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  • Exit Poll Results 2019 : UP में बीजेपी का नुकसान महागठबंधन का फायदा

    Exit Poll Results 2019 : UP में बीजेपी का नुकसान महागठबंधन का फायदा

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 2014 लोकसभा चुनावों में 80 में से 71 सीटें जीतने वाली बीजेपी को लगभग 30 सीटों का नुकसान हो रहा है। बीजेपी का नुकसान महागठबंधन का फायदा बना है। उत्तर प्रदेश में महागठबंधन बीजेपी से अधिक सीटें जीतने में कामयाब होता हुआ नजर आ रहा है।

    इंडिया न्यूज पोलस्ट्रैट के एग्जिट पोल के मुताबिक यूपी में बीजेपी को 38 सीटें मिल रही हैं वहीं महागठबंधन को 40 सीटें मिल रही हैं। कांग्रेस के खाते में दो सीटें आ रही हैं. देश के सबसे बड़े सियासी सूबे उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2019 के अंतिम दौर की वोटिंग समाप्त हो गई है।

    पोलस्ट्रैट-इंडिया न्यूज और न्यूज एक्स नेता सहित तमाम एक्जिट पोल एजेंसियां जैसे- सी वोटर, सीएसडीएस, जन की बात, चाणक्य, नील्सन, चाणक्या,एक्सिस, वीएमआर आदी अपने नतीजे जारी करेंगे। उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सांसद हैं।

    2019 लोकसभा चुनाव के अंतिम दौर की वोटिंग के बाद जारी हुए एक्जिट पोल (म्Ûपज च्वसस) के नतीजे आ गए हैं. इंडिया न्यूज और पोलस्ट्रैट के सर्वे में उत्तर प्रदेश में पिछली बार 73 सीटें जीतने वाली एनडीए को इस बार केवल 38 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है।
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रैट ने उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के महागठबंधन को 40 सीटें दी हैं. कांग्रेस के खाते में दो सीटें आई हैं. ऐसे में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में नुकसान होता हुआ नजर आ रहा है.। वहीं न्यूज एक्स के नेता सर्वे एक्जिट पोल के मुताबिक उत्तर प्रदेश में बीजेपी को 33 सीटें मिल रही हैं. सपा-बसपा-रालोद के महागठबंधन को 43 सीटें मिल रही हैं. वहीं कांग्रेस को 4 लोकसभा सीटों पर कामयाबी मिलती हुई दिख रही है। इस तरह पिछले लोकसभा चुनावों के मुकाबले उत्तर प्रदेश में बीजेपी को काफी नुकसान हो रहा है।

  • VVPAT को लेकर चंद्रबाबू नायडू का कल दिल्ली में प्रदर्शन

    VVPAT को लेकर चंद्रबाबू नायडू का कल दिल्ली में प्रदर्शन

    नई दिल्ली l आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इन दिनों गैर-एनडीए दलों को एकजुट करने की कोशिशों को लेकर चर्चाओं में है। नायडू अब मंगलवार को दिल्ली में वीवीपैट को लेकर प्रदर्शन करने वाले हैं। वीपीपैट को लेकर नायडू इससे पहले भी आवाज बुलंद करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने ‘अपराधियों’ के साथ चुनाव लड़ा है, इसलिए कम से कम 50 प्रतिशत वीपीपैट की गिनती पर जोर दे रहे हैं। चंद्रबाबू नायडू ने कहा, पर्चियों की गिनती को लेकर पार्टियों को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। पारदर्शी चुनाव के लिए लड़ने को लेकर हाल ही में टीडीपी की सराहना हुई थी। बीजेपी इस कदम का विरोध क्यों कर रही है?

    टीडीपी प्रमुख ने इसके साथ ही एग्जिट पोल के नतीजों को खारिज कर दिया। एग्जिट पोल के नतीजे आंध्र प्रदेश में उनकी सत्ता को जाते हुए दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे चुनाव में जीत को लेकर आश्वस्त हैं। नायडू ने सोमवार शाम पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात की। अब वे ममता के साथ यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मिलने के लिए जाएंगे।

    लोकसभा चुनाव समाप्त होने के साथ विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल भी सामने आ गए। लगभग सभी एग्जिट पोल में एनडीए की सरकार लौटती दिख रही है। एग्जिट पोल्स के नतीजों के बाद विपक्षी खेमा बातचीत में व्यस्त नजर आ रहा है। राहुल गांधी, मायावती और अखिलेश यादव जैसे नेताओं के साथ मुलाकात के बाद नायडू ममता बनर्जी के साथ मुलाकात करने जा रहे हैं।

  • पीएम मोदी बोले , 5 सेकंड में वोट देकर 5 सालों का राज का आशीर्वाद दीजिए !

    पीएम मोदी बोले , 5 सेकंड में वोट देकर 5 सालों का राज का आशीर्वाद दीजिए  !

    खरगौन ।  खरगौन में लोकसभा चुनाव 2019 की अपनी आखिरी चुनावी जनसभा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। इस दौरान पीएम ने मतदाताओं से 5 सेकंड में वोट देकर 5 सालों का राज सौंपने की अपील की। पीएम ने आतंकवाद, गरीबी, किसान, बिजली, महिला सशक्तिकरण, शौचालय के मुद्दों पर जनता से समर्थन मांगा।

    इसके बाद ‘अबकी बार, 300 पार’ का आशीर्वाद मांगते हुए चुनावी अभियान की समापन किया। पीएम मोदी ने कहा, ’21वीं सदी के भारत के इन्हीं निर्माताओं के उत्साह का परिणाम है कि देश आज कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से लेकर कामरूप तक पूरा देश कह रहा है- ‘अबकी बार, मोदी सरकार’। मैं तो 3-4 दिन से सुन रहा हूं- अबकी बार, 300 पार। ईवीएम मशीन में जाकर वोट देने में केवल 5 सेकंड का वक्त लगता है। आप मुझे 5 सेकंड देकर अगले 5 सालों की सत्ता सौंप दीजिए।’

    पीएम ने कहा, ‘मेरे चुनाव अभियान की शुरुआत मेरठ से हुई थी। अब आखिरी सभा खरगौन में हो रही है। ऐतिहासिक नजर से देखें तो मेरठ और खरगौन के बीच एक डोर ऐसी भी है, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। दोनों ही शहर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े हुए हैं।

    पीएम ने भाषण में आदिवासी क्रांतिकारी भीमा नायक का भी जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने कहा- दिल्ली में कहते हैं चुनाव लंबा हो गया है वे थक गए हैं। मैं कहता हूं कभी आदिवासियों के बीच में आकर बैठो सारी थकान मिट जाएगी। आपको सौ सलाम भाइयों-बहनों। आपने 2019 के चुनाव में नया रंग भर दिया है।

  • केदारनाथ धाम : भगवा धारण कर साधना में लीन हुए पीएम मोदी

    केदारनाथ धाम : भगवा धारण कर साधना में लीन हुए पीएम मोदी

    नई दिल्ली। देश के मुखिया आज विश्व के मुखिया के दर पर मथ्ता टेकने के लिए उनकी चौखट पर पहुंचे। उसके बाद साधना के लिए गुफा में चले गए। जी हां करीब डेढ़ माह तक चली लोकसभा चुनाव की थकान भरी कवायद का परिणाम आने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार को केदारनाथ पहुंचे और उन्होंने भगवान शिव का रूद्राभिषेक कर उनकी आराधना की। प्रधानमंत्री हेलीकॉप्टर से उतरने पर स्लेटी रंग के पहाड़ी परिधान और पहाड़ी टोपी पहने और कमर में केसरिया गमछा बांधे दिखाई दिए। हेलीपैड से मंदिर पहुंचने के पैदल रास्ते के दोनों ओर मौजूद श्रद्धालुओं तथा स्थानीय जनता का उन्होंने हाथ हिलाकर अभिवादन किया ।

    मंदिर परिसर में पहुंचने पर केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने उनका स्वागत किया, जिसके बाद वह भगवान शिव की पूजा अर्चना और रूद्राभिषेक के लिये मंदिर के गर्भगृह में पहुंचे । करीब आधे घंटे चली इस पूजा के बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर की परिक्रमा की और श्रद्धालुओं का फिर हाथ हिलाकर अभिवादन किया। केदारनाथ में प्रधानमंत्री का ध्यान करने तथा वहां चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा करने का भी कार्यक्रम है। पीएम मोदी रातभर की ध्यान-साधना के बाद रविवार सुबह बद्रीनाथ धाम जाएंगे।

    वहां से दर्शन के बाद रविवार को ही नई दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। यह पहला मौका है, जब पीएम मोदी केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन एक ही दौरे में करेंगे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि पीएम के इस दौरे का मकसद पूरी तरह से आध्यात्मिक है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) अशोक कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी है ।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने बताया कि मोदी के आगमन से उत्तराखंड की जनता और भाजपा बहुत उत्साहित है। प्रधानमंत्री के इस दौरे का मकसद पूरी तरह से आध्यात्मिक है । इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी अपने दो दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर यहां के निकट जौलीग्रांट हवाई अड्डे पहुंचे जहां उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनकी अगवानी की। प्रधानमंत्री का पिछले दो साल में केदारनाथ का यह चौथा दौरा है।

  • Exit Poll : शॉटगन को पटना साहिब की जनता ने किया ‘खामोश’, पूनम भी हार रहीं चुनाव …!

    Exit Poll : शॉटगन को पटना साहिब की जनता ने किया ‘खामोश’, पूनम भी हार रहीं चुनाव …!

    पटना​। पटना साहिब से कांग्रेस के उम्मीदवार शॉटगन यानी शत्रुघ्न सिन्हा अपनी सीट हार रहे हैं. न्‍यूज नेशन के एग्‍जिट पोल के मुताबिक पटना साहिब की जनता ने उन्‍हें खामोश कर दिया है. यहां से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद जीत हासिल कर रहे हैं. यही नहीं लखनऊ से उनकी पत्‍नी पूनम सिन्‍हा भी चुनाव हार रही हैं. लखनऊ से वह सपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं थीं।

    हालांकि पटना साहिब सीट पर लगातार तीसरी बार अपनी जीत बरकरार रखने के लिए आश्वस्त हैं। सिन्हा ने एग्‍जिट पोल से पहले रविवार को दावा किया था कि बिहार और उत्तर प्रदेश में बीजेपी का सूपड़ा साफ हो जाएगा। सिन्हा ने यह भी कहा कि इस बार मोदी लहर नहीं है और यह कहर बन गया है।

    बीजेपी को छोड़ कांग्रेस का हाथ मजबूत करने निकले शत्रुघ्न सिन्हा ने चुनाव आयोग पर कई सवाल उठाए. शॉटगन ने कहा कि इतनी लंबी चुनाव प्रक्रिया एक साजिश है। उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि इसके पीछे कोई साजिश है, ऐसा लगता है कि इसके पीछे कुछ न कुछ बात जरूर है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ की तपस्या और बद्रीनाथ की पूजा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सब राजनैतिक फायदे के लिए किया गया है, लेकिन चुनाव आयोग इस पर चुप है।

    वोटिंग के दौरान उन्होंने बीजेपी के 300 पार के दावे की खिल्ली भी उड़ाई और कहा कि पिछली बार जब मोदी लहर में नहीं ला पाए तो इस बार मोदी कहर है। हालांकि सभी चैनलों के एग्‍जिट पोल में बीजेपी की अगुआई वाला एनडीए 300 से अधिक सीटें लाता दिख रहा है।

    शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी और लखनऊ से समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार पूनम सिन्हा भी चुनाव हार रही हैं। यह शत्रुघ्‍न सिन्‍हा के लिए दोहरा झटका है. बता दें उनकी पत्नी पूनम भी लखनऊ में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं।

  • आज EVM से निकलेगी सरकार, गलत साबित हो सकते हैं एग्जिट पोल्स

    आज EVM से निकलेगी सरकार, गलत साबित हो सकते हैं एग्जिट पोल्स

    नई दिल्ली ।  देशभर में बनाए गए मतगणना केंद्रों पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिये गये हैं और मीडिया के लिए भी समाचार संकलन करने के लिए आवश्यक सुविधायें मुहैया करायी गयी हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए भी हर तरह के प्रबंध किये गये हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में कानून व्यवस्था कायम रखें।

    पंजाब की 13, हरियाणा की 10, हिमाचल प्रदेश की 4 सीटों के कल रिजल्ट आएंगे। इसके प्रबंध भी मुकम्मल कर लिए गए हैं। सत्रहवीं लोकसभा की 542 सीटों और चार राज्यों की विधानसभाओं के लिए हुये मतदान के बाद गुरुवार को होने वाली मतगणना की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गयी हैं।

    मतों की गिनती पहले की तरह ही होगी तथा गिनती पूरी होने के बाद ही वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाएगा। 22 विपक्षी दलों की मतगणना शुरू होने के समय वीवीपैट की पर्चियों का ईवीएम से मिलान करने की माँग ठुकराने के बाद आयोग ने पहले की तरह ही मतों की गिनती कराने का फैसला किया है।

    आज EVM से निकलेगी सरकार, गलत साबित हो सकते हैं एग्जिट पोल्स

    इस बारे में सभी आवश्यक दिशा-निर्देश राज्य चुनाव अधिकारियों को दे दिये गये हैं। मतगणना गुरुवार सुबह आठ बजे से होगीउधर, बक्सर से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लडऩे वाले पूर्व विधायक रामचंद्र यादव ने आज भभुआ में अपने घर पर प्रेस कांफ्रेंस में हथियार लहराए। पिस्टल हाथ में लेकर रामचंद्र यादव ने कहा कि कुशवाहा और तेजस्वी के नेतृत्व में लोकतंत्र बचाऊंगा।

    उपेंद्र कुशवाहा के विवादास्पद बयान के बाद भभुआ के पूर्व विधायक और लोकसभा चुनाव में बक्सर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार रामचंद्र यादव ने कैमूर ईवीएम मामले में हथियार लहराते हुए प्रेस कांफ्रेंस की और कहा कि लोकतंत्र के लिए हथियार उठाना पड़े तो उठाऊंगा। रिजल्ट फेवर में नहीं आने पर अब लडऩा पड़ेगा, अब चुप बैठने से काम नहीं चलेगा।

    यदि एग्जिट पोल्स की ओर से लगाए गए अनुमान गलत साबित होते हैं तो फिर छोटे-छोटे बहाने सुनने को तैयार रहिए। जैसे भ्रमित वोटर को प्रिफरेंस मिलना, प्रतिभागियों की ओर से गलत जवाब, सैम्पलिंग एरर या फिर आम लोगों की अपेक्षाओं के मुताबिक राय दिखाने के लिए किया गया रैशनलाइजेशन। ऐसी कई खामियां या चूक होती हैं, जिनके चलते एग्जिट पोल्स और वास्तविक नतीजों में खासा फर्क होता है।

    मतों की गिनती के लिए चुनाव आयोग द्वारा पहले से निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जायेगा और इसमें किसी तरह की खामियों तथा गड़बडिय़ों को तत्काल दूर करने की भी व्यवस्था की गयी है ताकि मतगणना सुचारु और निर्बाध रूप से चलती रहे। भीषण गर्मी को देखते हुये मतगणना में भाग लेने वाले कर्मचारियों और राजनीतिक दलों के एजेंटों के लिए भी विशेष प्रबंध किये गये हैं ताकि उन्हें किसी तरह की कोई असुविधा न हो।

    लोकसभा चुनाव के साथ ही चार राज्यों-आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम-की विधानसभा सीटों के लिए 11 अप्रैल से 19 मई के बीच मतदान कराये गये थे। वीवीपैट पर्ची से वोटों के मिलान और सत्यापन के लिए पाँच मतदान केंद्रों को औचक आधार पर चुना जायेगा। वीवीपैट सत्यापन प्रक्रिया में चार से पाँच घंटे का समय लग सकता है। चुनाव परिणाम आयोग की वेबसाइट और ‘वोटर हेल्पलाइन ऐपÓ पर उपलब्ध होंगे। आयोग ने इस बार के लोकसभा चुनाव के लिए 55 लाख ईवीएम का उपयोग किया है।

  • बड़ा उग्रवादी हमला : विधायक तिरोंग अबो समेत 11 लोगों की हत्या

    बड़ा उग्रवादी हमला : विधायक तिरोंग अबो समेत 11 लोगों की हत्या

    ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश में संदिग्ध एनएससीएन (आईएम) उग्रवादियों ने मंगलवार सुबह नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के निवर्तमान विधायक टिरोंग अबो समेत 11 लोगों की हत्या कर दी। वे डिब्रूगढ़ से अरुणाचल के खोनसा जा रहे थे।  इस हमले में विधायक अबो के बेटे की मौत होने की खबर आई है. जबकि दो लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि उग्रवादियों ने तिरोंग अबो को पहले भी जान से मारने की धमकी दी थी. घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने ट्वीट कर दुख व्यक्त किया है।

    मिली जानकारी के अनुसार, अरुणाचल के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।  पिछले विधानसभा में कांग्रेस से चुने गए विधायक तिरोंग अबो अपने बेटे और कुछ साथियों के साथ तीन गाड़ियों के काफिले में निकले थे. काफिले में सबसे आगे विधायक तिरोंग अबो की गाड़ी थी जिसे उनका बेटा चला रहा था।

    इस दौरान वहां सक्रीय एनएससीएन उग्रवादियों की पहली गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू करते हुए विधायक समेत 11 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया. जिसके बाद पुलिस ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।दुखद हमले के बाद मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने घटना पर दुख जताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय से हमले के लिए जिम्मेदार उग्रवादी संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा है।

    उन्होंने ट्वीट कर कहा ” नेशनल पीपुल्स पार्टी एनपीपी अपने नेता और एमएलए तिरोंग अबोह और उनके परिवार की मौत की खबर सुनकर शोक में है. हम इस कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा करते हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय पीएमओ और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से अपील करते हैं कि वे हमले में शामिल समूह के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो।

    वहीं केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने ट्वीट कर हमले पर दुख और शोक व्यक्त किया है. किरण रिजिजू ने ट्वीट कर कहा है कि इस क्रूरता पू्र्ण हमले में अरुणाचल प्रदेश से विधायक तिरोंग अबोह और उनके परिवार समेत 11 लोगों की मौत को लेकर बहुत दुखी हूं. इस हमले को अंजाम देने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।

  • कांग्रेस और नेशनल हेरल्ड से अनिल अंबानी की ग्रुप कंपनियों ने वापस लिए 5,000 करोड़ का मानहानि का मुकदमा

    कांग्रेस और नेशनल हेरल्ड से अनिल अंबानी की ग्रुप कंपनियों ने वापस लिए 5,000 करोड़ का  मानहानि का मुकदमा

    नई दिल्ली अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप ने कांग्रेस के स्वामित्व वाले अखबार नैशनल हेरल्ड समेत कई देसी, विदेसी मीडिया घरानों के साथ-साथ दर्जनभर कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा वापस लेने का फैसला किया है। ग्रुप ने राफेल बनाने वाली फ्रेंच कंपनी दसॉ एविएशन के साथ अपने ऑफसेट अग्रीमेंट को लेकर छपे लेख और की गई बयानबाजी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब उसका कहना है कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए उनसे मुकदमों को वापस लेगी।

    मीडिया खबरों के अनुसार अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने राफेल  मामले में कांग्रेस नेताओं और नेशनल हेराल्ड अखबार के खिलाफ अहमदाबाद की अदालत में दायर 5,000 करोड़ रुपये के मानहानि के मुकदमे को वापस लेने का फैसला किया है।  रिलायंस ने यह मुकदमा राफेल डील मामले में विवादित बयानों और लेख को लेकर किया था।  अनिल अंबानी ने पिछले साल अगस्त में राफेल मामलेमें कांग्रेस के स्वामित्व वाले अखबार नेशनल हेराल्ड के खिलाफ ये मुकदमा दायर किया था. इन मुकदमों को अहमदाबाद के सिविल और सेशन जज पी. जे. तमकुवाला की अदालत में सुना जा रहा था।

    बता दें कि अनिल अंबानी के मालिकाना हक वाली रिलायंस डिफेंस ने कांग्रेस नेता सुनील जाखड़, रणदीप सिंह सुरजेवाला, ओमन चांडी, अशोक चव्हाण, अभिषेक मनु सिंघवी, संजय निरुपम के खिलाफ सिविल मानहानि का मुकदमा दायर किया था. इसके साथ ही इसमें नेशनल हेरल्ड अखबार और इसके कुछ पत्रकार भी शामिल थे. यह भी पढ़े-राहुल गांधी का मोदी पर बड़ा हमला, कहा- ‘पीएम ने वायु सेना का 30 हजार करोड़ रुपये चुराकर अनिल अंबानी की जेब में डाल दिया’।

    शिकायतकर्ता के वकील राकेश पारिख ने कहा, “हमने प्रतिवादियों को सूचित किया है कि हम उनके खिलाफ मुकदमे वापस लेने जा रहे हैं.। अनिल अंबानी ( की कंपनी ने नेशनल हेराल्ड के एडिटर इंचार्ज और आर्टिकल के लेखक विश्वदीपक के खिलाफ दीवानी मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था. मुकदमे में अंबानी की कंपनी की ओर से आरोप लगाया था कि अखबार ने ‘राफेस सौदे से 10 दिन पहले अनिल अंबानी ने बनाई रिलायंस डिफेंस’ नाम से एक फर्जी और अपमानजनक आर्टिकल छापा था.।

  • बीजेपी अकेले 2014 दोहरा नहीं पाई, तो क्या……..! पढ़े पूरी खबर!

    बीजेपी अकेले 2014 दोहरा नहीं पाई, तो क्या……..! पढ़े पूरी खबर!

    आजादी के बाद शुरुआती तीन दशक को छोड़ दें तो बाद के वर्षों में ऐसा कई बार हुआ है कि उत्तर प्रदेश में ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी ने या तो केंद्र में सरकार बनाई या फिर केंद्र सरकार में उसकी अहम भूमिका रही। लोकसभा चुनाव वर्ष 1980 और 1984 के चुनाव में फिर से कांग्रेस को यूपी में ज्यादा सीटें मिलीं और केंद्र में उसकी सरकार बनी। 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल को यूपी में 54 सीटें मिलीं और बोफोर्स घोटाले में फंसे राजीव गांधी को हार का सामना करना पड़ा।

    जनता दल के नेता वीपी सिंह देश के आठवें प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1991 में मंडल और मंदिर आंदोलन के बीच बीजेपी को 51 सीटें और जनता दल को 22 सीटें मिलीं। हालांकि सरकार कांग्रेस की बनी। 1996 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी को यूपी में 52 सीटें मिलीं और अटल बिहारी वाजपेयी कुछ समय के लिए पीएम बने।

    बीजेपी अकेले 2014 दोहरा नहीं पाई, तो क्या……..! पढ़े पूरी खबर!

    (सभी फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    बाद में वाजपेयी सरकार गिर गई और एचडी देवगौड़ा तथा उसके बाद इंद्र कुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री बने। इन सरकारों में भी यूपी में 16 सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा। मुलायम सिंह यादव रक्षा मंत्री बनाए गए।

    इसके बाद 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यूपी में अच्छा प्रदर्शन किया और उसकी सरकार बनी। वर्ष 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की केंद्र में सरकार बनी जिसे यूपी में क्रमश 35 और 15 सीटें जीतने वाली एसपी और बीएसपी का समर्थन हासिल था। यही स्थिति 2009 के लोकसभा चुनाव में भी रही।

    वर्ष 2014 में मोदी लहर में बीजेपी ने यूपी में 80 में से 71 सीटें जीतकर केंद्र में सरकार बनाई। लोकसभा चुनाव 2019 में लगभग तमाम एग्जिट पोल ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत दर्ज करवा दी है, इसका एक बड़ा फायदा पीएम मोदी को यह हुआ है कि इसके आधार पर उन्हें एनडीए का सर्वमान्य नेता घोषित कर दिया गया है।

    लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि बीजेपी अकेले 2014 दोहरा नहीं पाई और उसे एकल बहुमत नहीं मिला, तो क्या नैतिकता के आधार पर नरेन्द्र मोदी- नितिन गड़करी, राजनाथ सिंह जैसे किसी दूसरे नेता को प्रधानमंत्री बनने का अवसर देंगे? शायद नहीं!

    असली नतीजे आने के पहले ही नेता का ऐलान हो चुका है, इसलिए सियासी जोड़तोड़ से भी सरकार बनी तो प्रधानमंत्री तो नरेन्द्र मोदी ही बनेंगे?

    यदि एग्जिट पोल के अनुसार 2014 जैसे नतीजे आते हैं तो यह स्वीकार करना चाहिए कि पीएम मोदी पर देश की जनता ने फिर से भरोसा किया है, लेकिन राजनीतिक कायदे से यदि बीजेपी पिछले लोकसभा चुनाव 2014 जितने वोट शेयर प्रतिशत नहीं हांसिल कर पाती है और यदि पिछली बार जितनी लोकसभा सीटें नहीं मिलती हैं।

    तो इसका मतलब यही होगा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को देश की जनता ने अस्वीकार कर दिया है? ऐसी स्थिति में नितिन गड़करी, राजनाथ सिंह जैसे किसी अनुभवी वरिष्ठ नेता को प्रधानमंत्री पद दिया जाना चाहिए, यही नहीं इस पद के लिए बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी योग्य हैं!

    मीडिया से मिली खबरों के अनुसार बहुमत तो दूर, यदि जोड़तोड़ से भी सरकार बनने के सियासी हालात रहे, तब भी कम-से-कम नैतिकता के लिए कोई गुंजाईश नहीं है।

  • UP में महागठबंधन फेल, रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों से आगे BJP

    UP में महागठबंधन फेल, रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों से आगे BJP

    नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख पार्टियां सपा और बसपा ने नरेंद्र मोदी की बीजेपी को हराने के लिए हाथ मिलाया और महागठबंधन बनाया. अजित सिंह की आरएलडी ने भी अखिलेश यादव और मायावती से हाथ मिलाया. यादव और मुस्लिम वोटर सपा का कैडर वोट माना जाता है. वहीं बसपा पिछड़ी जातियों की राजनीति करती है।

    ऐसे में सपा बसपा और आरएलडी के साथ आने से यूपी में यह गठबंधन काफी मजबूत माना जा रहा था। लोकसभा चुनाव 2019 परिणाम के शुरुआती रूझान आ चुके हैं। चुनावी रूझानों के बाद साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ बने सपा बसपा आरएलडी महागठबंधन पूरी तरह नाकाम रहा है. समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती और राष्ट्रीय लोकदल का जातीय समीकरण पूरी तरह फेल रहा।

    अब तक के चुनावी रूझानों के मुताबिक यूपी में बीजेपी को करीब 58 प्रतिशत वोट मिले हैं. वहीं अब तक यूपी में सपा बसपा आरएलडी महागठबंधन सिर्फ 38 प्रतिशत वोट ही हासिल कर पाया है।  भारतीय जनता पार्टी की पिछले चुनाव के मुकाबले और भी बड़ी जीत बताया जा रहा है।

    2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीती थी और पार्टी को यूपी में 42.30 प्रतिशत वोट मिले थे. हालांकि शुरुआती रूझानों के मुताबिक बीजेपी 2014 के मुकाबले कम सीटों पर बढ़त में है लेकिन वोट शेयर के मामले में रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों से आगे है। बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में जबरदस्त प्रदर्शन किया था और यूपी की 71 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।

    इसके बाद 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 403 में से 325 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को रिकॉर्ड तोड़ 41.38 प्रतिशत वोट मिले थे। अब 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अपने प्रदर्शन को और जबरदस्त बनाते हुए. वोट शेयर के मामले में बढ़त बनाए हुए है।

    अभी यूपी की सभी लोकसभा सीटों पर मतगणना जारी है। ये आंकड़े सिर्फ नतीजों के रूझानों पर आधारित है। काउंटिंग पूरी होने के बाद साफ हो जाएगा कि बीजेपी को कितने प्रतिशत वोट मिलते हैं।