ की सप्लाई के लिए रेफ्रीजिरेटिड पार्सल वैन का इस्तेमाल करने का इच्छुक है. सलाह दें.” इस पर भारतीय रेलवे ने ट्वीटर पर तुरंत कंपनी के ही प्रचलित टैग लाइन का इस्तेमाल करते हुये जवाब दिया – ‘‘भारतीय रेलवे को ‘अटर्ली बदर्ली’ दि टेस्ट ऑफ इंडिया को हर भारतीय तक पहुंचाने में प्रसन्नता होगी.’’ भारतीय रेल आमतौर पर यात्रियों की परेशानी दूर करने के लिये ट्वीटर हैंडल का इस्तेमाल करता है. लेकिन शायद यह पहला मौका है जब इसका इस्तेमाल किसी कारोबारी प्रस्ताव के लिये हुआ है.भारतीय रेलवे ने कुछ साल पहले खराब होने वाले सामान जैसे- फल, सब्जियों, मांस और चॉकलेट के सुविधाजनक परिवहन के लिए शीतित यान सेवा की शुरुआत की थी. हालांकि, ये सेवाएं कुछ विशिष्ट मार्ग पर ही उपलब्ध हैं.

  • ‘कुछ दिनों में प्रदूषण का स्तर सामान्य हो जाएगा’

    ‘कुछ दिनों में प्रदूषण का स्तर सामान्य हो जाएगा’

     

     

    केंद्रीय पर्यावरण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने गुरुवार को यहां कहा कि “अगले कुछ दिनों” में राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर सामान्य रूप से वापस आ जाएगा।

    नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (एनआईओ) में आयोजित एक समारोह के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में प्रदूषण का स्तर दिल्ली में काफी गिरा था।

    मौसम की स्थिति

    “दिल्ली सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों के लिए, उन्हें पूरी ईमानदारी के साथ किया जाना चाहिए। इसलिए हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की भी राज्य सरकारें हैं। वे सभी को जिम्मेदारी के अपने भाग को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना होगा। और मुझे यकीन है कि अगले कुछ दिनों में चीजें सामान्य हो जाएंगी, “श्री वर्धन ने कहा।

    “यह सब वास्तव में मौसम की स्थिति के कारण उपजी हो जाता है वहां कुछ नमी थी जो पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए और फिर हवा की गति और सभी वहां नहीं थे। इस तरह के वायुमंडल में जमा होने वाले इस कण के मामले में, “मंत्री ने कहा।

    कार्य योजना

    “यह उम्मीद है कि अगले 24 घंटों में, हवा की गति में और सुधार होगा और इन सभी उपायों के साथ विभिन्न सरकारों और केंद्र सरकार द्वारा उठाए जा रहे हैं, हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि तत्काल कार्रवाई योजना संपूर्णता में लागू की गई है, ” उसने कहा।

    विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने दिल्ली के निवासियों को घर के अंदर रहने की सलाह दी।

  • अमेरिकी चुनाव में रूस के दखल के दावे सिर्फ कल्पनाएं : पुतिन

    अमेरिकी चुनाव में रूस के दखल के दावे सिर्फ कल्पनाएं : पुतिन

     

     

    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल के आरोप कल्पनाएं हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति पद के महत्व को कमतर करने की कोशिश है. रूस पर डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान दल के साथ संपर्क के जरिये अमेरिकी चुनाव में दखल देने का आरोप है.

    ट्रंप प्रशासन इन दावों को लेकर विवादों में रहा है कि रूस ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता को व्हाइट हाउस में पहुंचाने में मदद की. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कई पूर्व सहयोगी रूस सरकार के साथ कथित सहयोग के लिए अमेरिकी जांच के घेरे में हैं.

    रूसी राष्ट्रपति ने वियतनाम में चल रहे एशिया-प्रशांत शिखर सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा, अमेरिका में तथाकथित रूसी डोजियर होने की सभी बातें वहां जारी घरेलू राजनीतिक संघर्ष की एक अभिव्यक्ति है.

    यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप के चुनाव अभियान दल के सदस्यों एवं रूसियों के बीच संपर्क को लेकर चल रही जांच की जानकारी है, पुतिन ने कहा, यकीनन, मुझे पता है. इन रूसियों में पुतिन की रिश्तेदार होने का दावा करने वाली महिला शामिल है.राष्ट्रपति ने कहा, प्रशासन या कुछ अधिकारियों के साथ मेरे रिश्तेदारों के किसी तरह के संपर्क को लेकर बात करें तो मुझे कल ही पेस्कोव से इसकी जानकारी मिली. उन्होंने कहा, मैं इसके बारे में कुछ नहीं जानता. मुझे लगता है कि ये एक तरह की कल्पनाएं हैं.

  • दिल्ली से भी ‘गंदी’ है पीएम मोदी की काशी, रिपोर्ट दे रही गवाही

    दिल्ली से भी ‘गंदी’ है पीएम मोदी की काशी, रिपोर्ट दे रही गवाही

     

     

    प्रदूषण का स्तर केवल राजाधानी में ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत में अपने चरम पर है. हालांकि, रोचक बात ये है कि जिस दिल्ली की हवा को पिछले कई दिनों से जहरीला बताई जा रही है वो प्रदूषण संबंधी रिपोर्ट में भारत के अन्य शहरों के मुकाबले कहीं पीछे है.

    दरअसल, स्वच्छ भारत अभियान को देश भर में व्यापक बना रहे प्रधानमंत्री मोदी के ही लोकसभा सीट में प्रदूषण बेलगाम है. सीपीबीसी की इस लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र बनारस टॉप पर है.

    सीपीसीबी द्वारा जारी की गई प्रदूषण संबंधी रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में बनारस के बाद दूसरा स्थान गुरुग्राम का है और फिर तीसरे नंबर पर दिल्ली है. इस लिस्ट में बनारस 491वें स्थान पर है वहीं गुरुग्राम 480, दिल्ली 468, लखनऊ 462 और कानपुर 461वें स्थान पर है.

    इधर, प्रदूषण की जद में उत्तर भारत के कई शहर और भी हैं. धुंध की वजह से लगभग 64 ट्रेनें अनियमित हुई हैं जबकि 14 ट्रेनों के चलने के समय में बदलाव किया गया है.

    स्मॉग की वजह से सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार भी धीमी हुई हैं. कई जगह रोड एक्सिडेंट के भी मामले सामने आए हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदूषण को कम करने के लिए हर संभव उपाय करने से वे पीछे नहीं हटेंगे.

    वहीं, दिल्ली-एनसीआर में जहरीले स्मॉग के असर को कम करने के लिए हेलीकॉप्टर से बौछार के बारे में विचार किया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी इसे लेकर मीटिंग कर रहे हैं और स्थिति बेहतर नहीं होने पर इसके लिए प्रयास की जाएगी.