क्या आप जानते हैं कि भारत की घटती जनसंख्या दर एक गंभीर समस्या बनती जा रही है? यह खबर आपको हैरान कर सकती है, लेकिन यह सच है! आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। क्या भारत एक जनसांख्यिकीय संकट का सामना कर रहा है? आइए जानते हैं इस चिंताजनक सच्चाई के पीछे के कारण।
1. गिरता TFR: एक खतरे की घंटी
भारत का कुल प्रजनन दर (TFR) 2.1 से नीचे आ गया है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। TFR 2.1 से नीचे होने का मतलब है कि हर एक महिला औसतन दो से कम बच्चे पैदा करती है जिससे आगे चलकर जनसंख्या में कमी आने लगती है। यह केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों के लिए भी एक चुनौती बन गया है। मोहन भागवत का कहना है कि TFR कम होने से समाज का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है, कई भाषाएँ और सभ्यताएँ पहले ही इसी कारण नष्ट हो चुकी हैं।
TFR और जनसंख्या संतुलन
TFR का 2.1 से नीचे आ जाना जनसंख्या संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे समय के साथ जनसंख्या में गिरावट देखने को मिलेगी। यह समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती पेश करेगा। यह चिंता केवल हिंदुओं के लिए नहीं है, कई धर्मों के लोगों का TFR 2.1 से नीचे है। जापान और चीन जैसे देश पहले ही इस समस्या से जूझ रहे हैं।
2. बुजुर्गों की बढ़ती आबादी: एक आर्थिक बोझ?
भारत की जनसंख्या में युवाओं की संख्या कम और बुजुर्गों की संख्या अधिक हो रही है। यह डिपेंडेंसी रेशियो को बढ़ाएगा, जिससे काम करने वाले लोगों पर बुजुर्गों का बोझ बढ़ेगा। 2022 से 2050 के बीच बुजुर्गों की आबादी में 134% तक का इजाफा होने का अनुमान है। इसका अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जैसे पेंशन और स्वास्थ्य सेवा पर खर्च बढ़ना और कार्यबल में कमी।
युवा कार्यबल: भारत की ताकत
भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण इसका युवा कार्यबल है। हालांकि, घटती जन्म दर से यह कार्यबल भी प्रभावित हो सकता है। चीन, जिसने एक बच्चा नीति के कारण आबादी में तेज़ी से बढ़ोत्तरी में गिरावट देखी, एक सतर्कता का संदेश देता है। जर्मनी और जापान जैसे विकसित देश भी घटते कार्यबल का सामना कर रहे हैं।
3. सामाजिक असमानता: एक गंभीर चुनौती
घटती जन्म दर और सामाजिक-आर्थिक असमानता के बीच एक गहरा संबंध है। अमीर परिवारों में जन्म दर पहले से ही कम है, जबकि गरीब परिवारों में यह अधिक है। इसका नतीजा यह हो सकता है कि समाज में अकुशल जनसंख्या अधिक बढ़े और देश के विकास पर विपरीत प्रभाव पड़े। सिगपुर जैसे देशों ने भी जनसंख्या नियंत्रण योजनाओं को समाप्त कर दिया है, क्योंकि हर गरीब बच्चे को अच्छी शिक्षा और पोषण उपलब्ध कराना मुश्किल है।
अकुशल जनसंख्या वृद्धि: विकास की बाधा
यदि अकुशल जनसंख्या लगातार बढ़ती है, तो यह देश के विकास में बाधा बन सकती है। उच्च शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
4. राजनीतिक आयाम: बहस और विवाद
मोहन भागवत के बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं विपक्षी दलों से आई हैं, जिन्हें लगता है कि यह अल्पसंख्यकों पर जनसंख्या नियंत्रण के एजेंडे के तहत लाया गया है। संघ परिवार की बढ़ती चिंता से स्पष्ट है कि हिंदू समुदाय की घटती जनसंख्या एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है।
डेमोग्राफिक परिवर्तन: एक वास्तविक चिंता
देश की जनसंख्या संरचना में परिवर्तन से होने वाली सामाजिक-राजनीतिक चिंताओं को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत योजनाओं पर चर्चा और कार्यवाई की आवश्यकता है।
Take Away Points:
- भारत की घटती जन्म दर एक गंभीर चिंता है जिस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
- कम TFR, बढ़ती बुजुर्ग आबादी, और सामाजिक-आर्थिक असमानता इस मुद्दे के मुख्य पहलू हैं।
- इस समस्या से निपटने के लिए व्यापक रणनीति और राष्ट्रीय स्तर पर बहस की आवश्यकता है।









