Category: national

  • सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन

    सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन

     

     

    नरेंद्र मोदी सरकार ने डेमोनेटीशनेशन स्कीम की घोषणा के एक साल बाद, कई सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और व्यापार संगठनों ने बुधवार को एक साथ एक साथ उनके विरोध का पंजीकरण करने के लिए एक साथ आए।

    ‘सरकार को माफी मांगनी चाहिए’

    प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित सार्वजनिक मीटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम में कई लोग शामिल थे – ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के थॉमस फ्रेंको, भारत के स्ट्रीट वेंडर नेशनल एसोसिएशन के अरबिंद सिंह, गौहर रजा, उमर खालिद – एक साथ मिलकर इस मुद्दे पर बोलें

    बीजेपी सरकार के कदम के बाद अपनी ज़िंदगी में खो गए सभी लोगों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग करते हुए, पीपुल्स कैम्पेन अगेंस्ट डिमोनेटिशन के सदस्य ने कहा: “हम भारत के लोगों ने इस आपराधिक स्टंट की निंदा करते हैं। नोटिस की वजह से मोदी सरकार को नुकसान और विनाश के लिए माफी मांगनी चाहिए और उन लोगों के परिवार की क्षतिपूर्ति करना चाहिए जो मर चुके हैं। सभी अभियुक्त, मंत्रियों सहित, की कोशिश की जानी चाहिए और न्यायालयों में दर्ज मामले।

    “हम एक गैर-लोकशाही सरकार नहीं चाहते हैं, जो लोगों को बेवकूफ बनाती है और कॉर्पोरेट्स के हाथों कठपुतली है। हम इस तरह के एक आर्थिक पूर्वानुमान को अस्वीकार करते हैं और एक सरकार चाहते हैं जो लोगों के लिए पारदर्शी और जवाबदेह है। ”

  • डोनाल्ड ट्रंप की खातिरदारी में पेश की गई थी 5 सेक्स वर्कर, पूर्व अंगरक्षक ने किया खुलासा

    डोनाल्ड ट्रंप की खातिरदारी में पेश की गई थी 5 सेक्स वर्कर, पूर्व अंगरक्षक ने किया खुलासा

     

     

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई कारणों से सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं.हाल ही में ट्रंप के पूर्व अंगरक्षक ने अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसके बाद सोशल मीडिया में आग लग गई है. ट्रंप के पूर्व संरक्षक कीथ शिलर ने कहा है कि पांच साल पहले ट्रंप मॉस्को की यात्रा पर गए थे, जहां उनके कमरे में पांच सेक्स वर्कर को भेजने का ऑफर मिला था. लेकिन ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.

    निजी हैसियत से प्रतियोगिता में ली थी हिस्सेदारी
    2013 में ट्रंप मिस यूनिवर्स सौंदर्य प्रतियोगिता के लिए मॉस्को गए थे. ट्रंप उस वक्त किसी सार्वजनिक पद पर नहीं थे और निजी हैसियत से प्रतियोगिता के आयोजन में हिस्सेदारी के लिए रूस गए हुए थे. शिलर ने बताया कि उस रात जब ट्रंप के कमरे में अरबपति व्यापारी ने ट्रंप को ये ऑफर दिया तो उन्होंने उस वक्त इस पेशकश को कोई महत्व नहीं दिया और ठुकरा दिया.

    सबसे अश्लील दावों में शोध दस्तावेजरिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का 2013 का यह दौरा 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान डेमोक्रेट द्वारा एक शोध दस्तावेज में शामिल सबसे अश्लील दावों में से एक का था. दस्तावेज में आरोप लगाया गया था कि ट्रंप उस दौरान मास्को में सेक्स वर्करों के साथ रहे थे जिसे ट्रंप ने सिरे से नकार दिया था. यात्राओं के दौरान अक्सर ट्रंप के साथ रहने वाले शिलर ने कांग्रेस जांचकर्ताओं से कहा कि उन्होंने मास्को में ट्रंप के किसी तरह के अवैध या खराब व्यवहार को नहीं पाया था.

  • निर्मला सीतारमण ने जाधव को पत्नी से मिलने देने के पाक कदम की सराहना की

    निर्मला सीतारमण ने जाधव को पत्नी से मिलने देने के पाक कदम की सराहना की

     

     

    रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौत की सज़ा का सामना कर रहे भारतीय
    कुलभूषण जाधव को उनकी पत्नी से मिलने देने की अनुमति देने के पाकिस्तान के निर्णय को एक ‘अच्छा मानवीय संकेत’ करार दिया.

    मानवीय आधार पर नयी दिल्ली ने इस्लामाबाद से जाधव की मां को वीजा देने का अनुरोध किया था. इस अनुरोध के महीनों बाद, पाकिस्तान ने शुक्रवार को कहा कि वो जाधव को उसकी पत्नी से जेल में मिलने की अनुमति दे रहा है.

    इस्लामाबाद के निर्णय को लेकर पूछे जाने पर निर्मला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, ‘ये एक अच्छा मानवीय पहल है.’ उन्होंने कहा, ‘भारत कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी जेल से रिहा कराने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत से भी संपर्क किया है.’ पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जासूसी के आरोप में अप्रैल में जाधव को मौत की सजा सुनाई थी. भारत की अपील पर अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने मई में इस सजा की तामील पर रोक लगा दी थी.

  • डेंगू की स्थिति पर फेसबुक पोस्ट को लेकर डॉक्टर सस्पेंड

    डेंगू की स्थिति पर फेसबुक पोस्ट को लेकर डॉक्टर सस्पेंड

     

     

    पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने एक चिकित्सक को फेसबुक पर की गई अपनी एक पोस्ट में ये आरोप लगाने पर निलंबित कर दिया है कि राज्य सरकार राज्य में
    डेंगू की बीमारी से संबंधित तथ्यों को दबा रही है.

    राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर अरूणाचल दत्त चौधरी की पोस्ट ‘जनता में चीज़ें गलत तरह से पेश करने वाले और अस्पताल प्रशासन के लिए अपमानजनक है.’ चिकित्सक एक एमडी हैं और उत्तर 24 परगना जिला स्थित बारासात जिला अस्पताल में तैनात थे.

    उन्होंने अपने पोस्ट में दावा किया कि छह अक्तूबर को 500 लोग अस्पताल में भर्ती हुए. उन्होंने इसमें इस बारे में भी लिखा है कि किस तरह से उन्होंने कई मरीज़ों के इलाज में संघर्ष किया जिसमें से कई फर्श पर पड़े हुए थे.

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गत जनवरी से राजकीय अस्पतालों में 19 मौतें हुई हैं और विभिन्न सरकारी क्लीनिक में 18 हज़ार से अधिक मामले आए.विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि ममता बनर्जी सरकार राज्य में डेंगू से होने वाली मौतों की संख्या को दबाने का प्रयास कर रही है.

  • रेलवे कर रहा कोहरे से लड़ने की तकनीक का परीक्षण

    रेलवे कर रहा कोहरे से लड़ने की तकनीक का परीक्षण

     

     

    एक बार फिर से कोहरे का मौसम आ गया है, जिससे रेल सेवाएं हर साल की तरह इस साल भी देरी से चल रही हैं और यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. रेलवे की कोहरे से निपटने की तैयारियां अभी भी नाकाफी हैं. उत्तर की तरफ जानेवाली ट्रेनों में एलईडी फॉग लाइटों और अन्य तकनीकों का प्रयोग करने की चर्चा हुई थी, लेकिन अभी भी यह परीक्षण के चरण में ही है.

    कोहरे के कारण दृश्यता प्रभावित होने से उत्तर की तरफ जानेवाली सभी ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही है, जिससे रेलवे का भीड़भाड़ वाला पूरा नेटवर्क प्रभावित होता है और सभी ट्रेनों पर असर पड़ता है. घने कोहरे के कारण सुरक्षा की दृष्टि से ड्राइवर रफ्तार घटाकर 15 किलोमीटर प्रति घंटा तक ले आते हैं, जिसके कारण ट्रेनें 4 घंटों से लेकर 22 घंटों की देरी से चल रही हैं.

    हर साल होने वाली इस बाधा से लड़ने के लिए रेलवे ने कई तकनीकी कदम उठाएं हैं.

    इसके तहत ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस), ट्रेन कोलिजन एवायडेंस सिस्टम (टीसीएएस) और टैरिन इमेजिंग फॉर डीजल ड्राइवर्स (ट्राई-एनईटीआरए) सिस्टम के साथ ही नवीनत एलईडी फॉग लाइट्स लगाने की तैयारियां चल रही हैं, ताकि दृश्यता में सुधार हो. लेकिन इन सब तकनीकों का अभी भी परीक्षण ही चल रहा है.रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी जो प्रेस से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं, ने आईएएनएस को बताया, कोहरे के कारण ड्राइवर को सिग्नल ठीक से दिखता नहीं है, इसलिए दुर्घटना का खतरा रहता है. इसलिए वे रफ्तार काफी कम रखते हैं.

    टीपीडब्ल्यूएस प्रणाली अभी केवल 35 इंजनों में लगी है, जो ड्राइवर को घने कोहरे या बारिश में भी सिग्नल देखने की सुविधा देती है. इसे चेन्नई और कोलकाता मेट्रो के उपनगरीय नेटवर्क में लगाया गया है. वहीं, टीसीएएस सिस्टम में ड्राइवर को आरएफआईडी टैग के माध्यम से केबिन में ही सिग्नल दिखता है। लेकिन ये सभी प्रणालियां अभी पायलट चरण में ही हैं.

  • स्टीम इंजन ‘अकबर’ पटरी से उतरा, कोई हताहत नहीं

    स्टीम इंजन ‘अकबर’ पटरी से उतरा, कोई हताहत नहीं

     

     

    भारतीय रेलवे की धरोहर माने जाने वाला स्टीम इंजन ‘अकबर’ उत्तर रेलवे के रेवाड़ी स्टीम शेड में मरम्मत कार्य के दौरान पटरी से उतर गया. हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है.

    उत्तर रेलवे के प्रवक्ता नितिन चौधरी ने बताया कि इंजन अकबर की शेड में मरम्मत चल रही थी. इस दौरान इंजन के ब्रेक की भी जांच की गई. तभी इंजन चलने लगा. कर्मचारियों ने ब्रेक लगाया लेकिन ब्रेक ठीक से काम नहीं कर रहे थे, जिससे कारण इंजन पटरी से उतर गया.

    हालांकि इससे कोई हताहत नहीं हुआ और रेलवे की संपत्ति को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.

    उन्होंने बताया कि डिवीजनल रेलवे मैनेजर ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. इंजन का नाम मुगल बादशाह अकबर के नाम पर रखा गया है और यह रेलवे के पुराने स्टीम इंजनों में से एक है.

  • ओडिशा की मंत्री का हैंडबैग चलती ट्रेन से चोरी

    ओडिशा की मंत्री का हैंडबैग चलती ट्रेन से चोरी

     

     

    ओडिशा की मंत्री उषा देवी का हैंड बैग पुरी-दुर्ग इंटरसिटी एक्सप्रेस से चोरी हो गया. बैग में 25000 रुपए नकद, मोबाइल फोन और अन्य बेशकीमती सामान थे.

    राज्य की कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री भुवनेश्वर में ट्रेन में सवार हुईं और शुक्रवार को कांताबानजी जा रही थीं. उन्होंने टिटिलागढ़ जीआरपी में दर्ज़ कराई गई प्राथमिकी में कहा कि हैंडबैग की चोरी रैराखोल और अंगुल स्टेशनों के बीच हुई.

    टिटिलागढ़ जीआरपी के प्रभारी निरीक्षक मोहन नायक ने कहा, ‘मंत्री की नकदी, मोबाइल और आईडी कार्ड की चोरी हो गई है. हमने मामला दर्ज़ किया है और मामले में जांच चल रही है.’

  • ‘वो राहुल गांधी हैं’: जिनकी बंद मुट्ठियों में कांग्रेस की उम्‍मीद बंधी है

    ‘वो राहुल गांधी हैं’: जिनकी बंद मुट्ठियों में कांग्रेस की उम्‍मीद बंधी है

     

     

    गुजरात की जमीन से आज कांग्रेस बीजेपी को ललकार रही है. कांग्रेसी नेता नई उम्मीद से भर गए हैं क्योंकि उन्हें अपने एक नेता में पार्टी को आगे ले जाने और देश को नेतृत्व देने की क्षमता दिख रही है. वो कोई और नहीं, राहुल गांधी हैं. वो राहुल गांधी, जो राजनीति की ऊबड़-खाबड़ राहों पर चलकर फिलहाल उस मुकाम तक पहुंच गए हैं, जहां से वो बीजेपी की जमीन खिसकाने का दावा कर रहे हैं.

    एक बार राहुल गांधी के कान में उनकी मां ने कहा था कि सत्ता ज़हर है और अब इसी ज़हर को पीने के लिए राहुल गांधी अपनी राजनीतिक यात्रा के नवसर्जन में जुटे हैं.

    देश की सबसे बड़ी और पुरानी राजनीतिक पार्टी की जिम्मेदारी उनके कंधों पर उस दौर में आई है जब वाकई कांग्रेस कमज़ोर है. गुजरात से दिल्ली पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हीं के घर में हराने के लिए राहुल गांधी नए तेवर में नज़र आए.

    उनके इसी तेवर की बंद मुट्ठियों में कांग्रेस की उम्मीद बंधी है, क्योंकि सबसे बड़े लोकतंत्र में सबसे ज़्यादा राज करने वाली पार्टी के पास अब राहुल के सिवा भरोसे के लिए कोई और नहीं है.

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    चुनावी रैली में राहुल गांधी

    कभी दिन थे कि कांग्रेस देश की सबसे ताकतवर महिला के कंधों पर टिकी थी और उसी महिला की गोद में चढ़े होते थे राहुल गांधी. वो ताक़तवर महिला थीं इंदिरा गांधी.

    राहुल का राजनीतिक जीवन तो 2004 में शुरू हुआ लेकिन उनके जीवन में राजनीति जन्म के साथ आ गई थी. देश के सबसे ताकतवर गांधी-नेहरू परिवार के वारिस का बचपन प्रधानमंत्री आवास में ही बीता.
    दफ्तर में देश चलाने वाली दादी इंदिरा गांधी के अजीज़ प्रियंका और राहुल गांधी घर में अपनी मनमानी चलाते और दादी का वक्त बच्चों को समझाने-सिखाने में बीतता.

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    दादी इंदिरा गांधी के साथ राहुल गांधी

    गांधी परिवार के भीतर की बहुत कम झलकियां ही हैं, लेकिन जिन्होंने बचपन के राहुल को देखा है वो बताते हैं कि आज का कांग्रेस नेता शर्मीला सा एक बालक था. देश चलाने वाले परिवार के राहुल का बचपन भी और बच्चों जैसा ही था, शैतानियों पर पिता की फटकार पड़ती तो दादी दीवार बनकर खड़ी हो जाती थीं.

    राहुल गांधी कहते हैं कि घर में पापा बहुत अनुशासन रखते थे. कोई गलती होती थी तो डंडा पापा मारते थे और दादी मुझे बचाती थीं. चाहें मैं कुछ भी बदमाशी करता था, दादी का छिपा हुआ हाथ मुझे पापा की डांट से बचा देता था.

    दादी के साथ राहुल गांधी का गहरा लगाव था. बचपन की ज़्यादातर तस्वीरों में राहुल गांधी दादी के करीब नज़र आते हैं. इसी गहरे लगाव के चलते राहुल गांधी को गहरा सदमा भी लगा था, जब दादी इंदिरा की हत्या उन्हीं के सुरक्षाकर्मियों ने कर दी थी.

    इंदिरा गांधी की चिता पर चटकती लकड़ियों में कांग्रेस का एक युग राख हो रहा था और दूसरा युग उसी चिता के सामने खड़ा था. राहुल गांधी उस वक्त करीब 15 साल के थे, राजनीति में आने की उम्र नहीं थी और उनके पिता राजीव गांधी कांग्रेस की अगली उम्मीद थे.

    सहानुभूति के ज्वार पर सवार कांग्रेस राजीव गांधी की अगुआई में एक बार फिर सत्ता में आई. राहुल गांधी अब करीब से राजनीति को देख और समझ रहे थे.

    [object Promise]मैं राजीव जी के साथ जाता था उनके घर, जब राहुल बहुत छोटे थे. वे बहुत विनम्र हैं और संस्कार भरा है.


    कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा

    अब तक इंदिरा के बेटे और राहुल, प्रियंका के पिता रहे राजीव देश के नेता की भूमिका में आ गए थे. बच्चों को पिता का साथ कम मिलता और एक डर हमेशा घेरे रहता था.

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    अपनी दादी की गोद में बालक राहुल

    गांधी परिवार को दूसरा सदमा सन 1991 में लगा, जब राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में हत्या कर दी गई. उस वक्त लगा था कि ये गांधी परिवार की राजनीति का अवसान है, लेकिन देश के शीर्ष परिवार की मां बचपन की उंगली थाम उसे जवानी की दहलीज पर ले आई. सोनिया गांधी ने परिवार की बिखरी विरासत, सियासत को सहेजा. बच्चों का संभाला. राजनीति की ऊबड़ खाबड़ राहों को समतल बनाया और बेटे राहुल को उतार दिया.

    सोनिया गांधी के कांग्रेस की कमान संभालने के बाद तैयारी थी राहुल गांधी को राजनीति में उतारने की. बचपन का राहुल अब पीछे छूट गया था और युवा राहुल सोनिया गांधी के साथ राजनीतिक मंचों पर नज़र आने लगे थे.

    2004 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने आधिकारिक तौर पर राजनीति में पांव रख दिया. पिता की सियासत से सींची गई अमेठी ने उन्हें बाहों में उठा लिया.

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    मां सोनिया और दादी इंदिरा गांधी के साथ राहुल

    ज्योतिरादित्य सिंधिया कहते हैं कि ‘राजनीति जनसेवा का रास्ता है. राहुल सहनशील हैं, लोगों की कठिनाई सुन कर समाधान निकालने में लगे रहते हैं. राहुल में नया सीखने की उत्सुकता रहती है. राष्ट्र के उत्थान के लिए एक रूपरेखा बनाई है उन्होंने.

    2007 से राहुल गांधी ने अगले चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी थीं, लेकिन कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का ऐसा कलंक लगा कि देश का माहौल ही उसके खिलाफ हो गया. अन्ना आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का सपना रखने वाले राहुल गांधी आलोचनाओं के कठघरे में खड़े थे और गुजरात से उठी नरेंद्र मोदी नाम की लहर देश पर छाने लगी थी.

    2014 के नतीजों से लगा कि कांग्रेस की नैया का खेवैया अब शायद कोई नहीं है, लेकिन अब एक बार फिर राहुल गांधी आक्रामक तेवर में हैं. अमेठी से सियासत में उतरे राहुल का परम लक्ष्य अब दिल्ली है और उनकी युवा टीम को लगने लगा है कि यही तेवर अब कांग्रेस को सत्ता का जेवर पहनाएगा.

    सचिन पायलट कहते हैं कि ‘देश भर में राष्ट्रीय स्तर पर अगर बीजेपी को कोई चुन्नौती दे रहा है, तो वो राहुल गांधी ही हैं. जिस आक्रामक अंदाज़ में बीजेपी को उन्होंने बेनक़ाब किया, अब विपक्ष भी रो-पीट कर उनका लोहा मान रहा है. उनके एक रिएक्शन पर कई मंत्रियों को एक साथ आकर रिएक्ट करना पड़ रहा है. उनकी रिएक्शन से खलबली मचती है.

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    पिता राजीव गांधी के साथ राहुल

    रणदीप सुरजेवाला कहते हैं, ‘राहुल में दूरदृष्टि है, दार्शनिक सोच के मालिक हैं. वो अच्छा व्यंग कर रहे हैं आजकल अपने ट्विटर से, ये उनकी सोच का नतीजा है.’

    राहुल गांधी की लड़ाई इस समय राजनीति के ‘बाहुबली’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है. राहुल अब तक सियासी चुटकुलों की सामग्री ज्यादा रहे हैं और नेता कम. उनकी छवि मोदी जैसे मज़बूत राजनेता की नहीं है, लेकिन अब कांग्रेस की सारी उम्मीद उनके कंधों पर टिकी है और कांग्रेसियों को लगता है कि अब वो दिन दूर नहीं, जब राहुल का जादू चलने वाला है.

  • VIDEO: सिर्फ 35 रुपए में घर बैठे बनाएं एयर-पॉल्यूशन मास्क

    VIDEO: सिर्फ 35 रुपए में घर बैठे बनाएं एयर-पॉल्यूशन मास्क

     

     

    दिल्ली में बीते मंगलवार से ही जहरीले स्मॉग ने कहर बरपाया हुआ है. स्मॉग के चलते दिल्ली सरकार ने हेल्थ एडवाइजरी भी जारी की और रविवार तक के लिए सभी स्कूल बंद कर दिए हैं. आपको बता दें कि एयर पॉल्यूशन सिर्फ दिल्ली की ही दिक्कत नहीं है, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक टॉप-20 प्रदूषित शहरों में से 9 भारतीय हैं.

    ऐसी सिचुएशन में एयर-पॉल्यूशन मास्क आपकी सबसे बड़ी जरूरत है. दिक्कत ये है कि स्मॉग से बचने के लिए काम आने वाले कार्बन लेयर्ड मास्क की कीमत 600 से लेकर 2000 रुपए के बीच है. आज हम आपको घर में ही कार्बन लेयर्ड मास्क कैसे बनाएं इसका तरीका बता रहे हैं. इसे बनाना न सिर्फ आसन है बल्कि बेहद सस्ता भी है…

    क्या-क्या चाहिए

    > एक कपड़ा- रुमाल या बैंडना  (20 रुपए)> चारकोल टैबलेट  (1 रुपए/गोली मेडिकल स्टोर से मिल जाएगी)
    > कैंची और स्टेपलर  (सबके घर पर होता है)
    > वेट और ड्राई टिशु पेपर  (10 रुपए)
    > गम ट्यूब  (सबके घर पर होती है)

    कैसे बनाना है?
    सबसे पहले बैंडना या रूमाल लें और उसे फोल्ड कर लें. इसके बाद चारकोल की 5 गोलियां लें और इन्हें बारीक-बारीक पीस लें. ध्यान रहे कि टैबलेट खरीदते हुए पढ़ लें कि वो एक्टिवेटेड चारकोल है या नहीं.

    इसके बाद एक वेट टिशु पेपर लें और बारीक पिसे चारकोल को इस पर अच्छी तरह फैला लें. वेट टिशु होने के चलते चारकोल इस पर चिपक जाएगा. इसके बाद वेट टिशु को भी फोल्ड कर लें. अब एक ड्राई टिशु पेपर लें और वेट टिशु पेपर को इसमें अच्छे से रैप कर लें. आप इसे चिपका भी सकते हैं या फिर स्टेपल भी कर सकते हैं. स्टेपल करने के बाद आपका कार्बन फ़िल्टर तैयार हो जाएगा.

    अब फोल्ड किया हुआ बैंडना या रुमाल लें और उसके अन्दर इसे स्टेपल कर लें. पहनते हुए फ़िल्टर को नाक की तरफ रखें. सिर्फ 35 रुपए खर्च कर आपका एयर-पॉल्यूशन मास्क तैयार हैं.

    एक और आसान तरीका
    काफी सारे ऐसे लोग भी होंगे जिन्होंने स्मॉग के डर से एंटीडस्ट मास्क खरीद लिया है लेकिन सच तो ये है कि ये स्मॉग में किसी कम का नहीं है. लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि इसे कैसे एंटी-पॉल्यूशन मास्क में बदल सकते हैं.

    ऊपर बताई गई प्रोसेस के मुताबिक कार्बन फ़िल्टर बनाएं. इस बार उसका साइज़ अपने एंटीडस्ट मास्क के मुताबिक रखें. मास्क के साइज़ का ही सूती कपड़ा भी लें. अब मास्क के पीछे कार्बन फ़िल्टर रखें फिर सूती कपड़ा रखें और स्टेपल कर लें. आपका एयर-पॉल्यूशन मास्क तैयार है.

    नोट: ये मास्क 10-15 दिन आराम से चल जाएगा. जब टिशु पेपर ब्रेक होने लगे तो स्टेपल पिन को निकालें और नया कार्बन फ़िल्टर बनाकर फिर से इस्तेमाल करें.

  • मुंबई पुलिस ने बच्चे को दूध पिला रही महिला को कार समेत उठाया

    मुंबई पुलिस ने बच्चे को दूध पिला रही महिला को कार समेत उठाया

     

     

    मुंबई ट्रैफिक पुलिस का दिल को झकझोर कर रख देने वाला चेहरा सामने आया है. ट्रैफिक पुलिस कर्मी ने एक निजी कार को उठवा लिया जिसमें एक बीमार महिला अपने सात महीने के बच्चे को दूध पिला रही थी. घटना शुक्रवार शाम उत्तर-पश्चिम के उपनगर मलाड (पश्चिम) की व्यस्त एस. वी. रोड की है. घटना का वीडियो एक स्थानीय नागरिक ने बनाया था जिसे महिला का पति बताया जा रहा है. यह वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है.

    घटना को गंभीरता से लेते हुए मुंबई के संयुक्त आयुक्त (ट्रैफिक)अमितेश कुमार ने पुलिस उपायुक्त – पश्चिम (डीसीपी-पश्चिम) को तुरंत जांच का आदेश दिया है.

    कुमार ने शनिवार शाम एक बयान में आश्वासन दिया कि उन्हें (डीसीपी-वेस्ट) तुरंत इस घटना की जांच करने का आदेश दिया गया है. रविवार रिपोर्ट मिलने के बाद मामले को सही और कड़ाई से निपटा जाएगा.

    जानकारी के मुताबिक, 20 साल की एक महिला, जिसकी पहचान अभी नहीं हो पाई है अपने सात महीने के बच्चे के साथ सफेद कार में बैठी हुई थी कि तभी एक टो वैन ने अचानक कार को उठाकर ले जाना शुरू कर दिया.उसने पुलिस कर्मी से अनुरोध किया कि वह टो न करें. ट्रैफिक पुलिसकर्मी का नाम शशांक राणे है, जिसने ड्यूटी के दौरान अपने नाम का बिल्ला नहीं पहना था. बिल्ला न पहनना महाराष्ट्र पुलिस के नियमों के खिलाफ है.

    इससे पहले, पुलिसकर्मी ने मुस्कुरा कर अपने नाम की पुष्टि की और महिला से गाड़ी को टो करने से पहले वाहन से उतरने का अनुरोध भी किया लेकिन महिला ने अपने बच्चे की नर्सिग करने और खुद को अस्वस्थ बताकर गाड़ी से उतरने से मना कर दिया.

    महिला ने खिड़की से एक चिकित्सा विवरण दिखाया था और वीडियोग्राफर को बताया कि वह बीमार है और अपने भूखे बच्चे को स्तनपान करा रही है, जो वीडियो में दिखाई दे रहा था. महिला ने दावा किया कि वहां खड़े दो अन्य वाहनों को पुलिस ने नहीं उठाया और उनकी कार को उसकी हताशा सुने बिना उठा लिया.