Category: national

  • ममता ‘शेरनी’ हैं जिन्होंने बंगाल में कम्युनिस्ट शासन का अंत किया: शिवसेना

    ममता ‘शेरनी’ हैं जिन्होंने बंगाल में कम्युनिस्ट शासन का अंत किया: शिवसेना

     

     

    शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राज्य में कम्युनिस्टों का सफाया करने के लिए ‘शेरनी’ बताया. उन्होंने कहा कि ये काम कांग्रेस और बीजेपी भी नहीं कर पाई.

    दक्षिण मुंबई के एक होटल में ठाकरे की तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो से मुलाकात के दो दिन बाद शिवसेना का ये बयान आया है.

    शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा है, ‘ममता बनर्जी के कुछ रुख विवादास्पद हो सकते हैं और उनमें से कुछ शिवसेना के विचार से नहीं मिलते-जुलते होंगे. लेकिन उन्होंने अपने राज्य में कम्युनिस्टों को ख़त्म कर दिया जिसके खिलाफ हमेशा से शिवसेना लड़ती रही है.’

    संपादकीय में लिखा है, ‘शेरनी ने वो कर दिखाया जो कांग्रेस और बीजेपी भी नहीं कर सकी. उन्होंने कम्युनिस्टों के 25 वर्ष पुराने शासन को ख़त्म कर दिया.’ इसमें लिखा है, ‘ऐसा करने के लिए उन्होंने ईवीएम मशीन से छेड़छाड़ नहीं की या वोट नहीं खरीदे. लोगों ने उन्हें काफी विश्वास के साथ राज्य का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी दी. लेकिन अब प्रयास किए जा रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में विकास रोका जाए और वित्तीय समस्याएं पैदा की जाएं.’इसने कहा, ‘राज्य की समस्याओं को और बढ़ाना और सिर्फ इसलिए इसे पीछे धकेलना ठीक नहीं है कि ये आपके विचार से मिलते-जुलते नहीं हैं. राज्य (बंगाल) भारत का हिस्सा है और इसके विकास को बेपटरी करना देश के विकास को बाधित करना है.’

    शिवसेना ने ठाकरे की बृहस्पतिवार को ममता से हुई मुलाकात का ज़िक्र करते हुए बीजेपी पर परोक्ष रूप से निशाना साधा और कहा कि बैठक पर सवाल उठाने वालों को बताना चाहिए कि ‘कश्मीर में सत्ता के लिए अलगाववादियों और पाकिस्तान समर्थकों से’ हाथ मिलाने के क्या कारण हैं. संपादकीय में लिखा गया है, ‘गोधरा दंगे के बाद वाजपेयी सरकार से इस्तीफा देने वाले रामविलास पासवान शनिवार आपकी सरकार में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं, जबकि कश्मीरी पंडित आज भी असहाय हैं और राम मंदिर (अयोध्या में) अभी तक नहीं बना है.’

  • धूमल को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने से छंट गया भ्रम: अनुराग ठाकुर

    धूमल को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने से छंट गया भ्रम: अनुराग ठाकुर

     

     

    हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता प्रार्टी के
    प्रेम कुमार धूमल को पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किए जाने के बाद बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर का कहना है कि इससे सभी ‘भ्रमों’ का निवारण हो गया है और इसने मतदाताओं को
    विधानसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में कर दिया है. अनुराग ठाकुर, प्रेम कुमार धूमल के पुत्र हैं.

    बड़े पैमाने पर अटकलों के दौर चले थे जिसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने के विचार को बल मिल रहा था. लेकिन ठाकुर ने कहा कि उनके पिता के नाम पर पहले ही सहमति बना ली गई थी.

    ठाकुर ने एक साक्षात्कार में बताया, ‘मीडिया में मुख्यमंत्री पद के दावेदार को लेकर चल रही ख़बरों के कारण लोगों और पार्टी के समर्थकों में भ्रम की स्थिति थी कि चुनावों में कौन बीजेपी का नेतृत्व करेगा. जिनका नाम इस दौड़ में नहीं था, उनका नाम भी उभरकर सामने आया. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा के बाद संशय पर पूर्णविराम लग गया.’

    उन्होंने कहा कि इस घोषणा के बाद पार्टी का मूड बदल गया और कार्यकर्ताओं में नया जोश भर गया.ठाकुर ने कहा, ‘धूमल जी को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने से कार्यकर्ता मुखर, अधिक उत्साहित और पहले से ज्यादा सक्रिय हो गए हैं. साथ ही जनता के मूड में भी काफी बदलाव देखा जा रहा है. राज्य में मोदी जी और धूमल जी के लिए मंच तैयार हो चुका है.’

    ठाकुर ने कहा, ‘आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री सात रैलियों को संबोधित करने जा रहे हैं. ये रैलियां पूरे दृश्य को बीजेपी के हित में परिवर्तित कर देगी. जिस तरीके से अमित शाह की ओर से धूमल के नाम की घोषणा की गई है, इसे पार्टी के कार्यकर्ताओं, समर्थकों और मतदाताओं के बीच एक अच्छा संदेश गया है.’

    उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में राज्य के उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए अगर अमित शाह ने धूमल का नाम बतौर पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार ले लिया होता तो उसका प्रभाव इतना शक्तिशाली नहीं होता जितना की आज है.

    उन्होंने कहा, ‘जो हवा हमने आज बनाई है, वो नहीं बनी होती अगर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा पहले कर दी गई होती. अमित शाह ने अच्छी तरह से इस पर रणनीति बनाई. अब यहां से हम केवल अपनी संख्या बढ़ाएंगे. इस घोषणा का दिन और समय शानदार था.’

    मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा में देरी के बारे में पूछे जाने पर ठाकुर ने कहा, ‘बीजेपी में योजना और रणनीति के बिना कुछ भी नहीं होता है, ख़ासकर जिसमें मोदीजी और अमित शाह जैसे नेता शामिल हों. ये पहले से तय था.’

    हमीरपुर के सांसद ठाकुर ने कांग्रेस नेतृत्व पर हमला किया और राहुल गांधी की क्षमताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनमें एक शक्तिशाली और निर्णायक नेता बनने का दम नहीं है.

    ठाकुर ने कहा, ‘कांग्रेस और उनके नेताओं में हिम्मत नहीं है. वो वीरभद्र सिंह के आगे नतमस्तक हैं, जो जमानत पर बाहर हैं. वो हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य में सिंह से भी छुटकारा नहीं पा सकते. हमारे पास प्रदेशाध्यक्ष (बिहार कांग्रेस के) पद से हटाए गए अशोक चौधरी के बाद कांग्रेस में फैले असंतोष का उदाहरण है. वो (गांधी) कैसे एक देश चला सकते हैं जब वो अपनी पार्टी चलाने और खुद के नेताओं को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं हैं?’

    राहुल गांधी की लोकप्रियता में अचानक बढ़ोतरी की ख़बरों के बारे में पूछे जाने पर ठाकुर ने कहा कि जैसा कि कांग्रेस दावा कर रही है कि वो लोकप्रिय हैं, तो फिर पार्टी उन्हें हिमाचल प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक सभा करने से क्यों रोक रही है.

    उन्होंने कहा, ‘हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के नेता क्यों राहुल से ज्यादा रैलियों को संबोधित करने का अनुरोध नहीं कर रहे हैं? राज्यों में कांग्रेस खुद उनके नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पा रही है और आप उनकी लोकप्रियता के बारे में बात कर रहे हैं.’

    ठाकुर ने कहा कि गांधी को भी समझना चाहिए कि वो कांग्रेस अध्यक्ष बन सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए उन्हें लोगों का सामना करना होगा क्योंकि ये ‘आरक्षित’ नहीं है.

    राज्य में मुद्दों के बारे में बात करते हुए ठाकुर ने कहा कि भ्रष्टाचार के साथ कानून-व्यवस्था बड़ी चिंता है और राज्य के लोग कांग्रेस से तंग आ गए हैं.

    उन्होंने कहा, ‘राज्य में माफिया राज, गुंडाराज चरम पर है. वीरभद्र सिंह हर मोर्चे पर विफल रहे हैं. बेरोज़गारी अभी भी एक बड़ी समस्या है. राज्य में 900,000 से अधिक युवा बेरोज़गार हैं. कांग्रेस ने पिछले चुनाव में जारी किए गए घोषणापत्र के मुद्दों को ही अपने ताज़ा घोषणापत्र में दोहराया है. देव भूमि, एक अपराध भूमि में बदल गई है.

    उन्होंने दावा किया कि राज्य पहले से ही 50,000 करोड़ रुपए के कर्ज़ में डूबा हुआ है.

    ठाकुर ने कहा कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो उसका ध्यान छात्रों को मुफ्त लैपटॉप और टैबलेट और 1 जीबी मुफ्त इंटरनेट डाटा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर होगा.

    उन्होंने कहा, ‘नए पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाएगा. राज्य में पर्यटन को एक नई दिशा देने के लिए जल, जंगल और पहाड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा. बेहतर परिवहन के लिए बड़े राजमार्गों की आवश्यकता है. सेब उद्योग को ई-मंडी से जोड़ा जाएगा. राज्य की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा.’

  • ‘पद्मावती’ पर भड़के गिरिराज- ‘किसी और धर्म पर फिल्म बनाकर दिखाएं’

    ‘पद्मावती’ पर भड़के गिरिराज- ‘किसी और धर्म पर फिल्म बनाकर दिखाएं’

     

     

    संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर शुरू हुआ विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, बल्कि उनकी मुसीबतें और बढ़ती ही जा रही हैं. अब यूनियन मिनिस्टर गिरिराज सिंह ने इस फिल्म पर इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है.

    गिरिराज सिंह ने कहा, ‘क्या संजय लीला भंसाली या किसी और में भी इतनी हिम्मत है कि वे दूसरे धर्मों पर फिल्म बनाएं या उनपर कोई टिप्पणी करें. ये लोग सिर्फ हिंदू गुरु, भगवान और योद्धाओं पर फ़िल्में बनाते हैं. जिसे हम और बर्दाश्त नहीं करेंगे.

    इससे पहले उमा भारती ने एक खुला ख़त लिखकर कहा था कि ये कलाकार अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर इतिहास के साथ खेल रहे हैं.

    उन्होंने लेटर में लिखा, ‘जब आप किसी ऐतिहासिक तथ्य पर फिल्म बनाते हैं तो आप उसके फैक्ट को तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं कर सकते.’ उमा भारती ने इस लेटर को सोशल मीडिया पर शेयर किया और लिखा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी की एक सीमा होती है आप इसके नाम पर कुछ भी नहीं दिखा सकते.

    पद्मावती फिल्म की शूटिंग के समय करणी सेना से इस फिल्म पर इतिहास के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे. उन्होंने फिल्म के सेट पर पहुंच भंसाली के साथ मार-पीट भी की थी. शूटिंग से शुरू हुआ यह विवाद बढ़ता ही जा रहा है. इस पूरे मामले पर भंसाली का कहना है कि ये इतिहास के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं है पर फिल्मों में मनोरंजन के लिए कुछ चीजें बदलीं जातीं हैं.

  • माल ढुलाई की लागत 12 फीसदी तक कम होगी: गडकरी

    माल ढुलाई की लागत 12 फीसदी तक कम होगी: गडकरी

     

     

    देश में माल ढुलाई की लागत (लॉजिस्टिक कॉस्ट) चिंताजनक स्तर तक अधिक है और सरकार तटीय नौवहन और अंतर्देशीय जलमार्गो को परिवहन के वैकल्पिक तरीकों को विकसित कर इसमें एक तिमाही तक की कमी लाने की दिशा में काम कर रही है.
    केंद्रीय नौपरिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को ये बात कही.

    ‘वर्ल्ड फूड इंडिया 2017’ में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत में ढुलाई का खर्च 18 फीसदी तक ऊंचा है, जबकि चीन में ये 8 से 10 फीसदी तक है.

    गडकरी ने कहा कि सरकार तटीय परिवहन और अंतर्देशीय जलमार्गो पर सड़क और रेलगाड़ी की तुलना में प्राथमिकता दे रही है, क्योंकि इसकी लागत कम होती है. उन्होंने कहा, ‘हम लागत को 12 फीसदी के करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय माल को और प्रतिस्पर्धी बनाने में मददगार होगी.’

    गडकरी, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री भी हैं. उन्होंने कहा, ‘सड़क से प्रत्येक 10 रुपए की ढुलाई लागत की तुलना में मालगाड़ी से ढुलाई का खर्च 6 रुपए और जलमार्ग से ढुलाई का खर्च 1 रुपए है. इसका मतलब ये है कि आप वर्तमान लागत के मुकाबले केवल 10 फीसदी में ही माल की ढुलाई कर सकते हैं.’उन्होंने कहा, ‘हमने 111 नदियों को अंतर्देशीय जलमार्गों के रूप में विकसित करने का फैसला किया है, इनमें से 10 नदियों पर काम शुरू हो चुका है. ये जलमार्ग ढुलाई की लागत खर्च में महत्वपूर्ण कमी करेंगे.’

  • ‘अगले हफ्ते तक पटेल आरक्षण पर अपना रुख स्पष्ट करेगी कांग्रेस’

    ‘अगले हफ्ते तक पटेल आरक्षण पर अपना रुख स्पष्ट करेगी कांग्रेस’

     

     

    गुजरात में विधानसभा चुनाव को लेकर जारी गहमागहमी के बीच पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति ने कहा है कि अगले सप्ताह तक कांग्रेस सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में पटेल समुदाय को आरक्षण देने की मांग पर अपना रुख स्पष्ट करेगी.

    शनिवार को समिति के नेता हार्दिक पटेल ने दावा किया कि कानूनी विशेषज्ञों द्वारा तैयार एक रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपी गई है. वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने एक रिपोर्ट दी है. इसमें मूल्यांकन किया जा गया है कि कोटा क्षेत्र से बाहर रहने वाले लोगों की आरक्षण की मांग कैसे पूरी हो सकती है.

    समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले महीने गांधीनगर में राज्य कांग्रेस के नेताओं के साथ इस विषय पर बात की थी. इस समिति की लगभग सभी मांगों पर एक आम सहमति है, फिर भी इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि पटेल समुदाय को ओबीसी आरक्षण के मौजूदा संवैधानिक ढांचे में कैसे शामिल किया जाएगा.

    दूसरी तरफ समस्या यह है कि अगर पटेल समुदाय को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण दिया जाता है तो इससे अोबीसी में असंतोष पनप सकता है. अभी गुजरात में लगभग 150 जातियां राज्य ओबीसी लिस्ट में हैं. राज्य की आबादी में इनकी हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है.इधर पिछले महीने अहमदाबाद में एक रैली के दौरान ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर पहले ही कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. कांग्रेस के लिए अब चुनौती ओबीसी समूहों के विरोध के बिना हार्दिक पटेल की आरक्षण की मांग को पूरा करना है.

    इसी तरह, हार्दिक पटेल और उनके समर्थकों के लिए भी चुनौती है कि वे चुनाव से पहले अपने समुदाय को एकजुट रखने के लिए कांग्रेस से आरक्षण पर ठोस आश्वासन हासिल करें.

    कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला संभवतः चुनाव के करीब होगा. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर के दूसरे हफ्ते में गुजरात में चुनाव कैम्पेन शुरू करेंगे और कांग्रेस कुछ करने से पहले भाजपा की अगली चाल का इंतजार कर रही है.

    ये भी पढ़ें:
    मोदी की सुरक्षा खर्च का ब्योरा देने से पीएमओ का इनकार
    कांग्रेस के काला दिवस की धार को कुंद करने की तैयारी मे लगी बीजेपी

  • तिहाड़ जेल में ब्रिटिश नागरिक यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हैं

    तिहाड़ जेल में ब्रिटिश नागरिक यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हैं

     

     

    दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को तिहाड़ जेल अधिकारियों से एक उत्तर देने की मांग की है, जो ब्रिटिश राष्ट्रीय कैदी द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न की शिकायत पर है।

    आतंकवादी संगठन अलकायदा के लिए युवाओं की भर्ती में कथित सहभागिता के लिए शिकायतकर्ता जेल में है।

    ‘अनुपयुक्त छुआ’

    बांग्लादेशी मूल के कैदी, सामीन रहमान ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि 2 नवंबर को तमिलनाडु के विशेष पुलिस (टीएसपी) के जवान अपने सेल की तलाश करने आए और लगभग पांच टीएसपी कर्मियों ने अपने शरीर की खोज की और “मुझे बहुत अनुचित रूप से छुआ”।

    रहमान ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा की अदालत में पटियाला हाउस कोर्ट में शिकायत दर्ज की।

    “आमतौर पर, केवल एक टीएसपी कर्मियों को मेरे शरीर को उचित तरीके से खोजते थे लेकिन कल [नवंबर। 2] सभी पांच टीएसपी कर्मियों ने (छुआ) की खोज की और मेरे निजी हिस्से को छुआ … इसके बाद उन्होंने मुझे पट्टी करने के लिए कहा और उन सभी को, एक-एक करके, मेरे गुदा को छुआ … और जानबूझकर मुझे यौन उत्पीड़ित किया, “वह आगे कथित तौर पर।

    ‘लक्षित होने के नाते’

    कैदी ने आरोप लगाया कि वह इस प्रकार के उत्पीड़न का सामना कर रहा है क्योंकि वह एक ब्रिटिश नागरिक है और अदालत से इस मामले की जांच करने और क्षेत्रीय लोकसभा अधिकारी को पांच अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा।

    जेल की आंतरिक सुरक्षा को टीएसपी के साथ सौंपा गया है।

    दिल्ली पुलिस के विशेष दल ने सितंबर में रहमान को अल-कायदा के लिए रोहिंग्या मुसलमानों की भर्ती में कथित तौर पर शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया था और उन्हें म्यांमार सेना के खिलाफ लड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया था। उन्होंने कट्टरपंथी युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए मिजोरम या मणिपुर में ठिकानों की स्थापना करने की भी योजना बनाई थी।

    अदालत ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आवेदन पर 8 नवंबर तक जवाब दें।

  • शत्रुघ्न का हमला- ‘वन मैन शो’ और ‘टू मैन आर्मी’ ना बने BJP

    शत्रुघ्न का हमला- ‘वन मैन शो’ और ‘टू मैन आर्मी’ ना बने BJP

     

     

    अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बार फिर अपनी पार्टी को सलाह दी है कि वह अगर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहती है तो उसे ‘वन मैन शो’ और ‘टू मैन आर्मी’ की तरह काम नहीं करना चाहिए.

    पटना साहिब से सांसद सिन्हा ने कहा कि भाजपा की वर्तमान नीतियों से युवा, किसान और व्यापारी असंतुष्ट हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं, किसानों और व्यापारियों की असंतुष्टि को देखते हुए उन्हें लगता है कि पार्टी को गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव में गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, उन्होंने खुद के लिए दूसरी पार्टी का विकल्प तलाशने की बात को खारिज कर दिया.

    उन्होंने कहा कि वह छोड़ने के लिए भाजपा में शामिल नहीं हुए थे. लेकिन, जब वह कहते हैं कि पार्टी वन मैन शो और टू मैन आर्मी बनकर चुनौतियों को पूरा नहीं कर सकती तो इसमें वह कोई कोताही नहीं करते. वन मैन शो और टू मैन आर्मी से उनका स्पष्ट इशारा पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से था.

    पूर्व केंद्रीय मंत्री सिन्हा ने कहा कि पार्टी को एकजुट रहना चाहिए और वयोवृद्ध नेताओं, जिन्होंने इस पार्टी को बनाने में कड़ी मेहनत की, उनके से आशीर्वाद से मजबूती से लड़ना चाहिए.उन्होंने कहा कि वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी जैसे नेताओं की क्या गलती है. क्यों उनको किनारा किया गया है. हम सभी एक परिवार की तरह हैं. अगर कोई गलती हुई है तो क्यों नहीं उसे सुधारने की कोशिश की जा रही है.

    सिन्हा ने विफलताओं की भी ईमानदारी से विवेचना पर जोर देते हुए कहा कि पार्टी इससे इनकार नहीं कर सकती कि नोटबंदी के बाद तमाम लोगों को नौकरी गंवानी पड़ी.

    उन्होंने कहा कि पिछले साल लागू की गई नोटबंदी से काले धन पर मामूली असर पड़ा. इसके बाद जीएसटी भी एक जटिल टैक्स सिस्टम के रूप में सामने आया. इससे लगता है कि केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को फायदा हुआ है. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत गिरने के बावजूद तेल की कीमते बढ़ रही है.

    उन्होंने गुजरात में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को भाजपा के पाले में नहीं ला पाने के लिए पार्टी नेतृत्व में अहंकार समा जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हार्दिक पटेल वैचारिक रूप से भाजपा के करीब थे लेकिन पार्टी ने पाटीदार आंदोलन को लेकर बुरा बर्ताव किया.

    उन्होंने राजस्थान में नौकरशाहों के खिलाफ बिना अनुमति कार्रवाई नहीं करने वाले विधेयक को लेकर राज्य की वसुंधरा राजे सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि उनके पास कई ऐसे उदाहरण हैं जिससे पता चलता है कि पार्टी नेतृत्व में अहंकार आ गया है.

    ये भी पढ़ें- 
    राहुल पर खामोश हुए ‘बिहारी बाबू’, कहा- बोलेंगे तो कुछ और ही मतलब निकलेगा
    ‘शत्रु’ के बदले सुर: देश को मोदीमय और यूपी को बताया योगीमय

  • ‘ नोटबंदी के बाद रद्द पंजीकरण वाली कंपनियों ने 17,000 करोड़ जमा कराए’

    ‘ नोटबंदी के बाद रद्द पंजीकरण वाली कंपनियों ने 17,000 करोड़ जमा कराए’

     

     

    सरकार ने कहा है कि पंजीकरण रद्द वाली करीब 35,000 कंपनियों ने
    नोटबंदी के बाद 17,000 करोड़ रुपये जमा कराए थे, जिसे बाद में निकाल लिया गया था.

    कालेधन के प्रवाह पर अंकुश के लिए उठाए गए कदमों के तहत अभी तक 2.24 लाख निष्क्रिय कंपनियों का नाम आधिकारिक रिकार्ड से हटा दिया गया है और 3.09 लाख निदेशकों को अयोग्य घोषित किया गया है.

    कंपनियों के बोर्ड में डमी निदेशकों की नियुक्त रोकने के लिए एक ऐसी व्यवस्था स्थापित की जा रही है जिसमें निदेशक के लिए नए आवेदनों को संबंधित व्यक्ति के पैन या आधार नंबर से जोड़ा जाएगा. सरकारी बयान में कहा गया है कि अभी तक 2.24 लाख कंपनियों का नाम आधिकारिक रिकार्ड से हटाया गया है. ये कंपनियां दो या अधिक साल से निष्क्रिय थीं.

    बयान में कहा गया है कि बैंकों से मिली शुरुआती सूचना के अनुसार 35,000 कंपनियों से जुड़े 58,000 बैंक खातों में नोटबंदी के बाद 17,000 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे, जिसे बाद में निकाल लिया गया. इसमें कहा गया है कि एक कंपनी जिसके खाते में 8 नवंबर, 2016 को कोई धन जमा नहीं थी, ने नोटबंदी के बाद 2,484 करोड़ रुपये जमा कराए और निकाले.पिछले साल नवंबर में सरकार ने कालेधन और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए 500 और 1,000 के नोटों को बंद कर दिया था. सरकार ने कहा कि एक कंपनी ऐसी थी जिसके 2,134 खाते थे.

    इस तरह की कंपनियों से संबंधित सूचनाओं को प्रवर्तन अधिकारियों से आगे की कार्रवाई के लिए साझा किया गया है. पंजीकरण रद्द कंपनियों के संदर्भ में राज्य सरकारों को सलाह दी गई है कि ऐसी इकाइयों की संपत्तियों के पंजीकरण की अनुमति नहीं दें.

  • शाह का तंज….‘चिट’ के सहारे किसानों की बात कर रहे हैं राहुल

    शाह का तंज….‘चिट’ के सहारे किसानों की बात कर रहे हैं राहुल

     

     

    भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राहुल गांधी पर किसानों से हमदर्दी दिखाने और उनकी बात करने  पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष कुछ गैर सरकारी संगठनों की ओर से दिए गए ‘चिट’ पर निर्भर हैं. शाह ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी गुजरात के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है.

    उन्होंने कांग्रेस को चुनौती दी कि वह विकास के मुद्दे पर चर्चा करे और विधानसभा चुनाव भी इसी मुद्दे पर लड़े. शाह ने दावा किया कि भाजपा के शासनकाल में गुजरात में किसानों की हालत सुधरी है और केंद्र सरकार की मुद्रा योजना के तहत राज्य के 25 लाख नौजवानों को रोजगार मिला.

    उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि राहुल गांधी राज्य में घूम रहे हैं और कुछ एनजीओ की ओर से दिए गए चिट के आधार पर किसानों के बारे में बात कर रहे हैं. वह नहीं जानते कि भाजपा सरकार ने वो हासिल किया जो कांग्रेस नहीं कर सकी. भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में गुजरात में 46 लाख टन दूध का उत्पादन होता था और भाजपा की सरकार में बढ़कर 122 लाख टन हो गया. शाह छह दिन के गुजरात दौरे पर हैं.

    यह भी पढ़ें-गुजरात चुनाव अभियान में तेजी लाएगी भाजपा, मोदी-शाह ने थामी कमान
    गुजरात चुनाव: राहुल नहीं, मोदी-शाह की साख दांव पर

  • VIDEO: वो मरी पड़ी रही, लोग लूटते रहे शराब की बोतलें

    VIDEO: वो मरी पड़ी रही, लोग लूटते रहे शराब की बोतलें

     

     

    महाराष्ट्र के जलगांव के भुसावल फैजपुर हाइवे पर एक हादसा हुआ, जिसमें शराब की बोतलों से लदे ट्रक ने एक बाइक को टक्कर मार दी. हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए.

    एक तरफ हादसे का शिकार हुए लोग खून से लथपथ सड़क पर पड़े थे, वे मदद की गुहार लगा रहे थे, लेकिन लोग शराब की बोतलें लूटने में व्यस्त थे.

    वहां मौजूद कुछ लोगों ने घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए आवाज़ भी दी, लेकिन कहां कोई सुनने वाला था. उनके लिए तो खून से ज्यादा नशीला पानी कीमती था. जब शराब लूट कर पूरा ट्रक खाली हो गया, तब जाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया.