Category: national

  • ममता ने खोला भाजपा के खिलाफ मोर्चा, पूरा विपक्ष उनके साथ दिखा

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    नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव छह चरणों के बाद अब जबकि सातवें और अंतिम चरण का चुनाव शेष रह गया है, तो ऐसे माहौल में ममता बनर्जी एक बार फिर विपक्ष के बीच सशक्त नेता के बतौर उभर कर सामने आ रही हैं।

    आम चुनाव की अधिसूचना से पहले 19 जनवरी को कोलकाता में हुई विपक्ष की महारैली को याद कीजिए, जब भाजपा के विरोध में ममता के बुलावे पर करीब 17 राजनीतिक दल एक मंच पर इकट्ठा हुए थे। पीएम मोदी और शाह से सीधे भिड़ने वाली ममता पिछले कुछ दिनों में और ज्यादा आक्रामक नजर आई हैं। साल 2012 में टाइम मैगजीन की ओर से दुनिया के 100 प्रभावशाली व्यक्तित्व में शामिल रहीं ममता बनर्जी सशक्त होतीं दिख रही हैं।पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव से लेकर छठे चरण के चुनाव तक बंपर वोटिंग हुई, लेकिन इस दौरान हिंसा की भी खूब घटनाएं हुईं।

    राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और समर्थक खून-खराबे पर उतर आए। इन सब घटनाओं के बीच चुनाव प्रचार अभियान, रैलियों और जनसभाओं में जो सबसे कॉमन बात दिखी, वह यह कि बंगाल में ज्यादा से ज्यादा कमल खिलाने के उद्देश्य में लगी भाजपा, टीएमसी प्रमुख और सीएम ममता बनर्जी पर हमलावर रही, वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी भी पीएम मोदी और अमित शाह के जुबानी हमलों पर पलटवार करती रहीं। पश्चिम बंगाल में हिंसा की खबरें तो लगातार आती रहीं, ।

    लेकिन कोलकाता में मंगलवार को अमित शाह की रोड शो के दौरान हुई हिंसा ने सियासी आग को और हवा दे दी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य चुनाव आयोग पर ममता के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए ललकारा तो बुधवार की शाम तक चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई सामने आई।

    आयोग ने बंगाल में चुनाव प्रचार की समय सीमा कम कर दी और गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्य अधिकारियों को पद से हटा दिया। इसके बाद ममता आक्रामक हुईं तो चुनाव आयोग को पीएम मोदी और शाह के इशारे पर काम करनेवाला बता दिया। ममता ने इस फैसले का विरोध किया तो पूरा विपक्ष उसके साथ खड़ा हो गया।

    बसपा प्रमुख मायावती, सपा प्रमुख अखिलेश, आप प्रमुख और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, टीडीपी प्रमुख और आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने ममता का समर्थन किया है। यहां तक कि कांग्रेस और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भी इस मामले पर ममता के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

    ममता बनर्जी अचानक इतनी मजबूत नहीं हुई हैं। उनके सशक्तीकरण के पीछे उनका लंबा इतिहास रहा है। उनके बचपन से लेकर उनकी पढ़ाई-लिखाई और फिर राजनीति में पदार्पण से लेकर अपनी सियासी जमीन तैयार करने तक वह एक सशक्त नेता के तौर पर उभरी हैं।

  • अबॉर्शन कानून के विरोध में ऐक्ट्रेस की सेक्स स्ट्राइक की अपील

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    वॉशिंगटन । अमेरिका में जॉर्जिया चौथा राज्य है जिसने अबॉर्शन पर बैन के नियम बदले हैं। हार्टबीट लॉ के तहत यह प्रावधान किया गया है कि भ्रूण के दिल की धड़कन का पता चलने के साथ ही महिलाएं अबॉर्शन नहीं करवा सकेंगी। अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानो अबॉर्शन संबंधी कानून के खिलाफ महिलाओं से सेक्स स्ट्राइक की अपील की।

    अभिनेत्री मिलानो हॉलिवुड में मीटू अभियान की शुरुआत करनेवाली इस कानून को महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इस कानून के विरोध में एकजुट होने का संदेश दिया। अभिनेत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पार्टनर को सेक्स के लिए इनकार करने का संदेश दिया। उन्होंने लिखा कि महिलाओं को अपने पार्टनर पर तब तक सेक्स स्ट्राइक करना चाहिए जब तक हमारी देह पर हमारा अधिकार फिर से न मिले।

    आम तौर पर भ्रूण की धड़कनें 6 सप्ताह में महसूस की जा सकती है और अक्सर तब तक महिलाओं को अपने गर्भवती होने का अहसास भी नहीं होता है। रिपब्लिकन नेतृत्ववाले राज्य मे इस कानून को लेकर काफी विवाद भी हो रहा है।

    एलिसा ने सेक्स स्ट्राइक के संबंध में अपने सोशल मीडिया पर कई ट्वीट किए। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, हम सबको यह समझने की जरूरत है कि पूरे देश में स्थितियां कितनी खराब हैं। हम यह अहसास कराने की कोशिश कर रहे हैं कि हमारे शरीर पर हमारा ही अधिकार है और हम इसका कैसे इस्तेमाल करना चाहते हैं।

    एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, हम प्रेम करते हैं और अपने शरीर की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष भी कर सकते हैं। मर्दों की बराबरी के लिए बहुत से और वैकल्पिक तरीके हैं। अपने वजाइना की रक्षा करो, लेडीज! सत्ता के पदों पर बैठे मर्द उस पर भी नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं।

    मीटू आंदोलन की नेतृत्वकर्ता एलिसा के इस अभियान का कुछ लोग समर्थन कर रहे हैं तो कुछ उनके खिलाफ भी हैं। उनके विचार का विरोध लिबरल और कंजर्वेटिव दोनों ही कर रहे हैं।

    कंजर्वेटिव इसकी आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि शायद इसका उद्देश्य सेक्स को लेकर संयम बढ़ाना है। लिबरल भी इसकी आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि सेक्स स्ट्राइक ऐसा विचार है कि मानो महिलाएं शारीरिक संबंध बनाकर पुरुषों के लिए कोई अहसान कर रही हों।

  • नतीजों से पहले मोदी को रोकने के लिए थर्ड फ्रंट की कवायद शुरू

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    नई दिल्ली ।   लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अभी सातवें चरण की वोटिंग होना बाकी है, लेकिन इससे पहले ही यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी को रोकने की कवायद तेज कर दी है। जानकारी के मुताबिक, सोनिया गांधी ने विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं को फोन करके कहा कि 22, 23 और 24 मई को क्या आप दिल्ली में रहेंगे? इसका मतलब साफ है कि नतीजो से पहले ही सोनिया गांधी ने विपक्ष के नेताओं की बैठक के लिए खुद अपने कंधों पर जिम्मेदारी लेते हुए कवायद तेज कर दी है।

    कांग्रेस विपक्षी दलों की बैठक बुलाती है तो ऐसे में यह साफ संदेश देने की कोशिश रहेगी कि भले ही हम सब प्री-पोल गठजोड़ का हिस्सा ना हों लेकिन हम सब मोदी के खिलाफ लड़े और एकजुट हैं. एक संदेश यह भी देने की होगी कि हमारे गठबंधन को ध्यान में रखा जाए और किसी एक दल की बजाय गठबंधन को ही सरकार बनाने का न्यौता मिलना चाहिए।

    सिर्फ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) ही नहीं, बल्कि थर्ड फ्रंट की भी कवायद शुरू हो गई है। लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई की आएंगे। ऐसे में अगर इस चुनाव में किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, तो देश का सियासी समीकरण पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक बदल जाएगा।

    इसीलिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी पूरी तरह से सक्रिय हो गई हैं। पिछले दिनों आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायड ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इस दौरान दिल्ली में विपक्षी दलों को 21 मई को बैठक करने की योजना बनाई है।

    सोनिया गांधी से पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर लोकसभा चुनाव की सियासी नब्ज को समझते हुए गठबंधन की कवायद शुरू कर दी है। इस कड़ी में उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री और माकपा नेता पिनरई विजयन से मुलाकात करके राजनीतिक हालात पर चर्चा की। ऐसे ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गठबंधन का जाल बुनने में जुट गए हैं।

    नायडू ने पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी। नायडू ने राहुल के साथ सातों चरण के चुनाव निपटते ही और नतीजे से पहले 21 मई को विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की योजना पर चर्चा की। दिलचस्प बात यह है कि नायडू और केसीआर से पहले  बीजेपी के कुछ नेता और उसके सहयोगी दल भी यह मानकर चल रहे हैं कि नरेंद्र मोदी इस बार बहुमत का जादुई आंकड़ा छू नहीं पाएंगे।

  • पश्चिम बंगाल : अमित शाह को यहां हेलिकॉप्टर लैंडिंग और रैली की इजाजत नही मिली, रैली रद्द करनी पड़ी

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    नई दिल्ली ।लोकसभा चुनाव 2019  देशभर में खत्म होने को आए है।  ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को यहां हेलिकॉप्टर लैंडिंग और रैली की इजाजत न मिलने से रैली रद्द करनी पड़ी। 19 मई को अखिरी चरण के चुनाव डाले जाएंगे। पांच दिनों के बीच राजनीतिक पार्टियां ताबड़तोड़ रैलियां कर रही है।  मामला जाधवपुर का है, जहां बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को रैली करने की इजाजत नहीं दी गई है।

    बताया जा रहा है कि उनके हेलिकॉप्टर को भी लैंडिंग की परमिशन नहीं मिली है। बता दें कि लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण 19 मई को पश्चिम बंगाल में 9 सीटों पर वोटिंग होगी। आज अमित शाह की तीन रैलियों का कार्यक्रम है, इनमें से एक रैली दक्षिण 24 परगना जिले के जाधवपुर में दोपहर 12.30 बजे होनी थी, लेकिन रैली से कुछ वक्त पहले ही परमिशन रद्द होने की खबर आई। साथ ही अमित शाह के हेलिकॉप्टर को भी लैंडिंग की इजाजत नहीं दी गई है।

    हालांकि, जाधवपुर के अलावा बाकी दोनों रैलियों को इजाजत मिल गई है।बता दें कि हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हमलों का जवाब देते हुए तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि मैं इंच-इंच का बदला लूंगी, आपने मुझे और बंगाल को बदनाम किया है।भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग तृणमूल कांग्रेस के पार्टी के प्रति कथित अलोकतांत्रिक माध्यमों का ‘मूकदर्शक’ बन गया है।

    भाजपा मीडिया प्रमुख और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी का कहना है कि पार्टी विरोध प्रदर्शन करेगी और चुनाव आयोग भी जाएगी। राज्य प्रशासन ने आखिरी समय पर अमित शाह की रैली और हेलीकॉप्टर की लैंडिंग को मंजूरी देने से मना कर दिया है।यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेताओं को रैली करने और हेलीकॉप्टर लैंड करने की इजाजत नही मिली है। इससे पहले 21 जनवरी को शाह के हेलीकॉप्टर को लैंड करने की मंजूरी नहीं मिली थी।

  • 46 साल की उम्र में pregnant हुई आयरन लेडी इरोम शर्मिला

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    इम्फालमदर्स डे के दिन आयरन लेडी इरोम शर्मिला को दोगुनी खुशी मिली है। उन्होंने 46 साल की उम्र में जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया है। मशहूर नागरिक अधिकारों की कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने बेंगलुरु के अस्पताल में बच्चियों को जन्म दिया। शर्मिला और उनके ब्रिटिश पति डेसमॉन्ड कोटिन्हो से जन्मीं बच्चियों के नाम निक्स शाखी और ऑटम तारा रखे गए हैं। क्लाउडनाइन गुप ऑफ हॉस्पिटल के प्रवक्ता ने बताया कि शर्मिला अभी रिकवर कर रही हैं और जल्द ही उनके बच्चियों की तस्वीरें जारी की जाएंगी। शर्मिला ने सी सेक्शन डिलिवरी के जरिए अस्पताल की मल्लेश्वरम ब्रांच में रविवार को नौ बजकर 21 मिनट में स्वस्थ बच्चियों को जन्म दिया।

    डॉ. श्रीपद विनेकर ने बताया, मदर्स के दिन डिलिवरी संयोग मात्र है। यह पूर्व नियोजित नहीं था। उन्हें इस बारे में पता भी नहीं चला जब तक मैंने उन्हें बताया नहीं। डॉ. ने बताया, हम अगले हफ्ते शर्मिला के ऑपरेशन की प्लानिंग कर रहे थे लेकिन शनिवार रात को तेज दर्द उठन की वजह से शर्मिला को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।

    वह एक मजबूत महिला है और हम उन्हें मंगलवार और बुधवार तक डिस्चार्ज करेंगे। अस्पताल में इस मौके पर कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ और न ही कई लोगों की भीड़ इकट्ठा थी। डॉ. विनेकर ने बताया, ‘वह काफी अद्भुत और संयमित दंपती हैं। यहां तक कि जब वे चेक अप के लिए आए थे तो केबिन के बाहर बैठकर चुपचाप अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

  • लोकसभा चुनाव के बाद सरकार देगी आपको ये तोहफा

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    नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 अपने अंतिम चरण में है। सभी पार्टियां दावे कर रही हैं कि चुनाव बाद वह आम जनता के लिए तमाम सुविधाओं का पिटारा खोल देंगी, लेकिन हकीकत यही है कि चुनावों के बाद आम जनता को महंगाई का तोहफा मिलने वाला है। 23 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद खासकर आपकी रसोई पर इसका असर देखने को मिलेगा। सब्जियों से लेकर के दूध के दाम तक बढ़ सकते हैं। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में अगर वृद्धि होती है तो फिर पेट्रोल-डीजल के दामों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।

    महंगाई को काबू में रखना नई सरकार के लिए सबसे कठिन कार्य होगा। देश के पश्चिम और दक्षिण के राज्य भीषण सूखे की चपेट में हैं। वहीं उत्तर भारत में भी गर्मी का प्रकोप जारी है। फिलहाल कई ऐसी वस्तुएं हैं, जिनकी कीमतों में पिछले साल की तुलना में अभी भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

    एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में ज्वार, बाजरा, कपास, टमाटर, प्याज की कीमतों में इजाफा हो गया है. इसके अलावा पशुओं को खिलाया जाने वाला चारा भी काफी महंगा हो गया है। इससे दूध के दाम भी आगे चलकर बढ़ सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि किसानों ने अपने पशुओं को चारा खिलाना कम कर दिया है।

    अमूल ब्रांड से दूध बेचने वाली कंपनी गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के प्रबंध निदेशक आर एस सोधी ने बताया कि इसकी वजह से भी दूध का उत्पादन कम हो गया है। हालांकि गर्मियों में पशु वैसे भी दूध देना कम कर देते हैं। ऐसे में अप्रैल से लेकर के जुलाई तक दूध का उत्पादन वैसे भी काफी कम हो जाता है।

    फिलहाल गर्मी की शुरुआत से ही सब्जियों की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है. फिलहाल कोई भी सब्जी देश भर की थोक मंडियों में 25-30 रुपये प्रति किलो से कम नहीं है। केवल आलू के दाम ही सस्ते हैं. वहीं खुदरा व्यापारी भी सब्जियों को लोकेशन के हिसाब से 40-70 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रही हैं।

  • प्रज्ञा ठाकुर ने ‘देशभक्त गोडसे’ बयान पर मांगी माफी, कही ये बड़ी बात !

    प्रज्ञा ठाकुर ने ‘देशभक्त गोडसे’ बयान पर मांगी माफी, कही ये बड़ी बात !

    नई दिल्ली । गोडसे पर दिए बयान पर मचे बवाल के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने माफी मांग ली है। प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि मेरा मकसद किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने कहा, मेरे बयान से किसी की भावनाओं को कष्ट पहुंचा है तो मैं माफी मांगती हूं। बीजेपी ने भी साध्वी के बयान पर नाराजगी जताते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा था और सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की बात कही थी।

    भोपाल से बीजेपी कैंडिडेट के इस बयान के बाद विपक्ष भी बीजेपी पर बेहद हमलावर हो गया था। अपने बयान पर सफाई देते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा, मैं रोड शो में थी, भगवा आतंक को जोड़कर मुझसे प्रश्न किया गया, मैंने तत्काल चलते-चलते उत्तर दिया। मेरी भावना किसी को कष्ट पहुंचाने की नहीं थी। किसी भावनाओं को कष्ट पहुंचा है तो मैं माफी मांगती हूं।

    गांधी जी ने देश के लिए जो भी किया है उसे भुलाया नहीं जा सकता है। मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं। इस बयान को मीडिया ने तोड़-मरोड़कर पेश किया है। मैं पार्टी का अनुशासन मानने वाली कार्यकर्ता हूं। जो पार्टी की लाइन है वही मेरी लाइन है।

    नेता से अभिनेता बने कमल हासन के गोडसे को पहला हिंदू आतंकी बताने के बयान पर जब साध्वी से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा, गोड़से देशभक्त थे, हैं और रहेंगे। उन्हें हिंदू आतंकवादी बताने वाले अपने गिरेबान में झांककर देखें। अबकी बार चुनाव में ऐसे लोगों को जवाब दे दिया जाएगा।

    बीजेपी ने दी सफाई
    विवाद बढ़ने पर बीजेपी के जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा था कि पार्टी साध्वी प्रज्ञा के बयान से सहमत नहीं है। हम इस बयान की निंदा करते हैं। राव ने कहा कि पार्टी उनसे इस मामले में सफाई देने को कहेगी। राव ने कहा था कि साध्वी को अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए।

    ‘बापू का हत्यारा देशभक्त’ कहने पर विपक्ष का हमला
    इस पूरे मामले पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, बापू का हत्यारा देशभक्त ? हे राम! उम्मीदवार से खुद को अलग करना काफी नहीं है। वहीं भोपाल से साध्वी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे कांग्रेस उम्मीदवार दिग्जविजय सिंह ने कहा था कि प्रज्ञा के इस बयान पर पीएम मोदी और अमित शाह को माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तंज कसते हुए कहा था कि यदि गोडसे देशभक्त हैं तो क्या गांधी देशद्रोही थे?

  • खड़गे का विवादित बयान, कहा- कांग्रेस को 40 से ज्यादा सीटें मिली तो क्या PM MODI विजय चौक में फांसी लगा लेंगे ?

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    बेंगलुरु। लोकसभा चुनाव में विवादित बयान देना एक फैशन सा बन गया है। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं की बदजुबानी थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित बयान दे डाला।

    कर्नाटक के चिंचोली में रैली को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा,  लोग इस देश का भविष्य लिखने जा रहे हैं। सुभाष और हमारा भविष्य आपके हाथों में है, उनके (बीजेपी-मोदी) के हाथ में नहीं है।

    वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा, श्जहां भी वह (मोदी) जाते हैं, कहते हैं कि कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 40 सीटें भी नहीं मिलेंगी। क्या आपमें से कोई भी इसे मानता है?

    अगर हमें 40 से ज्यादा सीटें मिल गयीं तो क्या मोदी दिल्ली के विजय चौक में फांसी लगा लेंगे? 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। बीजेपी की वरिष्ठ नेता और सांसद शोभा करंदलाजे ने खड़गे से इस बयान पर माफी की मांग करते हुए कहा कि उन्हें इतने वरिष्ठ नेता से ऐसे अशोभनीय बयान की उम्मीद नहीं थी।

    इससे पहले खड़गे ने रैली में कहा कि मोदी खुद को पिछड़ी जाति का बताते हैं लेकिन वह केवल धनवानों की मदद कर रहे हैं। मौजूदा विधायक उमेश जाधव के इस्तीफे के बाद चिंचोली में उपचुनाव हो रहा है। जाधव हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए और गुलबर्गा से लोकसभा चुनाव लड़े हैं।

    हालांकि ऐसा नहीं है कि खड़गे ने पहली बार पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी की है। इससे पहले खड़गे ने पीएम मोदी की तुलना जर्मनी के तानाशाह हिटलर से की थी। खड़गे ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, श्पीएम मोदी इस देश में वैसी ही तानाशाही लाने की कोशिश कर रहे हैं जैसी तानाशाही हिटलर ने जर्मनी में की थी।

    आज मोदीजी भी हिंदुस्तान में ऐसा ही कुछ करना चाहते हैं। संविधान खतरे में है और हमें इसे तबाह करने की बीजेपी की कोशिश से लड़ने की जरूरत है। खड़गे के अलावा भी कई नेता विवादित बयान देते रहे हैं।

  • वाराणसी : प्रियंका के रोड शो में उमड़ पडा जनता का भारी हुजूम

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    वाराणसी ।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार शाम को रोडशो किया । प्रियंका के साथ वाराणसी लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय मौजूद थे । बीएचयू में पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद प्रियंका ने रोडशो शुरू किया ।

    खुले वाहन की छत पर लाल सूती साड़ी पहने प्रियंका हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन कर रही थीं । वाहन पर छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कई कांग्रेस नेता सवार थे । रोड शो में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अलावा जनता का भारी हुजूम उमड़ पडा । इस दौरान मोदी विरोधी नारे लगते भी सुने गये । मोदी ने भी नामांकन करने से पहले यहां रोडशो किया था ।

    प्रियंका के रोडशो को भव्य बनाने के लिए कांग्रेस की स्थानीय इकाई ने भीड़ बटोरने का व्यापक इंतजाम किया था । मोदी के रोडशो की ही तरह प्रियंका का रोडशो भी दशाश्वमेध घाट पर संपन्न होगा । वह काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करेंगी और काल भैरव के भी दर्शन करेंगी ।

  • BJP नेता मुकुल राय की गाड़ी पर हमला, घर में बनाया बंधक, BJP ने TMC पर लगाया आरोप

    BJP नेता मुकुल राय की गाड़ी पर हमला, घर में बनाया बंधक, BJP ने TMC पर लगाया आरोप

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सातवें चरण के मतदान के पूर्व फिर एक बार हिंसा देखने को मिली. प्राप्त जानकारी के अनुसार सूबे में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन यानी गुरुवार को रात करीब  11:15 बजे महानगर से सटे दमदम लोकसभा क्षेत्र के नागर बाजार में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल राय की गाड़ी पर हमला किया गया।

    हमले का आरोप तृणमूल कांग्रेस समर्थकों पर लगा है. इतना ही नहीं एक घंटे से अधिक समय तक मुकुल राय सहित भाजपा के अन्य नेताओं को एक मकान में लोगों ने घेर कर रखा था। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी की दमदम में जनसभा को संबोधित करने के बाद भाजपा नेता मुकुल राय उस घर में जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने पहुंचे थे तभी यह हमला किया गया. यह घर नागर बाजार में स्थित है।

    जब मुकुल राय उक्त घर में पहुंचे तो अचानक सैकड़ों लोग वहां एकत्रित हो गये और गाड़ी में तोड़फोड़ करने लगे. भाजपा का आरोप है कि तोड़फोड़ करने वाले लोग तृणमूल समर्थक हैं। हालांकि, तृणमूल के नेताओं ने आरोप को नकार दिया है और कहा है कि इस घटना से उनके पार्टी समर्थकों का कुछ लेना-देना नहीं है. साथ ही तृणमूल ने आरोप लगाया है कि भाजपा नेता वहां रुपये बांटने के मकसद से पहुंचे थे।

    12:00 बजे के बाद भारी संख्या में पुलिस व केंद्रीय बल मौके पर पहुंचे और तोड़फोड़ करने वालों को हिरासत में लिया। यहां चर्चा कर दें कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा की उन नौ सीटों के लिए गुरुवार को रात 10 बजे प्रचार समाप्त हो गया जहां अंतिम चरण में चुनाव होने हैं. देश में यह पहली बार हो रहा है जब तय समय से 20 घंटे पहले चुनाव प्रचार खत्म कर दिया गया हो और ऐसा चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक हुआ है।

    चुनाव आयोग ने बताया कि दक्षिण बंगाल की नौ संसदीय सीटों पर रविवार को चुनाव होंगे जहां 111 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला 1,49,63,064 मतदाता के हाथों में होगा. रविवार को जिन सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें कोलकाता उत्तर एवं कोलकाता दक्षिण, दम दम, बारासात, बशीरहाट, जादवपुर, डायमंड हार्बर, जयनगर (आरक्षित) और मथुरापुर (आरक्षित) सीट शामिल हैं।