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  • हिमाचल की गरीब जनता के करोड़पति नेता

    हिमाचल की गरीब जनता के करोड़पति नेता

     

     

    गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. प्रधानमंत्री से लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तक रैली करने में जुटे हैं. गुजरात में जहां 12 दिसंबर मतदान की तारीख है, वहीं हिमाचल में 9 नवंबर को मतदान निपट जाएंगे. छोटा राज्य होने के चलते एक ही चरण में हिमाचल के चुनाव खत्म हो जाएंगे.

    पहाड़ी राज्य होने के कारण वहां जनता की समस्याएं अलग हैं. देश की तुलना में सामाजिक-आर्थिक मानकों के तहत हिमाचल की स्थिति ज़्यादा बेहतर नहीं है. हिमाचल में आम आदमी की तनख़्वाह सिर्फ 1,47,277 सालाना है जबकि ADR रिपोर्ट के मुताबिक, वहां चुनाव लड़ रहे 47% उम्मीदवार करोड़पति हैं. जानिए हिमाचल की गरीब जनता के करोड़पति नेताओं के बारे में. कौन सी पार्टी के उम्मीदवार हैं सबसे अमीर और कौन से वो प्रत्याशी हैं जिनकी माली हालाता है काफी खस्ता?

    लिंगानुपात और बेरोज़गारी में खराब हालातआंकड़ों की नज़र से देखें तो लिंगानुपात के मामले में हिमाचल की स्थिति भारत की तुलना में अच्छी नहीं है. भारत में एक हज़ार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 914 है जबकि हिमाचल में ये आंकड़ा 906 है.

    बेरोज़गारी की बात करें तो स्टेट एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज, दिसंबर 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल में 8,24,478 युवा बेरोज़गार हैं. देश में जहां बेरोज़गारी की दर 4.5% है तो हिमाचल में ये स्थिति 4.9% है. पहाड़ी राज्य होने के चलते रोजगार के अवसर यहां कम हैं. प्रदेश की ग्रोथ रेट की बात करें तो 2016-17 के दौरान ये 6.8% रही. जो बीते साल 2015-16 की तुलना में 1.3% कम रही.

    करोड़पति नेताओं की बौछार
    हिमाचल में नामांकन की प्रक्रिया ख़त्म हो चुकी है. उम्मीदवार चुनाव प्रचार में जी जान से जुटे हैं. वहां चुनाव लड़ रहे कुल प्रत्याशियों में से 158 ऐसे हैं जो करोड़पति हैं.

    सबसे ज़्यादा करोड़पति नेता मैदान में उतारने वाली पार्टी कांग्रेस है. उसकी टिकट पर चुनाव लड़ने वाले ऐसे प्रत्याशियों की संख्या 59 है.

    भाजपा की बात करें तो उन्होंने इस बार 47 करोड़पति प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. इसके बाद बसपा ने 9, CPI(M) ने 3 और सीपीआई ने 1 करोड़पति उम्मीदवार को अपना प्रत्याशी बनाया है.

    5 करोड़ से ज़्यादा संपत्ति वाले 16% प्रत्याशी
    ADR की रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल चुनाव में ताल ठोंक रहे 16% प्रत्याशी ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 5 करोड़ से ऊपर है. वहीं 2 से 5 करोड़ संपत्ति वाले प्रत्याशियों की तादाद भी 16% है.

    50 लाख से 2 करोड़ संपत्ति वाले उम्मीदवार की बात करें तो ये संख्या सबसे ज़्यादा 31% है. औसत संपत्ति वाले नेताओं की बात करें तो कांग्रेस 8.56 करोड़ के साथ सबसे आगे है. जबकि भाजपा के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 5.31 करोड़ है.

    बलवीर सबसे अमीर और नंद कुमार सबसे गरीब
    सबसे अमीर और सबसे गरीब की कसौटी पर उम्मीदवारों को कसा जाए तो ये मुकाबला काफी हैरान कर देने वाला है. हिमाचल विधानसभा चुनाव में ताल ठोंक रहे सभी उम्मीदवारों में सबसे अमीर चौपाल से भाजपा प्रत्याशी बलवीर सिंह वर्मा हैं. उनकी कुल संपत्ति 90 करोड़ है. उनके बाद नंबर आता है शिमला ग्रामीण से चुनाव लड़ रहे विक्रमादित्य सिंह का. कांग्रेस के इस प्रत्याशी की कुल संपत्ति 84 करोड़ है.

    निदर्लीय उम्मीदवारों में कांगड़ा से चुनाव लड़ रहे डॉ राजेश शर्मा के पास सबसे ज़्यादा संपत्ति है. उनकी कुल संपत्ति का आंकड़ा 74 करोड़ है. सबसे कम संपत्ति वाले नेताओं की बात करें तो उनका नाम नंद कुमार है. समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुराह से चुनाव लड़ रहे नंद कुमार की कुल संपत्ति महज़ 1000 रुपए है. दूसरे नंबर पर हैं मंडी से चुनाव लड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशी चुड़ामणी, जिनकी संपत्ति महज़ 3 हज़ार है.

  • ‘आधार’ है तो महीने में करा सकेंगे 12 ऑनलाइन टिकट

    ‘आधार’ है तो महीने में करा सकेंगे 12 ऑनलाइन टिकट

     

     

    भारतीय रेलवे ने आधार सत्यापित यात्रियों के लिए आईसीआरटीसी पोर्टल पर हर महीने बुक कराए जाने वाले टिकटों की संख्या छह से बढ़कार 12 कर दी है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

    माना जा रहा है कि यह कदम यात्रियों को आईआरसीटीसी पोर्टल पर अपने ऑनलाइन बुकिंग एकाउंट को आधार से जोड़ने को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है.

    आईआरसीटीसी के अधिकारियों ने बताया कि यात्री अब भी आधार कार्ड सत्यापन के बगैर महीने में छह टिकट बुक करा सकते हैं. यदि यह संख्या छह के पार जाती है जो यूजर और एक यात्री का आधार नंबर आईआरसीटीसी पोर्टल पर डालना होगा.

    उन्होंने बताया कि आईआरसीटीसी पोर्टल पर यूजर को ‘माई प्रोफाइल’ श्रेणी के तहत आधार केवाईसी क्लिक करना होगा और आधार संख्या डालनी होगी. उसे ‘वन टाइम’ पासवर्ड मोबाइल नंबर पर मिलेगा. इसके अलावा, यात्रा पर जा रहे लोगों में किसी एक की आधार संख्या भी मास्टर लिस्ट के तहत इसी तरह सत्यापित करानी होगी.अधिकारियों ने बताया कि यूजर सत्यापित यात्रियों के नामों को मास्टर लिस्ट में स्टोर कर सकते हैं. प्रति महीने छह से अधिक टिकट बुक कराने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ऐसा करना चाहिए. इस कदम से टिकट बुकिंग में गड़बड़ी दूर होगी क्योंकि दलाल और यात्रा एजेंट फर्जी यूजर आईडी नहीं बना पाएंगे.

  • माहौल को सांप्रदायिक बनाने की ‘हताश कोशिश’ कर रहे हैं शाह: सिद्धरमैया

    माहौल को सांप्रदायिक बनाने की ‘हताश कोशिश’ कर रहे हैं शाह: सिद्धरमैया

     

    बेंगलुरू। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने ‘टीपू जयंती’ मनाने को लेकर उनकी सरकार पर हुए हमले के बाद अमित शाह पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा प्रमुख विधानसभा चुनाव से पहले माहौल में सांप्रदायिकता फैलाने की ‘हताश कोशिश’ कर रहे हैं। गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष ने कल ही टीपू जयंती को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा था। इसपर जवाब देते हुए सिद्धरमैया ने आज दावा किया चुनाव ‘‘शाह जैसे पर्यटकों’’ को यहां खींच लाया है, जो राज्य के बारे में अपनी अनभिज्ञता दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘हम नव कर्नाटक के 26 नेताओं और निर्माताओं की जयंती मनाते हैं।

    सांप्रदायिकता फैलाने की हताश कोशिश में अमित शाह ने सिर्फ टीपू जयंती को निशाना बनाया।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘चुनाव आ रहे हैं। यह अमित शाह जैसे पर्यटकों को खींच लाता है। वह हमारे राज्य के बारे में अनभिज्ञता दर्शाते हैं और कन्नड़ राज्योत्सव को ‘कर्नाटक महोत्सव’ कहते हैं। रैली में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बी. एस. येद्दियुरप्पा की अगुवाई में 75 दिवसीय राज्य व्यापी ‘यात्रा’ को रवाना करते हुए शाह ने ‘टीपू जयंती’ समारोह की निंदा की थी और सिद्धरमैया सरकार पर ‘वोट बैंक की राजनीति’ करने का आरोप लगाया था। शाह ने कहा था, ‘‘कल एक नवंबर था। यह कर्नाटक स्थापना दिवस था।

    कर्नाटक महोत्वस काफी भव्य तरीके से होना था लेकिन सिद्धरमैया सरकार को कर्नाटक महोत्सव में दिलचस्पी ही नहीं है, वह तो 10 नवंबर को टीपू जयंती मनाने के प्रति उत्साह में डूबी है।’’ सिद्धरमैया ने कई ट्वीट कर टीपू जयंती का बचाव किया। उन्होंने लिखा, ‘‘राज्य के लोगों ने टीपू जयंती को स्वीकार किया है। टीपू देशभक्त थे। वह हिंदुओं या किसी अन्य समुदाय के विरुद्ध नहीं थे।’’ मुख्यमंत्री ने प्रदेश भाजपा नेताओं पर चुटकी लेते हुए आरोप लगा कि उन्होंने कभी टीपू सुलतान को स्वतंत्रता सेनानी कहा था लेकिन अब शाह से पाठ पढ़कर वह प्रबुद्ध हो गये हैं।

    उन्होंने दावा किया भाजपा यात्रा पहले दिन से ही विफल हो गयी है, जिससे साबित होता है कि जनता पार्टी के साथ नहीं हैं। भाजपा टीपू जयंती का विरोध करती आ रही है क्योंकि उसका मानना है कि 18 वीं सदी में मैसूर का यह शासक नृशंस हत्यारा और कट्टर था जिसने लोगों को मुसलमान बनाया।कर्नाटक में अगले साल के आरंभ में विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा सिद्धरमैया सरकार को बेदखल कर सत्ता पर काबिज होने के प्रयास में है।

  • वन विभाग को मंज़ूर नहीं मंत्री की एक भी शर्त, फिर फंसी वनरक्षक भर्ती

    वन विभाग को मंज़ूर नहीं मंत्री की एक भी शर्त, फिर फंसी वनरक्षक भर्ती

     

     

    वन विभाग में वन रक्षकों की भर्ती का मामला सुलझने की बजाए और उलझने वाला है. भर्ती प्रकिया स्थगित होने के बाद वन मंत्री अधीनस्थ चयन आयोग से ही चयन का अधिकार छीनना चाहते हैं. अंदर की खबर ये है कि अधिकारी किसी भी सूरत में ऐसा होने नहीं देना चाहते. ऐसे में तय है कि यह मामला और उलझेगा.

    उत्तराखंड में 2016 में अधीनस्थ वन सेवा नियमावली के अस्तित्व में आने के बाद पहले से चल रही व्यवस्थता को बदलकर वन रक्षकों पर डीएफओ का नियंत्रण ख़त्म कर वन मुख्यालय के हवाले कर दिया गया. इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के जरिए कराने का फैसला किया गया.

    नई व्यवस्था के तहत वन रक्षकों के खाली पड़े 1218 पदों पर भर्ती के लिए अगस्त 2017 में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने विज्ञप्ति जारी कर दी. लेकिन, वन मंत्री को भर्ती की कुछ शर्तें रास नहीं आई और नौ सितंबर को उन्होंने आयोग को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रिया स्थगित करवा दी.

    अब वन मंत्री चाहते हैं कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से वन रक्षकों की इस भर्ती के अधिकार को छीन लिया जाए और डीएफओ स्तर पर भर्ती की पुरानी प्रक्रिया लागू की जाए. उनका तर्क यह है कि इससे तबादलों के खेल पर रोक लगेगी क्योंकि प्रभाग स्तर पर भर्ती होने वाले को पता होगा कि उसे वहीं रहना है.हरक सिंह रावत की इच्छा पूरी करने के लिए राज्य अधीनस्थ वन सेवा नियमावली में संशोधन करना होगा जिसके लिए कैबिनेट की मंजूरी लेनी होगी. कैबिनेट तो दूर की बात वन विभाग के अधिकारी ही इससे सहमत नहीं है.

    न्यूज़ 18 के पास 28 अक्तूबर को प्रमुख वन संरक्षक राजेंद्र कुमार का वन और पर्यावरण सचिव को भेजे पत्र की कॉपी है जिसमें वन मंत्री के अहसमति वाले सभी बिंदुओं को एक-एक करके नकार दिया गया है.

    आइए एक नज़र डालते हैं वन मंत्री की आपत्तियों और प्रमुख वन सरंक्षक के उनके जवाब पर…

    1. वन मंत्री को आपत्ति है कि अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 25 वर्ष कम है, इसे बढ़ाया जाए.

    इसके जवाब में पीसीसीएफ उत्तराखंड पुलिस का हवाला देते हुए लिखते हैं- पुलिस में आरक्षी भर्ती हेतु 18 से 25 वर्ष आयु सीमा निर्धारित की गई है. वन विभाग के आरक्षियों को पुलिस से भी ज्यादा दूरस्थ, दुर्गम क्षेत्रों में कार्य करना होता है. अत़: वन आरक्षियों के लिए 18 से 25 वर्ष की आयु सीमा उचित है. विभाग ने तर्क के पक्ष में 30 जनवरी 2016 को प्रकाशित पुलिस विभाग की एक विज्ञप्ति भी अटैच की है.

    1. वन मंत्री को विज्ञान व कृषि विषयों के साथ 12वीं उत्तीर्ण की बाध्यता पर आपत्ति है और वह इसमें ढील देकर सभी विषयों को शामिल करवाना चाहते हैं और योग्यता भी दसवीं ही रखने के पक्षधर हैं ताकि ज़्यादा युवाओं को मौका मिले.

  • व्हाट्स एप कुछ देर के लिए डाउन हुआ तो पूरी दुनिया में मच गया हड़कंप

    व्हाट्स एप कुछ देर के लिए डाउन हुआ तो पूरी दुनिया में मच गया हड़कंप

     

    मशहूर चैटिंग एप व्हाट्सएप दुनिया भर में क्रैश हो जाने से इसके उपयोक्ताओं को आज परेशान होना पड़ा। लगभग घंटे भर यह एप डाउन रहा जिसके चलते ना तो संदेशों का आदान-प्रदान हो पा रहा था और ना ही वीडियो कॉलिंग संभव हो पा रही थी। एप के डाउन हो जाने से लोग अपना गुस्सा टि्वटर पर उतार रहे थे। उल्लेखनीय है कि सर्वाधिक लोकप्रिय इस चैटिंग एप से हर सेकेंड दुनियाभर में करोड़ों संदेश भेजे और प्राप्त किये जाते हैं।

    माना जा रहा है कि शायद किसी टेस्टिंग चलने की वजह से यह एप डाउन हुआ था। हाल ही में एप का संचालन करने वाली कंपनी की ओर से इस एप में कुछ नये फीचर जोड़े जाने की घोषणा की गयी थी। भारत सहित कई देशों में यह एप दोबारा काम करने लगा है।
     

  • 1000-500 के पुराने नोट रखने वालों पर सरकार नहीं करेगी कार्रवाई

    1000-500 के पुराने नोट रखने वालों पर सरकार नहीं करेगी कार्रवाई

     

     

    नोटबंदी मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नोटबंदी की संवैधानिक वैधता का मामला, संवैधानिक पीठ के समक्ष लंबित है. ऐसे में सभी याचिकाकर्ता संवैधानिक पीठ के समक्ष ही अर्जी दाखिल करें. वहीं, केंद्र ने कहा कि पुराने नोट जमा कराने की मांग करने वाले 14 याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पुराने नोट रखने को लेकर सरकार कोई भी क्रिमिनल करवाई नहीं करेगी.

    इसके साथ ही अब पुराने 1000 और 500 के नोट जमा कराने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ में सुनवाई होगी.

    बता दें कि सुधा मिश्रा ने याचिका दाखिल की थी कि सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे लोगों के लिए डायरेक्शन जारी करे जो पुराने नोट को नहीं जमा कर पाए थे.

  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दस नवंबर को भोपाल आयेगें

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दस नवंबर को भोपाल आयेगें

     

    भोपाल। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 10 नवंबर को कबीर प्रगटोत्सव में शामिल होने के लिये भोपाल आयेगें। देश का राष्ट्रपति बनने के बाद कोविंद की यह पहली मध्यप्रदेश यात्रा है। एक अधिकारी ने यहां बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रपति कोविंद के भोपाल प्रवास कार्यक्रमों के स्वरूप और रूपरेखा की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में प्रदेश के मुख्य सचिव बी. पी. सिंह, पुलिस महानिदेशक आर. के. शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    चौहान ने कहा कि राष्ट्रपति के भोपाल प्रवास के दौरान गरिमापूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाये और उनके स्वागत सत्कार की व्यवस्था भव्य एवं व्यवस्थित हो।अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति कोविंद 10 नवम्बर को पहली बार प्रदेश आ रहे हैं। कबीर प्रगटोत्सव कार्यक्रम का आयोजन भोपाल के लाल परेड मैदान में किया जायेगा। कार्यक्रम में कबीरपंथी संत और समाज के अन्य तबकों के सदस्य शामिल होंगे। इस अवसर पर पद्मश्री प्रह्लाद टिपाणियाँ का गायन होगा।राष्ट्रपति कोविंद समारोह में संस्कृति विभाग द्वारा प्रकाशित मध्यप्रदेश कबीर पुस्तक का विमोचन करेंगे। इस मौके पर राष्ट्रपति प्रदेश की छह कबीर मण्डलियों को कार्यक्रम में सम्मानित करेंगे।

     

  • ऊंचाहार विस्फोट में 32 लोगों की मौत, समिति एक महीने में देगी रिपोर्ट: NTPC

    ऊंचाहार विस्फोट में 32 लोगों की मौत, समिति एक महीने में देगी रिपोर्ट: NTPC

     

    नयी दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ऊंचाहार में कंपनी के बिजली संयंत्र में हाल की दुर्घटना के कारणों की जांच के लिये कार्यकारी निदेशक एस के राय की अध्यक्षता में समिति गठित की गयी है जो एक महीने में रिपोर्ट देगी। उन्होंने बताया कि पहली नवंबर को इस संयंत्र की 500 मेगावाट की यूनिट-6 के बायलर में विस्फोट की घटना के कारणों का पता लगाने के लिये जांच समिति गठित की गयी है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या 32 हो गयी है। सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस दुर्घटना में करीब 80 लोग प्रभावित हुए। इसमें 32 लोगों की मौत हो गयी है जबकि 48 का इलाज जारी है।’’

    एनटीपीसी के संयंत्र की यह दुर्घटना किसी इकाई में वर्ष 2009 के बाद सबसे भीषण दुर्घटना है। इससे पहले भारत अल्यूमीनियम कंपनी की निर्माणधीन कोरबा परियोजना में 2009 में बिजली संयंत्र की चिमनी के गिरने से 45 लोगों की मौत हुई थी। सिंह ने कहा कि ऊंचाहर की दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 12 लोगों को दिल्ली के सफदरजंग और अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एनटीपीसी प्रमुख ने कहा कि प्रभावित लोगों के परिवार को जिला प्रशासन के साथ मिलकर तत्काल राहत उपलब्ध कराने के लिये हर संभव उपाय किये जा रहे हैं। विस्फोट के कारणों के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, ‘‘जांच से पता चलेगा कि यह मानवीय गलती थी, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन या फिर अन्य कारण…।’’ एस के राय की अध्यक्षता वाली समिति में दो महाप्रबंधक शामिल हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि एनटीपीसी संयंत्र विस्फोट अपनी तरह की दुर्लभ घटना है, इकाई का प्रबंधन काफी अनुभवी लोगों के हाथों में था।सिंह ने कहा कि एनटीपीसी संयंत्र के परिचालन के लिये प्रक्रियाओं का पालन करती है और यूनिट-6 को चालू करने में छह महीने की देरी हुई थी। संयंत्र को 30 सितंबर 2017 को वाणिज्यिक रूप से परिचालन में आने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि प्रक्रियाओं के तहत बाहरी एजेंसियों को संयंत्र को चालू करने में शामिल किया गया था और एनटीपीसी ने भेल अधिकारियों से संयंत्र का दौरा करने को कहा है। भेल ने ऊंचाहार संयंत्र की 500 मेगावाट की छठी इकाई का डिजाइन तैयार करने के साथ इसकी आपूर्ति और इसे चालू किया था। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यूनिट छह को फिर से चालू करने में 3 से 6 महीने का समय लगेगा। कुल 1550 मेगावाट क्षमता के इस संयंत्र में 1,050 मेगावाट क्षमता की इकाइयां परिचालन में हैं। इस संयंत्र से नौ राज्यों को बिजली की आपूर्ति की जाती है।

  • विस्थापित निवासियों के लिए केजरीवाल ने राहत का आश्वासन दिया

    विस्थापित निवासियों के लिए केजरीवाल ने राहत का आश्वासन दिया

     

     

    दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के कठपुतली कॉलोनी में विध्वंस अभियान को गलत तरीके से करने का फैसला करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को साइट का दौरा किया और विस्थापित परिवारों को राहत देने का वादा किया।

    डीडीए ने हटाने शुरू कर दिया था jhuggis साइट पर सोमवार को कठपुतली कॉलोनी के अपने पुनर्विकास के हिस्से के रूप में जबकि स्थायी परिवारों का वादा होने के बाद सैकड़ों परिवार पहले ही कॉलोनी से बाहर निकल चुके थे, जबकि डीडीए के अनुसार, 771 आवेदकों को नए आवास के लिए अयोग्य पाया गया था।

    प्राधिकरण ने जे को हटाने के बाद huggis उन लोगों में से जो आनंद पारबाट या अपात्र आवेदकों में पारगमन शिविर के लिए अभी तक नहीं रवाना हुए थे, निवासियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है। मंगलवार को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 16 नवंबर तक विध्वंस पर रहने का अनुरोध किया।

    बुधवार को अदालत ने कहा कि यह प्रवास उन लोगों पर लागू होगा जिन्होंने डीडीए के स्थानांतरण प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।

    जो लोग स्थानांतरित करने के लिए सहमत हुए थे उन्हें छोड़ने और उनके विध्वंस का दो दिन का समय दिया जाएगा jhuggis इसके बाद जारी रह सकता है

    डीडीए ‘परेशान’ उन्हें

    गुरुवार को साइट पर जाकर, मुख्यमंत्री ने कहा कि निवासियों ने उन्हें सूचित किया था कि डीडीए उन्हें “परेशान” करने आए थे।

    उन्होंने कहा कि युवा लड़कियों को सड़कों पर बाहर रहने के लिए मजबूर किया गया था और कथित रूप से एक निवासी की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने डीडीए और पुलिस को जिस तरह से अभियान चलाया था, उस पर कहर लगाया, और कहा कि यदि वह अपनी शक्ति के अधीन थे तो व्यायाम नहीं किया जाता।

    उन्होंने कहा कि वे डीटीए की अध्यक्ष बनने वाले लेफ्टिनेंट-गवर्नर अनिल बैजल से पूछेंगे कि अदालत के आदेश का पालन किया जाए।

    उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट और उप-विभागीय मजिस्ट्रेट को विध्वंस से प्रभावित लोगों को भोजन, पानी, शौचालय और तंबू प्रदान करने का भी आदेश दिया।

    बाद में, मुख्यमंत्री के कार्यालय से एक बयान में कहा गया कि केजरीवाल ने श्री बैजल से मुलाकात की, जिन्होंने मामले की अगली सुनवाई तक तक जारी रहने के लिए साइट पर राहत कार्य की अनुमति देने पर सहमति जताई थी।

  • टीपू जयंती पर कोर्ट का सवाल, क्या राज्य बजट में खर्च का प्रावधान था?

    टीपू जयंती पर कोर्ट का सवाल, क्या राज्य बजट में खर्च का प्रावधान था?

     

     

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने आज सवाल किया कि क्या 10 नवंबर को टीपू जयंती के मौके पर, राज्य भर में होने वाले जश्न के लिए, राज्य सरकार के बजट में प्रावधान किया गया था. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच जी रमेश और न्यायमूर्ति पी एस दिनेश कुमार की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सवाल किया.

    जनहित याचिका में मांग की गई है कि राज्य सरकार को टीपू जयंती मनाने से रोका जाए. याचिकाकर्ता मंजूनाथ केपी ने ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय की मांग की जिससे यह पता चलेगा कि जयंती मनाने के खर्च के लिए बजट में प्रावधान था. इसके बाद अदालत ने सुनवाई कल तक के लिए स्थगित कर दी.