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  • Computer Baba ने कमलनाथ सरकार से मांगा सचिवालय में ऑफिस और एक ड्रोन

    Computer Baba ने कमलनाथ सरकार से मांगा सचिवालय में ऑफिस और एक ड्रोन

    भोपाल । मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा रीवर ट्रस्ट के चेयरमैन नियुक्त किए गए कंप्यूटर बाबा (नामदेव दास त्यागी) ने राज्य सचिवालय में ऑफिस की मांग की है। बाबा ने एक ड्रोन प्लेन की डिमांड भी है ताकि नर्मदा नदी के किनारों पर अवैध खनन की निगरानी कर सकें। सूत्रों के मुताबिक, कमलनाथ सरकार बाबा की मांग पर ध्यान दे रही है और जल्द ही इस पर फैसला लेगी।

    इससे पहले राज्य की पूर्व शिवराज सरकार के दौरान उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था।  रीवर ट्रस्ट के चेयरमैन का पदभार संभालने के बाद कंप्यूटर बाबा ने सरकार से एक हफ्ते के अंदर हेलिकॉप्टर उप्लब्ध कराने को कहा था ताकि वह नर्मदा नदी का हवाई सर्वेक्षण कर सके।

    Computer Baba ने कमलनाथ सरकार से मांगा सचिवालय में ऑफिस और एक ड्रोन
    कंप्यूटर बाबा

    सरकार ने तब उनकी मांग यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि कंप्यूटर बाबा को संबंधित अधिकारियों के साथ मीटिंग करनी होगी इसलिए उन्हें हेलिकॉप्टर की जरूरत नहीं है लेकिन इस बार कमलनाथ सरकार उनकी मांग पर गंभीर होकर ध्यान दे रही है। अपने प्लान के बारे में बाबा ने बताया, ‘मैंने जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के साथ बैठक की और मंत्रालय में एक ऑफिस की मांग करते हुए आवेदन दाखिल किया। मंत्री ने मुझे ऑफिस उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

    यह कोई नई बात नहीं है क्योंकि शिवराज सिंह चौहान की सरकार में अलग-अलग विभाग के लोगों को राज्य सचिवालय में ऑफिस अलॉट किए गए थे। कुछ लोग फिजूल में इसे मुद्दा बना रहे हैं।’बता दें कि इससे पहले शिवराज सिंह चौहान की सरकार के समय भी कंप्यूटर बाबा को राज्य मंत्री का दर्जा मिला था।

    इसके बाद मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने इसी साल मार्च महीने में उन्हें मां नर्मदा, मां क्षिप्रा, मां मंदाकिनी नदी न्यास का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने 6 जून को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में कार्यभार संभाला था लेकिन उन्हें कोई कमरा अलॉट नहीं हुआ था। मंत्री पीसी शर्मा ने कहा, ‘कंप्यूटर बाबा ने मंत्रालय में ऑफिस मांगा है। सरकार उनकी मांग पर ध्यान दे रही है और इस बाबत जल्द ही फैसला लिया जाएगा।’

  • बम बनाने में माहिर 19 वर्षीय आतंकवादी मुन्‍ना लाहोरी  को तलाश रही है सुरक्षा एजेंसियां

    बम बनाने में माहिर 19 वर्षीय आतंकवादी मुन्‍ना लाहोरी  को तलाश रही है सुरक्षा एजेंसियां

    श्रीनगर ।  19 वर्षीय जैश-ए-मोहम्‍मद आतंकवादी मुन्‍ना लाहोरी  ने  दक्षिण कश्‍मीर के पुलवामा जिले में पिछले सप्‍ताह 44 राष्‍ट्रीय राइफल्‍स के काफिले के पास विस्‍फोट में इस्‍तेमाल आईईडी को  तैयार किया था।

    गत 17 जून को हुए इस विस्‍फोट में सेना के दो जवान शहीद हो गए थे और कई अन्‍य घायल हो गए थे। सुरक्षा बलों ने मुन्‍ना को अरेस्‍ट करने के लिए पुलवामा और शोपियां इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

    सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक लाहोरी वाहनों में फिट किए जाने वाले आईईडी को बनाने में माहिर है। वह बड़े पैमाने पर हथियारों और विस्‍फोटकों के साथ पिछले साल कश्‍मीर में दाखिल हुआ था। एक वरिष्‍ठ खुफिया अधिकारी ने बताया कि मुन्‍ना ने ही इस बम को बनाया और उसी ने इसमें विस्‍फोट किया था।

    सुरक्षा एजेंसियों ने मुन्‍ना को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान तेज कर दिया है। बता दें कि पिछले छह महीने में आतंकवाद निरोधक अभियानों में कश्‍मीर में 117 आतंकवादी मारे गए हैं। इसमें 89 स्‍थानीय आतंकवादी थे।

    सूत्रों ने बताया कि दक्षिण कश्‍मीर में चार जिले-पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग- आतंकवाद प्रभावित हैं। मुन्‍ना और उसके साथियों ने पुलवामा-शोपिंया बेल्‍ट में अपना अड्डा बनाया है।

    यहां वे लोग कश्‍मीरी युवाओं को स्‍थानीय सामान के इस्‍तेमाल से आईईडी बनाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि लाहोरी पुलवामा की तरह से और हमले करने की योजना बना रहा है।

    एक वरिष्‍ठ खुफिया अधिकारी ने कहा, ‘दक्षिण कश्‍मीर के आतंकवादियों के कार्यशैली में बड़ा बदलाव आ रहा है। वे अपनी जिंदगी को खतरे में डाले बिना आईईडी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।’

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  • दरभंगा मेडिकल कॉलेज: डाक्टर की घोर लापरवाही, टूटा बायां हाथ, प्लास्टर चढ़ाया दाहिने हाथ पर

    दरभंगा मेडिकल कॉलेज: डाक्टर की घोर लापरवाही, टूटा बायां हाथ, प्लास्टर चढ़ाया दाहिने हाथ पर

    नई दिल्ली। बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल किसी से छिपी नहीं है. कुछ दिनों पहले दरभंगा मेडिकल कॉलेज की कुछ तस्वीरें सामने आई थी जिसमें बदहाल इमारत नजर आ रही थी।

    इमारत की हालत को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मरीजों और यहां तक कॉलेज के स्टॉफ की जिंदगी भी खतरे में है। इन सबके बीच दरभंगा मेडिकल कॉलेज से लापरवाही की खबर आई है। फैजान नाम का एक लड़का टूटे हुए हाथों के साथ अस्पताल में दाखिल हुआ।

    डॉक्टरों ने इलाज भी किया . लेकिन उसके बायीं हाथ की जगह दाहिने हाथ पर प्लास्टर चढ़ा दिया। मरीज के परिवार का कहना है कि यह घोर लापरवाही है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से उन्हें दवा मुहैया नहीं कराई गई। इस मामले में जांच होनी चाहिए।

    इस संबंध में डीएमसीएच अधीक्षक डॉ राज रंजन प्रसाद ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने उनसे बातचीत की और कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इस सिलसिले में जिम्मेदार लोगों से पूछताछ की जा रही है। वो इस तरह की लापरवाही की घोर निंदा करते हैं. इस घटना के लिए जो जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    बिहार के बदहाल अस्पतालों की यह तस्वीर सिर्फ मुजफ्फरपुर या दरभंगा तक सीमित नहीं है। बल्कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार के जिले की भी यही तस्वीर है. उनके गृह प्रखंड हरनौत की पीएचसी की जो तस्वीर सामने आई थी उसे देखकर आप खुद ब खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि दूसरे इलाकों में अस्पतालों की तस्वीर कैसी होगी।

  • लुधियाना की हाई सिक्यॉरिटी जेल में कैदियों के दो गुटों में खूनी संघर्ष , एक कैदी की मौत हो, कई घायल

    लुधियाना की हाई सिक्यॉरिटी जेल में कैदियों के दो गुटों में  खूनी संघर्ष , एक कैदी की मौत हो, कई घायल

    लुधियाना । पंजाब के लुधियाना की हाई सिक्यॉरिटी जेल में कैदियों के दो गुटों में खूनी संघर्ष के दौरान पत्थरबाजी हुई और फिर जमकर गोलियां चलीं। इसमें एक कैदी की मौत हो गई और कई कैदी घायल हुए।

    मिली जानकारी के अनुसार, कैदियों के एक गुट ने गैस सिलिंडरों के माध्यम से आग लगा दी। इससे हालात काबू से बाहर हो गए। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस घटना की मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। लुधियाना के डीसी पूरे मामले की जांच करेंगे।

    कैदियों में संघर्ष की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन व लुधियाना पुलिस मौके पर पहुची लेकिन हालात तब तक काफी बिगड़ गए थे। जेल में दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया। इस बीच जेल परिसर में जोरदार धमाके के साथ आग लग गई। जेल में हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल होने के फायदा उठाकर कुछ कैदी फरार हो गए।

    एसीपी संदीप वडेरा घायल हो गए हैं। वहीं कैदियों ने जेल सुपरिटेंडेंट की गाड़ी को भी आग लगा दी है। कैदियों को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। आला अधिकारियों ने जेल की घेराबंदी करने और देखते ही गोली मारने के आदेश जारी कर दिए हैं।

    करीब तीन घंटे की जद्दोजहद के बाद पुलिस ने उग्र हुए कैदियों को बैरकों में बंद किया। वहीं, जेल से भागे 4 कैदियों को पुलिस वापस ले आई है।

    मीडिया की जानकारी के अनुसार इससे पहले पंजाब की पटियाला की नई नाभा जेल में सिरसा के डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी और बरगाड़ी गुरु ग्रंथ साहिब से बेअदबी के आरोपी मोहिंदरपाल बिट्टू की हत्या के बाद जेल प्रशासन पर सवाल उठे थे। दो साथी कैदियों से विवाद के बाद बिट्टू की हत्या कर दी गई थी।

  • दर्दनाक हादसा : भारी बारिश की वजह से ढही दीवार, 15 लोगों की मौत

    दर्दनाक हादसा : भारी बारिश की वजह से ढही दीवार, 15 लोगों की मौत

    पुणे । महाराष्ट्र में पुणे के तालाब मस्जिद इलाके में देर रात यह हादसा हुआ,  कोंढवा में दीवार गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए हैं। राहत और बचाव का कार्य जारी है।  जिसकी वजह भारी बारिश बताई जा रही है। यहां की एक आवासीय सोसायटी में निर्माण कार्य चल रहा था, जिसके बगल में ही मजदूरों के रहने के लिए कच्चे घर बने हुए थे। पार्किंग से लगा हुआ इमारत का एक हिस्सा गिर गया, जिससे यह हादसा हुआ।

    सुबह घटनास्थल से कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें दिखाई देता है कि सोसायटी की दीवार, मजदूरों की बस्ती पर गिर गई। दीवार के साथ सोसायटी के लोगों की कुछ कारें भी मजदूरों के कच्चे घरों पर आ गईं। हादसे के बाद से ही आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंच गई। राहत और बचाव कार्य अभी जारी है।

    इसी तरह से ठाणे में भी देर रात कई जगहों पर पेड़ गिरने के मामले सामने आए। भारी बारिश की वजह से अंबरनाथ में शिवाजी चौक पर ऑटो रिक्शा स्टैंड पर पेड़ गिरने से 3 लोग घायल हो गए। आपको बता दें कि महाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे, कल्याण, पालघर और आसपास के जिलों में हुई जोरदार बारिश से जगह-जगह पानी भरने से बीएमसी के नाला सफाई के दावों की पोल खुल गई है। इस दौरान करंट लगने से तीन लोगों की मौत हो गई है।

  • अधिकारी को बल्ले से पीटने वाले BJP MLA आकाश विजयवर्गीय जेल से रिहा

    अधिकारी को बल्ले से पीटने वाले BJP MLA आकाश विजयवर्गीय जेल से रिहा

    इंदौर। नगर निगम के अधिकारी को क्रिकेट बल्ले से पीटने के बहुचर्चित मामले और एक अन्य प्रकरण में स्थानीय भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय को रविवार सुबह जिला जेल से रिहा किया गया। भोपाल की एक विशेष अदालत ने शनिवार शाम दोनों मामलों में उनकी जमानत अर्जी मंजूर की थी।

    रिहाई के बाद भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि ऐसी स्थिति में जब एक महिला को पुलिस के सामने घसीटा जा रहा था, मैं कुछ और करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था, जो मैंने किया था उस पर शर्मिंदा नहीं था। लेकिन मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि ‘वो दोबारा बल्लेबाजी करने का कोई अवसार ना दे’।

    जिला जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी ने बताया, “हमें आकाश विजयवर्गीय को जमानत पर रिहा करने का अदालती आदेश शनिवार रात 11 बजे के आस-पास मिला। तय औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें रविवार सुबह जेल से छोड़ दिया गया।”

    चतुर्वेदी ने बताया, “शनिवार को लॉक-अप के शाम सात बजे के नियत समय तक हमें विजयवर्गीय को जमानत पर रिहा करने का अदालती आदेश नहीं मिला था। लिहाजा जेल नियमावली के मुताबिक हम उन्हें शनिवार रात रिहा नहीं कर सकते थे।”

    उन्होंने बताया कि आकाश विजयवर्गीय जिला जेल में न्यायिक हिरासत के तहत बुधवार देर शाम से बंद थे। जेल शब्दावली के मुताबिक नियमित गिनती के बाद कैदियों को कारागार के भीतरी परिसर से दोबारा कोठरी में भेजकर बंद किये जाने को ‘लॉक-अप’ करना कहा जाता है।

    कैमरे में कैद पिटाई कांड में गिरफ्तारी के बाद विजयवर्गीय को बुधवार को एक स्थानीय अदालत के सामने पेश किया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद भाजपा विधायक की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके साथ ही, उन्हें 11 जुलाई तक न्यायिक हिरासत के तहत जिला जेल भेज दिया गया था। न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद रहने के दौरान भाजपा विधायक को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का पुतला जलाने के पुराने मामले में बृहस्पतिवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था।

  • सालों से सूखी पड़ी एक नदी को महिलाओं ने फिर से किया जिंदा, हर कोई है हैरान !

    सालों से सूखी पड़ी एक नदी को महिलाओं ने फिर से किया जिंदा, हर कोई है हैरान !

    वेल्लोर । देश का करीब आधा हिस्सा सूखे की चपेट में है। तमिलनाडु के ज्यादातर इलाके इन दिनों सूखे की मार झेल रहे हैं । कई इलाकों में पानी की भारी कमी है जिसकी आपूर्ति के लिए ज्यादातर लोग और सरकारें बारिश के भरोसे बैठे हैं।लेकिन इस सूबे का एक जिला ऐसा है जो लबालब पानी से भरा हुआ है। ऐसा नहीं है कि यहां इंद्र देवता ज्यादा मेहरबान हैं, और ऐसा भी नहीं है कि तमिलनाडु सरकार ने अलग से कोई ख़ास योजना बनायी है। बल्कि जब लोगों ने खुद ही सूखे के संकट को धूल चटाने की ठान ली, तो जो नतीजा निकला उसे देखकर हर कोई हैरान है। तमिलनाडु के वेल्लोर जिले की 20,000 महिलाओं ने सालों से सूखी पड़ी एक नदी को फिर से जिंदा करने का बेमिसाल काम अंजाम दिया है।

    सालों से सूखी पड़ी एक नदी को महिलाओं ने फिर से किया जिंदा, हर कोई है हैरान !
    जिंदा हुई सालों से मरी हुई नदी

    वेल्लोर जिले में बहने वाली नाग नदी करीब 15 साल पहले पूरी तरह सुख गयी उसके बाद इसमें बारिश के दिनों में पानी तो आता लेकिन आगे बह कर निकल जाता। नदी सूखी तो फसल और उसके साथ ज़िंदगी भी सूख गई। लोग दूसरी जगह पलायन करने लगे, लेकिन तस्वीर बदलने के लिए बीस हजार महिलाओं ने बीड़ा उठाया. नाग नदी को फिर से पुनर्जीवित करने की ज़िम्मेदारी इन महिलाओं ने अपने कंधे पर लिया और आज सूरत ये कि सूखी नदी में पानी का बसेरा है और खेत खलिहान लहलहा उठे हैं।

    नदी को पुनर्जीवित करने की पहल करने वाले चन्द्र शेखर ने कहा कि मेरे गांव के लोग पानी की समस्या के बारे में बातचीत करते थे। तभी मुझे लगा की कुछ किया जा सकता है तो मैंने आर्ट ऑफ़ लिविंग के गुरूजी से बातचीत की जिन्होंने मुझे एक वैगयानिक के पास भेजा। उन्होंने मुझे बताया की नदी के पानी को बचाने के लिए कुँए बनाए जाए और इसे बेकार बहने से रोका जाए. इसके बाद महिलाओं ने वेल्लोर की प्यास बुझाने के लिए एक बार ठान ली।

    फिर श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग संस्था ने भी मदद करना शुरू किया और फिर तमिलनाडु सरकार की नींद खुली तो वो भी महिलाओं के साथ जुड़ गए और फिर चार सालों की मेहनत रंग लाई, इन महिलाओं ने दुनिया भर में संदेश दिया कि इंसानी सूखे जैसी भयावह समस्या पर भी काबू पा सकता है।

    पंचायत अध्यक्ष रामसामी ने कहा कि इन्होंने पहले मुझे कहा की नदी में फिर से पानी लाया जा सकता है लेकिन मैंने इसे असंभव बताया और उसे टालता भी रहा की यह काम नहीं हो सकता लेकिन इसके बावजूद भी इन लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और दो तीन कुएं इस नदी से जोड़कर बना दिए। इन महिलाओं को ये काम अंजाम देने में चार साल लगे हैं। .इस दौरान उन्होंने बारिश का पानी रोकने के लिए कई छोटे-छोटे बांध और कुंए बनाए। 20 फीट गहरे, 16 फीट लंबे और 6 फीट चौड़े रीचार्ज वेल को बनाने में 23 दिन और 10 लोग लगे. इनमें इकट्ठा हुए पानी का इस्तेमाल नदी को जिंदा करने में किया गया।

  • 1 जुलाई से शुरू होगी 46 दिनों की अमरनाथ यात्रा, ये चीजें होंगी खास !

    1 जुलाई से शुरू होगी 46 दिनों की अमरनाथ यात्रा, ये चीजें होंगी खास !

    नई दिल्ली। इस बार अमरनाथ यात्रा 46 दिनो की होगी जो रक्षाबंधन यानि 15 अगस्त के दिन समाप्त हो जाएगी। इस साल अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से शुरू होनी है। इसके चलते सुरक्षा के कड़े इंतजाम अभी से कर दिए गए हैं। साथ ही श्रद्घालुओं का जत्था भी रवाना कर दिया गया है। इस साल आंतकियों के हमले की आशंका के चलते कुछ खास चीजों पर ज्यादा फोकस किया गया है। तो यात्रा में क्या-क्या चीजें रहने वाली है खास आइए जानते हैं इन सभी चीजों के बारे में।

    1.एक जुलाई यानि सोमवार से शुरू होगी श्री अमरनाथ की यात्रा। इस दौरान रोजाना पहलगाम, चंदनबाडी और बालटाल से तकरीबन साढ़े सात हजार भक्त यात्रा कर सकेंगे।

    2.इसके अलावा पंचतरिणी यात्रा सेवा यानि ऑनलाइन पंजीकरण के जरिए बुकिंग कराने वाले भक्तों को सीधे दर्शन की अनुमति है। यात्रा को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट को भी शामिल किया गया है।

    3.सीमित ऑनलाइन बुकिंग की वजह से ऐसे में भक्तों की ज्यादा भीड़ नहीं होगी। नतीजतन पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा।

    4.यात्रियों को यात्रा करते समय किसी प्रकार की परेशानी न हो उसको ध्यान में रखते हुए मार्ग पर दोनों ओर रेलिंग लगाई गई है। साथ ही स्वास्थ केंद्र और मौसम विभाग के पैनल भी बनाए गए हैं।

    5.इस बार अमरनाथ यात्रा पिछली बार के मुकाबले 14 दिन कम की है। साल 2018 में यात्रा की अवधि 60 दिनों की थी। सुरक्षा कारणों और पर्यावरण पर ध्यान देते हुए यात्रा को कम दिन कर कर दिया गया है।

    6.यात्रियों को खाने-पीने में परेशानी न हो इसके लिए भी थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लंगर की व्यवस्था की गई है।

    7.आतंकियों से लगातार मिल रही धमकी की वजह से इस बार सुरक्षा के इंतजाम पर ज्यादा चैकसी की जा रही है। भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लेकर लखनपुर तक नेशनल हाईवे तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

    8.प्राकृतिक बर्फ से तैयार होने वाले शिवलिंग की ऊंचाई इस बार 15 फीट है। जो पिछली बार की तुलना में ज्यादा ठोस है। इसके पूरी तरह से ठोस होने के चलते भोलेनाथ ज्यादा दिनों तक भक्तों को दर्शन दे पाएंगे।

  • कांग्रेस के नए अध्यक्ष होंगे सुशील कुमार शिंदे?

    कांग्रेस के नए अध्यक्ष होंगे सुशील कुमार शिंदे?

    नई दिल्ली। एक रिपोर्ट के मुताबिक गांधी परिवार के करीबी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे कांग्रेस के नए अध्यक्ष होंगे। देश की सबसे पुरानी पार्टी को संभालने के लिए शिंदे के नाम गांधी परिवार की भी मुहर लग गई है। खबर के अनुसार गांधी परिवार ने ही इस पद के लिए मौजूद विकल्पों में सबसे उपयुक्त नेता को चुना है. सुशील कुमार शिंदे के नाम पर सहमति बनने से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत, जनार्दन द्विवेदी से लेकर एके एंटनी और मुकुल वासनिक तक नामों पर चर्चा की गई।

    रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान सभी नामों पर विचार करने के बाद गांधी परिवार की सलाह लेकर पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को पार्टी के अगले अध्यक्ष के तौर पर चुनने का मन बना चुका है।

    हालांकि शिंदे के नाम की घोषणा होने में थोड़ा वक्त लग सकता है, क्योंकि अभी पार्टी में ‘इस्तीफे का नाटक’ चल रहा है. अब तक कांग्रेस के दफ्तर में 2019 लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार की जिम्मेदारी लेने वाले करीब 140 नेताओं के इस्तीफे आ चुके हैं. यह सिलसिला अभी थंमेगा नहीं, क्योंकि राहुल गांधी ने इसी लाइन पर अपना इस्तीफा सौंपा है।

    जानकारी के मुताबिक, सुशील कुमार शिंदे को आज इसके बारे में अंतिम जानकारी दी जा सकती है. इस बाबत शिंदे आज राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं।

    जानकारी के अनुसार उनके नाम पर गांधी परिवार की ओर से आम सहमति मिल गई है. यहां तक कि गांधी परिवार के सहालकार, वरिष्ठ, पार्टी के प्रमुख नेताओं ने भी उन्हें यह दायित्व सौंपने की वकालत की है. ऐसी खबरें हैं कि प्रियंका गांधी ने कांग्रेस के अगले अध्यक्ष को लेकर अपना मंतव्य जाहिर कर दिया है. हालांकि वह इस घोषणा से पहले छुट्टियां मनाने के लिए परिवार के साथ देश से बाहर चली जाएंगी।

    बता दें कि शिंदे को चुने जाने के पीछे कई कारणों ने काम किया है. एक तो शिंदे को कभी अति महत्वकांक्षी होते नहीं देखा गया. उनको लेकर यह आम धारणा है कि उन्होंने पार्टी के निर्देशों के ऊपर जाकर कभी अपनी महत्कांक्षाओं को हावी नहीं होने दिए. वह इससे पहले उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रह चुके हैं, तब उन्हें भैरो सिंह शेखावत से चुनौती मिली थी।

    यही नहीं, जब महाराष्ट्र में उनके और विलासराव देशमुख के बीच मुख्यमंत्री बनने की होड़ शुरू हुई तो पार्टी ने उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बना दिया, लेकिन उन्होंने एक शब्द बोले बगैर यह पद ले लिया. इसके बाद उन्हें कांग्रेस की सरकार में केंद्र प्रमुख पदों पर बुलाया गया।

    सुशील कुमार शिंदे महाराष्ट्र के लिए जाने-माने दलित नेता हैं. आने वाले दिनों में सबसे बड़ा चुनाव महाराष्ट्र में ही होने वाला है. साथ ही वे इस बार लोकसभा चुनाव हार गए थे. ऐसे में उनकी पूरी तैयारी विधानसभा चुनावों में उतरने की भी होगी. इतना ही नहीं एनसीपी को कांग्रेस के साथ लाने में उन्हीं प्रमुख भूमिका है. सुशील कुमार शिंदे ही वह शख्स हैं जो आने वाले विधानसभा चुनाव में एनसीपी और कांग्रेस के बीच पूल का काम करेंगे।

    राहुल गांधी और सोनिया गांधी से अशोक गहलोत की मुलाकातों के बाद यह तय हो पाया कि राहुल गांधी राजस्थान में कोई उठापटक नहीं चाहते हैं। असल में राजस्थान में दोनों पार्टियों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है. ऐसे में अगर गहलोत सीएम की गद्दी छोड़ते हैं और सचिन पायलट के युवा हाथों में प्रदेश की कमान आती है तो कुछ विधायकों के टूटने का डर है. यह कदम कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हो जाएगा. इसलिए राहुल गांधी ने ऐसा करने से मना कर दिया है।

    खबर के मुताबिक इस वक्त कांग्रेस में राहुल गांधी के बाद सबसे तगड़े अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे हैं, लेकिन वे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहने के दौरान कई फैसले बिना गांधी परिवार मसौदे बगैर ले लिए थे। इसी तरह गुलाम नबी आजाद को अध्यक्ष बनाने पर प्रतिद्वंद्वी पार्टी के लिए एक आसान निशाना देना साबित हो सकता है, क्योंकि हिन्दुत्व कार्ड इन दिनों चरम पर है. एंटेनी ने खुद को स्वतः अलग कर लिया है, जनार्दन द्विवेदी ने भी बीते कुछ दिनों से खुद को सक्रिय राजनीति से अलग कर रखा है. ऐसे में पार्टी सुशील कुमार शिंदे पर ही भरोसा जताएगी।

  • 20 करोड़ की होटल एक धमाके में हो गई जमींदोज

    20 करोड़ की होटल एक धमाके में हो गई जमींदोज

    उज्जैन। इस होटल का निर्माण बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में विभिन्न सोसायटियों की आवासीय जमीन पर बगैर भूमि डायवर्सन के नक्शा स्वीकृत कराकर किया गया था। हाईकोर्ट ने इस 6 मंजिला होटल को ढहाने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि इस होटल निर्माण 3 हिस्सों में हुआ था।

    इस इमारत को ध्वस्त करने के लिए कवायद कुछ दिनों से चल रही थी। जेसीबी, पोकलेन से दीवारें तोड़ी थी जिसके बाद कुल 101 पिलर सामने आए।  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आज बुधवार 3 जुलाई को 20 करोड़ रुपए की लागत से अवैध रूप से बनाई गई 6 मंजिला होटल शांति क्लार्क इन सुईट्स की इमारत बुधवार को बारूद लगाकर ध्वस्त कर दिया गया. होटल के दो हिस्सों को 34 किलो विस्फोटक लगाकर उड़ाया गया. इसका शेष हिस्सा गुरूवार 4 जुलाई को तोड़ा जाएगा।

    फिर इन पिलरों में बारूद भरा गया. इंदौर के विस्फोटक एक्सपर्ट शरद सरवटे के निर्देशन में इस होटल को ध्वस्त किया गया। पलक झपकते ही 20 करोड़ की लागत वाली ये होटल जबर्दस्त धमाके के साथ जमींदोज हो गई. विस्फोट के दौरान धूल का गुबार निकला और होटल के दो हिस्से जमींदोज हो गए।

    इमारत में विस्फोट के पहले जनसामान्य की सुरक्षा के लिहाज से नगर निगम आयुक्त प्रतिभा पाल के निर्देश पर पास की होटल विक्रमादित्य को खाली करा लिया गया था. इसके अलावा हरिफाटक ब्रिज और महामृत्युंज द्वार से ट्रैफिक डायवर्ट करने और अनाधिकृत व्यक्तियों को कार्रवाई स्थल से दूर रखा गया।

    यह होटल अफसरों से मिलीभगत कर नियम विरुद्ध बनाया गया था. इसे ढहाने में 34 किलो बारूद का उपयोग किया गया. इस पर 20 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हुए जिसे होटल मालिक से वसूला जाएगा।