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  • रेहड़ीवालों के मुद्दे पर फडणवीस से मिले राज ठाकरे

    रेहड़ीवालों के मुद्दे पर फडणवीस से मिले राज ठाकरे

     

     

    महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर मुंबई में अवैध रेहड़ीवालों के मुद्दे पर चर्चा की. यह बैठक ऐसे समय हुई जब बुधवार को रेहड़ीवालों ने आजाद मैदान में धरना देकर अपने लिए नीति तैयार करने की मांग की थी. बुधवार को मनसे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच रेहड़ी वालों के मुद्दे पर दादर में भिड़ंत हो गई थी.

    मनसे नेता बाला नंदगांवकर ने कहा कि उनकी पार्टी ने महाराष्ट्र की भाजपा सरकार से रेहड़ीवालों पर अदालत के आदेश को लागू करने को कहा है.

    नंदगांवकर ने कहा कि अगर सरकार अदालत के आदेश लागू करती है तो हमें मनसे को रेहड़ीवालों के खिलाफ आंदोलन चलाने की जरूरत नहीं होगी. मुंबई कांग्रेस प्रमुख संजय निरूपम ने रेहड़ीवालों के समर्थन में दादर में एक मोर्चा आयोजित किया था. इन रेहड़ीवालों को राज ठाकरे नीत पार्टी ने निशाना बनाया था.

    शहर में अवैध रेहड़ीवालों को आड़े हाथ लेते हुए बंबई उच्च न्यायालय ने कल केवल तय स्थानों पर रेहड़ी लगाने का आदेश देते हुए फुट और रेल ओवरब्रिजों पर तथा रेलवे स्टेशनों के 150 मीटर के दायरे में इन गतिविधियों पर पाबंदी लगाई थी.

  • कांग्रेस ने भगवान भरोसे छोड़ा हिमाचल चुनाव

    कांग्रेस ने भगवान भरोसे छोड़ा हिमाचल चुनाव

     

     

    हिमाचल प्रदेश के चुनाव में एक तरफ जहां बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है वहीं कांग्रेस ने वीरभद्र को भगवान भरोसे छोड़ दिया है. प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जहां ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष हिमाचल छोड़ अपना पूरा जोर गुजरात चुनाव में लगा रहे हैं. वीरभद्र और राहुल में मतभेद इस कदर है कि राहुल हिमाचल में 6 नवंबर को सिर्फ़ एक दिन का दौरा करेंगे. ज़ाहिर है कांग्रेस के कुनबे में मचे घमासान का फायदा उठाने की बीजेपी भरपूर कोशिश कर रही है.

    हिमाचल में एक तरफ पीएम का तूफानी दौरा तो दूसरी तरफ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की एक के बाद एक ताबड़तोड़ रैली हो रही है. एक तरफ गृह मंत्री राजनाथ सिंह की हुंकार तो दूसरी तरफ नितिन गडकरी की जनसभा हो रही है. बीजेपी पूरे दमखम से इस पहाड़ी राज्य के चुनावी समर में कूद गई है. लेकिन बीजेपी से मुकाबले के लिए कांग्रेस की तैयारी नज़र नहीं आ रही.

    कांग्रेस के प्रचार की कमान एक अकेले वीरभद्र सिंह ने संभाल रखी है. दरअसल राहुल गांधी और वीरभद्र में तनातनी का सीधा असर राज्य में पड़ रहा है और साफ दिख भी रहा है. राजा वीरभद्र सिंह पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अब भी नज़रअंदाज़ करते हैं और सोनिया को ही नेता मानते हैं. ये बात राहुल को इस कदर नागवार गुजरी कि राहुल ने भी चुनावी नतीजे की चिंता किए बिना प्रदेश पहाड़ों के राजा के हवाले कर दिया.

    राहुल गांधी फिलहाल गुजरात मे व्यस्त हैं. कांग्रेसी दावा कर रही हैं कि 6 नवंबर को राहुल हिमाचल में 2 रैलियां करेंगे. सोनिया गांधी भी एक रैली करने वाली थीं लेकिन खराब स्वास्थ्य से वो भी संभव नहीं लगता. वीरभद्र राहुल को एक नेता के तौर पर स्वीकार नहीं करते और सोनिया से ही बात करते हैं. पिछले 2 चुनावों से एक तरह से धमकी देकर ही खुद को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनवा रहे हैं. बड़ी मुश्किल से इस बार राहुल ने अपनी पसंद के सुखविंदर सुक्खू को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनवाया.वीरभद्र ने सुक्खू को हटाने की पूरी कोशिश की और धमकी भी दी लेकिन राहुल नहीं झुके. हिमाचल में वीरभद्र अब तक लगभग अपने तरीके से कांग्रेस चला रहे थे जो राहुल के हस्तक्षेप के बाद कुछ हद तक कम हुआ है. लेकिन राहुल अब भी वीरभद्र के साथ सहज नहीं हैं. दोनों के बीच तनातनी का असर हिमाचल की चुनावी रंगत में कांग्रेस की उम्मीद फीका कर रही है. जाहिर है बीजेपी को इसका सीधा फायदा हो रहा है.

    83 साल के वीरभद्र इस चुनाव को अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन का आखिरी चुनाव बता रहे हैं. उन्होंने अपने बेटे को भी चुनावी मैदान में उतार दिया है लेकिन पार्टी में मतभेद इस आखिरी बाज़ी को जीतने के उनके सपने पर पानी फेर सकता है.

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  • दिल्ली-केंद्र टर्फ स्पट सुनवाई आज

    दिल्ली-केंद्र टर्फ स्पट सुनवाई आज

     

     

    भारत के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीश संविधान खंडपीठ ने गुरुवार को दिल्ली सरकार द्वारा कानून को नीचे रखे जाने की एक अपील की सुनवाई शुरू कर दी है कि क्या लेफ्टिनेंट-गवर्नर (एलजी) एकतरफा बिना बंधे पूंजी का संचालन कर सकता है निर्वाचित सरकार की “सहायता और सलाह” द्वारा

    न्यायमूर्ति ए के सीरीरी और आर के अग्रवाल के एक डिवीज़न बेंच ने फरवरी में अपील को संविधान खंडपीठ के पास भेजा था।

    संविधान पीठ पर विचार करने के लिए उत्पन्न होने वाला प्राथमिक प्रश्न यह होगा कि क्या अपील को आगे सुप्रीम कोर्ट के 11-न्यायिक पीठ को भेजा जाना चाहिए या नहीं। इसका कारण यह है कि 1996 में सर्वोच्च न्यायालय के एक नौ न्यायाधीश के खंडपीठ में एनडीएमसी बनाम स्टेट ऑफ पंजाब मामला, कराधान उद्देश्यों के लिए दिल्ली को केंद्रशासित प्रदेश के रूप में मान्यता दी।

    ‘अधिक स्वतंत्रता चाहते हैं’

    हालांकि, दिल्ली सरकार के प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने यह भी कहा था कि याचिकाएं दिल्ली के लिए पूरी तरह से अस्तित्व नहीं मांगती हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासन और शासन के लिए एक निर्वाचित सरकार की ज्यादा आजादी की मांग कर रही थी।

    दो न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि कानून के कई प्रश्न हैं जिन्हें एक संविधान खंड द्वारा व्याख्या और निपटान करने की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति सीकरी की पीठ ने अपील की, जो कि अगस्त 2016 में दायर की गई थी, प्रारंभिक आधार पर सुनाई गई थी, लेकिन संविधान खंडपीठ के लिए सवाल तैयार करने से परहेज किया था।

    दिल्ली सरकार द्वारा दायर सात विशेष छुट्टी याचिकाओं के बैच ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 4 अगस्त के फैसले को चुनौती दी है, जो पुलिस, भूमि और सार्वजनिक व्यवस्था पर ही नहीं बल्कि “सेवाओं” में एल-जी की शक्ति को बरकरार रखती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि, एचसी के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

    दिल्ली सरकार ने प्राथमिक सवाल पर प्रकाश डाला है कि क्या आप-केंद्र के बीच विवाद एक संघीय विवाद था जो संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत आ रहा है और जो केवल सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में सुनने और फैसला करने का अधिकार है।

    उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया था कि आप-केंद्र संघर्ष एक ‘क्लासिक’ संघीय विवाद था।

    1 9 4 पृष्ठ के फैसले ने ‘सेवाओं’ मामलों पर एक राजनीतिक टग ऑफ युद्ध की स्थिति में विवाद को हटा दिया था, जिस पर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत निर्णय लेने का उच्च न्यायालय का पूर्ण अधिकार क्षेत्र था।

    यह देखा गया था कि केंद्र और एक राज्य सरकार के बीच हर विवाद को ‘संघीय विवाद’ के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है।

  • गुजरात चुनाव: राहुल नहीं, मोदी-शाह की साख दांव पर

    गुजरात चुनाव: राहुल नहीं, मोदी-शाह की साख दांव पर

     

     

    गुजरात के दक्षिण इलाके के दौरे का आखिरी दिन आते-आते राहुल के तेवर और स्क्रिप्ट दोनों बदल गए हैं. जो राहुल पिछले चुनाव तक मनमोहन सरकार की गलती पर सफाई देते थे अब वो पिछली बात नहीं करते बल्कि अब वो बात सिर्फ मोदी सरकार की गलतियों की करते हैं.

    राहुल को ये ज्ञान गीता से मिला है. राहुल उसी अंदाज में कहते भी हैं कि हमें अपना काम करना है. फल की चिन्ता नहीं करनी और पीछे नहीं देखना. राहुल मोदी सरकार से फिल्मी संवाद भी कहते हैं कि तुम्हारे पास ताकत है, सरकार है, पुलिस है पर मेरे पास सच है.

    ये राहुल की नई भाषा और स्क्रिप्ट है जो नए इतिहास की इबारत लिखना चाहती है. राहुल ने युवाओं की नब्ज पर हाथ भी रख दिया. हार्दिक पटेल पाटीदार युवा को साथ ले रहे हैं तो जिग्नेश मेवाणी के साथ दलित हैं और अल्पेश ठाकोर भी आ गए हैं. ये युवा सड़क और राहुल की रैली में दिख भी रहे हैं.

    अल्पेश साफ कहते हैं कि बीजेपी सुनने को तैयार नहीं क्या करें? कांग्रेस सुन रही है. पटेल भी ये मानते हैं. दूसरी ओर राहुल अब खुद गुस्सा नहीं होते और ये दूसरों के गुस्से को हवा दे रही बीजेपी के लिए सही संकेत नहीं है.राहुल को लगने भी लगा है खोने को कुछ नहीं है. गुजरात जीते तो दिल्ली दूर नहीं. दांव पर तो मोदी और शाह की साख है इसलिए राहुल अब पिच पर खुलकर खेल रहे हैं.

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  • रेल टेंडर घोटाला में तेजस्‍वी को फिर ED का नोटिस, राबड़ी को भी बुलावा

    रेल टेंडर घोटाला में तेजस्‍वी को फिर ED का नोटिस, राबड़ी को भी बुलावा

     

    नयी दिल्ली। रेलवे होटलों के आबंटन में भ्रष्टाचार के मामले में अपनी धनशोधन जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजद नेता लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी यादव को 13 नवंबर को पेश होने के लिये कहा है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 31 अक्तूबर को पेशी के संबंध में बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री को इसी तरह का सम्मन भेजा गया था, जिसमें वह पेश नहीं हुए थे।उन्होंने बताया कि अब एजेंसी ने पेशी के लिये 13 नवंबर की नई तारीख तय की है। जांच एजेंसी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत कुछ समय पहले लालू प्रसाद, उनके परिवार के सदस्यों एवं अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

    ईडी ने मामले में पूछताछ के संबंध में तेजस्वी की मां एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को भी सात नवंबर को उसके समक्ष पेश होने के लिये कहा है। इससे पहले ईडी मामले के संबंध में तेजस्वी से करीब नौ घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। बहरहाल एजेंसी ने बाद में उन्हें चार बार सम्मन भेजा लेकिन हर बार वह पेश नहीं हुए। राबड़ी देवी भी कम से कम पांच बार ईडी के भेजे सम्मन पर पेश नहीं हुईं। जुलाई में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक प्राथमिकी दर्ज की थी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद एवं अन्य की संपत्तियों पर कई बार तलाशी ली थी।

    सीबीआई की प्राथमिकी में आरोप है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता के स्वामित्व वाली ‘बेनामी’ कंपनी से रिश्वत के तौर पर पटना में अहम जगह की जमीन लेने के बाद वर्ष 2004 में लालू प्रसाद ने बतौर रेल मंत्री अपने कार्यकाल के दौरान इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) की दो होटलों की रख रखाव का जिम्मा उसी कंपनी को दिया था। ईडी ने सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर पीएमएलए के तहत उनके परिवार के सदस्यों एवं अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था।

    सीबीआई ने मामले के संबंध में हाल में तेजस्वी और लालू प्रसाद के बयान भी दर्ज किये थे। अधिकारी के अनुसार कथित शेल कंपनियों के माध्यम से आरोपियों के कथित तौर पर ‘‘गलत तरीके से धन जुटाने’’ के सिलसिले में ईडी जांच कर रही है। सीबीआई की प्राथमिकी में दर्ज अन्य नामों में विजय कोचर, विनय कोचर (दोनों सुजाता होटल के निदेशक), डिलाइट मार्केटिंग कंपनी (अब लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से) और तत्कालीन आईआरसीटीसी के प्रबंध निदेशक पी के गोयल शामिल हैं।

  • उत्तराखंड में किसानों के कर्ज नहीं होंगे माफ

    उत्तराखंड में किसानों के कर्ज नहीं होंगे माफ

     

     

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार किसानों के कर्ज माफ करने की स्थिति में नहीं है और वह बेहद कम ब्याज दर पर किसानों को ऋण देने की योजना बना रही है.

    रावत ने राज्य में अपनी सरकार के कामकाज को रेखांकित करने के लिए, यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हम राज्य में किसानों के कर्ज माफ नहीं कर सकते.

    भाजपा के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पर पहले से ही 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और वह किसानों को निम्न दर पर ऋण देने की योजना बना रही है.

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को दो प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज देने का फैसला किया है, जिसका उपयोग वे किसी भी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं. 

  • गुजरात में चुनाव आयोग के टेस्ट में 3500 VVPAT मशीनें फेल: हार्दिक पटेल

    गुजरात में चुनाव आयोग के टेस्ट में 3500 VVPAT मशीनें फेल: हार्दिक पटेल

     

     

    पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव आयोग के पहले चरण के परीक्षण में 3,500 से ज्यादा वीवीपीएटी मशीनें असफल रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी भाजपा आगामी गुजरात चुनावों में ‘धोखाधड़ी’ करेगी.

    पटेल ने एक ट्वीट में कहा, ‘चुनाव आयोग के पहले चरण के परीक्षण में 3,550 वीवीपीएटी मशीनें असफल रही है और मैं भरोसे के साथ कह सकता हूं कि भाजपा गुजरात चुनावों में ‘धोखाधड़ी’ करेगी.’

    चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को कहा था कि वह गुजरात के सभी 50,128 मतदान केंद्र पर वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) के साथ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का इस्तेमाल करेगा.

    गुजरात की 182 विधानसभा सीटों पर 9 और 14 दिसंबर को मतदान होगा. चुनाव के नतीजे 18 दिसंबर को जारी किए जाएंगे. भाजपा गुजरात में पाटीदार समुदाय के गुस्से का सामना कर रही है.पाटीदार समुदाय के नेता शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की श्रेणी में आरक्षण की मांग कर रहे हैं.

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  • बेल्जियम नरेश की भारत यात्रा के दौरान आतंकवाद, कारोबार, निवेश पर होगा जोर

    बेल्जियम नरेश की भारत यात्रा के दौरान आतंकवाद, कारोबार, निवेश पर होगा जोर

     

    नयी दिल्ली। बेल्जियम नरेश फिलिप और महारानी मेथिल्डे 5 से 11 नवंबर के दौरान भारत की यात्रा पर आ रहे हैं जहां दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई समेत अपने ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत बनाने के साथ वाणिज्य, कारोबार को बढ़ाने एवं द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के विषय पर चर्चा करेंगे। भारत और बेल्जियम के बीच दिल्ली में करीब 18 समझौतों पर हस्ताक्षर किये जाने की उम्मीद है। इसके अलावा मुम्बई में दोनों देशों के बीच कारोबार, निवेश, स्मार्ट सिटी, कृषि खाद्य एवं पशुपालन समेत अन्य विषयों पर 23 समझौते पर हस्ताक्षर किये जा सकते हैं।

    भारत में बेल्जियम के राजदूत जॉन लूवाइक्स ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ इस राजकीय यात्रा के मुख्य विषय भारत और बेल्जियम संबंधों को 21वीं सदी के अनुरूप नवोन्मेषी गठजोड़ में बदलना है। ’’ उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे कर रहे हैं। बेल्जियम के शाही दंपति प्रथम विश्व युद्ध में बेल्जियम की रक्षा करते शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजिल देंगे और सम्मान प्रकट करने इंडिया गेट जायेंगे। इस वर्ष जून में बेल्जियम में ब्रूसेल्स सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर विस्फोट हुआ था। ऐसे में दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत में आतंकवाद एक प्रमुख विषय हो सकता है।

    इस बारे में पूछे जाने पर बेल्जियम के राजदूत ने कहा, ‘‘ मुझे इस बारे में कोई संदेह नहीं है कि आतंकवाद के बारे में बातचीत होगी। ’’विदेश मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, साल 2013 में राजगद्दी संभालने के बाद बेल्जियम नरेश फिलिप की यह पहली राजकीय भारत यात्रा है। वे भारत के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर यहां आ रहे हैं। इस यात्रा से दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने में मदद मिलेगी।

    उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता के बाद भारत में राजनयिक मिशन स्थापित करने वाला बेल्जियम पहले यूरोपीय देशों में शामिल था। समझा जाता है कि बेल्जियम नरेश की भारत यात्रा के दौरान दोनों देश वाणिज्य, कारोबार को बढ़ाने एवं द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के विषय पर चर्चा करेंगे। भारत, बेल्जियम का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात स्थल है और यूरोपीय संघ से बाहर तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी है।

    साल 2016..17 में भारत का द्विपक्षीय कारोबार 13.28 करोड़ डालर रहा था। इसमें भारत से बल्जियम को निर्यात 5.65 अरब डालर था जबकि बेल्जियम से आयात 6.62 अरब डालर था। भारत और बेल्जियम के वाणिज्यिक संबंधों में हीरे का कारोबार प्रमुख है। रत्न और आभूषण का कारोबार द्विपक्षीय कारोबार में 75 प्रतिशत है। बेल्जियम के शाही दंपति के साथ छह मंत्री और वहां की 86 कंपनियों के सीईओ, 13 शैक्षणिक संस्थाओ के प्रमुखों और मीडिया के 29 सदस्यों समेत बड़ा शिष्टमंडल भारत आ रहा है।

    बेल्जियम सरकार के अनुमान के मुताबिक, बेल्जियम में भारतीय मूल के लोगों की संख्या 18 हजार है। इसमें से 10 हजार भारतीय नागरिक हैं। बेल्जियम की विभिन्न कंपनियों में करीब 1500 आईटी पेशेवर काम करते हैं। इसके अलावा करीब 800 भारतीय छात्रा वहां विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं।

  • हुकू सलाखों पर प्रतिबंध लगाने में आप ने कोई भूमिका नहीं निभाई: भाजपा

    हुकू सलाखों पर प्रतिबंध लगाने में आप ने कोई भूमिका नहीं निभाई: भाजपा

     

     

    राजधानी में हुक्का सलाखों पर लगाए गए प्रतिबंध में आम आदमी पार्टी (एएपी) सरकार ने “कोई भूमिका नहीं निभाई”, भाजपा सांसद पारवेश साहब वर्मा और राजौरी गार्डन के विधायक मंजंजंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को कहा।

    प्रतिबंध लगाने का श्रेय लेकर आम आदमी को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे बीजेपी नेताओं ने कहा कि 23 मई 2016 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हुक्का के धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए थे जिसके बाद 17 जुलाई, 2017 को, दिल्ली में इसे लागू करने के लिए श्री सिरसा ने लेफ्टिनेंट-गवर्नर (एलजी) से मुलाकात की।

    “एल-जी के आदेश पर यह था कि राज्य तंबाकू नियंत्रण विभाग ने 21 जुलाई को दिल्ली में हुक्का सलाखों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था। फिर, श्री सिरसा और उनकी टीम, नई आदेश के साथ सशस्त्र, इस आदेश को लागू करने के लिए दिल्ली पुलिस स्टेशन हाउस ऑफिसरों को प्रतियां सौंप दी, “दोनों ने कहा।

    श्री सिरसा के अनुसार, इन घटनाओं के बीच, उन्होंने राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से भी संपर्क किया था ताकि हुक्का बार बार दिल्ली में बंद हो जाए और इस मामले को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि उन्होंने बार-बार दिल्ली सरकार से भी संपर्क किया था लेकिन “इस मुद्दे पर उनकी अपीलों को ध्यान नहीं दिया”।

    ‘मुद्दे उठाने की कोशिश की’

    “अब, एएपी सरकार अपनी गहरी नींद से जाग रही है कि उसने इस हुक्का सलाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिन आदेशों के बारे में वे बात कर रहे हैं, वे दो महीने पुराने हैं और उनके पास इसमें कोई भूमिका नहीं निभानी है, “श्री सिरसा ने कहा।

    विधायक ने दावा किया कि उन्होंने दिल्ली विधायिका में इस मुद्दे पर ध्यान देने के लिए तीन बार मांग की थी, लेकिन अध्यक्ष ने “अस्वीकार कर दिया”।

  • सट्टेबाजों का दावा- गुजरात चुनाव में बीजेपी को मिलेंगी इतनी सीटें

    सट्टेबाजों का दावा- गुजरात चुनाव में बीजेपी को मिलेंगी इतनी सीटें

     

     

    ​गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा होते ही सट्टा बाजार में भी तेजी आ गई है. सट्टा बाजार इन चुनावों में भाजपा को हॉट फेवरेट मान रहा है.

    गुजरात में इन दिनों सट्टेबाज काफी बिजी हैं. उन्होंने फोन और लैपटॉप के जरिए अपने खुफिया दफ्तरों से काम शुरू कर दिया है.

    भाजपा के लिए अनुमान 

    सट्टा बाजार का अनुमान है कि इस विधानसभा चुनावों में भाजपा को 102 से 105 सीटें मिलेंगी. हमारे ईटीवी संवाददाता ने एक बुकी से बातचीत की, जिसे आप देख सकते हैं.

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    अपनी पहचान छिपाकर गुजरात चुनावों में सट्टा बाजार की गतिविधियों के बारे में बताता हुआ एक सटोरिया

    कांग्रेस के लिए क्या है दावा 
    सट्टाबाज बाजार में अगर भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें दी जा रही हैं तो कांग्रेस को 64 से 66 सीटें जीतने का दावा बुकी कर रहे हैं. फिलहाल सट्टा बाजार में भाजपा के पक्ष में 65 से 70 रुपए का भाव चल रहा है. माना जा रहा है कि ज्यों-ज्यों चुनाव करीब आएंगे, वैसे वैसे ये भाव भी बढ़ेंगे.

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    गुजरात विधानसभा चुनावों पर सट्टेबाज का आंकलन

    चुनावों में सट्टा लगाने वाले बढ़े
    बुकी का कहना है कि गुजरात चुनावों को लेकर लोग सट्टा लगाने में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं. सट्टा बाजार का मानना है कि अगले कुछ दिनों में हजारों करोड़ का सट्टा इन चुनावों में लग सकता है. चुनावों के दौरान हमेशा ही यहां का सट्टा बाजार काफी सक्रिय रहता है. क्रिकेट मैचों के दौरान भी गुजरात के सटोरिये काफी संख्या में सक्रिय हो जाते हैं.