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  • केंद्रीय कर्मचारियों को नई सौगात, सरकार ने HBA की सीमा बढ़ाई

    केंद्रीय कर्मचारियों को नई सौगात, सरकार ने HBA की सीमा बढ़ाई

     

     

    केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने केन्द्रीय कर्मचारियों के लिये हाउस बिल्डिंग एडवांस नियमों में बदलाव किया है. अब वह एक करोड़ रुपये तक की कीमत वाले घर बनाने या खरीदने के लिये 25 लाख रुपये तक का एडवांस ले सकेंगे. इससे पहले यह सीमा तीस लाख रुपए तक के मकान के लिए 7.50 लाख रुपए थी.

    मंत्रालय ने केन्द्रीय कर्मचारियों के लिये आवास हेतु भवन निर्माण के लिये एडवांस राशि जारी करने के नियमों (एचबीए) में बदलाव कर यह सुविधा शुरू की है. मौजूदा व्यवस्था में भवन निर्माण या खरीद के लिये मकान की अधिकतम कीमत 30 लाख रुपये थी और इसके लिये 7.50 लाख रुपये तक का ही एडवांस मिलता था.

    मंत्रालय की ओर से नियमों में संशोधन की आज जारी जानकारी के मुताबिक इससे लगभग 50 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों को लाभ होगा. नये नियमों के मुताबिक पति और पत्नी, दोनों के केन्द्रीय कर्मचारी होने की स्थिति में दोनों को एक साथ या अलग-अलग एडवांस लेने की छूट दी गयी है. इससे पहले सिर्फ पति या पत्नी को ही एडवांस राशि लेने का विकल्प दिया गया था. हालांकि केन्द्रीय कर्मचारी को उसके जीवनकाल में एक ही बार एडवांस राशि लेने का नियम अब भी बरकरार है.

    मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि आवास की बढ़ती जरूरतों को देखते हुये सरकार ने एचबीए नियमों को आसान बनाने की पहल की है. इससे भवन निर्माण क्षेत्र में छायी मंदी से भी उबरने में मदद मिलेगी.ये भी पढ़ें-
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  • आपातकालीन योजना के रूप में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ करने के लिए dips

    आपातकालीन योजना के रूप में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ करने के लिए dips

     

     

    राजधानी में बुधवार को प्राथमिक स्कूलों को बंद करने सहित कड़े उत्सर्जन नियंत्रण उपायों और स्वास्थ्य की सावधानी बरतने के लिए मंगलवार को राजधानी में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया।

    केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता सूचकांक (एएयूआई) 4:00 बजे से 448 था, जिससे यह ‘गंभीर’ हो गया – यह सबसे खराब श्रेणी और चेतावनी के साथ आता है जो स्वस्थ लोगों से भी प्रभावित होता है। विषाक्त हवा

    15 निगरानी स्टेशनों से डेटा का उपयोग करने वाले एएयूआई ने यह भी बताया कि दिल्ली में प्रमुख प्रदूषक थे, जो कि छोटे पीएम -2.5 और मोटे पीएम 10 दोनों के बीच कणिक पदार्थ थे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा में भी गंभीर प्रदूषण हुआ था, जबकि गुरुग्राम में बहुत कम हवा की गुणवत्ता थी।

    सुरक्षित सीमा से परे

    दिल्ली में, हानिकारक पीएम 2.5 का स्तर, जो फेफड़ों में गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी पैदा करने में काफी छोटा होता है, प्रति घन मीटर (ug / m3) 60 माइक्रोग्राम के स्तर पर कई बार होता था। दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण समिति के स्टेशन पर, आनंद विहार में, पीएम2.5 की 7.10 पीएम की एकाग्रता एक बहुत बड़ी 732 ug / m3 या 12 बार सुरक्षित स्तर से अधिक था।

    पीएम 10 के सांद्रण भी 100 डिग्री / एम 3 के मानक से ऊपर थे, आर.के. पुरम स्टेशन 835 ug / m3 के साथ 7.20 पीएम के रूप में रिकॉर्ड किया गया था।

    दिल्लीवासियों को जल्द ही राहत मिलने की संभावना नहीं है, क्योंकि राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनडब्ल्यूएफसी) ने कहा है कि मंगलवार को घने कोहरे को तीन दिन तक जारी रहने की संभावना है, इससे पूर्व में दृश्यता कम हो सकती है क्योंकि मौसम कोहरे के गठन के लिए अनुकूल है।

    मंगलवार को प्रदूषण के स्तर ने ग्रेडिंग रिस्पांस एक्शन प्लान की ‘गंभीर’ श्रेणी के तहत उपायों को लागू करने के लिए पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) को प्रेरित किया, जो पहले से ही लागू है।

    योजना के अनुसार, एनसीआर राज्य सरकारों को सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना होगा और धूल और वाहनों के प्रदूषण पर नीचे दबाना होगा।

    ‘दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता’

    इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने बुधवार को सभी प्राथमिक स्कूलों को बंद करने की घोषणा की।

    विशेषज्ञों ने हालांकि, कहा कि उत्सर्जन को कम करने की दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है। ईपीसीए के एक सदस्य और विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के निर्देशक, सुनीता नारायण ने कहा कि यदि ईपीसीए द्वारा पहले से पहचाने गए और सुझाए गए दीर्घकालीन उपाय लागू नहीं किए गए हैं, तो “हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो सकता”।

  • प्रदूषण से जंग: दिल्‍ली BJP अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने बांटे 1500 मास्‍क

    प्रदूषण से जंग: दिल्‍ली BJP अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने बांटे 1500 मास्‍क

     

     

    दिल्‍ली का दम फुला रहे प्रदूषण से लड़ने के लिए जहां दिल्‍ली सरकार ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू करने की तैयारी कर रही है. वहीं भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष ने भी प्रदूषण से परेशान लोगों को 1500 मास्‍क बांटकर राहत दी.

    दिल्‍ली के कनॉट प्‍लेस में दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने लोगों को मास्‍क बांटने के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए भी जागरुक किया. वहीं शत्रुघ्‍न सिन्‍हा के ट्वीट पर कहा कि वे खुद दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल से 7 महीने से वक्‍त मांग रहे हैं.

    उन्‍होंने कहा कि वे भी सरकार के ही आदमी हैं. वे भी प्रदूषण को लेकर चि‍ंतित हैं. जो भी ट्वीट कर रहे है वे यह पहलू भी देखें. साथ ही तिवारी ने कहा कि पराली जलाने से रोकने के लिए पंजाब सरकार का बजट पास नही किया गया इसपर भी उन्‍होंने ऐसे NGO से बात की है जो पराली के बदले पैसे देने को तैयार है.तो ये सब महज बातें हैं  और सभी राजनीति कर रहे है.

    वहीं स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने केजरीवाल के ऑड-ईवन फॉर्मूले को लागू करने के मसले पर केजरीवाल का सहयोग करने की बात कही. उन्‍होंने कहा कि दिल्ली में अचानक स्थिति गंभीर हो गयी है. स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार इस पर पर्यावरण मंत्रालय से चर्चा कर रहा है.पर्यावरण राज्यमंत्री महेश शर्मा ने इस पर मीटिंग भी बुलाई थी और मंत्रालय इस पर लगातार काम कर रहा है कि इन हालातों को सामान्‍य किया जाए. वहीं केजरीवाल सरकार के ऑड-ईवन फॉर्मूले पर वे बोलीं कि प्रदूषण को कम करने की किसी भी पहल की सराहना होनी चाहिए.

  • गुजरात में 50 से 75 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे: शिवसेना

    गुजरात में 50 से 75 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे: शिवसेना

     

     

    भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने अगले महीने होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव में 50 से 75 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने का निर्णय किया है. यह बात पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने आज कही. शिवसेना ने यह भी कहा कि वह गुजरात में भाजपा सहित किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी.

    उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना ने 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में करीब 40 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन राज्य में अपना खाता नहीं खोल पायी थी जहां भाजपा दो दशक से अधिक समय से सत्ता में है. राज्य में विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं.

    शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य अनिल देसाई ने संवाददाताओं को बताया कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने गुजरात में विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

    उन्होंने कहा, ‘शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हाल में बैठक हुई थी जिसमें निर्णय किया गया कि हम गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. यहां हमारे नेताओं से मशवरे के बाद हमने निर्णय किया है कि हम 50 से 75 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे.’उन्होंने कहा कि पार्टी की राज्य के कई हिस्सों में मौजूदगी है, विशेष रूप से जहां मराठी भाषी लोगों की संख्या अधिक है जैसे दक्षिण गुजरात में. उन्होंने कहा कि दक्षिण गुजरात के अलावा पार्टी सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों में भी अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारेगी.

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  • कभी थे जूनागढ़ के नवाब, पाकिस्तान भागे तो हो गए कंगाल

    कभी थे जूनागढ़ के नवाब, पाकिस्तान भागे तो हो गए कंगाल

     

     

    बंटवारे के बाद जब सरदार वल्लभ भाई पटेल 500 से ज्यादा रियासतों का विलय कर रहे थे. तब सभी शासकों ने एक से बढ़कर एक परेशानियां पैदा कीं. पटेल भी लोहे के बने थे, उनके आगे रियासतों को झुकना ही पड़ा. विलय की शर्त माननी पड़ी. हालांकि कुछ शासकों के मंसूबे कुछ और ही थे. जिन्ना बरगलाने में लगे थे.

    जूनागढ़ के नवाब पाकिस्तान में विलय के आमादा था. जबकि उसके राज्य की बहुसंख्यक हिन्दू जनता भारत में विलय के पक्ष में थी. जूनागढ़ के नवाब ने क्या कुछ नहीं किया लेकिन जब सारी चालें उल्टी पड़ने लगीं तो वह खुद पाकिस्तान भाग गए. जूनागढ़ के ये नवाब थे महाबत खान. आज पाकिस्तान में उन नवाब के परिवार की हालत खराब है. उन्हें गुजारे के तौर पर महीने का जो पैसा मिलता है, वो चपरासी के वेतन से भी कम होता है. केवल 16 हजार रुपए.

    पाकिस्तान से प्रकाशित एक अखबार को दिए इंटरव्यू में नवाब मुहम्मद जहांगीर ने नाराजगी जाहिर की कि आजादी के बाद बंटवारे के समय मोहम्मद अली जिन्ना के साथ हुए समझौते के तहत ही उनका परिवार पाकिस्तान आया था. जूनाग़ढ उस समय हैदराबाद के बाद दूसरे नंबर का सबसे धनवान राज्य था. नवाब अपनी संपत्ति जूनागढ़ में छा़ेडकर पाकिस्तान चले आए थे. यहां तक कि उन्होंने अपनी जूनाग़ढ की संपत्ति के बदले में पाकिस्तान में संपत्ति भी नहीं मांगी, तब भी पाकिस्तान में उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है.

    न मान न सम्मान न किसी गिनती में परिवार
    अब नवाब के परिवार का हाल ये है कि मौजूदा पाकिस्तान सरकार उन्हें अन्य राज परिवारों के समान न तो मान-सम्मान देती है औऱ न किसी गिनती में गिनती है. खटास इस बात की भी है कि अपने जिस वजीर के उकसावे में आकर वो पाकिस्तान से भागे, उस वजीर भुट्टो का परिवार पाकिस्तान का मुख्य राजनीतिक परिवार बन गया. वैसे जूनागढ़ के भारत में विलय का मामला भी कोई कम चर्चित नहीं रहा है.

    जूनागढ़ के भारत में विलय की कहानी
    जूनागढ़ में नवाब मुहम्मद महाबत खान और दीवान शाह नवाज भुट्टो की मंशा हिन्दू बहुसंख्यक आबादी के बावजूद पाकिस्तान में विलय की थी. मोहम्मद अली जिन्ना ने उन्हें पाकिस्तान में विलय के लिए बड़े बड़े सपने दिखाए थे.

    जिन्ना के साथ गुपचुप गठजोड़ की कहानी
    जिन्ना पेपर्स के अनुसार जूनागढ़ के दीवान और जुल्फिकार अली भुट्टो के पिता शाह नवाज ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को 19 अगस्त को पत्र लिखा, हम जूनागढ़ के पाकिस्तान में मिलाए जाने के लिए औपचारिक स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं. खुशी होगी कि अगर आप इसे जल्दी से जल्दी अमलीजामा पहना सकें (पृष्ठ 548). इस मामले में देरी होते देख उन्होंने चार सितंबर को जिन्ना को फिर दिल्ली में उनके वादे को याद दिलाते हुए पत्र लिखा, पाकिस्तान नहीं चाहेगा कि जूनागढ़ उससे छिटके.

    पाक ने कर दी थी विलय की घोषणा
    जिन्ना ने जवाब दिया, कल हम कैबिनेट मीटिंग में इस बारे में विचार विमर्श करेंगे. तय नीति बनाएंगे. पाकिस्तान ने आठ सिंतबर को पाकिस्तान-जूनागढ़ समझौते की घोषणा की, जिसमें ये कहा गया था कि जूनागढ़ के शासक पाकिस्तान में विलय को तैयार हैं. नेहरू ने विरोध करते हुए 12 सितंबर को लियाकत अली खान को पत्र लिखा और कहा कि चूंकि जूनागढ़ की 80 फीसदी आबादी हिन्दू है और इस बारे में रायशुमारी में उनकी राय नहीं ली गई है, लिहाजा ये मामला जूनागढ़ के लोगों की सहमति के बगैर नहीं उठाया जा सकता. भारत सरकार जूनागढ़ के पाकिस्तान में विलय को सहमति नहीं देगी. विलय का कोई संवैधानिक आधार नहीं बनता. ये मामला जूनागढ़ और भारत के बीच बनता है.

    कार्रवाई कैसे हो 
    इसके बावजूद 15 सितंबर 1947 को जूनागढ़ ने पाकिस्तान के साथ विलय को औपचारिक तौर पर स्वीकार कर लिया. बस इसके बाद भारतीय फौजों की रवानगी शुरू हो गई. भुट्टो की समझ में आ गया कि खतरा है. उन्होंने 16 सितंबर को लियाकत से मदद मांगते हुए कहा, कम से कम हमें ये तो बताइए कि आप हमें किस तरह की मदद दे रहे हैं.हमें किस तरह से कार्रवाई करनी चाहिए. वहीं भारत जूनागढ़ में सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार था. दिल्ली में केवल ये मुद्दा था कि कार्रवाई कैसे की जाए.

    माउंटबेटन का जवाब 
    एचवी हडसन की किताब ‘द ग्रेट डिवाइड’ के अनुसार, गर्वनर जनरल माउंटबेटन ने किंग को रिपोर्ट दी. उन्होंने लिखा, जूनागढ़ के मामले पर विचार के लिए शाम को एक कैबिनेट मीटिंग में विचार किया जाएगा. हालांकि सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र जवाब है. जिन्ना ने भारतीय फौजों की हलचल की शिकायत माउंटबेटन से की. माउंटबेटन ने जो जवाब दिया, उसका सार यही था कि पाकिस्तान जो कर रहा है, वो भारत सरकार के साथ उसके समझौते का उल्लंघन है.

    जूनागढ़ की 80 फीसदी जनता की राय
    जूनागढ़ की 80 आबादी के इस विलय पर जो रायशुमारी हुई थी, उसमें 80 फीसदी जनता भारत के साथ जाने को तैयार थी. पाकिस्तान निरुत्तर हो गया. 25 सितंबर को जूनागढ़ मुक्त करा लिया गया. पुस्तक सरदार लेटर्स के अनुसार, बंबई में उस दिन स्वतंत्र जूनागढ़ की अस्थाई सरकार गठित की गई. वीपी मेनन की पुस्तक इंटीग्रेशन आफ इंडिया इनस्टेड के अनुसार, हालात और दबाव के आगे भुट्टो टूटते जा रहे थे. पाकिस्तान की ओर से कोई खास पहल होती नहीं दिख रही थी.

    09 नवंबर भारतीय फौजों ने कब्जा कर लिया
    इन्हीं सब परिस्थितियों के बीच 09 नवंबर को भारतीय फौजें जूनागढ़ में प्रवेश कर गईं और उन्हें जूनागढ़ पर कब्जा कर लिया. इस तरह जूनागढ़ आजाद हो गया. हालांकि, पुख्ता मुहर 20 फरवरी 1948 को लगी, जब वहां भारत सरकार ने जनमत संग्रह कराया. कुल 2,01, 457 वोटरों में 1,90,870 ने वोट डाले. पाकिस्तान के पक्ष में केवल 91 वोट पड़े.

  • पाक नागरिक के लिए फिर पिघला सुषमा का दिल, किया वीजा देने का ऐलान

    पाक नागरिक के लिए फिर पिघला सुषमा का दिल, किया वीजा देने का ऐलान

     

     

    विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारत में लीवर प्रतिरोपण कराने के लिये एक पाकिस्तानी नागरिक को वीजा देने करने की घोषणा की.

    सुषमा स्वराज ने यह घोषणा ट्वीट के जरिये की. उनकी यह घोषणा तब सामने आई है जब कराची स्थित मोहम्मद तल्हा नामक व्यक्ति ने भारत में अपने पिता का इलाज कराने के लिये वीजा प्रदान करने की मांग की थी.

    सुषमा ने ट्वीट किया, ‘हमने आपके पिता शमीम अहमद के लिये चिकित्सा वीजा मंजूर कर दिया है.’ पिछले सप्ताह तल्हा ने ट्वीट के माध्यम से सुषमा स्वराज से आग्रह किया था कि भारत के अस्पताल में उनके पिता के लीवर के उपचार के लिये वीजा मंजूर किया जाए .

    उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के संबंधों में खटास के बावजूद चिकित्सा वीजा के लिये सम्पर्क करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के प्रति सुषमा स्वराज का रुख सहानुभूतिपूर्ण रहा है.ये भी पढ़ें-
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  • असम में कांग्रेस विधायक पर मेहरबान जेलर निलंबित

    असम में कांग्रेस विधायक पर मेहरबान जेलर निलंबित

     

     

    असम के एक जेलर को निलंबित कर दिया गया. जेलर पर आरोप है कि उसने विपक्षी नेता देवव्रत सैकिया और कांग्रेस विधायक रूपज्योति कुर्मी को हिरासत में लिए गए आरटीआई कार्यकर्ता अखिल गोगोई से मुलाकात करने और उसके साथ तस्वीरें खिंचाने की अनुमति दी थी.

    जेल महानिरीक्षक द्वारा जारी बयान के मुताबिक, डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल के जेलर अरूप कुमार पतंगिया को बुधवार से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

    बयान में कहा गया कि डिब्रूगढ़ के उपायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर जेलर के खिलाफ कार्रवाई की गई. जेल के अधीक्षक विकास विजय दास के खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई की गई.

    अधिकारिक बयान में कहा गया कि जेल एक निश्चित सीमा से बाहर है और असम जेल नियमावली के नियम 26 के अंतर्गत वहां किसी भी व्यक्ति के अनधिकृत प्रवेश पर प्रतिबंध है. इस क्षेत्र के अंदर ऐसे किसी व्यक्ति के साथ फोटो खिंचाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता.मैरिएनी के विधायक सैकिया और कुर्मी को डिब्रूगढ़ के पुलिस उपायुक्त ने 1 नवंबर को गोगोई के साथ साक्षात्कार की अनुमति दी थी. वह लगभग 45 मिनट के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के कैदी से मिले और साक्षात्कार के बाद नेताओं ने जेल के अंदरूनी परिसर का दौरा किया, जहां उन्होंने फोटो भी खिंचाई.

  • दिल्ली में फिर से लागू होगा ऑड-ईवन, जानें क्या है पूरा प्लान

    दिल्ली में फिर से लागू होगा ऑड-ईवन, जानें क्या है पूरा प्लान

     

     

    दिल्ली में जहरीले स्मॉग और प्रदूषण से निपटने के लिए एक बार फिर ऑड-ईवन लागू होने जा रहा है. दिल्ली सरकार ने इसपर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. लेकिन, सूत्रों के मुताबिक, 13 से 17 नवंबर तक दिल्ली में ऑड-ईवन लागू हो सकता है.

    सूत्रों के मुताबिक, ऑड-ईवन पर फैसला लेने के लिए गुरुवार शाम को परिवहन विभाग की अहम मीटिंग होने वाली है. इस मीटिंग में ऑड-ईवन के नए नियमों को मंजूरी दी जा सकती है.

    दिल्ली में नवंबर और दिसंबर में प्रदूषण काफी बढ़ जाता है. सरकार इस बार ऑड-ईवन को नए नियमों के साथ लागू करने की तैयारी में है. बताया जा रहा है कि इस बार दो-पहिया वाहनों को छूट नहीं दी जाएगी.

    प्रदूषण से निपटने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र और पड़ोसी राज्यों की सरकारों से सहयोग की अपील की है. गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “जब तक पराली में आग लगाना बंद नहीं होगा, तब तक दिल्ली गैस चैंबर बनी रहेगी. लोगों का दम घुटता रहेगा.”केजरीवाल ने कहा, “स्मॉग से लोगों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं. हमें इस मसले पर राजनीति करने से बचना चाहिए. अगर केंद्र सरकार, यूपी, पंजाब और हरियाणा सरकार एक साथ आ जाए और मिलकर काम करे, तो इस भयानक स्थिति से निपटने का रास्ता निकाला जा सकता है.”

    उन्‍होंने कहा कि दिल्‍ली में ट्रकों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है. सिर्फ कुछ जरूरत की चीजें लाने वाले ट्रकों को ही दिल्‍ली में एंट्री की इजाजत दी गई है. इससे दिल्‍ली की जनता को कुछ परेशानी जरूर होगी.

    केजरीवाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बयान पर भी कहा कि किसानों पर जुर्माना लगाने से कुछ नहीं होगा. बता दें कि हरियाणा के सीएम ने कहा था कि फसल को आग लगाने के चलते 250 किसानों पर जुर्माना लगाया गया है.

    बता दें कि ‘ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ (AIIMS) के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने दिल्ली के स्मॉग की तुलना 1952 की ‘ग्रेट स्मॉग ऑफ लंदन’ से की है. उन्होंने स्मॉग को ‘साइलेंट किलर’ बताया है. उनके मुताबिक, इस जहरीले स्मॉग से दिल्ली के 30 हजार लोगों को जान का खतरा है.

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  • चीनी बिल्ली ने वैश्विक विनिर्माण चूहे को कसकर पकड़ रखा है: राहुल गांधी

    चीनी बिल्ली ने वैश्विक विनिर्माण चूहे को कसकर पकड़ रखा है: राहुल गांधी

     

     

    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज विनिर्माण क्षेत्र में चीन की प्रभावशाली मौजूदगी की सराहना करते हुए कहा कि चीनी बिल्ली ने वैश्विक विनिर्माण चूहे को कसकर पकड़ रखा है लेकिन भारत को इस तरह का मॉडल अपनाने की जरूरत नहीं क्योंकि वहां लोग बोलने या सवाल उठाने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं.

    नोटबंदी का एक साल होने के मौके पर फाइनेंशियल टाइम्स में अपने लेख में राहुल ने यह भी कहा कि ब्लू-कॉलर नौकरियों पर चीन का वैश्विक एकाधिकार अन्य देशों के लिए बुनियादी चुनौती है, जिससे लाखों मजदूर वंचित और नाराज हुए जो अपनी नाराजगी मतपत्र के जरिये निकालते हैं. फिर चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए वोट की बात हो या ब्रेक्जिट या डोनाल्ड ट्रंप के लिए.

    कम्युनिस्ट नेता तंग शियाओपिंग का हवाला देते हुए राहुल ने लिखा कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि चूहे को पकड़ लेने वाली बिल्ली का रंग क्या है. आज चीनी बिल्ली ने वैश्विक निर्माण के चूहे को कसकर पकड़ लिया है.

    राहुल ने कहा कि 1990 के दशक में दुनिया के माल में चीन का उत्पादन महज तीन प्रतिशत था जो अब करीब 25 फीसदी है.उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि चीन फिलहाल हर रोज औसतन 50 हजार नौकरियों का सृजन करता है वहीं मोदी सरकार में भारत केवल 500 नौकरी पैदा कर पाता है.

    राहुल ने कहा, ‘‘इस विशेषता के साथ एक निर्मम नुकसान भी है. चीन के लोग बोलने के लिए, असहमति जताने के लिए या सवाल खड़ा करने के लिए आजाद नहीं हैं और जो ऐसा करते हैं उन्हें तत्काल कड़ी सजा दे दी जाती है. भारत को यह मॉडल नहीं अपनाना चाहिए.

  • कुम्भ से पहले इलाहाबाद के तीनों स्टेशन आ सकते हैं नॉर्थ सेंट्रल रेलवे में

    कुम्भ से पहले इलाहाबाद के तीनों स्टेशन आ सकते हैं नॉर्थ सेंट्रल रेलवे में

     

     

    संगम नगरी इलाहाबाद में जनवरी 2019 में आयोजित होने वाले कुम्भ से पहले शहर के अन्तर्गत आने वाले प्रयाग जंक्शन, प्रयाग घाट और इलाहाबाद सिटी स्टेशन नार्थ सेन्ट्रल रेलवे में शामिल किए जा सकते हैं. इन स्टेशनों को नॉर्थ सेन्ट्रल रेलवे में शामिल करने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भेजा जा चुका है. इस बात की जानकारी डीआरएम इलाहाबाद मण्डल संजय कुमार पंकज ने दी है. उन्होंने कहा है कि रेल मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद इन स्टेशनों को इलाहाबाद मण्डल में शामिल कर लिया जाएगा.

    उन्होंने कहा है कि इन स्टेशनों को इलाहाबाद मण्डल में शामिल करने को लेकर रेल मंत्रालय का भी सकारात्मक रुख है, और इस पर जल्द फैसला भी हो सकता है. उन्होंने कहा है कि तीनों स्टेशनों के इलाहाबाद मण्डल में शामिल करने से माघ मेला, अर्ध कुम्भ और कुम्भ जैसे बड़े आयोजनों में रेल यात्रियों के लिए स्पेशल ट्रेनों का संचालन करने में काफी सहूलियत होगी. इसके साथ ही जिला प्रशासन और राज्य सरकार को भी तीन अलग-अलग रेलवे जोन से भी समन्वय नहीं स्थापित करना पड़ेगा.

    प्रयाग जंक्शन और प्रयाग घाट स्टेशन उत्तर रेलवे के लखनऊ मण्डल के अन्तर्गत आते हैं, जिनके अधिकारी लखनऊ में बैठते हैं. वहीं इलाहाबाद सिटी रेलवे स्टेशन पूर्वोत्तर रेलवे के अन्तर्गत आता है, जिसके बड़े अधिकारी वाराणसी में मण्डल प्रबन्धक कार्यालय में बैठते हैं. डीआरएम के मुताबिक तीनों स्टेशनों के एनसीआर में शामिल होने से यहां से ट्रेनों के संचालन में भी काफी सुविधा होगी और यात्रियों को भी ट्रेनों के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी.