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  • कोमा में गए बांग्लादेशी बच्चे का दिल्ली में लीवर ट्रांसप्लांट सफल

    कोमा में गए बांग्लादेशी बच्चे का दिल्ली में लीवर ट्रांसप्लांट सफल

     

     

    लीवर के काम बंद करने के बाद गंभीर स्थिति का सामना कर रहे और कोमा में चले गये बांग्लादेश की राजधानी ढाका के रहने वाले तीन साल के अमन जावद उद्दीन का, दिल्ली के एक अस्पताल ने सफल लीवर ट्रांसप्लांट कर उसे नया जीवन दिया है. दो साल 11 महीने के अमन का इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में सितंबर महीने में लिवर ट्रांसप्लांट किया गया.

    अपोलो अस्पताल की एक विज्ञप्ति के मुताबिक ढाका निवासी अमन को अगस्त महीने में पीलिया हो गया था, जो धीरे धीरे खराब स्तर पर चला गया. परेशानियां बढ़ने के बाद बच्चे को ढाका के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. पता चला कि हेपेटाइटिस ए के कारण उसके यकृत ने काम करना बंद कर दिया था. वह कोमा में भी चला गया.

    विज्ञप्ति के मुताबिक बच्चे के परिवार को यकृत प्रतिरोपण की आवश्यकता बताई गयी और उन्होंने अपोलो अस्पताल से संपर्क किया. भारतीय उच्चायोग ने इस लिहाज से वीजा जारी कर दिया और हवाई मार्ग से उसे यहां अपोलो अस्पताल लाया गया.

    अपोलो के चिकित्सकों ने आपात स्थिति में यकृत बदलने का फैसला किया और बच्चे की मां का लिवर इस लिहाज से उपयुक्त पाया गया. अस्पताल ने बताया कि दिल्ली पहुंचने के 36 घंटे के भीतर बच्चे में यकृत प्रतिरोपण कर दिया गया और तीन सप्ताह बाद उसे छुट्टी दे दी गयी.इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर और वरिष्ठ पीडियैट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. अनुपम सिबल ने कहा, ”यह बहुत मुश्किल मामला था क्योंकि बच्चा पहले से ही स्टेज 3 हेपैटिक एनसेफैलोपैथी में था.

    इसका मतलब हुआ कि उसका लिवर शरीर की खराब चीजों को निकाल नहीं कर रहा था और इससे उसके मस्तिष्क का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा था. उसकी स्थिति तेजी से खराब हो रही थी. बच्चे की जान बचाने के लिए आपात स्थिति में यकृत प्रतिरोपण ही एकमात्र रास्ता था. सर्जरी के बाद अमन की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उसे तीन सप्ताह में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.”

    अस्पताल के वरिष्ठ यकृत प्रतिरोपण सर्जन डॉ. नीरव गोयल ने कहा कि बच्चे में ऐक्यूट लिवर फेल्योर की स्थिति में यकृत प्रतिरोपण सामान्य लिवर ट्रांसप्लांट के मुकाबले ज्यादा मुश्किल होता है.

  • मोदी-हसीना गुरुवार को शुरू करेंगे नयी यात्री ट्रेन सेवा

    मोदी-हसीना गुरुवार को शुरू करेंगे नयी यात्री ट्रेन सेवा

     

     

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना गुरुवार को कोलकाता और
    बांग्लादेश के दक्षिणपश्चिमी औद्योगिक शहर खुलना के बीच एक नयी यात्री
    ट्रेन सेवा की संयुक्त रूप से शुरुआत करेंगे.

    बांग्लादेश रेलवे के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘ट्रेन का नाम बंधन एक्सप्रेस होगा और वो 177 किलोमीटर लंबे खुलना-कोलकाता रेल मार्ग पर चलेगी. क्रॉस कंट्री सेवा 16 नवंबर से यात्री को लेकर जाना शुरू करेगी.’ निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप ट्रेन दिन में 11 बजे कोलकाता से रवाना होगी और साढ़े चार घंटे के सफर के बाद खुलना पहुंचेगी.

    बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि दोनों प्रधानमंत्री वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सेवा का उद्घाटन करेंगे.

    उन्होंने कहा कि दोनों नेता भारतीय ऋण से निर्मित दो रेल पुलों और ढाका-कोलकाता ‘मैत्री ट्रेन’ सेवाओं को आसान बनाने के लिए शुरुआत एवं समापन स्तर पर आव्रजन सुविधा की भी शुरुआत करेंगे.इस समय बांग्लादेश जा रहे भारतीयों या भारत की यात्रा कर रहे बांग्लादेशियों को बांग्लादेश के दर्शाना स्टेशन और भारत के गेदे बिंदु पर आव्रजन प्रक्रिया पूरी करनी होती है और दो घंटे इंतज़ार करना पड़ता है.

    ढाका से दक्षिणपूर्वी चटगांव और उत्तरपूर्वी सिलहट के बीच अप एवं डाउन ट्रेन सेवाओं के एक साथ संचालन के लिए दूसरी पटरी की खातिर भैरब और टिटास नदियों पर दो नए पुलों का निर्माण किया गया है.

  • CM ममता बनर्जी ने नोटबंदी को बताया DeMo डिजास्टर

    CM ममता बनर्जी ने नोटबंदी को बताया DeMo डिजास्टर

     

     

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नोटबंदी को DeMo डिजास्टर (नोटबंदी हादसा) बताते हुए आज ट्विटर पर अपने डिस्प्ले पिक्चर को काला कर दिया.

    गौरतलब है कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित ज्यादातर विपक्षी दल आज नोटबंदी का एक साल पूरा होने के अवसर पर काला दिवस मना रहे हैं.

    ममता ने सोमवार को घोषणा की थी कि नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर वह अपने टि्वटर का डिस्प्ले पिक्चर काला रखेंगी.

    मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया है, मैंने अपना टि्वटर का डिस्प्ले पिक्चर काला कर दिया है, #नोटबंदीहादसा. अपनी आवाज उठाएं. #नवंबर8कालादिवस.’ ममता ने अपने कल के फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया था कि नोटबंदी ‘‘बहुत बड़ा घोटाला’’ था जिसकी घोषणा कालाधन को सफेद धन में बदलने के निजी हित में की गयी थी.

    उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, नोटबंदी बड़ा घोटाला है. मैं दुहराती हूं, नोटबंदी बड़ा घोटाला है. यदि विस्तृत जांच की जाए तो यह साबित हो सकता है. नोटबंदी कालाधन के खिलाफ लड़ाई नहीं थी. यह सिर्फ सत्तारूढ़ दल के निजी हितों के तहत कालाधन को सफेद धन में बदलने के लिए किया गया था. विदेशी खातों से कोई काला धन वापस नहीं लाया जा सका. विशेष रूप से, इसका परिणाम बड़ा, बहुत बड़ा शून्य रहा.

  • रिक्शावाला, जो सालभर से डिजिटल ट्रांजिक्शन से लेता है भाड़ा

    रिक्शावाला, जो सालभर से डिजिटल ट्रांजिक्शन से लेता है भाड़ा

     

     

    सिलीगुड़ी में एक रिक्शावाला है, जो पिछले एक साल से अपने रिक्शे पर बैठने वालों से आनलाइन भाड़ा लेता है. इसके लिए उसने कई तरीके अपना रखे हैं.

    बंगाल के इस रिक्शेवाले का नाम सुशील बर्मन है, जिसने नोटबंदी के तुरंत बाद आनलाइन तरीके से पैसा लेना शुरू किया. अब वह अपने शहर में डिजिटल ट्रांजिक्शन के लिए एक मिसाल बन गया है.

    भाड़ा लेने का अनोखा तरीका 

    सुशील का कहना है, “मैं चाहता हूं कि कैशलेस ट्रांजिक्शन को हर कोई अपनाए और इंटरनेट का इस्तेमाल करे, इसलिए मैने भाड़ा लेने का ये तरीका अपनाया. मैं आनलाइन भुगतान के कई तरीकों का इस्तेमाल करता हूं. जिसमें क्रेडिट और डेबिट कार्ड के अलावा मोबाइल एप के जरिए भुगतान शामिल है.”

    नए ग्राहकों को डिस्काउंट भी 

    सुशील बंगाल के सिलीगुड़ी में रहता है. ऐसा नहीं है कि उसे आनलाइन पेमेंट लेने के चलते कभी कोई दिक्कत आई बल्कि उल्टा ही हुआ. उसका कहना है, “पिछले एक साल में आनलाइन भाड़ा लेने से मेरे ग्राहक बढ़े हैं.” वह आनलाइन भुगतान सिस्टम को लोकप्रिय बनाने के लिए नए ग्राहकों को 80 फीसदी डिस्काउंट देता है जबकि पुराने ग्राहकों को 20 फीसदी की छूट. गौरतलब है कि आठ नवंबर को ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा करते हुए 1000 और 500 रुपए के पुराने नोटों पर पाबंदी लगाने की घोषणा की थी. साथ ही लोगों को डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित किया था. इसके बाद से देश में भी डिजिटल ट्रांजिक्शन में बढोतरी हुई है.

    अलग पहचान बनाई 

    आमतौर पर सुशील के रिक्शे पर बैठने वाले लोग उसे पेटीएम के जरिए भाड़ा का भुगतान करते हैं. सिलीगुड़ी में उसकी एक अलग पहचान भी बन गई है. जिस दौरान नोटबंदी लागू हुई. तब उसने तुरंत अपने रिक्शे पर बैठने वालों को आनलाइन भुगतान का प्रस्ताव दे दिया. ऐसा नहीं है कि वह नकदी नहीं लेता लेकिन उसकी पहली कोशिश यही होती है कि उसके रिक्शे पर बैठने वाला ग्राहक उसे नकदी की बजाए डिजिटल तौर पर ही भुगतान करे. पिछले एक साल से वह ऐसा करने में सफल रहा है. बल्कि उसकी देखादेखी में अब कई दूसरे रिक्शावाले भी ऐसा ही कर रहे हैं.

    दिल्ली में भी रिक्शों पर पेटीएम का विकल्प

    देश के कई अन्य शहरों में रिक्शा चलाने वाले पेटीएम से अपने ग्राहकों से भाड़ा ले रहे हैं. ऐसा करने वाले रिक्शावाले दिल्ली जैसे शहर में भी हैं. जिनके रिक्शों के पीछे पेटीएम के स्टीकर लगे होते हैं.

  • एंटी ब्लैकमनी डे पर बीजेपी के 3 वीडियो, नोटंबदी को बताया ऐतिहासिक

    एंटी ब्लैकमनी डे पर बीजेपी के 3 वीडियो, नोटंबदी को बताया ऐतिहासिक

     

     

    नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर बीजेपी इसे एंटी ब्लैकमनी डे के तौर पर मना रही है. बीजेपी पूरे देश में कार्यक्रम करके बता रही है कैसे प्रधानमंत्री के इस कठोर कदम से भ्रष्टाचार, कश्मीर में पत्थरबाजी और देश में नक्सलवाद सहित कई मौर्चे पर सरकार को सफलता मिली है.

    वहीं, केंद्र सरकार के कई मंत्री और बीजेपी के दूसरे नेता सोशल साइट्स के साथ-साथ पब्लिक कार्यक्रमों में भी नोटबंदी के महत्व को बता रहे हैं.

    बीजेपी ने नोटबंदी के महत्व को बताते हुए तीन वीडियो भी जारी किए हैं. #AnitiBlackMoneyday, #DemoWins और #DemoWins नाम से बने इन वीडियोज को बीजेपी ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म पर जारी किया है.

    #DemoWins के पहले वीडियो में एक महिला राजनीतिज्ञ को दिखाया गया है. इसमें दिखाने की कोशिश की गई है कि कैसे नोटबंदी के बाद उन्हें करोड़ों के कालेधन का नुकसान हुआ है. वह इसी नुकसान की वजह से नोटबंदी का विरोध कर रही हैं.

    #DemoWins के एक दूसरे वीडियो में शेल कंपनी के नाम पर करोड़ों की कमाई करने वाले बिजनेसमैन को दिखाने की कोशिश की गई है. इसमें बताया गया है कि कैसे नोटबंदी के बाद सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से सवा दो लाख शेल कंपनियां पकड़ी गईं और करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ.

    #AnitiBlackMoneyday के एक तीसरे वीडियो में प्रधानमंत्री के इस कदम को भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई के तौर पर दिखाया गया है. इसे आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कदम बताते हुए ‘गरीबों के लिए और ईमानदारों के साथ’ लिया गया निर्णय बताया गया. इसमें ये भी बताने की कोशिश की गई है कि गरीबों की नींद नहीं हराम हुई और न ही ईमानदारों को परेशानी हुई.

  • धुएं के चैंबर में दिल्ली वाले जिएंगे तो कैसे?

    धुएं के चैंबर में दिल्ली वाले जिएंगे तो कैसे?

     

     

    सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है…शहरयार की इन लाइनों को हम थोड़ा बदलकर आंखों में जलन, फेफड़ों में तूफान सा क्यों है कर देते हैं. दिल्ली में भयंकर प्रदूषण से सांसों पर लगी इमरजेंसी के हालात तो यही कह रहे हैं.

    दिल्ली में जारी जहरीले स्मॉग को देखते हुए केजरीवाल सरकार ने रविवार तक सभी स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है. पूरी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र इस वक्त जहरीले धुंआ का चैंबर बन गया है. हर कोई यही कह रहा है कि आंखों में इतनी जलन क्यों है. दिल्ली वाले रहेंगे कैसे? सवाल वाजिब है, लेकिन सवाल हमें खुद से पूछना चाहिए कि आखिर ये हालात पैदा क्यों हो रहे हैं. हम खुद इसके लिए कितना जिम्मेदार हैं?

    इस धुंए में शामिल है ये
    पीएम यानी पर्टिक्युलेट मैटर, ये हवा में वो पार्टिकल होते हैं जिस वजह से प्रदूषण फैलता है. पर्टिक्युलेट मैटर में धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. जो डस्ट, कंस्ट्रहक्शपन कार्य और कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ती है. ये कण आसानी से नाक और मुंह के जरिए बॉडी के अंदर तक पहुंच कर लोगों को बीमार बनाते हैं. इस समय यही हो रहा है. धूल और धुएं से हवा जहरीली हो गई है और यह आंखों और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है.

    केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एजेंसी सिस्टम ऑफ एअर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में पिछले 24 घंटों में पीएम 2.5 और पीएम 10 का औसत स्तर 406 और 645 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा. यह सुरक्षित स्तर 60 और 100 से कई गुना अधिक है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के कई निगरानी केंद्रों ने प्रदूषण के सभी स्तर को पार कर जाने के कारण काम करना बंद कर दिया.

    आंखों में जलन…वाले मरीज बढ़े 

    नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक पिछले दो दिनों में आखों में जलन के करीब 30 फीसदी मामले बढ़ चुके हैं. लोग आंखों में एलर्जी होने की समस्या से परेशान हैं. ऐसे में जरूरी हो तभी बाहर निकलें, चश्मा लगाएं और ठंडे पानी से आंंख धोएं.

    दिल्ली सरकार ने बच्चों, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और दमा व हृदय से जुड़ी अन्य बीमारियों सहित ऐसे लोगों के लिए स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है. इनके इससे प्रभावित होने का खतरा अधिक है.

  • मनमोहन सिंह से जबरन बातें कहलवाई जा रही हैं जो वो नहीं कहना चाहते: नकवी

    मनमोहन सिंह से जबरन बातें कहलवाई जा रही हैं जो वो नहीं कहना चाहते: नकवी

     

     

    केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बुधवार को कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि
    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जबरन ऐसी बातें कहलवाई जा रही हैं जो वो कहना नहीं चाहते. उन्होंने कहा कि
    नोटबंदी के मुद्दे पर मनमोहन के मुंह में शब्द डाले जा रहे हैं.

    नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर बीजेपी की ओर से आयोजित ‘काला धन विरोधी दिवस’ के अवसर पर नकवी पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे.

    केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया, ‘मेरा मानना है कि वो एक भद्र पुरुष हैं, एक अनुभवी नेता हैं, लेकिन समस्या ये है कि उनके मुंह में शब्द डाले जा रहे हैं.’ नकवी ने कहा, ‘जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तो कांग्रेस उन्हें सिखाया-पढ़ाया करती थी, वो उनका अनादर करती थी. सभी को याद होगा कि कैसे कांग्रेस के मौजूदा युवराज ने (दोषी सांसदों को अयोग्य करार होने से बचाने के लिए लाए गए) अध्यादेश को बकवास बताकर खारिज़ कर दिया था.’

    इससे पहले, नकवी ने कहा कि नोटबंदी ‘क्रांतिकारी कदम’ था जिससे आतंकवाद और नक्सली हिंसा में काफी कमी आई है.नकवी ने कहा, ‘आज देश की जनता समझ रही है कि नोटबंदी भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई है. नोटबंदी के फैसले को एक साल हो रहा है और इस एक साल में हमारी सरकार का फैसला पूरी तरह सही और सफल साबित हुआ है. लोग तकलीफ के बावजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की इस लड़ाई में साथ खड़े रहे.’

    उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी अपने आप में एक क्रांतिकारी कदम था जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार पर प्रहार करना, कालेधन को उजागर करना, जाली नोटों पर रोक लगाना, आतंकवाद और नक्सलवाद की गतिविधियों की फंडिंग की कमर तोड़ना और देश के विकास के रास्ते में भ्रष्टाचार के रोड़े को हटाना रहा है.’ नकवी ने दावा किया, ‘नोटबंदी के चलते कश्मीर में पत्थरबाजी और आतंकी गतिविधियों में 75 फीसदी की कमी आई है. नक्सल हिंसा में 20 फीसदी से भी ज्यादा गिरावट हुई है. इसका असर आगे और दिखेगा.’

    उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार बदले की राजनीति नहीं बल्कि बदलाव की राष्ट्रनीति पर यकीन करती है. अपने तीन वर्ष के दौरान मोदी सरकार ने बदले की राजनीति नहीं बल्कि समावेशी विकास और रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म की राष्ट्रनीति के साथ काम किया है. एनडीए सरकार में सभी जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी गई है ताकि वो अपना काम पूरी निष्पक्षता से बिना किसी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप के कर सके. जबकि कांग्रेस के समय में सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों का दुरूपयोग राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को परेशान करने के लिए किया जाता था.’

    नकवी ने कहा, ‘भारत की अर्थव्यवस्था के प्रति दुनिया का विश्वास बढ़ा है. आज भारत निवेशकों के लिए एक सुरक्षित एवं सरल ठिकाना बनता जा रहा है. विमुद्रीकरण ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है. कर आधार बढ़ाने में नोटबंदी सफल रही है. नोटबंदी के बाद लगभग 57 लाख आयकरदाता बढ़ गए हैं. चालू वित्त वर्ष मे अप्रैल से अक्तूबर के दौरान लोगों और कंपनियों ने रिकॉर्ड 3 करोड़ 78 लाख रिटर्न दाखिल किए. आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर अब तक 6 करोड़ 85 लाख करदाता पंजीकृत हो चुके हैं, जो एक रिकॉर्ड है.’

  • राहुल पहले देखा फैक्ट्रियों में काम फिर खाया ‘चीज लोचा’

    राहुल पहले देखा फैक्ट्रियों में काम फिर खाया ‘चीज लोचा’

     

     

    सूरत में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी में पूरा दिन काफी बिजी रहा. उन्होंने अगर फैक्ट्रियों में काम देखा और कारीगरों से मुलाकात की तो फिर दोपहर तक खाने में सूरत का मशहूर चीज लोचा खाया.

    राहुल इन दिनों गुजरात का सघन दौरा कर रहे हैं. लोगों से मिल रहे हैं. विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस का प्रचार कर रहे हैं. उन्होंने नोटबंदी का एक साल पूरा होने पर मौजूदा सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रहार भी किया.

    कारीगरों से मिले
    राहुल गांधी का ये सूरत दौरा थोड़ा अलग था. उन्होंने सुबह से लूम फैक्ट्री में कारीगरों से मुलाकात की. बारीकी से उनके काम के बारे में जाना. इन फैक्ट्रियों में कैसे काम होता है और कारीगरों को किन हालात में काम करना होता है. इसे लेकर भी बात की.

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    राहुल गांधी सूरत में हीरा तराशने की कोशिश करते हुए

    हीरा भी घिसा
    सूरत हीरा तराशने का प्रमुख केंद्र है. लिहाजा राहुल गांधी वहां जाना भी नहीं भूले. वह केवल हीरा कारीगरों से मिले ही नहीं बल्कि खुद भी हीरा को घिसने के काम में उनका हाथ बंटाया. इसके बाद उनका अगला पड़ाव एंब्राडरी काम करने वाली महिलाओं से मिलने का था. वह वहां भी गए. महिलाओं से संवाद किया.

    व्यापारियों से मिले
    अगर राहुल ने मजदूरों और कारीगरों की परेशानी पूछी तो फुलपाड़ा निर्माण इंडस्ट्रिल एस्टेट में व्यापारियों से मुलाकात के दौरान मौजूदा एनडीए सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रहार किया, जिसने व्यापार और व्यापारियों को मुश्किल में डाल दिया है. उन्होंने कहा सूरत के व्यापारियों को सही बात कहने पर धमकाया जा रहा है.

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    राहुल गांधी सूरत में लूम फैक्ट्रियों में कारीगरों से मिलकर उनके काम के बारे में समझते हुए

    नोटबंदी और जीएसटी की आलोचना
    उन्होंने कहा कि नोटबंदी से लोगों को नुकसान हुआ है. राहुल ने जीएसटी में सुधार की जरूरत पर भी बल दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कई बार जेटली से मौजूदा प्रारुप में जीएसटी को लागू नहीं करने की अपील की थी लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया.

    केंद्रीय मंत्रियों का गुजरात दौरा
    गुजरात में बुधवार को दो केंद्रीय मंत्री भाजपा के गौरव महा संपर्क अभियान के सिलेसिले में पहुंचे. ये थे रेल मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान. पीयूष गोयल ने अहमदाबाद में डोर टु डोर अभियान चलाया और दसक्रोई विधानसभा के निकोल इकाले का दौरा किया.  उन्होंने नोटबंदी को सही फैसला बताया. धर्मेंद्र प्रधान ने भी नोटबंदी को सरकार का सही फैसला बताया. हमारी कोशिश ये है कि अगर केंद्र से एक रुपया भेजा जाए तो लाभार्थी को एक रुपया पूरा मिले.

  • न आंदोलन से उपजी यूकेडी जम पाई, न तीसरा विकल्प उभरा

    न आंदोलन से उपजी यूकेडी जम पाई, न तीसरा विकल्प उभरा

     

     

    उत्तराखण्ड में 17 सालों में सत्ता पर दो ही दलों का कब्जा रहा है. पहली कांग्रेस और दूसरी भाजपा. यहां क्षेत्रीय दल की संभावनाएं हर बार धुंधली होती जा रही है और तीसरा विकल्प किसी सपने सा रह गया है.

    राज्य आंदोलन के समय उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने जिस तरह से आंदोलन में अगवा की भूमिका निभाई थी उससे लग रहा था कि राज्य बनने के बाद भी वह कांग्रेस और भाजपा का विकल्प बन कर उभरेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

    साल 2002 में पहले विधानसभा चुनावों में जहां यूकेडी को 4 सीटें मिली थीं, वहीं 2007 के विधानसभा चुनावों में यह तीन सीटों पर सिमट गई. 2012 के चुनावों में इसे सिर्फ़ एक सीट मिली और 2017 आते-आते यह आंकड़ा शून्य हो गया.

    हाल ही में भाजपा छोड़कर फिर पार्टी में शामिल हुए मौजूदा अध्यक्ष दिवाकर भट्ट कहते हैं कि इसकी वजह सरकार बनाने के प्रति पार्टी की उदासीनता रही. वह कहते हैं कि हमने आंदोलन तो किया पर राज्य बनने के बाद सरकार बनाने पर कभी विचार नहीं किया.ऐसा नहीं है कि इन 17 सालों में यूकेडी ने सत्ता की मिठास न चखी हो लेकिन जब-जब उसके विधायक सरकार में शामिल हुए वह उसकी गोद में जा बैठे.

    दिवाकर भट्ट और ओम गोपाल रावत 2007 में खंडूड़ी सरकार का हिस्सा रहे और फिर भाजपा का दामन थाम लिया. प्रीतम सिंह पंवार 2012 में यमुनोत्री से चुनाव जीत कर आए तो उन्होंने पार्टी का साथ छोड़ दिया और निर्दलीय चुनाव लडा.

    चुनावों से ठीक पहले कई तरह के महागठबंधनों ने भी तीसरी ताकत बनने की कोशिश की लेकिन कोशिशें परवान नही चढ पाई. रक्षा मोर्चा ने तीसरी ताकत बनने के लिए मोर्चा तो खोला लेकिन विफल रहे.

    साल 2012 में उन्होंने 42 सीटों पर चुनाव लड़ा और तीसरे नंबर की पार्टी बनी लेकिन पार्टी के अंदर की राजनीति इस कदर हावी रही कि 2017 आते-आते पार्टी सिर्फ दो ही उम्मीदवार चुनाव में उतार पाई.

    अब इंतजार इस बात का है कि क्या राष्ट्रीय पटल पर बनी नई पार्टियां जैसे आम आदमी पार्टी क्या तीसरा विकल्प बनती है. या फिर भाजपा और कांग्रेस की ही सत्ता एक दूसरे को बदलती रहेगी.

     

  • धुँधली की पकड़ में दिल्ली

    धुँधली की पकड़ में दिल्ली