मुंबई l सात चरणों में समाप्त हुए लोकसभा चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों में एनडीए के बहुमत की तरफ बढ़ने से उत्साहित शेयर बाजार ने गुरुवार को इतिहास रच दिया। सेंसेक्स ने पहली बार 40 हजार का ऐतिहासिक आंकड़ा छुआ, तो निफ्टी ने भी 12 हजार का आंकड़ा पार कर रेकॉर्ड बनाया। सुबह 10.45 बजे सेंसेक्स ने 897.50 अंकों (2.29%) की तेजी के साथ 40,007.71 का स्तर छू दिया, वहीं निफ्टी ने 265.25 अंकों (2.26%) के उछाल के साथ 12,003.15 आंकड़ा छुआ। बाजार की रेकॉर्ड चाल को देखते हुए विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया भी 14 पैसे बढ़कर 69.51 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
बीजेपी के साथ शेयर बाजार ने भी रचा इतिहास, जानिए कैसे
मोदी सरकार के केंद्र की सत्ता में लौटने की आश्वस्तता को लेकर निवेशक बाजार में भारी लिवाली कर रहे हैं। बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में धुआंधार लिवाली हो रही है। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों को भी निवेशक हाथोंहाथ ले रहे हैं। साथ ही बाजार के वोलेटिलिटी इंडेक्स में 26 फीसदी की गिरावट आई है।
एग्जिट पोल के बाद भी हुई थी भारी लिवाली इससे पहले 20 मई को एग्जिट पोल के नतीजों में एनडीए को बहुत मिलने के संकेत मिलने के बाद बीएसई के 31 शेयरों के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स ने 10 साल का रेकॉर्ड बना दिया था। एक दिन के कारोबार में सेंसेक्स के 1421.90 अंक (3.75%) मजबूत होने का कारनामा पिछले 10 साल में पहली बार किया था। वहीं, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों का संवेदी सूचकांक निफ्टी 421.10 अंक (3.69%) मजबूत होकर क्रमशः 39,352.67 और 11,828.25 पर बंद हुआ था। बीएसई पर लगभग 40 कंपनियों के शेयरों ने 52 सप्ताह के उच्च स्तर को छू दिया था।
41,500 पार कर सकता है सेंसेक्स बाजार की नई ऊंचाई पर हमारे सहयोगी ईटी डॉट कॉम से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कैपिटलएम के रिसर्च के हेड रोमेश तिवारी ने कहा कि रुझान बीजेपी की जीत की ओर इशारा कर रहे हैं, इसलिए बाजार नई ऊंचाइयां छू सकता है और सोमवार को बाजार में शुरू हुई तेजी आगे भी बरकरार रह सकती है। इस तरह, सेंसेक्स 4,1500 और निफ्टी 12,300 के आंकड़े को छू सकता है और इस स्तर पर मुनाफावसूली देखी जा सकती है।
वहीं, मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशल सर्विसेज लिमिटेड के सीएमडी मोतीलाल ओसवाल ने बताया कि यह एक नई शुरुआत केवल बाजार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। भारत सुपर पावर बनने की राह पर है और यह पूरी दुनिया का नेतृत्व करेगा।
शुरुआती कारोबार में बीएसई पर 26 कंपनियों के शेयर हरे निशान पर तो 5 कंपनियों के शेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे। जबकि, एनएसई पर 48 कंपनियों के शेयरों में लिवाली तो 2 कंपनियों के शेयरों में बिकवाली दर्ज की गई। सुबह 10.21 बजे सेंसेक्स 807.32 अंकों (2.06%) के उछाल के साथ 39,917.53 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 236.30 अंकों (2.01%) की तेजी के साथ 11,974.20 पर कारोबार कर रहा था।
इन शेयरों में तेजी बीएसई पर इंडसइंड बैंक के शेयर में सर्वाधिक 6.35 फीसदी, एसबीआई में 6.18 फीसदी, पावरग्रिड में 2.58 फीसदी, यस बैंक में 8.02 फीसदी और एक्सिस बैंक के शेयर में 2.14 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। एनएसई पर भी इंडसइंड बैंक के शेयर में सर्वाधिक 5.54 फीसदी, सन फार्मा में 3.46 फीसदी, बजाज ऑटो में 2.51 फीसदी, बीपीसीएल में 2.35 फीसदी और आयशर मोटर्स के शेयर में 1.83 फीसदी की तेजी देखी गई।
इन शेयरों में गिरावट बीएसई पर वेदांता लिमिटेड के शेयर में 0.36 फीसदी और ओएनजीसी के शेयर में 0.11 फीसदी कि गिरावट दर्ज की गई। एनएसई पर टेक महिंद्रा के शेयर में सर्वाधिक 2.98 फीसदी, इंडिया बुल हाउजिंग फाइनैंस में 2.94 फीसदी, इंफ्राटेल में 2.52 फीसदी, यस बैंक में 1.49 फीसदी और जी लिमिटेड के शेयर में 1.35 फीसदी की गिरावट देखी गई।
अमेठी । बीजेपी की दिग्गज महिला नेता स्मृति इरानी अमेठी में राहुल को मात दी। खुद राहुल गांधी ने अमेठी सीट पर परिणाम घोषित होने से पहले ही पराजय स्वीकार कर ली है।
1967 में अस्तित्व में आई अमेठी सीट पर यह तीसरा मौका है, जब कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। यूपी में कांग्रेस का भले ही कितना भी खराब वक्त रहा हो, लेकिन रायबरेली और अमेठी संसदीय सीटों पर उसे जीत मिलती रही है।
रायबरेली से सोनिया गांधी और अमेठी से राहुल गांधी जीत दर्ज करते रहे हैं। लेकिन इस बार बीजेपी की दिग्गज महिला नेता स्मृति इरानी अमेठी में राहुल को मात दी हैं। इस हार में एक दिलचस्प पहलु यह है कि ‘21’ नंबर का भी है।
इस सीट पर हर 21 साल बाद कांग्रेस का यहां हारने का रिकार्ड रहा है और यह बात राहुल गांधी की हार में भी कायम रही है। पहली बार 1977 में इंदिरा गांधी की ओर से आपातकाल लगाए जाने के विरोध में देश भर में कांग्रेस विरोध लहर के दौरान संजय गांधी इस सीट से परास्त हुए थे।
यह पहला मौका था, जब अमेठी सीट कांग्रेस के हाथ से छिनी थी। उन्हें जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह ने परास्त किया था। इसके ठीक 21 साल बाद 1998 में कैप्टन सतीश शर्मा को पराजय झेलनी पड़ी थी। उन्हें बीजेपी कैंडिडेट संजय सिंह ने परास्त किया था।
सन 1998 के बाद अब फिर 21 साल पूरे हुए हैं और कांग्रेस के लिए नतीजा पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की हार के तौर पर सामने आया है। गौरतलब है कि बीजेपी की स्मृति इरानी ने राहुल गांधी को 19,000 से ज्यादा वोटों से मात दी है। इससे पहले 2014 में भी स्मृति ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी।
लेकिन वह दूसरे स्थान पर रही थीं। अमेठी का गढ़ उखड़ने के साथ ही कांग्रेस उत्तर प्रदेश में महज एक सीट पर ही सिमट गई है। रायबरेली सीट से सोनिया गांधी जीत हासिल करने में सफल रही हैं। हालांकि उनकी जीत का अंतर भी पिछले आम चुनावों के मुकाबले कम हुआ है।
पटना। पीएम नरेंद्र मोदी की मजबूत नेता की छवि ने पूरे देश में उनको सर्वामान्य नेता के रूप में पेश किया। नोटबंदी, जीएसटी और आतंकवाद के खिलाफ उनके कड़े फैसले से देश में उनकी छवि एक मजबूत नेता की बनी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी नीत एनडीए ने प्रंचड बहुमत हासिल की है। बिहार में सुशील मोदी की भाजपा, नीतीश कुमार की जेडीयू राम विलास पासवान की लोजपा समेत एनडीए ने 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की है। कांग्रेस नीत यूपीए गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने वाली लालू प्रसाद यादव की आरजेडी का खाता तक भी नहीं खुल सका है।
बिहार में तेजस्वी यादव के राजद की हालत कुछ ऐसी है जैसी साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी के अंदर मायावती की बसपा की थी। दरअसल साल 2014 लोकसभा चुनाव में मायावती की बहुजन समाज पार्टी को एक भी सीट हासिल नहीं हो सकी थी। इसी तरह साल 2019 के चुनाव में राष्ट्र जनता दल को एक भी सीट नहीं मिल सकी है।
पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं लालू की बड़ी बेटी मीसा भारती को भी हार का सामना करना पड़ा है। वहीं इस चुनाव हॉट चर्चा में बनी रही बेगूसराय लोकसभा सीट से राजद के तनवीर हसन को करारी हार मिली है. यहां से सीपीआई के कन्हैया को पछाड़ते हुए भाजपा के गिरिराज सिंह ने बड़ी जीत दर्ज की है। बिहार में एनडीए के कई बड़े नेताओं ने एक लाख से अधिक वोटों के साथ जीत दर्ज की है. ।
छपरा से महागठबंधन से लड़े रहे तेज प्रताप यादव के ससुर चंद्रिका राय को भी हार मिली है। वहीं एनडीए से यूपीए में शामिल हुए बिहार महागठबंधन के नेता और आरएलएसपी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी सीट से चुनाव हार गए हैं। हालांकि कुशवाहा ने हार को स्वीकार करते हुए कहा है कि वे जनता जनार्दन का फैसला सिर-आखों पर रखते हैं, उन्होंने आगे कहा कि इस समय महागठबंधन को आत्मचिंतन करना होगा, साथ ही स्वीकार करना होगा कि हम जनता की नब्ज पहचान करने में सफल नहीं हो सके हैं।
नयी दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्ता वापसी पर देश-दुनिया से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नेता पीएम मोदी को बधाई दे रहे हैं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सबसे अनोखे तरीके से हिन्दी में ट्वीट कर श्री मोदी को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा, “मेरे दोस्त नरेंद्र मोदी आपकी प्रभावशाली चुनावी जीत पर हार्दिक बधाई! ये चुनावी नतीजे एक बार फिर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आपके नेतृत्व को साबित करते हैं। हम साथ मिलकर भारत और इज़राइल के बीच घनिष्ठ मित्रता को मजबूत करना जारी रखेंगे। बहुत बढ़िया, मेरे दोस्त।”
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने भी श्री मोदी को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट किया, “आपकी जीत और आपके नेतृत्व में लोगों के दोबारा भरोसा जताने पर बधाई। श्रीलंका भविष्य में भारत के साथ नजदीकी एवं रचनात्मक संबंध जारी रखने के प्रति आशान्वित है।” श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने भी श्री मोदी को बधाई दी है। श्री विक्रमसिंघे ने ट्वीट किया, “चुनावों में फिर शानदार प्रदर्शन पर नरेंद्र मोदी को बधाइयां। हम आपके साथ मिलकर काम करने के प्रति आशान्वित हैं।”
नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने श्री मोदी को बधाई दी और कहा, “मैं लोकसभा चुनाव 2019 में भारी जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मैं उनके साथ निकटता के साथ काम करने की आशा रखता हूं।”
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी जबरदस्त बहुमत मिलने पर भारतीय प्रधानमंत्री को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट किया, “जबरदस्त बहुमत मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई। अफगानिस्तान की सरकार और जनता को दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग, शांति और समृद्धि के लिए दोनाें देशों के बीच निकट सहयोग प्रगाढ़ हाेने की उम्मीद है।”
गौरतलब है कि सत्रहवीं लोकसभा के चुनावों की मतगणना के रुझानों में भाजपा पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ रही है। सभी 542 सीटों के रुझान आ चुके हैं जिनमें से भाजपा 291 सीटों पर आगे चल रही है जबकि कांग्रेस सिर्फ 51 सीटों पर आगे है।
नई दिल्ली। 16वीं लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को समाप्त हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री से नई सरकार बनने तक पद पर बने रहने का आग्रह किया है। इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें 16वीं लोकसभा भंग करने की सिफारिश की गई। एक दिन पहले आए लोकसभा चुनाव नतीजों में बीजेपी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को जबर्दस्त जीत हासिल हुई है।
आपको बता दें कि 17वीं लोकसभा का गठन 3 जून से पहले किया जाना है और नए सदन के गठन की प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में तब शुरू होगी जब तीनों चुनाव आयुक्त राष्ट्रपति राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलेंगे और नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची सौपेंगे।
देश की जनता ने बीजेपी को ऐतिहासिक जनादेश दिया है और पार्टी ने 303 सीटें जीती हैं। अब चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि 17वीं लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट किसे कौन सा पोर्टफोलियो मिलेगा? केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, मेनका गांधी, पीयूष गोयल, प्रकाश जावड़ेकर आदि शामिल हुए। तबीयत ठीक नहीं होने के कारण अरुण जेटली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में भी नहीं पहुंचे।
सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वित्त मंत्री अरुण जेटली दोबारा वित्त मंत्रालय का कार्यभार नहीं लेंगे। इसकी वजह उनकी सेहत ठीक न होने को बताया जा रहा है। अगर जेटली पद स्वीकार नहीं करते हैं तो केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय या दोनों मंत्रालयों का प्रभार दिया जा सकता है।
अटकलें हैं कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है। दरअसल, रक्षा मंत्री का पद बीजेपी सरकार के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस चुनाव में भारतीय सेना और पाकिस्तान में घुसकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की काफी चर्चा हुई थी। ऐसे में सरकार एक मजबूत रक्षा मंत्री के तौर पर शाह को यह अहम पद दे सकती है।
सरकार गठन को लेकर जारी गहमागहमी के बीच पार्टी के कई नेताओं का ऐसा मानना है कि इस बार मोदी मंत्रिमंडल में अमित शाह भी शामिल होंगे और उन्हें गृह, वित्त, विदेश या रक्षा में से कोई एक मंत्रालय दिया जा सकता है। उम्मीद है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण नई सरकार में मुख्य भूमिका में रह सकती हैं।
स्मृति इरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी से पराजित किया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि पार्टी उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। वहीं, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रकाश जावड़ेकर को नए मंत्रिमंडल में बनाए रखे जाने की संभावना है। JDU और शिवसेना को भी नई कैबिनेट में स्थान दिया जा सकता है क्योंकि दोनों दलों ने क्रमश: 16 और 18 सीट दर्ज करके शानदार प्रदर्शन किया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना से नए चेहरों को स्थान दिया जा सकता है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, ‘मंत्री परिषद में कई युवा चेहरों को स्थान दिए जाने की संभावना है क्योंकि नेतृत्व पार्टी की दूसरी कतार तैयार करना चाहता है।’ वैसे किस सांसद को कौन सा मंत्रालय दिया जाए, इस पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेना है।
नयी दिल्ली। बीजेपी की अगुआई वाले NDA की शानदार जीत के बाद अब शनिवार को संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है। इस दौरान औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नेता चुना जा सकता है। हालांकि यह औपचारिकता मात्र है क्योंकि नतीजे आने से पहले ही NDA के घटक दल पीएम के नेतृत्व पर भरोसा जता चुके हैं।
सूत्रों ने बताया कि इस बारे में कैबिनेट की सिफारिश मिलने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद वर्तमान लोकसभा भंग करने की कार्रवाई करेंगे. 16वीं लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को समाप्त हो रहा है. 17वीं लोकसभा का गठन 3 जून से पहले किया जाना है और नये सदन के गठन की प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में तब शुरू होगी जब तीनों चुनाव आयुक्त राष्ट्रपति से मिलेंगे और नव निर्वाचित सदस्यों की सूची सौपेंगे।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल की सिफारिश के प्रस्ताव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संसदीय कार्य मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलेंग। वे प्रस्ताव तथा मंत्रिपरिषद का इस्तीफा राष्ट्रपति को सौपेंगे।
पूर्व लोकसभा महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने बताया कि उसके बाद प्रधानमंत्री को नयी सरकार के गठन तक पद पर बने रहने को कहा जायेगा। शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय की जायेगी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति वर्तमान लोकसभा को भंग कर देंगे. लोकसभा का कार्यकाल तीन जून को समाप्त हो रहा है. यदि इसे भंग नहीं किया जाता तो यह तीन जून को स्वभाविक रूप से भंग हो जायेगी. यह सिर्फ औपचारिकता है।इस बीच, लोकसभा चुनाव में एनडीए को मिली प्रचंड जीत के बाद नयी सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। इस क्रम में एनडीए संसदीय दल की बैठक शनिवार को शाम 5 बजे बुलायी गयी है।
इसमें गठबंधन के सभी नवनिर्वाचित सांसद शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि इस दौरान औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नेता चुना जा सकता है। इसके बाद वह राष्ट्रपति से मिलकर नयी सरकार बनाने का दावा करेंगे. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले 302 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है।
एक सीट पर परिणाम अभी नहीं आया है। चुनाव में एनडीए को 349 मिली हैं। वहीं, यूपीए के खाते में 82 और महागठबंधन को मात्र 15 सीटें मिली हैं। इसके साथ कैबिनेट में जगह को लेकर भी चर्चा का दौर शुरू हो गया है. सूत्रों से पता चला है कि इस बार पश्चिम बंगाल के चार सांसदों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
नई दिल्ली । 41 विधानसभा सीटों और दो विधान परिषद सदस्य पदों के लिए अगले छह महीने के अंदर चुनाव होंगे क्योंकि लोकसभा चुनाव में 49 विधायक, दो विधान परिषद सदस्य और चार राज्य सभा सांसदों ने जीत हासिल की है। इससे आने वाले कुछ महीनों में चुनाव आयोग को 16 राज्यों में उपचुनाव कराना पड़ सकता है। इस सूची में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है जहां 11 विधायक सांसद बने हैं।
बिहार में पांच विधायक और दो विधान परिषद सदस्य सांसद चुने गए हैं। नए चुने गए सांसदों को इस्तीफा देना होगा। इसमें ओडिशा की भी दो विधानसभा सीटें शामिल हैं जहां सीएम नवीन पटनायक को हिंजिली या बीजेपुर में से एक सीट को चुनना होगा। इस बीच महाराष्ट्र की छह विधानसभा सीटों और झारखंड की दो तथा हरियाणा की एक सीट पर उपचुनाव नहीं होंगे क्योंकि वहां पर अगले छह महीने में चुनाव होना है।उधर, एसपी-बीएसपी गठबंधन को यूपी में आने वाले छह महीने में एक और टेस्ट से गुजरना होगा।
राज्य में कुल 11 सीटों गोविंदनगर, टुंडला, लखनऊ कैंट, गंगोह, बल्हा, मानिकपुर, इगलास, जैदपुर, प्रतापगढ़, जलालपुर और रामपुर में उपचुनाव होंगे। बता दें कि तीन नए सांसद रीता बहुगुणा जोशी, सत्यदेव पचौरी और एसपी सिंह यूपी की वर्तमान योगी सरकार में मंत्री हैं।बिहार में भी पांच विधानसभा और दो विधान परिषद सीटों पर अगले छह महीने में चुनाव कराने पड़ेंगे।
ये पांच सीटें हैं-सिमरी बख्तियारपुर, दरौंधा, बेल्हर, नाथनगर और किशनगंज। नीतीश सरकार के तीन मंत्री राजीव रंजन सिंह, दिनेश चंद्र यादव (दोनों जेडीयू के) और पशुपति कुमार पारस (एलजेपी) लोकसभा चुनाव जीत गए हैं। अब उन्हें अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा।
जालंधर। 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव के चौंकाने वाले नतीजे आये और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को ऐतिहासिक जीत मिली। परंतु पंजाब के जालंधर में एक काउंटिंग सेंटर में चर्चा सिर्फ बीजेपी की जीत की नहीं, बल्कि एक और शख्स की है।
शटर बनाने का बिजनस करने वाले नीतू शटरांवाला आंसुओं के साथ काउंटिंग सेंटर से बाहर निकले। इसकी वजह सिर्फ चुनावी हार नहीं थी। अपने परिवार के लोगों से वोट न मिलने से टूट चुके नीतू ने बताया, मेरे परिवार में 9 लोग हैं, लेकिन मुझे सिर्फ 5 वोट मिले और यह मेरे लिए हैरान कर देने वाला है।
मेरी पूरी गली ने मुझे वोट करने का वादा किया था, लेकिन मुझे सिर्फ 5 वोट मिले। मैं एक महीने अपनी दुकान से दूर रहा और लोगों के बीच काम किया, लेकिन उन्होंने मेरे लिए वोट नहीं किया। हार से निराश नीतू ने आगे से कोई चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।
नीतू काउंटिंग सेंटर में ही रो पड़े और उनकी बातें लोगों ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दीं। देखते ही देखते उनके विडियो को लाखों लोग देख चुके थे।
हालांकि, बाद में पता चला कि नीतू ने हार पहले ही मान ली थी। दिन खत्म होने तक उन्हें 856 वोट मिल चुके थे। नीतू इससे पहले चर्चा में आए थे जब उन्होंने एक मोबाइल फोन को फर्जी बम के साथ जोड़ दिया था, उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया था। उस वक्त मीडिया से मिली अटेंशन के बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया।
नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अभूतपूर्व जीत दिलाने वाले श्री नरेन्द्र मोदी ने आज लगातार दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन प्रांगण में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरी बार देश की बागडोर संभाल ली है।
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राष्ट्रपति भवन में गुरुवार शाम आयोजित समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पीएम मोदी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। पीएम के बाद पिछली सरकार में गृह मंत्री रहे लखनऊ से बीजेपी के सांसद राजनाथ सिंह ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। ऐसे में साफ है कि मोदी सरकार 2.0 में उनका कद दूसरे नंबर का ही रहेगा। सरकार में तीसरे नंबर पर अमित शाह ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। आपको बता दें कि पीएम के साथ कुल 24 कैबिनेट मंत्रियों, 9 राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और 24 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली है।
सरकार में चैथे मंत्री के तौर पर नितिन गडकरी ने शपथ ली। इसके बाद सदानंद गौड़ा ने अंग्रेजी में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इससे पहले पीएम और तीन अन्य मंत्रियों ने हिंदी में शपथ ली। पिछली सरकार में रक्षा मंत्री रहीं निर्मला सीतारमण, छक्। के सहयोगी दल एलजेपी के प्रमुख रामविलास पासवान, नरेंद्र सिंह तोमर, पटना साहिब से जीते रविशंकर प्रसाद ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
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इसके बाद हरसिमरत कौर बादल ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। अकाली दल की प्रमुख नेता हरसिमरत पिछली सरकार में खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्री थीं। पिछली सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री रहे थावर चंद गहलोत ने भी शपथ ली। पूर्व विदेश सचिव डॉ. एस. जयशंकर ने भी कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कैबिनट मंत्री के तौर पर शपथ ली। स्मृति इरानी को मोदी कैबिनेट 2.0 में शामिल किया गया है। उन्होंने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। इसके बाद पिछली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ. हर्षवर्धन, मानव संसाधन विकास मंत्री रहे प्रकाश जावड़ेकर और रेल मंत्री रहे पीयूष गोयल ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली।
ओडिशा से ताल्लुक रखने वाले और पिछली सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान ने भी कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। मुख्तार अब्बास नकवी ने भी कैबिनेट मंत्री के तौर पर पद की शपथ ली। पिछली सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री थे। उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था। संघ से जुड़े रहे और धारवाड़ (कर्नाटक) से सांसद प्रह्लाद जोशी ने 20वें कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली।
चंदौली से सांसद और यूपी के बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे ने भी कैबिनेट मंत्री के तौर पर पद की शपथ ली। वह पिछली सरकार में मानव संसाधन राज्य मंत्री रह चुके हैं। आपको बता दें कि यूपी में एसपी-बीएसपी के महागठबंधन के बावजूद बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है। ऐसे में यह उनका प्रमोशन कहा जा सकता है। अरविंद सावंत ने शिवसेना कोटे से कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। इन्होंने मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा को हराया है।
शपथ ग्रहण के बाद अतिथियों को प्रणाम करते पीएम मोदी।
बेगूसराय से जीते बीजेपी के फायरब्रैंड नेता गिरिराज सिंह ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। वह पिछली सरकार में लघु-मध्यम उद्योग मंत्री थे। नवादा सीट बदले जाने से वह कई दिनों तक पार्टी नेतृत्व से नाराज रहे थे। हालांकि बेगूसराय में उन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज की और कन्हैया कुमार को हराया। इसके बाद राजस्थान के बड़े नेता और जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। शेखावत ने लोकसभा चुनाव में अशोक गहलोत के बेटे को बड़े अंतर से हराया।
8 बार लोकसभा सदस्य चुने गए बरेली में विकास पुरुष के नाम से मशहूर संतोष गंगवार ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली। हरियाणा के गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत सिंह पांचवीं बार लोकसभा का चुनाव जीते हैं। इस सरकार में उन्हें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर शपथ दिलाई गई। राव पहले कांग्रेस पार्टी में थे। नॉर्थ गोवा से सांसद और पिछली सरकार में आयुष मंत्री रहे श्रीपद नायक ने भी राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली। ऊधमपुर से जीते डॉ. जितेंद्र सिंह पिछली सरकार में राज्यमंत्री थे। मोदी सरकार 2.0 में इन्हें राज्य मंत्री बनाया गया है।
पिछली सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे अरुणाचल से जीते किरण रिजिजू नॉर्थ ईस्ट में बीजेपी के जानेमाने चेहरे हैं। उन्होंने हिंदी में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर शपथ ली। इसके बाद दमोह से बीजेपी के सांसद प्रह्लाद पटेल ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर शपथ ली। यूपीए सरकार में गृह सचिव रहे और आरा से सांसद आरके सिंह बिहार काडर के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें भी राज्य मंत्री बनाया गया है। दिसंबर 2013 में वह बीजेपी में शामिल हुए। पिछली सरकार में वह ऊर्जा राज्य मंत्री थे।
अमृतसर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी न्छ में भारत के पूर्व प्रतिनिधि रहे हरदीप सिंह पुरी को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। विदेश सेवा में उन्हें काम का लंबा अनुभव है। इसके बाद गुजरात के मनसुख मांडविया को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर शपथ दिलाई गई।
बीजेपी के बड़े आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते, बिहार के बक्सर से सांसद चुने गए अश्विनी कुमार चैबे, बीकानेर से बीजेपी सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली। मेघवाल पिछली सरकार में वित्त राज्य मंत्री थे। पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह ने भी राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली। वह गाजियाबाद से दोबारा चुनाव जीते हैं। पिछली सरकार में वह विदेश राज्य मंत्री थे। इसके बाद फरीदाबाद से सांसद कृष्ण पाल गुर्जर को राष्ट्रपति ने राज्य मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई।
बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय, बीजेपी के युवा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, आसनसोल से सांसद बाबुल सुप्रियो, दलित नेता और रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष रामदास आठवले, हरियाणा में बीजेपी के दलित नेता रतन लाल कटारिया, राव साहेब दानवे पाटिल, पहली बार सांसद बने तेलंगाना के जी. किशन रेड्डी, गुजरात के बीजेपी के वरिष्ठ नेता पुरुषोत्तम रुपाला ने भी राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली।
बालासोर (ओडिशा) से चुनाव जीते प्रताप सिंह सारंगी ने भी गुरुवार को राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली। रायगंज से जीतीं देबश्री चैधरी, साध्वी निरंजन ज्योति, संजीव कुमार बालियान, संजय धोत्रे, सुरेश अंगाड़ी, केरल बीजेपी के अध्यक्ष वी. मुरलीधरन, छत्तीसगढ़ की आदिवासी नेता और रमन सरकार में मंत्री रहीं रेणुका सिंह ने भी राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली। पूर्व आईएएस अधिकारी और पहली बार होशियारपुर से जीते सोम प्रकाश, डिब्रूगढ़ से सांसद रामेश्वर तेली, कैलाश चैधरी ने भी राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ एसपी नेता मुलायम सिंह यादव भी समारोह में मौजूद थे। शाहिद कपूर, कंगना रनौत समेत कई फिल्मी सितारों के अलावा प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी अपनी पत्नी नीता अंबानी के साथ समारोह में पहुंचे थे। उधर, बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा है कि केंद्र सरकार में उनकी पार्टी शामिल नहीं होगी। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि केंद्र में इस तरह से सांकेतिक भागीदारी में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। दरअसल, जेडीयू को कैबिनेट में एक पद ऑफर किया गया था जो उसे रास नहीं आया।
नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार ने देश की सत्ता पर फिर से अपना कब्जा कर लिया है। चुनावी नतीजे आने के बाद देश के लोग मिर्ची बाबा यानि महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद को ढूंढ रहे है।
बता दें कि ये वही मिर्ची बाबा हैं, जिन्होंने दिग्विजय सिंह की जीत के लिए लाल मिर्च का हवन किया था। लोकसभा चुनाव में भोपाल से दिग्विजय सिंह की जीत के लिए मिर्ची बाबा ने महायज्ञ किया था। इसी के साथ कम्प्यूटर बाबा ने भी दिग्विजय की जीत का संकल्प लिया था। दिग्विजय की जीत के लिए महायज्ञ के दौरान हवन में कुल 5 क्विंटल मिर्च डाली गई थी। मिर्ची बाबा ने कहा था कि मिर्ची हवन करने से दिग्विजय सिंह की जीत सुनिश्चित होगी। साथ ही यह संकल्प भी लिया था कि अगर दिग्विजय सिंह नहीं जीते, तो वो जिंदा जल समाधि ले लेंगे।
भोपाल से चुनावी नतीजे आने के बाद मिर्ची बाबा की भविष्यवाणी फेल साबित हुई। दिग्विजय सिंह को प्रज्ञा ठाकुर ने भारी मतों के साथ हरा दिया। दिग्विजय की हार के बाद अब लोग मिर्ची बाबा को ढूंढ रहे है। जिन्होंने कहा था कि अगर दिग्विजय सिंह नहीं जीते, तो वो जिंदा जल समाधि ले लेंगे। मिर्ची बाबा अब गायब हो गए है।