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  • भारत के इन दो राज्यों में है सबसे ज्यादा रोजगार के मौके

    भारत के इन दो राज्यों में है सबसे ज्यादा रोजगार के मौके

     

     

    देश में रोजगार के सबसे ज्यादा मौके बेंगलुरू और दिल्ली में है. बेंगलुरू में जहां आईटी उद्योग में सबसे ज्यादा मौके हैं तो दिल्ली में एमबीए और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में सबसे ज्यादा रोजगार है. टैलेंट प्लेटफार्म यूथ4वर्क द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई है.

    इस सर्वेक्षण में बताया गया कि देश में आईटी उद्योग में सबसे ज्यादा मौके बेंगलुरू (35 फीसदी), हैदराबाद (23 फीसदी), दिल्ली (22.5 फीसदी), अहमदाबाद (19 फीसदी), मुंबई (15 फीसदी)और चेन्नई (11 फीसदी) में है. जबकि एमबीए और ई-कॉमर्स क्षेत्रों में दिल्ली (37 फीसदी), मुंबई (28 फीसदी), बेंगलुरू (21 फीसदी), अहमदाबाद (17 फीसदी), चेन्नई (14 फीसदी) और हैदराबाद (12 फीसदी) में सबसे ज्यादा नौकरियां है.

    सर्वेक्षण में बताया गया कि देश का ई-कॉमर्स उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और जल्द ही यह अमेरिका को पीछे छोड़ देगा और अगले दस सालों में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ई-कॉमर्स अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा. इस दौरान देश का ई-कॉमर्स उद्योग 30 फीसदी की रफ्तार से बढ़ेगा. आईटी और ई-कॉमर्स उद्योग में तेजी का प्रमुख कारण इंटरनेट का बढ़ता प्रयोग है.

    सर्वेक्षण में आगे कहा गया कि आईटी क्षेत्र में बढ़ोतरी के साथ इंजीनियर और कंप्यूटर साइंस के विशेषज्ञों की शिक्षा के क्षेत्र में भी मांग बढ़ेगी. आईटी क्षेत्र में 35.6 फीसदी की दर से बढ़ोतरी की उम्मीद है. देश का आईटी क्षेत्र दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी निर्यातक है.यूथ4वर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंचित जैन ने कहा, “प्रौद्योगिकी हमेशा बदलती है और उन्नत होती जाती है, इसलिए कर्मचारियों को भी समय-समय पर अपना कौशल बढ़ाने की जरूरत है.”

  • GST बैठक स्थल पर प्रदर्शन कर रहे गोगोई, दूसरे कांग्रेसी नेता हिरासत में

    GST बैठक स्थल पर प्रदर्शन कर रहे गोगोई, दूसरे कांग्रेसी नेता हिरासत में

     

     

    असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई और अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को गुरुवार प्रदेश पुलिस ने एक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार कर लिया. ये लोग यहां एक होटल में चल रही जीएसटी परिषद की बैठक का विरोध कर रहे थे. गोगोई के अलावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा, नेता विपक्ष देबब्रत सैकिया और पूर्व मंत्री रकीबुल हुसैन को भी गिरफ्तार किया गया.

    गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त हिरेन चंद्र नाथ ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को बैठक स्थल के पास लागू धारा 144 के उल्लंघन पर गिरफ्तार किया गया. नाथ ने पीटीआई को बताया कि कांग्रेस जीएसटी परिषद के सामने प्रदर्शन करना चाहती थी. इसलिये उन्हें रोकना पड़ा. गिरफ्तार व्यक्तियों को बाद में निजी मुचलके पर जमानत दे दी गयी.

    कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी ने शहर में होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक का स्वागत किया था लेकिन उसके नेता और कार्यकर्ता 28 फीसदी के कर ढांचे को पूरी तरह खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे.

    प्रवक्ता ने कहा कि सरकार का व्यवहार स्तब्धकारी था. उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जाहिर की कि जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त गोगोई को पुलिस गिरफ्तारी के बाद सामान्य बस में लेकर गई. गुवाहाटी में आज से एक लग्जरी होटल में जीएसटी परिषद की दो दिवसीय बैठक हो रही है.

  • ओपिनियन पोल: गुजरात में इस बार भी खिलेगा कमल

    ओपिनियन पोल: गुजरात में इस बार भी खिलेगा कमल

     

     

    गुजरात विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर है. जीत के लिए बीजेपी और कांग्रेस पूरी ताकत झोंक चुकी हैं. गुजरात की सत्ता में बीजेपी 22 सालों से काबिज है हालांकि, इस बार बीजेपी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे के बिना चुनाव में उतरी है. ऐसे में गुजरात चुनाव उसके लिए नाक का सवाल बन गया है. लेकिन अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी की तिकड़ी बीजेपी के लिए सिरदर्द बनी हुई है. दूसरी ओर कांग्रेस भी गुजरात की सत्ता को वापस हासिल करने के लिए अपनी पूरे दमखम के साथ जुटी हुई है.

    कहा तो यहां तक जा रहा है कि ये चुनाव 2019 के लोकसभा चुनाव की नई इबारत लिखेगा. ऐसे में कौन बनेगा सरताज और किसके हौसले होंगे पस्त, सबकी निगाहें इस पर टिकी हुई हैं. बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने वाले हैं. चुनाव की वोटिंग 9 और 14 दिसंबर को होगी जबकि चुनाव के नतीजे का ऐलान 18 दिसंबर को होगा.

    कम हो सकती हैं बीजेपी की सीटें
    इसी बीच एक न्यूज चैनल के लिए लोकनीति और सीएसडीएस ने ओपिनियन पोल किया है. इस ओपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी फिर से गुजरात में सत्ता हासिल करेगी. हालांकि उसे कई मुद्दों की वजह से नुकसान भी उठाना पड़ेगा जिससे उसकी सीटों में कमी आएगी. बीजेपी को चुनाव में 113-121 सीटें मिल सकती हैं. वहीं दूसरी बड़ी पार्टी कांग्रेस को 58-64 सीटें मिलने के आसार हैं.वोट शेयर में भी बीजेपी आगे
    इस ओपिनियन पोल के अनुसार महिलाओं का झुकाव सबसे ज्यादा बीजेपी की ओर है. अगर वोट शेयर की बात करें तो इस ओपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी को 47 फीसदी जबकि कांग्रेस को 41 फीसदी वोट मिलने की संभावना दिखाई पड़ रही है.

    सीएम के रूप में रूपाणी पहली पसंद
    गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लोगों की पहली पसंद विजय रूपाणी ही हैं. सर्वे के मुताबिक उन्हें 18 फीसदी लोग पसंद करते हैं जबकि आनंदीबेन पटेल को केवल 7 फीसदी लोग ही पसंद करते हैं.

    इस सर्वे से ये साफ हो गया है कि भले ही कांग्रेस का जीतने का सपना साकार न हो पाए लेकिन उसके वोट प्रतिशत में पिछले साल के मुकाबले इजाफा जरूर होगा. वहीं बीजेपी की सीटें पिछले साल की अपेक्षा कम जरूर होंगी लेकिन इस बार का गुजरात में जीत का सेहरा उसी के सिर बंधेगा.

  • रोज़गार सृजन नहीं हुआ तो भावी पीढ़ी माफ़ नहीं करेगी: गंगवार

    रोज़गार सृजन नहीं हुआ तो भावी पीढ़ी माफ़ नहीं करेगी: गंगवार

     

     

    श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने बुधवार को कहा कि यदि हम
    रोज़गार सृजन के कदम उठाने में असफल रहे तो भावी पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी. उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है और प्रत्येक युवा को रोज़गार चाहिए.

    गंगवार ने कहा, ‘यदि रोज़गार सृजन की दिशा में तुरंत आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी.’ गंगवार बुधवार को नोएडा स्थित वीवी गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान में रोजगार सृजन रणनीति पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

    केन्द्रीय श्रम मंत्रालय की यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार गंगवार ने कहा कि उनका मंत्रालय खुद सीधे तौर पर रोजगार सृजन नहीं करता है बल्कि नियोक्ताओं और कर्मचारियों के लिए उपयुक्त माहौल बनाता है. उन्होंने कहा कि कौशल विकास और रोज़गार सृजन के मामले में सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है.

    गंगवार ने अपने संबोधन में नोटबंदी का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि नोटबंदी से पिछले एक साल के दौरान कई बेहतर परिणाम सामने आए हैं. सरकार ने आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी.गंगवार ने इस दौरान वीवी गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान के चार प्रकाशनों को भी जारी किया और संस्थान के मरम्मत के बाद नए तैयार किए गए सेमिनार ब्लॉक का भी उद्घाटन किया.

    सम्मेलन में श्रम सचिव एम सत्यवती ने कहा कि हर साल एक करोड़ युवा रोज़गार चाहने वालों की दौड़ में शामिल हो जाते हैं. उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य की बात है कि आज बाज़ार में नौकरी पाने के लिए कई युवाओं के पास ज़रूरी कौशल नहीं होता है. सरकार इस कमी को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है.’

    उन्होंने कहा, ‘हाल में करीब 1.17 करोड़ युवाओं को विभिन्न प्रकार के कौशल में प्रशिक्षित किया गया और इन युवाओं को उद्योगों और संस्थानों में रोज़गार दिलाने के लिए 920 रोज़गार मेलों का आयोजन किया गया.’ सचिव ने मिहला कर्मचारियों को 26 हफ्ते का मातृत्व अवकाश दिए जाने संबंधी महत्वपूर्ण विधेयक के बारे में कहा कि कई नियोक्ता वेतन सहित 26 हफ्ते के अवकाश को देने के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों को इस मुद्दे का समाधान बताना चाहिए.

  • अगर चूहे ने कतरी जिरॉक्स मशीन तो महाराष्ट्र सरकार कतरेगी कर्मचारियों की जेब

    अगर चूहे ने कतरी जिरॉक्स मशीन तो महाराष्ट्र सरकार कतरेगी कर्मचारियों की जेब

     

     

    इन दिनों महाराष्ट्र सरकार के एक आदेश से बवाल मचा हुआ है. सरकार के आदेश से अधिकारी दहशत में हैं और अपना काम छोड़कर जिरॉक्स मशीनों की निगरानी कर रहे हैं. दरअसल महाराष्ट्र सरकार ने एक शासनादेश निकाला है कि अगर जिरॉक्स मशीनें खराब हुईं और बड़े अधिकारियों को इस मामले का पता चला तो उस कर्मचारी की सैलरी से मरम्मत का पैसा काट लिया जाएगा.

    6 नवंबर को निकले इस शासनादेश के बाद अब अधिकारी काम कम जिरॉक्स मशीनों की निगरानी ज्यादा कर रहे हैं. सरकार ने अपने शासनादेश में कहा है कि फोटोकापी मशीनों को सही और सुरक्षित स्थान पर रखा जाए और अगर यह पाया गया कि कर्मचारी की गलती और लापरवाही से फोटोकापी मशीनें खराब हुई हैं तो कर्मचारी की सैलरी से उसके मरम्मत का खर्च काट लिया जाएगा.

    दरअसल मंत्रालय में महंगी जिरॉक्स मशीनें लगाई गई हैं जिनके लगातार खराब होने की शिकायतें शासन के बड़े अधिकारियों के पास पहुंच रही थी. शासन ने एक सर्वे करवाया जिसमें पाया गया कि अधिकतर जिरॉक्स मशीनों के आस-पास या ऊपर खाने-पीने का सामान रख दिया जाता है जिससे चूहे आ जाते हैं और मशीनों को नुकसान पहुंचाते हैं.

    इससे तंग आकर सरकार ने एक शासनादेश निकालकर कर्मचारियों को हिदायत दी है कि अगर गलती हुई तो कर्मचारियों की सैलरी से उसका खर्च काटा जाएगा जिसके बाद अब कर्मचारी काम कम और जिरॉक्स मशीनों की निगरानी ज्यादा कर रहे हैं.ये भी पढ़ें-
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  • दिल्ली, सियोल ने ‘दोस्ती समझौते’ को मंजूरी दी

    दिल्ली, सियोल ने ‘दोस्ती समझौते’ को मंजूरी दी

     

     

    दिल्ली सरकार के बयान के अनुसार, ‘दोस्त’ बनने की दिशा में पहला कदम में, दिल्ली और सियोल की सरकारों ने बुधवार को एक “दोस्ती शहर समझौते” के मसौदे को मंजूरी दी थी।

    सियोल मेट्रोपॉलिटन सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल, जो मेयर पार्क के नेतृत्व में चला गया, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिला। मसौदा समझौते के अनुसार, दोनों शहरों में स्मार्ट सिटी, ई-गवर्नेंस, परिवहन, संस्कृति, पर्यटन, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के क्षेत्र में एक्सचेंजों को सहयोग और बाहर ले जाना होगा।

    इससे पहले कि आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जा सकें, इससे पहले विदेश मंत्रालय द्वारा इस समझौते को मंजूरी देनी होगी। हालांकि उनके शहर औपचारिक रूप से अभी भी दोस्त नहीं हो सकते हैं, लेकिन केजरीवाल और श्री पार्क को यह पता चला कि वे पहले मिले थे। दोनों को 2006 में रमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और समारोह के लिए मनीला में मिले थे।

  • भारत में ड्रग्स-हथियारों की तस्करी के लिए हो सकता है ड्रोन का इस्तेमाल!

    भारत में ड्रग्स-हथियारों की तस्करी के लिए हो सकता है ड्रोन का इस्तेमाल!

     

     

    पाकिस्तान के आतंकवादी और तस्कर भारत में आतंक फैलाने के लिए नई-नई तकनीक अपना रहे हैं. पाक आतंकी और तस्कर सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए नशीले पदार्थों और हथियारों को भारतीय सीमा पर गिराने के लिए ड्रोन और पैराग्लाइडर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. मल्टी एजेंसी ग्रुप की ओर से एक खुफिया रिपोर्ट में ये बातें कही गई हैं.

    ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी ने संबंधित रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. इस रिपोर्ट में पंजाब में आतंकवादी गतिविधियां फिर से शुरू होने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है. साथ ही आने वाले दिनों में सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के कैसे ट्रेंड हो सकते हैं, इसपर चर्चा की गई है.

    इस खुफिया रिपोर्ट को तैयार करने वाले ग्रुप में सरकार के अधिकारी, आर्मी, बीएसएफ और पंजाब पुलिस के अधिकारी शामिल थे. रिपोर्ट में सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी पर चिंता जाहिर की गई है. साथ ही ये आशंका जताई गई है कि कैसे पाक आतंकी ड्रोन के जरिए भारत में ड्रग्स और हथियार गिरा सकते हैं और जीपीएस से उसे ट्रैक कर सकते हैं.

    बीएसएफ ने इस तरह के 40 मामले दर्ज किए हैं. इनमें से 36 मामले तो सिर्फ अमृतसर सेक्टर से हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब में घुसपैठ में कैसे सिख और कश्मीरी आतंकवादी मदद कर रहे हैं.रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि सीमापार इलाकों में कैसे अफसरों को फंसाकर उनके जरिए तस्करी कराने के लिए कुछ महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, ‘दोनों तरफ से गतिविधियां तेज होने पर तस्कर अपना काम निकालने के लिए बीएसएफ रेंजर्स को फंसा सकते हैं.’

    यही नहीं, बीएसएफ के मुताबिक, तस्कर और आतंकवादी आपस में बातचीत करने के लिए फेसबुक, व्हाट्सऐप, स्काइप, आईएमओ और मैसेंजर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती है.

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  • इंदिरा गांधी जिला अस्पताल को E-hospital का दर्जा

    इंदिरा गांधी जिला अस्पताल को E-hospital का दर्जा

     

     

    कोरबा का आईएसओ प्रमाणित इंदिरा गांधी जिला अस्पताल को ई-हॉस्पिटल का दर्जा मिला है. अब यहां पंजीयन से लेकर सारे काम ऑनलाइन हो गए हैं. जिला अस्पताल की मॉनीटरिंग सीधे दिल्ली से होगी.

    अस्पताल के ई-हॉस्पिटल बनने से सुविधाओं में इजाफ़ा होने की बात जिम्मेदार कह रहे हैं. बता दें कि इंदिरा गांधी जिला अस्पताल को कायाकल्प योजना के पहले चरण में प्रथम पुरस्कार मिल चुका है. अब ई-हॉस्पिटल का दर्जा भी मिल गया है.

    दरअसल डिजिटल भारत के तहत केंद्रीय स्वास्थय विभाग प्रदेश के चुनिंदा 9 जिला अस्पतालों को ई-हॉस्प्टिकल बनाने की कवायद कर रहा है. कोरबा के सीएमएचओ डॉ. पीएस सिसोदिया ने बताया कि जिला अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों के पंजीयन, उपचार से लेकर सारे काम और डाटा ऑनलाइन होंगे. मरीजों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए यूनिक आईडी नंबर मिलेगा, जिसमें मरीज का सारा रिकॉर्ड दर्ज होगा.

  • भारत की दो-टूक: पाक को बात करनी है तो आतंक को सपोर्ट करें बंद

    भारत की दो-टूक: पाक को बात करनी है तो आतंक को सपोर्ट करें बंद

     

     

    भारत ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए उपयुक्त माहौल जरूरी है जो आतंक, आतंकवाद और आतंकवादियों को पाकिस्तान की ओर से समर्थन देना बंद करने से ही पैदा की जा सकती है.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘पाकिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के बारे में हमारा रुख अभी भी पहले की तरह है. हमने हमेशा कहा है कि पड़ोसी देश से बातचीत के लिए उपयुक्त माहौल होना चाहिए. यह माहौल आतंक, आतंकवाद और आतंकवादियों को पाकिस्तान की ओर से समर्थन देना बंद करके ही बनाई जा सकती है.’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पाकिस्तान से आई उस खबर के बारे में पूछा गया था जो भारत-पाक वार्ता फिर से शुरू करने के विषय से संबंधित थी.

    उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान ने दिसंबर 2015 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान समग्र द्विपक्षीय वार्ता प्रारूप के तहत बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी, हालांकि 2016 में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन की ओर से पठानकोठ हमले के बाद वार्ता रूक गई थी.

    यह पूछे जाने पर वार्ता शुरू करने के लिए क्या कोई समयसीमा है, कुमार ने कहा कि कोई भी कृत्रिम समयसीमा तय नहीं की जा सकती. जब तक उपयुक्त माहौल नहीं बनेगा, तब तक क्या कहा जा सकता है.दक्षेस के बारे में एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने कहा कि एक देश है जिसे माहौल बनाना है जहां अर्थपूर्ण बातचीत हो सकती है और वह सफल हो सकती है.

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  • क्या हिमाचल में टूटेगा 2003 की वोटिंग का रिकॉर्ड?

    क्या हिमाचल में टूटेगा 2003 की वोटिंग का रिकॉर्ड?

     

     

    हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में हमेशा मतदान प्रतिशत अन्य राज्यों से अधिक रहा है. चाहे जितना भी दुर्गम क्षेत्र हो लोग अपने अधिकार का इस्तेमाल करते रहे हैं.

    हिमाचल के चुनावी इतिहास में सबसे ज्यादा 74.51 फीसदी मतदान 2003 के चुनाव में हुआ था. जबकि 1977 में सबसे कम 58.57 फीसदी वोट पड़े थे.
    इस बार चुनाव आयोग ने लोगों को मतदान करने के लिए काफी प्रेरित किया है. 1990 के चुनाव में 67.76 फीसदी वोट डाले गए थे.

    जबकि अन्य सभा विधानसभा चुनावों में वोटिंग प्रतिशत 70 फीसदी से अधिक रहा है. 2012 में भी 73.51 प्रतिशत लोगों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया.हिमाचल विधानसभा चुनाव में पहली बार थर्ड जेंडर भी वोट डालेंगे. वे 20 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान करेंगे. मतदान का अधिकार मिलने के बाद ऐसे कुल 29 मतदाताओं ने अपना नाम दर्ज कराया है.

    धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से करीब आठ सौ तिब्बती समुदाय के लोगों के नाम भी मतदाता सूची में दर्ज हैं. मालूम हो कि हिमाचल प्रदेश के श्याम शरण नेगी देश के पहले मतदाता और चुनाव आयोग के ब्रांड अंबेसडर भी हैं. जिनके वोट डालने के लिए चुनाव आयोग ने मतदान केंद्र पर रेड कारपेट बिछाया है.

    कुल मिलाकर हिमाचल में वोटिंग को लेकर लोगों में खासा उत्साह है. लेकिन क्या 2003 का रिकॉर्ड टूट पाएगा, यह बड़ा सवाल है.