Category: national

  • सूरत में लगी आग में मरने वाले विद्यार्थीओ की मौत का जवाबदार कौन:? तंत्र या दमकल..?

    सूरत में लगी आग में मरने वाले विद्यार्थीओ की मौत का जवाबदार कौन:? तंत्र या दमकल..?
    सूरत l सूरत के मुंबई-अहमदाबाद हाइवे के पास स्थित एक कमर्शल कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को भीषण आग लग गई। आग में फंसे लोगों ने जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूदना शुरू कर दिया। अभी तक इस घटना में 15 लोगों के मारे जाने की खबर है। सूरत के पुलिस कमिश्नर सतीश कुमार मिश्रा ने 15 लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि अभी यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    सरथना इलाके में स्थित तक्षशिला कॉम्प्लेक्स एक कमर्शल कॉम्प्लेक्स है और इसमें कई दुकानें और कोचिंग सेटर्स हैं। मृतकों में ज्यादातर स्टूडेंट हैं, जो कॉम्प्लेक्स में स्थित एक कोचिंग में पढ़ने आए थे। हालांकि आग लगने की क्या वजह है, यह अभी नहीं साफ हो पाया है। गुजरातमुख्यमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा, ‘मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने आग की घटना की जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने घटना में जान गंवाने वाले हर छात्र के परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है।’

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    सूरत में लगी आग में मरने वाले विद्यार्थीओ की मौत का जवाबदार कौन:? तंत्र या दमकल..?

    सूरत में लगी आग में मरने वाले विद्यार्थीओ की मौत का जवाबदार कौन:? तंत्र या दमकल..?

    ANI

    ✔@ANI

    #Visuals Gujarat: A fire broke out on the second floor of a building in Sarthana area of Surat; 18 fire tenders at the spot. More details awaited.

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    घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख
    इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, ‘सूरत में आग की घटना से बेहद व्यथित हूं। मृतकों के परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। मैंने गुजरात सरकार और स्थानीय प्रशासन से प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद देने के लिए कहा है।’

    आग के वक्त बिल्डिंग में मौजूद थे 50 से ज्यादा छात्र
    मौके पर फायर ब्रिगेड की 18 गाड़ियां मौजूद हैं और आग बुझाने का प्रयास कर रही हैं। आग के वक्त बिल्डिंग में 50 से ज्यादा बच्चे और टीचर मौजूद थे। मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। ज्यादातर छात्रों की मौत घबराहट में बिल्डिंग से छलांग लगाने की वजह से हुई है।

  • S. Jaishankar बने विदेश मंत्री बनने वाले पहले नौकरशाह

    S. Jaishankar बने विदेश मंत्री बनने वाले पहले नौकरशाह

    नयी दिल्ली। अनुभवी नौकरशाह एवं पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार में विदेश मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार दिया गया है. जयशंकर को चीन एवं अमेरिका मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है और नये विदेश मंत्री के रूप में उन पर खास नजर होगी कि वह इन दोनों महत्वपूर्ण देशों के साथ पाकिस्तान के साथ निपटने में भारत के रूख को किस प्रकार से आगे बढ़ाते हैं।

    जयशंकर को यह महत्वपूर्ण दायित्व उस समय दिया गया है जब करीब 16 महीने पहले ही वे विदेश सेवा से सेवानिवृत हुए हैं. उनके समक्ष विश्व स्तर खासकर जी..20, शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स संगठन जैसे वैश्चिक मंचों पर भारत के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने की उम्मीदों को अमल में लाने की जिम्मेदारी भी रहेगी।

    हालांकि, उनके नेतृत्व में अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और यूरोपीय संघ तथा पड़ोसी देशों के साथ व्यापार एवं रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने पर मंत्रालय का मुख्य जोर रहेगा. जयशंकर के समक्ष एक अन्य चुनौती चीन के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत बनाने पर होगी जो 2017 के मध्य में डोकलाम विवाद के बाद प्रभावित हुए हैं।

    64 वर्षीय जयशंकर न तो राज्यसभा और न ही लोकसभा के सदस्य हैं. उनके नेतृत्व में मंत्रालय के अफ्रीकी महाद्वीप के साथ सहयोग प्रगाढ़ बनाने पर जोर देने की उम्मीद है जहां चीन तेजी से प्रभाव बढ़ा रहा है. नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद में पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को शामिल किया जाना चौंकाने वाला रहा। अनुभवी राजनयिक जयशंकर चीन और अमेरिका के साथ बातचीत में भारत के प्रतिनिधि भी रहे थे। देश के प्रमुख सामरिक विश्लेषकों में से एक दिवंगत के सुब्रमण्यम के पुत्र जयशंकर ऐतिहासिक भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के लिए बातचीत करने वाली भारतीय टीम के एक प्रमुख सदस्य थे।

    इस समझौते के लिए 2005 में शुरूआत हुयी थी और 2007 में मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली संप्रग सरकार ने इस पर हस्ताक्षर किए थे. जनवरी 2015 में जयशंकर को विदेश सचिव नियुक्त किया गया था और सुजाता सिंह को हटाने के सरकार के फैसले के समय को लेकर विभिन्न तबकों ने तीखी प्रतिक्रिया जतायी थी।

    जयशंकर अमेरिका और चीन में भारत के राजदूत के पदों पर भी काम कर चुके हैं। 1977 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस)अधिकारी जयशंकर ने लद्दाख के देपसांग और डोकलाम गतिरोध के बाद चीन के साथ संकट को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जयशंकर सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त और चेक गणराज्य में राजदूत पदों पर भी काम कर चुके हैं. 64- वर्षीय जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव रहे हैं।

  • नीतीश कैबिनेट विस्तार में BJP को जगह नहीं

    नीतीश कैबिनेट विस्तार में BJP को जगह नहीं

    पटना । बिहार में  लोकसभा चुनाव में कई विधायकों के सांसद बनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। आठ नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इनमें सारे मंत्री जदयू कोटे से बनाए गए, जबकि भाजपा से किसी नेता को शामिल नहीं किया गया। मंत्रिमंडल विस्तार में अशोक चौधरी, नीरज कुमार, लक्ष्मेश्वर राय, श्याम रजक, रामसेवक सिंह, बीमा भारती, संजय झा, नरेंद्र नारायण यादव को जगह दी गई।

    इस दौरान 8 नए मंत्री शामिल हुए। कांग्रेस से जेडीयू में आए पार्टी एमएलसी अशोक चौधरी के अलावा श्याम रजक, रामसेवक सिंह, नीरज कुमार, बीमा भारती, नरेंद्र यादव, संजय झा और लक्ष्मेश्वर राय ने मंत्री पथ की शपथ ली।

    जेडीयू के प्रदेश महासचिव लक्ष्मेश्वर राय ने मंत्री पथ की शपथ ली है। वहीं 2009 से लगातार जेडीयू के प्रवक्ता रहे नीरज कुमार को भी मंत्री बनाया गया है। बीजेपी से जेडीयू में आए संजय झा भी अब मंत्री बन गए हैं। वहीं कांग्रेस से जेडीयू में शामिल हुए अशोक चौधरी को भी मंत्री बनाया गया है।आलमनगर से विधायक नरेंद्र यादव को भी नीतीश ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है। वहीं 6 बार से विधायक श्याम रजक को भी मौका मिला है। इसी तरह आने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार ने अति पिछड़ा समाज से बीमा भारती को कैबिनेट में शामिल किया है। इसके अलावा राष्ट्रीय सचिव रामसेवक सिंह भी इस बार मंत्रिमंडल का हिस्सा बन गए हैं।

    इस मंत्रिपरिषद विस्तार में बीजेपी और एलजेपी से किसी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया है। हालांकि जेडीयू के महासचिव और मुख्‍य प्रवक्‍ता केसी त्‍यागी ने कहा है कि उनकी पार्टी गठबंधन में ‘छोटा भाई, बड़ा भाई’ की सोच के खिलाफ है। उन्‍होंने कहा कि अगर बीजेपी केंद्र सरकार में जेडीयू के सदस्‍यों को शामिल करने पर ‘संतोषजनक ऑफर’ देती है तो उनकी पार्टी इस पर विचार करेगी।

    लंबे समय बाद नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। लोकसभा चुनाव में राज्य सरकार के तीन मंत्रियों के जीत जाने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार तय माना जा रहा था। लोकसभा चुनाव में नीतीश सरकार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को मुंगेर लोकसभा क्षेत्र से सफलता मिली है, जबकि आपदा और लघु सिंचाई मंत्री दिनेश चन्द्र यादव को मधेपुरा से और पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस को हाजीपुर से जीत हासिल हुई है। इससे पहले ही सृजन घोटाले में नाम आने के कारण मंजू वर्मा को समाज कल्याण मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद से नीतीश मंत्रिमंडल में कोई भी महिला सदस्य नहीं है।

  • देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन गई निर्मला सीतारमण

    देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन गई निर्मला सीतारमण

    नई दिल्ली।  PM नरेन्द्र मोदी कैबिनेट में विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। अरुण जेटली की ओर से मंत्री पद संभालने से मना करने के बाद इस बार वित्त मंत्रालय का कार्यभार निर्मला सीतारमण को सौंपा गया है। इसी के साथ वह देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन गई हैं। इससे पहले वह मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में पहली महिला रक्षा मंत्री बनी थीं।

    हालांकि इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए कुछ वक्त के लिए वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय अपने पास रखे थे, लेकिन 5 वर्षों के लिए अब निर्मला सीतारमण के पास फुल टाइम वित्त मंत्रालय रहेगा। इसके अलावा उन्हें कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय संभालने का जिम्मा भी दिया गया है।

    तमिलनाडु के मदुरई में जन्मी निर्मला सीतारमण ने अपनी स्कूली शिक्षा तिरुचिरापल्ली से ली है। उन्होंने यहां के सीतालक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज से इकनॉमिक्स में बीए किया है। वहीं, दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से उन्होंने मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। निर्मला सीतारमण के पिता रेलवे कर्मचारी थे, लिहाजा उनका बचपन कई राज्यों में बीता।

    इससे पहले अरुण जेटली ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए खुद को मंत्री न बनाए जाने की गुजारिश की थी। इसके बाद कयास लगने लगे थे कि वित्त मंत्रालय का भार किसको सौंपा जाएगा। इस रेस में पीयूष गोयल का नाम आगे चल रहा था. लेकिन पीएम मोदी ने उन्हें रेलवे मंत्रालय संभालने का जिम्मा सौंपा और खजाने की चाबी निर्मला सीतारमण को सौंप दी।

    देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन गई निर्मला सीतारमण
    सीतारमण बनीं वित्त मंत्री

     

  • देशभर में भीषण Heatwave का कहर, अबतक कम से कम 30 की मौत

    देशभर में भीषण Heatwave का कहर, अबतक कम से कम 30 की मौत

    नई दिल्ली । देशभर के ज्यादातर राज्यों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। कई जगहों पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। राजस्थान के गंगानगर में तो शुक्रवार को अधिकतम तापमान 50 डिग्री के करीब पहुंच गया। वहां 49.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। देश में इस साल हीटवेव की वजह से अबतक कम से कम 30 लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक, अभी अगले 3 दिनों तक भीषण हीटवेव से राहत नहीं मिलने वाली है।

    मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी राजस्थान के ज्यादातर हिस्सों में शनिवार को भीषण हीटवेव चल रही है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, यूपी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, नॉर्थ कर्नाटक, बिहार, झारखंड, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लू का कहर अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा।

    देशभर में भीषण Heatwave का कहर, अबतक कम से कम 30 की मौत
    Photo Credit- Social Media

    हीटवेव की वजह से इस साल तेलंगाना में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। पिछली 23 दिनों में सूबे में गर्मी और लू से 17 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है। इसी तरह आंध्र प्रदेश में इस सीजन में 3 लोगों की लू लगने से मौत हुई है। इसके अलावा 433 लोग बीमार हुए हैं। दोनों राज्यों में 2015 में भीषण लू ने कहर ढाया था। तब अकेले आंध्र प्रदेश में लू लगने से 1,369 लोगों की मौत हुई थी। इसी तरह तेलंगाना में 2015 में 541 लोगों की मौत हुई थी। वहां पिछले साल भी 27 लोगों की जान गई थी।

    महाराष्ट्र के भी ज्यादातर हिस्से भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। यहां इस सीजन में गर्मी से अबतक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 456 लोगों के बीमार होने के मामले सामने आए हैं। नागपुर और अकोला जैसे क्षेत्रों में लू से मौत और बीमार पड़ने की घटनाएं ज्यादा हुई हैं।

    इस सीजन में कुछ जगहों पर अधिकतम तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। शुक्रवार को जहां राजस्थान का गंगानगर सबसे गरम था, वहीं उससे एक दिन पहले गुरुवार को इलाहाबाद देश में सबसे ज्यादा तप रहा था। शुक्रवार को गंगानगर में अधिकतम तापमान 49.6 डिग्री सेल्सियस और गुरुवार को इलाहाबाद में 48.6 डिग्री सेल्सियस रहा।

  • अजित डोभाल का प्रमोशन, मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा

    अजित डोभाल का प्रमोशन,  मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा

    नई दिल्ली । एनडीए की पिछली सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) रहे अजित डोभाल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर भरोसा जताया है। उन्हें दोबारा अगले 5 साल के लिए NSA नियुक्त कर दिया गया है। एक्सटेंशन के अलावा डोभाल का प्रमोशन भी किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान को देखते हुए डोभाल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर डोभाल का कद अब एक कैबिनेट मंत्री के बराबर होगा। डोभाल का फिर से एनएसए बनना बताता है कि मोदी के साथ-साथ नए गृह मंत्री अमित शाह भी उनके काम से संतुष्ट हैं।

    कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में डोभाल की नियुक्ति की जानकारी दी गई है। आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने डोभाल को इस पद पर दोबारा नियुक्त किये जाने के संबंध में अपनी मंजूरी दे दी है और यह व्यवस्था 31 मई 2019 से प्रभावी होगी। प्रधानमंत्री के कार्यकाल के साथ-साथ उनकी नियुक्ति भी खुद समाप्त हो जाएगी।

    आदेश में कहा गया है, ‘इस पद पर नियुक्ति के दौरान उन्हें कैबिनेट मंत्री का रैंक दिया गया है।’ डोभाल को पहली बार मई 2014 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था ।

  • संसद का बजट सत्र 17 जून से होगा शुरू, बजट पेश होगा 5 जुलाई को

    संसद का बजट सत्र 17 जून से  होगा शुरू,  बजट पेश होगा 5 जुलाई को

    नई दिल्ली। सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव के बाद संसद का पहला सत्र 17 जून से 26 जुलाई तक चलेगा और नई सरकार का पहला बजट पांच जुलाई को पेश किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि 17 जून से आरंभ होने वाले इस सत्र में कुल तीस बैठकें होंगी और यह 26 जुलाई तक चलेगा। उन्होंने बताया कि 17 एवं 18 जून को लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलायी जाएगी तथा 19 जून को लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा।

    उन्होंने बताया कि 20 जून को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करके उसे पारित कराया जाएगा।

    चार जुलाई को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा और पांच जुलाई को आम बजट प्रस्तुत किया जाएगा। लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र पिछली सरकार ने गत फरवरी में पूर्ण बजट पेश नहीं किया था बल्कि परंपरा के अनुरूप लेखानुदान पारित किया गया था।

  • बेगूसराय : BJP नेता की पीट-पीटकर हत्‍या

    बेगूसराय : BJP नेता की पीट-पीटकर हत्‍या

    बेगूसराय।बिहार के बेगूसराय में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता की पीट-पीटकर हत्‍या कर दी गयी है. मामला बीती रात का है। जानकारी के अनुसार बेगूसराय के सिंघौल थाना क्षेत्र के अमरौर किरतपुर के रहने वाले और अमरौर पंचायत के पंचायत अध्यक्ष गोपाल सिंह की हत्या अपराधियों ने कर दी. अपराधियों ने घटना को उनके घर के बाहर ही अंजाम दिया।

    घटना के बाद इलाके में तनाव व्याप्त है. घटना के कारणों कर फिलहाल पता नहीं चल सका है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. बताया जा रहा है अपराधियों ने गोपाल सिंह को घर के बाहर मार डाला और वहीं लाश को फेंक कर फरार हो गये।

    गौर हो कि बेगूसराय में बीते कुछ दिनों में कई घटनाओं को अपराधियों ने अंजाम दिया है। हाल ही में अपराधियों ने एक फेरी वाले को यह कहते हुए गोली मार दी थी कि उसे तो पाकिस्‍तान में होना चाहिए।

  • Odisha के सांसद ने इस चीज में पीएम मोदी को भी दे दी मात, जानिये इनके बारे में !

    Odisha के सांसद ने इस चीज में पीएम मोदी को भी दे दी मात,  जानिये इनके बारे में !

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद अमित शाह समेत 57 और मंत्रियों ने पद और गोपनियता की शपथ ली।

    लेकिन शपथ ग्रहण समारोह में सबसे ज्यादा ताली बटोरने के मामले में एक शख्स ने पीएम मोदी को भी मात दे दी। हम बात कर रहे हैं ओडिशा में अपनी झोपड़ी से निकलते हुए कमजोर से दिखने वाले और ईमानदार माने जाने वाले 64 वर्षीय प्रताप चंद सारंगी की। प्रताप चंद सारंगी जब 56वें नंबर पर शपथ लेने आए तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा।

    हर कोई उनकी सादगी को देखकर उनका कायल हो गया। सारंगी को उनकी सादगी की वजह से ओडिशा का मोदी भी कहा जाता है। जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे आज भी कहीं आने.जाने के लिए निजी वाहन का नहीं बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने अपना उन्होंने अपना चुनाव प्रचार भी साइकिल पर किया। ओडिशा के बालासोर से पहली बार जीतकर संसद पहुंचे प्रताप चंद्र सारंगी को उनके सादगी के लिए जाना जाता है।

    मोदी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री प्रताप चंद्र सारंगी ओडिशा में बजरंग दल के प्रमुख रह चुके हैं। और मोदी सरकार में सूक्ष्म  लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय और पशुपालन डेयरी और मत्स्य पालन विभाग में उन्हें केंद्रीय राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार  उनके खिलाफ दंगा करने  धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच घृणा को बढ़ावा देने आपराधिक धमकी और जबरन वसूली के आरोपों के तहत मामले दर्ज हैं।

    वह अपनी लाइफस्टाइल के लिएए अपने सादा जीवन और काम के लिए अकसर ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड में रहते हैं। लंबी दाढ़ी और साधारण से कुर्ते पजामे में शपथ लेते सारंगी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल रही।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ट्वीट में कहा गया कि प्रताप सारंगी को ‘ओडिशा का मोदी’ कहा जाता है। उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके पास केवल 15,000 रुपये नकद हैं। उनकी चल संपत्ति 1.5 लाख रुपये और अचल संपत्ति कुल 15 लाख रुपये की है. जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों की औसत संपत्ति लगभग 4 करोड़ रुपये थी।

    प्रताप चंद्र सारंगी सांसद चुने जाने से पहले ओडिशा के नीलगिरी विधानसभा से 2004 और 2009 में विधायक चुने जा चुके हैं। इससे पहले वह 2014 के लोकसभा चुनाव में भी खड़े हुए थे लेकिन तब उन्हें हार मिली थी।

  • नई सरकार का  बड़ा फैसला, अब सभी किसानों को मिलेंगे ₹6000

    नई सरकार का  बड़ा फैसला,  अब सभी किसानों को मिलेंगे ₹6000

    नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली नई सरकार ने चुनाव में किये गये वादों को पूरा करने के लिये कदम उठाना शुरू कर दिया है। सरकार ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री किसान योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसके तहत सभी किसानों को 6,000 रुपये सालाना देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। नई राजग सरकार के मंत्रिमंडल की पहली बैठक में यह निर्णय किया गया। आम चुनावों के अपने घोषणापत्र में भाजपा ने सभी किसानों को इस योजना के दायरे में लाने का वादा किया था।

    प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत अब 14.5 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे, इससे सरकारी खजाने पर 87,000 करोड़ रुपये सालाना बोझ पड़ेगा। उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल ने पीएम-किसान योजना का दायरा बढ़ाकर सभी किसानों को इसमें अंतर्गत लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

    नई सरकार का  बड़ा फैसला,  अब सभी किसानों को मिलेंगे ₹6000
    मोदी सरकार 2.0 कैबिनेट की पहली ही बैठक में फैसला, अब हर किसान को मिलेंगे सालाना 6 हजार रुपये

    वित्त वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट में 75,000 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की घोषणा की गयी थी। इसके तहत सरकार ने दो हैक्टयर तक की जोत वाले करीब 12 करोड़ छोटे एवं सीमांत किसानों को 6,000 रुपये सालाना तीन किस्तों में देने की घोषणा की थी। आधिकारिक आंकड़े के अनुसार प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत अब तक 3.11 करोड़ छोटे किसान 2,000 रुपये की पहली किस्त प्राप्त कर चुके हैं। वहीं 2.75 करोड़ कृषकों को दूसरी किस्त मिल चुकी है।