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  • चेन्नई में ‘जया टीवी’ के 21 ठिकानों पर इनकम टैक्स का छापा

    चेन्नई में ‘जया टीवी’ के 21 ठिकानों पर इनकम टैक्स का छापा

     

     

    चेन्नई स्थित एआईएडीएमके के माउथपीस और चैनल ‘जया टीवी’ के 21 ठिकानों पर गुरुवार को इनकम टैक्स का छापा पड़ा है. टैक्स चोरी का मामला दर्ज होने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ये कार्रवाई की.

    गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम चेन्नई के इक्कटथुथंगल स्थित ‘जया टीवी’ के ऑफिस पहुंची. टीम ने यहां से कुछ कागजात और फाइलें जब्त की हैं.

    इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अफसरों ने कहा, ‘टैक्स छिपाने की सूचना की हम पुष्टि करते हैं. हम टीवी चैनल और उसके सीनियर अफसरों अधिकारियों के गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं.’

    बता दें, तमिल चैनल ‘जया टीवी’ की शुरुआत तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता ने की थी. अभी इस चैनल पर एआईएडीएमके प्रमुख वीके शशिकला के परिवारवालों का कंट्रोल है.

    आय से अधिक संपत्ति मामले में शशिकला जेल में हैं. ऐसे में उनका भतीजा विवेक जयरामन इस चैनल को संभाल रहा है.

    जिन 21 ठिकानों पर आयकर विभाग छापेमारी कर रहा है, उसमें शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन के मन्नारगुड़ी स्थित घर भी शामिल है. इस छापेमारी की कार्रवाई में कुल 150 अधिकारी शामिल हैं.

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  • प्रदूषण से पक्षी हो रहे बेहोश तो कुत्तों में बढ़ी एलर्जी

    प्रदूषण से पक्षी हो रहे बेहोश तो कुत्तों में बढ़ी एलर्जी

     

     

    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बेतहाशा बढ़े 
    प्रदूषण ने पशु-पक्षियों का भी सुख-चैन छीन लिया है. उनमें बेचैनी बढ़ रही है. गुरुग्राम के एक बर्ड अस्पताल में दस दिनों में 25 पक्षी बेहोशी की हालत में पहुंचाए गए. उनकी आंखें खराब हो रही हैं तो कुत्तों में खांसी और एलर्जी की समस्याएं सामने आ रही हैं.

    बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सदस्य और बर्ड वॉचर एन. शिवकुमार सवाल करते हैं “धुंध और धुएं से लिपटे क्षेत्रों में पक्षी कैसे आएंगे?, खुद महसूस करिए, आपके आसपास पक्षियों का कलरव दिनोंदिन कम होता जा रहा है. पक्षी हमसे ज्यादा सेंसटिव होते हैं, इसलिए वे प्रदूषण से ज्यादा मरते हैं.”

    कम मेहमान पक्षी आएंगे

    प्रदूषण से मरते हैं पक्षी

    इस बारे में हमने दिल्ली बर्ड वाचर ग्रुप के कॉर्डिनेटर केबी सिंह से भी बात की. वह कहते हैं “पक्षी बायो इंडीकेटर होते हैं. ये प्रदूषण की वजह से दिल्ली-एनसीआर में लगातार कम हो रहे हैं. ओखला और सुल्तानपुर बर्ड सेंचुरी में जितने पक्षी पहले दिखते थे अब नहीं दिखते. प्रदूषण से पक्षी मरते भी हैं और पलायन भी करते हैं.” सिंह के अनुसार “हमने 2000 से 2017 तक सिर्फ 450 तरह के पक्षियों की प्रजाति दिल्ली-एनसीआर में देखे हैं. प्रदूषण ऐसा ही रहा तो इसमें कमी दर्ज की जाएगी.”

    दस दिन में आए 25 बेहोश पक्षी 

    जैन चैरिटी बर्ड हॉस्पिटल गुरुग्राम के संचालक नरेश जैन ने बताया ” इतने अधिक प्रदूषण की वजह से पक्षियों में बेचैनी बढ़ी है. वे बेहोश हो रहे हैं और उनकी आंखों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. पिछले 10 दिन में 25 पक्षियों को लोगों ने बेहोशी की हालात में अस्पताल पहुंचाया है.” संस्थानम अभय दानम बर्ड हॉस्पिटल के डॉ. विनोद बता रहे हैं कि “प्रदूषण की वजह से पक्षियों की आंखों में समस्या आ रही है. उनकी आंखों में सूजन है. वे बेचैन हैं. हमारे यहां ऐसे कुछ पक्षियों का इलाज चल रहा है.”

    पॉलिथीन के बाद प्रदूषण इस तरह डाल रहा असर

    पॉलिथीन और बढ़ते प्रदूषण के बाद अब स्मॉग जानवरों और परिंदों के लिए भी खतरे की घंटी बनता जा रहा है. खासतौर पर ठंड के मौसम में पशुओं के लिए बदलते तापमान से कदमताल करना आसान नहीं होता है. ऐसे में स्मॉग ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.  खासतौर पर मध्य प्रदेश के उत्तर भारत से सटे इलाकों में स्मॉग पशुओं की दिनचर्या को भी प्रभावित कर रहा है.

    पक्षियों की उडान में भी स्मॉग से दिक्कत

    अलसुबह सड़कों पर विचरण करने वाले पशुओं के लिए विजिबिलिटी कम होने और हवा में जहरीले तत्वों की मौजूदगी उन्हें विचलित कर रही है. ऐसे में कुछ जगहों पर यह भी देखा जा रहा है कि पशु लंबे समय तक अपनी जगह ही नहीं छोड़ते हैं, जबकि परिंदों की उड़ान भी अब पौ फटने के काफी देर बाद ही शुरू होती है. जानकार बताते हैं कि खासतौर पर ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले परिंदों के लिए स्मॉग दिक्कतें देने वाला है. ​

    कुत्तों पर प्रदूषण का असर
    सोलन (हिमाचल प्रदेश्)  के नालागढ़ में जानवरों के डॉक्टर सतनाम सेखो बताते हैं कि “प्रदूषण बढ़ने से जानवरों पर तो ज्यादा असर नहीं है, लेकिन कुत्तों असर देखने को मिल रहा है. कुत्तों में खांसी और एलर्जी के मामले सामने आ रहे हैं. नालागढ़ में सप्ताह में एक से दो मामले ऐसे आ रहे हैं. एनिमल हस्बेंडरी बोर्ड, शिमला के सीईओ आरके आनंद ने बताया कि ” हिमाचल में तो पाल्युशन लेवल इतना नहीं है, लेकिन अगर दिल्ली जैसे हालात या स्मॉग बढ़ता है तो जानवरों में बॉयोलिजकल और मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर की समस्या आएगी. चर्म रोग और आंखों पर असर होगा. इससे जानवर सुस्त हो जाते है.

    …तो खतरनाक हो सकती है स्थिति

    पशु विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो पशु-पक्षियों पर भी असर दिखने लगेगा. लखनऊ स्थित वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान के पशु चिकित्सक डॉ उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि फिलहाल प्रदूषण का असर चिड़िया घर में देखने को नहीं मिला है. अगर इसका असर इंसानों पर होता है तो जाहिर सी बात है जानवरों पर भी देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति लगातार बनी रहती है तो स्थिति खतरनाक हो सकती है.

    -साथ में मध्य प्रदेश से मनोज खांंडेकर, हिमाचल प्रदेश  से विनोद कुमार एवं यूपी से अमित तिवारी  

  • मौलाना आजाद स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण स्तंभ : राहुल गांधी

    मौलाना आजाद स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण स्तंभ : राहुल गांधी

     

     

    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद को उनकी 129वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की. राहुल ने ट्वीट कर मौलाना आजाद को स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण स्तंभ और सर्वोत्कृष्ट राजनीतिज्ञ बताया.

    राहुल ने कहा मौलाना अबुल कलाम आजाद आज भी हमें प्रेरित करते हैं.

    शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी आजाद ने शिक्षित भारत की नींव रखी थी. उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा जा चुका है.

    उनकी जयंती 2008 से राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाई जाती है. आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ था.

  • इंटरव्यू: जिग्नेश ने कहा- भारत डिजिटल नहीं सामंतवादी हो रहा

    इंटरव्यू: जिग्नेश ने कहा- भारत डिजिटल नहीं सामंतवादी हो रहा

     

     

    गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवानी लगातार चर्चाओं में हैं. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से उनकी मीटिंग होने वाली है और कयास लगाए जा रहे हैं कि वह इसके बाद कांग्रेस ज्वाइन कर लेंगे. लेकिन, जिग्नेश कहते हैं कि वे अपने सामाजिक मूवमेंट का राजनीतिकरण नहीं करना चाहेंगे.

    सीएनएन-न्यूज 18 से बातचीत में उन्होंने खुलकर बताया कि वह क्यों नरेंद्र मोदी से नाराज हैं और क्यों वह फिलहाल राजनीति से दूर हैं.

    आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से क्यों नाराज हैं?
    जिग्नेश- यहां कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दो या ढाई साल पहले मुझे मेरी मां के सामने सिर पकड़ कर घसीटा गया था. और, यह सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं मां के लिए बीपीएल कार्ड मांगने गया था.यदि एक पार्टी दलित संगठनों से बात करने से इनकार कर दे. सामाजिक संस्थाओं से बात करने से इनकार कर दे. आप क्या कहेंगे? अगर एक सत्ताधारी पार्टी इस तरह का घमंड दिखाए तो मेरे जैसे कब तक अपना गुस्सा नहीं दिखाएंगे?

    मैं एक दलित नौजवान हूं. नरेंद्र मोदी ने चुनावी वादा किया था कि वह युवाओं के लिए हर साल दो करोड़ नौकरी की व्यवस्था करेंगे. नौकरियां कहां हैं? उन्होंने गुजरात और देश की जनता को ठगा है. जिस तानाशाही के साथ हमें निपटना पड़ा है और जिस घमंड को हमें सहना पड़ रहा है उसे चुनौती दी जानी चाहिए. गुजरात के दलितों ने तय कर लिया है. समय आ गया है कि बीजेपी को गद्दी से उखाड़ फेंकना चाहिए. उनके पास ऊना के पीड़ितों को देने के लिए पांच एकड़ जमीन नहीं है, लेकिन कॉरपोरेट्स को देने के लिए हजारों एकड़ जमीन है.

    हम क्या पूछ रहे हैं? सिर्फ सामाजिक न्याय. गुजरात के 18000 गांवों में 12000 में दलित रहते हैं. सरकार ऐसी चुनौती क्यों नहीं लेती है कि कम से कम एक को छुआछूत से दूर कर देंगे? मुझे पता है कि यह एक रात में नहीं होता है. लेकिन सरकार को कम से कम इरादा तो दिखाना चाहिए.

    मोदी गुजरात में बहुत लोकप्रिय मुख्यमंत्री थे. फिर इस समय ऐसी बात क्यों हो रही है कि गुजरात में दलितों को कुछ नहीं मिला?

    जिग्नेश- विकास का गुबाड़ा साल 2002 में पहली बार सामने आया. फिर साल 2007 और 2012 में इस प्रचारित किया गया. लेकिन इस बात पर आपको विश्वास करना पड़ेगा कि कुछ भी नहीं हुआ. हमारी जिंदगी नहीं बदली. इसका अहसास दलित, ओबीसी और पटेलों को हो गया है. बीजेपी हमें कांग्रेस का राजनैतिक एजेंट बताते हुए खारिज करती है. फिर ठीक है. जिग्नेश गलत है. अल्पेश गलत है. हार्दिग गलत है. लेकिन हजारों उन लोगों के बारे में क्या कहना है जो बीजेपी के खिलाफ सड़क पर उतरे.

    क्या सभी गलत हैं? अगर हमें जीना है तो सैद्धांतिक दुश्मनों को मारना होगा. आशा वर्कर्स और आंगनबाड़ी वर्कर्स को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है. यदि गुजरात वाइब्रेंट है तो सरकारी कर्मचारियों को 4000 की जगह 45000 रुपये क्यों नहीं भुगतान करतें.

    हार्दिक, अप्लेश और आपका मूवमेंट सामान्य तौर पर विरोधाभासी और अलग है. कैसे हम आशा करें कि आप साथ काम करेंगे?

    जिग्नेश- हमारी सैद्धांतिक दुश्मनी बीजेपी से है. हां, ओबीसी, दलित और पटेल में कुछ मतभेद हैं. भविष्य में ये सामने आ सकते हैं. लेकिन पहले हमें बीजेपी से संघर्ष करना है. ‘हम सब गुजरात मॉडल, सब का विकास’ के पीड़ित हैं. किसका विकास? वे इस पर बात बात भी नहीं करना चाहते. बीजेपी महान है. वे पेड़ हिलाते हैं, कुछ पत्तियों को बिखेरते हैं और फिर हेमा मालिनी, सलमान खान और अमिताभ बच्चन को बुलाकर छाड़ू लगाते हुए फोटो क्लिक कराते हैं.

    गुजरात में करीब एक लाख सेनिटेशन कार्यकर्ताओं को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलती है. बीजेपी को देश भक्ति के बारे में बात करना अच्छा लगता है और वह इसका सर्टिफिकेट भी बांटती है. गुजरात का एक जवान किशोर वाल्मी बॉर्डर पर शहीद हो जाता है. मुख्यमंत्री विजय रुपाणी उसके परिजनों को 4 लाख रुपये देने का वादा करते हैं. उन्हें अब तक एक रुपये नहीं दिया गया है. वे कॉर्पोरेट्स को 30 हजार करोड़ की सब्सिडी दे सकते हैं. ऐसे में वे खुद को देशभक्त कहते हैं.

    मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के आप क्यों आलोचक हैं?
    जिग्नेश-
    सीएम हमें जो तर्क देते हैं उसे आपने सुना है? वे कहते हैं रामजी का बाण इसरो से ज्यादा शक्तिशाली होता है. वह व्राइट ब्रदर्स की विरासत को पुष्पक विमान से तुलना करते हैं. क्या भारत ऐसे डिजिटल बनेगा? ऐसे ही भारत सामंतवादी बने जाएगा. हम 22वीं शताब्दी में जाने की जगह 17वीं में जा रहे हैं.

    आप क्यों नहीं चुनाव लड़ रहे हैं?
    जिग्नेश- हमें चुनावी राजनीति के लिए एक सामाजिक आंदोलन को क्यों कम करना चाहिए? चुनाव लड़ने से मुझे कोई एलर्जी नहीं है. आज सड़क में हैं कल संसद में होंगे. लेकिन मैं इसके लिए उतावला नहीं हूं.

    क्या आप सोचते हैं कि भारत पहले से ज्यादा असहिष्णु हो गया है?
    जिग्नेश- लव जिहाद, घर वापसी और और गौ माता के नाम पर किसी को भी किसी की हत्या करने का अधिकार नहीं है. अगर बीजेपी कहती है लव जिहाद तो हम कहते हैं कि प्यार इश्क मोहब्बत जिंदाबाद. हम अंबेडकर की जयंती मनाते हैं और वेलेंटाइन डे भी.

    श्रेया धौंधियाल न्यूज 18

  • प्रद्युम्न मर्डर केस: आरोपी छात्र की रिमांड खत्म, आज कोर्ट में होगी पेशी

    प्रद्युम्न मर्डर केस: आरोपी छात्र की रिमांड खत्म, आज कोर्ट में होगी पेशी

     

     

    गुरुग्राम के प्रद्युम्न मर्डर केस में सीबीआई जल्द एक और नया खुलासा कर सकती है. 7 साल के प्रद्युम्न की हत्या के मामले में रायन इंटरनेशनल स्कूल के ही एक और छात्र का हाथ होने की बात सामने आ रही है. पुलिस के मुताबिक, वह छात्र भी सोहना का रहने वाला है. वहीं, इस केस में पकड़े गए आरोपी छात्र पर सीबीआई को पहले से शक था. सीबीआई सितंबर से ही उसपर नजर रख रही थी.

    आरोपी छात्र की तीन दिन की रिमांड शनिवार को पूरी हो रही है. उसे आज दोपहर 2 बजे जुविनाइल कोर्ट में पेश किया जाएगा. सीबीआई क्राइम सीन रिक्रिएट करना चाहती है. इसके लिए छात्र को और कुछ दिनों के लिए रिमांड पर लिया जा सकता है.

    बस कंडक्टर की अर्जी पर 16 नवंबर को होगी सुनवाई
    मामले में पहले गुरुग्राम पुलिस ने स्कूल के बस कंडक्टर को गिरफ्तार किया था. लेकिन, सीबीआई की जांच में केस में नया मोड़ आया. 11वीं के छात्र की गिरफ्तारी के बाद बस कडंक्टर अशोक कुमार को क्लीन चिट मिल गई है. अशोक के वकील ने शुक्रवार को जमानत की अर्जी दाखिल की है. इसपर 16 नवंबर को सुनवाई होगी.अशोक के पिता बोले- पुलिस अधिकारियों पर करेंगे केस
    अशोक कुमार के पिता अमीरचंद ने बताया, “सीबीआई की जांच में मामला साफ हो चुका है. मेरे बेटे को पुलिस ने बलि का बकरा बनाया था. हम गुरुग्राम पुलिस और एसआईटी अफसरों के खिलाफ केस दायर करेंगे.” उन्होंने बताया, “इन लोगों ने मेरे बेटे को बहुत टॉर्चर किया. उसे नशे का डोज दिया गया, जिससे उसने मीडिया के सामने वो जुर्म कबूल लिया, जो उसने किया ही नहीं.” अमीरचंद ने पुलिस अफसरों पर केस करने के लिए गांववालों से आर्थिक मदद मांगी है.

    प्रद्युम्न के पिता ने कहा- पिंटो से भी हो पूछताछ
    उधर, प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने इस केस में रायन इंटरनेशनल स्कूल के मालिक पिंटो पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने सीबीआई से पिंटो से भी पूछताछ करने की मांग की है. साथ ही उन्होंने आरोपी छात्र को बालिग की तरह व्यवहार करने को कहा है और उसके लिए फांसी की सजा की मांग की है.

    परीक्षा टालने के लिए वारदात को दिया अंजाम
    सीबीआई की थ्योरी के मुताबिक, आरोपी छात्र ने परीक्षा टालने की वजह से इस वारदात को अंजाम दिया था. सीबीआई का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपी चाकू ले जाते दिखाई दिया है. आरोपों के अनुसार आरोपी छात्र उस समय बाथरूम में कुछ कर रहा था. उसी समय उसकी नजर प्रद्युम्न ठाकुर पर पड़ी. उसने चाकू निकाला और प्रद्युम्न का गला काट दिया. इस दौरान प्रद्युम्न का यौन शोषण नहीं हुआ था.

    बाकी छात्रों को पहले ही दे दी थी स्कूल बंद होने की सूचना
    पकड़े गए छात्र के साथ पढ़ने वाले दूसरे लड़कों ने भी कुछ हैरान करने वाले गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोपी छात्र के सहपाठियों के मुताबिक, वह पढ़ने में बहुत कमजोर है. परीक्षा नजदीक थी. इसके पहले पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग होने वाली थी. आरोपी छात्र दोनों को टालना चाहता था. उसने क्लास में पहले ही बता दिया था कि वे परीक्षा की तैयारी न करें, क्योंकि स्कूल बंद होने वाले हैं. दोस्तों के आरोपों में कितनी सच्चाई है पुलिस और सीबीआई इसकी जांच कर रही है.

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    प्रद्युम्न मर्डर केस: अब पुलिस अफसरों पर केस करेगा बस कंडक्टर का परिवार

  • एनजीटी 14 नवंबर तक शहर में सभी निर्माण गतिविधियों को रोकता है

    एनजीटी 14 नवंबर तक शहर में सभी निर्माण गतिविधियों को रोकता है

     

     

    राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गुरुवार को क्षेत्र में खराब हवा की गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली और एनसीआर में 14 नवंबर तक सभी निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

    स्थिति को नियंत्रित करने की दिशा में निष्क्रियता के संबंध में दिल्ली सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों पर रैपिंग करते हुए, एनजीटी के अध्यक्ष स्वंतेर कुमार के नेतृत्व में एक पीठ ने कहा, “पूरे दिल्ली-एनसीआर में सभी निर्माण गतिविधियों को इसके लिए प्रतिबंधित है। किसी भी प्रकार का निर्माण किसी भी व्यक्ति, निजी या सरकार द्वारा नहीं किया जाएगा हालांकि, उन दिनों के लिए कि निर्माण प्रतिबंधित है, मजदूरों को उनकी मजदूरी से इनकार नहीं किया जाएगा। ”

    उत्सर्जन की रिलीज

    एनजीटी ने ईंट भट्टों और उद्योगों के संचालन पर भी प्रतिबंध लगा दिया है जो उत्सर्जन जारी करते हैं। इसके अलावा, ग्रीन पैनल ने सभी नागरिक निकायों और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को अधिकारियों की टीमों के गठन के लिए निर्देशित किया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके संबंधित अधिकार क्षेत्र में कचरे को जलाना जरूरी नहीं है।

    इसके अतिरिक्त, पीठ ने कहा: “हम यह निर्देश देते हैं कि पीएम 10 को 600 से अधिक पानी मिलते समय पानी की छिड़काव होनी चाहिए। छिड़काव के बाद नियमित रूप से सड़कों की सफाई करनी चाहिए, जिससे कि कणों का फिर से उगना न पड़े।”

    ट्राइब्यूनल भी 2016 में पारित किए गए दिशा-निर्देशों का पालन न करने के लिए सभी अधिकारियों पर भारी रूप से नीचे आ गया। “ट्रिब्यूनल ने 2016 में विस्तृत फैसले पारित कर दिया था, स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक कदम उठाए जा रहे थे कि सावधानी बरतें प्रदूषित परिवेश वायु गुणवत्ता 2017 में दोहराई नहीं गई है। हालांकि, यह अप्रत्याशित और गैर अनुपालन रहता है। ”

    नागरिक निकायों को ऊपर खींच लिया

    नागरिक निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों पर लटके, ग्रीन पैनल ने कहा, “आपने पिछले 10 दिनों में कौन से दिशाएं पारित की हैं? क्या पापों ने पाप किया है कि उन्हें इस तरह हवा में श्वास लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए? ”

    “हमें यह मानने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि सभी सरकारें और अधिकारी अपने वैधानिक कार्यों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं। बैठकों की बैठकों, पत्र लिखने और गैर-प्रदर्शन के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराते हुए पर्यावरणीय आपातकाल के दौरान शायद ही कोई बहाना हो सकता है। ”

    ट्रकों पर प्रतिबंध

    ट्रिब्यूनल ने राजधानी में रेल और सीमेंट जैसे निर्माण सामग्री ले जाने वाले ट्रकों के चलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

    इसके अतिरिक्त, उसने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि फसल के अवशेष को जलाया जाए और संबंधित सरकारों से किसानों को पर्याप्त प्रोत्साहन देने के लिए कहा गया है। यह भी सभी राज्यों को परिवेश वायु की गुणवत्ता में सुधार के क्रम में वर्गीकृत कार्य योजना का अनुपालन करने का निर्देश दिया।

  • गुजरात: राहुल ने अक्षरधाम मंदिर से चुनाव अभियान की शुरुआत की

    गुजरात: राहुल ने अक्षरधाम मंदिर से चुनाव अभियान की शुरुआत की

     

     

    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तरी गुजरात में अपने
    चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत शनिवार को गुजरात के गांधीनगर के प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर की यात्रा के साथ की.

    अक्षरधाम मंदिर स्वामी नारायण पंथ का है और पटेल समुदाय में इसके काफी अनुयायी हैं. कांग्रेस विधानसभा चुनाव के पहले इस समुदाय को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है. प्रदेश में विधानसभा चुनाव दो चरण में नौ दिसंबर और 14 दिसंबर को होने हैं.

    राहुल शनिवार सुबह गांधीनगर पहुंचे और अक्षरधाम मंदिर गए. उन्होंने मंदिर में भगवान स्वामीनारायण की पूजा अर्चना की और अपना तीन दिवसीय दौरा शुरू किया. इस यात्रा में वो छह जिलों का दौरा करेंगे.

    बीजेपी ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि राहुल गांधी चुनाव के पहले हिंदू मंदिरों में जा रहे हैं ताकि वोट हासिल किए जा सकें.उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा, ‘राहुल गांधी क्यों चुनावों के पहले मंदिरों की यात्रा कर रहे हैं. लोग उनके इरादे जानते हैं कि वो ऐसे हथकंडों से वोट हासिल करना चाहते हैं. उनका भक्ति के प्रति कोई झुकाव नहीं है क्योंकि अपने पहले की यात्राओं के दौरान राहुल गांधी कभी किसी मंदिर में नहीं गए.’ पटेल ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि कांग्रेस अपनी छद्म धर्मनिरपेक्षता को छोड़ दे और मुख्यधारा हिन्दुत्व का सम्मान करे, लेकिन वोट हासिल करने के लिए उनके हथकंडे गुजरात में सफल नहीं होंगे.’ कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि लोग बीजेपी को सबक सिखाएंगे क्योंकि वो मंदिर जाने का विरोध कर रही है.

    कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा, ‘क्या किसी के पास भक्ति का पेटेंट है? वो लोग मंदिर की यात्रा का विरोध कर रहे हैं. गुजरात के लोग उन्हें सबक सिखाएंगे.’ उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी जी हिंदू मंदिरों के अलावा जैन मंदिर और गुरुद्वारे भी गए हैं. हम धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते हैं.’ राहुल गांधी शनिवार शाम बनासकांठा जिले में प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर जाएंगे.

  • कैंब्रिज विश्वविद्यालय के क्लब में महिलाओं को प्रवेश के लिए वोट

    कैंब्रिज विश्वविद्यालय के क्लब में महिलाओं को प्रवेश के लिए वोट

     

     

    अपने 180 साल के इतिहास में पहली बार
    कैंब्रिज विश्वविद्यालय के एक पारंपरिक प्राइवेट मेंबर क्लब ने महिला सदस्यों को अनुमति देने के लिए वोट किया है. प्रसिद्ध पिट क्लब में केवल पुरुषों की भागीदारी है.

    पिट क्लब 1835 में शुरुआत के बाद से केवल पुरुषों के लिए खुला है. औपचारिक रूप से चुनाव के आधार पर प्रवेश होता है.

    अबतक महिलाएं सहयोगी सदस्यों के साथ कैंपस के क्लबहाउस के कार्यक्रम में जा सकती थीं लेकिन अपनी मर्ज़ी से उसमें शिरकत नहीं कर सकती थीं.

    छात्रों के अखबार ‘वर्सिटी’ के मुताबिक, क्लब ने इस सप्ताह पुष्टि कर दी कि वह अब महिलाओं के लिए खुला है जिसका मतलब है कि उन्हें सदस्य चुने जाने का बराबर का अधिकार होगा.क्लब ने एक बयान में कहा, ‘विश्वविद्यालय पिट क्लब के अधिकतर रेजिडेंट सदस्यों ने महिला सदस्यों को चुनने के लिए वोट किया. क्लब अपनी पहली महिला सदस्यों का स्वागत करने के लिए तैयार है.’

  • ‘कांग्रेसी वित्त मंत्रियों की चिट्ठी से GST की खामियां बेनकाब’

    ‘कांग्रेसी वित्त मंत्रियों की चिट्ठी से GST की खामियां बेनकाब’

     

     

    पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस-शासित राज्यों के वित्त मंत्रियों की लिखी चिट्ठी से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के डिजायन और कार्यान्वयन में संरचनात्मक खामियों का खुलासा हुआ है.

    ट्वीट्स की एक सीरीज में उन्होंने कहा कि इस पत्र से गुवाहाटी में होने वाली जीएसटी बैठक का एजेंडा तैयार हुआ है, इस बैठक में जीएसटी दरों में बदलाव की उम्मीद है.

    उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के पास बदलाव की मांग स्वीकार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है. गुजरात चुनावों को धन्यवाद कि उसने सरकार को जीएसटी की खामियों पर विपक्ष और विशेषज्ञों की बात सुनने को मजबूर किया.

    चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने जीएसटी बिल पर राज्य सभा में चर्चा और मतदान से परहेज किया. अब वो सार्वजनिक मंच पर या जीएसटी परिषद में इस पर चर्चा से परहेज नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि कांग्रेसी वित्त मंत्रियों ने जीएसटी परिषद की बैठक में इसके बदलाव के लिए जोर डाला है. आगरा, सूरत, तिरुपुर और अन्य केंद्रीय शहर इसे देख रहे हैं.

  • शुक्रिया गुजरात! चुनाव की वजह से कम हुई जीएसटी की दरें: चिदंबरम

    शुक्रिया गुजरात! चुनाव की वजह से कम हुई जीएसटी की दरें: चिदंबरम

     

     

    पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने गुजरात चुनाव को देखते हुए जीएसटी की दरों में कटौती की है. जीएसटी काउंसिल द्वारा 178 सामानों को 28 फीसदी से 18 फीसदी तक लाने पर उन्होंने कहा कि इसे ‘कैप्ड’ किया गया है.

    उन्होंने कहा, शुक्रिया गुजरात. आपके चुनाव ने वह कर दिया जो संसद और लोगों का सामान्य ज्ञान नहीं कर पाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का अलगा लक्ष्य इसे एक रेट में लाना है.

    उन्होंने कहा, जीएसटी रेट्स को 18 फीसदी पर लाया जाना यह बताता है कि सरकार को ये चीजें देर से समझ में आईं. कांग्रेस सही साबित हुई. मैं सही साबित हुआ. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मांग की थी कि जीएसटी के अंतर्गत इन सभी टैक्स को 18 फीसदी के स्लैब में रखा जाए.

    इससे पहले चिदंबरम ने कहा था कि कांग्रेस-शासित राज्यों के वित्त मंत्रियों की लिखी चिट्ठी से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के डिजायन और कार्यान्वयन में संरचनात्मक खामियों का खुलासा हुआ है. गुजरात चुनावों को धन्यवाद कि उसने सरकार को जीएसटी की खामियों पर विपक्ष और विशेषज्ञों की बात सुनने को मजबूर किया.