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  • कमल हासन ने इस काम के लिए की पुलिस की तारीफ

    कमल हासन ने इस काम के लिए की पुलिस की तारीफ

     

     

    तमिल फिल्म अभिनेता कमल हासन ने भारी बारिश से जलमग्न हुए इलाकों में राहत कार्य के लिए पुलिस विभाग को सराहा है. हासन ने कहा अच्छे नागरिक वर्दी के साथ या उसके बिना भी चमकते हैं.

    उन्होंने आज ट्विटर पर लिखा, फर्ज से आगे बढ़कर काम करने के लिए धन्यवाद. अच्छे नागरिक वर्दी के साथ या उसके बिना भी चमकते हैं. इस तरह और भी तमिलों को काम में लगना चाहिए. अभिनेता ने पिछले हफ्ते भारी बारिश के बाद चेन्नई की एक जलमग्न सड़क पर राहत कार्य में हिस्सा ले रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक तस्वीर भी साझा की.

    एक दूसरे ट्वीट में हासन ने अपने समर्थकों से सरकारी एजेंसियों के कर्मचारियों के कार्य में व्यावधान पहुंचाए बिना राहत कार्य में हिस्सा लेने की अपील की.

    उन्होंने लिखा, मैं अपने प्रशंसकों एवं समर्थकों से सरकारी कर्मचारियों के कार्य में व्यावधान पहुंचाए बिना राहत एवं पुनर्वास कार्यों में हिस्सा लेने की अपील करता हूं. 27 अक्तूबर को उत्तरपूर्वी मानसून के पहुंचने के साथ सरकारी विभागों के कर्मचारी चेन्नई एवं पड़ोसी जिलों के निचले इलाकों में राहत कार्यों में हिस्सा ले रहे हैं.

    कमल हासन हाल के समय में राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गए हैं और तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं तथा राज्य में डेंगू फैलने को लेकर उसपर निशाना साधा है.अभिनेता ने राजनीतिक पारी शुरू करने के भी संकेत दिए हैं.

  • पीएम ने GST में बदलाव के दिए संकेत, दूर होगी व्यापारियों की परेशानी

    पीएम ने GST में बदलाव के दिए संकेत, दूर होगी व्यापारियों की परेशानी

     

     

    जीएसटी के कारण छोटे कारोबारियों को हो रही दिक्कतों को दूर करने के लिए और कदम उठाने का वादा करते हुए
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि राज्यों के मंत्रियों की एक समिति ने उनके ज्यादातर सुझावों को स्वीकार कर लिया है.

    मोदी ने कहा कि इस बारे में कोई घोषणा जीएसटी परिषद की अगले हफ्ते होने वाली बैठक में की जा सकती है. जीएसटी परिषद ने कारोबारी इकाइयों के सामने आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए पिछले महीने कुछ कदमों की घोषणा की थी. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद की आगामी बैठक 9-10 नवंबर को गुवाहाटी में होनी है.

    विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रैंकिंग में भारत की लंबी उछाल पर आयोजित एक कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि कुछ मुद्दों पर राज्यों की आपत्तियों को देखते हुए जीएसटी परिषद ने राज्यों के ​मंत्रियों और अधिकारियों की एक समिति गठित की थी.

    मोदी ने कहा कि व्यापारियों और छोटे कारोबारियों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर विचार करने के लिए राज्यों के मंत्रियों का समूह गठित किया गया था. समूह ने उनके ज्यादातर सुझावों को सकारात्मक रूप से स्वीकार कर लिया है.समूह की सिफारिशों को जीएसटी परिषद की 9-10 नवंबर को होने वाली बैठक में स्वीकार कर लिए जाने की उम्मीद है. विश्व बैंक की रैंकिंग का ज़िक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इस नवीनतम रिपोर्ट में माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी के कार्यान्वयन पर विचार नहीं किया गया है.

    उन्होंने कहा, ‘आप सब जानते हैं कि जीएसटी भारतीय अर्थव्यवसथा में सबसे बड़ा कर सुधार है. इसका असर कारोबार करने के अनेक पहलुओं पर हुआ है. जीएसटी के साथ हम एक आधुनिक कर प्रणाली की ओर बढ़ रहे हैं जो कि पारदर्शी, स्थिर और टिकाऊ है.’ उन्होंने कहा कि अनेक सुधार पहले ही हो चुके हैं लेकिन इन्हें स्थिर होने के लिए समय चाहिए और उसके बाद ही विश्व बैंक उन पर विचार करता है. मोदी ने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत की रैंकिंग में लगातार सुधार होगा.

  • भारत ने 918 किलो की खिचड़ी के साथ बनाया विश्व रिकॉर्ड

    भारत ने 918 किलो की खिचड़ी के साथ बनाया विश्व रिकॉर्ड

     

     

    भारतीय व्यंजनों को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाने के उद्देश्य से एक अनूठा प्रयास किया गया है. एक विशाल कढ़ाई में मल्टी ग्रेन को मिलाकर 918 किलो की
    खिचड़ी बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया गया.

    इस पूरी प्रक्रिया में सात फीट के व्यास वाली एक हज़ार लीटर की स्टेनलेस स्टील की कढ़ाई में भाप का प्रयोग कर व्यंजन को धीमी आंच पर पकाया गया. इस कढ़ाई को उठाने के लिए क्रेन का इस्तेमाल किया गया और वजन कर इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज़ कराने योग्य बनाया गया.

    इस मौके पर केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि इस कार्यक्रम के ज़रिए हमारा मकसद खिचड़ी को विश्व स्तर पर बढ़ावा देना है. इसमें प्रयोग होने वाले चावल, बाजरा, रागी, ज्वार और अमरनाथ के बाज़ार को बढ़ावा मिलेगा जिसका सीधा फायदा भारतीय किसानों को होगा.

    उन्होंने कहा, ‘हमने खिचड़ी को विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए इस्तेमाल किया है ताकि ये दिखाया जाए कि हमारे व्यंजन विविध हो सकते हैं लेकिन हमारे पास एक समानता है.’ व्यंजन को देश की एकता का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें विश्व का सबसे पसंदीदा व्यंजन बनने की क्षमता है.इस मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि इस व्यंजन पर ज़ोर देने से विश्व बाज़ार में भारतीय भोजन को नया सम्मान मिलेगा. रामदेव ने कहा, ‘सूक्ष्म पोषक तत्वों की उच्च संख्या की वजह से ये भारतीयों का सुपर खाना है और अंतर्राष्ट्रीय सुपर भोजन बनने की क्षमता रखता है.’

    व्यंजन की तैयारी का काम कर रहे शेफ संजीव कपूर और अक्षय कुमार ने कहा कि आज दुनिया के दर्शकों के लिए एक स्वस्थ भोजन के रूप में खिचड़ी का फिर से आविष्कार किया गया है. उन्होंने बताया कि व्यंजन के एक हिस्से को पैक कर नुस्खे के साथ भारत में विदेशी मिशन के प्रमुखों को भेजा जाएगा.

    हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि इस व्यंजन को गुरु नानक देव जी के गुरुपर्व के शुभ अवसर पर लगभग दस हज़ार व्यक्तियों को वितरित किया जाएगा. दिल्ली लंगर सेवा समिति के अध्यक्ष बिकी धींगरा ने कहा कि वो एक निश्चित स्थान पर लगभग 5,000 वंचित लोगों को भोजन वितरित करेंगे.

  • टी 20 के दौरान ग्रिड पावर लाइट्स स्टेडियम

    टी 20 के दौरान ग्रिड पावर लाइट्स स्टेडियम

     

     

    पहली बार, भारत-न्यूजीलैंड ट्वेंटी 20 इंटरनेशनल के दौरान बुधवार को फिरोज शाह कोटला मैदान की फ्लडलाइट ग्रिड पावर से पूरी तरह सक्रिय हो गई थी, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीईपीएल) के बिजली डिस्काक ने कहा।

    वायु प्रदूषण के कारण डीजल संचालित जनरेटर पर प्रतिबंध लगाने वाले राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के हालिया आदेश को देखते हुए कोई जनरेटर सेट नहीं किया गया था। इससे पहले, दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ के पास स्टेडियम में 1,800 किलोवाट का बिजली कनेक्शन था, जबकि बाकी आवश्यकता जनरेटर के माध्यम से हुई थी।

    आईओसीएक्स के प्रवक्ता ने कहा कि बीओपीएल को 28 अक्टूबर को 3500 किलोवाट का अतिरिक्त भार लगाने के लिए और अगले दिन 500 किलोवाट के एक अतिरिक्त भार के लिए आयोजकों ने संपर्क किया था, उन्होंने कहा कि सिर्फ तीन दिनों में 5,800 किलोवाट का कुल भार व्यवस्थित किया गया था ।

  • छोटे व्यवसायियों, किरायेदारों के लिए बिजली राहत

    छोटे व्यवसायियों, किरायेदारों के लिए बिजली राहत

     

     

    राज्य के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने शुक्रवार को घोषणा की कि यदि उनके उपभोग 5 किलोवाट (केडब्ल्यू) तक सीमित हैं तो उनके घरों से छोटे व्यवसाय चलाने वाले पांच लाख से ज्यादा लोग जल्द ही घरेलू बिजली कनेक्शन प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

    श्री जैन ने कहा कि राजधानी में कई लोग अपने घर से छोटे व्यवसाय चलाने से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे थे, लेकिन बिजली कनेक्शनों से अक्सर वाणिज्यिक कनेक्शन लेने के लिए दबाव डाला जाता था।

    “यदि आपका पावर कनेक्शन 5 किलोवाट से कम है, तो आप घरेलू कनेक्शन प्राप्त करने में सक्षम होंगे। बहुत से लोग पहले ही ऐसा करते हैं (घरेलू कनेक्शन का उपयोग करें) कानून के डर से, लेकिन यह अब कानूनी होगा, “श्री जैन ने कहा।

    उन्होंने कहा कि दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन (डीईआरसी) ने 2017-18 के अपने टैरिफ कार्यक्रम में घोषित निर्णय, बिजली के डिस्काउंटों को दिया गया है और जल्द ही इसका कार्यान्वयन किया जाएगा।

    सब्सिडी लाभ

    बिजली मंत्री ने किराए के आवास में रहने वाले लोगों के लिए प्रीपेड बिजली मीटर की स्थापना की घोषणा की ताकि वे बिजली सब्सिडी का लाभ उठा सकें जो कि वर्तमान में जमींदारों को जाता है।

    यह अगले तीन महीनों में किया जाएगा, उन्होंने कहा।

    अक्टूबर में, श्री जैन ने बिजली विभाग के अधिकारियों और डिस्मोम्स के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक आयोजित की थी ताकि किरायेदारों को बिजली सब्सिडी के लाभ का विस्तार करने के तरीके के साथ आ सके।

    घरेलू उपभोक्ताओं

    मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि किरायेदारों को आम आदमी पार्टी (एएपी) सरकार की सब्सिडी से भी लाभ मिले, जो सभी घरेलू उपभोक्ताओं पर लागू होता है जो हर महीने 400 इकाइयों का इस्तेमाल करते हैं।

    मंत्री ने कहा कि प्रीपेड बिजली मीटर का विकल्प और दस्तावेज़ीकरण की सरलीकरण केवल किरायेदारों को बिजली सब्सिडी के लाभ का लाभ नहीं देगा, बल्कि इससे भी ज़मीनदारों को लाभ होगा और आसानी से बिलिंग की प्रक्रिया में सहायता मिलेगी।

    श्री जैन ने कहा, “डिस्मोक्स को इन प्रीपेड मीटर को अगले तीन महीनों में प्राप्त करने के लिए कहा गया है।”

    स्वच्छ विद्युत समझौता

    ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय ने 201 9 तक 1,000 मेगावाट (मेगावाट) स्वच्छ ऊर्जा की खरीद के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

    “यह एएपी सरकार की सौर नीति की ओर एक कदम है। तीन डिस्कॉम के साथ चर्चा लगभग छह महीने तक चल रही थी और अब वे सहमत हुए हैं। मूल सिद्धांत समझौते किए गए हैं, “उन्होंने कहा।

    केंद्र सरकार की एजेंसी, सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) लिमिटेड, परियोजना के लिए टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू करने के लिए नोडल एजेंसी होगी।

    मंत्री महोदय ने कहा कि साफ बिजली लागत 3 ₹ 3 प्रति यूनिट के नीचे होने की संभावना है। “हमारी उम्मीद यह है कि लागत 3 रुपये प्रति यूनिट के नीचे होगी। वर्तमान में दिल्ली में बिजली की खरीद की औसत लागत 5.50 प्रति यूनिट के बारे में है, “श्री जैन ने कहा।

    एएपी सरकार सिंचाई के प्रयोजनों के लिए सौर पंप खरीदने के लिए किसानों को सब्सिडी प्रदान करने की भी योजना बना रही है।

  • कांग्रेस की बी टीम है AAP : मनोज तिवारी

    कांग्रेस की बी टीम है AAP : मनोज तिवारी

     

     

    भाजपा ने दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख तय करने के मामले में आप पर निशाना साधा है. भाजपा ने आम आदमी पार्टी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में अपनी ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम को अपना प्रतिनिधि बनाने को लेकर उसे कांग्रेस की बी टीम बताया है.

    दिल्ली भाजपा के प्रमुख मनोज तिवारी ने बताया, चाहे चिदंबरम का दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार को बचाने की खबरें हों या निर्वाचन आयोग से संपत्ति या अन्य बातें छिपाने की खबरें हों, हमें अब कुछ भी हैरान नहीं करता.

    तिवारी ने आरोप लगाया, हमने शुरू से कहा है कि आम आदमी पार्टी (आप) कांग्रेस की ‘बी’ टीम है और अब चिदंबरम के केजरीवाल सरकार का वकील बनना स्वीकार करने की खबरें साफ करती हैं कि कांग्रेस ने खुले तौर पर अपनी ‘बी’ टीम को बचाने का फैसला कर लिया है.

    उन्होंने कहा कि जल्द ही अजय माकन के नेतृत्व वाली दिल्ली कांग्रेस का आप में विलय होते नजर आ सकता है. तिवारी की यह टिप्पणी चिंदबरम द्वारा उस न्यायिक टीम में शामिल होने के बाद आई है जो दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस करेगी जिसमें कहा गया है. कि उपराज्यपाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का प्रशासनिक प्रमुख होता है.सर्वोच्च न्यायालय में चिदंबरम द्वारा आप सरकार का प्रतिनिधित्व करने की घोषणा आप सरकार के स्थायी सलाहकार राहुल मेहरा ने सोमवार को की थी.

    गृह मंत्रालय द्वारा मई 2016 में एक अधिसूचना को पारित करने के बाद आप और केंद्र सरकार आमने-सामने आ गए, जिसके तहत सार्वजनिक आदेश, पुलिस और सेवाओं जैसे मामलों में दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग को अप्रत्याशित अधिकार दिए गए थे.

  • 2022 तक भ्रष्टाचार और गरीबी मुक्त हो जाएगा भारत, बशर्ते….

    2022 तक भ्रष्टाचार और गरीबी मुक्त हो जाएगा भारत, बशर्ते….

     

     

    सरकार को सलाह देने वाली संस्था नीति आयोग ने साल 2022 तक गरीबी, गंदगी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद और सांप्रदायिकता मुक्त नए भारत की परिकल्पना की है. नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने गवर्नर्स कॉन्फ्रेंस में न्यू इंडिया @ 2022 डॉक्युमेंट पेश किया.

    इसके मुताबिक अगर भारत 8 प्रतिशत की वृद्धि दर से आगे बढ़ना जारी रखता है तो 2047 तक विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में होगा. इसके साथ ही हम साल 2022 तक ‘कुपोषण मुक्त भारत’ का सपना भी पूरा कर लेंगे.

    दस्तावेज में दिखाया गया है कि सरकार 2019 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 500 से अधिक आबादी वाले (विशेष इलाकों में 250 से अधिक की आबादी वाले) गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ सकती है. साथ ही, 2022 तक भारत में 20 विश्वस्तरीय उच्च शिक्षण संस्थानों की परिकल्पना की गई है.

    इसमें डॉक्युमेंट कहा गया है कि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) के तहत चयनित सभी गांव 2022 तक आदर्श गांव का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं, साथ ही यह भी कहा गया है कि हमें 2022 तक भारत को गरीबी मुक्त बनाने का संकल्प लेना चाहिए.

  • क्या शहीद BSF कमांडर दीपक मंडल हुए साजिश का शिकार !

    क्या शहीद BSF कमांडर दीपक मंडल हुए साजिश का शिकार !

     

     

    यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर न्यूज़ 18 इंडिया के टीम की रिपोर्ट का ताना बाना बुना गया है…न्यूज़ 18  इंडिया यह अपने आप नहीं कह रहा है, बल्कि शहीद दीपक मंडल के घरवालों के आरोप और सबसे जरूरी त्रिपुरा पुलिस की इस मामले में खुफिया जांच रिपोर्ट के आधार पर कह रहा है.

    क्या है यह पूरा मामला ये हम आपको आगे बताएंगे लेकिन सबसे पहले हम त्रिपुरा पुलिस कि वह खुफिया जांच रिपोर्ट के बारे में आपको बताते हैं, जो शहीद दीपक मंडल की हत्या के मामले में ये शक जाहिर करती है. त्रिपुरा पुलिस की रिपोर्ट यह कहती है की हत्या की नियत से तस्कर आए थे उन्होंने भारत बंग्लादेश सीमा पर त्रिपुरा में ड्यूटी के दौरान दीपक मंडल पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की. पहली कोशिश में वह सफल नहीं हुए और दूसरी कोशिश में वो अपनी इस हत्या की कोशिश में कामयाब हुए.

    यानी भारत बांग्लादेश सीमा पर मौजूद तस्करों ने एक सोची समझी साजिश के तहत एक जांबाज अधिकारी को अपना निशाना बनाया था.

    क्या था पूरा मामलादरअसल, भारत-बांग्लादेश सीमा पर त्रिपुरा में बीएसएफ की 145 वीं बटालियन में तैनात दीपक मंडल पिछले 5 सालों से उस इलाकों में लगातार तस्करों से लोहा ले रहे थे. 16 अक्टूबर को रात में ड्यूटी के दौरान उन्होंने एक बार फिर तस्करों से लोहा लिया लेकिन इस बार उनकी कोशिश अंतिम कोशिश साबित हुई, तस्करों को रोकने की कोशिश में दीपक मंडल बुरी तरीके से जख्मी हो गए और 4 दिन बाद यानी 20 अक्टूबर को जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद वह शहीद हो गए.

    बीएसएफ यूनिट कमांडर की शहादत से ये सवाल उठता है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्कर क्या इतने मजबूत हो गए हैं कि वो लगातार वहां पर तैनात बीएसएफ यानी सीमा सुरक्षा बल जवानों पर हमला करते रहते हैं. और कई वजहों से चाह कर भी हमारे देश के जवान उनके हमलों उचित जवाब नहीं दे पाते. नतीजा यह होता है कि बीएसएफ को भारी नुकसान पहुंचता है और उनके जवान या तो घायल हो जाते हैं, या फिर शहीद होते हैं. रही सही कसर बीएसएफ यानी जिस फोर्स में वह तैनात हैं वो पूरा कर देती है क्योंकि तस्करों के खिलाफ ऑपरेशन को वो नियमित मुठभेड़ मानती है जबकि शहीद के परिजन और ऐसी रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करते हैं कि तस्कर साजिशन फोर्स के जवानों और अधिकारियों को अपना निशाना बनाते हैं.

    बीएसएफ का कहना है दीपक की शहादत तस्करों के साथ मुठभेड़ की वजह से हुई, इस बाबत बीएसएफ ने ट्वीट भी किया था 20 अक्टूबर को जब दीपक मंडल शहीद हो गए थे. बीएसएफ के रुख से और सरसरी तौर पर इस घटना को देखकर दीपक मंडल की शहादत एक मुठभेड़ ही लग रही थी लेकिन न्यूज 18 इंडिया दीपक की शहादत के बाद बंगाल के नादिया जिले के उस गांव में गया जहां उनके परिजन हैं.

    यहां भी कहानी ने कुछ दूसरा रुख लिया. उनके परिजनों का कहना है कि दीपक की शहादत महज एक मुठभेड़ नहीं है. बल्कि उन्हें तस्करों मे सोची समझी साजिश के तहत निशाना बनाया, दीपक के भाई दिलीप मंडल कहते हैं कि जैसे निशान दीपक के शरीर पर निशाना थे उससे तो उनके मौत की वजह की दलील पर यकीन कर पाना मुश्किल है फिलहाल. बात करते-करते शहीद के परिजनों की आंखों में आंसू आ जाते हैं, और वजहें भी हैं इसके पीछे.

    अब नजर डालते हैं शहीद दीपक मंडल के इस सर्विस रिकॉर्ड पर. पिछले 6 साल से इस दुर्दांत इलाके में दीपक मंडल तैनात थे और कई बार तस्करों से उन्होने लोहा लिया, तस्करों को धूल चटाई और काफी हद तक इस इलाके में उन पर काबू पाया. मंडल के परिजन यह आशंका जता रहे हैं क्यों मंडल की ही मौत हुई जबकि उनके साथ उनकी टीम के बाकी के सदस्य थे. अगर उनकी मौत में कुछ गड़बड़ है तो कसूरवारों को सजा मिले. शहीद दीपक की पत्नी सुदेशना यह कहती है कि जो भी कसूरवार है उसे जल्द पकड़ा जाए और सजा मिले.

    क्या है परिवारवालों को शक
    उनके घरवाले कहते हैं कि दीपक के शरीर पर चार निशान थे दाहिनी आंख के ऊपर, चिन के नीचे, कोहनी पर और हाथ पर इसके अलावा उनके पैर पर भी चोट के निशान थे. घर वालों का यह सवाल है कि अगर बीएसएफ का जवान जूता पहनता है तो उसके पैर में कैसे चोट आती है जब वह गाड़ी से कुचला जाता है क्योंकि गाड़ी के कुचले जाने से इतनी हल्की चोटें नहीं आती. परिजनों ने ये बातें स्थानीय सांसद को भी इस चिट्ठी के जरिए बताई हैं जो कि बीएसएफ पर तो सवाल उठा ही रहे हैं साथ ही आनेवाले दिनों में इसे प्रदेश की मुख्यमंत्री, गृह मंत्रालय और संसद में इसे उठाएंगे. तपश मोंडल जो कि नादिया से सांसद हैं, वो कहते हैं कि बीएसएफ की कहीं न कहीं गलती है. मुझे लग रहा है कि कुछ छुपाया जा रहा है.

    बीएसएफ खामोश है
    बीएसएफ यानी सीमा सुरक्षा बल जिसका ये अधिकारी था हमने उस फोर्स के अधिकारियों से इन आरोपों और इस पूरे प्रकरण के बारे में पूछा तो उनकी ओर से हमें कोई जवाब नहीं मिला, इस बारे में हमने बीएसएफ को ईमेल किया लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला. अब सवाल ये उठता है कि दीपक मंडल की शहादत क्या तस्करों के एक बड़े सिंडिकेट का तो हिस्सा नहीं है. क्यों खामोश है बीएसएफ, क्यों लगातार उसी इलाके में अधिकारियों की जान जाती रहती है. ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब सबको चाहिए आनेवाले दिनों में. हम आपको ये भी बता दें कि शहीद दीपक मंडल की शहादत का ये अकेला मामला नहीं है हम आगे आपको बताएंगे कि इसी इलाके में तैनात रहे और शहीद हो चुके कुछ और जांबाजों की दास्तान.

    और भी शहीद बीएसएफ जांबाजों के परिजनों का यही है आरोप
    अगर शहीद दीपक मंडल इस जगह कुछ दिनों पहले तैनात थे तो करीब 4 साल पहले यानी 2014 में इसी जगह भारत बंग्लादेश सीमा पर त्रिपुरा में से कुछ ही दूरी पर तैनात थे बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट फूलचंद. उनके परिजनों के मुताबिक 25 अक्टूबर 2014 को ड्यूटी के दौरान उनकी तस्करों से मुठभेड़ हुई, जिसके बाद वो बुरी तरीके से घायल हो गए. एक महीने तक अस्पताल में जिन्दगी और मौत से जंग लड़ने के बाद उन्होने दम तोड़ दिया. उनके परिजनों का आरोप है कि भारत बंग्लादेश सीमा पर मौजूद तस्करों ने उनकी हत्या की है. इस बाबत उन्होने बीएसएफ और गृह मंत्रालय में शिकायत भी की है लेकिन अभी तक उनकी मांगों को नहीं सुना गया.

    BSF के जांबाजों के लिए नासूर बन चुके भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूद तस्कर बेहद खतरनाक है, कम से कम आंकड़े तो इस बात का गवाह है किस तैयारी से वह आते हैं कैसे वह अपने काम को अंजाम देते हैं और क्यों सरकारी नीतियों की वजह से हमारे जवान उन पर उन्हीं के अंदाज में कार्यवाही नहीं कर पाते हैं या यूं कहें कि पुख्ता कार्यवाही नहीं कर पाते.

    क्या कहते हैं आंकड़े
    इस साल 66 बार तस्करों ने BSF की फोर्स पर भारत-बांग्लादेश सीमा में हमला किया है, जिसमें 88 जवान घायल हुए हैं जबकि दो जवानों की मौत हुई है. यह केवल इस साल का आंकड़ा नहीं है पिछले 4 सालों के अगर बात करें तो यही कहानी नजर आती है. 2013 में जहां 112 जवान घायल हुए थे तस्करों के हमलों में और 3 जवानों की मौत हुई थी, तो 2014 में 88 जवान घायल हुए थे जबकि एक की मौत हुई थी, वहीं 2015 में 102 जवान घायल हुए थे जबकि दो जवानों की मौत हुई थी.

    हालांकि 2016 में एक भी जवान की मौत नहीं हुई थी लेकिन इस साल भी तस्करों के हमले जारी रहे और 109 जवान घायल हुए, इस फोर्स से जुड़े पूर्व अधिकारी भी मानते हैं कि बहुत कुछ हो वहां पर ऐसे हालात होते हैं कि चाह कर भी हमारे देश के जवान तस्करों पर उन्हीं के अंदाज में उनको जवाब नहीं दे पाते.

    जे पी सिन्हा, पूर्व बीएसएफ आईजी यह मांगते हैं कि उन जगहों पर देश के जवान उन्हीं तस्करों के अंदाज में जवाब नहीं दे पाते. तस्कर तस्करी का सामान अवैध तरीके से भारत की सीमा से बंगलादेश में ले जाते हैं और बांग्लादेश की सीमा में भारत से लाते हैं. पूरी तैयारी इनकी होती है, ये अपने साथ डंडे, ईंट पत्थर और घातक हथियार लेकर आते हैं. सरकारी नीतियों की वजह से फोर्स के जवान इन पर कड़ा प्रहार नहीं कर पाते हैं जबकि यह मौका पाते ही कड़े से कड़ा प्रहार करने से नहीं चूकते. इन जांबाजों की शहादत से ये उम्मीद की जानी चाहिए कि हालात में कुछ सुधार हो.

  • तीन दशक में अपर मिडिल क्लास वालों का देश होगा भारतः विश्व बैंक

    तीन दशक में अपर मिडिल क्लास वालों का देश होगा भारतः विश्व बैंक

     

     

    देश में प्रति व्यक्ति आय में हो रही वृद्धि की तारीफ करते हुए विश्व बैंक की CEO क्रिस्टलीना जॉर्जिया ने शनिवार को कहा कि उन्हें इसमें कोई शक नहीं दिख रहा है कि भारत 2047 तक उच्च मध्यम आय वाला देश होगा. उस वक्त वह अपनी आजादी की सौंवीं वर्षगांठ मना रहा होगा.

    प्रवासी भारतीय केंद्र में इंडियाज बिजनेस रिफॉर्म्स सम्मेलन में जॉर्जिया ने कहा कि पिछले तीन दशकों से भारत की प्रति व्यक्ति आय चार गुना बढ़ गई है. इसमें कोई शक नहीं है कि 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता का शताब्दी समारोह मना रहा होगा, उस समय वह एक उच्च-मध्य आय वाला देश होगा.

    जॉर्जिया ने भारत में व्यापार करने की आसानी के मामले में 30 पायदान की छलांग की भी तारीफ की.  उन्होंने कहा कि हम यहां एक बहुत प्रभावशाली उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए हैं. पिछले 15 सालों में व्यापार करने में आसानी के मामले में अचानक महज एक साल में 30 पायदान की छलांग बहुत दुर्लभ है. जैसे कि क्रिकेट में शतक लगाना मुश्किल है.

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के लिए उनकी प्रशंसा की, जिसके कारण व्यापार करने की आसानी में भारत की रैंकिंग बढ़ी है. विश्व बैंक की CEO ने कहा, “आज गुरु नानक की जयंती भी है, जो मुझे उनके शब्दों की याद दिलाता है. जो बीज बोया जाता है, उसी का पौधा उगता है.”यह भी पढ़ें-
    भारत की ईज ऑफ डूइंग रेटिंग सुधरने से आपको होंगे ये चार फायदे!
    ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर राहुल का तंज, लिखा- ‘जेटली, ये ख्याल अच्छा है’

  • लोकायुक्त एजेंसी है सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में

    लोकायुक्त एजेंसी है सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में

     

    लखनऊ। उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि लोकायुक्त एजेंसी ‘सूचना के अधिकार अधिनियम 2005’ के दायरे में आती है। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार ने तीन अगस्त 2012 को एक अधिसूचना जारी कर लोकायुक्त एजेंसी को सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया था। न्यायालय ने सरकार के इस कृत्य को अवैध एवं अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जारी की गयी अधिसूचना बताते हुए गुरूवार को इसे रद्द कर दिया और प्रदेश के कथित भ्रष्ट तंत्र पर जोरदार हमला किया।

    न्यायालय ने कहा कि समय आ गया है कि सरकार गलत तरीके से कमायी गयी सम्पत्ति को जब्त करने का प्रावधान बनाकर उसे सख्ती से लागू करे। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति वीरेंद्र कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर की ओर से दायर याचिका को मंजूर करते हुए पारित किया। याची ने तीन अगस्त 2012 की उक्त अधिसूचना को चुनौती देते हुए कहा था कि राज्य सरकार का आदेश अवैध एवं मनमाना है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि आरटीआई अधिनियम की धारा 24 के तहत लोकायुक्त एजेंसी खुफिया या सुरक्षा संगठन की परिभाषा के दायरे में नहीं आती, लिहाजा सरकार उसे आरटीआई के दायरे से बाहर नहीं कर सकती है।

    उन्होंने कहा कि लोकायुक्त के समक्ष नौकरशाह एवं बड़े बड़े अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामले भी जांच के लिए आते है और जांच की प्रगति या अन्य कार्रवाई की सूचना अगर आम जनता को मिले तो हर्ज क्या है? दूसरी ओर सरकारी वकीलों ने याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए दलील दी कि सरकार की अधिसूचना उचित एवं कानूनसम्मत है। अदालत ने सरकारी वकीलों की दलील नकारते हुए कहा कि अधिसूचना में लोकायुक्त एजेंसी को आरटीआई के दायरे से बाहर करने के पक्ष में कोई कारण नहीं दिया गया है जो समझ से परे है। अदालत ने कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 24 के तहत लोकायुक्त एजेंसी को खुफिया या सुरक्षा संस्थान मानने से इनकार किया गया है ताकि उसे आरटीआई के दायरे से बाहर रखा जा सके।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब कोई प्रावधान जनता के हित के लिए बनाया गया हो तो उसे केवल इसलिए दरकिनार नहीं किया जा सकता कि ऐसा करने का सरकार को हक है। उक्त अधिसूचना केवल संविधान प्रदत्त मूलभूत अधिकारों का हनन है। अदालत इस बात को संज्ञान में ले सकती है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में भ्रष्टाचार के मामले सामने आये हैं, लेकिन ऐसा विरले ही देखा गया है कि उसकी प्रभावकारी जांच हुई हो या मुकदमा चलाया गया हो।